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                <title>देश की आम भाषा हो सकती है हिंदी, द्रमुक संकीर्ण राजनीति कर रही: विहिप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) तमिल भारत की ‘राष्ट्रीय भाषाओं’ में से एक है, लेकिन केवल हिंदी ही देश में समन्वय की आम भाषा के रूप में काम कर सकती है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को यह बात कही।</p>
<p>उसने तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक से कहा कि वह इस बात को अस्वीकार करके राज्य को देश की प्रगति की मुख्यधारा से अलग न करे।</p>
<p>विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की टिप्पणी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत निर्धारित स्कूली शिक्षा के लिए तीन-भाषा फॉर्मूले को लेकर चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137006/hindi-can-be-a-common-language-of-the-country--dmk-is-doing-narrow-politics--vhp"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/hindi-language-thank-you.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) तमिल भारत की ‘राष्ट्रीय भाषाओं’ में से एक है, लेकिन केवल हिंदी ही देश में समन्वय की आम भाषा के रूप में काम कर सकती है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को यह बात कही।</p>
<p>उसने तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक से कहा कि वह इस बात को अस्वीकार करके राज्य को देश की प्रगति की मुख्यधारा से अलग न करे।</p>
<p>विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की टिप्पणी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत निर्धारित स्कूली शिक्षा के लिए तीन-भाषा फॉर्मूले को लेकर चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक ने केंद्र पर नीति के कार्यान्वयन पर जोर देकर राज्य पर हिंदी थोपने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।</p>
<p>विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने संस्कृत को लेकर नियमित रूप से आपत्ति जताने के लिए भी द्रमुक की आलोचना की और कहा कि पार्टी ‘‘वोट बैंक के पीछे अंधी हो गई है’’ लेकिन वह तमिलनाडु को ‘‘हिंदी और संस्कृत से अलग करके’’ उसकी जड़ों से नहीं काट सकती।</p>
<p>केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनईपी के तमिलनाडु सरकार के विरोध को ‘राजनीतिक’ करार देते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि तीन भाषा के फॉर्मूले में छात्रों पर हिंदी नहीं थोपी जा रही और राज्य सरकार स्कूली शिक्षा पर कोई भी तीन भारतीय भाषाएं चुन सकती है।</p>
<p>प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर जैन ने तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि द्रमुक हिंदी को खारिज करके राज्य को ‘देश की प्रगति की मुख्यधारा’ से अलग करना चाहती है।</p>
<p>उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इसलिए यह एनईपी को लागू नहीं कर रही है, जबकि सभी शिक्षाविदों का मानना ​​है कि यह नई पीढ़ी सहित लोगों की प्रगति सुनिश्चित करने और उन्हें अच्छे नागरिक बनाने के लिए एक अच्छी पहल है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि तमिल भी एक ‘राष्ट्रीय भाषा’ है, लेकिन देश को एक आम भाषा की जरूरत है जिसे हर कोई बोल सके।</p>
<p>जैन ने पूछा, ‘‘क्या वे अंग्रेजी बोलेंगे?’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘अगर पूरे देश में समन्वय की कोई भाषा हो सकती है, तो वह केवल हिंदी हो सकती है। इसलिए कृपया इसे खारिज करके तमिलनाडु को राष्ट्रीय प्रगति की मुख्यधारा से अलग न करें।’’</p>
<p>विवाद के बीच, तमिल समर्थक कार्यकर्ताओं ने रविवार को राज्य के दो रेलवे स्टेशनों पर लगे बोर्ड पर हिंदी शब्दों पर कालिख पोत दी।</p>
<p>सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी प्रसारित हुआ, जिसमें कार्यकर्ताओं को हिंदी में लिखे ‘पोलाची जंक्शन’ पर कालिख पोतते देखा गया। बाद में अधिकारियों ने इसे ठीक कर दिया।</p>
<p>द्रमुक कार्यकर्ताओं ने तिरुनेलवेली जिले के पलायनकोट्टई स्टेशन के बोर्ड पर हिंदी नाम को भी काले पेंट से रंग दिया। रेलवे सुरक्षा बल ने रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के तहत छह पार्टी कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किया।</p>
<p>भाषा को लेकर द्रमुक के व्यवहार की आलोचना करते हुए विहिप पदाधिकारी ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ के दौरान संगम में पवित्र स्नान करने के लिए तमिलनाडु से बड़ी संख्या में लोग आए थे।</p>
<p>जैन ने कहा, ‘‘वे हिंदी ठीक से नहीं समझते थे, लेकिन अन्य श्रद्धालुओं के साथ तालमेल बिठाते हुए टूटी-फूटी हिंदी बोल रहे थे, क्योंकि वे दिल की भाषा समझते थे। कुंभ हिंदू एकता का प्रतीक बन गया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मंदिर हिंदू संस्कृति का जीवंत रूप हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री (एमके स्टालिन) की पत्नी भी वहां जाती हैं। उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी (हिंदी में) करुणानिधि, दयानिधि, उदयनिधि हैं।’’</p>
<p>जैन ने पूछा कि क्या स्टालिन अपनी पत्नी को मंदिरों में जाने से रोकेंगे और अपने परिवार के सदस्यों के नाम बदलेंगे ?</p>
<p>विहिप पदाधिकारी ने कहा कि द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने हाल में लोकसभा सचिवालय के उस कदम का विरोध किया था, जिसमें सदन की कार्यवाही का संस्कृत में अनुवाद करने की बात कही गई थी, जबकि तमिलनाडु में देश का सबसे पुराना संस्कृत महाविद्यालय है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 18:57:23 +0530</pubDate>
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                <title>साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए अगले साल से रचनाकार सीधे आवेदन कर सकेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 18 दिसंबर (भाषा) साहित्य अकादमी अगले साल से अपने सभी पुरस्कारों के लिए विज्ञापन जारी कर रचनाकारों से आवेदन आमंत्रित करेगी। अकादमी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>अकादमी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला, पंजाबी, राजस्थानी और संस्कृत समेत 24 भारतीय भाषाओं में साहित्य अकादमी पुरस्कार, युवा पुरस्कार, बाल साहित्य पुरस्कार तथा अनुवाद पुरस्कार प्रदान करती है।</p>
<p>अकादमी के सचिव, के. श्रीनिवास राव ने यहां पत्रकारों को बताया कि 2025 से कोई भी रचनाकार पुरस्कार के लिए सीधे आवेदन कर सकेगा और इसके बाद संबंधित भाषा की चयन समिति उनकी पुस्तकों पर गौर करेगी।</p>
<p>उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/111810/creators-will-be-able-to-apply-directly-for-sahitya-akademi-award-from-next-year"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/compromise-settlement-pen-writing-application-judgment-paper.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 18 दिसंबर (भाषा) साहित्य अकादमी अगले साल से अपने सभी पुरस्कारों के लिए विज्ञापन जारी कर रचनाकारों से आवेदन आमंत्रित करेगी। अकादमी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>अकादमी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला, पंजाबी, राजस्थानी और संस्कृत समेत 24 भारतीय भाषाओं में साहित्य अकादमी पुरस्कार, युवा पुरस्कार, बाल साहित्य पुरस्कार तथा अनुवाद पुरस्कार प्रदान करती है।</p>
<p>अकादमी के सचिव, के. श्रीनिवास राव ने यहां पत्रकारों को बताया कि 2025 से कोई भी रचनाकार पुरस्कार के लिए सीधे आवेदन कर सकेगा और इसके बाद संबंधित भाषा की चयन समिति उनकी पुस्तकों पर गौर करेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, “ इतना ही नहीं, रचनाकार की ओर से प्रकाशक या उनका कोई शुभचिंतक भी आवेदन कर सकेगा। इसके लिए अकादमी अखबारों और सोशल मीडिया पर विज्ञापन जारी करेगी जिसके अनुसार वे पुरस्कार के लिए अकादमी में आवेदन कर पाएंगे।”</p>
<p>राव ने बताया कि युवा और बाल साहित्य पुरस्कारों के लिए तो विज्ञापन जारी किए जा चुके हैं।</p>
<p>राव ने एक सवाल के जवाब में कहा, “पहले अलग-अलग भाषाओं के दो विशेषज्ञ किताबों की सूची बनाते थे। विशेषज्ञ पिछले पांच साल में प्रकाशित उत्कृष्ट कृतियों की सूची बनाते थे तो हो सकता है, एकाध किताब उनसे छूट जाए तथा लेखक भी पूछते थे कि वे अकादमी को पुरस्कार के लिए कैसे संपर्क करें।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसलिए उस प्रावधान को अब खत्म कर दिया गया है जिसके तहत पुरस्कार के लिए सीधे आवेदन नहीं किया जा सकता था।</p>
<p>राव के मुताबिक, यह प्रक्रिया सभी तरह के पुरस्कारों के लिए बदली गई है।</p>
<p>सचिव ने बताया कि 2025 के पुरस्कार के लिए 2019 से लेकर 2023 के बीच प्रकाशित किताब के लेखक पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p>साहित्य अकादमी की वेबसाइट के मुताबिक, अकादमी की स्थापना भारत सरकार ने 1954 में की थी। भारत की प्रमुख साहित्यिक संस्था के रूप में अकादमी पुरस्कार, फेलोशिप, अनुदान, प्रकाशन, साहित्यक कार्यक्रम, कार्यशाला, एवं प्रदर्शनी के माध्यम से स्वयं द्वारा मान्यता प्रदत्त 24 भारतीय भाषाओं में साहित्य को संरक्षण एवं प्रोत्साहन प्रदान करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 19:35:12 +0530</pubDate>
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                <title>हिंदी में गगन गिल को मिलेगा 2024 का साहित्य अकादमी पुरस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 18 दिसंबर (भाषा) हिंदी भाषा में ‘मैं जब तक आयी बाहर’ के लिए प्रसिद्ध कवयित्री गगन गिल और अंग्रेजी में ‘स्पिरिट नाइट्स’ के लिए ईस्टरिन किरे समेत 21 भारतीय भाषाओं के रचनाकारों को वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा बुधवार को की गई।</p>
<p>अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गिल को उनके कविता संग्रह ‘मैं जब तक आयी बाहर’ के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में किरे को उनके उपन्यास ‘स्पिरिट नाइट्स’ के लिए तथा मराठी में सुधीर रसाल को उनकी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/111742/gagan-gill-will-receive-the-2024-sahitya-akademi-award-in-hindi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k18122024-06.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 18 दिसंबर (भाषा) हिंदी भाषा में ‘मैं जब तक आयी बाहर’ के लिए प्रसिद्ध कवयित्री गगन गिल और अंग्रेजी में ‘स्पिरिट नाइट्स’ के लिए ईस्टरिन किरे समेत 21 भारतीय भाषाओं के रचनाकारों को वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा बुधवार को की गई।</p>
<p>अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गिल को उनके कविता संग्रह ‘मैं जब तक आयी बाहर’ के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में किरे को उनके उपन्यास ‘स्पिरिट नाइट्स’ के लिए तथा मराठी में सुधीर रसाल को उनकी आलोचना ‘विंदांचे गुद्यरूप’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।</p>
<p>राव के मुताबिक, इनके अलावा संस्कृत में दीपक कुमार शर्मा (कविता संग्रह), राजस्थानी में मुकुट मणिराज (कविता संग्रह), पंजाबी में पॉल कौर (कविता संग्रह), कश्मीरी में सोहन कौल (उपन्यास) और गुजराती में दिलीप झावेरी (कविता संग्रह) को पुरस्कृत किया जाएगा।</p>
<p>सचिव ने बताया कि मैथिली में महेन्द्र मलंगिया (निबंध), मणिपुरी में हाओबम सत्यबती देवी (कविता संग्रह), असमिया में समीर तांती (कविता संग्रह), बोडो में अरन राजा (कविता संग्रह), नेपाली में युवा बराल (कहानी), ओडिया में बैष्णब चरण सामल (निबंध), कोंकणी में मुकेश थली (निबंध), संथाली में महेश्वर सोरेन (नाटक), सिंधी में हूंदराज बलवाणी (कहानी), तमिल में ए. आर. वेंकटचलपति (शोध), कन्नड़ में केवी नारायण (आलोचना), मलयालम में के. जयकुमार (कविता संग्रह) और तेलुगु में पेगुगोंडा लक्ष्मीनारायण (साहित्यिक आलोचना) को प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि अकादमी ने फिलहाल 21 भाषाओं के लिए पुरस्कारों का ऐलान किया है जिनमें आठ कविता संग्रह, तीन उपन्यास, दो कहानी संग्रह, तीन निबंध, तीन साहित्यिक आलोचना, एक नाटक और एक शोध की पुस्तक शामिल हैं।</p>
<p>राव ने बताया कि इन पुरस्कारों की अनुशंसा इन भारतीय भाषाओं की निर्णायक समितियों द्वारा की गई तथा साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक की अध्यक्षता में आयोजित अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में आज इन्हें अनुमोदित किया गया।</p>
<p>सचिव ने बताया कि ये पुरस्कार पिछले पांच वर्षों (एक जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2022) के दौरान प्रकाशित पुस्तकों पर दिए गए हैं।</p>
<p>सचिव के मुताबिक, बांग्ला, डोगरी और उर्दू भाषाओं में पुरस्कारों का ऐलान बाद में किया जाएगा। अकादमी हर साल 24 भाषाओं के रचनाकारों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित करती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विजेता रचनाकारों को अगले साल आठ मार्च को आयोजित एक समारोह में पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा जिसमें एक लाख रुपये की राशि, एक उत्कीर्ण ताम्रफलक और शॉल शामिल है।</p>
<p>इस बीच अकादमी ने एक बयान में बताया, “साहित्य अकादमी ने आज प्रतिष्ठित पंजाबी लेखिका अजीत कौर को अपने सर्वोच्च सम्मान महत्तर सदस्यता से सम्मानित किया।”</p>
<p>बयान के मुताबिक, कौर प्रख्यात पंजाबी कथा लेखिका, पत्रकार, अर्थशास्त्री, सांस्कृतिक प्रचारक, सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। 16 नवंबर 1934 में लाहौर में जन्मीं कौर विभाजन के बाद दिल्ली आ गई और यहीं उनकी पढ़ाई लिखाई हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 16:10:54 +0530</pubDate>
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                <title>भारत के विकास में हिंदी ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका : ओम बिरला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इटावा (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कहा कि हिंदी भारत की आत्मा व पहचान है तथा अन्य भाषाओं के साथ-साथ इस भाषा ने समाज तथा राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p>बिरला ने इटावा हिंदी सेवा निधि के 30वें वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी ने देश की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोया है और उसे सशक्त बनाया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हिंदी न केवल संचार की आम भाषा है बल्कि बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुसार भी इसने खुद को ढाला है।</p>
<p>बिरला ने कहा, “आज कृत्रिम मेधा (एआई) के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110749/hindi-played-an-important-role-in-india-s-development--om-birla"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/hindi-language-thank-you.jpg" alt=""></a><br /><p>इटावा (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कहा कि हिंदी भारत की आत्मा व पहचान है तथा अन्य भाषाओं के साथ-साथ इस भाषा ने समाज तथा राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p>बिरला ने इटावा हिंदी सेवा निधि के 30वें वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी ने देश की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोया है और उसे सशक्त बनाया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हिंदी न केवल संचार की आम भाषा है बल्कि बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुसार भी इसने खुद को ढाला है।</p>
<p>बिरला ने कहा, “आज कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग से हिंदी साहित्य और कविता की समृद्ध विरासत दुनिया भर में उपलब्ध है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि न्याय, प्रशासन और इंटरनेट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी हिंदी का उपयोग बढ़ रहा है।</p>
<p>बिरला ने कहा कि भारत के संविधान के निर्माण के दौरान विभिन्न राज्यों के दूरदर्शी नेताओं ने अलग-अलग भाषाएं और बोलियों के महत्व को एकता के प्रतीक के रूप में पहचाना और पूरे देश को एकजुट करने की हिंदी की अंतर्निहित क्षमता को स्वीकार किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत में 22 भाषाएं हैं, जिससे सदस्यों के लिए अपनी-अपनी भाषाओं में बात करना स्वाभाविक है।</p>
<p>बिरला ने कहा कि संसद एआई जैसी आधुनिक तकनीक के साथ अनुवाद, व्याख्या और प्रतिलेखन जैसी सुविधाओं के उपयोग की व्यवहार्यता तलाश रही है।</p>
<p></p><div class="pbwidget wid6a13ab12c7b94 htmlwidget"><div class="pbwidget-body">(अस्वीकरण: उपरोक्त समाचार/लेख समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा की ऑटो जनरेटेड  सिंडिकेटेड फीड से प्राप्त हुई है और लोकतेज टीम द्वारा संपादित नहीं की गई है। लोकतेज इस सामग्री के लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।)</div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 10:39:05 +0530</pubDate>
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