कांग्रेस के रुख से आहत साथी दल


नई दिल्ली। बिहार में गठबंधन साथियों के साथ लंबे अरसे बाद सत्ता में आई कांग्रेस का रुख साथी दलों को बहुत रास नहीं आ रहा है। बाqल्क यह अहसास होने लगा है कि गठबंधन से कांग्रेस ने न तो सीख ली और न ही गठबंधन धर्म निभाने के प्रति गंभीर है। इस मामले में भाजपा ज्यादा अच्छी है। खासकर असम में गठबंधन को देखते हुए यह भावना गहराने लगी है।
गौरतलब है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में असम और केरल ही ऐसे दो राज्य हैं जहां कांग्र्रेस बड़ी पार्टी भी है और नेतृत्व भी कर रही है। लिहाजा बिहार में कांग्रेस को सहारा देने वाली र्पािटयों को भरोसा था कि यहां कांग्रेस बदला चुकाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साथी दलों को दूसरी राह तलाशनी पड़ी। एक बड़े नेता का मानना है, ठगठबंधन के मामले में कांग्र्रेस का अनुभव अच्छा नहीं है। भाजपा शायद उससे ज्यादा अच्छी है।ठ उक्त नेता ने इससे ज्यादा बोलने से मना कर दिया। लेकिन यह स्पष्ट था कि वह कांग्र्रेस के रुख से आहत हैं।
उक्त नेता का मानना है कि इसका खामियाजा कांग्रेस को असम में भोगना पड़ेगा। न तो बिहार के साथी दलों को साथ रखा और न ही बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआइयूडीएफ की सुनी। ऐसे में अगर अजमल ७० से ज्यादा सीटों पर लड़े तो कांग्र्रेस के लिए मुाqश्कलें बढ़ेंगी। गौरतलब है कि असम में भाजपा ने बड़ा गठबंधन बना लिया है और एजेंडा वही है जिसके सहारे कांग्रेस इतने वर्षों से सत्ता में काबिज थी।