ईरान व सउदी अरब से ऊर्जा संसाधनो पर भारत का नया रिश्ता


नईदिल्ली। मध्य पूर्व एशियाई क्षेत्र बदलते भू-राजनीतिक परिवेश के मद्देनजर क्षेत्र की दो सबसे अहम शक्तियों सऊदी अरब और ईरान को एक साथ साधने की कोशिश हो रही है। दुनिया के तमाम बड़ी शक्तियों के लिए एक वूâटनीतिक चुनौती बन गया मध्य एशियाई देश न सिर्पâ ऊर्जा सुरक्षा के हिसाब से बाqल्क अन्य सामाजिक व र्आिथक दृाqष्टकोण से भी काफी अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब की सफल यात्रा के बाद भारत सरकार अब ईरान के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से संवारने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में वैâबिनेट की बैठक में ईरान को लेकर एक अहम समझौता सरकार की मंशा को दिखाता है। वैâबिनेट ने ईरान की वंâपनियों के लिए ३००० करोड़ रुपये का लाइन ऑफ व्रेâडिट उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अभी तक यह सुविधा ९०० करोड़ रुपये की थी। इससे ईरान की वंâपनियां अब ज्यादा भारतीय उत्पादों का आयात कर सवेंâगी।
उधर, विदेश मंत्रालय के अनुरोध पर रिजर्व बैंक ने भारतीय तेल वंâपनियों पर ईरान के बकाये राशि के भुगतान के मामले को जल्द से जल्द सुलझाने में जुटा हुआ है। ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के दौरान देश की तेल वंâपनियों ने वहां से ६.५ अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल खरीदा था जिसका भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। रिजर्व बैंक ईरान के बैंक के साथ विमर्श शुरू कर चुका है और उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों के दौरान ही बकाये राशि का किस्तों में भुगतान शुरू हो जाएगा। भारत ने खुल कर ईरान से तेल आयात करना भी शुरू कर दिया है। पांच-सात वर्ष पहले तक ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आर्पूितकर्ता देश था। माना जा रहा है कि इस वर्ष ईरान फिर यह स्थान हासिल कर सकता है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक ईरान और भारत के बीच पुराने रिश्ते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के दौरान भी भारत उन गिने-चुने देशों में है जिसने ईरान के साथ अपने व्यापारिक व अन्य रिश्तों को बनाये रखा है। जुलाई, २०१५ में रूस (उफा) में प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी की मुलाकात में द्विपक्षीय रिश्तों को नए सिरे से मजबूत बनाने की इच्छा जताई गई थी। अब इस पर काम शुरू हो चुका है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस हफ्ते के अंत में ईरान जा रहे हैं। इसके बाद १४ अप्रैल, २०१६ को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी तेहरान जाएंगी। इन दोनों की यात्रा को प्रधानमंत्री मोदी की संभावित तेहरान यात्रा की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। वैसे प्रधान की इस यात्रा का काफी व्यापक एजेंडा है। प्रधान ने सिर्पâ ईरान के तेल मंत्री अमीर हुसैन जमानिनिया से मिलेंगे बाqल्क व्यापार मंत्री रेजा नेमतजादेह और सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के गवर्नर से भी द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। प्रधान मुख्य तौर पर ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच होने वाले समझौते की जमीन तैयार करेंगे तो विदेश मंत्री सुषमा की यात्रा के दौरान चाबहार पोर्ट और यहां भारत की मदद से स्थापित होने वाले विशेष र्आिथक क्षेत्र (एसईजेड) की स्थापना की राह की रुकावटों को दूर करने की कोशिश करेंगे।