केन्द्रीय मंत्रियों सहित सोनिया, राहुल ने नहीं किया विकाश कोष का इस्तेमाल


० मोदी वैâबिनेट के आधे मंत्री भी शामिल
नईदिल्ली। केन्द्रीय वैâबिनेट के करीब आधे लोगों, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता एल.के. आडवाणी और राज्यसभा की मनोनीत सांसद रेखा समेत कई लोगों में आश्चर्यजनक रूप से एक समानता उभरकर सामने आई है। इनमें से किसी ने भी इस साल मेंबर ऑफ पाल्र्यामेंट लोकल एरिया डिवेलपमेंट स्कीम (एमपीएलएडीएस) के तहत एक भी पैसे का इस्तेमाल नहीं किया है। एमपीएलएडीएस के तहत हर लोकसभा और राज्य सभा सदस्य अपने निर्वाचन क्षेत्र में सालाना ५ करोड़ रुपये तक कम्युनिटी असेट्स के विकास कामों की सिफारिश कर सकता है। मनोनीत सदस्य देश में कहीं भी ऐसे काम की सिफारिश कर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष में कई सांसदों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया है। वैसे एमपीएलएडीएस पंâड लैप्स नहीं होते। साांqख्यकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय इस स्कीम की नोडल मिनिस्ट्री और २५ फरवरी तक उसके पास करीब १,००० करोड़ रुपये अनरिलीज्ड पंâड्स के रूप में थे। यह एमपीएलएडीएस के तहत हर साल दिए जाने वाले ३,९५० करोड़ रुपये के एक चौथाई से ज्यादा है। बतौर सांसद, वैâबिनेट मंत्रियों का प्रदर्शन देखने से पता चलता है कि २७ में से ११ मंत्रियों (वैâबिनेट का ४२ फीसदी) ने एमपीएलएडीएस के तहत एक भी काम की सिफारिश नहीं की है। इन मंत्रियों में मनोहर र्पिरकर, डीवी सदानंद गौड़ा, उमा भारती, कलराज मिश्रा, अनंत कुमार, अनंत गीते, हरसिमरत कौर, नरेंद्र िंसह तोमर, राधामोहन िंसह और डॉक्टर हर्षवद्र्धन शामिल हैं। हरियाणा से राज्य सभा सांसद सुरेश प्रभु ने भी उस जिले का कोई संकेत नहीं दिया है, जहां वह एमपीएलएडीएस पंâड्स का इस्तेमाल करना चाहते हैं। हालांकि, वैâबिनेट के कुछ मंत्री बड़ी सक्रियता से कामकाज स्वीकृत कर रहे हैं और पंâड्स रिलीज कर रहे हैं। इन मंत्रियों में रवि शंकर प्रसाद, अरुण जेटली, स्मृति ईरानी और एम वेंवैâया नायडू शामिल हैं। हालांकि, वरिष्ठ भाजपा नेता एल के आडवाणी ने अपने गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र में कामकाज स्वीकृत करने में ऐसी तत्परता नहीं दिखाई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी जिला प्रशासन से किसी काम की सिफारिश नहीं की है। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन िंसह, पार्टी सहयोगी अमिंरदर िंसह, ज्योतिरादित्य िंसधिया, कमलनाथ और मणिशंकर अय्यर भी सक्रियता से इस स्कीम के तहत कामों को मंजूरी दे रहे हैं। देश के सबसे गरीब जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों ने भी एमपीएलएडीएस स्कीम के तहत उपलब्ध पंâड्स का इस्तेमाल नहीं किया है।
० सांसद रंजीत रंजन ने मांग
१५ गरीब जिलों के सांसदों में से केवल एक रंजीत रंजन में इस पंâड का इस्तेमाल किया है। वहीं, बालाघाट, बैतूल, मांडला, टीकमगढ़, नवादा, सरगुजा, राजनंदगांव, पलामू, दुमका, नांदेड, बोलनगीर, कालाहांडी, कोरापुट और महाराजगंज के सांसदों ने पंâड्स का इस्तेमाल नहीं किया है।