अयोध्या में हुए आतंकी हमले पर फैसला 29 को


लखनऊ। राम नगरी अयोध्या में जुलाई २००५ में हुए आतंकी हमले के मामले में अब पैâसला सात दिन बाद आएगा। यहां पर हमले के मामले पांच आतंकियों पर आने वाले पैâसले की तारीख टली। अब २९ मार्च को आएगा पैâसला।अयोध्या पर आतंकी हमले के मामले में सेंट्रल जेल, नैनी में पैâसला होना था। इस प्रकरण की सुनवाई सत्र न्यायधीश ने नैनी सेंट्रल जेल में ही की थी। गौरतलब है कि पांच जुलाई २००५ की सुबह सवा नौ बजे के आसपास आतंकियों ने रामजन्म भूमि परिसर में धमाका किया था। करीब डेढ़ घंटे तक चली मुठभेड़ में इस पांच आंतकवादी मार गिराए गए थे। मारे गए आतंकियों की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। हमले में निर्दोष रमेश कुमार पांडेय व शांति देवी को जान गंवाना पड़ा था। इस मुठभेड़ में दारोगा नंद किशोर, हेड कांस्टेबिल सुल्तान िंसह, धर्मवीर िंसह पीएसी सिपाही हिमांशु यादव, किशन स्वरूप उर्पâ कृष्ण स्वरूप, प्रेम चंद्र गर्ग व सहायक कमांडेंट संतो देवी घायल हुए थे। पुलिस की तफ्तीश में असलहों की सप्लाई करने और आतंकियों के मददगार के रूप में आसिफ इकबाल, मोहम्मद नसीम, मोहम्मद जीज, शकील अहमद व डॉ. इरफान का नाम सामने आया। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। २००६ में हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें पैâजाबाद जेल से इलाहाबाद के सेंट्रल जेल, नैनी भेज दिया गया। सुरक्षा कारणों से जेल में ही विशेष न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई की। कुल ५१ गवाहों ने गवाही दी।
अयोध्या में विवादित ढांचा (बाबरी माqस्जद) विध्वंस का बदला लेना हमले का मकसद था। थाना राम जन्म भूमि परिसर में दर्ज रिपोर्ट कहती है कि हमलावर दो सम्प्रदायों के बीच शत्रुता बढ़ाकर देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाना चाहते थे। इसी क्रम में हैंड ग्रेनेड, एक ४७, राकेट लांचर से लैस होकर उन्होंने हमला बोला था। बमबाजी और फायिंरग से पहले हमलावरों ने वह मार्शल जीप ब्लास्ट कर उड़ा दी थी, जिससे वह आए थे।