इतालवी मरीन पर UN कोर्ट के फैसले पर उलझे भारत-इटली


नई दिल्ली। केरल में दो भारतीय मछुआरों के हत्यारोपी एक इतालवी मरीन (नौसैनिकों) पर हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय अदालत का अंतरिम फैसला आ गया है। लेकिन दोनों ही देश इस फैसले को अपने-अपने पक्ष में बता रहे हैं।

इटली के मुताबिक, अंतरिम फैसले में भारत में रह रहे उसके मरीन को अंतिम फैसला आने तक स्वदेश लौटने की अनुमति मिल गई है। लेकिन भारत का कहना है कि आदेश के मुताबिक जमानत की शर्त भारतीय सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा।

मालूम हो कि दो इतालवी मरीनों ने 2012 में दो मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। दोनों मरीनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इटली उसी समय से मैसीमिलैनो लातोरे और सल्वातोर गिरोन नामक इन दोनों मरीनों की स्वदेश वापसी की कोशिश कर रहा है।

इसमें से एक लातोरे इलाज के बहाने इटली जाने में सफल रहा और बाद में भारत लौटने से इनकार कर दिया। इसके बाद भारत ने दूसरे मरीन गिरोन को स्वदेश भेजने से मना कर दिया। इसे लेकर दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे।

इटली का कहना है कि उक्त घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में हुई थी, इसलिए भारत को उन पर मुकदमा चलाने का कानूनी अधिकार नहीं है। जबकि भारत इस दावे को खारिज करता है। लिहाजा, अपने मरीन की स्वदेश वापसी के लिए इटली ने 2015 में अंतराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

इटली का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने अंतरिम फैसले में अभी तक भारत में जमानत पर रह रहे एक इतालवी मरीन को अदालती कार्यवाही पूरी होने तक इटली भेजने का आदेश दिया है। लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने इस मामले में भारतीय सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को ही सर्वोपरि माना है और गिरफ्तार मरीन की जमानत की शर्त तय करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

अंतराष्ट्रीय अदालत ने कहा कि मरीनों के खिलाफ केस चलाने के दोनों देशों के अधिकार क्षेत्र पर अंतिम फैसला आने तक भारत में रह रहे नौसैनिक को इटली भेजा जा सकता है। लेकिन उसे भारतीय सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में ही माना जाएगा।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार गिरोन की जमानत की शर्त सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा इटली में नामित एक अधिकारी को रिपोर्ट करने, इतालवी अधिकारियों के पास पासपोर्ट जमा कराने तथा बगैर सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के इटली से बाहर नहीं जाने का प्रावधान हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला यदि भारत के पक्ष में आता है तो इटली को दोनों मरीनों को भारत के हवाले करना होगा। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस फैसले का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही आगे की कार्रवाई पर फैसला किया जाएगा।