उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन, सीएम रावत ने दिया इस्तीफा


नई दिल्ली। अरुणांचल के बाद उत्तराखंड पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केन्द्रीय कैबिनेट की सिफारिश पर संविधान के अनुच्छेद ३५६ के तहत उद्घोषणा पर हस्ताक्षर करते हुए हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को बख्रास्त किया और विधानसभा को निलंबित कर राष्ट्र्रपति शासन लगा दिया है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद हरीश रावत ने राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रविवार को यह फैसला लिया गया है। राज्यपाल की रिपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री मंडल की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की थी। इस फैसले के बाद अब राज्य से लेकर केंद्र की राजनीति में हलचल मच गई है।
गौरतलब है कि इस बड़े फैसले के बीच उत्तराखंड विधानसभा भंग नहीं की गई है केवल निलंबित की गई है। राज्यपाल की रिपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री मंडल की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। उधर, उत्तराखंड मुख्यमंत्री का स्टिंग सामने के आने के दूसरे दिन रविवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि केंद्रीय सत्ता राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकी दे रही है। उन्होंने कहा कि लगातार बीजेपी से राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकियां मिल रही हैं। विपक्ष का ऐसा रवैया लोकतंत्र की पंरपरा की हत्या है। भाजपा पर केंद्र में सत्ता पर होने का अहंकार है और इसी अहंकार में वह राज्य की राजनीति में निदंनीय प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री रावत ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि राज्य में सरकार बदल के लिए जनता पर विश्वास नहीं किया जा रहा है, बल्कि पैसे पर विश्वाव किया जा रहा है। यह घटिया दर्जे की राजनीति है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्य में लोकतंत्र की हत्या का यह दूसरा प्रयास है। सामने आऐ स्टिंग ऑपरेशन में उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत बागी नेताओं को पार्टी में वापस लाने के लिए पैसे देने की बात करते नजर आ रहे हैं। यह स्टिंग जिस व्यक्ति द्वारा किया गया है वह किसी निजी समाचार चैनल में संपादक हैं। मुख्यमंत्री रावत ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में बोलते हुए कहा कि जिस स्टिंग को विपक्ष मेरे खिलाफ ब्रह्मास्त्र बता रहा है। उस स्टिंग को करने वाला व्यक्ति खुद ४२० के केस में आरोपी है। राजनीति के इस स्तर तक पहुंचने से पहले मैंने ५० साल उत्तराखंड में गांव-गलियों की खाक छानी है। राज्य की जनता के सुख-दुख में हमेशा साथ रहा हूं। स्टिंग को लेकर विपक्ष के लोग गलत फहमी में हैं। कृपया स्टिंग करने वाले व्यक्ति के डीएनए की भी जांच करें और फिर सही गलत की पहचान करें। हरीश रावत ने कहा कि जल्द ही वह जनता के बीच में जाएंगे। उन्होंने कहा कि धनबल के आधार पर बीजेपी वापस राज्य की सत्ता में आना चाहती है। धनबल से राज्य में राजनीति का अपहरण किया जा रहा है। प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि मेरा डीएनए उत्तराखंड का डीएनए है। संवैधानिक संस्थाओं पर बीजेपी हमला कर रही है। उधर, मीडिया से मुखातिब होते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने स्टिंग के बारे में कोई सफाई नहीं दी। उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं की कि वह कथित स्टिंग वीडियो में क्या कर रहे थे।
– केंद्र सरकार ने की थी सिफ़ारिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार रात यहां कैबिनेट की आपातकालीन बैठक हुई। मोदी बैठक में शामिल होने के लिए असम की यात्रा में बीच में छोड़कर राष्ट्रीय राजधानी आए थे। कैबिनेट ने राज्यपाल केके पॉल से मिली कई रिपोर्ट पर विचार किया जिसमें उन्होंने राजनीतिक स्थिति को अस्थिर बताया और राज्य विधानसभा में सोमवार को प्रस्तावित शक्ति परीक्षण में हंगामा होने की संभावना पर चिंता जताई थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रपति को शनिवार रात कैबिनेट की सिफारिश के आधार के बारे में बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार की रात एक घंटे की कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन समेत तमाम विकल्पों पर विचार किया था। बता दें कि इस बैठक के लिए पीएम अपने दो दिवसीय असम दौरे को बीच में छोड़कर आए थे। सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कल देर रात राष्ट्रपति को इस बारे में जानकारी दी। राज्यपाल की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।