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                            <item>
                <title>सूरत : विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी के प्रस्ताव का विरोध तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत। विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव के खिलाफ सूरत की विस्कोस वीवर्स इंडस्ट्री ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।</p>
<p>विस्कोस वीवर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय और मुंबई स्थित टेक्सटाइल कमेटी के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति देकर इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए यार्न स्पिनरों की मांगों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।</p>
<p>एसोसिएशन का कहना है कि जिन स्पिनरों ने 75 डेनियर से अधिक विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की मांग की है, वे आज भी करीब 60 वर्ष पुरानी PSY तकनीक और मशीनरी के आधार पर उत्पादन कर रहे हैं।</p>
<p>एसोसिएशन के अनुसार, स्पिनरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/147195/surat-opposition-to-the-proposal-of-anti-dumping-duty-on-viscose"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-05/b18052026-10.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव के खिलाफ सूरत की विस्कोस वीवर्स इंडस्ट्री ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।</p>
<p>विस्कोस वीवर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय और मुंबई स्थित टेक्सटाइल कमेटी के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति देकर इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए यार्न स्पिनरों की मांगों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।</p>
<p>एसोसिएशन का कहना है कि जिन स्पिनरों ने 75 डेनियर से अधिक विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की मांग की है, वे आज भी करीब 60 वर्ष पुरानी PSY तकनीक और मशीनरी के आधार पर उत्पादन कर रहे हैं।</p>
<p>एसोसिएशन के अनुसार, स्पिनरों द्वारा उत्पादित करीब 40 प्रतिशत यार्न निम्न गुणवत्ता का होता है, ऐसे में पुरानी तकनीक पर आधारित उत्पादन को संरक्षण देने के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी की मांग उचित नहीं मानी जा सकती।</p>
<p>वीवर्स एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया कि स्पिनर खुद यह स्वीकार कर रहे हैं कि 75 डेनियर से कम वाले यार्न में उन्हें लाभ हो रहा है, जबकि 75 डेनियर से अधिक वाले यार्न में नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में, लाभदायक श्रेणी के यार्न का उत्पादन बढ़ाने के बजाय घाटे वाले यार्न के लिए संरक्षण मांगना कई सवाल खड़े करता है।</p>
<p>एसोसिएशन ने बताया कि वर्तमान में देश में 75 डेनियर से कम श्रेणी के केवल लगभग 6 हजार टन यार्न का उत्पादन हो रहा है, जबकि करीब 40 हजार टन यार्न का आयात किया जा रहा है। इसके बावजूद घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं।</p>
<p>एसोसिएशन ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज़ (DGTR) की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि DGTR की टीम ने बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ को साथ लिए केवल स्पिनिंग यूनिट्स का दौरा किया, जबकि वीविंग यूनिट्स, जो इस प्रस्ताव से सबसे अधिक प्रभावित होंगी, उनका निरीक्षण नहीं किया गया।</p>
<p>एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी स्थिति में एंटी-डंपिंग ड्यूटी के संबंध में तैयार की गई रिपोर्ट की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।</p>
<p>वीवर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू की गई, तो सूरत की करीब 10 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली वीविंग इंडस्ट्री पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके साथ ही लगभग 1000 MSME उद्यमियों और करीब 4.5 लाख लोगों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है।</p>
<p>एसोसिएशन का कहना है कि बीते सात वर्षों में सूरत के बुनकरों ने बैंक लोन, संपत्तियां गिरवी रखकर और ऊंचे ब्याज पर वित्त जुटाकर एयरजेट, रेपियर और रेपियर जैक्वार्ड जैसी आधुनिक मशीनरी में भारी निवेश किया है। यदि आयातित धागा महंगा हुआ, तो वीविंग उद्योग आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा।</p>
<p>एसोसिएशन ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2007 से 2017 के दौरान भी विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू थी। उस अवधि में स्पिनरों ने अच्छा मुनाफा कमाया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी 50 से 60 वर्ष पुरानी तकनीक और मशीनरी को अपग्रेड करने की दिशा में पर्याप्त निवेश नहीं किया।</p>
<p>वीवर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सूरत की वीविंग इंडस्ट्री, MSME सेक्टर और लाखों श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:21:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सूरत : नायलॉन यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी को लेकर विवाद, सूरत के बुनकरों ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत के टेक्सटाइल उद्योग में नायलॉन यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। डीजीटीआर  (Directorate General of Trade Remedies) के हालिया फैसले में चीन और वियतनाम से आयात होने वाले नायलॉन यार्न पर कंपनी के अनुसार 23.5 रुपये से 78 रुपये प्रति किलो तक ड्यूटी लगाने की सिफारिश की गई है।</p>
<p>इस फैसले पर सूरत के वीवर्स और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय हजारों बुनकरों के हितों के खिलाफ है और इसे लेकर खरीदारों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p>वीवर्स संगठनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146129/surat-controversy-over-anti-dumping-duty-on-nylon-yarn-surat-weavers"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/5224_yarn.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत के टेक्सटाइल उद्योग में नायलॉन यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। डीजीटीआर  (Directorate General of Trade Remedies) के हालिया फैसले में चीन और वियतनाम से आयात होने वाले नायलॉन यार्न पर कंपनी के अनुसार 23.5 रुपये से 78 रुपये प्रति किलो तक ड्यूटी लगाने की सिफारिश की गई है।</p>
<p>इस फैसले पर सूरत के वीवर्स और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय हजारों बुनकरों के हितों के खिलाफ है और इसे लेकर खरीदारों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p>वीवर्स संगठनों का दावा है कि स्पिनर्स (कातिनों) द्वारा डीजीटीआर में यह कहते हुए अर्जी दी गई थी कि इंपोर्टेड नायलॉन यार्न से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। इंडस्ट्री के अनुसार, कई स्पिनर्स ने पिछले साल 600 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाया है, जबकि कुछ कंपनियों का लाभ 132 प्रतिशत से भी अधिक रहा है।</p>
<p>इसके साथ ही, नायलॉन FDY और मदर यार्न की मासिक मांग में 7000 टन से अधिक की कमी बताई जा रही है। ऐसे में वीवर्स का कहना है कि जब उत्पादन पहले से ही मांग से कम है और स्पिनर्स लाभ में हैं, तो एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का औचित्य सवालों के घेरे में है।</p>
<p>इंडस्ट्री लीडर्स ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुद्दे को फाइनेंस मिनिस्ट्री और  टेक्सटाइल मिनिस्ट्री के समक्ष उठाएंगे। साथ ही, सांसद सी.आर. पाटिल को भी प्रतिनिधित्व देकर ड्यूटी लागू न करने की मांग की जाएगी।</p>
<p>वीवर्स संगठनों ने यह भी कहा कि डीजीटीआर का निर्णय अंतिम नहीं है और वित्त मंत्रालय को 90 दिनों के भीतर इस पर अंतिम फैसला लेना है। ऐसे में उद्योग से जुड़े लोगों को घबराने या जल्दबाजी में नायलॉन यार्न की खरीद करने से बचने की सलाह दी गई है।</p>
<p>उन्होंने वर्ष 2018 का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय भी डीजीटीआर ने एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने अंतिम निर्णय में वीवर्स के पक्ष में फैसला लिया था।</p>
<p>सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी के सचिव और वीवर लीडर मयूर गोलवाला, सूरत नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मयूर चेवली और वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्रभाई चाहवाला ने संयुक्त रूप से कहा कि उद्योग के हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p>इस फैसले को लेकर अब पूरे टेक्सटाइल सेक्टर की नजर केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 19:54:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सूरत : टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर 'युद्ध' की मार या मुनाफ़ाखोरी की चाल? यार्न की कीमतों में ₹55 तक का उछाल, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत । युद्ध के मौजूदा हालात की आड़ में यार्न निर्माताओं द्वारा कृत्रिम तरीके से कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते हुए सूरत के उद्योग जगत ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।</p>
<p>सचिन इंडस्ट्रीयल कॉ. ऑ. सोसायटी लिमिटेड  के सचिव मयूर जे. गोलवाला ने इस संबंध में प्रधानमंत्री, केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री, टेक्सटाइल आयुक्त मुंबई, गुजरात के मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p>पत्र में कहा गया है कि पिछले तीन सप्ताह में पॉलिएस्टर, विस्कोस और नायलॉन यार्न की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह बढ़ोतरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146034/surat-textile-industry-is-affected-by-war-or-a-ploy"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/5224_yarn.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत । युद्ध के मौजूदा हालात की आड़ में यार्न निर्माताओं द्वारा कृत्रिम तरीके से कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते हुए सूरत के उद्योग जगत ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।</p>
<p>सचिन इंडस्ट्रीयल कॉ. ऑ. सोसायटी लिमिटेड  के सचिव मयूर जे. गोलवाला ने इस संबंध में प्रधानमंत्री, केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री, टेक्सटाइल आयुक्त मुंबई, गुजरात के मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p>पत्र में कहा गया है कि पिछले तीन सप्ताह में पॉलिएस्टर, विस्कोस और नायलॉन यार्न की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह बढ़ोतरी कच्चे माल की वास्तविक लागत, उत्पादन खर्च या अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुरूप नहीं है। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि बाजार में योजनाबद्ध तरीके से कीमतों में हेरफेर कर कृत्रिम महंगाई पैदा की जा रही है।</p>
<p>उद्योग जगत के अनुसार युद्ध से पहले और बाद में यार्न की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर आया है।</p>
<p>उदाहरण के तौर पर पॉलिएस्टर FDY (50/48) SD की कीमत ₹107 से बढ़कर ₹137, पॉलिएस्टर FDY (50/47) ब्राइट ₹111 से बढ़कर ₹150 और पॉलिएस्टर मदर यार्न ₹107 से बढ़कर ₹150 तक पहुंच गई है। इसी तरह नायलॉन फिलामेंट यार्न ₹208 से बढ़कर ₹235 और नायलॉन मदर यार्न ₹215 से बढ़कर ₹270 तक पहुंच गया है। वहीं विस्कोस स्टेपल यार्न की कीमत ₹210 से बढ़कर ₹245 तक पहुंच गई है।</p>
<p>पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई निर्माता रोजाना बाजार में “सेल बंद” जैसे संदेश जारी कर रहे हैं, जिससे पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनाया जा रहा है। इससे डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल उद्योग में अनिश्चितता और दबाव का माहौल बन गया है।</p>
<p>उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि कई कंपनियां पहले से तय कम कीमत वाले यार्न सौदों का पालन नहीं कर रही हैं और ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमतों पर नया माल खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। नायलॉन मदर यार्न के मामले में स्थिति और गंभीर बताई गई है, जहां दो महीने पहले करीब ₹195 की कीमत पर हुए सौदे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं और खरीदारों को लगभग ₹270 की कीमत पर माल लेने का दबाव डाला जा रहा है।</p>
<p>इसके अलावा कुछ निर्माता पुरानी डील का केवल 50 प्रतिशत माल पुरानी कीमत पर और शेष 50 प्रतिशत बढ़ी हुई कीमत पर देने की शर्त रख रहे हैं, जिसे उद्योग जगत ने अनुचित और दबावपूर्ण बताया है।</p>
<p>पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि  'ऑल इंडिया मदर यार्न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन'  के कई सदस्यों ने 10 मार्च से पहले की सभी डील्स को “फोर्स मेज्योर” का हवाला देकर एकतरफा स्थगित कर दिया है। जबकि उद्योग जगत का दावा है कि कई स्पिनिंग यूनिट्स के पास चिप्स और अन्य कच्चे माल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।</p>
<p>उद्योग प्रतिनिधियों ने मांग की है कि  'कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया' (CCI) और एंटी-प्रॉफिटियरिंग कमेटी इस मामले की तत्काल जांच करें। साथ ही जिन निर्माताओं द्वारा सप्लाई में हेरफेर कर कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p>इसके अलावा बड़े यार्न निर्माताओं के पास मौजूद कच्चे माल और चिप्स के स्टॉक का स्वतंत्र ऑडिट कराने तथा “फोर्स मेज्योर” के आधार पर डील्स स्थगित करने की प्रक्रिया की जांच करने की भी मांग की गई है।</p>
<p>उद्योग जगत का कहना है कि देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री लाखों लूम्स, निटिंग, एम्ब्रॉयडरी और अन्य इकाइयों पर आधारित है, जिनसे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के हितों की रक्षा के लिए सरकार को जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/146034/surat-textile-industry-is-affected-by-war-or-a-ploy</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 19:50:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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