कसाब ने कभी बिरयानी नहीं मांगी थी: उज्ज्वल निकम


– कसाब के पक्ष में ‘भावनात्मक लहर’ रोकने का प्रयास
जयपुर । मुंबई २००८ आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब के जेल में बिरयानी मांगने की बात असत्य है। इस मामले में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने यह दावा करते हुए कहा कि इस बात को कसाब के पक्ष में बनाई जा रही एक ‘भावनात्मक लहर’ को रोकने के लिए ‘गढ़ा’ गया था। आतंकवाद विरोधी अंतररराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आए निकम ने कहा, कि कसाब ने कभी भी बिरयानी की मांग नहीं की थी और न ही सरकार ने उसे बिरयानी परोसी थी। मुकदमे के दौरान कसाब के पक्ष में बन रहे भावनात्मक माहौल को रोकने के लिए मैंने इसे गढ़ा था। उन्होंने कहा कि मीडिया गहराई से कसाब पर नजर रख रही थी और उसे यह बात अच्छे से पता थी। इसलिए उसने एक दिन कोर्ट में अपना सिर झुका लिया और अपने आंसू पोंछने लगा। निकम ने कहा कि थोड़ी ही देर बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इससे जुड़ी खबर दी। वह रक्षाबंधन का दिन था और मीडिया में इसे लेकर पैनल डिस्कशन शुरू हो गए। कुछ लोगों ने कहा कि कसाब की आंखों में आंसू अपनी बहन को याद करते हुए आए और कुछ ने तो उसके आतंकी होने पर ही सवाल खड़े कर दिए। निकम ने कहा, इस तरह की भावनात्मक लहर और माहौल को रोकने की जरूरत थी। इसलिए इसके बाद मैंने मीडिया में बयान दिया कि कसाब ने जेल में मटन बिरयानी की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मीडिया से यह सब कहा तो एक बार वहां फिर पैनल चर्चाएं शुरू हो गर्इं और मीडिया दिखाने लगा कि एक खूंखार आतंकवादी जेल में मटन बिरयानी की मांग कर रहा है, जबकि सचाई यह है कि कसाब ने न तो बिरयानी मांगी थी, न ही उसे परोसी गई थी।निकम ने कहा कि उन्होंने इस सम्मेलन में एक सेशन के दौरान भी लोगों के सामने इसका खुलासा किया। पाकिस्तानी आतंकवादी कसाब को नवंबर २००८ में हुए आतंकी हमले के करीब चार साल बाद नवंबर २०१२ में फांसी दे दी गई थी।