अयोध्या में रामलला के दर्शन को लेकर दुविधा


नई दिल्ली । अयोध्या में रामलला का दर्शन करने में फिलहाल परेशानियां बरकरार रहेंगी। दर्शर्नािथयों को बुनियादी सुविधाएं देने की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोई आदेश नहीं दिया। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने शीर्ष अदालत में यह याचिका दायर की है। इस याचिका को शीर्ष अदालत ने राम जन्मभूमि विवाद के मुख्य मामले के साथ संलग्न कर दिया है। स्वामी को अदालत ने मुख्य न्यायाधीश से शीघ्र सुनवाई का आग्रह करने की छूट दी है।
सुप्रीम कोर्ट में २०१० से ही लंबित स्वामी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। स्वामी ने दर्शर्नािथयों की परेशानियों का जिक्र किया और बुनियादी सुविधाएं देने की मांग की।
स्वामी ने कहा कि यह मामला राम जन्मभूमि मुख्य विवाद से अलग है। यह दर्शर्नािथयों को बुनियादी सुविधाएं देने से जुड़ा है। पिछले बीस साल से ाqस्थति जस की तस है। पूजा करते समय लोगों को चप्पल जेब में रखना पड़ रहा है। पेयजल, पाा\कग की व्यवस्था नहीं है। दर्शर्नािथयों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने से किसी को क्या परेशानी होगी?
दूसरी तरफ प्रतिवादी हाशिम के वकील ने स्वामी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिका महत्वहीन हो चुकी है इसे खारिज किया जाए। हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से पहले ही रोक लगी है। १९९६ का आदेश है। इसके बाद २०१० में मुख्य मामले में पैâसला आ चुका है ऐसे में अब इस अर्जी का कोई महत्व नहीं रह जाता।
दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह फिलहाल कोई आदेश पारित करने नहीं जा रही है। पीठ ने मामले को राम जन्मभूमि के मुख्य विवाद के साथ संलग्न करने का आदेश दिया। हालांकि, पीठ ने स्वामी से कहा कि अगर वह मामले पर जल्दी सुनवाई चाहते हैं तो मुख्य न्यायाधीश के सामने मामले का जिक्र कर मांग कर सकते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि वाद का निपटारा हो चुका है इसलिए एसएलपी का भी निपटारा हो गया।