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                <title>Hamirpur - Loktej</title>
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                <title>मक्के की खेती में लागत कम, मुनाफा दोगुना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 22 जुलाई (हि.स.)। इस साल समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र में किसानों ने मक्के की खेती शुरू की है। इन दिनों खेतों में मक्के समेत अन्य खरीफ की फसलों की बोआई कराने में किसान खेतों में डेरा डाले हैं। इस बार कृषि डिपार्टमेंट किसानों को मक्के के बीज उपलब्ध नहीं करा पाया है क्योंकि राजकीय बीज गोदाम में मक्के समेत अन्य फसलों के बीज गायब हैं।<br /><br />प्रगतिशील किसान रघुवीर सिंह व ऋषि शुक्ला ने बताया कि मक्के की खेती में लागत बहुत कम आती है लेकिन मुनाफा दोगुना होता है। इसकी फसल कम पानी में भी हो जाती है। अगले साल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103283/lower-cost-and-double-profit-in-maize-cultivation"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/d22072024-09.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 22 जुलाई (हि.स.)। इस साल समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र में किसानों ने मक्के की खेती शुरू की है। इन दिनों खेतों में मक्के समेत अन्य खरीफ की फसलों की बोआई कराने में किसान खेतों में डेरा डाले हैं। इस बार कृषि डिपार्टमेंट किसानों को मक्के के बीज उपलब्ध नहीं करा पाया है क्योंकि राजकीय बीज गोदाम में मक्के समेत अन्य फसलों के बीज गायब हैं।<br /><br />प्रगतिशील किसान रघुवीर सिंह व ऋषि शुक्ला ने बताया कि मक्के की खेती में लागत बहुत कम आती है लेकिन मुनाफा दोगुना होता है। इसकी फसल कम पानी में भी हो जाती है। अगले साल मक्के की खेती का रकबा और बढ़ाया जाएगा।<br /><br />उपनिदेशक कृषि हरीशंकर भार्गव ने बताया कि बुंदेलखंड के चित्रकूट धाम बांदा मंडल में मक्के की खेती का दायरा शासन ने बढ़ाया है। इस साल 24 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्के की बोआई किसान कर रहे है। कहीं-कहीं मक्के की बोआई भी हो गई है। पिछले साल 11 हेक्टेयर रकबे में मक्के की खेती हुई थी लेकिन पिछले साल की तुलना में इस बार 13 हेक्टेयर अधिक क्षेत्रफल क्षेत्रफल में मक्के की फसल की बोआई किसान करा रहे हैं।<br /><br />बुंदेलखंड के चित्रकूट धाम बांदा मंडल में बारिश होने के बाद किसान खरीफ की बोआई कराने के लिए खेतों में डेरा डाले है। उपनिदेशक कृषि ने बताया कि मंडल के महोबा जिले में अबकी बार सर्वाधिक दस हेक्टेयर रकबे में मक्के की खेती किसानों ने शुरू की है। वहीं हमीरपुर में पांच हेक्टेयर में व चित्रकूट में सबसे कम चार हेक्टेयर रकबे में मक्के की बोआई कराई जा रही है। बताया कि बांदा जिले में भी पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्के की खेती किसानों ने शुरू की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 19:38:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कई प्रान्तों में धूम मचाने वाली हमीरपुर की नागरा जूती उद्योग तोड़ रहा दम</title>
                                    <description><![CDATA[हमीरपुर की हल्की नागरा जूती पहनकर चलने पर निकलती है चर्र-चर्र की आवाज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102885/hamirpurs-nagra-shoe-industry-which-was-making-waves-in-many"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/d01072024-16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। हमीरपुर जिले में जूती उद्योग पर खतरे के बादल मंडराने लगे है। यहां की जूती की धूम बुंदेलखंड ही नहीं राजस्थान,दिल्ली,बिहार समेत कई राज्यों में भी है, लेकिन अफसोस सरकारी मदद न मिलने के कारण अब ये उद्योग बंदी के मुहाने पर आ गए हैं। भवन मालिक ने भी जूती उद्योग चलाने वालों से साफ तौर पर कह दिया है कि पूरा भवन जर्जर हो गया है लिहाजा दुकानें खाली की जाए। भवन मालिक के फरमान से जूती उद्योग के कारोबार से जुड़े लोगों में चिंताएं बढ़ गई है।<br /><br />हमीरपुर शहर से करीब पन्द्रह किमी दूर सुमेरपुर कस्बे में पुलिस स्टेशन के पास पिछले कई दशकों से जूती बनाने का बड़े स्तर पर चल रहा है। एक दर्जन से अधिक दुकानों में चमड़े की जूती बनाई जाती है। जूती उद्योग में कई दर्जन लोग काम करते हैं। जूती उद्योग चलाने वाले सर्वेश वर्मा ने बताया कि यहां सुमेरपुर कस्बे में जूती उद्योग बहुत पुराना है। लेकिन इसे चमकाने के लिए शासन और प्रशासन ने कोई भी कदम नहीं उठाए है।<br /><br />वंशगोपाल का कहना है कि यहां चमड़े की जूती बनाने का काम वर्ष 1952 में शुरू हुआ था। उस जमाने में आधा दर्जन से कम ही लोग इस कारोबार में लगे थे। बहुत ही हल्के वजन की यहां की जूती की लगातार डिमांड ग्रामीण इलाकों में बढ़ी है।<br /><br />ढाई सौ से लेकर एक हजार रुपये कीमत में नागरा जूती मिलती है जो बड़ी ही टिकाऊ होती है। जूती उद्योग से जुड़े कारीगरों ने बताया कि यहां की नागरा जूतियां राजस्थान की कला से पूरी तरह प्रभावित नजर आती है। शुरू में सैकड़ों कारीगर चमड़े की नागरा जूतियां बनाकर अपना घर चलाते थे, लेकिन अब यह कारोबार मंद पड़ गया है। बताया कि जूतियां बनाने की प्रक्रिया भी बड़ी महंगी है। पहले चमड़े को तेल में डाला जाता है। कई प्रक्रिया के बाद एक शानदार जूती तैयार होती है। जूती बनाने वालों ने बताया कि यहां जूती उद्योग किराए के भवन में चल रहे हैं। मौजूदा में पूरा भवन जर्जर हो गया है। भवन मालिक ने भी दुकानें खाली करने को कहा है। जिससे दशकों पुराना जूती उद्योग बंदी के मुहाने आ गया है।<br /><br /><strong>आधुनिकता व महंगाई के दौर में भी इस जूती ने एमपी-राजस्थान में मचाई थी धूम</strong><br /><br />जूती उद्योग से जुड़े सरमन, चन्द्रपाल, दशरथ, विजय व सर्वेश कुमार ने बताया कि यहां की जूती ने उत्तर प्रदेश के साथ ही मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, पंजाब तक पहुंच बनाई है। बताया कि कोरोना संक्रमण काल से पूर्व जूती उद्योग कुटीर की रूप ले चुका था, किन्तु अब ये बंदी के मुहाने पर आ गया है। बताया कि सुमेरपुर कस्बे में एक पुराने भवन में जूती उद्योग चल रहा है। जर्जर हो चुकी एक दर्जन से अधिक नागरा जूती की दुकानों को खाली करने का फरमान भी मकान मालिक ने दे दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>हमीरपुर की हल्की नागरा जूती पहनकर चलने पर निकलती है चर्र-चर्र की आवाज</strong><br /><br />हमीरपुर जिले के सुमेरपुर कस्बे की बनी नागरा जूती पहनने में बड़ी ही आरामदायक है। इसका वजन भी बहुत कम होता है। जूती उद्योग चलाने वाले सर्वेश वर्मा समेत अन्य लोगों ने बताया कि सिकहुला, परछछ, उन्नाव, अमौली, फतेहपुर व बांदा से कारीगर काम करने आते हैं। कभी इस व्यवसाय से मोटा मुनाफा होता था, लेकिन अब इस कारोबार में पहले जैसी कमाई नहीं रही। बताया कि बहुत ही हल्की वजन की जूती पहनकर चलने से चर्र-चर्र की आवाज से लोग प्रभावित होते हैं।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 20:45:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हमीरपुर की दो बुजुर्ग महिलाओं ने योग से बदला जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर 21 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में दो बुजुर्ग महिलाओं ने योग और प्राणायाम के जरिए बुढ़ापे को न सिर्फ मात दी बल्कि वह आज तक अस्पताल की चौखट पर कदम भी नहीं रखीं। इतनी उम्र होने के बाद भी ये खुद ही अपने हाथों काम करती हैं। यहां एक और बुजुर्ग महिला भी स्वस्थ रहने को योग कर रही हैं। योग के कारण कैंसर बीमारी भी इसका कुछ बिगाड़ नहीं सकी।<br /><br />हमीरपुर शहर के पटकाना मुहाल निवासी राधा रानी (80) अपनी बहू और नाती के साथ रहती हैं। उनका परिवार बहुत ही गरीब है। पिछले कई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102616/two-elderly-women-of-hamirpur-changed-their-lives-through-yoga"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d21062024-17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर 21 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में दो बुजुर्ग महिलाओं ने योग और प्राणायाम के जरिए बुढ़ापे को न सिर्फ मात दी बल्कि वह आज तक अस्पताल की चौखट पर कदम भी नहीं रखीं। इतनी उम्र होने के बाद भी ये खुद ही अपने हाथों काम करती हैं। यहां एक और बुजुर्ग महिला भी स्वस्थ रहने को योग कर रही हैं। योग के कारण कैंसर बीमारी भी इसका कुछ बिगाड़ नहीं सकी।<br /><br />हमीरपुर शहर के पटकाना मुहाल निवासी राधा रानी (80) अपनी बहू और नाती के साथ रहती हैं। उनका परिवार बहुत ही गरीब है। पिछले कई दशक से ये अपना स्वयं का काम तो करती ही हैं साथ ही पड़ोस में भी लोगों के काम में आगे रहती हैं। खास बात यह है कि ये बुजुर्ग महिला आज भी शारीरिक रूप से स्वस्थ है। क्योंकि इसने योग और प्राणायाम से नाता जोड़ रखा है। महिला ने बताया कि पिछले 20 सालों से घर में ही योग और प्राणायाम करने से कभी बीमार नहीं हुईं। दो बेटों की मां राधा रानी नानी और दादी बन चुकी हैं। इसके बावजूद ये घर का काम करती हैं साथ ही पड़ोस में शादी विवाह के मौके पर भी सारा काम करती हैं। उनका कहना है कि कई दशक गुजर गए लेकिन आज तक बीमार होकर अस्पताल नहीं गई। आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर राधा रानी और कैलासवती ने बच्चों के साथ योग और प्राणायाम किया। यहां 106 साल की बुजुर्ग महिला विजय कुमारी ने भी योग किया।<br /><br />हमीरपुर शहर के मिश्राना मुहाल में कैलासवती 90 साल की उम्र होने के बाद भी ये पिछले कई सालों से योग करती हैं। योग से इनका जीवन ही बदल गया है। इसके तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। इन्हें नानी और दादी बनने का सुख मिल चुका है। उन्होंने बताया कि 25 साल पहले कैंसर हो गया था। कैंसर हास्पिटल कानपुर में डा. ईश्वर चन्द्र खरे ने जांच की तो पता चला कि कैंसर है। गंभीर बीमारी पता चलने के बाद इसने साहस नहीं छोड़ा और घर आकर दवाएं लेने के साथ ही नियमित योग व प्राणायाम करने लगीं। कई दशक बीत गए लेकिन कैंसर बीमारी भी इस बुजुर्ग महिला का कुछ बिगाड़ नहीं सकी।<br /><br />कैलासवती और राधा रानी उम्र के आखिरी पड़ाव में भी पूरी तरह से स्वस्थ हैं। दोनों की आंखों की रोशनी भी कम नहीं हुई। बिना चश्मा के ही खुद का काम करती हैं। खास बात यह है कि इन दोनों बुजुर्ग महिलाओं के दांत आज भी मजबूत हैं। इसीलिए सुपारी का गुटखा बड़े ही चाव से खाती है। दोनों महिलाओं ने योग दिवस पर प्राणायाम किया। बच्चों ने भी इसके साथ योग किया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दोनों बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि ये चमत्कार योग के कारण हुआ है। यदि नई पीढ़ी के बच्चे घर में ही कम से कम बीस मिनट नियमित रूप से योग और प्राणायाम करते हैं तो उनका जीवन निरोगी हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jun 2024 20:26:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक किसान गांव के लोगों का बुझा रहा प्यास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 18 जून (हि.स.)। हमीरपुर जिले में ग्रामीण पेयजल योजनाएं रामभरोसे चल रही है। हालत यह है कि कई करोड़ रुपये की खुराक पीने के बाद भी ये पेयजल योजनाएं ग्रामीणों के लिए तमाशा बन गई है। आधा दर्जन से अधिक गांवों के लिए तीन दशक पहले बनाई गई एक ग्रामीण पेयजल योजना का संचालन ठप हो जाने से पूरे गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।<br /><br />गांव के ही एक किसान ने पूरे गांव के लोगों को पीने का पानी मुहैया कराने के लिए पानी के टैंकर का इंतजाम किया है। टैंकर आते ही गांव के लोगों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102540/a-farmer-is-quenching-the-thirst-of-village-people"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d18062024-14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 18 जून (हि.स.)। हमीरपुर जिले में ग्रामीण पेयजल योजनाएं रामभरोसे चल रही है। हालत यह है कि कई करोड़ रुपये की खुराक पीने के बाद भी ये पेयजल योजनाएं ग्रामीणों के लिए तमाशा बन गई है। आधा दर्जन से अधिक गांवों के लिए तीन दशक पहले बनाई गई एक ग्रामीण पेयजल योजना का संचालन ठप हो जाने से पूरे गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।<br /><br />गांव के ही एक किसान ने पूरे गांव के लोगों को पीने का पानी मुहैया कराने के लिए पानी के टैंकर का इंतजाम किया है। टैंकर आते ही गांव के लोगों की भीड़ पानी भरने के लिए उमड़ पड़ती है।<br /><br />जलसंस्थान के अधिशाषी अभियंता राहुल सिंह ने बताया कि जलनिगम ने पहाड़ी भिटारी ग्राम समूह पेयजल योजना का निर्माण कराया था। यह पेयजल योजना बाद में जलसंस्थान को संचालन कराने केलिए दी गई थी। बताया कि 2017 से ग्रामीण पेयजल योजनाओं के रखरखाव के लिए कोई भी बजट नहीं मिल रहा है। अब ग्रामीण पेयजल योजनाएं जल जीवन मिशन में शामिल कर दी गई है।<br /><br /><strong>तीस साल पहले पूर्व मंत्री ने दी थी ग्रामीण पेयजल योजना को मंजूरी</strong><br /><br />पिछले तीस साल पहले बादशाह सिंह विधायक थे तब उन्होंने मुस्करा क्षेत्र के अलरा गौरा, पहाड़ी भिटारी, गहरौली समेत तमाम गांवों के लिए ग्राम समूह पेयजल योजना को जिला योजना से मंजूरी कराई थी। जलनिगम ने उस समय इस पेयजल योजना को तीन किमी दूर अलरा गौरा गांव में स्थापित कराया था। इस पेयजल योजना से आधा दर्जन से अधिक गांवों को शामिल किया गया। गांवों तक पाइपलाइनें भी डाली गई थी। पेयजल योजना में भी भारी बजट भी खर्च हो गया था, फिर भी चयनित गांवों को पीने का पानी नहीं मिल सका। कई किमी लम्बी पाइपलाइनें भी फट गई थी।<br /><br /><strong>एक किसान टैंकर के जरिए गांव के लोगों का बुझा रहा प्यास</strong><br /><br />पहाड़ी भिटारी गांव के रवीन्द्र कुशवाहा, विमल कुशवाहा, रामदयाल राजपूत, राजेश सविता समेत तमाम लोगों ने बताया कि गांव के लोगों को इस पेयजल योजना से पीने का पानी नहीं मिल रहा है। अब गांव के अवधेश राजपूत ने अपने टैंकर से गांव केहर मुहल्ले में पीने का पानी लोगों को मुहैया करा रहे है। बताया कि सुबह से शाम तक पूरे गांव के लोगों की प्यास बुझाने को पानी का टैंकर गली कूचों में भेजा जा रहा है। लोग बड़े ही उत्साह से पानी भरते हैं। जलसंस्थान के अधिशाषी अभियंता राहुल सिंह ने बताया कि अब जल जीवन मिशन में ये पेयजल योजना सम्मिलित हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jun 2024 21:13:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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                <title>हमीरपुर में मर्दाे को गांव से भगाने के बाद औरतें खेलती है होली</title>
                                    <description><![CDATA[सैकड़ों साल पुरानी परम्परा में घूंघट वाली महिलायें भी उड़ाती है रंग, गुलाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/100443/in-hamirpur-women-play-holi-after-driving-away-men-from"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d23032024-16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 23 मार्च (हि.स.)। बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में एक ऐसे गांव में महिलाओं की होली कोई भी मर्द नहीं देख सकता। सैकड़ों साल पुरानी परम्परा की महिलाओं की होली शुरू होने से पहले ही पूरे गांव के पुरुषों को घर छोड़कर खलिहान में डेरा डालना पड़ता है। बूढ़ी और घूंघट वाली महिलाएं होली पर ठुमके लगाकर पूरे गांव में धमाल मचाती है। महिलाओं की यह अनोखी होली सूर्यास्त होने के बाद खत्म होती है। तभी सभी पुरुष अपने घर लौटते हैं।<br /><br />बुन्देलखंड के हर इलाके में कोई भी ऐसा गांव नहीं है जहां यह अनूठी परम्परा की होली खेली जाती है। वीरभूमि के हमीरपुर जिले में कुंडौरा ऐसा गांव है, जो इस परम्परा के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है। यहां महिलाओं की टोली फाग निकालकर पूरे गांव में घूमती हैं।<br /><br />महिलाओं की फाग में धमाल करने वाली देवरती कुशवाहा, पूर्व प्रधान उपदेश कुमारी, गिरिजा कुशवाहा, सुनीता, कमलेश कुमारी सहित सहित तमाम महिलाओं ने बताया कि जब से वह बाबुल का घर छोड़कर पिया के घर आई है तभी से ही इस होली की परम्परा का हिस्सा बन रही है।<br /><br />हर साल धूमधाम के साथ फाग में हिस्सा लेकर गांव में महिलाओं की फाग सम्पन्न होती है। इन महिलाओं ने बताया कि होली की फाग का शुभारंभ गांव के ऐतिहासिक रामजानकी मंदिर से होता है। पूरे गांव के गली कूचों और मुहल्लों में होली की धमाल करने के बाद महिलाओं की फाग खेरापति बाबा के मंदिर परिसर में इस अनूठी परम्परा का समापन होता है।<br /><br />ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अरविन्द प्रताप सिंह ने बताया कि गांव में महिलाओं की होली का यह अनूठी परम्परा सैकड़ों साल पहले पूर्वजों ने शुरू की थी, जिसका आज भी निर्वहन बड़े ही शिद्दत के साथ किया जाता है। जिस समय महिलाओं की फाग गांव में घूमती है तो उस समय गांव के पुरुष गांव की गलियों से हटकर या तो घरों में कैद हो जाते हैं या फिर उन्हें खेल और खलिहान की ओर निकलना पड़ता है। पुरुष तभी गांव के अंदर वापस आएंगे जब महिलाओं की फाग और होली का समापन हो जाता है।<br /><br /><strong>पूरे गांव में होली के रंग में घूंघट वाली महिलाएं करती है धमाल</strong><br /><br />कुंडौरा गांव के बुजुर्ग बंजारी कुशवाहा (90) ने बताया कि गांव में महिलाओं की होली का इतिहास कम से कम पांच सौ साल पुराना है। जिसमें गांव की बहुएं भी फाग निकलने के दौरान नृत्य करती है। इन्हें कोई भी गांव का पुरुष देख नहीं सकता है। यदि किसी ने देखने की हिम्मत भी की तो उन्हें लट्ठ लेकर गांव से ही खदेड़ दिया जाता है।<br /><br />सत्तर वर्षीय गिरिजा कुशवाहा व देवरती कुशवाहा ने बताया कि महिलाओं की फाग निकालने की कोई पुरुष अथवा युवक भी फोटो कैमरे से नहीं ले सकता है। महिलाओं की होली की फोटो लेने पर भी प्रतिबंध है। यदि कोई इस अनूठी परम्परा का चोरी-छिपे फोटो लेते पकड़ा गया तो उस पर तगड़ा जुर्माना बोला जाता है। गांव की सरपंच सविता देवी ने बताया कि गांव के पुरुष और लड़के अनूठी परम्परा की होली की फाग निकलने से पहले ही घरों में कैद हो जाते है अथवा सभी को गांव छोड़कर बाहर जाना होता है।<br /><br /><strong>बुजुर्ग महिलाएं ही होली की फाग में बजाती है ढोल और मजीरे</strong><br /><br />गांव की सरपंच सविता देवी ने बताया कि इस बार होली त्योहार के दूज के दिन पूरे गांव की महिलाएं रामजानकी मंदिर में एकत्र होती है फिर यहां से फाग निकाली जाती है। गाजे और बाजे के साथ महिलाओं की फाग गली कूचे और मुहल्लों से होते हुए एक जगह पर नाच गाना होता है। उन्होंने बताया कि हर घर से महिलाएं इस अनूठी परम्परा में शामिल होती है। और ढोल मजीरा बजाते हुए महिलाएं ठुमके भी लगाती है। यह आयोजन शाम तक चलता है। सभी महिलाएं एक दूसरे को गुलाल लगाकर सम्मान भी करती है।<br /><br />गांव की बुजुर्ग देवरती कुशवाहा ने बताया कि बुन्देलखंड का यह अकेला गांव है जहां यह परम्परा आज भी कायम है। इस परम्परा की होली में बुजुर्ग महिलाओं के अलावा घूंघट वाली महिलाएं भी धमाल करती है। प्रधानपति अरविन्द प्रताप सिंह ने बताया कि अनूठी परम्परा की होली को लेकर महिलाओं ने तैयारी अभी से शुरू कर दी है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 19:46:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बुन्देलखंड के बीच सरोवर में 105 फीट ऊंचे खखरामठ को चमकाने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 27 जनवरी (हि.स.)। बुन्देलखंड की वीरभूमि महोबा में बीच सरोवर में एक सौ पांच फीट ऊंचे खखरामठ को चमकाने की तैयारी पर्यटन विभाग ने की है। इस धरोहर का इतिहास भी बारह सौ साल पुराना है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पयर्टकों का मेला लगता है। खखरामठ को नजदीक से देखने के लिए एक करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लोटिंग ब्रिज बनाया गया जो बुन्देलखंड का पहला फ्लोटिंग ब्रिज है। इसे पयर्टकों के लिए खोला गया था लेकिन अब आम लोगों के लिए यह ब्रिज बंद कर दिया गया है।<br /><br />बुंदेलखंड की वीर भूमि महोबा में चंदेली राजा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/98954/preparation-to-shine-105-feet-high-khakhramath-in-the-middle"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-01/d27012024-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 27 जनवरी (हि.स.)। बुन्देलखंड की वीरभूमि महोबा में बीच सरोवर में एक सौ पांच फीट ऊंचे खखरामठ को चमकाने की तैयारी पर्यटन विभाग ने की है। इस धरोहर का इतिहास भी बारह सौ साल पुराना है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पयर्टकों का मेला लगता है। खखरामठ को नजदीक से देखने के लिए एक करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लोटिंग ब्रिज बनाया गया जो बुन्देलखंड का पहला फ्लोटिंग ब्रिज है। इसे पयर्टकों के लिए खोला गया था लेकिन अब आम लोगों के लिए यह ब्रिज बंद कर दिया गया है।<br /><br />बुंदेलखंड की वीर भूमि महोबा में चंदेली राजा मदन बर्मन के द्वारा 1129 से 1163 ई के बीच मदन सागर में टापू पर खखरामठ का निर्माण कराया था। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि खखरामठ शिवालय हुआ करता था, पहले यहां पर मूर्तियां हुआ करती थी जो कि अब वहां से गायब हो चुकी है। मंदिर की ऊंचाई 105 फीट है और चौड़ाई लगभग 50 फीट है। यह हमें खजुराहो के मंदिरों की याद दिलाता है। यह बिना सीमेंट और गारा के प्रयोग के बनाया गया है। बगल में मझारी दीप है जहां पर चंदेली राजाओं की बैठक लगा करती थी और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ करते थे। केंद्र सरकार के द्वारा मदन सागर सरोवर के सुंदरीकरण के लिए 3.65 करोड़ रूपये का बजट जारी किया गया था।<br /><br />पर्यटन विभाग के द्वारा सुंदरीकरण का काम कराया गया है, जिसमें सरोवर के किनारे नेहरू पार्क का निर्माण कराया गया, सुलभ शौचालय और दो गेटों के साथ खखरामठ तक पहुंचने के लिए एक फ्लोटिंग ब्रिज का निर्माण कराया गया है। इसको बुंदेलखंड का पहला फ्लोटिंग ब्रिज कहते हैं। अधिकारियों के द्वारा पर्यटकों के लिए ब्रिज खोला गया था जहां पर पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ था। लेकिन कुछ समय के बाद ही आम जनमानस के लिए बंद कर दिया गया। लंबे समय से ब्रिज के बंद चलने के कारण और रखरखाव के अभाव में फ्लोटिंग ब्रिज पर लगे कुछ नट बोल्ट ढीले हो गए हैं और कुछ पाइप गायब हो गए हैं।<br /><br /><strong>देवी महिषासुर मर्दिनी की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद हुआ था बांध का निर्माण</strong><br /><br />वीर भूमि से बहने वाली मकरध्वज नदी पर बांध का निर्माण कराया गया, जिसे मदन सागर के नाम से जाना जाता है और बीच सरोवर में टापू पर खखरामठ का निर्माण करवाया गया है। बताया जाता है कि जब बांध का निर्माण चल रहा था तो बांध दो बार टूट गया। जिस पर साधु संतों ने राजा को देवी महिषासुर मर्दिनी का आवाहन कर प्राण प्रतिष्ठा करने की बात कही।जिस पर राजा मदन बर्मन ने देवी महिषासुर मर्दिनी का विधि विधान से आवाहन कर प्राण प्रतिष्ठा करवायी, जिसे कालांतर में छोटी चंद्रिकादेवी के नाम से जानते हैं।<br /><br /><strong>बीच टापू पर शिलाओं में बनी है सुंदर कलाकृतियां</strong><br /><br />मदन सागर सरोवर में बीच टापू पर शिलाएंपड़ी हुई है जिन पर सुंदर नक्काशी की हुई कृतियां हैं। हाथियों की सुंदर कलाकृति की शिलाएं मौजूद हैं। हाथियों के किसी का सिर तो किसी का हाथ और किसी का पैर कटा हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले राजाओं के द्वारा जो युद्ध लड़े गए, उनमें यह हाथी युद्ध लड़ते हुए शहीद हो गए। इनके द्वारा युद्ध लड़ा गया है और बाद में यह शिलाओं के रूप में परिवर्तित हो गए हैं। यह ऐतिहासिक धरोहर है, जिन्हें पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jan 2024 19:55:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमीरपुर : क्षेत्र में 716 लोग आए फाइलेरिया बीमारी की जद में</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 9 जनवरी (हि.सं.)। हमीरपुर जिले में फाइलरिया बीमारी ने अब तेजी से पांव पसारे हैं। ग्रामीण इलाकों में हाथी पांव फाइलेरिया की जद में तमाम लोगों के आने से यहां स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। बीमारी के लगातार बढ़ने पर मलेरिया विभाग की टीमें गांव में कैम्प लगाकर फाइलेरिया की जांच करने में जुट गई है।<br /><br />हमीरपुर जिले में मादा क्यूलेक्स मच्छरों का सफाया करने की मुहिम न चलाए जाने से ये मच्छर अब लोगों पर कहर बरपा रहे है। शहर से लेकर गांव तक मादा मच्छरों की भरमार होने से लोग परेशान हैं। इनके खात्मे के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/98533/716-people-fell-victim-to-filariasis-in-hamirpur-area"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-01/d09012024-17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 9 जनवरी (हि.सं.)। हमीरपुर जिले में फाइलरिया बीमारी ने अब तेजी से पांव पसारे हैं। ग्रामीण इलाकों में हाथी पांव फाइलेरिया की जद में तमाम लोगों के आने से यहां स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। बीमारी के लगातार बढ़ने पर मलेरिया विभाग की टीमें गांव में कैम्प लगाकर फाइलेरिया की जांच करने में जुट गई है।<br /><br />हमीरपुर जिले में मादा क्यूलेक्स मच्छरों का सफाया करने की मुहिम न चलाए जाने से ये मच्छर अब लोगों पर कहर बरपा रहे है। शहर से लेकर गांव तक मादा मच्छरों की भरमार होने से लोग परेशान हैं। इनके खात्मे के लिए विभाग ने कीट नाशक दवा का छिड़काव भी नहीं कराया है। विभाग की फागिंग मशीनें जंग खा रही है। इस समय जिले में फाइलेरिया बीमारी में सर्वाधिक तकलीफ देने वाली हाथी पांव है जिसके कारण मरीजों को चलने में बड़ी दिक्कतें होती है। हमीरपुर शहर में ही कई लोग हाथी पांव से पीड़ित है। मरीजों का कहना है कि इस बीमारी में भीषण दर्द होता है। एक कदम भी चलना मुश्किल होता है।<br /><br />सुमेरपुर क्षेत्र के हेलापुर समेत कई गांवों में भी इस बीमारी की जद में तमाम लोग आ गए है। कई लोग तो हाथी पांव बीमारी के कारण लाचार भी हो गए है। जिला मलेरिया अधिकारी आरके यादव का कहना है कि फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है। इसमें व्यक्ति किसी भी उम्र में संक्रमित हो सकता है। फाइलेरिया बीमारी के लक्षण हाथ और पैर की सूजन है। किसी भी शख्स को संक्रमण के बाद बीमारी का पता चलने में कई साल लग सकते हैं। बताया कि फाइलेरिया बीमारी को लेकर टीमें गांवों में कैम्प लगाकर मरीजों के खून की स्लाइडें बना रहे हैं। जांच में बीमारी की पुष्टि होने पर मरीजों को दवा दी जा रही है।<br /><br /><strong>हमीरपुर में हाथी पांव की जद में आए 716 लोग</strong><br /><br />जिला मलेरिया अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि हमीरपुर जिले में 716 लोग हाथी पांव फाइलेरिया बीमारी की गिरफ्त में है। ये मरीज दवा खा रहे है। बताया कि जिले के कुरारा क्षेत्र में 50 लोग हाथी पांव फाइलेरिया बीमारी से पीड़ित है वहीं सुमेरपुर क्षेत्र में 194, मौदहा क्षेत्र में 120, मुस्करा क्षेत्र में 167, सरीला क्षेत्र में 15, गोहांड क्षेत्र में 30, नौरंगा क्षेत्र में 66 व हमीरपुर के नगरीय क्षेत्र में 74 लोगों में हाथी पांव फाइलेरिया बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। बताया कि हाल में ही मौदहा क्षेत्र के अरतरा व कुनेहटा गांव में फाइलेरिया बीमारी को लेकर 610 मरीजों की जांच कराई गई है जिसमें सात लोग हाथी पांव फाइलेरिया बीमारी के लक्षण मिले है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jan 2024 22:09:37 +0530</pubDate>
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