असम में अगप को है मोदी का सहारा


गुवाहाटी. असम में आqस्तत्व की लड़ाई लड़ रही असम गण परिषद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे के सहारे अपने पुनर्वास की सम्भावना दिख रही है.
कभी प्रदेश की राजनीति में मुख्य भूमिका में रहने वाली असम गण परिषद आज अपनी पहचान बनाए रखने के लिये संघर्ष कर रही है.
कभी असम गण परिषद के शासन में रहे असम में आज मोदी का प्रभाव साफ देखा जा रहा है. यही कारण है कि बांग्लादेशी िंहदू अप्रवासियों के लिये नागरिकता के अधिकार और असम समझौते जैसे मुद्दों पर दोनों र्पािटयों के मतभेद के बावजूद असम गण परिषद भाजपा से गठबंधन के लिए लालायित है.
कभी असम में सरकार की कमान संभालने वालीअसम गण परिषद अब अपनी पहचान बनाए रखने के लिये संघर्ष कर रही है. बीते चुनावों में इसे सिर्पâ नौ सीटें मिली थीं, जो भाजपा से ५ अधिक थीं. गौर करने लायक तथ्य यह भी है कि भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी सर्वानंद सोनोवाल एजीपी के पूर्व नेता हैं. उन्होंने मौजूदा नेतृत्व के साथ मतभेद के चलते पार्टी छोड़ दी थी.