इशरत जहां केस में UPA सरकार और लश्कर की थी मिलीभगत : रिजिजू


नई दिल्ली। इशरत जहां मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि तत्कालीन गृह मंत्रालय ने सच छुपाने के लिए पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर काम किया। एक टीवी साक्षात्कार में उन्होंने कहा, पी. चिदंबरम के नेतृत्व में यूपीए सरकार के गृह मंत्रालय ने लश्कर के साथ काम किया और आतंकवाद के खिलाफ नरम रुख अपनाया। हालांकि रिजिजू ने आगे कहा, मैं व्यक्तिगत तौर पर पी. चिदंबरम का बहुत सम्मान करता हूं। वह अब तक के बेहतरीन प्रशासक, सबसे बेहतरीन मंत्रियों में से एक हैं।

इशरत जहां मामले में गुम हुई फाइलों का नहीं मिला सुराग

इशरत जहां मुठभेड़ मामले में गायब फाइलों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। फाइलों की पड़ताल करने के लिए रिकार्ड रुम को पूरी तरह खंगाला गया है। गृहमंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि गायब फाइलों का पता लगाने के लिए गठित एक सदस्यीय समिति 31 मई के पहले अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को दे देगी।

पूर्व गृह सचिव ने लगाया था एफिडेविट बदलने का आरोप

यूपीए सरकार में होम सेक्रेटरी रहे जीके पिल्लई ने कहा है कि इशरत जहां एनकाउंटर से जुड़े एफिडेविट में चिदंबरम ने उन्हें दरकिनार करते हुए खुद बदलाव करवाया था।  पिल्लई ने कहा- चिदंबरम ने आईबी में मेरे जूनियर ऑफिसर्स को कॉल किया और एफिडेविट को पूरी तरह बदल दिया। वे खुद बोल कर नया एफिडेविट लिखवा रहे थे। इसलिए किसी ने कोई विरोध नहीं किया।

चिदंबरम की सफाई

पिल्लई के आरोपों पर सफाई देते हुए पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी यह माना था कि एफिडेविट बदला गया था, लेकिन ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि पहला एफिडेविट भ्रम फैलाने वाला था। उन्होंने कहा कि ऐसा किसी को बचाने के लिए नहीं किया गया था बल्कि इस मामले में केंद्र सरकार का पक्ष ठीक से रखने के लिए किया गया था।