गृहमंत्रालय सूत्रों के मुताबिक- कन्हैया को अभी नहीं मिली क्लीनचिट


नई दिल्ली । गृह मंत्रालय सूत्रों ने कन्हैया को क्लीनचिट दिए जाने की खबरों को खारिज भी किया है। सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्रालय अभी मामले की जांच कर रही है। गृहमंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सिर्फ नारे लगाना ही देशद्रोह के अंतर्गत नहीं आता। गृहमंत्रालय का ये भी कहना है कि जब जांच पूरी हो जाएगी तब इस बारे में मीडिया को जानकारी दे दी जाएगी। गृह मंत्रालय के सूत्रों का मानना है कि कन्हैया की गिरफ्तारी में जल्दबाजी की गई। उसने भारत विरोधी नारे नहीं लगाए थे।

कन्हैया की गिरफ्तारी कुछ अफसरों के अति उत्साह का नतीजा!

नई दिल्ली। जेएनयू में देशविरोधी नारों को लेकर गृहमंत्रालय के सूत्रों से ऐसी खबर आ रही है जो दिल्लीr पुलिस के लिए किरकिरी का सबब बन सकता है। गृह मंत्रालय के सूत्रों से खबर दी है कि सुरक्षा एजेंसियों की मंत्रालय को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक छात्रसंघ अध्य़क्ष कन्हैया कुमार ने भारत विरोधी नारेबाजी नहीं की थी। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देशद्रोह के आरोप में कन्हैया की गिरफ्तारी दिल्लीr पुलिस कुछ अफसरों के अति उत्साह का परिणाम हो सकती है। कन्हैया ने देशविरोधी नारेबाजी नहीं की थी। सुरक्षा एजेंसियों ने गृह मंत्रालय को बताया है कि कन्हैया कुमार अफजल गुरु पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल था लेकिन संभवत उसने भारत विरोधी नारे नहीं लगाए और न ही ऐसा कुछ किया जिस पर देशद्रोह के आरोप में उसे गिरफ्तार किया जाए। एजेंसी का कहना है कि भारती विरोधी नारे सीपीआई माओस्ट से जुड़े डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन डीएसयू ने लगाए थे। अगर ये बात सही साबित होती है तो दिल्लीr पुलिस और कमिश्नर बीएस बस्सी के लिए खासा किरकिरी का सबब बन सकती है। मीडिया के बातचीत में बस्सी कह चुके हैं कि पुलिस के पास कन्हैया के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। इसी के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट: पुलिस ने कार्यक्रम के बारे में जेएनयू प्रशासन को किया था सतर्क
नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल की गई एक स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि उसने जेएनयू के अधिकारियों को नौ फरवरी की घटना और उसके संभावित प्रभावों के बारे में आगाह किया था। दूसरी तरफ पटियाला हाउस अदालत में पत्रकारों और जेएनयू के छात्रों और अध्यापकों पर हुए हमले के एक दिन बाद भी पुलिस ने इन्हें अंजाम देने वाले किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया है। पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है कि जेएनयू छात्र संघ के गिरफ्तार किए गए अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित १८ छात्र इस कार्यक्रम में मौजूद थे। इस कार्यक्रम के तहत रात करीब साढ़े सात बजे एक घंटे तक साबरमती ढाबा और गंगा ढाबा के बीच मार्च निकाला गया। इसके बाद भीड़ शांतिपूर्ण ढंग से तितर बितर हो गई। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में नौ फरवरी को तब पता चला जब परिसर के अंदर पोस्टर लगाए गए। इसके बाद उसे जेएनयू अधिकारियों को इस कार्यक्रम और इसके संभावित प्रभावों के बारे में आगाह किया था। रिपोर्ट के अनुसार कुछ छात्रों पर आरोप है कि वे सांस्कृतिक संध्या के नाम पर अवांछित गतिविधियों में संलग्न थे। उन्होंने भारत विरोधी नारे लगाए और जम्मू कश्मीर की आजादी का समर्थन किया। इस बीच दिल्लीr पुलिस ने पटियाला हाउस अदालत परिसर में वकीलों और जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर हमले के कई वीडियो का व्यापक विश्लेषण किया लेकिन वह किसी आरोपी की पहचान करने में विफल रही। उधर मुंबई से प्राप्त समाचार के अनुसार मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि दिल्लीr विश्वविद्यालय के गिरफ्तार प्राध्यापक जी एन साईबाबा के माओवादियों से कथित संबंध के मामले में अभी तक हुई जांच से पता चला है कि डीयू और जेएनयू में बड़ी संख्या में चरम वामपंथी छात्र हैं जिनका कश्मीरी उग्रवादी समूहों से संबंध है। नक्सल विरोधी अभियान, नागपुर रेंज के महानिरीक्षक रवीन्द्र कदम ने गढ़चिरौली में एक मराठी समाचार चैनल से बातचीत करते हुए यह बात कही। सुबह पत्रकारों का एक दल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पास गया और उसने एक वकील की पहचान की जो वीडियो में छात्रों पर हमला कर रहे वकीलों में शामिल था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पत्रकारों ने इसकी पहचान विक्रम सिंह चौहान के रूप में की। दिन में सोशल मीडिया पर एक पोस्टर सामने आया जिसमें संकेत मिलता है कि चौहान का संबंध बीजेपी से है। बहरहाल, पुलिस ने इस चित्र की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की।