कोहिनूर हीरे को वापस लाने से सरकार का इंकार


नई दिल्ली। कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन से वापस भारत लाने की मुहिम से सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग (एएसआइ) ने आरटीआइ आवेदन के जवाब में यह जानकारी दी है। एएसआइ का कहना है कि सरकार का कोहिनूर को वापस लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। एएसआइ ने जवाब में यह भी साफ किया है कि यूनेस्को कन्वेंशन के तहत स्वतंत्रता प्रााqप्त से पहले जो चीजें विदेशों में चली गर्इं हैं, उन्हें अब वापस लाना संभव नहीं है। एएसआइ की ओर से यह जवाब अधीक्षण पुरातत्वविद सुनंदा श्रीवास्तव ने दिया है। उन्होंने यह भी बताया है कि पुरातत्व और बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम १९७२ के तहत कोहिनूर हीरे को वापस भारत लाने के लिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई करना संभव नहीं है। गौरतलब है कि आजादी के बाद से ही भारत के बड़े वर्ग की मांग रही है कि कोहिनूर को भारत वापस लाया जाए।
कोहिनूर हीरे को इंग्लैड से वापस लाने को लेकर सरकार की ओर से दो बार अधिकारिक तौर पर पहल की जा चुकी है। पहली कोशिश देश की आजादी के तुरंत बाद १९४७ में की गई थी। दूसरी पहल १९५३ में की गई थी। दोनों ही बार इंग्लैंड ने भारत के दावे को खारिज कर दिया। कोहिनूर हीरे को दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा हीरा (करीब ७९३ वैâरेट) माना जाता है। दस्तावेजों के मुताबिक यह आंध्र प्रदेश की खानों से करीब तीन हजार साल पहले मिला था। बाद में यह मुगल बादशाहों के पास आ गया। मौजूदा समय में यह इंग्लैंड में है। इसके अब कई हिस्से भी कर दिए गए हैं। इनमें से ही एक हिस्सा इंग्लैंड की महारानी के मुकुट में जड़ा है।