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                <title>Syria - Loktej</title>
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                <description>Syria RSS Feed</description>
                
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                <title>सीरिया के भविष्य को लेकर प.एशिया के पुराने दो दुश्मनों के बीच कटु प्रतिद्वंद्विता उभर रही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(अमीन सैकल, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी )</p>
<p>कैनबरा, 18 दिसंबर (द कन्वरसेशन) सीरिया में बशर अल-असद के शासन का अंत होने के बाद पश्चिमी एशिया के पुराने दो दुश्मनों के बीच एक बार फिर से कटु प्रतिद्वंद्विता उभर रही है।</p>
<p>सीरिया में ईरान और रूस की सबसे प्रभावशाली भूमिका के बजाय इजराइल और तुर्किये अपने परस्पर विरोधी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने का अवसर तलाश रहे हैं।</p>
<p>इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के नेतृत्व में हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंध तेजी से खराब हुए हैं। इससे दोनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/111824/bitter-rivalry-is-emerging-between-two-old-enemies-of-east-asia-over-the-future-of-syria"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k15122024-01.jpg" alt=""></a><br /><p>(अमीन सैकल, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी )</p>
<p>कैनबरा, 18 दिसंबर (द कन्वरसेशन) सीरिया में बशर अल-असद के शासन का अंत होने के बाद पश्चिमी एशिया के पुराने दो दुश्मनों के बीच एक बार फिर से कटु प्रतिद्वंद्विता उभर रही है।</p>
<p>सीरिया में ईरान और रूस की सबसे प्रभावशाली भूमिका के बजाय इजराइल और तुर्किये अपने परस्पर विरोधी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने का अवसर तलाश रहे हैं।</p>
<p>इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के नेतृत्व में हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंध तेजी से खराब हुए हैं। इससे दोनों देशों के बीच सीरिया को लेकर कटु टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई है।</p>
<p>एक नयी प्रतिद्वंद्विता उभर रही है:</p>
<p>ऐसा माना जा रहा है कि तुर्किये ने सीरिया के विद्रोही गुट ‘हयात तहरीर अल-शाम’ समूह (एचटीएस) के नेतृत्व में असद को सत्ता से हटाने के लिए किए गए हमले का समर्थन का किया है जिससे सीरिया के सहयोगी ईरान और रूस को धोखा मिला है। तेहरान का मानना है कि तुर्किये के समर्थन के बिना एचटीएस यह नहीं कर पाता।</p>
<p>अब ऐसा माना जा रहा है कि असद के शासन का अंत हो जाने के बाद एर्दोआन सुन्नी मुस्लिम दुनिया के लिए खुद को नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>तुर्किये ने असद के शासन का अंत होने के तुरंत बाद दमिश्क में अपना दूतावास फिर से खोल दिया और उसने सीरिया का शासन चलाने में एचटीएस को मदद करने की भी पेशकश की।</p>
<p>दूसरी ओर, इजराइल ने अपनी क्षेत्रीय और सुरक्षा महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए सीरिया में किसी का भी शासन न होने का लाभ उठाया। इसने सीरिया के गोलान हाइट्स क्षेत्र में घुसपैठ की और देश भर में इसकी सैन्य संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर बमबारी की।</p>
<p>तुर्किये ने सीरिया और गोलान हाइट्स पर इजराइल की कार्रवाई को जमीन हड़पने का प्रयास माना। अरब देशों ने इजराइल की इस कार्रवाई की निंदा की और सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की मांग की।</p>
<p>इजराइल, सीरिया के एक जिहादी राज्य में तब्दील होने तथा वहां स्पष्ट रूप से एक इस्लामी समूह के सत्ता पर काबिज हो जाने से चिंतित है। हालांकि, एचटीएस के नेता अहमद अल-शरा (जिन्हें मोहम्मद अल-गोलानी के नाम से भी जाना जाता है) ने संकेत दिया है कि वह इजराइल के साथ संघर्ष नहीं चाहते। उन्होंने यह भी वचन दिया है कि वे किसी भी समूह को इजराइल पर हमले के लिए सीरिया का उपयोग करने की अनुमति नहीं देंगे।</p>
<p>दो कट्टर दुश्मन:</p>
<p>तुर्किय के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन लंबे समय से फलस्तीन का समर्थन और इजराइल की घोर आलोचना करते आए हैं। गाजा में हमास के साथ युद्ध शुरु हो जाने के बाद से इजराइल और तुर्किये के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पिछले कई वर्षों से एर्दोआन पर निशाना साधते रहे हैं। उन्होंने एर्दोआन को एक ‘‘मजाक’’ और ‘‘तानाशाह’’ कहा जिनकी जेलों में सबसे ज्यादा पत्रकार और राजनीति से जुड़े लोग बंद हैं। उन्होंने एर्दोआन पर कुर्द लोगों का ‘‘नरसंहार’’ करने का भी आरोप लगाया था।</p>
<p>तुर्किये और इजराइल का सहयोगी माने जाने वाले अमेरिका ने यह सुनिश्चित करने के लिए गहन कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं कि एचटीएस सीरिया के भविष्य को सही दिशा में ले जाए। वह असद के शासन का अंत होने के बाद सत्ता पर काबिज हुई सरकार से चाहता है कि वह अमेरिका के हितों के अनुसार ही काम करे।</p>
<p>अमेरिका के इन हितों में पूर्वोत्तर सीरिया में एचटीएस अमेरिका के कुर्द सहयोगियों का समर्थन करे और देश में अमेरिका के हजार सैनिकों को तैनात रहने दे। अमेरिका यह भी चाहता है कि एचटीएस इस्लामिक स्टेट आतंकी समूह को पुनः ताकत हासिल करने से रोकता रहे।</p>
<p>अमेरिका को सीरिया में इजराइल और तुर्किए के बीच उभरती भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का भी प्रबंधन करना होगा।</p>
<p>कुछ पर्यवेक्षकों ने इजराइल और तुर्किये के बीच सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि उनके बीच युद्ध होने वाला है। लेकिन उनके हितों में टकराव और आपसी दुश्मनी की गहराई निश्चित रूप से एक नए स्तर पर पहुंच गई है।</p>
<p>ईरान की हार महंगी पड़ सकती है:</p>
<p>ईरान के लिए असद को हटाए जाने का मतलब है कि इजराइल और अमेरिका के खिलाफ मुख्यतः शिया बहुल ‘‘प्रतिरोध की धुरी’’ में एक महत्वपूर्ण सहयोगी को खो देना। ईरानी शासन ने पिछले 45 वर्षों में अपनी राष्ट्रीय और व्यापक सुरक्षा के मूलभूत हिस्से के रूप में इस गिरोह को बनाने के लिए कड़ी मेहनत की थी।</p>
<p>इसने 2011 में असद के खिलाफ शुरू हुए लोकप्रिय विद्रोह के बाद से लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से सीरिया में सुन्नी बहुसंख्यक आबादी पर असद की अल्पसंख्यक अलावी तानाशाही को कायम रखा था।</p>
<p>असद शासन का अचानक पतन हो जाने से अब ईरान में इस बात पर आत्ममंथन किया जा रहा है कि ईरान की क्षेत्रीय रणनीति मजबूत है या नहीं और नये सीरिया में यह क्या भूमिका निभाएगा।</p>
<p>द कन्वरसेशन</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 10:00:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मादक पदार्थ कैप्टागन क्या है, इसका सीरिया की असद सरकार के पतन से क्या संबंध है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(निकोल ली, कर्टिन विश्वविद्यालय)</p>
<p>पर्थ, 15 दिसंबर (द कन्वरसेशन) सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद वहां मादक पदार्थ कैप्टागन के बड़े भंडार का खुलासा हुआ है।</p>
<p>माना जा रहा है कि सीरियाई विद्रोहियों ने जिस भंडार का पता लगाया है वह अल-असद सैन्य मुख्यालय से जुड़ा हुआ है। जिससे पता चलता है कि इस मादक पदार्थ के निर्माण और वितरण में सीरियाई शासन की संलिप्तता थी।</p>
<p>लेकिन जैसा कि हमें पता है कैप्टागन का इस्तेमाल एक समय औषधि के तौर पर ठीक वैसे ही होता था, जैसे ‘ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार’ (एडीएचडी) जैसी स्थितियों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110575/what-is-the-drug-captagon--what-is-its-connection-with-the-fall-of-syria-s-assad-government"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/16122024-14.jpg" alt=""></a><br /><p>(निकोल ली, कर्टिन विश्वविद्यालय)</p>
<p>पर्थ, 15 दिसंबर (द कन्वरसेशन) सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद वहां मादक पदार्थ कैप्टागन के बड़े भंडार का खुलासा हुआ है।</p>
<p>माना जा रहा है कि सीरियाई विद्रोहियों ने जिस भंडार का पता लगाया है वह अल-असद सैन्य मुख्यालय से जुड़ा हुआ है। जिससे पता चलता है कि इस मादक पदार्थ के निर्माण और वितरण में सीरियाई शासन की संलिप्तता थी।</p>
<p>लेकिन जैसा कि हमें पता है कैप्टागन का इस्तेमाल एक समय औषधि के तौर पर ठीक वैसे ही होता था, जैसे ‘ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार’ (एडीएचडी) जैसी स्थितियों के उपचार के लिये हम कानूनी रूप से उपलब्ध कुछ दवाओं का आज भी करते हैं।</p>
<p>कैप्टागन कभी एक दवा थी</p>
<p>कैप्टागन एक पुराने सिंथेटिक फार्मास्युटिकल उत्प्रेरक का मूल ब्रांड नाम है जिसे 1960 के दशक में जर्मनी में बनाया गया था। यह एम्फ़ैटेमिन और मेथैम्फेटामाइन का एक विकल्प था। उस समय इन दोनों का इस्तेमाल दवा के रूप में किया जाता था।</p>
<p>इस दवा में सक्रिय घटक फेनेथिलीन है और शुरुआत में एडीएचडी और नींद की बीमारी नार्कोलेप्सी जैसी स्थितियों के उपचार के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। इसका उपयोग कानूनी रूप से उपलब्ध कुछ उत्प्रेरक पदार्थों के समान था, जिनका हम आज भी उपयोग करते हैं जैसे कि डेक्साम्फैटामाइन।</p>
<p>कैप्टागन का प्रभाव एम्फ़ैटेमाइन जैसा ही होता है। यह मस्तिष्क में डोपामाइन को बढ़ाता है, जिससे स्वास्थ्य, आनंद और उल्लास की भावनाएं पैदा होती हैं। यह ध्यान, एकाग्रता और सहनशक्ति में भी सुधार करता है। लेकिन इसके कई अवांछित दुष्प्रभाव भी हैं जैसे कि थोड़ा बहुत मनोविकार।</p>
<p>यह दवा मूल रूप से पश्चिम एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में बेची जाती थी। यह यूरोप में कुछ समय तक काउंटर पर (बिना डॉक्टर के पर्चे के) उपलब्ध थी, उसके बाद में यह केवल डॉक्टर के पर्चे पर लिखे जाने के बाद ही मिलना प्रारंभ हुई।</p>
<p>अस्सी के दशक में इसे प्रतिबंधित पदार्थ घोषित किया गया लेकिन इससे पहले इसे अमेरिका में केवल कुछ समय के लिए ही बिक्री की मंजूरी दी गई थी। कई यूरोपीय देशों में नार्कोलेप्सी के उपचार के लिए इसका इस्तेमाल वैध था।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्वापक नियंत्रण बोर्ड के अनुसार कैप्टागन का निर्माण 2009 तक बंद हो गया था।</p>
<p> </p>
<p>अवैध व्यापार का कब्ज़ा</p>
<p>अवैध रूप से निर्मित संस्करण को आमतौर पर कैप्टागन कहा जाता है। इसे कभी-कभी ‘रासायनिक साहस’ कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि इसका उपयोग पश्चिम एशिया के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सैनिक ध्यान केंद्रित करने और ऊर्जा पाने के लिए करते हैं।</p>
<p>उदाहरण के लिए, यह इजराइल के साथ संघर्ष में शामिल हमास के लड़ाकों के शवों में पाया गया था। इसका निर्माण अपेक्षाकृत सरल और सस्ता है, जिससे यह काला बाजारी दवा व्यापार के लिए पसंदीदा बन गया।</p>
<p>ब्लैक-मार्केट कैप्टागन अब लगभग विशेष रूप से सीरिया और लेबनान में निर्मित होता है। इसका ज़्यादातर इस्तेमाल पश्चिम एशिया में होता है। कुछ खाड़ी देशों में मनोरंजन के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।</p>
<p>यह सीरिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली अवैध दवाओं में से एक है।</p>
<p>एक हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि कैप्टागन ने 2020 से 2022 के बीच सीरिया और लेबनान में 7.3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक (लगभग 2.4 अरब डॉलर प्रति वर्ष) कमाई की है।</p>
<p>प्रतिबंधित पदार्थों के बारे में हम आमतौर पर यही जानते हैं कि किसी भी जब्ती या विनिर्माण या बिक्री पर कार्रवाई का दवा बाजार पर बहुत सीमित प्रभाव पड़ता है, क्योंकि मांग को पूरा करने के लिए कोई अन्य निर्माता या वितरक सामने आ जाता है।</p>
<p>(द कन्वरसेशन)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 23:50:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीरिया से लौटे भारतीयों ने सुनाई दास्तान, ‘दहशत का था माहौल, सड़कों पर थे असामाजिक तत्व’</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) संकटग्रस्त सीरिया से निकाले जाने के बाद शनिवार को स्वदेश लौटे भारतीय नागरिकों के एक समूह ने दहशत के उस मंजर को याद किया, जिसे उन्होंने चंद रातों पहले अनुभव किया। हालांकि, उन्होंने वहां भारतीय दूतावास की ‘लगातार संपर्क’ में रहने के लिए प्रशंसा की।</p>
<p>देर शाम दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने के तुरंत बाद कुछ लोगों ने मीडिया के साथ पिछले सप्ताह के अपने अनुभव साझा किए।</p>
<p>चंडीगढ़ के मूल निवासी और मैकेनिकल इंजीनियर सुनील दत्त ने आरोप लगाया कि सड़कों पर कुछ ‘असामाजिक तत्व’ भी थे जो ‘सामान लूट रहे थे’।</p>
<p>उन्होंने बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110447/indians-returning-from-syria-told-the-story---there-was-an-atmosphere-of-terror--anti-social-elements-were-on-the-streets"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k15122024-01.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) संकटग्रस्त सीरिया से निकाले जाने के बाद शनिवार को स्वदेश लौटे भारतीय नागरिकों के एक समूह ने दहशत के उस मंजर को याद किया, जिसे उन्होंने चंद रातों पहले अनुभव किया। हालांकि, उन्होंने वहां भारतीय दूतावास की ‘लगातार संपर्क’ में रहने के लिए प्रशंसा की।</p>
<p>देर शाम दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने के तुरंत बाद कुछ लोगों ने मीडिया के साथ पिछले सप्ताह के अपने अनुभव साझा किए।</p>
<p>चंडीगढ़ के मूल निवासी और मैकेनिकल इंजीनियर सुनील दत्त ने आरोप लगाया कि सड़कों पर कुछ ‘असामाजिक तत्व’ भी थे जो ‘सामान लूट रहे थे’।</p>
<p>उन्होंने बताया कि बहुत ही खराब स्थिति थी और गोलीबारी व बमबारी की आवाजों ने हालात को और भी बदतर बना दिया।</p>
<p>दत्त ने दिल्ली हवाई अड्डे पर संवाददाताओं को बताया हालांकि भारतीय दूतावास ‘‘हमारे लगातार संपर्क में था’’ और ‘‘हमसे शांत रहने व दरवाजे नहीं खोलने के लिए कहा गया था’’।</p>
<p>भारत ने सीरिया से अपने उन सभी नागरिकों को निकाल लिया है, जिन्होंने घर लौटने की इच्छा जताई थी।</p>
<p>सीरिया में विद्रोहियों ने राष्ट्रपति बशर असद की सरकार का तख्तापलट कर सरकार को बर्खास्त कर दिया।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था, “हमने सीरिया में मौजूद उन सभी भारतीय नागरिकों को निकाल लिया है, जो वहां हाल के घटनाक्रम के बाद घर लौटना चाहते थे। अब तक सीरिया से 77 भारतीय नागरिकों को निकाला जा चुका है।”</p>
<p>ग्रेटर नोएडा के रहने वाले सचित कपूर भी शनिवार को दिल्ली पहुंचे भारतीयों में शामिल थे।</p>
<p>उन्होंने कहा, “हम करीब सात महीने सीरिया में रहे। सात दिसंबर को स्थिति और खराब हो गई। हमें दमिश्क शहर में स्थानांतरित कर दिया गया और फिर हमने चारों ओर आग तथा बमबारी देखी। हर जगह दहशत का माहौल था। हम एक लग्जरी होटल में 11 लोगों के समूह में थे। स्थिति और खराब हो गई। लोग सड़कों पर बेकाबू हो रहे थे, कुछ लोग लूटपाट भी कर रहे थे।”</p>
<p>कपूर ने हालात को याद करते हुए बताया कि सीरिया में भारतीय दूतावास की वजह से ‘‘हमें बहुत आसानी से लेबनान स्थानांतरित कर दिया गया और हमें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।’’</p>
<p>इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ने कहा, ‘‘लेबनान में भी हमारे रहने और खाने की सुविधा बहुत अच्छी थी।’’</p>
<p>कपूर ने विदेश मंत्रालय को उन प्रभावित भारतीयों को दी गई सहायता के लिए धन्यवाद दिया, जो स्वदेश लौटना चाहते थे।</p>
<p>शनिवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे एक अन्य भारतीय नागरिक रतन लाल ने कहा, “मैं पिछले पांच वर्षों से सीरिया में था। जब स्थिति खराब हो गई, तो हमें दमिश्क बुलाया गया और वहां एक होटल में ठहराया गया। फिर हमें वीजा दिया गया, जिसके बाद हम आगे की यात्रा के लिए हवाई अड्डे गए।”</p>
<p>लाल ने बताया कि स्थिति बहुत खराब थी और उनके परिवार के लोगों ने उन्हें किसी भी तरह वापस लौटने को कहा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 11:00:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत ने सीरिया से 75 नागरिकों को निकाला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) भारत ने सीरिया में विद्रोही बलों द्वारा बशर अल असद की सरकार को अपदस्थ किए जाने के दो दिन बाद मंगलवार को वहां से 75 भारतीय नागरिकों को बाहर निकाला।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा स्थिति के आकलन के बाद दमिश्क और बेरूत स्थित भारतीय दूतावासों ने निकासी की समन्वित प्रक्रिया की।</p>
<p>देर रात जारी बयान में कहा गया, ‘‘भारत सरकार ने सीरिया में हाल में हुए घटनाक्रम के बाद आज 75 भारतीय नागरिकों को वहां से निकाला।’’</p>
<p>इसमें कहा गया, ‘‘निकाले गए लोगों में जम्मू कश्मीर के 44 जायरीन शामिल हैं, जो सईदा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108865/india-evacuated-75-citizens-from-syria"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/d25012023-04.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) भारत ने सीरिया में विद्रोही बलों द्वारा बशर अल असद की सरकार को अपदस्थ किए जाने के दो दिन बाद मंगलवार को वहां से 75 भारतीय नागरिकों को बाहर निकाला।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा स्थिति के आकलन के बाद दमिश्क और बेरूत स्थित भारतीय दूतावासों ने निकासी की समन्वित प्रक्रिया की।</p>
<p>देर रात जारी बयान में कहा गया, ‘‘भारत सरकार ने सीरिया में हाल में हुए घटनाक्रम के बाद आज 75 भारतीय नागरिकों को वहां से निकाला।’’</p>
<p>इसमें कहा गया, ‘‘निकाले गए लोगों में जम्मू कश्मीर के 44 जायरीन शामिल हैं, जो सईदा जैनब में फंसे हुए थे। सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से लेबनान पहुंच गए हैं और वे उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों से भारत लौटेंगे।’’</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।</p>
<p>उसने कहा, ‘‘सीरिया में रह रहे भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे दमिश्क में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।’’</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘सरकार स्थिति पर निकटता से नजर बनाये रखेगी। ’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2024 10:38:06 +0530</pubDate>
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                <title>असद शासन का पतन सीरिया के लोगों के लिए ‘ऐतिहासिक अवसर’ : बाइडन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(ललित के झा)</p>
<p>वाशिंगटन, नौ दिसंबर (भाषा) अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने रविवार को कहा कि सीरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का पतन देश के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है क्योंकि असन शासन ने बीते 50 साल में हजारों निर्दोष सीरियाई लोगों के साथ क्रूरता की, उन्हें प्रताड़ित किया और उनकी जान ली।</p>
<p>कई वर्षों के हिंसक गृहयुद्ध और बशर अल-असद एवं उनके परिवार के दशकों के नेतृत्व के बाद विद्रोही समूहों के देश पर कब्जा कर लिया जिसके कुछ घंटों बाद बाइडन ने व्हाइट हाउस (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय एवं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/107977/fall-of-assad-regime--historic-opportunity--for-syrian-people--biden"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-09/3048_joe-biden-america-president.jpg" alt=""></a><br /><p>(ललित के झा)</p>
<p>वाशिंगटन, नौ दिसंबर (भाषा) अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने रविवार को कहा कि सीरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का पतन देश के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है क्योंकि असन शासन ने बीते 50 साल में हजारों निर्दोष सीरियाई लोगों के साथ क्रूरता की, उन्हें प्रताड़ित किया और उनकी जान ली।</p>
<p>कई वर्षों के हिंसक गृहयुद्ध और बशर अल-असद एवं उनके परिवार के दशकों के नेतृत्व के बाद विद्रोही समूहों के देश पर कब्जा कर लिया जिसके कुछ घंटों बाद बाइडन ने व्हाइट हाउस (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय एवं आवास) में यह बात कही।</p>
<p>बाइडन ने कहा, ‘‘सीरिया में 13 साल के गृहयुद्ध और बशर असद तथा उनके पिता के करीब आधी सदी से अधिक समय तक क्रूर तानाशाहीपूर्ण शासन के बाद विद्रोही ताकतों ने असद को अपने पद से इस्तीफा देने एवं देश से भागने पर मजबूर कर दिया। हमें मालूम नहीं है कि वह कहां है, लेकिन ऐसी खबरें हैं कि वह रूस की राजधानी मॉस्को में है। आखिरकार, असद शासन का पतन हो गया।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इस शासन ने सैकड़ों हजारों निर्दोष सीरियाई लोगों पर अत्याचार किया, उन्हें प्रताड़ित किया और उनकी जान ली। इस शासन का पतन न्याय का एक मौलिक कार्य है। यह सीरिया में लंबे समय से पीड़ित लोगों के लिए अपने गौरवशाली देश का बेहतर भविष्य बनाने का ऐतिहासिक अवसर है।’’</p>
<p>बाइडन ने कहा कि यह जोखिम और अनिश्चितता का भी समय है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में हिज्बुल्ला, ईरान और रूस का असद शासन को समर्थन खत्म हो गया है। वह इस पूरे घटनाक्रम को सीरिया के लोगों के लिए अब एक नए अवसर के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p>असद को सत्ता से बेदखल करने वाले सीरियाई विपक्ष का नेतृत्व ‘हयात तहरीर अल-शाम’ करता है। अमेरिका ‘हयात तहरीर अल-शाम’ को एक आतंकवादी संगठन मानता है जिसका संबंध अल-कायदा से है। हालांकि, समूह का कहना है कि उसने अल-कायदा से संबंध तोड़ लिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 10:48:07 +0530</pubDate>
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                <title>सीरिया में सभी भारतीय सुरक्षित: सरकारी सूत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) सीरिया में सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने रविवार को दी।</p>
<p>सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी इस्लामी विद्रोहियों द्वारा सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल करने के कुछ घंटे बाद दी।</p>
<p>सूत्रों ने कहा कि दमिश्क में भारतीय दूतावास अभी भी काम कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि दूतावास सभी भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और वे सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि दूतावास सीरिया में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए उपलब्ध है।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, सीरिया में लगभग 90 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें 14 ऐसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/107954/all-indians-safe-in-syria--government-sources"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/d25012023-04.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) सीरिया में सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने रविवार को दी।</p>
<p>सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी इस्लामी विद्रोहियों द्वारा सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल करने के कुछ घंटे बाद दी।</p>
<p>सूत्रों ने कहा कि दमिश्क में भारतीय दूतावास अभी भी काम कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि दूतावास सभी भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और वे सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि दूतावास सीरिया में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए उपलब्ध है।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, सीरिया में लगभग 90 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें 14 ऐसे हैं जो संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों में काम कर रहे हैं।</p>
<p>एक सूत्र ने कहा, ‘‘हमारा दूतावास सीरिया के दमिश्क में काम करना जारी रखे हुए है। दूतावास सभी भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और वे सुरक्षित हैं।’’</p>
<p>सीरिया की राजधानी दमिश्क में विद्रोहियों के घुसने और राष्ट्रपति बशर-अल असद के देश छोड़कर भागने संबंधी दावों के बीच सरकार गिरने के साथ ही असद परिवार के 50 साल के शासन का रविवार तड़के अप्रत्याशित अंत हो गया और लोगों ने सड़कों पर उतरकर जश्न मनाया तथा खुशी में हवा में गोलियां भी चलाईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Dec 2024 23:52:35 +0530</pubDate>
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