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                <title>Securities and Exchange Board of India (SEBI) - Loktej</title>
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                <description>Securities and Exchange Board of India (SEBI) RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आईपीओ लाने वाली कंपनियों के लिए सरकार ने बदला नियम, सेबी ने जारी की नई गाइडलाइन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 16 मार्च (वेब वार्ता)। वित्त मंत्रालय ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) होने वाली कंपनियों के लिए ‘प्रतिभूति अनुबंध संशोधन नियम, 2026’ अधिसूचित कर दिया है।</p>
<p>नए नियमों के तहत, आईपीओ लाने वाली कंपनियों की न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी को अब उनकी निर्गम के बाद की कुल पूंजी (Post-Issue Capital) से जोड़ दिया गया है।</p>
<p>जिन कंपनियों की पूंजी 1,600 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये के बीच है, उन्हें लिस्टिंग के तीन साल के भीतर अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 25 प्रतिशत करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, लिस्टिंग के समय प्रत्येक वर्ग की</p>
<p>प्रतिभूतियों का कम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146050/government-changed-the-rules-for-the-companies-bringing-ipo-after"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 16 मार्च (वेब वार्ता)। वित्त मंत्रालय ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) होने वाली कंपनियों के लिए ‘प्रतिभूति अनुबंध संशोधन नियम, 2026’ अधिसूचित कर दिया है।</p>
<p>नए नियमों के तहत, आईपीओ लाने वाली कंपनियों की न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी को अब उनकी निर्गम के बाद की कुल पूंजी (Post-Issue Capital) से जोड़ दिया गया है।</p>
<p>जिन कंपनियों की पूंजी 1,600 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये के बीच है, उन्हें लिस्टिंग के तीन साल के भीतर अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 25 प्रतिशत करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, लिस्टिंग के समय प्रत्येक वर्ग की</p>
<p>प्रतिभूतियों का कम से कम 2.5 प्रतिशत हिस्सा जनता के लिए पेश करना अनिवार्य कर दिया गया है। संशोधित नियमों में विशाल पूंजी वाली कंपनियों के लिए अलग स्लैब निर्धारित किए गए हैं।</p>
<p>यदि किसी कंपनी की लिस्टिंग के बाद की पूंजी 5,000 करोड़ रुपये से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये के बीच है, तो उसे कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के शेयर सार्वजनिक करने होंगे। ऐसी बड़ी कंपनियों को अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25 प्रतिशत तक पहुँचाने के लिए पाँच साल का समय दिया जाएगा।</p>
<p>वहीं, 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी वाली महाकाय कंपनियों को कम से कम 1,500 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर जारी करने होंगे। यह कदम बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और खुदरा निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।</p>
<p>सेबी (SEBI) द्वारा तय किए गए इन नए मानकों का पालन न करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी जोड़ा गया है। नए नियम पंजीकृत शेयर बाजारों को यह अधिकार देते हैं कि वे सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के गैर-अनुपालन के लिए संबंधित कंपनियों पर जुर्माना लगा सकें।</p>
<p>यह संशोधन उन कंपनियों पर भी लागू होगा जो नियमों के प्रभावी होने से पहले से ही सूचीबद्ध हैं लेकिन मानकों को पूरा नहीं कर रही हैं।</p>
<p>सरकार का मानना है कि इस बदलाव से शेयर बाजार में शेयरों की तरलता (Liquidity) बढ़ेगी और बड़ी कंपनियों के स्वामित्व में आम जनता की हिस्सेदारी मजबूत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 15:38:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजारों के लिए नई तकनीकी दिशा तय करने को सेबी बनाएगा कार्य समूह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 20 दिसंबर (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को कहा कि बाजार नियामक अगले पांच-10 वर्ष में शेयर बाजारों के लिए नई तकनीकी दिशा तय करने को एक कार्य समूह बनाने की योजना बना रहा है।</p>
<p>यह समूह अगले 5-10 साल में शेयर बाजार की तकनीक कैसे विकसित हो सकती है, इसे देखेगा। साथ ही, यह दुनिया भर की सफल प्रथाओं की तुलना करेगा और बाजार की संरचना को मजबूत करने के नए तरीके खोजेगा।</p>
<p>कमोडिटी एंड कैपिटल पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीपीएआई) के 11वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पांडेय ने कहा, ''हम एक कार्य समूह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144723/sebi-will-form-a-working-group-to-decide-the-new"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/4101_share-market-sensex-nifty-business-stock-finance-market-financial.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 20 दिसंबर (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को कहा कि बाजार नियामक अगले पांच-10 वर्ष में शेयर बाजारों के लिए नई तकनीकी दिशा तय करने को एक कार्य समूह बनाने की योजना बना रहा है।</p>
<p>यह समूह अगले 5-10 साल में शेयर बाजार की तकनीक कैसे विकसित हो सकती है, इसे देखेगा। साथ ही, यह दुनिया भर की सफल प्रथाओं की तुलना करेगा और बाजार की संरचना को मजबूत करने के नए तरीके खोजेगा।</p>
<p>कमोडिटी एंड कैपिटल पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीपीएआई) के 11वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पांडेय ने कहा, ''हम एक कार्य समूह बनाएंगे जो तय करेगा कि हमारे शेयर बाजारों में अगली तकनीकी दिशा क्या होगी।''</p>
<p>पांडेय ने कहा कि तकनीकी मजबूती बेहद जरूरी है और सेबी शेयर बाजार से जुड़ी हर तकनीकी गड़बड़ी को गंभीरता से लेता है।</p>
<p>उन्होंने माना कि तेजी से बदलती तकनीक के कारण कभी-कभी व्यवधान आ सकते हैं, लेकिन इसके लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 15:17:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेबी का अमेरिकी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेन स्ट्रीट के खिलाफ सख्त एक्शन, स्टॉक मार्केट में कारोबार पर लगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 04 जुलाई (वेब वार्ता)। मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने अमेरिकी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेन स्ट्रीट और इससे जुड़ी एंटिटीज के भारतीय शेयर बाजार में एंट्री करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।</p>
<p>सेबी के अंतरिम आदेश में कहा गया है कि वो जेन स्ट्रीट से 48.4 अरब रुपये यानी लगभग 570 मिलियन डॉलर की राशि जब्त करेगा। सेबी का कहना है कि ये राशि जेन स्ट्रीट ने अवैध रूप से अर्जित की गई की है। जेन स्ट्रीट को ये पैसा एक एस्क्रो एकाउंट में जमा करना होगा।</p>
<p>मार्केट रेगुलेटर के फैसले से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141705/sebis-ban-on-trading-in-strict-action-stock-market-against"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 04 जुलाई (वेब वार्ता)। मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने अमेरिकी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेन स्ट्रीट और इससे जुड़ी एंटिटीज के भारतीय शेयर बाजार में एंट्री करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।</p>
<p>सेबी के अंतरिम आदेश में कहा गया है कि वो जेन स्ट्रीट से 48.4 अरब रुपये यानी लगभग 570 मिलियन डॉलर की राशि जब्त करेगा। सेबी का कहना है कि ये राशि जेन स्ट्रीट ने अवैध रूप से अर्जित की गई की है। जेन स्ट्रीट को ये पैसा एक एस्क्रो एकाउंट में जमा करना होगा।</p>
<p>मार्केट रेगुलेटर के फैसले से अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म को जबरदस्त झटका लगा है। जेन स्ट्रीट ने पिछले साल भारत में इक्विटी डेरिवेटिव्स से 2.30 अरब डॉलर से अधिक का नेट रेवेन्यू हासिल किया था।</p>
<p>सेबी के अंतिम आदेश में कहा गया है कि जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों को भारतीय सिक्योरिटी मार्केट में कारोबार करने से रोक दिया गया है और उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सिक्योरिटीज को खरीदने, बेचने या अन्य तरीके से लेनदेन करने से भी प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>सेबी के आदेश में बताया गया है कि बैंकों को भी ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों द्वारा खोले गए खातों से भी सेबी की अनुमति के बिना कोई डेबिट ना किया जाए। मार्केट रेगुलेटर का ये आदेश जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत या संयुक्त रूप से खोले गए सभी खातों के संबंध में जारी किया गया है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ मार्केट रेगुलेटर सेबी को कई शिकायतें मिली थी। इन शिकायतों में बताया गया था कि जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों ने भारतीय स्टॉक मार्केट में हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी का इस्तेमाल करके करीब 4,843 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।</p>
<p>आरोप है कि जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों ने भारतीय स्टॉक मार्केट में गलत तरीके से मैनिपुलेटिव ट्रेडिंग स्ट्रेटजी अपनाई। सेबी के पास इस बात की भी शिकायत आई थी कि मार्केट में असामान्य तरीके से उतार चढ़ाव कराया जा रहा है। सेबी के सर्विलांस सिस्टम ने भी इस गड़बड़ी के संकेत दिए थे।</p>
<p>जेन स्ट्रीट ग्रुप भारत में अपनी तीन सब्सिडियरी जेन स्ट्रीट एशिया ट्रेडिंग लिमिटेड (जेएसएटीएल), जेन स्ट्रीट इंडिया ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (जेएसआईटीपीएल) और जेन स्ट्रीट एशिया एलएलसी (जेएसएएलएलसी) के जरिए कारोबार करता था। ये तीनों कंपनियां भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के रूप में रजिस्टर्ड हैं।</p>
<p>सेबी की जांच में पता चला था कि ये तीनों कंपनियां इंडियन स्टॉक मार्केट में मिलकर ट्रेडिंग पोजीशन लेती थीम और एल्गोरिदम बेस्ड स्ट्रेटजी का इस्तेमाल कर मार्केट को मैनिपुलेट करती थीं। ये तीनों कंपनियां निफ्टी और बैंक निफ्टी जैसे इंडेक्स डेरिवेटिव्स के फ्यूचर्स और ऑप्शंस में पोजीशन लेती थीं।</p>
<p>इनमें एक कंपनी सेल पोजीशन (बिकवाल की भूमिका) लेती थीं तो दूसरी कंपनी बाय पोजीशन (लिवाल की भूमिका) लेती थीं। ये पोजीशन एक ही कॉन्ट्रैक्ट में एक ही प्राइस पर और एक ही समय में लिए जाते थे। इसका मतलब कीमतों को अपनी जरूरत के हिसाब से गिराना या चढ़ाना होता था।</p>
<p>सेबी की जांच में इस बात का भी पता चला कि ट्रेडिंग की ये स्ट्रेटजी ज्यादातर वीकली और मंथली एक्सपायरी के दिन अपनायी जाती थी। इंडेक्स की क्लोजिंग प्राइस को घटाने या बढ़ाने के लिए ट्रेडिंग के आखिरी मिनट में जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियां बड़े ऑर्डर प्लेस करती थीं, जिससे इंडेक्स में अंतिम मिनट में होने वाले होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रॉफिट पर काफी ज्यादा असर पड़ता था। आरोप है कि जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों ने इस स्ट्रेटजी का पालन करके मार्केट को मैनिपुलेट किया और गलत तरीके से काफी लाभ अर्जित किया।</p>
<p>आपको बता दें की मार्केट रेगुलेटर सेबी ने पिछले साल एक स्टडी जारी करके बताया था कि इंडेक्स डेरिवेटिव्स में विदेशी हेज फंड्स ने जम कर पैसे कमाए थे, जबकि इंडिविजुअल ट्रेडर्स को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था।</p>
<p>इस स्टडी में बताया गया था कि फ्यूचर एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग करने वाले इंडिविजुअल ट्रेडर्स में से 90 प्रतिशत को नुकसान का सामना करना पड़ा था। सिर्फ 2 साल की अवधि में ही इंडिविजुअल ट्रेडर्स को करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jul 2025 16:12:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेबी के आदेश के बाद जेनसोल इंजीनियरिंग के प्रवर्तकों ने कंपनी से इस्तीफा दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="content-profession">
<p>नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) संकटग्रस्त जेनसोल इंजीनियरिंग के प्रवर्तकों अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने बाजार नियामक सेबी के अंतरिम आदेश के बाद कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने शेयर बाजार को यह जानकारी दी।</p>
<p>अनमोल सिंह जग्गी के पास प्रबंध निदेशक और पुनीत सिंह जग्गी के पास पूर्णकालिक निदेशक का पद था।</p>
<p>भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इससे पहले 15 अप्रैल को धन की हेराफेरी और कामकाज के संचालन में खामियों से जुड़े मुद्दों के चलते जेनसोल इंजीनियरिंग और उसके प्रवर्तकों अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी को अगले आदेश तक</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140722/following-sebis-order-the-promoters-of-jansol-engineering-resigned-from"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><div class="content-profession">
<p>नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) संकटग्रस्त जेनसोल इंजीनियरिंग के प्रवर्तकों अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने बाजार नियामक सेबी के अंतरिम आदेश के बाद कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने शेयर बाजार को यह जानकारी दी।</p>
<p>अनमोल सिंह जग्गी के पास प्रबंध निदेशक और पुनीत सिंह जग्गी के पास पूर्णकालिक निदेशक का पद था।</p>
<p>भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इससे पहले 15 अप्रैल को धन की हेराफेरी और कामकाज के संचालन में खामियों से जुड़े मुद्दों के चलते जेनसोल इंजीनियरिंग और उसके प्रवर्तकों अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी को अगले आदेश तक प्रतिभूति बाजारों से प्रतिबंधित कर दिया था।</p>
<p>नियामक ने अनमोल और पुनीत सिंह जग्गी को अगले आदेश तक जेनसोल में निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय कर्मी का पद संभालने से भी रोक दिया था।</p>
<p>जेनसोल इंजीनियरिंग ने शेयर बाजार को बताया कि प्रबंध निदेशक अनमोल सिंह जग्गी और पूर्णकालिक निदेशक पुनीत सिंह जग्गी ने अपना इस्तीफा दे दिया है। वे कंपनी की विभिन्न समितियों के सदस्य भी नहीं रहेंगे।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/140722/following-sebis-order-the-promoters-of-jansol-engineering-resigned-from</link>
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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 20:52:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेनसोल के पुणे ईवी संयंत्र में कोई विनिर्माण नहीं हो रहा था, सिर्फ दो-तीन मजदूर मौजूद थे : सेबी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एक अधिकारी ने पुणे स्थित जेनसोल इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) संयंत्र का दौरा किया तो उसे ‘कोई विनिर्माण गतिविधि’ देखने नहीं मिली और वहां केवल दो-तीन मजदूर मौजूद थे।</p>
<p>ये खुलासे जून, 2024 में प्राप्त एक शिकायत के बाद 15 अप्रैल को जारी किए गए बाजार नियामक सेबी के अंतरिम आदेश का हिस्सा थे, जिसमें जेनसोल के शेयर मूल्य में हेरफेर और धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।</p>
<p>अपने आदेश में, सेबी ने भाइयों- अनमोल सिंह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140248/no-manufacturing-was-being-done-at-pune-ev-plant-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एक अधिकारी ने पुणे स्थित जेनसोल इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) संयंत्र का दौरा किया तो उसे ‘कोई विनिर्माण गतिविधि’ देखने नहीं मिली और वहां केवल दो-तीन मजदूर मौजूद थे।</p>
<p>ये खुलासे जून, 2024 में प्राप्त एक शिकायत के बाद 15 अप्रैल को जारी किए गए बाजार नियामक सेबी के अंतरिम आदेश का हिस्सा थे, जिसमें जेनसोल के शेयर मूल्य में हेरफेर और धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।</p>
<p>अपने आदेश में, सेबी ने भाइयों- अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी द्वारा प्रवर्तित कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग द्वारा निवेशकों के लिए विसंगतियों के साथ-साथ भ्रामक खुलासे भी पाए।</p>
<p>एनएसई द्वारा की गई जांच से एक खुलासा हुआ, जिसमें पुणे के चाकन में जेनसोल के ईवी संयंत्र - जेनसोल इलेक्ट्रिक व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड में विनिर्माण गतिविधियों में कमी का पता चला।</p>
<p>नौ अप्रैल को संयंत्र का दौरा करने के दौरान एनएसई के एक अधिकारी ने पाया कि वहां केवल दो-तीन मजदूर मौजूद थे।</p>
<p>सेबी ने कहा, “यह पाया गया कि संयंत्र में कोई विनिर्माण गतिविधि नहीं हो रही थी और केवल दो-तीन मजदूर वहां मौजूद थे। एनएसई अधिकारी ने इकाई के बिजली बिलों का विवरण मांगा और यह पाया गया कि पिछले 12 महीनों के दौरान महावितरण द्वारा बिल की गई अधिकतम राशि दिसंबर, 2024 के लिए 1,57,037.01 रुपये थी।”</p>
<p>सेबी ने 15 अप्रैल को जारी अपने अंतरिम आदेश में कहा, “इसलिए, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि संयंत्र स्थल पर कोई विनिर्माण गतिविधि नहीं हुई है, जो कि पट्टे पर दी गई संपत्ति है।”</p>
<p>यह दौरा 28 जनवरी, 2025 को जेनसोल द्वारा शेयर बाजारों को दी गई घोषणा के बाद हुई, जिसमें दावा किया गया था कि उसे भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो-2025 में प्रदर्शित अपनी नई पेश की गई ईवी की 30,000 इकाइयों के लिए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।</p>
<p>हालांकि, कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की समीक्षा करने पर, सेबी ने पाया कि ये ऑर्डर 29,000 कारों के लिए नौ संस्थाओं के साथ किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) थे।</p>
<p>ये एमओयू इच्छा की अभिव्यक्ति की प्रकृति के थे, जिनमें वाहन की कीमत या डिलिवरी का कोई उल्लेख नहीं था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Apr 2025 18:24:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेनसोल मामला: हरित ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से उभरे जग्गी बंधु अब सेबी की जांच के घेरे में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) कभी देश के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गज माने जाने वाले अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी भाइयों पर अब वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं।</p>
<p>दोनों ने दो प्रमुख उद्यमों - जेनसोल इंजीनियरिंग और ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी के जरिए स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक परिवहन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।</p>
<p>हालांकि, सेबी की जांच के बाद उनकी प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचा। बाजार नियामक ने मंगलवार को अपने अंतरिम आदेश में जग्गी बंधुओं को अगली सूचना तक प्रतिभूति बाजारों में लेन-देन से रोक दिया।</p>
<p>दोनों पर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140213/the-jansol-case-the-jaggi-brothers-who-emerged-rapidly-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/investigation-probe-enquiry.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) कभी देश के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गज माने जाने वाले अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी भाइयों पर अब वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं।</p>
<p>दोनों ने दो प्रमुख उद्यमों - जेनसोल इंजीनियरिंग और ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी के जरिए स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक परिवहन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।</p>
<p>हालांकि, सेबी की जांच के बाद उनकी प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचा। बाजार नियामक ने मंगलवार को अपने अंतरिम आदेश में जग्गी बंधुओं को अगली सूचना तक प्रतिभूति बाजारों में लेन-देन से रोक दिया।</p>
<p>दोनों पर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग द्वारा लिए गए कर्ज के कुछ हिस्से का इस्तेमाल निजी उपयोग के लिए किया। इससे कंपनी में कॉरपोरेट प्रशासन और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p>जेनसोल इंजीनियरिंग सौर परामर्श सेवाएं, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) सेवाओं, तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को पट्टे पर देने के व्यवसाय में शामिल है। इसे 15 अक्टूबर, 2019 को बीएसई एसएमई मंच पर सूचीबद्ध किया गया था और बाद में इसे तीन जुलाई, 2023 को बीएसई और एनएसई के मुख्य बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया गया।</p>
<p>कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से वृद्धि दर्ज की। वित्त वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच कंपनी का परिचालन लाभ दो करोड़ रुपये से बढ़कर 209 करोड़ रुपये हो गया, जबकि शुद्ध लाभ दो करोड़ रुपये से बढ़कर 80 करोड़ रुपये हो गया।</p>
<p>कंपनी के शेयर की कीमत एक साल पहले 1,126 के उच्च स्तर से घटकर 116 रुपये प्रति शेयर पर आ गई। इस बीच क्रेडिट रेटिंग एजेसिंयों ने इसकी साख को घटा दिया और कॉरपोरेट प्रशासन प्रथाओं पर चिंता जताई।</p>
<p>इसके बाद मिली शिकायतों के आधार पर सेबी ने अपनी जांच शुरू की। सेबी ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (सीआरए) से ऋण दायित्वों के बारे में पता लगाने के लिए कहा।</p>
<p>सीआरए ने कहा कि जेनसोल ने भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (इरेडा) और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) को छोड़कर सभी ऋणदाताओं के स्टेटमेंट दिए। इन दो ऋणदाताओं के संबंध में जेनसोल ने इरेडा और पीएफसी द्वारा कथित रूप से जारी किए गए आचरण पत्र साझा किए, जिसमें कहा गया था कि जेनसोल नियमित रूप से अपना कर्ज चुका रही है। हालांकि, जब इरेडा और पीएफसी से इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार किया।</p>
<p>इसके बाद सेबी ने इरेडा और पीएफसी से जेनसोल को दिए गए कर्ज को चुकाने के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी, जिसके कई चूक के बारे में पता चला।</p>
<p>सेबी की जांच में पाया गया कि ईवी खरीद के लिए निर्धारित धन अक्सर जेनसोल या जग्गी बंधुओं से जुड़ी दूसरी कंपनियों को भेज दिया जाता था। कुछ धनराशि का इस्तेमाल प्रवर्तकों के निजी खर्चों के लिए किया गया था। इसके तहत लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा गया, रिश्तेदारों को पैसा दिया गया और प्रवर्तकों के स्वामित्व वाली निजी संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए निवेश किया गया।</p>
<p>सबसे चौंकाने वाली बात यह पता चली कि 42.94 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अनमोल सिंह जग्गी के कैपब्रिज वेंचर्स के जरिए डीएलएफ कैमेलियास में एक लग्जरी अपार्टमेंट खरीदने के लिए किया गया।</p>
<p>सेबी ने पाया कि प्रवर्तक कंपनी को निजी गुल्लक की तरह चला रहे थे और शेयरधारकों के हितों की परवाह किए बिना खर्च कर रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 19:46:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सेबी के परामर्श पत्र के बाद एनएसई ने साप्ताहिक अनुबंध के समाप्ति दिन को बदलने पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने बाजार नियामक सेबी के परामर्श पत्र के बाद सभी सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प की समाप्ति तिथि को बृहस्पतिवार से सोमवार करने की अपनी योजना को अगली सूचना तक टाल दिया है।</p>
<p>यह बदलाव चार अप्रैल 2025 से प्रभावी होना था। इसके तहत सभी सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प के अंतिम निपटान दिवस को बृहस्पतिवार से सोमवार किया जाना था।</p>
<p>एनएसई ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि निफ्टी साप्ताहिक अनुबंध जो वर्तमान में बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहे हैं, उन्हें सोमवार को स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसके अलावा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139647/after-sebis-counseling-paper-nse-banned-the-change-of-weekly"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने बाजार नियामक सेबी के परामर्श पत्र के बाद सभी सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प की समाप्ति तिथि को बृहस्पतिवार से सोमवार करने की अपनी योजना को अगली सूचना तक टाल दिया है।</p>
<p>यह बदलाव चार अप्रैल 2025 से प्रभावी होना था। इसके तहत सभी सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प के अंतिम निपटान दिवस को बृहस्पतिवार से सोमवार किया जाना था।</p>
<p>एनएसई ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि निफ्टी साप्ताहिक अनुबंध जो वर्तमान में बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहे हैं, उन्हें सोमवार को स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसके अलावा निफ्टी मासिक, त्रैमासिक और अर्ध-वार्षिक अनुबंधों की समाप्ति को समाप्ति माह के अंतिम बृहस्पतिवार से बदलकर अंतिम सोमवार किया जाएगा।</p>
<p>हालांकि, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के परामर्श पत्र के मद्देनजर, एनएसई ने इस बदलाव के क्रियान्वयन को अगली सूचना तक स्थगित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>एनएसई ने बृहस्पतिवार देर रात जारी परिपत्र में कहा, ‘‘ सदस्य इस बात पर गौर करें कि 27 मार्च 2025 को सेबी परामर्श पत्र के मद्देनजर शेयर वायदा विकल्प (इक्विटी डेरिवेटिव) के लिए अंतिम निपटान दिवस (समाप्ति दिवस) में बदलाव संबंधी परिपत्र का क्रियान्वयन अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया है।’’</p>
<p>सेबी ने बृहस्पतिवार को जारी अपने परामर्श पत्र में प्रस्ताव दिया कि सभी सूचकांक में सभी शेयर वायदा-विकल्प अनुबंधों की समाप्ति मंगलवार या बृहस्पतिवार तय की जाए। इससे समाप्ति तिथियों के बीच अंतराल को अनुकूलतम बनाने में मदद मिलेगी तथा सप्ताह के पहले या अंतिम दिन को समाप्ति तिथि के रूप में निर्धारित करने से बचा जा सकेगा।</p>
<p>इसके अलावा, नियामक ने सिफारिश की कि सूचकांकों को किसी भी अनुबंध की समाप्ति या निपटान दिवस में बदलाव या संशोधित करने से पहले सेबी की मंजूरी लेनी चाहिए।</p>
<p>नियामक ने प्रस्ताव दिया, ‘‘ प्रत्येक सूचकांक को उसके द्वारा चुने गए दिन (मंगलवार या बृहस्पतिवार) के लिए साप्ताहिक सूचकांक विकल्प की अनुमति जारी रहेगी।’’</p>
<p>भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इन प्रस्तावों पर 17 अप्रैल तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 12:44:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेबी ने निवेश सलाहकारों, शोध विश्लेषकों को एक साल तक अग्रिम शुल्क लेने की अनुमति दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 24 मार्च (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों को एक साल तक अग्रिम शुल्क लेने की अनुमति देने का फैसला किया।</p>
<p>मौजूदा नियमों के तहत निवेश सलाहकार (आईए) ग्राहक की सहमति होने पर दो तिमाहियों तक के लिए अग्रिम शुल्क ले सकते हैं। शोध विश्लेषकों (आरए) के लिए यह अवधि केवल एक तिमाही थी।</p>
<p>सेबी ने कहा कि उद्योग की कई चिंताओं को दूर करने के लिए पहले भी आईए और आरए से संबंधित नियमों को युक्तिसंगत बनाया गया था। ज्यादातर बदलावों का उन्होंने स्वागत किया है।</p>
<p>बाजार नियामक ने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139553/sebi-allowed-investment-advisors-research-analysts-to-charge-advance-fees"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 24 मार्च (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों को एक साल तक अग्रिम शुल्क लेने की अनुमति देने का फैसला किया।</p>
<p>मौजूदा नियमों के तहत निवेश सलाहकार (आईए) ग्राहक की सहमति होने पर दो तिमाहियों तक के लिए अग्रिम शुल्क ले सकते हैं। शोध विश्लेषकों (आरए) के लिए यह अवधि केवल एक तिमाही थी।</p>
<p>सेबी ने कहा कि उद्योग की कई चिंताओं को दूर करने के लिए पहले भी आईए और आरए से संबंधित नियमों को युक्तिसंगत बनाया गया था। ज्यादातर बदलावों का उन्होंने स्वागत किया है।</p>
<p>बाजार नियामक ने कहा कि हालांकि शुल्क संबंधी कुछ प्रावधानों पर चिंताएं बनी हुई थीं, जो आईए और आरए द्वारा अग्रिम शुल्क लेने को छह महीने या तीन महीने तक सीमित करती हैं।</p>
<p>सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इन चिंताओं को दूर करने के लिए, बोर्ड ने फैसला किया कि अगर ग्राहक सहमत हो, तो आईए और आरए एक साल तक अग्रिम शुल्क ले सकते हैं।’’</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि शुल्क सीमा, भुगतान विधि, धन वापसी से संबंधित अनुपालन आवश्यकताएं केवल व्यक्तिगत और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) वाले ग्राहकों पर लागू होंगी।</p>
<p>गैर-व्यक्तिगत ग्राहकों, मान्यता प्राप्त निवेशकों और प्रॉक्सी सलाहकार की सिफारिश चाहने वाले संस्थागत निवेशकों के मामले में शुल्क संबंधी नियम समझौते की शर्तों के अनुसार तय होंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/139553/sebi-allowed-investment-advisors-research-analysts-to-charge-advance-fees</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 20:23:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपंजीकृत निवेश सलाहकारों से खतरा, 70 हजार भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट, खाते हटाए गए: नारायण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 21 मार्च (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण जी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल 'फिन-इन्फ्लुएंसर' ढांचे के क्रियान्वयन के बाद से सोशल मीडिया मंचों के साथ परामर्श कर 70,000 भ्रामक खाते और ‘पोस्ट’ हटाए गए हैं।</p>
<p>सोशल मीडिया पर वित्तीय मामलों में लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखने वालों को फिन-इन्फ्लुएंसर कहते हैं।</p>
<p>नारायण ने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की चिंताओं के बीच कुल मिलाकर निवेश प्रवाह उतना बुरा नहीं है, जितना सोचा गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139473/narayan-removed-70-thousand-misleading-social-media-post-accounts-threatened"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 21 मार्च (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण जी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल 'फिन-इन्फ्लुएंसर' ढांचे के क्रियान्वयन के बाद से सोशल मीडिया मंचों के साथ परामर्श कर 70,000 भ्रामक खाते और ‘पोस्ट’ हटाए गए हैं।</p>
<p>सोशल मीडिया पर वित्तीय मामलों में लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखने वालों को फिन-इन्फ्लुएंसर कहते हैं।</p>
<p>नारायण ने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की चिंताओं के बीच कुल मिलाकर निवेश प्रवाह उतना बुरा नहीं है, जितना सोचा गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में एफआईआई का निवेश जारी है।</p>
<p>नारायण ने कहा कि अपंजीकृत निवेश सलाहकार और शोध विश्लेषक एक ‘‘खतरा’’ हैं, जो निवेश में बढ़ती रुचि का फायदा उठा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने यहां पंजीकृत निवेश सलाहकारों द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ अक्टूबर 2024 से सेबी ने 70,000 से अधिक भ्रामक खातों/‘पोस्ट’ को हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों के साथ काम किया है।’’</p>
<p>सेबी के पूर्णकालिक सदस्य ने कहा कि उन्होंने अनुपालन सुनिश्चित करने में सलाहकारों की मदद मांगी। उन्होंने साथ ही सेबी-पंजीकृत संस्थाओं की पहचान करने में मदद के लिए यूपीआई ‘पेराइट’ खाते और इस दिशा में सेबी के प्रयासों के रूप में वैकल्पिक केंद्रीकृत शुल्क संग्रह तंत्र का उल्लेख किया।</p>
<p>वाणिज्यिक बैंकर से नियामक बने नारायण ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) की निकासी पर कहा कि स्थिति उतनी बुरी नहीं है, लेकिन ‘‘ हमें आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि भारत को विदेशी बचत की आवश्यकता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 तक एफपीआई के पास भारतीय शेयर में 62 लाख करोड़ रुपये या 700 अरब डॉलर से अधिक और ऋण के रूप में करीब 5.9 लाख करोड़ रुपये या 68 अरब डॉलर थे।</p>
<p>नारायण ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में शेयर और ऋण में 54 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी प्रवाह देखा गया है, जो पिछले पांच वर्षों के 19 अरब अमेरिकी डॉलर से बहुत अधिक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की रुचि बनाए रखने के लिए निरंतर वृद्धि, व्यापक आर्थिक स्थिरता और कामकज का उचित माहौल देने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 20:13:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदालत ने पूर्व सेबी प्रमुख, पांच अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर चार मार्च तक रोक लगाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 03 मार्च (वेब वार्ता)। बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को एसीबी से कहा कि सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर चार मार्च तक कोई कार्रवाई न की जाए।</p>
<p>बुच, बीएसई के प्रबंध निदेशक सुंदररमन राममूर्ति और चार अन्य अधिकारियों ने उन पर दर्ज प्राथमिकी के आदेश के खिलाफ सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया था।</p>
<p>मुंबई स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने शनिवार को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और विनियामकीय उल्लंघन के संबंध में बुच और पांच अन्य अधिकारियों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138841/the-court-stayed-till-march-4-on-the-order-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 03 मार्च (वेब वार्ता)। बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को एसीबी से कहा कि सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर चार मार्च तक कोई कार्रवाई न की जाए।</p>
<p>बुच, बीएसई के प्रबंध निदेशक सुंदररमन राममूर्ति और चार अन्य अधिकारियों ने उन पर दर्ज प्राथमिकी के आदेश के खिलाफ सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया था।</p>
<p>मुंबई स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने शनिवार को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और विनियामकीय उल्लंघन के संबंध में बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था।</p>
<p>बुच और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति एस जी डिगे की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी और तब तक एसीबी की विशेष अदालत के आदेश पर कार्रवाई नहीं होगी।</p>
<p>सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बुच और सेबी के तीन मौजूदा पूर्णकालिक निदेशकों – अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय की ओर से पेश हुए।</p>
<p>वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदररमन राममूर्ति और इसके पूर्व चेयरमैन और जनहित निदेशक प्रमोद अग्रवाल की ओर से पेश हुए।</p>
<p>याचिकाओं में विशेष अदालत के आदेश को अवैध और मनमाना बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई।</p>
<p>याचिकाओं में कहा गया कि यह आदेश कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं को नोटिस भी जारी नहीं किया गया और निर्णय लेने से पहले उनकी बात भी नहीं सुनी गई।</p>
<p>एसीबी अदालत के न्यायाधीश शशिकांत एकनाथराव बांगर ने शनिवार को पारित आदेश में कहा था, “प्रथम दृष्टया विनियामकीय चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।”</p>
<p>अदालत ने कहा कि वह जांच की निगरानी करेगी और 30 दिनों के भीतर (मामले की) स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है।अदालत ने आदेश में यह भी कहा है कि आरोपों से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, जिसके लिए जांच जरूरी है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की निष्क्रियता के कारण सीआरपीसी (आपराधिक प्रक्रिया संहिता) के प्रावधानों के तहत न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है।</p>
<p>शिकायतकर्ता सपन श्रीवास्तव, जो एक मीडिया रिपोर्टर हैं, ने कथित अपराधों की जांच की मांग की थी, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, विनियामक उल्लंघन और भ्रष्टाचार शामिल है।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने दावा किया कि सेबी के अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहे, बाजार में हेरफेर को बढ़ावा दिया, तथा निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करने वाली कंपनी को सूचीबद्ध करने की अनुमति देकर कॉरपोरेट धोखाधड़ी के लिए रास्ता खोला।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने कहा कि कई बार पुलिस स्टेशन और संबंधित नियामक निकायों से संपर्क करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p>भारत की पहली महिला सेबी प्रमुख बुच पर अमेरिका स्थित शोध एवं निवेश कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने हितों के टकराव के आरोप लगाए थे। उसके बाद राजनीतिक तनाव के बीच बुच ने शुक्रवार को अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया।</p>
<p>सेबी ने कहा कि वह ‘इस आदेश को चुनौती देने के लिए उचित कानूनी कदम उठाएगा और सभी मामलों में उचित विनियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार ‘धोखाधड़ी’ मामले में पूर्व सेबी प्रमुख बुच, पांच अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 02 मार्च (वेब वार्ता)। एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और विनियामक उल्लंघन के संबंध में शेयर बाजार नियामक सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>मुंबई स्थित विशेष एसीबी अदालत के न्यायाधीश शशिकांत एकनाथराव बांगर ने शनिवार को पारित आदेश में कहा, “प्रथम दृष्टया विनियामकीय चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।”</p>
<p>अदालत ने कहा कि वह जांच की निगरानी करेगा और 30 दिनों के भीतर (मामले की) स्थिति रिपोर्ट मांगी गई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138817/order-to-register-fir-against-former-sebi-chief-five-others"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 02 मार्च (वेब वार्ता)। एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और विनियामक उल्लंघन के संबंध में शेयर बाजार नियामक सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>मुंबई स्थित विशेष एसीबी अदालत के न्यायाधीश शशिकांत एकनाथराव बांगर ने शनिवार को पारित आदेश में कहा, “प्रथम दृष्टया विनियामकीय चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।”</p>
<p>अदालत ने कहा कि वह जांच की निगरानी करेगा और 30 दिनों के भीतर (मामले की) स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है।</p>
<p>अदालत ने आदेश में यह भी कहा है कि आरोपों से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, जिसके लिए जांच जरूरी है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की निष्क्रियता के कारण सीआरपीसी (आपराधिक प्रक्रिया संहिता) के प्रावधानों के तहत न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है।</p>
<p>शिकायतकर्ता, जो एक मीडिया रिपोर्टर है, ने कथित अपराधों की जांच की मांग की थी, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, विनियामक उल्लंघन और भ्रष्टाचार शामिल है।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने दावा किया कि सेबी के अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहे, बाजार में हेरफेर को बढ़ावा दिया, तथा निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करने वाली कंपनी को सूचीबद्ध करने की अनुमति देकर कॉरपोरेट धोखाधड़ी के लिए रास्ता खोला।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने कहा कि कई बार पुलिस स्टेशन और संबंधित नियामक निकायों से संपर्क करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p>भारत की पहली महिला सेबी प्रमुख बुच पर अमेरिका स्थित शोध एवं निवेश कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने हितों के टकराव के आरोप लगाए थे। उसके बाद राजनीतिक तनाव के बीच बुच ने शुक्रवार को अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/138817/order-to-register-fir-against-former-sebi-chief-five-others</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Mar 2025 21:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेबी प्रमुख : तीन साल बाद नौकरशाह बने बाजार नियामक के प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) अनुभवी नौकरशाह और नियमों के पक्के वित्त सचिव तुहिन कांत पांडेय तीन साल के लिए पूंजी बाजार नियामक, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख होंगे।</p>
<p>पांडेय 1987 बैच के ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। वह माधबी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका तीन साल का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो रहा है।</p>
<p>बुच सेबी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला और निजी क्षेत्र से चुनी गईं पहली सेबी चेयरपर्सन भी हैं।</p>
<p>सेबी प्रमुख का पद ज्यादातर अनुभवी नौकरशाहों के पास रहा है। यह हालिया महीनों में किसी नियामक संस्था</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138366/sebi-chief--bureaucrat-became-the-head-of-the-market-regulator-after-three-years"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) अनुभवी नौकरशाह और नियमों के पक्के वित्त सचिव तुहिन कांत पांडेय तीन साल के लिए पूंजी बाजार नियामक, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख होंगे।</p>
<p>पांडेय 1987 बैच के ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। वह माधबी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका तीन साल का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो रहा है।</p>
<p>बुच सेबी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला और निजी क्षेत्र से चुनी गईं पहली सेबी चेयरपर्सन भी हैं।</p>
<p>सेबी प्रमुख का पद ज्यादातर अनुभवी नौकरशाहों के पास रहा है। यह हालिया महीनों में किसी नियामक संस्था के शीर्ष पर नौकरशाह की दूसरी नियुक्ति है। दिसंबर 2024 में सरकार ने शक्तिकान्त दास की सेवानिवृत्ति के बाद राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा ​​को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का गवर्नर नियुक्त किया था।</p>
<p>बुच ने अपने कार्यकाल में इक्विटी के तेजी से निपटान, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) खुलासे में वृद्धि तथा म्यूचुअल फंड पैठ बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की, लेकिन उनके कार्यकाल के अंतिम वर्ष में काफी विवाद हुआ जब सेबी के कर्मचारियों ने ‘‘कामकाज के गलत तरीकों’’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। साथ ही अमेरिका की शोध एवं निवेश कंपनी हिंडनबर्ग तथा विपक्षी दल कांग्रेस ने भी उनपर कई आरोप लगाए थे।</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में, सरकार ने एक अनुभवी नौकरशाह पांडेय को नियामक निकाय का प्रमुख चुना, जिनके पास सरकार के विनिवेश व निजीकरण कार्यक्रमों को संभालने का व्यापक अनुभव है।</p>
<p>मृदुभाषी पांडेय नियम पुस्तिका का पालन करने और काम पूरा करने के लिए पहचाने जाते हैं।</p>
<p>दीपम (डीआईपीएएम) सचिव के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ही एयर इंडिया का निजीकरण किया गया था, जबकि ऐसा करने के कई प्रयास पहले असफल रहे थे। पांडेय ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की योजनाओं की भी देखरेख की।</p>
<p>पांडेय सेबी के प्रमुख का पद ऐसे समय संभालेंगे जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बाद बाजार में मंदी का दबाव देखने को मिल रहा है। जनवरी से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।</p>
<p>पांडेय निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सचिव हैं। दीपम वित्त मंत्रालय का एक विभाग है जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी इक्विटी और सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) का भी प्रबंधन करता है।</p>
<p>उन्होंने नौ जनवरी को राजस्व विभाग का कार्यभार संभाला था, जब उनके पूर्ववर्ती संजय मल्होत्रा ​​भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बन गए थे। पांडेय ने 2025-26 के बजट को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें मध्यम वर्ग को कुल एक लाख करोड़ रुपये की कर राहत दी गई। वे नए आयकर विधेयक के मसौदे को तैयार करने में भी शामिल थे, जो 64 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा।</p>
<p>दीपम में अपने पांच साल से अधिक के कार्यकाल (24 अक्टूबर 2019 से आठ जनवरी 2025) में पांडेय ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के विनिवेश को आगे बढ़ाया क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (पीएसई) संबंधी नीति को लागू किया, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में पीएसई में सरकार की उपस्थिति को कम करना था।</p>
<p>पांडेय ने पंजाब विश्वविद्यालय (चंडीगढ़) से अर्थशास्त्र में एमए और बर्मिंघम विश्वविद्यालय (ब्रिटेन) से एमबीए किया है। उन्होंने ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार में विभिन्न पदों पर काम किया है।</p>
<p>अपने करियर के शुरुआती दौर में पांडेय ने स्वास्थ्य, सामान्य प्रशासन, वाणिज्यिक कर, परिवहन व वित्त विभागों में प्रशासनिक प्रमुख के रूप में काम किया।</p>
<p>उन्होंने ओडिशा राज्य वित्त निगम के कार्यकारी निदेशक और ओडिशा लघु उद्योग निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में भी काम किया।</p>
<p>केंद्र में उन्होंने योजना आयोग (अब नीति आयोग) में संयुक्त सचिव, कैबिनेट सचिवालय में संयुक्त सचिव और वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव के पद पर सेवाएं दी हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/138366/sebi-chief--bureaucrat-became-the-head-of-the-market-regulator-after-three-years</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 15:06:28 +0530</pubDate>
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