उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोटर तय करेंगे सत्ता की राहें


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है। इस चुनाव में कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा समेत अन्य क्षेत्रीय दलों ने कमर कस ली है। सभी अपने स्तर पर रणनीतियां बना रहे हैं। लेकिन, सभी दलों की नजरें उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण वोटरों पर नजरें हैं। यह वोटर किसी भी दल का भाग्य तय करेंगे। यहां १२ प्रतिशत ब्राह्मण वोट है।
जानकारी के अनुसार इसी कारण कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के लिए ब्राह्मण उम्मीदवार शीला दीक्षित को आगे किया। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय कभी भी एक पार्टी के साथ नहीं रहा। मायावती ने अपने जातीय समीकरणों में ब्राह्मणों, मुाqस्लम व दलित वोटरों को साथ जोड़े रखा। अब कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेतृत्व को ब्राह्मण उम्मीदवार आगे करने के लिए कहा क्योंकि ब्राह्मण मतदाता परम्परागत रूप से कांग्रेस का वोट बैंक रहा है। ब्राह्मण वोट बैंक का मामला गर्माने के बाद अब कांग्रेस के अलावा बसपा तथा भाजपा की निगाहें भी ब्राह्मणों की तरफ टिक गई हैं। ब्राह्मण समुदाय के हाथों में किसी भी पार्टी की जीत की वुंâजी रहेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ब्राह्मण वोटों को अपनी तरफ रिझाने के लिए सियासी र्पािटयों में होड़ मची हुई है। कांग्रेस के कदम से भाजपा भी मुख्यमंत्री पद के लिए ब्राह्मण चेहरे की तलाश में जुट गई है। ऐसी ाqस्थति में १२ प्रतिशत ब्राह्मण वोट तथा १८ प्रतिशत मुाqस्लम वोट किसी भी पार्टी को सत्ता के निकट पहुंचा सकती हैं। कांग्रेस ने ब्राह्मण वोटों के साथ-साथ मुाqस्लम मतदाताओं को रिझाने के लिए गुलाब नबी आजाद को भी यू.पी. में आगे किया हुआ है। ब्राह्मण समुदाय नाराज है क्योंकि पिछले कई वर्षों में इस समुदाय को नजरअंदाज किया जाता रहा है। अपनी महत्ता बनाने के लिए ब्राह्मण समुदाय को अब मुाqस्लम व दलित लोगों की भांति एकजुट होकर एक पार्टी के पक्ष में वोट डालना होगा। ब्राह्मणों में एकता न होने के कारण ही उन्हें नजरअंदाज किया जाता रहा है।