कार्ति चिदंबरम के मुद्दे पर हंगामा, कांग्रेस ने उठाया अनार पटेल का मामला


नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की बेटी अनार पटेल और उसके साझेदार को सस्ती दर भी भूमि आवंटित किये जाने पर और अन्नाद्रमुक सदस्यों के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के विरूद्ध जांच किये जाने की मांग को लेकर भारी हंगामा करने के कारण शून्यकाल नहीं हो सका, साथ ही सदन की कार्यवाही दोपहर १२.०० बजे तक स्थगित कर दी गयी।
सुबह में कार्यवाही शुरू होते ही अन्नाद्रमुक के सदस्य सभापति के आसन के समक्ष पहुंचकर चिदंबरम के विरूद्ध जांच कराये जाने की मांग करने लगे। इसी दौरान कांग्रेस सदस्य भी नारेबाजी करते हुये सदन के बीचो बीच आ गये। हालांकि भारी शोरशराबे के बीच उप सभापति पी जे कुरियन ने विधायी कार्य निपटाया और हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी अपनी सीटों पर लौटकर अपनी बात कहने की अपील की और कांग्रेस के प्रमोद तिवारी को शून्यकाल के तहत मुद्दा उठाने के लिए कहा। तिवारी ने भारी शोरशराबे के बीच कहा कि गुजरात की मुख्यमंत्री की पुत्री और उसके पाटर्नर को मात्र १५ रुपये वर्ग मीटर की दर पर सुरक्षित क्षेत्र में वर्ष २०१० में भूमि आवंटित की गयी। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के आपत्ति करने पर कुरियन ने तिवारी से शून्यकाल के लिए दिये गये मुद्दे को उठाने के लिए कहा लेकिन कांग्रेस सदस्य के अपनी बात जारी रखने पर उप सभापति ने उनकी बातों को कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया। कुरियन ने अन्नाद्रमुक के नवनीत कृष्णन से कहा कि आप ने कल दिन भर इसी मुद्दे पर हंगाम किया और अंत में आपने वादा किया था आज इसे नहीं उठायेंगे। फिर भी आप इस मुद्दे को उठा रहे हैं। पहले आप उचित तरीके से नोटिस दीजिये तब उस पर सभापति विचार करेंगे। इसी दौरान संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि तिवारी की बातों को कार्यवाही से हटाया जाये। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक के साथ ही दूसरे विपक्षी दल भी चिदंबरम के मुद्दे पर चर्चा कराना चाहते तो इस पर सरकार को काई आपत्ति नहीं है और वह इसके लिए तैयार है। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सदन में जो हो रहा है वह सरकार समर्थित है। इसी दौरान हंगामा बढने पर कुरियन ने सदन की कार्यवाही ११.१२ बजे १० मिनट के लिए स्थगित कर दी।

इशरतजहां मामले में सरकार ने किया रबर स्टैंप की तरह प्रयुक्त :आर वी मनी 
-२महीने में दाखिल दूसरे शपथ पत्र में सरकार पर यू-टर्न लेने का आरोप
नईदिल्ली। इशरत जहां मुठभेड़ मामले में पूर्व केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के विरुद्ध अब एक और पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सामने आए हैं। अधिकारी का कहना है कि इशरत मामले से जुड़े मामले में तत्कालीन यूपीए सरकार में राजनैतिक स्तर पर शपथ पत्र में बदलाव किए गए थे। तत्कालीन वेंâद्र सरकार ने इस मामले में दो शपथ पत्र दाखिल किए थे। पहले शपथ पत्र में कहा गया था कि इशरत जहां सहित जिन लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया गया था, आतंकी थे। दो महीने के अंदर दाखिल दूसरे शपथ पत्र में सरकार ने पूरी तरह से यू-टर्न लेते हुए कहा कि इस बात के पक्के सबूत नहीं हैं कि मुठभेड़ में मारे गए लोग आतंकी थे। इन दोनों शपथ पत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले वेंâद्रीय गृह मंत्रालय में पूर्व अवर सचिव (आंतरिक सुरक्षा) आर वी मनी ने दावा किया है कि सरकार ने उन्हें रबर स्टैंप की तरह इस्तेमाल किया था। मनी ने कहा कि इशरत मामले में झूठे पैदा किए गए थे। पूर्व अधिकारी ने आगे बताया कि उन्हें दूसरे शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने इस बात के संकेत दिए की मामले की जांच कर रहा विशेष जांच दल (एसआईटी) चाहता था कि वह गुजरात के इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों को इस मामले में लाया जाये। एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में मनी ने आरोप लगाया कि एसआईटी प्रमुख सतीश वर्मा ने उन्हें यातनाएं दीं। उन्होंने आगे कहा कि वर्मा ने उन्हें सिगरेट से दागा था। यही नहीं, एक सीबीआई अधिकारी ने पीछा किया।

इशरत केस में पूर्व अधिकारी का खुलासा, बताया कैसे होता था टॉर्चर
नई दिल्ली। केन्द्रीय मनाव संशाधन मंत्री स्मृति ईरानी पर मोर्चा खोले कांग्रेस को पूर्व गृहमंत्री चिदंबरम को लेकर अचानक बैकफुट पर आना पड़ गया है। चिदंबरम के बेटे कार्ति के मामला सामने आने पर कांग्रेस कल संसद में दिन भर बैकफुट पर रही। इसके अलावा इशरत जहां केस में चिदंबरम पूर्व अधिकारी के खुलासे से भी कांग्रेस मुश्किल में है। इस दोहरे हमले ने संसद में कांग्रेस की रणनीति को गड़बड़ा दिया है। पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई और फिर अंडर सेक्रेट्री आरवीएस मणि के दावे ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है। दोनों ने ये आरोप लगाया है कि इशरत केस पर अदालत में सरकार की तरफ से दाखिल किया गया हलफनामा दवाब में दिया था। दोनों ही अफसरों का कहना है कि ये दबाव उस वक्त गृहमंत्री रहे पी.चिदंबरम की तरफ से था। इसके साथ ही २६/११ के गुनहगार डेविड हेडली की गवाही ने चिदंबरम और कांग्रेस की परेशानी को और बढ़ा दिया है। अब बीजेपी ही मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रही है। इशरत केस की ही मुश्किल से कैसे निकला जाए, इसका रास्ता ही कांग्रेस को नहीं मिल रहा है। साथ ही चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के मामले ने कांग्रेस का सिरदर्द और बढ़ा दिया है। अब इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद सदन में हंगामा तय है। इस केस में पूर्व गृहसचिव जी के पिल्लई के बाद अब गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेट्री आरवी मणि के खुलासे ने बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का नया हथियार दे दिया है। पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लई ने कहा था कि चिदंबरम के दबाव में इशरत केस में दो-दो एफिडेविट बनाए गए। आर वी एस मणि ने कहा एसआईटी चीफ सतीश वर्मा ने उनपर फर्जी रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया और नहीं मानने पर उन्हें टॉर्चर किया। मुझे सिगरेट से जलाया भी गया। मणि ने कहा कि इशरत को आतंकी ना बताने का दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन ये दबाव कहां से आ रहा था उन्हें नहीं मालूम।
उन्होंने ये भी दावा किया कि इनपुट के मुताबिक इशरत समेत चार लोग मोदी को मारने आये थे और इशरत की मौत एनकाउंटर नहीं बल्कि क्रॉस फायरिंग में हुई थी। मणि ने बताया कि उस वक्त आर के सिंह गृह सचिव बन चुके थे और उन्होंने अपनी शिकायत सीनियर को दी थी। पहला हलफनामा गृहमंत्रालय की मंजूरी से दिया था, लेकिन दूसरा हलफनामा क्यों दिया गया, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।