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                <title>Indian Institute of Technology (IIT) - Loktej</title>
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                <description>Indian Institute of Technology (IIT) RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आईआईटी-रुड़की में अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देहरादून, 18 दिसंबर (भाषा) उत्तराखंड में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की में बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन शुरू हुआ जिसका उद्देश्य शिक्षा में इसके महत्व को बताना है।</p>
<p>तीन दिवसीय इस सम्मेलन में भारत के अलावा विदेशों से आए विद्वान, संत और शोधकर्ता भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार विमर्श करेंगे। सम्मेलन में करीब 150 शोध पत्र पेश किए जाएंगे।</p>
<p>सम्मेलन में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा को रामायण के मूल्यों को समझने और आत्मसात करने जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद सिर्फ आजीविका कमाना नहीं है बल्कि मानवता की सेवा करना है।</p>
<p>सम्मेलन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144695/international-ramayana-conference-begins-in-iit-roorkee"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/3931_iit-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p>देहरादून, 18 दिसंबर (भाषा) उत्तराखंड में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की में बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन शुरू हुआ जिसका उद्देश्य शिक्षा में इसके महत्व को बताना है।</p>
<p>तीन दिवसीय इस सम्मेलन में भारत के अलावा विदेशों से आए विद्वान, संत और शोधकर्ता भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार विमर्श करेंगे। सम्मेलन में करीब 150 शोध पत्र पेश किए जाएंगे।</p>
<p>सम्मेलन में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा को रामायण के मूल्यों को समझने और आत्मसात करने जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद सिर्फ आजीविका कमाना नहीं है बल्कि मानवता की सेवा करना है।</p>
<p>सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईआईटी- रुड़की के निदेशक प्रोफेसर के.के. पंत ने बताया कि उनके संस्थान का कुलगीत भी कवि गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस की चौपाई से प्रेरित है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘रामचरितमानस की पंक्ति ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ और आईआईटी-रुड़की का कुलगीत ‘सर्जन हित जीवन नित अर्पित’ दोनों समाज सेवा के महत्व को रेखांकित करते हैं।’’</p>
<p>पंत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांत अमूल्य हैं।</p>
<p>उन्होंने रामायण के मूल्यों, माता-पिता के प्रति कर्तव्य, सामाजिक जिम्मेदारी, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और ‘रामराज्य के आदर्श’ को सतत विकास, स्वास्थ्य, नैतिकता एवं राष्ट्र-निर्माण जैसे समकालीन विषयों से जोड़ते हुए युवाओं से आग्रह किया कि वे ज्ञान को केवल उच्च वेतन प्राप्ति का साधन न मानकर समाज की सेवा एवं ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण का माध्यम समझें।</p>
<p>संत महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद ने मोबाइल फोन और भौतिक चीजो के पीछे भागने वाले इस दौर में चरित्र निर्माण और आंतरिक सुख के लिए रामायण, महाभारत और दूसरे धर्मग्रंथों के महत्व के बारे में बताया।</p>
<p>उद्घाटन सत्र में ‘गीता शब्द अनुक्रमणिका’ (गीता शब्द इंडेक्स) का विमोचन भी किया गया।</p>
<p>यह सम्मेलन आईआईटी-रुड़की और श्री रामचरित भवन, अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>श्री रामचरित भवन के संस्थापक एवं ह्यूस्टन–डाउनटाउन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि रामायण एवं संबंधित आध्यात्मिक साहित्य पर आधारित लगभग 150 शोध पत्र सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाएंगे।</p>
<p>प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान प्रो. महावीर अग्रवाल को संस्कृत साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपराओं में पांच दशकों तक शिक्षण, अनुसंधान और सेवा के लिए मरणोपरांत ‘रामायण रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 21:28:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनसीईआरटी, आईआईटी-मद्रास ने शैक्षिक अनुसंधान एवं विकास के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शिक्षा में प्रौद्योगिकी नवाचार और अनुसंधान में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी-मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र में पहुंच, समावेशिता और गुणवत्ता में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और ‘मशीन लर्निंग’ (एमएल) सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना है।</p>
<p>स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा, ‘‘नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के दृष्टिकोण और लक्ष्यों को साकार करने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143770/ncert-iit-madras-signs-mou-for-educational-research-and-development"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/national-council-of-educational-research-and-training-ncert.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शिक्षा में प्रौद्योगिकी नवाचार और अनुसंधान में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी-मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र में पहुंच, समावेशिता और गुणवत्ता में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और ‘मशीन लर्निंग’ (एमएल) सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना है।</p>
<p>स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा, ‘‘नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के दृष्टिकोण और लक्ष्यों को साकार करने के लिए यह सहयोगात्मक प्रयास महत्वपूर्ण है। बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने के मद्देनजर सभी पुस्तकों को डिजिटल बनाने और 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘व्यक्तिगत रूप से अनुकूल शिक्षण (पीएएल) को विकसित करने की जरूरत है और एआई टूल का उपयोग करके भविष्य के कौशल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अच्छे शैक्षणिक और तकनीकी उपकरणों को विकसित करने की भी जरूरत है।’’</p>
<p>भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के साथ एमओयू का उल्लेख करते हुए एनसीईआरटी के अध्यक्ष दिनेश सकलानी ने कहा, ‘‘यह सहयोग सुलभ और समावेशी शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करके एनईपी-2020 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 18:29:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी बॉम्बे में अवैध रूप से प्रवेश के मामले में सुरक्षा चूक का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 28 जून (वेब वार्ता)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पवई में अवैध रूप से प्रवेश के मामले में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा की जांच टीम ने संस्थान की सुरक्षा टीम की ओर से लापरवाही पर चिंता जताई है और परिसर की सुरक्षा में गंभीर चूक को भी उजागर किया है।</p>
<p>गौरतलब है कि इस मामले में कर्नाटक के मंगलुरु के एक निवासी को अवैध रूप से छात्रावास में रहने और आईआईटी मुंबई में व्याख्यान में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह संस्थान भारत का प्रमुख तकनीकी संस्थानों और दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141597/security-lapse-revealed-in-case-of-illegal-entry-into-iit"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/3931_iit-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 28 जून (वेब वार्ता)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पवई में अवैध रूप से प्रवेश के मामले में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा की जांच टीम ने संस्थान की सुरक्षा टीम की ओर से लापरवाही पर चिंता जताई है और परिसर की सुरक्षा में गंभीर चूक को भी उजागर किया है।</p>
<p>गौरतलब है कि इस मामले में कर्नाटक के मंगलुरु के एक निवासी को अवैध रूप से छात्रावास में रहने और आईआईटी मुंबई में व्याख्यान में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह संस्थान भारत का प्रमुख तकनीकी संस्थानों और दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक है।</p>
<p>बिलाल अहमद फैयाज अहमद तेली नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर संस्थान के भीतर जासूसी गतिविधियों को अंजाम दिया और 14 दिनों तक अवैध रूप से आईआईटी पवई के अंदर रहा, सुरक्षा कर्मियों की नजर में आए बिना लगभग आठ से 10 बार परिसर में स्वतंत्र रूप से आता जाता रहा।<br />पुलिस को बिलाल के मोबाइल फोन पर मैसेजिंग और कॉलिंग प्लेटफॉर्म आईएमओ और सिग्नल ऐप मिले हैं।</p>
<p>अपराध शाखा के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं, जिसमें आरोपी को दो सप्ताह की अवधि में कई बार परिसर में प्रवेश करते और बाहर निकलते हुए देखा गया है। जांच ने संस्थान की सुरक्षा टीम की ओर से की गयी लापरवाही पर चिंता जताई है। सूत्रों ने कहा कि बिलाल परिसर में विभिन्न स्थानों पर सोता था, जिसमें हॉस्टल लॉबी में सोफे और खाली कमरों में गद्दे भी दिखाई दिये हैं, वह रोजाना अपने सोने की जगह बदलता था।</p>
<p>पूछताछ के आधार पर अपराध शाखा ने परिसर में उसके प्रवेश मार्गों और आवाजाही का नक्शा बनाया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि आगे की जांच में सहायता के लिए एक विस्तृत नक्शा तैयार किया गया है। हालांकि, उसके लंबे समय तक रहने और निगरानी के पीछे का मकसद अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।</p>
<p>अपराध शाखा ने बताया कि बिलाल ने वीपीएन का उपयोग करके आईआईटी पवई के आंतरिक क्षेत्रों के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए थे। उसके मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण से ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं। जांचकर्ता इन अपलोड के पीछे के उद्देश्य का पता लगाने में जुटे हैं।</p>
<p>सात से दस जून के बीच बिलाल कथित तौर पर मुंबई से सूरत गया और दावा किया कि वह अपने रिश्तेदारों से मिलने गया था। अपराध शाखा फिलहाल इस दावे की पुष्टि कर रही है। जांचकर्ताओं ने यह भी पाया है कि बिलाल कम से कम 21 ईमेल आईडी संचालित कर रहा था।</p>
<p>मामले की संवेदनशीलता काे देखते हुए, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) अब जांच में शामिल हो गए हैं और आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि कई सबूत संदिग्ध गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/141597/security-lapse-revealed-in-case-of-illegal-entry-into-iit</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 16:43:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्चतम न्यायालय ने आईआईटी दिल्ली में विद्यार्थियों की आत्महत्या की जांच का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की आत्महत्या की चिंताजनक प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी-दिल्ली) में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के दो छात्रों की आत्महत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज करे और उसकी जांच करे।</p>
<p>न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम जिला) को प्राथमिकी दर्ज करने और सहायक पुलिस आयुक्त रैंक के अधिकारी को जांच के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया।</p>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘ हमें इस विषय में और कुछ कहने की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139556/supreme-court-ordered-an-inquiry-into-students-suicides-in-iit"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/3931_iit-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की आत्महत्या की चिंताजनक प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी-दिल्ली) में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के दो छात्रों की आत्महत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज करे और उसकी जांच करे।</p>
<p>न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम जिला) को प्राथमिकी दर्ज करने और सहायक पुलिस आयुक्त रैंक के अधिकारी को जांच के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया।</p>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘ हमें इस विषय में और कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि किसी भी अपराध की जांच पुलिस के अधिकार क्षेत्र में है।’’</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हर शिक्षण संस्थान के प्रशासन के कंधों पर है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘ इसलिए, परिसर में आत्महत्या जैसी किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में, उचित प्रशासन के पास तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराना उसका स्पष्ट कर्तव्य बन जाता है।’’</p>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘ऐसी कार्रवाई न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करने के लिए नैतिक अनिवार्यता भी है। इसके साथ ही, पुलिस अधिकारियों का यह दायित्व है कि वे बिना किसी देरी या इनकार के प्राथमिकी दर्ज कर तत्परता और जिम्मेदारी के साथ काम करें।’’</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने कहा कि शिक्षण संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा इन दायित्वों का सम्यक निर्वहन ऐसी त्रासदियों की पुनरावृति रोकने तथा सामाजिक संस्थानों में विश्वास बनाये रखने के लिए जरूरी है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का समाधान करने और उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्याओं को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यबल के गठन का निर्देश दिया।</p>
<p>शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट इस बल का नेतृत्व करेंगे।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने आदेश में कहा, ‘‘हम सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश देते हैं कि वे अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी नोडल अधिकारी के रूप में नामित करें....।’’</p>
<p>यह निर्णय दो दिवंगत विद्यार्थियों के अभिभावकों की अपील पर आया है। इन अभिभावकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी जिसमें मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया गया था।</p>
<p>जुलाई 2023 में बीटेक छात्र आयुष आशना अपने छात्रावास के कमरे में फांसी पर लटके पाए गए थे। उसके बाद एक सितंबर 2023 को बीटेक छात्र और उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के निवासी अनिल कुमार (21) संस्थान के छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए। कुमार ने 2019 में आईआईटी में प्रवेश लिया था।</p>
<p>शिकायतों में उनकी मौतों को आत्महत्या नहीं बल्कि साजिश के परिणामस्वरूप हत्या बताया गया था और आईआईटी के शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा जातिगत भेदभाव किये जाने का भी आरोप लगाया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/139556/supreme-court-ordered-an-inquiry-into-students-suicides-in-iit</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 20:35:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी मद्रास ने स्तन कैंसर के अपेक्षाकृत सुरक्षित उपचार के लिए दवा देने की प्रणाली का पेटेंट कराया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के शोधकर्ताओं ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए दवा देने की नयी प्रणाली विकसित की है और उसका पेटेंट कराया है।</p>
<p>स्तन कैंसर वैश्विक स्तर पर महिलाओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, शोधकर्ताओं ने दवा वितरण प्रणाली को डिजाइन करने के लिए ‘नैनोमटेरियल’ के अनूठे गुणों का लाभ उठाया है जो कैंसरग्रस्त कोशिकाओं तक कैंसर-रोधी दवाओं को पहुंचा सकते हैं। यह नवाचार पारंपरिक उपचार विकल्पों के लिए एक सुरक्षित और अत्यधिक प्रभावी विकल्प प्रदान करता है।</p>
<p>संस्थान के एप्लाइड मैकेनिक्स और बायोमेडिकल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/132629/iit-madras-patented-the-system-of-giving-medication-for-relatively-safe-treatment-of-breast-cancer"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7448_breast-cancer.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के शोधकर्ताओं ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए दवा देने की नयी प्रणाली विकसित की है और उसका पेटेंट कराया है।</p>
<p>स्तन कैंसर वैश्विक स्तर पर महिलाओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, शोधकर्ताओं ने दवा वितरण प्रणाली को डिजाइन करने के लिए ‘नैनोमटेरियल’ के अनूठे गुणों का लाभ उठाया है जो कैंसरग्रस्त कोशिकाओं तक कैंसर-रोधी दवाओं को पहुंचा सकते हैं। यह नवाचार पारंपरिक उपचार विकल्पों के लिए एक सुरक्षित और अत्यधिक प्रभावी विकल्प प्रदान करता है।</p>
<p>संस्थान के एप्लाइड मैकेनिक्स और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर स्वाति सुधाकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘नैनोकैरियर बायोकम्पैटिबल हैं और गैर-कैंसरग्रस्त या स्वस्थ कोशिकाओं के लिए विषाक्त नहीं हैं। इसलिए, वे कीमोथेरेपी या विकिरण चिकित्सा या कीमोथेरेपेटिक दवाओं जैसे उपचारों के लिए एकदम सही विकल्प हैं, जो न केवल कैंसर कोशिकाओं पर हमला करते हैं बल्कि स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित करते हैं जिससे बालों का झड़ना, मतली, थकान जैसे गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं।’’</p>
<p>सुधाकर ने बताया कि बार-बार दवा की खुराक लेने से कैंसर कोशिकाएं कीमोथैरेपेटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध भी विकसित कर सकती हैं, जो अंततः उपचार के प्रभाव को कम कर देती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रयोगशाला में स्तन कैंसर कोशिकाओं पर कई परीक्षण किए गए, जिससे पता चला कि दवाओं से भरे नैनोआर्कियोसोम ने कैंसर कोशिकाओं में कोशिकाओं को समाप्त करना शुरू किया और कीमोथेरेपेटिक दवा की बहुत कम खुराक पर भी ट्यूमर के पनपने को प्रभावी ढंग से रोक दिया।’’</p>
<p>आईआईटी मद्रास और शिक्षा मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित अनुसंधान के निष्कर्षों को रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री द्वारा प्रकाशित मैटेरियल्स एडवांस और नैनोस्केल एडवांस सहित प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है।</p>
<p>इस शोध के लिए पिछले महीने एक भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया था। सुधाकर ने कहा, ‘‘यह शोध कैंसर उपचार थैरेपी को बदलने, जीवित रहने की दर में सुधार करने और दुनिया भर में लाखों रोगियों के लिए जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बहुत बड़ा वादा करता है। हमारा अगला कदम पशु मॉडल में इस दवा के प्रभाव का परीक्षण करना है।’’</p>
<p>प्रोफेसर ने बताया कि नियंत्रित तरीके से दवा की मात्रा देने से ट्यूमर बनने की जगह पर लंबे समय तक दवा की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जिससे बार-बार खुराक की आवश्यकता कम हो जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/132629/iit-madras-patented-the-system-of-giving-medication-for-relatively-safe-treatment-of-breast-cancer</link>
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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 15:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी-मद्रास ने स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले में सांस्कृतिक उत्कृष्टता कोटा शुरू किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले में “ललित कला और संस्कृति उत्कृष्टता (एफएसीई)” कोटा शुरू करने वाला देश का पहला आईआईटी बन गया है। संस्थान के निदेशक वी. कामकोटि ने यह जानकारी दी।</p>
<p>कामकोटि के मुताबिक, एफएसीई कोटा शैक्षणिक सत्र 2025-26 से शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कोटे का मकसद ललित कला और संस्कृति में उत्कृष्टता हासिल करने वाले छात्रों को पुरस्कृत एवं प्रोत्साहित करना है।</p>
<p>आईआईटी-मद्रास इससे पहले शैक्षणिक सत्र 2024-25 से स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले में खेल कोटा शुरू करने वाला पहला आईआईटी भी बना था।</p>
<p>कामकोटि के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले में “ललित कला और संस्कृति उत्कृष्टता (एफएसीई)” कोटा शुरू करने वाला देश का पहला आईआईटी बन गया है। संस्थान के निदेशक वी. कामकोटि ने यह जानकारी दी।</p>
<p>कामकोटि के मुताबिक, एफएसीई कोटा शैक्षणिक सत्र 2025-26 से शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कोटे का मकसद ललित कला और संस्कृति में उत्कृष्टता हासिल करने वाले छात्रों को पुरस्कृत एवं प्रोत्साहित करना है।</p>
<p>आईआईटी-मद्रास इससे पहले शैक्षणिक सत्र 2024-25 से स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले में खेल कोटा शुरू करने वाला पहला आईआईटी भी बना था।</p>
<p>कामकोटि के अनुसार, एफएसीई कोटा के तहत आईआईटी-मद्रास के सभी बीटेक और बीएस पाठ्यक्रमों में दो-दो सीटें आवंटित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि इन दो सीटों में से एक महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि दूसरी सीट लिंग तटस्थ होगी।</p>
<p>कामकोटि ने कहा, “आईआईटी-मद्रास अपने प्रत्येक स्नातक पाठ्यक्रम में एफएसीई दाखिले के जरिये उन भारतीय नागरिकों और भारत के विदेशी नागरिकों/भारतीय मूल के व्यक्तियों (ओसीआई/पीआईओ) के लिए दो अतिरिक्त सीटें बनाकर सीटों की पेशकश करेगा। जिन अभ्यर्थियों ने जेईई (एडवांस्ड)-2025 के लिए पंजीकरण के समय भारतीय नागरिकों के समान समझे जाने का विकल्प चुना है, वे एफएसीए कोटे के तहत दाखिले के लिए पात्र होंगे।”</p>
<p>उन्होंने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थियों को इस कोटे के तहत दाखिले के लिए आईआईटी-मद्रास/एफएसीई प्रवेश पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा।</p>
<p>कामकोटि ने कहा, “एफएसीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (जेओएसएए) पोर्टल के जरिये नहीं, बल्कि आईआईटी-मद्रास के बनाए एक अलग पोर्टल पर होगी, जिसमें एफएसीई के माध्यम से दाखिला देने में दिलचस्पी रखने वाले अन्य आईआईटी भी हिस्सा ले सकते हैं। शैक्षणिक वर्ष 2025-2026 के लिए केवल आईआईटी-मद्रास ललित कला और संस्कृति उत्कृष्टता कोटे के तहत सीटों की पेशकश कर रहा है।”</p>
<p>उन्होंने बताया, “प्रत्येक अभ्यर्थी को उसकी श्रेणी के अनुसार ललित कला और संस्कृति में उसकी उत्कृष्टता के आधार पर अंक दिया जाएगा। विभिन्न ललित कला एवं संस्कृति कार्यक्रमों में अभ्यर्थियों के प्रदर्शन या उन्हें प्राप्त पुरस्कारों या छात्रवृत्तियों के आधार पर उन्हें मिले कुल अंक के आधार पर एक अलग एफएसीई रैंक सूची (एफआरएल) तैयार की जाएगी।”</p>
<p>कामकोटि ने कहा कि पात्रता मानदंड के अनुसार अभ्यर्थी का जेईई (एडवांस्ड)-2025 उत्तीर्ण करना और कॉमन रैंक लिस्ट (सीआरएल) या श्रेणी-वार रैंक सूची में स्थान हासिल करना अनिवार्य है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “रैंक सूची में स्थान ऐसी किसी भी श्रेणी में हो सकता है, जिसके लिए रैंक सूची तैयार की जाती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आरक्षण का लाभ न बेकार जाए और अपेक्षित शैक्षणिक आवश्यकता कमतर न हो। अभ्यर्थी को आईआईटी के लिए पात्रता मानदंड के अनुसार 12वीं कक्षा में न्यूनतम आवश्यक अंक प्राप्त करने होंगे।”</p>
<p>कामकोटि ने बताया, “अभ्यर्थियों को ललित कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी उत्कृष्टता के लिए चयनित श्रेणियों में से कम से कम एक में मान्यता हासिल होनी चाहिए।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/111338/iit-madras-introduces-cultural-excellence-quota-in-admissions-to-undergraduate-courses</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 11:00:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रगति के लिए प्रौद्योगिकी जरूरी, पर इसके दुरुपयोग को लेकर सतर्क रहने की जरूरत: जीत अदाणी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 17 दिसंबर (भाषा) अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लि. के निदेशक जीत अदाणी ने मंगलवार को कहा कि देश वैश्विक प्रौद्योगिकी की दौड़ से बाहर नहीं रह सकता है और उसे ऐसी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए जो इसके दुरुपयोग के खिलाफ सतर्क रहते हुए इसे शीर्ष पर रखें।</p>
<p>उद्योगपति गौतम अदाणी के छोटे पुत्र जीत अदाणी ने आईआईटी बंबई के टेकफेस्ट-2024 में कहा कि प्रौद्योगिकी का भविष्य डरावना और रोमांचक दोनों है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन चाहे यह डरावना हो या रोमांचक, हम एक राष्ट्र के रूप में या उसके नागरिक के रूप में प्रौद्योगिकी को न तो नजरअंदाज कर सकते हैं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/111572/technology-is-necessary-for-progress--but-need-to-be-cautious-about-its-misuse--jeet-adani"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k18122024-01.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 17 दिसंबर (भाषा) अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लि. के निदेशक जीत अदाणी ने मंगलवार को कहा कि देश वैश्विक प्रौद्योगिकी की दौड़ से बाहर नहीं रह सकता है और उसे ऐसी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए जो इसके दुरुपयोग के खिलाफ सतर्क रहते हुए इसे शीर्ष पर रखें।</p>
<p>उद्योगपति गौतम अदाणी के छोटे पुत्र जीत अदाणी ने आईआईटी बंबई के टेकफेस्ट-2024 में कहा कि प्रौद्योगिकी का भविष्य डरावना और रोमांचक दोनों है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन चाहे यह डरावना हो या रोमांचक, हम एक राष्ट्र के रूप में या उसके नागरिक के रूप में प्रौद्योगिकी को न तो नजरअंदाज कर सकते हैं और न ही उसके उपयोग में धीमी गति से चल सकते। भारत इस वैश्विक दौड़ से बाहर नहीं रह सकता।’’</p>
<p>अदाणी ने कहा, ‘‘अगर हम शीर्ष पर रहना चाहते हैं और 2047 तक विकसित भारत के अपने सपने को साकार करना चाहते हैं तो हमारी पीढ़ी को इस नए प्रौद्योगिकी युग में भारत का नेतृत्व करने के लिए क्षमताओं का निर्माण करने की आवश्यकता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी ने मानव जाति को प्रगति करने में मदद की है, पर इसका उपयोग फर्जी समाचार, फर्जी तस्वीरें, फर्जी वीडियो, ऑनलाइन घोटाले और साइबर अपराध जैसे गलत कार्यों के लिए भी किया जा रहा है।</p>
<p>अदाणी ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी का दायरा और शक्ति बढ़ती है, हमें इस बात के लिए सावधान रहना चाहिए कि प्रौद्योगिकी के नुकसानदायक उपयोग को प्रौद्योगिकी के लाभकारी उपयोग पर हावी न होने दें। प्राद्योगिकी उतनी ही अच्छी है जितना लाभ देती है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज हम कृत्रिम मेधा (एआई) की ताकत से लैस एक नई दुनिया के मुहाने पर खड़े हैं। हम सभी को खुद से पूछना चाहिए कि यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि प्रौद्योगिकी की विशाल क्षमता का उपयोग अच्छे के लिए किया जाए। इसकी कोई सीमा नहीं है कि प्रौद्योगिकी हमें कहां ले जा सकती है। लेकिन इसके आगे बढ़ने का मार्गदर्शन करना हमारी पीढ़ी की जिम्मेदारी है।’’</p>
<p>अदाणी ने छात्रों से अपनी प्रौद्योगिकी गतिविधियों का उपयोग सामाजिक लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में करने का आग्रह किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही यूपीआई और डिजिटल इंडिया जैसे उपायों के माध्यम से उद्देश्यपूर्ण प्रौद्योगिकी को अपना लिया है। इसने वित्तीय और डिजिटल सेवाओं को लाखों लोगों के लिए सुलभ बना दिया है।</p>
<p>अदाणी ने कहा कि देश में हर साल 180 अरब ‘कैशलेस’ लेनदेन हो रहे हैं और यह अमेरिकी, ब्रिटेन जैसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं अधिक संख्या है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी का उपयोग न केवल आर्थिक वृद्धि के लिए बल्कि स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और संचालन व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 10:44:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी खड़गपुर के मुख्य परिसर से स्वास्थ्य सुविधाएं चार किमी की दूरी पर ले जाने को लेकर विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोलकाता, 15 दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर शिक्षक संघ (आईआईटीटीए) ने परिसर के अंदर स्थित ज्यादातर स्वास्थ्य सुविधाओं को करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित नये डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल (एसपीएमएसएच) में स्थानांतरित करने संबंधी संस्थान के अधिकारियों के निर्णय का विरोध किया है।</p>
<p>संस्थान के प्रबंधन ने दलील दी है कि इस कदम का उद्देश्य अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और मरीजों के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अस्पताल की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना है।</p>
<p>यह मुद्दा उठाते हुए आईआईटीटीए ने शनिवार को अधिकारियों को लिखे पत्र में कहा कि इस तरह के किसी भी स्थानांतरण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>कोलकाता, 15 दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर शिक्षक संघ (आईआईटीटीए) ने परिसर के अंदर स्थित ज्यादातर स्वास्थ्य सुविधाओं को करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित नये डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल (एसपीएमएसएच) में स्थानांतरित करने संबंधी संस्थान के अधिकारियों के निर्णय का विरोध किया है।</p>
<p>संस्थान के प्रबंधन ने दलील दी है कि इस कदम का उद्देश्य अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और मरीजों के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अस्पताल की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना है।</p>
<p>यह मुद्दा उठाते हुए आईआईटीटीए ने शनिवार को अधिकारियों को लिखे पत्र में कहा कि इस तरह के किसी भी स्थानांतरण से विद्यार्थियों सहित परिसर के लोगों को काफी असुविधा होगी और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।</p>
<p>संस्थान द्वारा 12 दिसंबर को जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए शिक्षक संघ ने पत्र में कहा, ‘‘संस्थान के प्रशासन ने परिसर में स्थित डॉ. बी. सी. रॉय टेक्नोलॉजी अस्पताल (बीसीआरटीएच) के कर्मियों और बुनियादी ढांचे को नए एसपीएमएसएच में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है, जो परिसर से चार किलोमीटर दूर बलरामपुर में स्थित है।’’</p>
<p>पत्र में कहा गया है, ‘‘बीसीआरटीएच में केवल आपातकालीन प्राथमिक देखभाल और फार्मेसी ही रहेंगी। यह बदलाव विद्यार्थियों सहित परिसर में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा व्यवधान बनने जा रहा है। हम इस बात से स्तब्ध हैं कि शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों या विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी भी मान्यता प्राप्त संगठन से कभी भी परामर्श नहीं किया गया। हालांकि ‘अस्पताल प्रबंधन समिति’ नामक एक समिति मौजूद है जिसमें इन सभी हितधारकों का प्रतिनिधित्व शामिल है।’’</p>
<p>आईआईटी खड़गपुर के प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि इस कदम का उद्देश्य उन्नत बुनियादी ढांचे के साथ परिसर के भीतर और बाहर रहने वाले लोगों को बेहतर विशिष्ट उपचार उपलब्ध कराना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/110562/controversy-over-moving-health-facilities-to-a-distance-of-four-kilometers-from-the-main-campus-of-iit-kharagpur</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 18:26:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहली बार, आईआईटी मद्रास ने भ्रूण के मस्तिष्क की सबसे विस्तृत 3डी तस्वीरें जारी कीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा)भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास भ्रूण के मस्तिष्क की सबसे विस्तृत 3डी उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें जारी करने वाला दुनिया का पहला अनुसंधान संस्थान बन गया है। आईआईटी मद्रास के निदेशक वी.कामकोटी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>इस तरह के हाई-रिजॉल्यूशन वाली मस्तिष्क तस्वीर तैयार करने का मुख्य उद्देश्य विकासात्मक विकारों के शीघ्र निदान और उपचार के लिए वर्तमान भ्रूण इमेजिंग प्रौद्योगिकियों में प्रगति है।</p>
<p>कामकोटी ने बताया कि आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर द्वारा किया गया अग्रणी कार्य ब्रेन मैपिंग प्रौद्योगिकी की सीमाओं को परे ले जाता है और भारत को ब्रेन मैपिंग विज्ञान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108602/for-the-first-time--iit-madras-releases-the-most-detailed-3d-images-of-the-fetal-brain"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k10122024-12.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा)भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास भ्रूण के मस्तिष्क की सबसे विस्तृत 3डी उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें जारी करने वाला दुनिया का पहला अनुसंधान संस्थान बन गया है। आईआईटी मद्रास के निदेशक वी.कामकोटी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>इस तरह के हाई-रिजॉल्यूशन वाली मस्तिष्क तस्वीर तैयार करने का मुख्य उद्देश्य विकासात्मक विकारों के शीघ्र निदान और उपचार के लिए वर्तमान भ्रूण इमेजिंग प्रौद्योगिकियों में प्रगति है।</p>
<p>कामकोटी ने बताया कि आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर द्वारा किया गया अग्रणी कार्य ब्रेन मैपिंग प्रौद्योगिकी की सीमाओं को परे ले जाता है और भारत को ब्रेन मैपिंग विज्ञान के वैश्विक समूह में स्थान दिलाता है, क्योंकि यह दुनिया में अपनी तरह का पहला कार्य है।</p>
<p>अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक देश के लिए भ्रूण से लेकर बच्चे, किशोरावस्था और युवा वयस्क तक के मस्तिष्क के विकास तथा ऑटिज्म जैसे विकासात्मक विकारों को समझना महत्वपूर्ण है।</p>
<p>संस्थान के निदेशक के मुताबिक, ‘‘विश्व स्तर पर पहली बार, संस्थान में सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर द्वारा विकसित अत्याधुनिक ब्रेन मैपिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग करके 5,132 मस्तिष्क खंडों को डिजिटल तस्वीरों में अंकित किया गया है। यह कार्य तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र को आगे बढ़ाएगा और संभावित रूप से मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली स्वास्थ्य स्थितियों के लिए उपचार के विकास की ओर ले जाएगा।’’</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">For the first time, the Sudha Gopalakrishnan Brain Centre at <a href="https://twitter.com/iitmadras?ref_src=twsrc%5Etfw">@iitmadras</a> has released detailed 3D high-resolution images of the human fetal brain—DHARANI, featuring 5,132 brain sections at cell resolution. Remarkably, it was done at less than 1/10th the cost of similar Western… <a href="https://t.co/TPkcNjUmjm">pic.twitter.com/TPkcNjUmjm</a></p>
— IIT Madras (@iitmadras) <a href="https://twitter.com/iitmadras/status/1866408359215378674?ref_src=twsrc%5Etfw">December 10, 2024</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक कार्य पहली बार हुआ है जब भारत से इस तरह के उन्नत मानव तंत्रिका विज्ञान डेटा तैयार किया है। यह परियोजना पश्चिमी देशों की तुलना में 1/10वें हिस्से से भी कम लागत पर पूरी की गई। यह अनुसंधान भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, रोमानिया और दक्षिण अफ्रीका के अनुसंधानर्ताओं के साथ आईआईटी मद्रास की एक बहु-विषयक टीम द्वारा किया गया। इसमें चेन्नई स्थित मेडिस्कैन सिस्टम्स और सविता मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा सहयोग किया गया।’’</p>
<p>अनुसंधान के निष्कर्षों को एक विशेष अंक के रूप में जर्नल ऑफ कम्पेरेटिव न्यूरोलॉजी में प्रकाशित किया गया। यह एक शताब्दी पुराना समकक्ष-समीक्षित तंत्रिकमंत्र विज्ञान पर केंद्रित पत्रिका है।</p>
<p>ये आंकड़े ‘ डीएचएआरएएनआई’ विश्व भर के सभी अनुसंधानकर्ताओं के लिए निःशुल्क उपलब्ध है।</p>
<p>जर्नल ऑफ कम्पेरेटिव न्यूरोलॉजी के प्रधान संपादक सुजाना हरकुलानो-हौजेल ने कहा, ‘‘डीएचएआरएएनआई’ अब मानव भ्रूण मस्तिष्क का सबसे बड़ा सार्वजनिक रूप से सुलभ डिजिटल डाटा है। इसे एलन ब्रेन एटलस को संचालित करने वाले शुरुआती फंड के दसवें हिस्से से भी कम राशि से बनाया गया है, और एक प्रौद्योगिकी मंच है जिसे 2020 और 2022 के बीच कोविड महामारी के दौरान पूरी तरह से भारत में संकलित किया गया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार, आईआईटी मद्रास एलन ब्रेन इंस्टीट्यूट की कतार में शामिल हो गया है, और भारत मानव मस्तिष्क मानचित्रण के क्षेत्र में अमेरिका की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां मानव मस्तिष्क की संरचनाओं के बारे में उपलब्ध ज्ञान के एटलस को मानव जाति को निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए बड़ी रकम का निवेश किया जाता है।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Dec 2024 21:00:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>आईआईटी दिल्ली वहनीयता के लिहाज भारतीय विश्वविद्यालयों में अग्रणी: क्यूएस रैंकिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) वहनीयता के लिहाज से भारत के विश्वविद्यालयों में अग्रणी स्थान पर है और दुनिया भर में इसका स्थान 255 से बढ़कर 171वें स्थान पर पहुंच गया है। मंगलवार को घोषित क्यूएस रैंकिंग में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>क्यूएस की वहनीयता रैंकिंग (2025) में भारत के कुल 78 विश्वविद्यालयों को जगह मिली है। इसमें 10 संस्थानों में से नौ की रैंकिग में सुधार हुआ है और 21 नए संस्थान इस सूची में शामिल हुए हैं।</p>
<p>पर्यावरणीय प्रभाव के लिए आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108652/iit-delhi-leads-indian-universities-in-terms-of-affordability--qs-ranking"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/3931_iit-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) वहनीयता के लिहाज से भारत के विश्वविद्यालयों में अग्रणी स्थान पर है और दुनिया भर में इसका स्थान 255 से बढ़कर 171वें स्थान पर पहुंच गया है। मंगलवार को घोषित क्यूएस रैंकिंग में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>क्यूएस की वहनीयता रैंकिंग (2025) में भारत के कुल 78 विश्वविद्यालयों को जगह मिली है। इसमें 10 संस्थानों में से नौ की रैंकिग में सुधार हुआ है और 21 नए संस्थान इस सूची में शामिल हुए हैं।</p>
<p>पर्यावरणीय प्रभाव के लिए आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में शामिल हुए हैं।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान को पर्यावरण शिक्षा के लिए दुनिया के शीर्ष 50 संस्थानों की सूची में जगह मिली है।</p>
<p>लंदन में रह रहे क्यूएस के उपाध्यक्ष बेन सॉटर ने कहा, ‘‘क्यूएस सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग (2025) में शामिल 78 भारतीय विश्वविद्यालयों में से 34 ने पिछले वर्ष की तुलना में सुधार किया है तथा आठ का स्थान इस बार भी बरकरार रहा है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यह भारतीय उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे यह पता चलता है कि भारतीय विश्वविद्यालय वहनीयता के लिए अपनी पहलों पर काम कर रहे हैं।’’</p>
<p>सॉटर ने कहा, ‘‘सामाजिक प्रभाव की श्रेणी में शामिल होने के लिए भारत के विश्वविद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा और समानता के क्षेत्र में सुधार कर सकते हैं क्योंकि इस श्रेणी में कोई भी संस्थान शीर्ष 350 में शामिल नहीं है। भारत के विश्वविद्यालयों ने ज्ञान का आदान-प्रदान, रोजगार एवं परिणाम के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है।’’</p>
<p>क्यूएस की 2025 की रैंकिंग में 107 देशों तथा क्षेत्रों के 1,740 से अधिक विश्वविद्यालय शामिल हैं जबकि पिछले साल 95 स्थानों के केवल 1397 संस्थानों को जगह मिली थी। इससे पता चलता है कि इस साल की क्यूएस रैंक में बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>क्यूएस रैंकिंग में इस साल टोरंटो विश्वविद्यालय को शीर्ष स्थान मिला है जबकि ईटीएच ज्यूरिख दूसरे स्थान पर है तथा स्वीडन का लुंड विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बर्कले (यूसीबी) तीसरे स्थान पर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Dec 2024 19:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रक चालन के व्यवहार का आकलन करने के लिए एआई संचालित मोबाइल ऐप तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता पर ‘ट्रक ड्राइविंग’ व्यवहार का मूल्यांकन करने के लिए एक एआई संचालित मोबाइल ऐप विकसित किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मोबाइल एप्लीकेशन पूर्वानुमानित अलर्ट भी भेजता है, जो सड़क अवसंरचना के स्थैतिक संदर्भ के सापेक्ष अपर्याप्त ड्राइविंग व्यवहार के बारे में ड्राइवरों को सूचित करता है और इसमें उन डीजल ट्रकों के ड्राइवरों को नामांकित किया जाएगा जो न्यूनतम 4,000 किमी प्रति माह की लंबी दूरी पर परिचालन कर रहे हैं।।</p>
<p>आईआईटी मद्रास में ‘जीरो एमिशन ट्रकिंग’ के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108298/ai-powered-mobile-app-ready-to-assess-truck-driving-behavior"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k09122024-15.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता पर ‘ट्रक ड्राइविंग’ व्यवहार का मूल्यांकन करने के लिए एक एआई संचालित मोबाइल ऐप विकसित किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मोबाइल एप्लीकेशन पूर्वानुमानित अलर्ट भी भेजता है, जो सड़क अवसंरचना के स्थैतिक संदर्भ के सापेक्ष अपर्याप्त ड्राइविंग व्यवहार के बारे में ड्राइवरों को सूचित करता है और इसमें उन डीजल ट्रकों के ड्राइवरों को नामांकित किया जाएगा जो न्यूनतम 4,000 किमी प्रति माह की लंबी दूरी पर परिचालन कर रहे हैं।।</p>
<p>आईआईटी मद्रास में ‘जीरो एमिशन ट्रकिंग’ के लिए उत्कृष्टता केंद्र (सीओईजेडईटी) ने दो प्रमुख परियोजनाएं शुरू की हैं।</p>
<p>आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटि के अनुसार, इसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक ट्रकों की तरह ‘जीरो एमिशन ट्रक’ (जेट) को अपनाने में तेजी लाना है क्योंकि सभी वाहनों में ट्रक केवल 5 प्रतिशत हैं, लेकिन वे लगभग 65 प्रतिशत डीजल की खपत करते हैं, जिससे काफी प्रदूषण होता है और ईंधन की खपत एवं लागत अधिक होती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसे कई लोग हैं जो ट्रक विद्युतीकरण के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ काम कर रहे हैं और आईआईटी मद्रास इस सबसे उपेक्षित समुदाय के साथ जुड़ रहा है जो ई-ट्रकों को अपनाने में सबसे महत्वपूर्ण होने जा रहा है।</p>
<p>आईआईटी मद्रास के निदेशक ने बताया कि भारत का ट्रक उद्योग तेजी से विकास की राह पर है और माल ढुलाई सड़क-आधारित परिवहन का 70 प्रतिशत हिस्सा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इस पहल से भारत को ट्रकों के विद्युतीकरण में तेजी लाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिससे पेट्रोलियम के आयात की लागत में बचत होगी, प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा, उत्सर्जन में कमी आएगी और चालक की सुविधा और कल्याण में वृद्धि होगी।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 21:05:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी गुवाहाटी ने मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड को पर्यावरण अनुकूल जैव ईंधन में बदलने की तकनीक विकसित की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के अनुसंधानकर्ताओं ने मीथेनोट्रोफिक बैक्टीरिया का उपयोग करके मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड को स्वच्छ जैव ईंधन में परिवर्तित करने के लिए एक उन्नत जैविक विधि विकसित की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह नवीन दृष्टिकोण टिकाऊ ऊर्जा समाधान और जलवायु परिवर्तन को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।</p>
<p>एल्सेवियर की प्रमुख पत्रिका ‘फ्यूल’ में प्रकाशित यह अनुसंधान दो महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों - ग्रीनहाउस गैसों के हानिकारक पर्यावरणीय प्रभाव और जीवाश्म ईंधन भंडारों की कमी कर समाधान पेश करता है।</p>
<p>आईआईटी गुवाहाटी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108123/iit-guwahati-develops-technology-to-convert-methane--carbon-dioxide-into-eco-friendly-biofuel"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k09122024-09.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के अनुसंधानकर्ताओं ने मीथेनोट्रोफिक बैक्टीरिया का उपयोग करके मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड को स्वच्छ जैव ईंधन में परिवर्तित करने के लिए एक उन्नत जैविक विधि विकसित की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह नवीन दृष्टिकोण टिकाऊ ऊर्जा समाधान और जलवायु परिवर्तन को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।</p>
<p>एल्सेवियर की प्रमुख पत्रिका ‘फ्यूल’ में प्रकाशित यह अनुसंधान दो महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों - ग्रीनहाउस गैसों के हानिकारक पर्यावरणीय प्रभाव और जीवाश्म ईंधन भंडारों की कमी कर समाधान पेश करता है।</p>
<p>आईआईटी गुवाहाटी के बायोसाइंसेज एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर देबाशीष दास ने बताया कि ग्रीनहाउस गैस मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड से 27 से 30 गुना अधिक शक्तिशाली है और ग्लोबल वार्मिंग में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड को तरल ईंधन में परिवर्तित करने से उत्सर्जन में कमी आ सकती है और नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध हो सकती है, लेकिन मौजूदा रासायनिक विधियां महंगी हैं और विषाक्त उप-उत्पाद उत्पन्न करती हैं, जिससे उनकी मापनीयता सीमित हो जाती है।’’</p>
<p>दास ने कहा कि उनकी टीम ने एक पूर्ण जैविक प्रक्रिया विकसित की है, जो हल्की परिचालन स्थितियों के तहत मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड को बायो-मेथनॉल में परिवर्तित करने के लिए एक प्रकार के मीथेनोट्रोफिक बैक्टीरिया का उपयोग करती है।</p>
<p>प्रोफेसर ने कहा, ‘‘पारंपरिक रासायनिक विधियों के विपरीत यह प्रक्रिया महंगे उत्प्रेरकों की आवश्यकता को समाप्त कर देती है, विषाक्त उप-उत्पादों से बचाती है तथा अधिक ऊर्जा-कुशल तरीके से कार्य करती है।’’</p>
<p>अनुसंधानकर्ताओं ने दावा किया कि इस विधि से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, हाइड्रोजन सल्फाइड और धुएं के उत्सर्जन में 87 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।</p>
<p>दास के अनुसार, यह अनुसंधान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि यह दर्शाता है कि मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड पर निर्भर बैक्टीरिया से प्राप्त बायो-मेथनॉल, जीवाश्म ईंधन का एक व्यवहार्य विकल्प हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/108123/iit-guwahati-develops-technology-to-convert-methane--carbon-dioxide-into-eco-friendly-biofuel</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 19:51:25 +0530</pubDate>
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