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                <title>सीआईआई ने एमएसएमई, निर्यातकों के लिए की प्रोत्साहन की मांग</title>
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                        <![CDATA[<p>नई दिल्ली, 06 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र सरकार से सूक्ष्म, मझौले तथा लघु उद्यम (एमएसएमई) और निर्यातकों के लिए प्रोत्साहन की मांग की है।</p>
<p>संगठन ने मौजूदा समय में सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए “समयबद्ध, संतुलित और समन्वित” कदमों की सराहना करते हुए रविवार को एक 20 सूत्री एजेंडा जारी किया।</p>
<p>इसमें एमएसएमई के लिए आसान और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने, निर्यातकों के लिए ऋण और बीमा को मजबूत बनाने तथा ऊर्जा स्रोतों पर कर कम करने जैसे सुझाव दिये गये हैं।</p>
<p>सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146447/cii-offers-incentives-for-msme-exporters"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-03/news-photo-(18)2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 06 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र सरकार से सूक्ष्म, मझौले तथा लघु उद्यम (एमएसएमई) और निर्यातकों के लिए प्रोत्साहन की मांग की है।</p>
<p>संगठन ने मौजूदा समय में सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए “समयबद्ध, संतुलित और समन्वित” कदमों की सराहना करते हुए रविवार को एक 20 सूत्री एजेंडा जारी किया।</p>
<p>इसमें एमएसएमई के लिए आसान और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने, निर्यातकों के लिए ऋण और बीमा को मजबूत बनाने तथा ऊर्जा स्रोतों पर कर कम करने जैसे सुझाव दिये गये हैं।</p>
<p>सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक के शुरुआती उपायों ने बाजार की भावना को स्थिर करने में मदद की है और यह दिखाया है कि देश का नीतिगत ढांचा बाहरी झटकों के सामने भी मजबूत और सक्षम है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत के पिछले अनुभव बताते हैं कि समन्वित राजकोषीय और मौद्रिक कदम लचीलापन बढ़ाने में मदद करते हैं। अगला चरण लक्षित तरलता समर्थन, ऋण सुविधा, व्यापारलागत प्रबंधन और विदेशी मुद्रा स्थिरता पर केंद्रित होना चाहिये।</p>
<p>सीआईआई की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और व्यापार चैनलों में आपूर्ति पक्ष से संबंधित दबाव बने हुए हैं। उद्योगसे प्राप्त फीडबैक के अनुसार, शुरुआती नीतिगत उपायों ने तत्काल प्रभाव को कम किया है, लेकिन कईक्षेत्रों – विशेषकर एमएसएमई, निर्यातक और ऊर्जा-गहन उद्योग – अब भी परिचालन और वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>सीआईआई ने अपने एजेंडा में आपात स्थिति के लिए क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम की मांग की है ताकि एमएसएमई और प्रभावित क्षेत्रों को बिना जमानत अतिरिक्त कार्यशील पूंजी मिल सके।</p>
<p>एमएसएमई और निर्यातकों के लिए तीन महीने के मोरेटोरियम और ऋण पुनर्गठन सुविधा और विशेष रिफाइनेंस विंडो की मांग की गई है।</p>
<p>उद्योग संगठन ने एमएसएमई को राहत देने के लिए सार्वजनिक उद्यमों के साथ अनुबंध की समय- सीमा तीन-चार महीने बढ़ाने और बैंक गारंटी के लिए अर्हताओं में कमी की मांग की है। साथ ही कार्यशील पूंजी की ऋण सीमा भी बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, खासकर निर्यात-उन्मुख इकाइयों के लिए।</p>
<p>एमएसएमई के लिए बैंकिंग शुल्कों में अस्थाई छूट या कमी की बात कही गई है। उद्योगों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत रिफंड में तेजी लाने और ऊर्जा क्षेत्र लिए कच्चे माल जैसे एलएनजी पर कर और शुल्कों में अस्थाई कमी की वकालत की गई है।विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर में अस्थाई छूट का सुझाव दिया गया है।</p>
<p>सीआईआई ने एमएसएमई के लिए संकट प्रतिक्रिया ढांचा विकसित करने, उर्वरक सब्सिडी को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली से जोड़ने और सार्वजनिक तेल एवं गैस कंपनियों के लिए विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा देने की मांग की है।</p>
<p>उसने कहा है कि प्राथमिक सेक्टर को ऋण देने के मानदंडों में लचीलापन लाया जाये, निर्यात क्रेडिट और बीमा ढांचे को मजबूत करने के लिए विभिन्न संस्थानों में समन्वय बढ़ाया जाये तथा विभिन्न मंत्रालयों और उद्योग के बीच समन्वित तंत्र विकसित किया जाये ताकि संकट की निगरानी और नीतिगत प्रतिक्रिया बेहतर हो सके।</p>]]>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:18:31 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Bhatu Patil]]>
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