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                            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गुजरात पहुंचा 20,000 टन एलपीजी लेकर चला जहाज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांडला (गुजरात), 17 मई (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया संकट के बीच कतर से 20,000 टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर चला एक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण पहुंच गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मार्शल आइलैंड के ध्वज वाला पोत ‘एमवी सिमी’ कतर से रवाना हुआ था और 13 मई को होर्मुज पार करने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे कांडला बंदरगाह पर पहुंचा।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, मार्च की शुरुआत से अबतक 13 भारतीय ध्वज वाले पोत होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इनमें 12 एलपीजी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/147173/ship-carrying-20000-tonnes-of-lpg-crossed-the-strait-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/7674_lpg-cylinder.jpg" alt=""></a><br /><p>कांडला (गुजरात), 17 मई (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया संकट के बीच कतर से 20,000 टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर चला एक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण पहुंच गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मार्शल आइलैंड के ध्वज वाला पोत ‘एमवी सिमी’ कतर से रवाना हुआ था और 13 मई को होर्मुज पार करने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे कांडला बंदरगाह पर पहुंचा।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, मार्च की शुरुआत से अबतक 13 भारतीय ध्वज वाले पोत होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इनमें 12 एलपीजी टैंकर और एक कच्चा तेल ले जाने वाला पोत शामिल है।</p>
<p>ओमान तट के निकट स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।</p>
<p>पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण इस समुद्री मार्ग पर गंभीर असर पड़ा है।</p>
<p>अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई शुरू हुई, जिससे हाल के दशकों के सबसे बड़े ऊर्जा संकट में से एक पैदा हो गया।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (यूएनईसीओएसओसी) की ऊर्जा एवं आपूर्ति प्रवाह सुरक्षा पर आयोजित विशेष बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने कहा कि होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, नागरिक चालक दल की सुरक्षा को खतरे में डालना और नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा पहुंचाना अस्वीकार्य है।</p>
<p>इस बीच, 13 मई को ओमान तट के पास एक भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक पोत पर हमला हुआ था।</p>
<p>ओमान के अधिकारियों ने सोमालिया से आ रहे उस पोत के सभी 14 चालक दल सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। हालांकि हमला किसने किया, इसका तत्काल पता नहीं चल सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 21:05:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एलपीजी में 20 प्रतिशत डीएमई मिलाने से सालाना 34,200 करोड़ रुपये की बचत संभव: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 19 अप्रैल (वेब वार्ता)। कोयला गैसीकरण से उत्पादित 20 प्रतिशत डाइमिथाइल ईथर (डीएमई) को रसोई गैस (एलपीजी) के साथ मिलाने से एलपीजी आयात में सालाना लगभग 63 लाख टन की कमी आ सकती है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार इससे प्रति वर्ष लगभग 34,200 करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।</p>
<p>कोयला गैसीकरण की प्रक्रिया में कोयले को सिनगैस में बदला जाता है, जिसे बाद में डीएमई में बदल दिया जाता है। डीएमई एक स्वच्छ जलने वाला ईंधन है, जो आयातित एलपीजी के स्वदेशी विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है।</p>
<p>पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146686/annual-savings-of-rs-34200-crore-possible-by-mixing-20"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/7674_lpg-cylinder.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 19 अप्रैल (वेब वार्ता)। कोयला गैसीकरण से उत्पादित 20 प्रतिशत डाइमिथाइल ईथर (डीएमई) को रसोई गैस (एलपीजी) के साथ मिलाने से एलपीजी आयात में सालाना लगभग 63 लाख टन की कमी आ सकती है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार इससे प्रति वर्ष लगभग 34,200 करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।</p>
<p>कोयला गैसीकरण की प्रक्रिया में कोयले को सिनगैस में बदला जाता है, जिसे बाद में डीएमई में बदल दिया जाता है। डीएमई एक स्वच्छ जलने वाला ईंधन है, जो आयातित एलपीजी के स्वदेशी विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है।</p>
<p>पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद से भारत को एलपीजी आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के मद्देनजर यह रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।<br />ईवाई-पार्थेनन और घरेलू कोयला गैसीकरण कंपनी न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन लिमिटेड की ‘ऊर्जा और रासायनिक सुरक्षा के लिए कोयला गैसीकरण’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, ”कोयला गैसीकरण से उत्पादित डीएमई, एलपीजी आयात को आंशिक रूप से प्रतिस्थापित कर सकता है।”</p>
<p>रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 20 प्रतिशत मिश्रण से सालाना लगभग 63 लाख टन एलपीजी आयात कम हो सकता है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) पहले ही भारत में 20 प्रतिशत तक डीएमई-एलपीजी मिश्रण की अनुमति देने वाले मानकों को अधिसूचित कर चुका है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमई स्वच्छ ईंधन के एक विकल्प के रूप में उभर रहा है। इस समय भारत में पायलट स्तर पर ही डीएमई उत्पादन किया जा रहा है।</p>
<p>न्यू एरा क्लीनटेक के प्रबंध निदेशक बालासाहेब दराडे ने कहा, ”निवेश को आकर्षित करने और घरेलू डीएमई उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट मिश्रण नीति महत्वपूर्ण होगी।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:58:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी राहत, 16 हजार टन एलपीजी लेकर मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा विशाल ‘अपोलो ओशन’ मालवाहक जहाज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मंगलुरु, 27 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध और तनावपूर्ण वैश्विक हालातों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक सुखद खबर सामने आई है।</p>
<p>कर्नाटक के न्यू मंगलुरु पोर्ट (NMP) पर कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले जहाजों का आवागमन बिना रुके जारी है। इसी कड़ी में, ‘अपोलो ओशन’ नामक एक विशाल एलपीजी कार्गो जहाज गुरुवार शाम करीब 4 बजे सुरक्षित रूप से मंगलुरु बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है।</p>
<p>यह जहाज सबसे पहले गुजरात के बंदरगाह पर रुका था, जहाँ खेप का आधा हिस्सा उतारने के बाद शेष स्टॉक लेकर यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146239/big-relief-to-indias-energy-security-amidst-west-asia-war"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-03/d24032026-02.jpg" alt=""></a><br /><p>मंगलुरु, 27 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध और तनावपूर्ण वैश्विक हालातों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक सुखद खबर सामने आई है।</p>
<p>कर्नाटक के न्यू मंगलुरु पोर्ट (NMP) पर कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले जहाजों का आवागमन बिना रुके जारी है। इसी कड़ी में, ‘अपोलो ओशन’ नामक एक विशाल एलपीजी कार्गो जहाज गुरुवार शाम करीब 4 बजे सुरक्षित रूप से मंगलुरु बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है।</p>
<p>यह जहाज सबसे पहले गुजरात के बंदरगाह पर रुका था, जहाँ खेप का आधा हिस्सा उतारने के बाद शेष स्टॉक लेकर यह कर्नाटक पहुंचा है। इस सफल आवाजाही ने युद्ध के कारण आपूर्ति ठप होने की आशंकाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है।</p>
<p>पोर्ट अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘अपोलो ओशन’ जहाज में कुल 16,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी है, जिसे उतारने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में शुरू कर दी गई है।</p>
<p>अनुमान है कि पूरी गैस को सुरक्षित रूप से डिपो तक पहुंचाने में लगभग दो दिन का समय लगेगा। बंदरगाह पर इस निरंतर सक्रियता से स्थानीय उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।</p>
<p>राहत की बात यह भी है कि आने वाले कुछ दिनों में कच्चे तेल से लदे दो और बड़े जहाजों के मंगलुरु पहुंचने की पूरी संभावना है, जिससे देश के पास ईंधन का पर्याप्त बफर स्टॉक सुनिश्चित हो सकेगा।</p>
<p>वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Hormuz Strait) के समुद्री मार्ग पर संकट के बादल मँडरा दिए हैं। दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलपीजी व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है, जिस पर ईरान की भौगोलिक स्थिति सामरिक नियंत्रण रखती है।</p>
<p>युद्ध की स्थिति में इस मार्ग के बाधित होने का सीधा असर वैश्विक कीमतों पर पड़ता है। हालांकि, भारतीय बंदरगाहों पर जहाजों का समय पर पहुंचना यह दर्शाता है कि भारत सरकार और पेट्रोलियम कंपनियां वैकल्पिक सुरक्षा उपायों और कूटनीतिक रास्तों के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में सफल रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 15:32:53 +0530</pubDate>
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