अटल को राष्ट्रपति खुद देगें भारत रत्न


० मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी रहेगें उपस्थिति
० अटल बिहारी वाजपेयी को बधाइयों का तांता
० महामना मदन मोहन मालवीय को ३१ मार्च को करेगें भेंट
नईदिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी प्रोटोकॉल तोड़कर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनके घर जाकर २७ मार्च को सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ भेंट करेगें। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। बीते साल २५ दिसंबर को एनडीए सरकार ने वाजपेयी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने का घोषणा की थी। अटल बिहारी वापजेपी को यह अवार्ड २७ मार्च को, जबकि महामना मदन मोहन मालवीय को ३१ मार्च को दिया जाएगा।
० बधाईयां शुरू
आज सुबह से ही सियासी गलियारों के अलावा पूरे देश से अटल बिहारी वाजपेयी को बधाइयां मिलने लगी थी। आइए जानते है उनको देश का सर्वोच्च सम्मान दिए जाने के बाद किसने क्या कहा। राजनाथ िंसह, केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहाकि अटल जी को भारत रत्न दिया जा ना, सिर्पâ राजनीतिक र्पािटयों के लिए ही नहीं बाqल्क देश के सभी नागरिकों के लिए महान गौरव का क्षण है। ममता बनर्जी, पाqश्चम बंगाल मुख्यमंत्री, ने कहा कि बहुत खुशी की बात है कि अटल जी आज भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। वो बड़े पैमाने पर इस सम्मान के हकदार हैं, जो वास्तव में एक महान राजनेता। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूं…
० अटल-मदन मोहन में कई समानताएं
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहली बार िंहदी में भाषण देकर िंहदी का परचम फहरा चुके हैं। करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता और प्रखर कवि के रूप में विख्यात अटल ने बतौर विदेश मंत्री १९७७ में पहली बार संयुक्त राष्ट्र में िंहदी में उद्बोधन दिया था। २५ दिसंबर, १९२४ को ग्वालियर में जन्मे वाजपेयी पहले जनसंघ और फिर भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष रहे। तीन बार प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी का समय तेज र्आिथक विकास दर और विश्व स्तर पर भारत की साख बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जाता है। संघ के स्वयंसेवक होने के बावजूद भी धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी चेहरा रहे वाजपेयी की लोकप्रियता बतौर राजनेता तमाम दलगत सीमाओं से ऊपर रही है।
० िंहदी के लिये अंग्रेजों से लड़ी लड़ाई
सर्वोच्च नागरिक सम्मान हासिल करने वाले महामना मदन मोहन मालवीय का जन्म २५ दिसंबर, १८६१ को इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने दान की जमीन और पैसे लेकर बनारस िंहदू विश्वविद्यालय जैसी संस्था की स्थापना की थी। स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् महामना दो बार कांग्रेस अध्यक्ष रहे। उन्होंने ही पहली बार अदालती कामकाज में िंहदी के इस्तेमाल को लेकर अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी। मंदिर में प्रवेश दिलाने से लेकर वंचित तबकों के उत्थान के लिए भी महामना ने अथक प्रयास किए थे।
० ४३ लोगों को मिल चुका भारत रत्न
गौरतलब है कि अभी तक कुल ४३ लोगों को भारत रत्न दिया जा चुका है। इनमें वैज्ञानिक सीवी रमन, क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर, िंसगर लता मंगेशकर और सी राजगोपालाचारी जैसे राजनेता और विद्वान शामिल हैं।