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                <title>Acharya Mahashraman - Loktej</title>
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                <description>Acharya Mahashraman RSS Feed</description>
                
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                <title>सूरत : गुरु पूर्णिमा के दिन आचार्यश्री महाश्रमणजी के सन्निधि में तेरापंथ स्थापना दिवस का भव्य आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div>सूरत (गुजरात) 21.07.2024, रविवार : सिल्कसिटी व डायमण्ड सिटी के रूप में प्रख्यात गुजरात का सूरत शहर को आध्यात्मिकता से आलोकित बनाने के लिए पधारे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में गुरु पूर्णिमा के दिन 265वें तेरापंथ स्थापना दिवस का भव्य रूप में समायोजन हुआ।</div>
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<div>आध्यात्मिक सुगुरु की मंगल सन्निधि में यह आयोजन भी आध्यात्मिकता से ओतप्रोत रहा। इस अवसर पर उपस्थित जनमेदिनी को जहां आचार्यश्री की मंगलवाणी से पावन प्रेरणा प्राप्त हुई, वहीं मुख्यमुनिश्री व साध्वीवर्याजी के वचनों के श्रवण का लाभ भी प्राप्त हुआ। सूरत शहर व आसपास के तेरापंथी नौनिहालों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103253/grand-celebration-of-terapanth-foundation-day-in-the-company-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/‍b21072024-02.jpg" alt=""></a><br /><div>सूरत (गुजरात) 21.07.2024, रविवार : सिल्कसिटी व डायमण्ड सिटी के रूप में प्रख्यात गुजरात का सूरत शहर को आध्यात्मिकता से आलोकित बनाने के लिए पधारे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में गुरु पूर्णिमा के दिन 265वें तेरापंथ स्थापना दिवस का भव्य रूप में समायोजन हुआ।</div>
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<div>आध्यात्मिक सुगुरु की मंगल सन्निधि में यह आयोजन भी आध्यात्मिकता से ओतप्रोत रहा। इस अवसर पर उपस्थित जनमेदिनी को जहां आचार्यश्री की मंगलवाणी से पावन प्रेरणा प्राप्त हुई, वहीं मुख्यमुनिश्री व साध्वीवर्याजी के वचनों के श्रवण का लाभ भी प्राप्त हुआ। सूरत शहर व आसपास के तेरापंथी नौनिहालों ने इस अवसर पर अपने आराध्य के मुख से मंत्र दीक्षा स्वीकार कर इस स्थापना दिवस को आध्यात्मिक रूप में मनाया। </div>
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<div>भगवान महावीर युनिवर्सिटी में वर्ष 2024 का चतुर्मास करने के उपस्थित जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में रविवार को आषाढ़ी पूर्णिमा (गुरुपूर्णिमा) के दिन तेरापंथ धर्मसंघ के 265वें स्थापना दिवस का कार्यक्रम भी समायोजित हुआ। भव्य एवं विशाल महावीर समवसरण में भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी लगभग नौ बजे ही पधार गए। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। आचार्यश्री के मंगल उद्बोधन से पूर्व साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने तेरापंथ के इतिहासों का वर्णन किया तो मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने तेरापंथ धर्मसंघ के पूर्ववर्ती विशिष्ट संतों के जीवन आदि का वर्णन किया। </div>
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<div>तदुपरान्त तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अनुशास्ता महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित विशाल जनमेदिनी को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का 265वां स्थापना दिवस का प्रसंग है। आषाढ़ी पूर्णिमा का दिन है। चतुर्मास लग जाने के बाद का पहला दिन। आषाढी पूर्णिमा हमारे धर्मसंघ के ऐतिहासिक दृष्टि से उतना ही महत्त्वपूर्ण है, जितना भारत के लिए 15 अगस्त का दिन होता है। 15 अगस्त भारत के स्वतंत्रता का दिवस है तो तेरापंथ के लिए आषाढ़ी पूर्णिमा स्थापना का दिवस है। एक स्वतंत्र पंथ के प्रारम्भ का दिन है। जिस प्रकार 26 जनवरी प्रतिष्ठा को प्राप्त है, उसी प्रकार माघ शुक्ला सप्तमी तेरापंथ का विशिष्ट दिन है। हमारे धर्मसंघ को आज 264 वर्ष सम्पन्न हो रहे हैं। तेरापंथ के नाम में एक ओर तेरह की संख्या का योग है तो दूसरी ओर जोधपुर के एक सेवक जाति के द्वारा रचे गए दोहा भी आधार बन गया। उद्गम तो सेवक जाति द्वारा हो गया तो व्यवहार के रूप में हमें उनका भी आभार मानना चाहिए। परम पूज्य आचार्यश्री भिक्षु स्वामी के पास यह बात पहुंची तो उन्होंने उदारता दिखाते हुए पट्ट उतरे और उसका अर्थ करते हुए कहा कि हे प्रभो! यह तेरा पंथ। इस वाक्य में भगवान महावीर के प्रति आस्था व समर्पण का भाव भी अभिव्यक्त होता है। </div>
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<div>आचार्यश्री ने आगे कहा कि मेरा ऐसा मानना है कि परम वंदनीय आचार्यश्री भिक्षु स्वामी ने चैत्र शुक्ला नवमी जैसी प्रतिष्ठित तिथि को अभिनिष्क्रमण किया तो आषाढ़ी पूर्णिमा जैसी ऐतिहासिक तिथि को तेरापंथ की स्थापना की। मेरा अनुमान है कि इन तिथियों के चयन के पीछे शुभ मुहूर्त अथवा उत्तम तिथियों का विचार किया था। संभवतः मैंने आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के भाषण में सुना था कि संभवतः दो हजार वर्ष तक तेरापंथ धर्मसंघ का कोई बाल बांका नहीं कर सकता। उन्होंने अच्छे दिन व मुहूर्त का ध्यान कर अभिनिष्क्रमण किया और अच्छे मुहूर्त में तेरापंथ की स्थापना की। </div>
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<div>तेरापंथ को समझने के लिए आदमी को पहले तेरापंथ के इतिहास को पढ़ने की आवश्यकता होगी। उसके बाद आदमी तेरापंथ के दर्शन और तेरापंथ की मर्यादा व्यवस्था का अच्छा अध्ययन करे तो तेरापंथ को विस्तारपूर्वक समझा जा सकता है। महामना आचार्यश्री भिक्षु स्वामी व चतुर्थ आचार्य श्रीमज्जयाचार्य के ग्रंथों के माध्यम से भी तेरापंथ को जाना जा सकता है। आज का दिन धर्मसंघ के लिए महत्त्वपूर्ण है। हमारे पूर्वाचार्यों ने धर्मसंघ की कितनी सेवा की। नवमें आचार्यश्री तुलसी ने साधिक साठ वर्षों तक धर्मसंघ की सेवा की। उनके काल में अनेक नवीन उन्मेष आए। परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने भी धर्मसंघ की सेवा की। हमारा धर्मसंघ तेजस्वी बना रहे, ऐसा प्रयास होना चाहिए। मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने अपने दैनिक कार्यक्रमों में उपस्थिति व अपने व्याख्यान के समय आदि का वर्णन करते हुए सूरत चतुर्मास के उपरान्त आगे के यात्रा पथ की जानकारी भी दी। </div>
<div> </div>
<div>आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वीवृंद व मुनिवृंद ने इस अवसर पर पृथक्-पृथक् गीत का संगान किया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा पूज्य सन्निधि में आयोजित मंत्र दीक्षा कार्यक्रम में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा व तेरापंथ युवक परिषद के मंत्री श्री सौरभ पटावरी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ के नन्हें-मुन्हें बच्चों ने अपने आराध्य के समक्ष अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तदुपरान्त आचार्यश्री ने समुपस्थित सैंकड़ों नन्हें-मुन्हें बच्चों को मंत्र दीक्षा प्रदान करने के साथ ही बच्चों से प्रश्नोत्तर करते हुए विविध प्रेरणाएं प्रदान कीं तो गुरु की भावी पीढ़ी पर बरसती कृपा को देख पूरी जनमेदिनी भावविभोर नजर आ रही थी। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त दिव्यांग श्री भावेश भाटिया ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री के साथ उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ ने अपने स्थान पर खड़े होकर संघगान किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jul 2024 19:40:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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                <title>सूरत : भव्य दीक्षा महोत्सव में आठ दीक्षार्थियों ने स्वीकारा संयम जीवन  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत (गुजरात) 19.07.2024, शुक्रवार। संसार के भोग विलास को त्याग कर संयम के पथ पर बढ़ना, त्याग के पथ पर बढ़ना कोई सरल कार्य नहीं है। कोई विरले ही होते है जो आज के युग में भी भौतिक आकांक्षाओं का त्याग कर आत्मा के उद्धार का मार्ग स्वीकार कर लेते है। कुछ ऐसा ही विरल दृश्य आज सुरत के चातुर्मासिक स्थल "संयम विहार" में देखने को मिला जब आठ भाई–बहनों ने संयम जीवन को स्वीकार कर अपना जीवन आत्मा के उद्धार एवं परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में आज भव्य जैन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103228/eight-initiates-accepted-a-life-of-abstinence-in-the-grand"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b19072024-131.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत (गुजरात) 19.07.2024, शुक्रवार। संसार के भोग विलास को त्याग कर संयम के पथ पर बढ़ना, त्याग के पथ पर बढ़ना कोई सरल कार्य नहीं है। कोई विरले ही होते है जो आज के युग में भी भौतिक आकांक्षाओं का त्याग कर आत्मा के उद्धार का मार्ग स्वीकार कर लेते है। कुछ ऐसा ही विरल दृश्य आज सुरत के चातुर्मासिक स्थल "संयम विहार" में देखने को मिला जब आठ भाई–बहनों ने संयम जीवन को स्वीकार कर अपना जीवन आत्मा के उद्धार एवं परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में आज भव्य जैन भागवती दीक्षा समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें दो समणी जी का श्रेणी आरोहण एवं दो मुमुक्षु भाई व चार मुमुक्षु बहनों ने जैन मुनि दीक्षा ग्रहण की। आचार्य भिक्षु के बोधि दिवस के साथ ही दीक्षा समारोह से श्रद्धालुओं का उत्साह द्विगुणित हो गया। हजारों की संख्या में विशाल जन समुदाय आज के इस भव्य दीक्षा समारोह का साक्षी बनने उपस्थित था।</p>
<p>प्रातः 09 बजे समारोह के प्रारंभ के साथ ही महावीर समवसरण का विशाल पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। हर कोई दीक्षा के दुर्लभ क्षणों का साक्षी बनने के लिए समुत्सुक था। सर्व प्रथम समणी मंजू प्रज्ञा जी ने एवं मुमुक्षु रुचिका, मुमुक्षु साधना ने दीक्षार्थियों का परिचय प्रस्तुत किया। जिसके पश्चात पारमार्थिक शिक्षण संस्था के अध्यक्ष श्री बजरंग जैन ने दीक्षा स्वीकार करने वालो के आज्ञा पत्र का वाचन किया। दीक्षार्थियों ने माता–पिता के वह पत्र गुरु चरणों में समर्पित कर दीक्षा देने हेतु लिखित एवं मौखिक आज्ञा प्रदान की। </p>
<p>मंगल धर्म देशना में गुरुदेव ने कहा – तीर्थंकर प्रभु महावीर लोकोत्तम पुरुष थे। अरिहंत प्रभु को लोक में उत्तम कहा गया है, सिद्ध भगवान को उत्तम माना गया है और केवली प्रज्ञप्त धर्म को लोक में उत्तम माना गया है।  साधु बनने का भी अर्थ है लोकोत्तमता की स्थिति को प्राप्त करना। आज आचार्य भिक्षु का जन्म 299 वां जन्म दिवस है। आजका दिन "बोधि दिवस" के रूप मे भी प्रतिष्ठित है। आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ धर्म संघ की नींव रखी। इस अनंत काल की यात्रा में साधु बनना व साधुत्व की प्राप्ति होना बहुत मुश्किल है। हमारे में भी बोधि प्राप्त हो व बोधि का विकास हो। वीतरागता प्राप्त करने की दिशा में हमारा प्रस्थान हो। साधुता व साधुत्व सबसे बड़ी चीज है। गृहस्थ भी त्याग व संयम की दिशा में आगे बढ़ते रहें। </p>
<p>दीक्षा संस्कार के साथ ही मत्थेण वंदामि से गूंजी धर्म सभा<br />आचार्य प्रवर ने आर्ष वाणी का उच्चारण करते हुए सभी दीक्षार्थियों को सर्व सावद्य कार्यों का त्याग कराते हुए जैन मुनि दीक्षा प्रदान की। इसके साथ ही अतीत के कृत कार्यों की आलोचना करवाते हुए आचार्यश्री ने आगम पाठ करवाया। जैसे ही दीक्षा संस्कार पूर्ण कर आचार्यश्री ने फरमाया की यह सभी अब हमारे परिवार के हो गए है समुची जनमेदनी ने मत्थेण वंदामी के घोष से नव दीक्षितों की अभिवंदना की।</p>
<p>केशलोंचन विधि : चोटी गुरु के हाथ में<br />केश लुंचन एक ओर जहां साधु चर्या का महत्वपूर्ण अंग है वहीं शिष्य की चोटी हमेशा गुरु के हाथ में रहती है इसका प्रतीक है। इस परंपरा का निर्वहन करते हुए आचार्यश्री ने नव दीक्षित दोनों मुनियों के चोटी के बालों का हाथों से लूंचन किया वहीं गुरुदेव की आज्ञा से साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा जी ने नवदीक्षित साध्वियों का लोंचन यह विधि पूर्ण की। </p>
<p>नए जीवन का नया नामकरण : प्रदान किया अहिंसा का ध्वज<br />दीक्षा आध्यात्मिक जीवन का नया जन्म है। इसके तहत आचार्य श्री ने नवदीक्षितों का नामकरण किया। जिसके तहत मुमुक्षु विकास बाफना - मुनि श्री वीतराग कुमार, मुमुक्षु सुरेंद्र कोचर - मुनि श्री संयम कुमार, समणी अक्षयप्रज्ञाजी - साध्वी श्री अक्षयविभा, समणी प्रणवप्रज्ञाजी - साध्वी श्री प्रीतिप्रभा, मुमुक्षु मीनाक्षी सामसुखा - साध्वी श्री परागप्रभा,  मुमुक्षु मीनल परीख - साध्वी श्री मेधावीप्रभा,  मुमुक्षु दीक्षिता संघवी - साध्वी श्री दीक्षितप्रभा,  मुमुक्षु नूपुर बरड़िया - साध्वी श्री निश्चयप्रभा के रूप में आध्यात्मिक नाम प्रदान किया। गुरुदेव ने साथ ही साधु चर्या का अभिन्न अंग राजोहरण जिसे अहिंसा का ध्वज भी कहा जाता है आगम वाणी के साथ नव दीक्षितों को प्रदान किया।</p>
<p>इस अवसर पर साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने सारगर्भित उद्बोधन प्रदान किया। नवदीक्षितों ने अपने भावोद्गार रखे। कार्यक्रम में कई युवक युवतियों ने मुमुक्षु हेतु पारमार्थिक शिक्षण संस्था में प्रवेश भी किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 20:17:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : ज्ञान अनंत है समय कम है अतः सारभूत ज्ञान को ग्रहण करें - युगप्रधान आचार्य महाश्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत (गुजरात) 18.07.2014, गुरुवार। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी चतुर्विध धर्मसंघ के साथ सूरत शहर में चातुर्मासिक प्रवास पर है। आचार्य श्री के पावन प्रवेश के बाद से ही शहर में ऐसा लग रहा है मानों कोई आध्यात्मिक उत्सव आ गया हो। प्रातः चार बजे से ही गुरुदेव के दर्शनार्थ लोगों का तांता लग जाता है।</p>
<p>मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में महावीर समवसरण की विशाल जनमेदिनी इस धर्म नगरी की पहचान को ओर सुदृढ़ कर देती है। कल आचार्यश्री के पावन सान्निध्य में भव्य जैन दीक्षा समारोह समायोजित है। जिसमें आठ दीक्षार्थी संयम जीवन स्वीकार कर भोग से त्याग के पथ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103211/surat-knowledge-is-infinite-time-is-short-hence-grasp-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/‍b18072024-11.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत (गुजरात) 18.07.2014, गुरुवार। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी चतुर्विध धर्मसंघ के साथ सूरत शहर में चातुर्मासिक प्रवास पर है। आचार्य श्री के पावन प्रवेश के बाद से ही शहर में ऐसा लग रहा है मानों कोई आध्यात्मिक उत्सव आ गया हो। प्रातः चार बजे से ही गुरुदेव के दर्शनार्थ लोगों का तांता लग जाता है।</p>
<p>मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में महावीर समवसरण की विशाल जनमेदिनी इस धर्म नगरी की पहचान को ओर सुदृढ़ कर देती है। कल आचार्यश्री के पावन सान्निध्य में भव्य जैन दीक्षा समारोह समायोजित है। जिसमें आठ दीक्षार्थी संयम जीवन स्वीकार कर भोग से त्याग के पथ पर आगे बढ़ेंगे।</p>
<p>मध्यान्ह में दीक्षार्थियों की शोभायात्रा (वरघोड़ा) भी निकाली गई जिसमें शहर वासियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। रात्रि में मंगल भावना समारोह समायोज्य है। जिसमें पारमार्थिक शिक्षण संस्था की मुमुक्षु बहनों द्वारा आध्यात्मिक आरती का दृश्य विशेष उल्लेखनीय रहता है।</p>
<p>साथ ही पारिवारिक जनों ने दीक्षार्थियों के प्रति अपनी भावाभिव्यक्ति दी। दीक्षा महोत्सव के साथ कल तेरापंथ के आद्य प्रवर्तक आचार्य श्री भिक्षु का जन्म दिवस भी बोधि दिवस के रूप में मनाया जायेगा। 20 जुलाई को चातुर्मास स्थापना दिवस एवं 21 जुलाई को तेरापंथ स्थापना दिवस मनाया जायेगा।</p>
<p>मंगल प्रवचन में प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री ने कहा – हमारे जीवन में ज्ञान व शिक्षा का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा लौकिक भी व आध्यात्मिक भी दोनों प्रकार की होती है। कितने कितने क्षेत्रों में विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रयास रत रहते हैं। तात्विक दृष्टि से से ज्ञान के दो प्रकार है – क्षायिक व क्षयोपशमिक। ज्ञान की पूर्ण प्राप्ति, केवल ज्ञान की प्राप्ति व कर्मों के पूर्ण विलय से क्षायिक ज्ञान होता है तथा आंशिक ज्ञान क्षयोपशम से हो सकता है। ज्ञान अपने आप में पवित्र है। ज्ञान का कोई अंत नहीं है। कोई सौ वर्षों तक भी पढ़ता रहे तो ज्ञान पूर्ण नहीं होता। ज्ञान प्राप्ति के लिए विनय का होना जरूरी है।</p>
<p>गुरुदेव ने आगे कहा कि ज्ञान प्राप्ति के लिए जरूरी है की देने वाला विशेषज्ञ हो, ज्ञानी हो और लेने वाला भी योग्य हो। जो ज्ञान पिपासु होता है वही ज्ञान को प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति ऐसा ज्ञान प्राप्त करें जो जीवन के लिए उपयोगी हो। ज्ञान अनंत है और काल सीमित, उसमें भी विघ्न बाधाएं भी आ जाती है। ऐसे में सारभूत ज्ञान को ग्रहण कर लेना चाहिए। जैसे हंस केवल दूध और पानी में दूध ग्रहण करता है उसी प्रकार केवल सारभूत ज्ञान को ग्रहण करना चाहिए। वर्तमान समय में ज्ञान प्राप्ति के लिए आज आधुनिक तकनीक का भी बड़ा विकास हुआ है, लेकिन इस तकनीक का दुरूपयोग न हो।</p>
<p>इस अवसर पर विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के सलाहकार श्री अजय भुतोडिया कार्यक्रम में उपस्थित थे।</p>
<p>अभिनंदन के क्रम में बाबूलाल भोगर, अनिल बोथरा, उधना से निर्मल चपलोत, गौतम आंचलिया, सोनू बाफना, प्रदीप गंग, विमल लोढ़ा, लक्ष्मीलाल गोखरू, फूलचंद चत्रावत, राजेश सुराणा, श्रीमती कनक बरमेचा, गणपत भंसाली, चंपक भाई, प्रवीण भाई, अर्जुन मेडतवाल, शैलेश झवेरी, राजा बाबू एवं दिव्य भास्कर के एडिटर श्री मृगांक जी ने अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही दैनिक भास्कर के चीफ एडिटर मुकेश जी शर्मा आदि ने दिव्य भास्कर की प्रति गुरुदेव को भेंट की।<br /> <br />आराध्य का अभिनंदन करते हुए प्रवास व्यवस्था समिति, उधना महिला मंडल, कन्या मंडल, पर्वतपाटिया कन्या मंडल, अणुव्रत समिति के सदस्यों ने गीतों की प्रस्तुति दी।</p>
<p>प्रातः भ्रमण के क्रम में आचार्य प्रवर परिसर में निर्मित ज्ञानकुंज में पधारे एवं आधुनिक रूप से निर्मित ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी का अवलोकन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 20:03:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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                <title>सूरत : मनुष्य जीवन श्रेष्ठ है उसका उपयोग सर्वोत्तम  न हो तो अधम तो नहीं होना चाहिए  -- आचार्य श्री महाश्रमणजी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत दि. 17:07:2024 । युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी का दिव्य प्रवचन भगवान महावीर विश्वविद्यालय परिसर के संयम विहार में मनोहर वातावरण में चल रहा है। हजारों की संख्या में धार्मिक श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।</p>
<p>बुधवार को व्याख्यानमाला में आचार्यश्री ने मनुष्य जीवन एवं गुणस्थान पर दार्शनिक चर्चा की। पूज्य श्री ने कहा मनुष्य जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। 84 लाख जीव योनियों में मानव जीवन सर्वश्रेष्ठ है और इसका कारण यह है कि अध्यात्म की सर्वोच्च भूमिका तक केवल मनुष्य ही पहुँच सकता है, अन्य कोई प्राणी नहीं पहुँच सकता। प्रश्न यह है कि सर्वोच्च भूमिका क्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103201/human-life-is-the-best-if-it-is-not-used"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b18072024-01.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत दि. 17:07:2024 । युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी का दिव्य प्रवचन भगवान महावीर विश्वविद्यालय परिसर के संयम विहार में मनोहर वातावरण में चल रहा है। हजारों की संख्या में धार्मिक श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।</p>
<p>बुधवार को व्याख्यानमाला में आचार्यश्री ने मनुष्य जीवन एवं गुणस्थान पर दार्शनिक चर्चा की। पूज्य श्री ने कहा मनुष्य जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। 84 लाख जीव योनियों में मानव जीवन सर्वश्रेष्ठ है और इसका कारण यह है कि अध्यात्म की सर्वोच्च भूमिका तक केवल मनुष्य ही पहुँच सकता है, अन्य कोई प्राणी नहीं पहुँच सकता। प्रश्न यह है कि सर्वोच्च भूमिका क्या है? सर्वोच्च भूमिका है 14वां गुणस्थान। 14वें गुण स्थान तक सिर्फ गर्भज मनुष्य ही पहुंच सकता है, कोई और नहीं। शास्त्रों के अनुसार पांचवें गुणस्थान के बाद प्रत्येक गुणस्थान में मनुष्य की ही भूमिका होती है।</p>
<p>पंचम गुण स्थान एक ऐसा गुणस्थान है जो गर्भज मनुष्य में भी हो सकता है और गर्भज तिर्यंच पंचेंद्रिय में भी मौजूद हो सकता है। चौथा गुणस्थान सभी चार गतियों में उपलब्ध है। ऐसा कहा जाता है कि 12वें गुण स्थान तक मनुष्य संज्ञी रहता है और 13वें गुण स्थान पर मनुष्य संज्ञी नहीं रहता। वही 14वें गुणस्थान पर हैं। इन दोनों स्थानों पर मनुष्य की नोसंज्ञी-नो असंज्ञी अवस्था प्राप्त होती है। तो फिर प्रश्न उठता है कि मृत्यु से पहले किसी व्यक्ति की संज्ञी असंज्ञी कैसे हो सकती है? उत्तर में इन दोनों का संबंध कर्म के क्षयोपशाम और उदय से है।</p>
<p>मनुष्य जन्म इसलिए उत्कृष्ट है क्योंकि किसी भी अन्य गति में अगले गुण स्थान पर साधना नहीं की जा सकती। मानव जीवन सर्वोत्तम है लेकिन इसका उपयोग अच्छे के लिए भी किया जा सकता है और बुरे के लिए भी। सर्वोत्तम मानव जीवन का उपयोग सर्वोत्तम तरीके से किया जाना चाहिए, लेकिन यदि ऐसा नहीं किया जा सकता है, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इसे अधम तरीके से तो न किया जाए। जो जीवन का अधमता पूर्वक उपयोग करता है वह सातवें नरक में जाता है। प्रयत्न यह करना चाहिए कि मानव जीवन का सर्वोत्तम उपयोग करके 14वें गुण स्थान अर्थात् मोक्ष के द्वार तक पहुँचा जा सके, परन्तु वहाँ न भी जा सके तो भी छठे और सातवें स्थान तक पहुँच सके तो भी बहुत है।</p>
<p>पूज्य आचार्यश्री ने कहा कि साधु-साध्वी और श्रावक-श्राविका का चार तीर्थों में स्थान है यदि साधु साध्वी बन सके तो बहुत अच्छा है और यदि साधु साध्वी नहीं बन सकते हैं तो श्रावक - श्राविका का होना आवश्यक है। चातुर्मास में ज्ञानाराधना, दर्शनाराधना, चरित्राराधना और तपाराधना करने से आत्मा का कल्याण होगा। आचार्यश्री ने आगामी पर्व तिथियों को लेकर अट्ठाई एवं अन्य तप आराधना की सुंदर प्रेरणा दी। पर्यूषण की आराधना के लिए जाने वाले उपासक उपासिका भी ज्ञानाराधना का ही क्रम है।</p>
<p>प्रवास व्यवस्था समिति के उपाध्यक्ष श्री अनिल चंडालिया, महासचिव नानालाल राठौड़, तेरापंथी सभा अध्यक्ष मुकेश बैद, युवा परिषद अध्यक्ष अभिनंदन गादिया, महिला मंडल अध्यक्ष चंदा भोगर, महिला मंडल कन्या मंडल सूरत, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम सूरत, ज्ञानशाला उधना, किशोर मंडल उधना आदि द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं।</p>
<p>आचार्यश्री महाश्रमणजी ने धर्म आराधना की दृष्टि से बनाये गये भव्य संयम विहार का अवलोकन किया। पूज्य श्री ने कुटिरों पर नैतिक सदाचार और नशे से परहेज़ को दर्शाने वाले भित्ति चित्र भी देखे।</p>
<p><strong>शुक्रवार 19 जुलाई को आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में भव्य दीक्षा समारोह का आयोजन किया जाएगा</strong></p>
<p>कुल आठ भाई-बहन दीक्षा लेंगे, जिनमें समणी अक्षय प्रज्ञाजी और समणी प्रणव प्रज्ञाजी समण श्रेणी से श्रमण श्रेणी (साधु श्रेणी) में प्रवेश करेंगे, जबकि मुमुक्षु सुरेंद्र कोचर, विकास बाफना, दीक्षिता संघवी, मीनल परीख, नूपुर बरडिया और मीनाक्षी सामसुखा जो सभी स्नातक और स्नातकोत्तर हैं, सभी सांसारिक संबंधों और भौतिक संपत्तियों को त्याग कर संयम का मार्ग अपनाएंगे।<br /> दीक्षा समारोह आचार्यश्री की निश्रा में संयम विहार में होगा, जिसके उपलक्ष्य में 18 जुलाई को दीक्षार्थियों की संयम शोभा यात्रा दोपहर 1 बजे वेसू स्थित सेलेस्टियल ड्रीम से रवाना होकर संयम विहार पहुंचेगी और रात्रि 8 बजे मंगल भावना समारोह का आयोजन होगा। इसके बाद 19 जुलाई को सुबह 9 बजे एक भव्य दीक्षा समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें दो समणीजी और छह मुमुक्षु आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में दीक्षा लेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 14:41:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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                <title>सूरत : हीरों की नगरी में युगप्रधान आचार्य महाश्रमण का हुआ भव्य नागरिक अभिनंदन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत 16 जुलाई। भारत के पश्चिमी प्रवेश द्वार, हीरों की नगरी के रूप में विख्यात सूरत में तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण का नागरिक  अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ।  जिसमें शहर के मेयर दक्षेश मावाणी,डेप्युटी मेयर नरेंद्र पाटील, सांसद मुकेश दलाल सहित अनेकानेक धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक  संगठनों के प्रमुख व्यक्तियों सहित हजारों की संख्या में  जनता संभागी बनी। </p>
<p>युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी ने संयम विहार सूरत के महावीर समवसरण में उपस्थितों को पावन पाथेय  प्रदान करते हुए फरमाया कि दुनिया में दो प्रकार के जीव होते हैं - सिद्ध जीव यानी परमात्म स्वरुप जीव और दूसरे सांसारिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103171/a-grand-civic-felicitation-of-yugpradhan-acharya-mahashraman-took-place"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b16072024-14.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत 16 जुलाई। भारत के पश्चिमी प्रवेश द्वार, हीरों की नगरी के रूप में विख्यात सूरत में तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण का नागरिक  अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ।  जिसमें शहर के मेयर दक्षेश मावाणी,डेप्युटी मेयर नरेंद्र पाटील, सांसद मुकेश दलाल सहित अनेकानेक धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक  संगठनों के प्रमुख व्यक्तियों सहित हजारों की संख्या में  जनता संभागी बनी। </p>
<p>युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी ने संयम विहार सूरत के महावीर समवसरण में उपस्थितों को पावन पाथेय  प्रदान करते हुए फरमाया कि दुनिया में दो प्रकार के जीव होते हैं - सिद्ध जीव यानी परमात्म स्वरुप जीव और दूसरे सांसारिक जीव । जो सिद्ध जीव है वे जन्म मरण के चक्कर से मुक्त होते है, अशरीरी, अमन और अवाक् होते हैं । उन्हें किसी भी तरह शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक दुःख नही होते । वे पूर्णतया दुःख मुक्त होते हैं । उन्हें आत्मा के भीतर का सहजानन्द प्राप्त होता है । जिस तरह कुंड का पानी बाह्य और कुंए का पानी भीतरी होता है वैसे ही  सुख भी दो प्रकार के होते है- बाह्य स्थिति जन्य सुख और भीतरी सुख होते है । सिद्धों के पास भीतरी सुख है जो शाश्वत सुख है, कोई भी उसे चुरा नही सकता । जब सर्वज्ञान प्रकाशमान हो जाता है तो आत्मा सिद्धत्व को प्राप्त हो जाती है । सर्व ज्ञान प्रकाशन के लिए राग द्वेष से मुक्त होना पड़ेगा, वीतराग बनना पड़ेगा । वीतरागता हेतु अज्ञान मोह का विवर्जन होने पर, राग द्वेष से मुक्त होने पर आत्मा मोक्ष को प्राप्त करती है ।</p>
<p>दूसरे प्रकार के जीव के प्रकार की विवेचना करते हुए गुरुदेव ने आगे कहा कि सांसारिक जीवों को अगर धर्म का ज्ञान दिया जाए तो वे वीतरागता की ओर बढ़ सकते हैं । </p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2024-07/b16072024-15.jpg" alt="B16072024-15" width="1280" height="720"></img></p>
<p>जैन परम्परा में चातुर्मास का बड़ा महत्व है । चातुर्मास काल में एक जगह चार मास रहकर साधना की जाती है ।  प्रतिदिन प्रवचन श्रवण के समय व्यक्ति सामायिक में  लगभग दो घण्टे तक सावद्य कार्यों से मुक्त रह सकता है, ज्ञान की पुष्टि एवं वृद्धि हो सकती है और चौथा लाभ  जिज्ञासाओं का समाधान भी मिल सकता है । सुनते सुनते श्रोता भी एक अच्छा वक्ता बन सकता है । </p>
<p>पूज्य प्रवर ने सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति की विवेचना करते हुए इन्हें अपनाने की  प्रेरणा दी । सूरत के सम्पूर्ण समाज में सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति प्रवर्धमान रहें। इस "संयम विहार" में संयम की चेतना का विकास होता रहे, संयम प्रवर्धमान होता रहे।</p>
<p>साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यक्ति को महान पुरुषों का सान्निध्य मिले तो जीवन की दशा और दिशा बदल सकती है। सूरतवासियों को महान पुरुषों के समागम का यह दुर्लभ अवसर मिला है। </p>
<p>प्रवचन के उपरांत मंगलाचरण  "लो संघसुमेरु सूरत का अभिनंदन " गीतिका के संगान के साथ  नागरिक अभिनंदन समारोह का शुभारंभ हुआ। भरत शाह ने अभिनंदन समिति की ओर से स्वागत वक्तव्य किया। पूज्यप्रवर को सूरत शहर की प्रतीकात्मक चाबी मेयर श्री दक्षेश मावाणी, डेप्युटी मेयर, सांसद मुकेश दलाल, पद्म श्री मथुरभाई सवानी एवं नागरिक अभिनंदन समारोह समिति के सदस्यों ने समर्पित की। </p>
<p>मुनि श्री उदितकुमार जी ने प्रासंगिक वक्तव्य में कहा- अभिनंदन उसका होता है जिसमें संतता है, महानता है, गतिशीलता है और सबको प्रेरणा प्रदान करता है। </p>
<p>अपने वक्तव्य में मेयर दक्षेश मावाणी ने कहा कि  राष्ट्रसंत आचार्य महाश्रमण के चातुर्मास को पाकर सूरत की धरा पावन हो गयी है। सूरत चातुर्मास से जनता को बहुत लाभ होगा। सांसद मुकेश दलाल ने कहा कि  आचार्य प्रवर के चरण कमलों के स्पर्श का सौभाग्य सूरत शहर को मिला है। आचार्य श्री का अभिनंदन कर सूरत शहर धन्य हो गया। डॉ जीतुभाई शाह, जय छेड़ा, सूरत शहर  BJP महामंत्री किशोर बिंदल, आरएसएस सूरत से सुरेश मास्टर आदि ने पूज्यप्रवर के प्रति अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के संस्थापक संजय जैन व अनिल जैन ने यूनिवर्सिटी की ओर से पूज्य आचार्य प्रवर का अभिनंदन किया।</p>
<p>नागरिक अभिनंदन  पत्र का वाचन अंकेशभाई शाह ने एवं आभार ज्ञापन संजय सुराणा ने किया। नागरिक अभिनंदन समारोह कार्यक्रम का संचालन नानालाल राठौड़ एवं विश्वेश संघवी ने किया। इस अवसर पर  आचार्य श्री महाश्रमण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का मंचन भी किया गया। मीडिया टीम के महावीर सेमलानी, विश्वेश संघवी व संजय वैदमेहता द्वारा इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jul 2024 19:11:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत में आध्यात्मिक चेतना के विकास की है प्रचुर संभावना : आचार्य महाश्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सत्य, प्रेम और अहिंसा के प्रखर पुरस्कर्ता  युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी का सोमवार प्रातःभगवान महावीर विश्वविद्यालय परिसर के संयम विहार में शानदार चातुर्मास प्रवेश हुआ। पूज्य श्री ने प्रातः श्रमण श्रमणियों की धवल सेना के साथ सिटी लाइट तेरापंथ भवन से विहार प्रारम्भ किया। विहार यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। </p>
<p>जय जय ज्योति चरण, जय जय महाश्रमण और जैन धर्म के गगन गामी नारे और मधुर भक्ति गीतों के साथ जैसे ही रैली सूरत के सिटीलाइट के राजमार्ग पर निकली तो हजारों की निगाहें यात्रा पर टिक गईं। </p>
<p>यात्रा में बहनों ने विभिन्न नारे वाले बैनर के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103155/there-is-immense-potential-for-development-of-spiritual-consciousness-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/‍b15072024-19.jpg" alt=""></a><br /><p>सत्य, प्रेम और अहिंसा के प्रखर पुरस्कर्ता  युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी का सोमवार प्रातःभगवान महावीर विश्वविद्यालय परिसर के संयम विहार में शानदार चातुर्मास प्रवेश हुआ। पूज्य श्री ने प्रातः श्रमण श्रमणियों की धवल सेना के साथ सिटी लाइट तेरापंथ भवन से विहार प्रारम्भ किया। विहार यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। </p>
<p>जय जय ज्योति चरण, जय जय महाश्रमण और जैन धर्म के गगन गामी नारे और मधुर भक्ति गीतों के साथ जैसे ही रैली सूरत के सिटीलाइट के राजमार्ग पर निकली तो हजारों की निगाहें यात्रा पर टिक गईं। </p>
<p>यात्रा में बहनों ने विभिन्न नारे वाले बैनर के साथ जैन शासन की पताका लेकर लोगों को जैन धर्म के सिद्धांतों का संदेश दिया। पूरे अनुशासन के साथ एक विशाल रैली संयम विहार पहुंची. रास्ते में हजारों-हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने आचार्यश्री के दर्शन वंदन कर सौभाग्य का अनुभव किया। <br />आचार्यश्री के चातुर्मास प्रवेश को देखने और उनकी अमृतवाणी सुनने के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। गृह मंत्री हर्ष संघवी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और पूज्यश्री की प्रवचन प्रसादी ग्रहण कर आशीर्वाद लिया।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2024-07/%E2%80%8Db15072024-20.jpg" alt="‍B15072024-20" width="1280" height="720"></img></p>
<p>भगवान महावीर विश्वविद्यालय परिसर के पास बने संयम विहार में महावीर समवसरण में चातुर्मास प्रवेश के प्रथम दिन मंगल प्रवचन फरमाते हुए पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ आगम के दशवैकालिक सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि--यदि संसार में कोई मंगल है तो वह धर्म है।</p>
<p>अरिहंत मंगल है, सिद्ध मंगल है, साधु मंगल है लेकिन धर्म उत्कृष्ट मंगल है। धर्म कारण मंगल है। शेष तीनों कार्य मंगल हैं। मूल तत्व धर्म है। शास्त्रों में धर्म का ऐसा कोई विशेष नाम निर्दिष्ट नहीं है  बल्कि उसे सच्चा धर्म कहा गया है जिसमें अहिंसा, संयम और तप है। अहिंसा, तप और संयम के अतिरिक्त कोई धर्म नहीं बचता। जो सदैव इस प्रकार के धर्म का आचरण करता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।</p>
<p>सूरत में चातुर्मास के संबंध में पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कहा आज हमने सूरत में भगवान महावीर यूनिवर्सिटी में चातुर्मास प्रवेश किया है। <br />हमने आज तक कई चातुर्मास किए हैं लेकिन भगवान महावीर के नाम से बने किसी विश्वविद्यालय में यह संभवत: पहला चातुर्मास है। विद्याभूमि का अपने आप में एक अलग स्थान, एक अलग महत्व है।  </p>
<p>यहां के विश्वविद्यालय का नाम भगवान महावीर से जुड़ा है। यहां के प्रवचन पंडाल का नाम भी महावीर समवसरण है और हमारे साथ जो मुख्य मुनि हैं उनका नाम भी महावीर मुनि है। यहां कई साधु साध्वियां पहुंच चुके हैं। यहां आशा है कि जैन और अजैन सभी को योग मिलेगा और सभी अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार व्याख्यान सुनने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुत विभाजी ने कहा-- पूज्यश्री का सूरत का चातुर्मास अद्वितीय चातुर्मास होगा। चूंकि यह मुंबई और अहमदाबाद के बीच एक मध्यवर्ती क्षेत्र है, इसलिए इन दोनों क्षेत्रों को सूरत से लाभ होगा। सूरत हीरों का शहर है।हीरा भौतिक संपदा का प्रतीक है। आचार्यश्री यहां सम्यक्त्व का हीरा लेकर आये हैं। सम्यक्त्व एक अनमोल हीरा है जो मोक्ष का साधन हो सकता है। </p>
<p>सूरत एक स्वच्छ शहर है, बाहरी सफाई तो हमें दिखती है, लेकिन आचार्य श्री आंतरिक स्वच्छता के सूत्र लेकर आए  हैं। यह हरा-भरा शहर है, बाहर से हरा-भरा दिखता है लेकिन आचार्य श्री महाश्रमणजी की शिक्षाओं और मार्गदर्शन से उम्मीद है कि सूरत अंदर से भी हरा-भरा हो जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2024-07/%E2%80%8Db15072024-21.jpg" alt="‍B15072024-21" width="1280" height="720"></img></p>
<p>गुजरात राज्य के गृह मंत्री श्री हर्ष संघवी ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि आचार्य श्री का सूरत का चातुर्मास आध्यात्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक होगा।<br />आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास समिति के अध्यक्ष संजय सुराणा, स्वागताध्यक्ष भगवान महावीर विश्वविद्यालय के श्री संजय जैन आदि ने आचार्य श्री का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। </p>
<p>सूरत पुलिस कमिश्नर श्री अनुपमसिंह गेहलोत एवं डीसीपी विजयसिंह गुर्जर ने भी पूज्य आचार्य प्रवर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तेरापंथ महिला मंडल सूरत एवं ज्ञानशाला द्वारा सुन्दर सामूहिक गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि श्री दिनेशकुमार जी ने किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 20:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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                <title>सूरत : सड़को पर उमड़ा श्रद्धा का हुजूम : युगप्रधान का भव्य स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत शहर की सूरत आज की बदली बदली सी थी, हर ओर लोगों में उल्लास, उमंग छाया नजर आ रहा था और हो भी क्यों नहीं जब इतने लम्बे समय की प्रतीक्षा पश्चात जीवन की राह दिखाने वाले गुरु, जन जन के आराध्य आचार्य श्री महाश्रमण जी का यहां पदार्पण हो रहा हो। प्रातः जैसे ही लिंबायत से आचार्यश्री ने सिटीलाइट तेरापंथ भवन के लिए प्रस्थान किया। जैसे जैसे काफिला बढ़ता जा रहा था आचार्य श्री के साथ जनसमूह भी बढ़ता जा रहा था। जगह जगह नारे लगाते हुए श्रद्धालु जैन श्वेतांबर तेरापंथ के ग्यारहवें अधिशास्ता का स्वागत कर रहे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103131/crowd-of-devotees-gathered-on-surat-streets-to-welcome-yug"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/‍b14072024-06.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत शहर की सूरत आज की बदली बदली सी थी, हर ओर लोगों में उल्लास, उमंग छाया नजर आ रहा था और हो भी क्यों नहीं जब इतने लम्बे समय की प्रतीक्षा पश्चात जीवन की राह दिखाने वाले गुरु, जन जन के आराध्य आचार्य श्री महाश्रमण जी का यहां पदार्पण हो रहा हो। प्रातः जैसे ही लिंबायत से आचार्यश्री ने सिटीलाइट तेरापंथ भवन के लिए प्रस्थान किया। जैसे जैसे काफिला बढ़ता जा रहा था आचार्य श्री के साथ जनसमूह भी बढ़ता जा रहा था। जगह जगह नारे लगाते हुए श्रद्धालु जैन श्वेतांबर तेरापंथ के ग्यारहवें अधिशास्ता का स्वागत कर रहे थे।</p>
<p>लिंबायत का तेरापंथ भवन इस बीच गुरु चरणों से पावन बना। मार्ग में जैसे ही गुरुदेव उधना पधारे तो मानों उधनावासियों का उत्साह हर्ष हिलोरे लेने लगा। हजारों की संख्या में सड़क के दोनों ओर खड़े बच्चे–बूढ़े सभी आचार्य श्री की एक झलक पाने को लालायित नजर आ रहे थे। इतनी विशाल उपस्थिति में भी अनुशासन बद्ध तरीके से चल रहे श्रद्धालुओं ने सबको तेरापंथ धर्मसंघ की अनुशासन शैली की स्मृति करा दी। एक वर्ष पूर्व के पदार्पण से इस बार का पदार्पण कुछ अलग उल्लास लिए हुए था। क्युकी थी सिर्फ 22 दिनों का लघु प्रवास सूरत वासियों को प्राप्त हुआ था और इस बार चातुर्मास की लंबी अवधि से सभी लाभान्वित होने वाले है। लगभग 10 किमी शहर में पदयात्रा कर गुरुदेव सिटीलाइट के तेरापंथ भवन में पधारे तो हजारों श्रद्धालुओं को प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के 2003 के चातुर्मास की स्मृति हो आई। हजारों श्रद्धालुओं ने जयघोषों को गुंजायमान कर शांतिदूत का तेरापंथ भवन में स्वागत किया। </p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2024-07/%E2%80%8Db14072024-07.jpg" alt="‍B14072024-07" width="1280" height="720"></img></p>
<p>सभा भवन में उपस्थिति श्रद्धालुओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए आचार्यश्री ने कहा– मनुष्य दुःख से डरता है। कोई भी व्यक्ति दुःखी होना नहीं चाहता। यह जीवन अनेक समस्याओं से घिरा रहता है। कभी शारीरिक तो कभी मानसिक समस्याएँ भी आती है। कोई रोग आदि हो जाए, बीमार हो जाए तो कष्ट। कोई अपमान कर देता है व मन के प्रतिकूल घटनाएँ भी घटित हो जाती है तो भी व्यक्ति दुखी भी बन जाता है।भगवान महावीर ने दुःख मुक्ति का मार्ग बताते हुए कहा कि स्वयं का, अपनी आत्मा का निग्रह करो। संयम के द्वारा व्यक्ति दुःखों से बच सकता है। </p>
<p>गुरुदेव ने आगे बताया कि कोई गाली भी दे तो उसे वापिस गाली न दें, अपशब्द न बोले। व्यक्ति सोचें कि दुसरे के बोलने से मैं खराब नहीं हो जाता ऐसे में मैं क्यों परेशान व दुखी बनूं ? यह बोलने वाले की अमहानता है, मेरे लिए कोई खास बात नहीं। गाली के बदले गाली देने से उग्रता बढ़ती है, बात विवाद का रूप ले लेती है। जो करे हमारा विरोध हम उसे समझे विनोद यह सूत्र अपनाना चाहिए। यदि क्षमा का खड़ग हमारे पास है तो कोई दूसरा दुखी नहीं बना सकत। व्यक्ति के मन में क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या की भावनाएं होती है उनसे बचना चाहिए। कषायों को भी मंद कर और कामनाओं की सीमित कर व्यक्ति दुःख मुक्ति के मार्ग पर बढ़ सकता है। </p>
<p>प्रसंगवश गुरुदेव ने उल्लेख करते हुए फरमाया की आज सिटीलाइट के इस भवन में आना हुआ है। सन 2003 के चातुर्मास की कई स्मृतियां ताजा हो गई। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के साथ तब मैं युवाचार्य रूप में था। उस समय अब्दुल कलाम जी का आना हुआ और भी धर्म गुरुओं के साथ विभिन्न कार्यक्रम भी यहां हुए।</p>
<p>इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित केंद्रीय राज्यमंत्री श्री डॉ. एल मुरुगन ने आचार्यश्री का स्वागत किया एवं कहा कि मेरा सौभाग्य है जो आपके दर्शन करने का और इस प्रवेश के अवसर पर आने का मुझे मोका मिला।</p>
<p>स्वागत अभिनंदन के क्रम में तेरापंथ सभा सूरत अध्यक्ष श्री मुकेश बैद, मैनेजिंग ट्रस्टी श्री बाबूलाल भोगर, तेयुप अध्यक्ष श्री अभिनंदन गादिया, महिला मंडल अध्यक्षा श्री चंदा भोगर ने अपने विचार रखे। तेरापंथ सभा सदस्य, किशोर मंडल, कन्या मंडल, ज्ञानशाला प्रशिक्षिका एवं कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गीतों की प्रस्तुति दी।</p>
<p><strong>सूरत से मुम्बई की दूरी 280 किमी : आचार्यश्री ने तय किया 2000 किमी का सफर</strong></p>
<p>सूरत और मुंबई के मध्य जहां केवल 280 किलोमीटर का फासला है। कार आदि गाड़ी के माध्यम से आए तो छह घंटे, निरंतर पैदल चले तो तीन दिन। वही आचार्यश्री महाश्रमण जी जिन्होंने सन 2023 में मई माह में अक्षय तृतिया सूरत में की और फिर मुंबई महानगर और महाराष्ट्र के सैंकड़ों गांवो को पावन बनाकर तेरह माह और दो हजार किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर सूरत पहुंचे है। जनकल्याण के लिए समर्पित आचार्य श्री ने इन दरमायन महाराष्ट्र के तेरह जिलों का स्पर्श किया एवं गांव गांव जाकर हजारों लोगों को नशामुक्त बनाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jul 2024 19:59:58 +0530</pubDate>
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