कड़ी सुरक्षा के बीच हाजी अली दरगाह में दुआ मांगने पहुंची तृप्ति देसाई


मुंबई। वुमन राइट्स एक्टिविस्ट तृप्ति देसाई ने बुधवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच मुंबई की हाजी अली दरगाह में एंट्री ली। दरगाह से बाहर निकलने के बाद उन्होंने कहा कि मैं दरगाह में वहां तक गई जहां तक महिलाएं जा सकती हैं, मैंने वहां महिलाओं के लिए प्रार्थना की और वापस आ गई। ‘तृप्ति ने कहा, ‘इस बार पुलिस मददगार रही। यह लड़ाई महिला-पुरुष समानता की है, अगली बार हम दरगाह के अंदर के हिस्से में जाने की कोशिश करेंगे।’ तृप्ति के दरगाह में प्रवेश करने के बाद पुलिस और लोकल लोगों के बीच कहासुनी और झड़प हुई। विवाद बढ़ने पर दरगाह को दिनभर के लिए बंद कर दिया गया है।

हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह का निर्माण 1631 में हुआ था। ये आस्था के केन्द्र के तौर पर दुनिया भर में मशहूर है। बताया जाता है कि वर्ष 2001 तक यहां पर महिलाओं का प्रवेश वर्जित नहीं था। तृप्ति पिछले महीने से दरगाह में प्रवेश के लिए प्रयास कर रही है। पहले भी उन्होंने महिलाओं के साथ दरगाह में प्रवेश का प्रयास किया था जिस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उल्लेखनीय है कि हाजी अली में महिलाओं के प्रवेश पर रोक के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की जा चुकी है। हाजी अली दरगाह में प्रवेश की घोषणा करने पर शिवसेना के मुस्लिम नेता हाजी अरफात शेख ने धमकी दी थी कि चप्पलों का प्रसाद देकर तृप्ति देसाई का स्वागत किया जाएगा।

शेख ने कहा था कि तृप्ति देसाई ने दरगाह में प्रवेश की जिस तरह कवायद शुरू की है उससे मुस्लिमों में असंतोष है। मुस्लिम रीति रिवाज और शरीयत के मुताबिक महिलाओं का दरगाह और कब्रिस्तान में जाना मना है।यही नहीं शेख ने यह भी कहा कि राज्य में इस वक्त सूखा, महिलाओं की शिक्षा और कन्या भ्रूण हत्या जैसे कई गंभीर मसले हैं लेकिन इनको महत्व न देते हुए तृप्ति देसाई सिर्फ धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश के मसले को विवादित ढंग से बढ़ावा दे रही है। तृप्ति ने कहा था कि अगर केन्द्र सरकार कानून बना दें कि भारत में सभी धर्मों और जातियों के धर्मस्थलों में महिलाओं को प्रवेश मिलना चाहिए तो महिलाओं के हक में ये बड़ा फैसला होगा।