गुजरात, महाराष्ट्र में खाली पड़े हैं हजारों सस्ते घर


गांधीनगर । एक तरफ तो मोदी सरकार लोगों को सस्ते घर देने का वादा कर रही है वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही गृहराज्य में हजारों सस्ते घर खाली पड़े हैं। यही हाल बीजेपी के शासन वाले महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में हैं।
ये किफायती मकान जवाहरलाल नेहरू नैशनल अर्बन रिन्यूएबल मिशन और राजीव आवास योजना के तहत कई स्कीमों के जरिए बनाए गए हैं। आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के हालिया डेटा के मुताबिक, इन दो बड़ी स्कीमों के तहत १४ लाख किफायती मकानों का आवंटन किया गया था लेकिन राज्य सरकारों की तरफ से सिर्पâ ८ लाख मकानों का निर्माण हो पाया।
इन मकानों में से २.४५ लाख मकानों को कोई पूछने वाला नहीं है। अब उपरोक्त दोनों योजनाओं के मेल से बनी नई योजना में सरकार ने २ करोड़ सस्ते मकान बनाने का लक्ष्य तय किया है जिसमें १४ लाख स्लम रीडिवेलपमेंट वाले मकान होंगे।
सस्ते और खाली मकानों की संख्या सबसे ज्यादा महाराष्ट्र (५२,९६६) में हैं। इसके बाद गुजरात (२९,१२६), दिल्ली (२६,७५९), मध्य प्रदेश (२६,००४) और आंध्र प्रदेश (२३,६८८) का नंबर आता है। पुरानी हाऊिंसग स्कीमों में सबसे बड़ी समस्या जमीन की उपलब्धता रही है। सूत्र ने कहा, ‘राज्य सरकारों को सस्ते मकान सैंक्शन किए गए लेकिन जमीन उपलब्ध कराने को लेकर उनकी तरफ से काम नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने मकान बनाए ही नहीं। उन्होंने मकान बनाए भी तो वे दूरदराज के इलाकों में थे। साथ ही वहां स्वूâल, पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दी गर्इं।’ बहुत से झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास प्रॉजेक्ट्स में स्कीम का फायदा पाने वालों की पहचान प्रॉजेक्ट शुरू किए जाने से पहले नहीं की गई। जब उनकी पहचान की गई तब उनके साथ ठीक से बात-विचार नहीं किया गया। इसलिए उन्होंने अपने लिए बनाए मकान में आने मकान में आने से मना कर दिया।