ई-कचरा पैदा करने में अमेरिका शीर्ष पर, भारत 5 नंबरी


० ग्लोबल स्तर पर २०१८ तक २१ फीसदी बढ़ेगा ई-कचरा
० संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में खुलासा
नईदिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा करने वाला दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश भारत बन चुका है। भारत ने २०१४ में १७ लाख टन इलेक्ट्रॉनिक और इलोqक्ट्रकल उपकरण कचरे के रूप में निकाले। यूनाइटेड नेशंस यूनिर्विसटी के ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर २०१४ रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और चीन ने २०१४ में सबसे ज्यादा ई-कचरा पैदा किया। ई-कचरा पैदा करने के मामले में अमेरिका पहले पायदान पर, चीन दूसरे, जापान तीसरे और जर्मनी चौथे जबकि भारत पांचवे पायदान पर है। रिपोर्ट की माने तो अगले तीन साल में ग्लोबल स्तर पर ई-कचरा २१ फीसदी तक बढ़ सकता है। पिछले साल दुनिया में सबसे ज्यादा १.६ करोड़ टन ई-कचरा एशिया में पैदा हुआ। इनमें चीन में ६० लाख टन, जापान में २२ लाख टन और भारत में १७ लाख टन ई-कचरा पैदा हुआ। वहीं यूरोप में सबसे जयादा ई-कचरा करने वाले देशों में नॉर्वे पहले, ाqस्वट्जरलैंड दूसरे, आइसलैंड तीसरे, डेनमार्वâ चौथे और ब्रिटेन पांचवें पायदान पर रहा। वहीं सबसे कम १९ लाख टन ई-कचरा अप्रâीका में पैदा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, २०१८ में ई-कचरे की मात्रा २१ फीसदी तक बढ़कर ५ करोड़ टन पहुंचने की संभावना है।
० मोबाइल से कम कचरा
पिछले साल पैदा हुए ई-कचरा में महज ७ फीसदी मोबाइल फोन, वैâलकुलेटर, पीसी, िंप्रटर और छोटे आईटी उपकरण रहे, वहीं करीब ६० फीसदी हिस्सा घरों और कारोबार में इस्तेमाल होने वाले वैक्यूम क्लीनर, टोस्टर्स, इलोqक्ट्रक रेजर्स, वीडियो वैâमरा, वॉिंशग मशीन और इलोqक्ट्रक स्टोव जैसे उपकरणों का था।