अक्षय तृतीया : आज से चार धाम यात्रा शुरु


देहरादून। आज गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही गढ़वाल हिमालय की प्रसिद्ध वार्षिक चारधाम यात्रा शुरू। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि उत्तरकाशी जिले में दस हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर तथा रुद्रप्रयाग जिले में 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के संबंध में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। सर्दियों में छह माह तक बंद रहने के बाद इन धामों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। गढ़वाल हिमालय के चार धामों के नाम से प्रसिद्ध एक अन्य धाम चमोली जिले मे स्थित बद्रीनाथ मंदिर के कपाट भी 11 मई को श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। इन धामों के कपाट हर साल सर्दियों में क्षेत्र के भारी बर्फबारी की चपेट मे रहने के कारण श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद कर दिए जाते है, जो गर्मियां आने पर दोबारा खोल दिए जाते हैं।छह माह के यात्रा सीजन के दौरान इन धामों के दर्शनों के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या श्रद्धालु आते हैं। चारधाम यात्रा को गढ़वाल हिमालय की आर्थिकी की रीढ़ भी माना जाता है।

‘हेमकुंड साहिब’ के कपाट 25 को खोले जाएंगे….

‘छोटी चार धाम यात्रा’ के नाम से प्रसिद्ध इन हिन्दू तीर्थस्थलों के अलावा प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल ‘हेमकुंड साहिब’ के कपाट भी इस माह की 25 तारीख से खोल दिए जाएंगे। साथ उत्तराखंड के लोकप्रिय तीर्थस्थल तुंगनाथ मंदिर 11 मई, रुद्रनाथ मंदिर 18 मई और मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 20 मई को खोले जाएंगे।

बर्फबारीे के कारण अक्टूबर-नवंबर में बंद कपाट बंद….

परंपरागत रूप से शीतकाल के दौरान भारी बर्फबारी की चपेट में रहने के कारण चारों धामों के कपाट हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में श्रद्धालुओं के लिये बंद कर दिये जाते हैं। प्राचीन रीति-रिवाजों के अनुसार, हर साल बसंत पंचमी के आसपास ग्रीष्मकाल के लिए इन तीर्थस्थलों के कपाट खुलने के मुहूर्त विधि-विधान से निकाले जाते हैं।

अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश….

28 मार्च से राष्ट्रपति शासन के अधीन इस पहाडी राज्य (उत्तराखंड) के राज्यपाल केके पॉल ने इस विश्व प्रसिद्ध यात्रा में पर्याप्त रूचि दर्शाते हुए यात्रा के समुचित प्रबंधन के लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं। उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि तीर्थयात्रियों के पहुंचने से पहले सभी आवश्यक सुविधाएं, सड़क और आवागमन व्यवस्था सहित सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएं।