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                <title>Crude Oil - Loktej</title>
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                <description>Crude Oil RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूएई के हटने के बाद ओपेक प्लस का बड़ा फैसला: जून से कच्चे तेल के उत्पादन में होगी 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वियना/दुबई, 04 मई (वेब वार्ता)। ग्लोबल ऑयल मार्केट में जारी उथल-पुथल के बीच रविवार को तेल उत्पादक देशों के समूह ‘ओपेक प्लस’ (ओपीईसी+) ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक क्रांतिकारी फैसला लिया है।</p>
<p>संगठन ने घोषणा की है कि जून महीने से सदस्य देश संयुक्त रूप से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) अतिरिक्त तेल का उत्पादन करेंगे। यह निर्णय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा संगठन से बाहर होने के आधिकारिक ऐलान के ठीक बाद आया है।</p>
<p>यूएई के जाने के बाद सऊदी अरब, रूस, इराक और कुवैत सहित सात प्रमुख देशों ने बाजार में तेल की किल्लत को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146937/big-decision-of-opec-plus-after-uaes-withdrawal-crude-oil"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>वियना/दुबई, 04 मई (वेब वार्ता)। ग्लोबल ऑयल मार्केट में जारी उथल-पुथल के बीच रविवार को तेल उत्पादक देशों के समूह ‘ओपेक प्लस’ (ओपीईसी+) ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक क्रांतिकारी फैसला लिया है।</p>
<p>संगठन ने घोषणा की है कि जून महीने से सदस्य देश संयुक्त रूप से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) अतिरिक्त तेल का उत्पादन करेंगे। यह निर्णय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा संगठन से बाहर होने के आधिकारिक ऐलान के ठीक बाद आया है।</p>
<p>यूएई के जाने के बाद सऊदी अरब, रूस, इराक और कुवैत सहित सात प्रमुख देशों ने बाजार में तेल की किल्लत को रोकने और कीमतों पर लगाम लगाने की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, ओपेक प्लस का यह कदम केवल आपूर्ति बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ और स्थिरता का प्रदर्शन करना भी है।</p>
<p>यह फैसला ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में लिया गया है जब ईरान द्वारा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर की गई नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।</p>
<p>28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद से ही तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि का डर बना हुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि इस अतिरिक्त उत्पादन के जरिए समूह दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि संगठन आज भी तेल बाजार की दिशा तय करने में सक्षम है।</p>
<p>ओपेक प्लस के इस फैसले से भारत जैसे बड़े आयातक देशों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अधिक उपलब्धता कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगी।</p>
<p>यदि उत्पादन सुचारू रूप से बढ़ता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक शुभ संकेत है, जिससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत में स्थिरता बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 18:30:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में उछाल, ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के ऊपर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 23 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमत में तेजी का रुख बना हुआ है।</p>
<p>ब्रेंट क्रूड आज 105.86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक उछल गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज सौ डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के पार पहुंच गया। हालांकि बाद में कच्चे तेल की कीमत में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता टल जाने और होर्मुज स्ट्रेट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146759/rise-in-the-price-of-crude-oil-in-the-international"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 23 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमत में तेजी का रुख बना हुआ है।</p>
<p>ब्रेंट क्रूड आज 105.86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक उछल गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज सौ डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के पार पहुंच गया। हालांकि बाद में कच्चे तेल की कीमत में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता टल जाने और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के मसले पर दोनों देशों के आमने सामने आ जाने की वजह से इस प्रमुख समुद्री रास्ते के जरिये होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई लगभग ठप पड़ी हुई है और निकट भविष्य में इसके शुरू होने की संभावना भी नजर नहीं आ रही है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमत में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है।</p>
<p>आज ब्रेंट क्रूड ने तेजी दिखाते हुए 100 डॉलर के ऊपर 101.66 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। थोड़ी देर में ही यह उछल कर 105.86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।</p>
<p>भारतीय समय के अनुसार सुबह 9:15 बजे तक का कारोबार होने के बाद ब्रेंट क्रूड 1.80 प्रतिशत की तेजी के साथ 103.76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।</p>
<p>इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड में आज 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 92.69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। थोड़ी देर में ही यह उछल कर 97.22 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।</p>
<p>हालांकि बाद में इसके भाव में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। भारतीय समय के अनुसार 9:15 बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.13 प्रतिशत की उछाल के साथ 94.97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।</p>
<p>आपको बता दें कि फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में शुरू हुई इस जंग ने दुनिया के पेट्रोलियम बेस्ड एनर्जी मार्केट को हिला कर रख दिया है। इस जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट के लगभग बंद हो जाने से फारस की खाड़ी से होने वाली ऑयल और गैस की सप्लाई में जबरदस्त गिरावट आई है।</p>
<p>अमेरीका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए यहां नाकेबंदी कर रखी है। दूसरी ओर, ईरान अपनी ओर से होर्मुज को इंटरनेशनल ट्रैफिक के लिए बंद रखने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसी कोशिश में बुधवार को ईरानी गनबोट्स ने ओमान के पास मालवाहक जहाजों पर फायरिंग भी की।</p>
<p>जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल शांति वार्ता होने की संभावना नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान जरूर किया है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी जारी रखने की बात कह कर तनाव को और बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, ईरान भी लगातार अमेरिका को सख्त जवाब देने की बात कह रहा है।</p>
<p>ओमान के पास मालवाहक जहाजों पर फायरिंग कर उसने ये भी जता दिया है कि वो अमेरिकी धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है। ऐसे में इन दोनों देशों के हठी रवैये से लगने लगा है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से मालवाहक जहाजों और ऑयल टैंकर्स का आना-जाना तत्काल संभव नहीं हो सकेगा।</p>
<p>ऐसी स्थिति में दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई में परेशानी जारी रहेगी, जिसका परिणाम कच्चे तेल की कीमत में तेजी के रूप में देखा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:49:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में युद्धविराम की आहट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 17 अप्रैल (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी राहत दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>पश्चिम एशिया में जारी लंबे संघर्ष के थमने की खबरों के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर 97.99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।</p>
<p>वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 92.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।</p>
<p>भारतीय बाजार में भी इसका सीधा असर दिखा, जहाँ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146644/heavy-fall-in-crude-oil-prices-in-international-market-due"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 17 अप्रैल (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी राहत दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>पश्चिम एशिया में जारी लंबे संघर्ष के थमने की खबरों के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर 97.99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।</p>
<p>वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 92.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।</p>
<p>भारतीय बाजार में भी इसका सीधा असर दिखा, जहाँ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चा तेल 2.6 प्रतिशत लुढ़ककर 8,625 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।</p>
<p>तेल की कीमतों में आई इस नरमी का मुख्य श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिवसीय युद्धविराम की घोषणा को दिया जा रहा है। शांति वार्ताओं में प्रगति और ईरान के साथ एक बड़े परमाणु समझौते की संभावनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताएं कम कर दी हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिए हैं कि हिंसा समाप्त करने का समय आ गया है और तेहरान के साथ सकारात्मक संवाद जारी है।</p>
<p>इस कूटनीतिक सफलता ने बाजार में सकारात्मक उत्साह भर दिया है, जिससे पिछले सत्र की 5 प्रतिशत की उछाल के बाद अब कीमतों में स्थिरता आने लगी है।</p>
<p>कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे प्रमुख आयातक देशों के लिए संजीवनी के समान है, क्योंकि इससे देश के आयात बिल और राजकोषीय दबाव में कमी आएगी।</p>
<p>हालांकि, वैश्विक शेयर बाजारों में फिलहाल मिला-जुला रुख बना हुआ है; जहाँ भारतीय सेंसेक्स और निफ्टी सपाट खुले, वहीं अमेरिकी वॉल स्ट्रीट के इंडेक्स मामूली बढ़त पर रहे।</p>
<p>बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति वार्ता स्थाई समझौते की ओर बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और सुधार होगा, जिससे परिवहन लागत कम होगी और घरेलू स्तर पर महंगाई से जूझ रही जनता को बड़ी राहत मिल सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:05:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजफायर की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, 7 प्रतिशत तक फिसला ब्रेंट क्रूड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 25 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में युद्धविराम (सीजफायर) की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को बड़ी गिरावट देखी गई।</p>
<p>सुबह के कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा में 7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 97.18 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल में 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और यह 86.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है। इससे महंगाई और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146204/big-fall-in-crude-oil-prices-due-to-expectations-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 25 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में युद्धविराम (सीजफायर) की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को बड़ी गिरावट देखी गई।</p>
<p>सुबह के कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा में 7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 97.18 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल में 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और यह 86.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है। इससे महंगाई और चालू खाता घाटा (सीएडी) पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, तकनीकी संकेत बताते हैं कि अभी कीमतें अहम स्तरों के आसपास हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले हफ्ते भी कमोडिटी बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। ब्रेंट क्रूड, जो हाल ही में 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था, अब 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर करीब 91 डॉलर पर आ गया है। इससे भारत के तेल आयात बिल, सीएडी और रुपए पर तत्काल दबाव कम हुआ है।</p>
<p>विशेषज्ञों ने बताया कि भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल का बदलाव जीडीपी के मुकाबले सीएडी को 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक प्रभावित करता है और महंगाई (सीपीआई) को 20-30 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकता है।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी कच्चा तेल फिलहाल 85 से 87 डॉलर के अहम स्तर के आसपास बना हुआ है। अगर कीमतें 92-94 डॉलर के ऊपर जाती हैं तो फिर तेजी लौट सकती है और दाम 98-100 डॉलर तक पहुंच सकते हैं। वहीं, अगर 85 डॉलर से नीचे गिरावट आती है तो कीमतें 81-82 डॉलर तक जा सकती हैं।</p>
<p>कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अहम सपोर्ट लेवल बने रहते हैं, तब तक गिरावट में खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक और आर्थिक कारणों से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।</p>
<p>तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से रुपए और महंगाई को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन जोखिम अभी भी बना हुआ है। यदि तेल की कीमतें फिर से बढ़ती हैं या विदेशी निवेश में कमी आती है तो रुपए पर दबाव फिर बढ़ सकता है।</p>
<p>इस बीच, अमेरिका के शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। एसएंडपी 500 और नैस्डैक क्रमशः 0.84 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।</p>
<p>इसके विपरीत, एशियाई बाजारों में भारी तेजी देखी गई। जापान का निक्केई 225 3.26 प्रतिशत उछला, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.36 प्रतिशत बढ़ा और हांगकांग का हैंग सेंग 1.30 प्रतिशत चढ़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 15:34:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज में भारत ने तेल सप्लाई की सुरक्षा के लिए बढ़ाया नौसैनिक पहरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 20 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समुद्री मोर्चे पर सतर्कता बढ़ा दी है।</p>
<p>रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प के तहत अपने युद्धपोतों और विशेष बल मार्कोस कमांडो की तैनाती कर दी है।</p>
<p>यह कदम उन तेल टैंकरों और व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जो भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति लेकर इसी मार्ग से गुजरते हैं। नौसेना के युद्धपोत क्षेत्र में लगातार गश्त कर रहे हैं और भारतीय ध्वज वाले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146123/india-increased-naval-patrol-in-hormuz-to-protect-oil-supply"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/import-export-port-harbour-ship-transport-truck.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 20 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समुद्री मोर्चे पर सतर्कता बढ़ा दी है।</p>
<p>रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प के तहत अपने युद्धपोतों और विशेष बल मार्कोस कमांडो की तैनाती कर दी है।</p>
<p>यह कदम उन तेल टैंकरों और व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जो भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति लेकर इसी मार्ग से गुजरते हैं। नौसेना के युद्धपोत क्षेत्र में लगातार गश्त कर रहे हैं और भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान कर रहे हैं।</p>
<p>कूटनीतिक स्तर पर भी भारत सक्रिय है। ईरान के साथ संवाद के जरिए भारतीय जहाजों के निर्बाध आवागमन का रास्ता सुनिश्चित किया गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए जीवनरेखा जैसा है, जहां से देश के लगभग 45 प्रतिशत कच्चे तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति होती है।</p>
<p>ऐसे में किसी भी तरह की बाधा से बचने के लिए भारत ने समुद्र और कूटनीति—दोनों मोर्चों पर संतुलित रणनीति अपनाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 15:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, $119 से फिसलकर $92 पर पहुंचा क्रूड ऑयल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 मार्च (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पिछले 24 घंटों के भीतर नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है। सोमवार को $119.50 प्रति बैरल के डरावने स्तर पर पहुँचने वाला कच्चा तेल मंगलवार सुबह धड़ाम होकर $92 के करीब आ गया।</p>
<p>कीमतों में आई करीब 6.6% की इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के जल्द समाप्त होने के संकेत दिए हैं।</p>
<p>साथ ही, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ट्रम्प के बीच हुई फोन वार्ता ने निवेशकों के बीच शांति की उम्मीद जगाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145945/heavy-fall-in-the-prices-of-crude-oil-in-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 10 मार्च (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पिछले 24 घंटों के भीतर नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है। सोमवार को $119.50 प्रति बैरल के डरावने स्तर पर पहुँचने वाला कच्चा तेल मंगलवार सुबह धड़ाम होकर $92 के करीब आ गया।</p>
<p>कीमतों में आई करीब 6.6% की इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के जल्द समाप्त होने के संकेत दिए हैं।</p>
<p>साथ ही, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ट्रम्प के बीच हुई फोन वार्ता ने निवेशकों के बीच शांति की उम्मीद जगाई है, जिससे ऊंचे दामों पर बिकवाली का दौर शुरू हो गया।</p>
<p>एक ओर जहाँ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने तेल निर्यात ठप करने की धमकी दी है, वहीं बाजार ने इसे दरकिनार कर दिया है। इसकी वजह अमेरिका और G-7 देशों की वह रणनीति है, जिसके तहत वे अपने ‘इमरजेंसी ऑयल रिजर्व’ से लाखों बैरल तेल बाजार में छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>ट्रम्प प्रशासन रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर भी विचार कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की कमी न हो। हालांकि, इराक और सऊदी अरब द्वारा उत्पादन में कटौती की आशंका अभी भी बनी हुई है, जिससे विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें $75 से $105 के बीच अस्थिर रह सकती हैं।</p>
<p>भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल का $90 के करीब आना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है। यदि कीमतें इसी स्तर पर स्थिर रहती हैं, तो घरेलू तेल कंपनियां (IOCL, HPCL, BPCL) पेट्रोल और डीजल के दाम में 2 से 5 रुपये तक की कटौती कर सकती हैं।</p>
<p>इससे न केवल आम जनता की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि परिवहन लागत घटने से महंगाई पर भी लगाम लगेगी। हालांकि, अंतिम फैसला खाड़ी देशों की जमीनी स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के अगले रुख पर निर्भर करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 14:56:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक तेल बाजार स्थिर करने के लिए भारत से की तेल खरीद की बात: अमेरिकी ऊर्जा मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वॉशिंगटन, 09 मार्च (वेब वार्ता)। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत से उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने को कहा, जो अभी चीन के रिफ़ाइनरियों पर अनलोड होने के लिए इंतजार कर रहे थे।</p>
<p>राइट ने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व में तेल बाजारों में उठते डर को कम करने के लिए सीधे भारत से संपर्क किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि “मैंने भारतीयों को कॉल किया, जैसा कि अमेरिकी वित्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145926/us-energy-minister-talks-about-purchasing-oil-from-india-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन, 09 मार्च (वेब वार्ता)। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत से उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने को कहा, जो अभी चीन के रिफ़ाइनरियों पर अनलोड होने के लिए इंतजार कर रहे थे।</p>
<p>राइट ने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व में तेल बाजारों में उठते डर को कम करने के लिए सीधे भारत से संपर्क किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि “मैंने भारतीयों को कॉल किया, जैसा कि अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट ब्रेसेंट ने भी किया, और कहा कि देखिए, बहुत सारा तेल है जो चीन के रिफ़ाइनरियों में अनलोड होने के लिए तैर रहा है।’’</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, “छह हफ्ते इंतजार करने के बजाय, उस तेल को जल्दी आगे ले आते हैं, इसे भारत के रिफाइनरियों पर उतारते हैं और तेल की कमी के डर और कीमतों में उछाल जैसी चिंताओं को कम करते हैं।”</p>
<p>अमेरिका के ऊर्जा सचिव ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य जल्दी से अतिरिक्त क्रूड तेल को वैश्विक बाजारों में लाना और ईरान के साथ चल रही जंग के कारण तेल कीमतों में और वृद्धि को रोकना है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यह एक व्यावहारिक और अल्पकालिक प्रयास है और इससे अमेरिका की रूस के प्रति नीतियों में बदलाव नहीं आया है।<br />राइट ने यह भी कहा कि अमेरिका की रूस के प्रति नीति अब भी वही बनी हुई है, हालांकि भारत को अस्थायी छूट दी गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही अपने ऊर्जा स्रोतों को रूस के क्रूड से दूर करने की दिशा में कदम उठाए हैं और अमेरिका सहित अन्य देशों से अपने तेल आयात बढ़ाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 15:53:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान संघर्ष के बीच भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों का रुख किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 08 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंका के बीच भारतीय खुदरा ईंधन कंपनियों ने अमेरिका, रूस और पश्चिम अफ्रीका से अतिरिक्त कच्चे तेल के लिए बातचीत शुरू कर दी है। उद्योग अधिकारियों और विश्लेषकों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में परिशोधित करने वाली रिफाइनरियों ने फिलहाल अपनी प्रस्तावित मरम्मत बंदी को टाल दिया है और सामान्य परिचालन दर बनाए रखी है ताकि देश की तात्कालिक जरूरतों के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक बना रहे।</p>
<p>भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145912/amid-iran-conflict-india-turns-to-alternative-sources-for-crude"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 08 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंका के बीच भारतीय खुदरा ईंधन कंपनियों ने अमेरिका, रूस और पश्चिम अफ्रीका से अतिरिक्त कच्चे तेल के लिए बातचीत शुरू कर दी है। उद्योग अधिकारियों और विश्लेषकों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में परिशोधित करने वाली रिफाइनरियों ने फिलहाल अपनी प्रस्तावित मरम्मत बंदी को टाल दिया है और सामान्य परिचालन दर बनाए रखी है ताकि देश की तात्कालिक जरूरतों के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक बना रहे।</p>
<p>भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। फरवरी में इस आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से होकर आया था, जो ईरान और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।</p>
<p>ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस रणनीतिक मार्ग से टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।</p>
<p>पेट्रोलियम मंत्रालय के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया, ‘हम उन क्षेत्रों से अधिक आपूर्ति ले रहे हैं जो संघर्ष क्षेत्र से बाहर हैं। वर्ष 2025 में गैर-होर्मुज स्रोतों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई है।’</p>
<p>भारतीय रिफाइनरियां अब पश्चिम अफ्रीका, लातिन अमेरिका और अमेरिका से तेल ले रही हैं। साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी (वित्त) विभाग द्वारा रूसी तेल की बिक्री और वितरण के लिए दी गई 30 दिनों की छूट ने एक नया रास्ता खोल दिया है।</p>
<p>इस छूट के तहत पांच मार्च तक जहाजों पर लदे रूसी तेल को पांच अप्रैल तक बिना प्रतिबंधों के भारत पहुंचने की अनुमति दी गयी है।</p>
<p>रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड जैसी कंपनियों ने रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है। मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि भारत की स्थिति मजबूत है और वर्तमान भंडार देश की 50 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत के पास वर्तमान में लगभग 14.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल भंडारण में है और महत्वपूर्ण बात यह है कि तेल की इस आपूर्ति की निरंतर भरपाई की जा रही है।</p>
<p>मंत्रालय के आंकड़ों अनुसार, देश के पास इसके अलावा सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) और सरकारी तेल कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक को मिलाकर कुल क्षमता लगभग 74 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर है।</p>
<p>हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित होने के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अधिक माल भाड़े और बीमा प्रीमियम के कारण आयात बिल बढ़ सकता है।</p>
<p>28 फरवरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतें भी दोगुनी से अधिक बढ़कर 24-25 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गई हैं।</p>
<p>भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और अपनी कुल जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बाधित होने से देश की आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव पड़ा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/145912/amid-iran-conflict-india-turns-to-alternative-sources-for-crude</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:16:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान संकट के बीच भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 03 मार्च (वेब वार्ता)। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के मामले में भारत फिलहाल काफी हद तक सुरक्षित स्थिति में है।</p>
<p>देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है। इसमें वह मात्रा भी शामिल है जो जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रही है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत आपूर्ति मध्य-पूर्वी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए होती है। ईरान युद्ध के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145856/india-has-sufficient-reserves-of-crude-oil-and-petroleum-products"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 03 मार्च (वेब वार्ता)। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के मामले में भारत फिलहाल काफी हद तक सुरक्षित स्थिति में है।</p>
<p>देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है। इसमें वह मात्रा भी शामिल है जो जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रही है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत आपूर्ति मध्य-पूर्वी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए होती है। ईरान युद्ध के बाद इस मार्ग से तेल प्रवाह प्रभावित हुआ है।</p>
<p>हालांकि, भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। अफ्रीका, रूस और अमेरिका से आयात बढ़ाया गया है और रणनीतिक भंडार बनाकर आपूर्ति को सुरक्षित किया गया है।</p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि देश की तेल विपणन कंपनियों (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के पास कई हफ्तों का स्टॉक है और उन्हें अलग-अलग मार्गों से लगातार आपूर्ति मिल रही है।</p>
<p>इसके अलावा, सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि बफर स्टॉक और मजबूत हो सके।</p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी देशों के बाहर से भी बड़े पैमाने पर तेल आयात शुरू किया है, जिससे अब काफी मात्रा में आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नहीं आती।</p>
<p>भारत के पास पुडुर में 2.25 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की भंडारण क्षमता है। विशाखापट्टनम में 1.33 एमएमटी और मैंगलुरु में 1.5 एमएमटी कच्चे तेल को स्टोर करने की क्षमता है। इसके अलावा समुद्री तट पर चांदीखोल में एक और रणनीतिक भंडार सुविधा बनाई जा रही है।</p>
<p>आपात स्थिति में देश इन रणनीतिक तेल भंडारों का उपयोग कर सकता है। वैश्विक कीमतों में तेज उछाल आने पर भी इन भंडारों से तेल निकालकर राष्ट्रीय तेल कंपनियों को राहत दी जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, तत्काल प्रभाव कीमतों पर दिखाई देगा। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है, जो ईरान संकट के बाद लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल बढ़ता है और महंगाई दर में इजाफा होता है, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच, यानी चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में, 206.3 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च किए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 21:04:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूसी तेल को लेकर ट्रंप के दावे पर क्रेमलिन प्रवक्ता बोले- ‘कुछ भी नया नहीं है, भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए आजाद है’</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मॉस्को, 05 फरवरी (वेब वार्ता)। हाल ही में भारत और रूस के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालांकि, रूस ने इस दावे को खारिज कर दिया है। रूस ने कहा कि भारत किसी भी सप्लायर से क्रूड खरीदने के लिए आजाद है और एनर्जी सोर्सिंग पर उसके फैसलों में कुछ भी अजीब नहीं है।<br />क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि भारत पहले से कई देशों से तेल खरीदता रहा है और रूस उसका अकेला क्रूड सप्लायर नहीं है। उन्होंने इस बात को खारिज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145423/on-trumps-claim-regarding-russian-oil-kremlin-spokesperson-said"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को, 05 फरवरी (वेब वार्ता)। हाल ही में भारत और रूस के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालांकि, रूस ने इस दावे को खारिज कर दिया है। रूस ने कहा कि भारत किसी भी सप्लायर से क्रूड खरीदने के लिए आजाद है और एनर्जी सोर्सिंग पर उसके फैसलों में कुछ भी अजीब नहीं है।<br />क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि भारत पहले से कई देशों से तेल खरीदता रहा है और रूस उसका अकेला क्रूड सप्लायर नहीं है। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा किया है।<br />पेसकोव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “हम, बाकी सभी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों के साथ, अच्छी तरह जानते हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का अकेला सप्लायर नहीं है। भारत ने हमेशा ये प्रोडक्ट्स दूसरे देशों से खरीदे हैं। इसलिए, हमें यहां कुछ भी नया नहीं दिख रहा है।”<br />पेसकोव ने यह भी बताया कि रूस को भारत से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है जिससे पता चले कि वह रूसी तेल खरीदना बंद करने की योजना बना रहा है। बता दें, भारत का रूस से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद होने को लेकर चर्चा ट्रंप के बयान के बाद शुरू हुई है। ट्रंप ने समझौते को लेकर यह भी दावा किया कि भारत एक बड़े व्यापार समझौते के तहत भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ में कमी के बदले में रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है। इससे ड्यूटी घटकर 18 फीसदी हो जाएगी।<br />रूस के विदेश मंत्रालय ने भारत के साथ हाइड्रोकार्बन व्यापार के आपसी फायदों पर जोर देते हुए कहा कि तेल सप्लाई में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और इससे अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट में स्थिरता आती है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि रूस भारत के साथ करीबी ऊर्जा सहयोग जारी रखने के लिए तैयार है। भारतीय रिफाइनर क्रूड ग्रेड और ब्लेंडिंग जरूरतों में अंतर के कारण रूसी क्रूड का आयात बंद नहीं कर सकते हैं, और अमेरिका ऑयल जैसे दूसरे संसाधनों के रूसी सोर्स से सप्लाई किए गए वॉल्यूम को तुरंत कवर नहीं कर सकते हैं।<br />बता दें, रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, जिसके बाद 2022 में पश्चिमी देशों ने उसके ऊपर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद ही भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक रहा है और 2025 में भारत के कुल क्रूड आयात में रूसी क्रूड का हिस्सा लगभग एक-तिहाई था। हालांकि, ग्लोबल एनर्जी मार्केट और ट्रेड बातचीत में बदलाव के बीच हाल के महीनों में रूस से भारतीय आयात में कमी आई है।<br />पेसकोव ने दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति एक स्वतंत्र फैसला है और भारत के साथ रूस की रणनीतिक साझेदारी जरूरी बनी हुई है, जिससे पता चलता है कि तेल खरीदने में कोई भी बदलाव बाहरी दबाव के बजाय भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कमर्शियल बातों से निर्देशित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 14:54:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस से तेल खरीद रोकने, अमेरिका से आयात में भारी वृद्धि के लिए तैयार हुआ भारत: ट्रम्प</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाशिंगटन, 03 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से साथ टेलीफोन वार्ता के बाद कहा कि भारत अमेरिका से आयात में भारी वृद्धि करने, अमेरिकी सामानों पर आयात शुल्क शून्य करने तथा रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमत होगया है, और बदले में अमेरिका भारतीय उत्पादों पर तत्काल प्रभाव सेआयात शुल्क घटाकर 18प्रतिशत कर देगा।</p>
<p>ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए मोदी को अपनासबसे अच्छा मित्र बताते हुए लिखा कि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका, तथा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145383/india-ready-to-stop-buying-oil-from-russia-trump-ready"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन, 03 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से साथ टेलीफोन वार्ता के बाद कहा कि भारत अमेरिका से आयात में भारी वृद्धि करने, अमेरिकी सामानों पर आयात शुल्क शून्य करने तथा रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमत होगया है, और बदले में अमेरिका भारतीय उत्पादों पर तत्काल प्रभाव सेआयात शुल्क घटाकर 18प्रतिशत कर देगा।</p>
<p>ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए मोदी को अपनासबसे अच्छा मित्र बताते हुए लिखा कि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका, तथा संभवतः वेनेजुएला, से खरीद बढ़ाने पर सहमत हो गये हैं जिससे यूक्रेन युद्ध समाप्त करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिका तत्काल प्रभाव से भारतीय उत्पादों पर प्रतिवर्ती आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। बदले में भारतअमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क और आयात बाधाओं को घटाकर शून्य कर देगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस बात पर सहमत हुए कि भारत ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदने के अलावा अमेरिका से आयात बढ़ायेगा।</p>
<p>अमेरिका की कृषि मंत्री ब्रूक रोलिंस ने इस समझौते की तारीफ करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि इससे भारत के विशाल बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा, जिससे दाम बढ़ेंगे और अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में आमदनी बढ़ेगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि भारत के साथ कृषि व्यापार में साल 2024 में अमेरिका का व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था। अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारत की बढ़ती आबादी एक महत्वपूर्ण बाजार है और इस घाटे को कम करने में आज के व्यापार समझौते की दूरगामी भूमिका होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 14:48:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत अब ईरान के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा: ट्रंप ने किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, 01 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अब ईरान के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा के पाम बीच जाते समय ‘एयर फोर्स वन’ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी इस सवाल के जवाब में की कि क्या चीन वेनेजुएला को दिए गए कर्ज की भरपाई तेल आपूर्ति के बदले कर पाएगा।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, ‘‘चीन का स्वागत है और वह तेल के मामले में एक बड़ा सौदा कर सकता है। हम चीन का स्वागत करते हैं। हम पहले ही एक सौदा कर चुके हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145343/india-will-now-buy-oil-from-venezuela-instead-of-iran"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/petrol-crude-oil.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, 01 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अब ईरान के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा के पाम बीच जाते समय ‘एयर फोर्स वन’ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी इस सवाल के जवाब में की कि क्या चीन वेनेजुएला को दिए गए कर्ज की भरपाई तेल आपूर्ति के बदले कर पाएगा।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, ‘‘चीन का स्वागत है और वह तेल के मामले में एक बड़ा सौदा कर सकता है। हम चीन का स्वागत करते हैं। हम पहले ही एक सौदा कर चुके हैं। भारत आ रहा है और वह ईरान से तेल खरीदने के बजाय वेनेजुएला का तेल खरीदेगा। हमने पहले ही यह सौदा कर लिया है, कम से कम इस सौदे की अवधारणा तो तय हो चुकी है।’’ ट्रंप की इन टिप्पणियों पर नयी दिल्ली की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।</p>
<p>भारत 2019 तक ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है, लेकिन तेहरान पर अमेरिकी प्रतिबंध दोबारा लगाए जाने के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात में काफी कटौती कर दी थी।</p>
<p>ट्रंप के ये बयान ईरान और वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंधों और इन देशों से कच्चा तेल न खरीदने को लेकर प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों पर बनाए जा रहे दबाव की पृष्ठभूमि में आए हैं।</p>
<p>हाल के वर्षों में भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिससे रूस भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है।</p>
<p>अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया है, जिसमें रूसी तेल की खरीद के कारण लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा एवं विस्तृत करने पर सहमति जताई।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि और लोगों के बीच संपर्क सहित सभी क्षेत्रों में भारत-वेनेजुएला साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा था, ‘‘दोनों नेताओं ने आपसी हित के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए अपने घनिष्ठ सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।’’</p>
<p>‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित राष्ट्र के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 18:04:41 +0530</pubDate>
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