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                <title>Mahakumbh - Loktej</title>
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                <description>Mahakumbh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वर्ष 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले प्रदूषण से मुक्त होगी क्षिप्रा : मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इंदौर, 29 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि उज्जैन में वर्ष 2028 के दौरान लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा और इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान लाखों श्रद्धालु इसके शुद्ध जल में स्नान करेंगे।</p>
<p>सिंहस्थ कुंभ मेला भगवान शिव के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग वाली धार्मिक नगरी उज्जैन में हर 12 साल में क्षिप्रा नदी के तट पर लगता है।</p>
<p>यादव ने इंदौर जिले के चित्तौड़ा गांव में एक श्रीमद् भागवत कथा कार्यक्रम के समापन समारोह में कहा, ‘‘सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144907/kshipra-mohan-yadav-will-be-free-from-pollution-before-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-01/first-bath-mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर, 29 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि उज्जैन में वर्ष 2028 के दौरान लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा और इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान लाखों श्रद्धालु इसके शुद्ध जल में स्नान करेंगे।</p>
<p>सिंहस्थ कुंभ मेला भगवान शिव के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग वाली धार्मिक नगरी उज्जैन में हर 12 साल में क्षिप्रा नदी के तट पर लगता है।</p>
<p>यादव ने इंदौर जिले के चित्तौड़ा गांव में एक श्रीमद् भागवत कथा कार्यक्रम के समापन समारोह में कहा, ‘‘सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के शुद्ध जल में स्नान करेंगे। इसके लिए बारिश के दौरान एक जलाशय में पानी जमा किया जाएगा जिसे धीरे-धीरे क्षिप्रा में छोड़ा जाएगा। इससे इस नदी में सतत प्रवाह बना रहेगा।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि श्रद्धालु सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान क्षिप्रा नदी के जल से पूरी श्रद्धा के साथ आचमन भी करते हैं, इसलिए इस नदी के पानी की शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।</p>
<p>यादव ने जोर देकर कहा कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ेगा।</p>
<p>उज्जैन में पिछला सिंहस्थ कुम्भ मेला 2016 के दौरान लगा था। इसके लिए प्रदेश सरकार ने नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना के जरिये नर्मदा नदी का जल लम्बी दूरी की पाइपलाइन के जरिये क्षिप्रा नदी में छोड़ा था और श्रद्धालुओं ने इस जल में स्नान किया था।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले में श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के ही शुद्ध जल में स्नान करेंगे।</p>
<p>बहरहाल, क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से मुक्त करना प्रदेश सरकार के सामने बड़ी चुनौती की तरह है और कई साधु-संत भी इस विषय में चिंता जता चुके हैं।</p>
<p>इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र से निकलने वाली क्षिप्रा बहते-बहते उज्जैन पहुंचती है जहां हर 12 साल में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले में लाखों श्रद्धालु इस नदी में स्नान करते हैं। क्षिप्रा को हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं में ‘मोक्षदायिनी नदी’ भी कहा जाता है।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में गंदे नाले में तब्दील कान्ह और सरस्वती नदियों का पानी भी आगे जाकर क्षिप्रा में मिलता है और इसमें होने वाले प्रदूषण में इजाफा करता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर क्षिप्रा नदी को कान्ह और सरस्वती नदियों के गंदे पानी से बचाने के लिए अलग योजना बनाई गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 21:08:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकुंभ के दौरान पानी की गुणवत्ता स्नान के लिए उपयुक्त थी : सीपीसीबी रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 09 मार्च (वेब वार्ता)। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)को सौंपी अपनी नई रिपोर्ट में कहा गया है कि सांख्यिकीय विश्लेषण के अनुसार प्रयागराज में हाल ही में संपन्न महाकुंभ के दौरान पानी की गुणवत्ता स्नान के लिए उपयुक्त थी।</p>
<p>सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सांख्यिकीय विश्लेषण इसलिए आवश्यक था क्योंकि एक ही स्थान से अलग-अलग तिथियों और एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए नमूनों में ‘‘आंकड़ों की भिन्नता’’ थी, जिसके कारण ये ‘‘नदी क्षेत्र में समग्र नदी जल की गुणवत्ता’’ को प्रतिबिंबित नहीं करते थे।</p>
<p>बोर्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139146/cpcb-report-was-suitable-for-water-quality-bath-during-mahakumbh"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-01/first-bath-mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 09 मार्च (वेब वार्ता)। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)को सौंपी अपनी नई रिपोर्ट में कहा गया है कि सांख्यिकीय विश्लेषण के अनुसार प्रयागराज में हाल ही में संपन्न महाकुंभ के दौरान पानी की गुणवत्ता स्नान के लिए उपयुक्त थी।</p>
<p>सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सांख्यिकीय विश्लेषण इसलिए आवश्यक था क्योंकि एक ही स्थान से अलग-अलग तिथियों और एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए नमूनों में ‘‘आंकड़ों की भिन्नता’’ थी, जिसके कारण ये ‘‘नदी क्षेत्र में समग्र नदी जल की गुणवत्ता’’ को प्रतिबिंबित नहीं करते थे।</p>
<p>बोर्ड की 28 फरवरी की तारीख वाली इस रिपोर्ट को सात मार्च को एनजीटी की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। बोर्ड ने 12 जनवरी से लेकर अब तक प्रति सप्ताह दो बार, जिसमें स्नान के शुभ दिन भी शामिल हैं, गंगा नदी पर पांच स्थानों तथा यमुना नदी पर दो स्थानों पर जल निगरानी की है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘विभिन्न तिथियों पर एक ही स्थान से लिए गए नमूनों के लिए विभिन्न मापदंडों जैसे पीएच, घुलित ऑक्सीजन (डीओ), जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) और फीकल कोलीफॉर्म काउंट (एफसी) के परिमाण में अहम बदलाव देखे गए है। एक ही दिन एकत्र किए गए नमूनों के लिए उपर्युक्त मापदंडों के परिमाण भी अलग-अलग स्थानों पर भिन्न होते हैं।’’</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक जल में ऑक्सीजन की मात्रा या डीओ, जल में कार्बनिक पदार्थों को खंडित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा को मापता बीओडी, तथा सीवेज संदूषण का सूचक एफसी जल की गुणवत्ता के प्रमुख संकेतक हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि एक विशेषज्ञ समिति ने ‘‘आंकड़ों में परिवर्तनशीलता’’ के मुद्दे की जांच की और कहा कि ‘‘आंकड़ा एक विशिष्ट स्थान और समय पर जल गुणवत्ता का तत्कालिक स्थिति को दर्शाता है और यह ऊपरी धारा में मानवजनित गतिविधियों (मानव क्रियाकलापों), प्रवाह की दर, नमूने की गहराई, नमूने का समय, नदी की धारा और धाराओं का मिश्रण, नमूना स्थान और ऐसे कई अन्य कारकों के आधार पर काफी भिन्न हो सकता है’’।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘परिणामस्वरूप, ये मान उस सटीक समय और स्थान पर जल गुणवत्ता मापदंडों को दर्शाते हैं, जहां से ये जल नमूने एकत्र किए गए थे, तथा ये नदी की समग्र विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं कर सकते हैं, इसलिए, जरूरी नहीं है कि ये नदी के पूरे क्षेत्र में समग्र जल गुणवत्ता को प्रदर्शित करें।’’</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परिवर्तनशीलता के कारण, प्रमुख मापदंडों के लिए विभिन्न निगरानी स्थानों के जल गुणवत्ता डेटा का सांख्यिकीय विश्लेषण 12 जनवरी से 22 फरवरी तक ‘‘सामूहिक स्नान’’ के 10 स्थानों पर किया गया और 20 दौर की निगरानी की गई।’’</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘‘यह प्रस्तुत किया गया है कि उपर्युक्त सांख्यिकीय विश्लेषण के अनुसार, निगरानी किए गए खंडों के लिए पीएच, डीओ, बीओडी और एफसी का औसत परिमाण (आंकड़ों की केंद्रीय प्रवृत्ति) संबंधित मानदंडों/अनुमेय सीमाओं के भीतर है।’’</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, एफसी का औसत परिमाण 1,400 था, जबकि स्वीकार्य सीमा 2,500 यूनिट प्रति 100 मिली है, जबकि डीओ पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक के निर्धारित मानक के मुकाबले 8.7 था, तथा बीओडी 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम या उसके बराबर की निर्धारित सीमा के मुकाबले 2.56 था।</p>
<p>सीपीसीबी ने 17 फरवरी को एक रिपोर्ट में एनजीटी को सूचित किया कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में विभिन्न स्थानों पर फीकल कोलीफॉर्म का स्तर स्नान के लिए प्राथमिक जल गुणवत्ता के अनुरूप नहीं था। एनजीटी इस मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल को करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 19:19:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : पुनर्मिलन का संगम बना प्रयागराज महाकुम्भ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रयागराज, 02 मार्च (वेब वार्ता)। महाकुम्भ 2025 अपने दिव्य ,भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप के साथ 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति से ऐतिहासिक आयोजन बन गया। संगम के तट पर आयोजित प्रयागराज महाकुम्भ में 144 साल बाद बने पुण्य संयोग में देश दुनिया से श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा। इस जन सैलाब के कारण कई लोग कुछ पलों के लिए अपनों से बिछड़ गए, लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शिता और बिछड़ों को अपनों से मिलाने के लिए किए गए प्रयासों की मदद से महाकुम्भ के इस विराट मेले में कुल 54,357 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138806/prayagraj-maha-kumbh-became-the-confluence-of-prayagraj-reunion"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज, 02 मार्च (वेब वार्ता)। महाकुम्भ 2025 अपने दिव्य ,भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप के साथ 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति से ऐतिहासिक आयोजन बन गया। संगम के तट पर आयोजित प्रयागराज महाकुम्भ में 144 साल बाद बने पुण्य संयोग में देश दुनिया से श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा। इस जन सैलाब के कारण कई लोग कुछ पलों के लिए अपनों से बिछड़ गए, लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शिता और बिछड़ों को अपनों से मिलाने के लिए किए गए प्रयासों की मदद से महाकुम्भ के इस विराट मेले में कुल 54,357 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता मिली है। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की रही। यही नहीं पुलिस द्वारा देश के विभिन्न राज्यों और नेपाल से आए श्रद्धालुओं का उनके परिवारों से सफलतापूर्वक पुनर्मिलन कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।</p>
<p>पुनर्मिलन का साक्षी बना प्रयागराज महाकुम्भ<br />इस दिव्य आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने कई अनुकरणीय पहल कीं, जो उपयोगी साबित हुईं। इस बार महाकुम्भ में खोए हुए लोगों को शीघ्रता से उनके परिवारों से मिलाने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की स्थापना की। महाकुम्भ में इनसे 35 हजार से श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाने का कार्य किया गया। अमृत स्नान पर्व मकर संक्रांति पर्व (13, 14 और 15 जनवरी) को खोए हुए 598 श्रद्धालु, मौनी अमावस्या के दौरान (28, 29 और 30 जनवरी) 8725 लोगों और बसंत पंचमी (2, 3 और 4 फरवरी) को डिजिटल खोया-पाया केंद्र की मदद से 864 लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया गया। इसके अलावा अन्य स्नान पर्वों और सामान्य दिनों में खोए हुए 24,896 लोगों का भी उनके परिवारों के साथ पुनर्मिलन कराया गया। इस तरह महाकुम्भ के समापन पर 35,083 लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया।</p>
<p>निजी संस्थाओं ने भी किया पूरा सहयोग<br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर संपूर्ण महाकुम्भ क्षेत्र में 10 डिजिटल खोया-पाया केंद्र स्थापित किए गए। इनमें अगर अत्याधुनिक एआई आधारित चेहरा पहचान प्रणाली, मशीन लर्निंग और बहुभाषीय समर्थन जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का संगम देखने को मिला तो वहीं गैर सरकारी सामाजिक संस्थाओं के प्रयास में मानवता और सेवा का अद्भुत मेल देखने को मिला। इनमें सबसे पुराना भारत सेवा केंद्र एवं हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति भी शामिल हैं। भारत सेवा केंद्र के भूले भटकों के शिविर के संचालक उमेश चंद्र तिवारी के मुताबिक, महाकुम्भ के समापन तक शिविर ने 19,274 बिछड़े महिला और पुरुष को अपनों से मिलाया। इसके अलावा कुम्भ मेले में बिछड़ गए सभी 18 बच्चों को भी उनके परिजनों से मिलाया गया। शिविर के माध्यम से न सिर्फ खोए हुए लोगों को खोजा गया, बल्कि उनके घरों तक पहुंचाने में भी मदद की गई।</p>
<p>समापन के आखिरी दिन तक होता रहा पुनर्मिलन<br />महाकुम्भ के आखिरी स्नान पर्व महा शिवरात्रि तक खोया पाया केंद्रों और भूले भटके शिविरों में मेले में बिछड़ गए लोगों को उनके अपनों से मिलाने की प्रक्रिया पूरी हो गई। खोया पाया केंद्र विशेष रूप से कारगर रहे। उन्होंने न सिर्फ बिछड़े लोगों का परिजनों से मिलन कराया, बल्कि बिछड़े लोगों की ट्रैकिंग भी की और जब तक वो परिवार से मिल नहीं गए तब तक प्रक्रिया को रिपीट किया गया। मुजफ्फरपुर धरकरी बिहार के कपलेश्वर साहनी की सास कृष्णा देवी को केंद्र ने आखिरी दिन परिजनों से मिलाया। इसी तरह रायपुर छत्तीसगढ़ के बृजलाल चौहान की पत्नी की जंगी देवी भी अपने घर पहुंच गईं। नेपाल के बांके जिला जगजन्नन धारू के खोने की शिकायत उनके बेटे मनोज थारू ने लिखाई थी, लेकिन मनोज थारू का मोबाइल बंद मिला। इसी तरह सप्तरी नेपाल के सीताराम शाह ने पत्नी बिंदी के खो जाने की शिकायत दर्ज की थी, लेकिन सीताराम शाह ने जो मोबाइल नंबर शिकायत में दर्ज कराया वह गलत निकला। खोया पाया केंद्र की इस पहल से हर कोई संतुष्ट नजर आया और परिजनों के मिलने पर सभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताना नहीं भूले।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/138806/prayagraj-maha-kumbh-became-the-confluence-of-prayagraj-reunion</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Mar 2025 19:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकुंभ-2025 ने पूरी दुनिया को 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत-सर्वसमावेशी भारत' का संदेश दिया : योगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लखनऊ, 28 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ-2025 ने पूरी दुनिया को 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत-सर्वसमावेशी भारत' का संदेश दिया है।</p>
<p>‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आदित्यनाथ ने कहा,''आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन में आस्था, एकता और समता के महासमागम महाकुम्भ-2025, प्रयागराज ने 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत-सर्वसमावेशी भारत' का संदेश पूरी दुनिया को दिया है।''</p>
<p>उन्होंने कहा,''देश-विदेश से पधारने वाले करोड़ों श्रद्धालु जन सुगमतापूर्वक पवित्र त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर स्वयं को धन्य कर अभिभूत हैं।''</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति और मानवता के विराट महोत्सव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138661/mahakumbh-2025-gave-the-whole-world-the-message-of-india-india-service-india"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/uttar-pradesh-chief-minister-yogi-adityanath-1.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ, 28 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ-2025 ने पूरी दुनिया को 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत-सर्वसमावेशी भारत' का संदेश दिया है।</p>
<p>‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आदित्यनाथ ने कहा,''आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन में आस्था, एकता और समता के महासमागम महाकुम्भ-2025, प्रयागराज ने 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत-सर्वसमावेशी भारत' का संदेश पूरी दुनिया को दिया है।''</p>
<p>उन्होंने कहा,''देश-विदेश से पधारने वाले करोड़ों श्रद्धालु जन सुगमतापूर्वक पवित्र त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर स्वयं को धन्य कर अभिभूत हैं।''</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति और मानवता के विराट महोत्सव का स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन संपूर्ण विश्व के लिए शोध का विषय बन गया है।</p>
<p>‘एक्स’ पोस्ट में आदित्यनाथ ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने बृहस्पतिवार को एक्स पर एक पोस्ट में महाकुंभ के सफल समापन पर उन्हें बधाई दी थी।</p>
<p>बृहस्पतिवार को एक्स पर एक पोस्ट में विष्णु देव साय ने कहा,''आज मैंने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से दूरभाष पर चर्चा कर प्रयागराज महाकुंभ के ऐतिहासिक एवं भव्य आयोजन के सफल समापन पर उन्हें हार्दिक बधाई दी। यह भव्य और विराट आयोजन हमारी सनातन संस्कृति, आस्था और परंपराओं की अद्भुत झलक प्रस्तुत करता है।''</p>
<p>उन्होंने कहा था कि साथ ही, मैंने छत्तीसगढ़ राज्य के श्रद्धालुओं के लिए महाकुंभ मेला परिसर में साढ़े चार एकड़ भूमि आवंटित करने हेतु उनका हृदय से आभार व्यक्त किया।</p>
<p>इस मंडप में छत्तीसगढ़ के लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने निःशुल्क आवास, भोजन एवं अन्य सुविधाओं का लाभ उठाया और संगम में स्नान का पुण्य प्राप्त किया।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रबंधन एवं संत-समाज के सान्निध्य में संपन्न हुए इस भव्य आयोजन के लिए पुनः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और उनकी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएं एवं साधुवाद।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 20:38:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उप्र : महाकुंभ मेला संपन्न होने के बाद भी बड़ी संख्या में संगम स्नान कर रहे श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभ नगर, 28 फरवरी (भाषा) धार्मिक समागम महाकुंभ 2025 बुधवार को संपन्न हो गया, लेकिन मेले के दौरान भारी भीड़ की वजह से संगम में डुबकी लगाने से वंचित रह गए श्रद्धालु अब भीड़ कम होने से यहां आ रहे हैं और संगम में स्नान कर रहे हैं।</p>
<p>जल पुलिस के प्रभारी जनार्दन साहनी ने बताया कि आम दिनों की तुलना में संगम में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ है और लोग आनंद के साथ संगम में डुबकी लगा रहे हैं। जल पुलिस के साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी सुरक्षा में तैनात है।</p>
<p>साहनी ने कहा कि 45</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138325/up--even-after-the-conclusion-of-mahakumbh-mela--devotees-are-taking-a-large-number-of-sangam-bath"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-01/first-bath-mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ नगर, 28 फरवरी (भाषा) धार्मिक समागम महाकुंभ 2025 बुधवार को संपन्न हो गया, लेकिन मेले के दौरान भारी भीड़ की वजह से संगम में डुबकी लगाने से वंचित रह गए श्रद्धालु अब भीड़ कम होने से यहां आ रहे हैं और संगम में स्नान कर रहे हैं।</p>
<p>जल पुलिस के प्रभारी जनार्दन साहनी ने बताया कि आम दिनों की तुलना में संगम में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ है और लोग आनंद के साथ संगम में डुबकी लगा रहे हैं। जल पुलिस के साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी सुरक्षा में तैनात है।</p>
<p>साहनी ने कहा कि 45 दिनों तक चले महाकुंभ में रिकॉर्ड 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई, लेकिन कई लोग भारी भीड़ को देखते हुए यहां आने की हिम्मत नहीं जुटा सके और अब वे पुण्य लाभ अर्जित करने संगम आ रहे हैं।</p>
<p>चेन्नई से आए आशीष कुमार सिंह ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को रात साढ़े 11 बजे प्रयागराज पहुंचे और आज उन्होंने संगम में डुबकी लगाई। भीड़ की वजह से उन्होंने मेला समाप्त होने के बाद आने का मन बनाया।</p>
<p>कक्षा 11 के विद्यार्थी सिंह ने बताया कि उनका जन्म बिहार में हुआ, लेकिन वह पले बढ़े चेन्नई में, इसलिए वह हिंदी और भोजपुरी के साथ ही तमिल भाषा में भी बात कर लेते हैं।</p>
<p>वहीं, जयपुर से आए योगेंद्र गंगवार ने कहा कि वह भी मेले में आने से चूक गए क्योंकि बस और ट्रेनों में जगह नहीं थी। उन्होंने कहा कि अब वह बड़े आराम से जयपुर से प्रयागराज आए हैं और उनकी योजना दिन में संगम में डुबकी लगाने की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 15:11:50 +0530</pubDate>
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                <title>महाकुंभ सही मायने में वैश्विक आयोजन, इसकी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है: योगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभनगर, 27 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को महाकुंभ मेला 2025 को सही मायने में एक वैश्विक आयोजन करार देते हुए इसके सफल आयोजन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया।</p>
<p>यहां सेक्टर-2 में स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों से मुखातिब योगी ने कहा, “प्रयागराज में महाकुंभ सही मायने में एक वैश्विक आयोजन बन गया और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को जाता है। उनकी दूरदर्शिता से हमें इस वृहद आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करने में मदद मिली।”</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने आस्था और अर्थव्यवस्था का जो दृष्टिकोण दिया है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138266/mahakumbh-is-truly-a-global-event--the-credit-for-its-success-goes-to-prime-minister-modi--yogi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभनगर, 27 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को महाकुंभ मेला 2025 को सही मायने में एक वैश्विक आयोजन करार देते हुए इसके सफल आयोजन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया।</p>
<p>यहां सेक्टर-2 में स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों से मुखातिब योगी ने कहा, “प्रयागराज में महाकुंभ सही मायने में एक वैश्विक आयोजन बन गया और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को जाता है। उनकी दूरदर्शिता से हमें इस वृहद आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करने में मदद मिली।”</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने आस्था और अर्थव्यवस्था का जो दृष्टिकोण दिया है, वह यहां साकार होता दिखाई दिया। भारत में आध्यात्मिक पर्यटन में भारी संभावनाएं हैं और उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “पिछले वर्ष लगभग 65 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक उत्तर प्रदेश में मंदिरों को लेकर प्रख्यात विभिन्न शहरों में आए थे, जिनमें अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, चित्रकूट, विंध्याचल, गोरखपुर और नैमिषारण्य शामिल हैं।”</p>
<p>योगी ने कहा, “अकेले प्रयागराज में पिछले 45 दिनों में 66 करोड़ 30 लाख पर्यटक और श्रद्धालु आ चुके हैं। प्रयागराज महाकुंभ ने उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन के पांच गलियारे उपलब्ध कराए। इनमें प्रयागराज से मिर्जापुर और काशी, प्रयागराज से अयोध्या और गोरखपुर, प्रयागराज से लालापुर, राजापुर और चित्रकूट, प्रयागराज से लखनऊ और नैमिषारण्य और प्रयागराज से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के रास्ते मथुरा-वृंदावन होते हुए शुक्रताल गलियारे शामिल हैं।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “इन पांचों गलियारों में पिछले डेढ़ महीने में देश-दुनिया से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आए। महाकुंभ मेले के दौरान 45 दिनों में 100 देशों के लोग प्रयागराज पहुंचे, जिनमें 74 देशों के उच्चायुक्त और राजदूत शामिल हैं। इसके अलावा, 12 देशों के मंत्रियों और राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति भी दर्ज की गई।”</p>
<p>योगी ने कहा, “महाकुंभ के पूरे आयोजन में केंद्र और राज्य ने निर्माण कार्यों पर 7,500 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें 200 से अधिक सड़कों, 14 फ्लाईओवर, नौ अंडरपास और 12 कॉरिडोर का निर्माण शामिल है। अक्षयवट कॉरिडोर, सरस्वती कूप कॉरिडोर, पातालपुरी कॉरिडोर, बड़े हनुमान जी कॉरिडोर, महर्षि भारद्वाज कॉरिडोर, नागवासुकि कॉरिडोर, श्रंग्वेरपुर कॉरिडोर, द्वादश माधव कॉरिडोर समेत अलग-अलग प्रकार के 12 कॉरिडोर प्रयागराज में विकसित किए गए।”</p>
<p>महाकुंभ में तकनीक के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पूरे मेला क्षेत्र को लगभग 3,000 सीसीटीवी कैमरे के साथ फेस रिकॉग्निशन और एआई टूल से जोड़ा गया। इसके माध्यम से एक-एक व्यक्ति के आने की सूचना और उसके चेहरे की पहचान के साथ-साथ कितने लोगों ने डुबकी लगाई, उन सबकी गिनती की व्यवस्था हो सकी।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “महाकुंभ नगर में 15,000 से ऊपर स्वच्छताकर्मी तैनाथ थे। परिवहन निगम की 7,500 से अधिक बसें लगाई गईं और 750 से ज्यादा शटल बसें चलाई गईं। रेलवे ने लगभग 13,000 मेला स्पेशल ट्रेन चलाकर यात्रियों को सकुशल गंतव्य तक पहुंचाया। साढ़े तीन करोड़ यात्री केवल उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों से प्रयागराज आए।”</p>
<p>योगी ने कहा, “आस्था और अर्थव्यवस्था के बीच समन्वय हो सकता है, यह मीडिया ने साबित करके दिखाया। 7.5 हजार करोड़ रुपये खर्च करके 3.5 लाख करोड़ की वृद्धि दर्ज की जा सकती है, यह भी मीडिया ने बताया।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “यह आयोजन शोध का नया विषय बन गया है। मेरे पास लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से पत्र आ रहे हैं कि भीड़ प्रबंधन कैसे होता है, आस्था और अर्थव्यवस्था का समन्वय कैसे हो सकता है.. इस पर एक घंटे का टॉक शो कीजिए।”</p>
<p>इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नगर विकास मंत्री एके शर्मा समेत अन्य मंत्री एवं अधिकारीगण मौजूद थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 21:59:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महाकुंभ के दौरान 16,000 से अधिक ट्रेनों का संचालन हुआ- रेल मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रयागराज (उप्र), 27 फरवरी (भाषा) प्रयागराज महाकुंभ के समापन के अगले दिन रेल कर्मियों का अभिनंदन करने यहां पहुंचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि महाकुंभ के दौरान 13,000 ट्रेनें चलाने की योजना थी, लेकिन 16,000 से अधिक ट्रेनें चलाई गईं।</p>
<p>वैष्णव ने उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर), पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) और उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले विभिन्न स्टेशनों का दौरा किया और जमीनी स्तर पर परिचालन का आकलन किया।</p>
<p>रेल मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रयागराज दौरा में रेल मंत्री ने इस वृहद आयोजन (महाकुंभ) में श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाने वाले प्रत्येक रेलकर्मी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138250/more-than-16-000-trains-operated-during-mahakumbh--railway-minister"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/track-indian-railways.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज (उप्र), 27 फरवरी (भाषा) प्रयागराज महाकुंभ के समापन के अगले दिन रेल कर्मियों का अभिनंदन करने यहां पहुंचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि महाकुंभ के दौरान 13,000 ट्रेनें चलाने की योजना थी, लेकिन 16,000 से अधिक ट्रेनें चलाई गईं।</p>
<p>वैष्णव ने उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर), पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) और उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले विभिन्न स्टेशनों का दौरा किया और जमीनी स्तर पर परिचालन का आकलन किया।</p>
<p>रेल मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रयागराज दौरा में रेल मंत्री ने इस वृहद आयोजन (महाकुंभ) में श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाने वाले प्रत्येक रेलकर्मी से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की।</p>
<p>उन्होंने कहा, “भीड़ प्रबंधन में आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल), जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) और पुलिसकर्मियों की मदद करने वाले रेल कर्मी से लेकर निर्बाध ढंग से रेल परिचालन सुनिश्चित करने वाले इंजीनियर और सफाईकर्मी से लेकर डॉक्टर तक ने इस आयोजन में बड़ी भूमिका निभाई है।”</p>
<p>रेल मंत्री ने टीटीई, लोको पायलट (चालक), सहायक स्टेशन मास्टर, कंट्रोल अधिकारियों, ट्रैकमेन और रेलवे प्रशासकों का आभार प्रकट किया जिनके समन्वित प्रयासों से श्रद्धालुओं को उनके गंतव्यों तक पहुंचाने में मदद मिली।</p>
<p>यहां संवाददाताओं से बातचीत में रेल मंत्री ने कहा, “16,000 से अधिक ट्रेनों के जरिए 4.5 से 5 करोड़ यात्रियों को महाकुंभ लाया गया और उन्हें उनके गंतव्यों तक पहुंचाया गया। मैंने सभी रेलकर्मियों को धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने एक होकर काम किया।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “इस महाकुंभ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य और केंद्र के सभी विभागों और रेलवे के कर्मचारियों ने एक होकर काम किया। इसी तरह हम सभी एक हो जाएं तो कोई हमें हरा नहीं सकता।”</p>
<p>रेल मंत्री ने कहा, “पिछले कुंभ (2019) में हमने करीब 4,000 ट्रेनें चलाई थीं और इस बार उससे तीन गुना से अधिक ट्रेनें चलाने की योजना थी, जबकि चार गुना ट्रेनें चलाई गईं। इसके लिए ढाई साल पहले से काम किया जा रहा था।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “इन ट्रेनों में 7,667 स्पेशल ट्रेनें और 9,485 नियमित ट्रेनें शामिल रहीं जिससे श्रद्धालु सकुशल अपने गंतव्यों तक पहुंच सके। महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए जिसमें से 4.24 करोड़ श्रद्धालुओं ने प्रयागराज के नौ प्रमुख रेलवे स्टेशनों से यात्रा की।”</p>
<p>वैष्णव ने कहा, “इस महाकुंभ के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया और 21 से अधिक फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए जिसमें गंगा नदी पर नये पुल का निर्माण शामिल है। साथ ही हर स्टेशन पर होल्डिंग एरिया बनाए गए और यात्रियों के लिए उचित व्यवस्था की गई।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “इस दौरान नए तरीके के फुटओवर ब्रिज बनाए गए। रेलवे ने यात्रियों को ध्यान में रखकर हर तरह की व्यवस्थाएं की। (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी ने हमें सिखाया है कि हमें श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं कहनी चाहिए, बल्कि श्रद्धालु और भक्त कहना चाहिए और उनकी श्रद्धा और भक्ति में सहयोग देने की बात करनी चाहिए।”</p>
<p>रेल मंत्री ने महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 21:56:52 +0530</pubDate>
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                <title>महाकुंभ 'युग परिवर्तन की आहट', इसने भारत की विकास यात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में संपन्न हुए महाकुंभ को बृहस्पतिवार को 'युग परिवर्तन की आहट' करार दिया और कहा कि इस आयोजन ने भारत की विकास यात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है और यह संदेश है 'विकसित भारत' का।</p>
<p>महाकुंभ के पूर्ण होने पर विभिन्न सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से साझा किए गए एक आलेख में प्रधानमंत्री ने इस भव्य आयोजन को एकता का महाकुंभ बताया और कहा, "जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वह सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137947/mahakumbh--aut-of-yuga-parivartan---it-gave-the-message-of-a-new-chapter-of-india-s-development-journey--modi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/9726_modi1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में संपन्न हुए महाकुंभ को बृहस्पतिवार को 'युग परिवर्तन की आहट' करार दिया और कहा कि इस आयोजन ने भारत की विकास यात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है और यह संदेश है 'विकसित भारत' का।</p>
<p>महाकुंभ के पूर्ण होने पर विभिन्न सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से साझा किए गए एक आलेख में प्रधानमंत्री ने इस भव्य आयोजन को एकता का महाकुंभ बताया और कहा, "जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वह सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद से प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान सभी देवी-देवता जुटे, संत-महात्मा जुटे, बाल-वृद्ध जुटे, महिलाएं-युवा जुटे और सभी ने देश की जागृत चेतना का साक्षात्कार किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "यह महाकुंभ एकता का महाकुंभ था, जहां 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ, एक समय में, इस एक पर्व से आकर जुड़ गई थी।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में संपन्न महाकुंभ का यह आयोजन आधुनिक युग के ‘मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स’ (प्रबंधन पेशेवरों) के लिए, प्लानिंग (नियोजन) और पॉलिसी एक्सपर्ट्स (नीति विशेषज्ञों) के लिए नए सिरे से अध्ययन का विषय बना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर, त्रिवेणी संगम पर इतनी बड़ी संख्या में... करोड़ों की संख्या में लोग जुटे। इन करोड़ों लोगों को ना औपचारिक निमंत्रण था, ना ही किस समय पहुंचना है, उसकी कोई पूर्व सूचना थी। बस, लोग महाकुंभ के लिए चल पड़े...और पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धन्य हो गए।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए यह देखना बहुत ही सुखद रहा कि बहुत बड़ी संख्या में भारत की आज की युवा पीढ़ी प्रयागराज पहुंची। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं का इस तरह महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए आगे आना, एक बहुत बड़ा संदेश है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "इससे यह विश्वास दृढ़ होता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारे संस्कार और संस्कृति की वाहक है और इसे आगे ले जाने का दायित्व समझती है और इसे लेकर संकल्पित भी है, समर्पित भी है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि कुंभ से लौटे लोगों द्वारा त्रिवेणी से लेकर गए जल की कुछ बूंदों ने भी करोड़ों भक्तों को कुंभ स्नान जैसा ही पुण्य दिया और कितने ही लोगों का कुंभ से वापसी के बाद गांव-गांव में जो सत्कार हुआ, जिस तरह पूरे समाज ने उनके प्रति श्रद्धा से सिर झुकाया, वह अविस्मरणीय है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "यह कुछ ऐसा हुआ है, जो बीते कुछ दशकों में पहले कभी नहीं हुआ। यह कुछ ऐसा हुआ है, जो आने वाली कई-कई शताब्दियों की एक नींव रख गया है।"</p>
<p>मोदी ने कहा कि प्रयागराज में जितनी कल्पना की गई थी, उससे कहीं अधिक संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसकी एक वजह यह भी थी कि प्रशासन ने भी पुराने कुंभ के अनुभवों को देखते हुए ही अंदाजा लगाया था लेकिन अमेरिका की आबादी के करीब दोगुने लोगों ने एकता के महाकुंभ में हिस्सा लिया, डुबकी लगाई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक क्षेत्र में शोध करने वाले लोग करोड़ों भारतवासियों के इस उत्साह पर अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अपनी विरासत पर गौरव करने वाला भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>मोदी ने कहा, "मैं मानता हूं, यह युग परिवर्तन की वह आहट है, जो भारत का नया भविष्य लिखने जा रही है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि 144 वर्षों के बाद होने वाले महाकुंभ में ऋषियों-मुनियों द्वारा उस समय-काल और परिस्थितियों को देखते हुए नए संदेश भी दिए जाते थे।</p>
<p>उन्होंने कहा, "अब इस बार 144 वर्षों के बाद पड़े इस तरह के पूर्ण महाकुंभ ने भी हमें भारत की विकास यात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है। यह संदेश है- विकसित भारत का।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह एकता के महाकुंभ में हर श्रद्धालु, चाहे वह गरीब हो या संपन्न हो, बाल हो या वृद्ध हो, देश से आया हो या विदेश से आया हो, गांव का हो या शहर का हो, पूर्व से हो या पश्चिम से हो, उत्तर से हो दक्षिण से हो, किसी भी जाति का हो, किसी भी विचारधारा का हो, सब एक महायज्ञ के लिए एकता के महाकुंभ में एक हो गए।</p>
<p>उन्होंने कहा, "एक भारत-श्रेष्ठ भारत का यह चिर स्मरणीय दृश्य, करोड़ों देशवासियों में आत्मविश्वास के साक्षात्कार का महापर्व बन गया। अब इसी तरह हमें एक होकर विकसित भारत के महायज्ञ के लिए जुट जाना है।"</p>
<p>महाभारत के उस प्रसंग को याद करते हुए जिसमें बालक रूप में श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को अपने मुख में ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे, मोदी ने कहा कि वैसे ही इस महाकुंभ में भारतवासियों ने और विश्व ने भारत के सामर्थ्य के विराट स्वरूप के दर्शन किए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमें अब इसी आत्मविश्वास से एकनिष्ठ होकर, विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ये एक ऐसी शक्ति है, जिसके बारे में भक्ति आंदोलन में संतों ने राष्ट्र के हर कोने में अलख जगाई थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विवेकानंद हों या श्री ऑरोबिंदो हों, हर किसी ने हमें इसके बारे में जागरूक किया था और इसकी अनुभूति महात्मा गांधी ने भी आजादी के आंदोलन के समय की थी।</p>
<p>मोदी ने कहा, "आजादी के बाद भारत की इस शक्ति के विराट स्वरूप को यदि हमने जाना होता, और इस शक्ति को सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की ओर मोड़ा होता तो यह गुलामी के प्रभावों से बाहर निकलते भारत की बहुत बड़ी शक्ति बन जाती।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "लेकिन हम तब यह नहीं कर पाए। अब मुझे संतोष है, खुशी है कि जनता जनार्दन की यही शक्ति, विकसित भारत के लिए एकजुट हो रही है।"</p>
<p>नदियों और उनकी स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए मोदी ने लोगों से हर नदी को जीवनदायिनी मां का प्रतिरूप मानते हुए 'नदी उत्सव' का आह्वान किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन आसान नहीं था लेकिन इसके बावजूद यदि कोई कमी रह गई हो तो वह इसके लिए जनता जनार्दन से क्षमा मांगते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का सांसद होने के नाते वह गर्व से कह सकते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शासन, प्रशासन और जनता ने मिलकर, इस एकता के महाकुंभ को सफल बनाया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "केंद्र हो या राज्य हो, यहां ना कोई शासक था, ना कोई प्रशासक था, हर कोई श्रद्धा भाव से भरा सेवक था। हमारे सफाईकर्मी, हमारे पुलिसकर्मी, नाविक साथी, वाहन चालक, भोजन बनाने वाले, सभी ने पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निरंतर काम करके इस महाकुंभ को सफल बनाया।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि विशेषकर, प्रयागराज के निवासियों ने इन 45 दिनों में तमाम परेशानियों को उठाकर भी जिस तरह श्रद्धालुओं की सेवा की है, वह अतुलनीय है। उन्होंने इसके लिए प्रयागराज सहित उत्तर प्रदेश के निवासियों का आभार जताया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि महाकुंभ के दृश्यों को देखकर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर उनकी आस्था अनेक गुना मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इससे अभीभूत होकर वह जल्द ही द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ के दर्शन करने जाएंगे और हर भारतीय के लिए प्रार्थना करेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा, "महाकुंभ का स्थूल स्वरूप महाशिवरात्रि को पूर्णता प्राप्त कर गया है। लेकिन मुझे विश्वास है, मां गंगा की अविरल धारा की तरह, महाकुंभ की आध्यात्मिक चेतना की धारा और एकता की धारा निरंतर बहती रहेगी।"</p>
<p>महाकुंभ 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ शुरू हुआ था और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन इसका समापन हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 13:13:07 +0530</pubDate>
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                <title>महाकुंभ: महाशिवरात्रि पर संगम पर एक साथ दिखे भारत के विविध रंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में पिछली 13 जनवरी को शुरू हुए आस्था के सबसे बड़े संगम महाकुंभ के अंतिम दिन महाशिवरात्रि पर देश के विभिन्न भागों से तीर्थयात्री पवित्र संगम स्थल पर डुबकी लगाने के लिए एकत्र हुए और झांझ की झंकार, पवित्र मंत्र और भारत के विविध रूप दिखाने वाले रंग त्रिवेणी संगम पर एक दूसरे में घुल-मिल गये।</p>
<p>प्रयागराज में महाकुंभ पिछली 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा) को शुरू हुआ था और इसमें नागा साधुओं के भव्य जुलूस और तीन 'अमृत स्नान' हुए। इस विशाल धार्मिक समागम में अब तक रिकॉर्ड 64 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137740/mahakumbh--diverse-colors-of-india-were-seen-together-at-the-confluence-on-mahashivaratri"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-01/first-bath-mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में पिछली 13 जनवरी को शुरू हुए आस्था के सबसे बड़े संगम महाकुंभ के अंतिम दिन महाशिवरात्रि पर देश के विभिन्न भागों से तीर्थयात्री पवित्र संगम स्थल पर डुबकी लगाने के लिए एकत्र हुए और झांझ की झंकार, पवित्र मंत्र और भारत के विविध रूप दिखाने वाले रंग त्रिवेणी संगम पर एक दूसरे में घुल-मिल गये।</p>
<p>प्रयागराज में महाकुंभ पिछली 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा) को शुरू हुआ था और इसमें नागा साधुओं के भव्य जुलूस और तीन 'अमृत स्नान' हुए। इस विशाल धार्मिक समागम में अब तक रिकॉर्ड 64 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री शामिल हुए हैं।</p>
<p>महाकुंभ के अंतिम शुभ स्नान की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आधी रात के करीब संगम के तट पर एकत्र होने लगे थे। उनमें से अनेक लोग 'ब्रह्म मुहूर्त' में डुबकी लगाने के लिए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे थे, जबकि उनमें से कई ने नियत समय से बहुत पहले ही स्नान अनुष्ठान कर लिया था। उनमें पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के रहने वाले चार दोस्त भी थे, जिन्होंने स्नान अनुष्ठान के लिए घाट पर जाने से पहले चमकीले पीले रंग की धोती पहनी थी।</p>
<p>बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाले आकाश पाल, कंटेंट राइटर अभिजीत चक्रवर्ती, फार्मास्युटिकल क्षेत्र में काम करने वाले राजा सोनवानी और वकील अभिषेक पाल के अलग-अलग करियर हैं, लेकिन वे "महाकुंभ में महाशिवरात्रि" का त्योहार मनाने की इच्छा में एकजुट हैं।</p>
<p>आकाश पाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "हम दोस्त हैं और हम पश्चिम बंगाल से प्रयागराज तक कार से गए और फिर जहां वाहन ले जाने की अनुमति नहीं थी वहां से हम संगम स्थल तक पैदल गए। इस शानदार आध्यात्मिक जमावड़े का हिस्सा बनना अद्भुत लगता है, खासकर इस शुभ दिन पर।"</p>
<p>पश्चिम बंगाल के तीर्थयात्री दुर्गापुर और कूच बिहार जैसे स्थानों से भी आए थे। साथ ही, 'जय गंगा मैया', 'हर हर महादेव', 'सीता राम' के जयकारे हवा में गूंज रहे थे। साथ ही कई भक्तों द्वारा बजाए जा रहे झांझ की मधुर झंकार भी गूंज रही थी।</p>
<p>दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम के रूप में स्थापित हो चुके इस विशाल धार्मिक उत्सव ने अपने अंतिम दिन न केवल देश के चारों कोनों से बल्कि पड़ोसी नेपाल से भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित किया।</p>
<p>नेपाल के चार किशोरों ने तीन अन्य सदस्यों के साथ महाशिवरात्रि मनाने के लिए पवित्र डुबकी लगाई। मनीष मंडल, रब्बज मंडल, अर्जुन मंडल और दीपक साहनी और उनके चाचा डोमी साहनी ने भगवान शिव नाम वाली अंगरखी पहनी थी।</p>
<p>साहनी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "हम नेपाल के जनकपुर से हैं, जो माता सीता से जुड़ा स्थान है। हमारा शहर जानकी मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। महाकुंभ में पवित्र स्नान के बाद हम भगवान राम के दर्शन के लिए अयोध्या जाएंगे।"</p>
<p>नेपाल से आए समूह के सदस्य पहले अपने गृह नगर से जयनगर गए और फिर ट्रेन से प्रयागराज पहुंचे।</p>
<p>साहनी ने कहा, "अयोध्या से हम वापस जयनगर जाएंगे और फिर कुंभ और अयोध्या दोनों देखने के बाद जनकपुर जाएंगे।"</p>
<p>कई तीर्थयात्रियों ने यह भी कहा कि वे "144 फैक्टर" के कारण इस कुंभ मेले में आए हैं। कुछ लोगों का दावा है कि यह विशाल धार्मिक उत्सव किसी दुर्लभ ग्रह के संरेखण के समय हो रहा है और ऐसा अवसर 144 साल बाद आता है।</p>
<p>महाशिवरात्रि पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए कर्नाटक, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश से भी तीर्थयात्री आए हैं। संगम स्थल पर या उसके आस-पास के विभिन्न घाटों पर तीर्थयात्रियों के आने और पवित्र स्नान करने के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने सतर्क नजर रखी और किसी भी स्थान पर लंबे समय तक भीड़ नहीं लगने दी। महाकुंभ मेला क्षेत्र में विशाल प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जैसे नंदी द्वार और संगम प्रिय।</p>
<p>संगम स्थल के पास संगम द्वार के शीर्ष पर माँ गंगा, माँ यमुना और माँ सरस्वती की एक-एक तस्वीर अंकित है। संगम की ओर जाते समय कई तीर्थयात्री इस प्रवेश द्वार के साथ एक तस्वीर लेने के लिए कुछ समय के लिए रुके।</p>
<p>कई भक्त भगवा वस्त्र पहनकर मेले में आए, जबकि कई अन्य भगवान शिव का नाम लेते हुए और हवा में हाथ उठाते हुए आए।</p>
<p>महाशिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन का स्मरण कराती है और कुंभ मेले के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।</p>
<p>हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने समुद्र मंथन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके कारण अमृत कुंभ (अमृत से भरा घड़ा) का उद्भव हुआ। यह कुंभ मेले का सार है। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था और अपने कंठ में उसे रोक लिया था जिसकी वजह से उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, मंगलवार को संगम और मेला क्षेत्र के अन्य घाटों पर कुल 1.33 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। इसके साथ ही प्रयागराज महाकुंभ में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या संख्या 64 करोड़ से अधिक हो गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 17:07:05 +0530</pubDate>
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                <title>रिकॉर्ड 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान के साथ महाकुंभ मेला संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में 45 दिनों तक विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक एवं आध्यात्मिक समागम- महाकुंभ 2025, बुधवार को अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के साथ संपन्न हो गया।</p>
<p>तेरह जनवरी से प्रारंभ हुए इस मेले में देश विदेश से 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई।</p>
<p>मेला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को शाम छह बजे तक 1.44 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई तथा 13 जनवरी से अब तक स्नान करने वालों की संख्या 66.21 करोड़ पहुंच गई है।</p>
<p>श्रद्धालुओं की यह संख्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137717/mahakumbh-mela-concluded-with-a-record-of-more-than-66"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में 45 दिनों तक विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक एवं आध्यात्मिक समागम- महाकुंभ 2025, बुधवार को अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के साथ संपन्न हो गया।</p>
<p>तेरह जनवरी से प्रारंभ हुए इस मेले में देश विदेश से 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई।</p>
<p>मेला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को शाम छह बजे तक 1.44 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई तथा 13 जनवरी से अब तक स्नान करने वालों की संख्या 66.21 करोड़ पहुंच गई है।</p>
<p>श्रद्धालुओं की यह संख्या चीन और भारत को छोड़कर अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों समेत सभी देशों की आबादी से अधिक है। साथ ही यह मक्का और वेटिकन सिटी जाने वाले श्रद्धालुओं से भी अधिक है।</p>
<p>महाकुंभ अपनी स्वच्छता को लेकर भी चर्चा में रहा जिसमें स्वच्छता कर्मियों की अहम भूमिका रही। महाकुंभ मेले में स्वच्छता प्रभारी डाक्टर आनंद सिंह ने ‘पीटीआई- भाषा’ को बताया कि पूरे मेले में 15,000 स्वच्छताकर्मी चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात रहे। कई पालियों में उन्होंने साफ सफाई की जिम्मेदारी बखूबी निभाई और मेले में शौचालयों और घाटों को पूरी तरह से साफ रखा। सभी ने उनके कार्यों की सराहना की।</p>
<p>महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या को हुई भगदड़ की घटना से इसकी छवि थोड़ी धूमिल हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर इस घटना का कोई खास असर नहीं पड़ा और लोगों का आगमन अनवरत जारी रहा। भगदड़ में 30 लोगों की मृत्यु हो गई थी।</p>
<p>महाकुंभ मेले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, फिल्मी सितारों और खेल जगत, उद्योग जगत की हस्तियों तक ने संगम में डुबकी लगाई और प्रदेश सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की।</p>
<p>इस महाकुंभ में नदियों के संगम के साथ ही प्राचीनता और आधुनिकता का भी संगम देखने को मिला जिसमें एआई से युक्त कैमरों, एंटी ड्रोन जैसी कई अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया गया और मेला पुलिस को इन प्रणालियों का प्रशिक्षण दिया गया।</p>
<p>हालांकि, यह मेला कई विवादों को लेकर भी चर्चा में रहा जैसे फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनना और उनको लेकर विवाद खड़ा होना। इसके अलावा, गंगा जल की शुद्धता को लेकर राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एनपीसीबी) की रिपोर्ट और फिर उस पर सरकार के हवाले से कई वैज्ञानिकों द्वारा गंगा जल की शुद्धता की पुष्टि करना भी चर्चा में रहा।</p>
<p>हिंदुओं की मान्यता है कि ग्रह नक्षत्रों के विशेष संयोग से कुंभ और महाकुंभ में गंगा और संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<p>परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के प्रमुख चिदानंद सरस्वती ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मेरे लिए महाकुंभ तब संपन्न होगा जब अंतिम श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा लेगा। आप कह सकते हैं कि बृहस्पतिवार को ब्रह्म मुहूर्त शुरू होने के साथ मेला समाप्त होगा।”</p>
<p>इस मेले के लिए एक नया जिला-महाकुंभ नगर अधिसूचित किया गया और मेला संचालन के लिए जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत पुलिस और प्रशासन की नियुक्ति की गई। यह प्रदेश का 76वां अस्थायी जिला है।</p>
<p>महाकुंभ मेले में सभी 13 अखाड़ों ने तीन प्रमुख पर्वों- मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर अमृत स्नान किया। हालांकि, मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ की घटना के बाद अखाड़ों का अमृत स्नान अधर में लटक गया था, लेकिन अंततः अखाड़ों के साधु संतों ने अमृत स्नान किया और बसंत पंचमी स्नान के साथ वे मेला से विदा हो गए।</p>
<p>मौनी अमावस्या को हुए हादसे को लेकर नेताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू किया जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाकुंभ को ‘मृत्युकुंभ’ करार दिया। हालांकि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका तगड़ा जवाब दिया। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर भगदड़ में मृतकों की संख्या छिपाने का आरोप लगाया।</p>
<p>सपा समेत विपक्षी दलों ने श्रद्धालुओं की संख्या पर भी सवाल खड़ा किया, लेकिन सरकार ने 1,800 एआई कैमरों समेत 3,000 से अधिक कैमरों, ड्रोन और 60,000 कर्मचारियों के हवाले से श्रद्धालुओं की सही संख्या बताने की बात कही।</p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘श्रद्धालुओं की संख्या का मिलान करने के लिए एआई कैमरों के साथ ही हम रोडवेज, रेलवे और हवाईअड्डे के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहे।’’</p>
<p>महाकुंभ मेले में अग्निशमन विभाग ने आग की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाई और आग लगने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई किए जाने से जनहानि की एक भी सूचना नहीं आई। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 37,000 पुलिसकर्मी, 14,000 होमगार्ड के जवान तैनात रहे। इसके अलावा, तीन जल पुलिस थाने, 18 जल पुलिस कंट्रोल रूम और 50 ‘वाच टावर’ स्थापित किए गए थे।</p>
<p>महाकुंभ में आने वाले अति विशिष्ट लोगों में भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल, ब्रिटेन के रॉक बैंड कोल्डप्ले के क्रिस मार्टिन प्रमुख रूप से शामिल थे।</p>
<p>इनके अलावा, सोशल मीडिया के चर्चित चेहरों में हर्षा रिछारिया, माला बेचने वाली युवती मोनालिसा भोसले और ‘आईआईटी बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध अभय सिंह ने भी इस मेले में सुर्खियां बटोरी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 16:14:28 +0530</pubDate>
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                <title>उप्र : महाकुंभ में अपनों से बिछड़ने से बचने के लिए रस्सियां, गांठ और घुंघरू बांधकर चल रहे श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(कुणाल दत्त)</p>
<p>महाकुंभनगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में लाखों लोगों की भीड़ के बीच श्रद्धालु अपने परिवार के अन्य सदस्यों से आसानी से बिछड़ सकने की आशंका के बीच, संगम तक जाते समय और वापस आते समय अपने परिचितों के साथ-साथ चलने के लिए अलग-अलग उपाय अपना रहे हैं।</p>
<p>जहां कुछ लोग लंबी रस्सी लाए हैं और उन्होंने उससे एक ‘सुरक्षा घेरा’ बनाया है जिसमें वे चल सकें, वहीं कई अन्य लोग एक-दूसरे के कपड़ों से गांठ बांधकर चल रहे हैं ताकि वे बिछड़ न जाएं।</p>
<p>बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शुभ स्नान के साथ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137621/up--devotees-walking-with-ropes--lumps-and-ghungroo-to-avoid-separation-from-their-loved-ones-in-mahakumbh"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>(कुणाल दत्त)</p>
<p>महाकुंभनगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में लाखों लोगों की भीड़ के बीच श्रद्धालु अपने परिवार के अन्य सदस्यों से आसानी से बिछड़ सकने की आशंका के बीच, संगम तक जाते समय और वापस आते समय अपने परिचितों के साथ-साथ चलने के लिए अलग-अलग उपाय अपना रहे हैं।</p>
<p>जहां कुछ लोग लंबी रस्सी लाए हैं और उन्होंने उससे एक ‘सुरक्षा घेरा’ बनाया है जिसमें वे चल सकें, वहीं कई अन्य लोग एक-दूसरे के कपड़ों से गांठ बांधकर चल रहे हैं ताकि वे बिछड़ न जाएं।</p>
<p>बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शुभ स्नान के साथ 45 दिवसीय महाकुंभ का समापन होगा। हर 12 साल बाद आयोजित होने वाले महाकुंभ का अंतिम स्नान पर्व बुधवार को ‘हर हर महादेव’ के घोष के साथ प्रारंभ हो गया। बुधवार तड़के से ही श्रद्धालुओं का गंगा और संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला जारी है। इस बीच, सरकार ने श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि सुबह आठ बजे तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। इस तरह से 13 जनवरी से आरंभ हुए महाकुंभ में अब तक 65.37 करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा और संगम में डुबकी लगा चुके हैं और शाम तक यह आंकड़ा 66 करोड़ को पार करने की संभावना है।</p>
<p>सोमवार रात से लेकर कई लोग अपने प्रियजन और मित्रों से नदी किनारों या मेला क्षेत्र के अन्य हिस्सों में बिछड़ चुके हैं। इनमें से कई लोगों को मानवीय सहायता और डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपने परिजन से मिलाया जा चुका है।</p>
<p>सेक्टर तीन, अक्षय वट रोड स्थित ‘खोया-पाया’ केंद्र पर सोमवार देर रात तीन बजे भी चहल-पहल थी।</p>
<p>मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से आए 34 तीर्थयात्रियों ने अपने समूह के चारों तरफ रस्सी का घेरा बनाया जिसे विभिन्न ओर से समूह के कुछ सदस्यों ने थाम रखा था।</p>
<p>समूह में शामिल सोमदत्त शर्मा (34) ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने यह सुरक्षा घेरा इसलिए बनाया है ताकि हम एक-दूसरे से बिछड़ न जाएं। हम पहली बार किसी कुंभ में आए हैं और हम एक-दूसरे से अलग होने के खतरों से वाकिफ हैं इसलिए हमने यह व्यवस्था की है।’’</p>
<p>कई अन्य लोग एक दूसरे के कपड़ों में गांठ बांधकर चल रहे हैं।</p>
<p>पीली कोठी क्षेत्र के स्थानीय निवासी अजय कुमार कुंभ मेला शुरू होने के बाद से रोजाना अपने घर से तीर्थयात्रियों की भीड़ को गुजरते देखते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘गांवों के लोग गांठ बांधकर चलते हैं। पुरुष तीर्थयात्री अपनी धोती के साथ अपने साथ आई महिला की साड़ी के पल्लू को बांधते हैं या दो महिलाएं एक-दूसरे के शॉल का उपयोग करके गांठ बांध लेती हैं।’’</p>
<p>उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ ये कहा कि दरअसल कई लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते और उन्हें संपर्क नंबर भी मुश्किल से याद रहता है इसलिए एक बार बिछड़ जाने पर उनका फिर से मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर वे गांठ बांधकर चलते हैं।</p>
<p>एक अन्य श्रद्धालु अक्षत लाल ने कहा, ‘‘कुछ लोग तो एक पैर में घुंघरू बांधकर चल रहे हैं, ताकि भीड़ में खो जाने पर उनकी आवाज से एक-दूसरे को खोज सकें।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 12:30:33 +0530</pubDate>
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                <title>सुबह से शाम तक, सूर्यास्त से सूर्योदय तक... त्रिवेणी संगम पर चौबीसों घंटे होता है स्नान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभनगर, 25 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में गंगा नदी के तटों पर चौबीसों घंटे तीर्थयात्रियों की भीड़ लगी रहती है, पूजा सामग्री बेचने वाले तथा संगम स्थल पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर जगह सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं - त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहां दिन और रात का अंतर नज़र नहीं आता।</p>
<p>सुबह से शाम तक और आधी रात से भोर तक, इस पवित्र नगरी में मानवता के विशाल समागम में आध्यात्मिक स्नान का चक्र बिना रुके चलता रहता है।</p>
<p>दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव महाकुंभ का बुधवार को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम 'स्नान'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137394/from-morning-to-evening--sunset-from-sunset-to-sunrise-----bath-is-round-the-clock-at-triveni-sangam"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभनगर, 25 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में गंगा नदी के तटों पर चौबीसों घंटे तीर्थयात्रियों की भीड़ लगी रहती है, पूजा सामग्री बेचने वाले तथा संगम स्थल पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर जगह सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं - त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहां दिन और रात का अंतर नज़र नहीं आता।</p>
<p>सुबह से शाम तक और आधी रात से भोर तक, इस पवित्र नगरी में मानवता के विशाल समागम में आध्यात्मिक स्नान का चक्र बिना रुके चलता रहता है।</p>
<p>दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव महाकुंभ का बुधवार को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम 'स्नान' के साथ समापन हो जाएगा। अब हर समय महाकुंभ मेला क्षेत्र में लोगों के सैलाब को आता-जाता देखा जा सकता है। कई लोग पवित्र डुबकी के लिए दिन के समय होने वाली भारी भीड़ से बचने के लिए रात का वक्त चुनते हैं।</p>
<p>सोमवार देर रात करीब 1.30 बजे, जब देश का अधिकांश हिस्सा सो रहा था, संगम के घाट तथा उस स्थान के पास जन-जीवन गुलजार था, तथा लोगों का सैलाब केवल एक ही उद्देश्य से उमड़ रहा था कि गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के संगम पर 'कुंभ स्नान' करना है।</p>
<p>हर घंटे भीड़ बढ़ती गई। तीर्थयात्री नदी के किनारे पहुंचने के लिए एक-दूसरे से धक्का-मुक्की करते रहे और पवित्र स्नान करने वाले लोग अपने कपड़े बदलने के लिए जगह ढूंढने के लिए संघर्ष करते रहे। घाट श्रद्धालुओं से अटे पड़े थे जिसमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल थे।</p>
<p>झारखंड के साहिबगंज से आए एक तीर्थयात्री ने अपनी पत्नी और बेटे के साथ रात करीब दो बजे स्नान किया। उन्होंने कहा, "जय गंगा मैया, मैंने स्नान कर लिया और मुझे नया उत्साह महसूस हो रहा है। मैं पहली बार कुंभ मेले में आया हूं, मुझे खुशी है कि मैं इसका हिस्सा बन सका।”</p>
<p>जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, कई लोग त्रिवेणी संगम के पास बैठे गए। इस बीच पुलिसकर्मी घाट के किनारे घूम रहे थे और लोगों को निर्देश दे रहे थे कि वे घाट के किनारे जमीन पर बैग न रखें और जगह बनाने के लिए धक्का-मुक्की न करें।</p>
<p>पुलिस कर्मी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लोगों से कहते रहे कि “आगे बढ़िए, आगे बढ़िए।”</p>
<p>भीड़ बढ़ती जा रही थी। कई लोग अपने प्रियजनों और दोस्तों से या तो तटों पर या मेला क्षेत्र के अन्य हिस्सों पर बिछड़ गए।</p>
<p>सेक्टर 3, अक्षय वट रोड स्थित 'खोया-पाया' केंद्र में देर रात तीन बजे भी चहल-पहल थी।</p>
<p>मध्य प्रदेश के रमेश कैदन अपनी पत्नी से बिछड़ गए थे और वह बेसब्री से केंद्र पर उनका इंतजार कर रहे थे। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के मुन्नीलाल ठाकुर भी अपने भाई, भाभी और पोते की प्रतीक्षा कर रहे थे।</p>
<p>मेला क्षेत्र में लाउडस्पीकरों पर बार बार घोषणाएं की जा रही थीं, जबकि केंद्र में एक डिजिटल स्क्रीन पर खो गए या मिल गए व्यक्तियों के नाम (ज्यादातर फोटो के साथ) प्रदर्शित किए जा रहे थे।</p>
<p>शिवलिंग, रुद्राक्ष की माला, नदी का पानी ले जाने के लिए बोतल आदि और अनुष्ठान के धागे बेचने वाले विक्रेता पूरी रात कारोबार करते देखे जा सकते हैं।</p>
<p>राजस्थान की रहने वाली और अनुष्ठान के धागे बेचने वाली मनीषा ने कहा, "इस स्थान पर पूरे दिन तीर्थयात्रियों की भीड़ लगी रहती है, घाट पूरी रात भरे रहते हैं। संगम पर हमेशा लोगों की आवाजाही रहती है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 19:08:12 +0530</pubDate>
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