गिर के 18 शेर हिरासत में, चलेेगा मुकदमा


दोषी पाए जाने पर हो सकती है आजीवन कारावास

अहमदाबाद। गिर अभ्यारण्य के आसपास बसे गांववासियों के शिकार के आरोप में 18 शेरों को हिरासत में ले लिया गया है। इन शेरों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। गिर के इतिहास में यह पहली बार है जब शेरों के पिंजरों में कैद किया गया है। शेरों पर हत्या का अपराध साबित होने पर उन्हें आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है। यदि आरोप साबित नहीं हो पाया और बरी हो गए तो इन्हें फिर से जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

आरोप साबित तो आजीवन कारावास

गिर के आसपास बसे आबंरडी, कोदिया और दूधिया गावों में पिछले तीन महीने में शेरों ने चार व्यक्तियों का शिकार किया और करीब 6 लोगों को घायल कर दिया। इस अपराध में वन विभाग ने 18 शेरों को पकड़कर जूनागढ के शक्कर बाग चिडिय़ाघर में रखा है।

फूटप्रिंट से होगा मिलान

18 शेरों में से किसने शिकार किया, इसकी जांच की जाएगी। शिकार की जगह से शेरों के पंजों के निशान लिए जाएंगे। फूटप्रिंट को पकड़े गए शेरों के पंजों से मिलाया जाएगा। आरोपी शेर के मल में मानव मांस,य मृत व्यक्ति के कपड़े तथा अन्य अवशेष की भी जांच की जाएगी। वन विभाग का विशेष बोर्ड नरभक्षी शेर को हमेशा के लिए किसी चिडिय़ाघर में बंद कर देगा।
23 साल में 18 शिकार, पिछले 5 महीने में 6 मामले

* गिर व इससे जुड़े क्षेत्रों में पिछले 23 सालों में शेरों द्वारा इंसान को मारने के 18 मामले हुए हैं।
* आश्चर्य की बात तो यह है कि इस साल के पहले 5 महीने में ही शेरों के हमले के 6 मामले सामने आए। जबकि तीन महीने में चार मामले।
* गिर के संरक्षित क्षेत्र में गिर नेशनल पार्क, सेक्चुरी, पानिया वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी और मिलयाला वाइल्डलाइफ सेक्चुरी आते हैं। वर्ष 2015 में की गयी गणना के मुताबिक, गिर में 523 शेर हैं। हालांकि कई संरक्षित क्षेत्र के बाहर रहते हैं। यानी कि गावों के आसपास।
* शेरों का दायरा अमरेली और भावनगर की ओर बढ़ रहा है। शेर अब 22,000 वर्ग किमी में भ्रमण कर रह हैं।
* एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने आत्मरक्षा में शेरों और तेंदुओं को मारने की इजाजत देने की मांग की है।