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                <title>Sardar Vallabhbhai Patel - Loktej</title>
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                <description>Sardar Vallabhbhai Patel RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पटेल की 150वीं जयंती: मध्यप्रदेश का प्रतिनिधिमंडल 11 नवंबर को गुजरात कार्यक्रम में शामिल होगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, 10 नवंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि राज्य का एक प्रतिनिधिमंडल सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मनाने के लिए 11 नवंबर को गुजरात के केवड़िया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेगा।</p><p>यादव ने भोपाल में मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले अपने सहयोगियों को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने ‘भावांतर योजना’ के तहत मिले मॉडल रेट के फायदों के लिए किसानों को, जबकि ‘समाधान योजना’ से प्राप्त राहत के लिए बिजली उपभोक्ताओं को बधाई भी दी।</p><p>एक अधिकारी ने बताया, “भावांतर (भाव का अंतर)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143971/patels-150th-birth-anniversary-delegation-from-madhya-pradesh-will-participate"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-12/sardar-vallabhbhai-patel-statue-kevadia.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 10 नवंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि राज्य का एक प्रतिनिधिमंडल सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मनाने के लिए 11 नवंबर को गुजरात के केवड़िया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेगा।</p><p>यादव ने भोपाल में मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले अपने सहयोगियों को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने ‘भावांतर योजना’ के तहत मिले मॉडल रेट के फायदों के लिए किसानों को, जबकि ‘समाधान योजना’ से प्राप्त राहत के लिए बिजली उपभोक्ताओं को बधाई भी दी।</p><p>एक अधिकारी ने बताया, “भावांतर (भाव का अंतर) योजना की राशि 13 नवंबर को देवास से किसानों के खातों में अंतरित कर दी जाएगी।”</p><p>बालाघाट जिले में महिला नक्सली सुनीता के हथियार डालने का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि यह राज्य सरकार की ओर से अपनाई गई प्रभावी आत्मसमर्पण नीति का नतीजा है।</p><p>मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मध्यप्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है।</p><p>उन्होंने कहा कि छतरपुर जिले के घुवारा की रहने वाली तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ को जबलपुर में आदिवासी नायक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।</p><p>गौड़ एकदिवसीय विश्व कप जीतने वाली महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 15:13:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटेल पूरे कश्मीर को भारत में मिलाना चाहते थे लेकिन नेहरू ने इसकी अनुमति नहीं दी: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एकता नगर (गुजरात), 31 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरदार पटेल अन्य रियासतों की तरह पूरे कश्मीर को भी भारत में मिलाना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा नहीं होने दिया।</p>
<p>गुजरात के एकता नगर में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास राष्ट्रीय एकता दिवस परेड के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि घुसपैठ की घटनाएं भारत के जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ रही थीं जिसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई का फैसला किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सरदार पटेल का मानना ​​था कि इतिहास लिखने में समय बर्बाद नहीं करना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143807/patel-wanted-to-merge-entire-kashmir-with-india-but-nehru"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-10/k31102025-72400.jpg" alt=""></a><br /><p>एकता नगर (गुजरात), 31 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरदार पटेल अन्य रियासतों की तरह पूरे कश्मीर को भी भारत में मिलाना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा नहीं होने दिया।</p>
<p>गुजरात के एकता नगर में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास राष्ट्रीय एकता दिवस परेड के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि घुसपैठ की घटनाएं भारत के जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ रही थीं जिसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई का फैसला किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सरदार पटेल का मानना ​​था कि इतिहास लिखने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि इतिहास बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने 550 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कराने का असंभव सा लगने वाला कार्य पूरा किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने जो नीतियां बनाईं, जो निर्णय लिए, उन्होंने नया इतिहास रच दिया। मोदी ने कहा, ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत का विचार उनके लिए सर्वोपरि था।’’</p>
<p>कांग्रेस पर हमला करते हुए मोदी ने कहा कि कश्मीर और देश को इस मुद्दे से निपटने में पार्टी की गलतियों की भारी कीमत चुकानी पड़ी है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सरदार पटेल अन्य रियासतों की तरह पूरे कश्मीर का एकीकरण करना चाहते थे। लेकिन नेहरू जी ने उनकी इच्छा पूरी नहीं होने दी। कश्मीर का विभाजन हुआ, उसे अलग संविधान और अलग झंडा दिया गया और कांग्रेस की इस गलती का खामियाजा देश को दशकों तक भुगतना पड़ा।’’</p>
<p>मोदी ने कहा कि सरदार पटेल के लिए देश की संप्रभुता सर्वोपरि थी लेकिन उनकी मृत्यु के बाद, सरकारों ने देश की संप्रभुता के संबंध में उतनी गंभीरता नहीं दिखाई।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर में हुई गलतियां, पूर्वोत्तर में उत्पन्न समस्याएं और पूरे देश में फैला नक्सलवाद-माओवाद, ये सभी राष्ट्र की संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौतियां थीं।’’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल की नीतियों पर चलने के बजाय उस दौर की सरकारों ने रीढ़विहीन रवैया अपनाया।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की कमजोर नीतियों के कारण कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चला गया, जिसने फिर राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दिया। कश्मीर और देश ने भारी कीमत चुकाई, फिर भी कांग्रेस हमेशा आतंकवाद के आगे झुकी। वह सरदार पटेल के दृष्टिकोण को भूल गई, लेकिन हम नहीं।’’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 की ‘‘बेड़ियां’’ तोड़कर कश्मीर पूरी तरह से मुख्यधारा में शामिल हो गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज पाकिस्तान और आतंकवादी भी जानते हैं कि भारत की असली ताकत क्या है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दुनिया ने देखा कि अगर कोई भारत पर बुरी नजर डालेगा तो हम उसके घर में घुसकर उसे खत्म कर देंगे। यह सरदार पटेल का भारत है।’’</p>
<p>पिछले 11 वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक यह समस्या देश से जड़ से समाप्त नहीं हो जाती।</p>
<p>मोदी ने कहा, ‘‘2014 से पहले देश के लगभग 125 जिले माओवाद के आतंक से प्रभावित थे। आज यह 11 जिलों तक सीमित है। उनमें भी केवल तीन जिलों में ही नक्सलवाद कायम है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासी भारत की एकता और आंतरिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा हैं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ये अवैध प्रवासी हमारे संसाधनों पर कब्जा कर रहे हैं और जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ रहे हैं जिससे देश की एकता खतरे में पड़ रही है। लेकिन पिछली सरकारों ने केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर आंखें मूंद ली थीं।’’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अगर देश की सुरक्षा और पहचान को खतरा होगा तो हर नागरिक खतरे में होगा। आज राष्ट्रीय एकता दिवस पर हमें अपना संकल्प दोहराना होगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत में रह रहे हर अवैध प्रवासी को बाहर निकाला जाए।’’</p>
<p>कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि पार्टी को भारत पर राज करने वाले अंग्रेजों से ‘गुलामी की मानसिकता’ विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि देश औपनिवेशिक मानसिकता के हर निशान को मिटा रहा है।</p>
<p>मोदी ने पूछा, ‘‘राजनीतिक अस्पृश्यता को देश में एक संस्कृति बना दिया गया था। हम सभी जानते हैं कि कांग्रेस सरकारों के शासनकाल में सरदार पटेल और उनकी विरासत का क्या हश्र हुआ। इन लोगों ने बाबासाहेब आंबेडकर के साथ उनके जीवनकाल में और उनकी मृत्यु के बाद भी क्या किया? उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. लोहिया और जयप्रकाश नारायण के साथ क्या किया?’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी हमले और षड्यंत्र किए गए।</p>
<p>मोदी ने कांग्रेस पर धार्मिक आधार पर ‘वंदे मातरम’ के कुछ हिस्से को हटाने का आरोप लगाया और इसे समाज को विभाजित करने वाला और ब्रिटिश एजेंडे को आगे बढ़ाने वाला कृत्य बताया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जिस दिन कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को तोड़ने और विभाजित करने का फैसला किया उसी दिन भारत के विभाजन की नींव रख दी गई। अगर वह पाप न किया गया होता तो आज भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग होती।’’</p>
<p>कुछ राज्यों में भाषा विवाद के बीच प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि हर भाषा एक राष्ट्रीय भाषा है और किसी भी भाषा को दूसरों पर थोपने का कभी कोई प्रयास नहीं किया गया।</p>
<p>भाषा को भारत की एकता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की सैकड़ों भाषाएं और बोलियां इसकी खुली और रचनात्मक सोच का प्रतीक हैं।</p>
<p>मोदी ने कहा, ‘‘यही कारण है कि भारत भाषाई रूप से इतना समृद्ध राष्ट्र बना है। हमारी भाषाओं ने संगीत के विभिन्न सुरों की तरह हमारी पहचान को मजबूत किया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि हर भारतीय भाषा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। मोदी ने कहा, ‘‘हमें गर्व है कि भारत के पास तमिल है जो दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। हमारे पास संस्कृत है जो ज्ञान का भंडार है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि हर बच्चा अपनी मातृभाषा में आगे बढ़े।</p>
<p>अपने संबोधन से पहले मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस परेड का निरीक्षण किया जिसमें पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियों ने भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 15:35:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ये लौहपुरुष सरदार पटेल का भारत है, सुरक्षा और सम्मान से कभी समझौता नहीं करेगा: प्रधानमंत्री मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केवड़िया, 31 अक्टूबर (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर गुजरात के एकता नगर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ये लौहपुरुष सरदार पटेल का भारत है, जो सुरक्षा और सम्मान से कभी समझौता नहीं करेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह गर्व और प्रेरणा का पल है। हमने संकल्प लिया है कि हम ऐसे कार्यों को बढ़ावा देंगे, जो देश की एकता को मजबूती दें।<br />प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर एकता नगर में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान हम सभी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143805/this-is-the-india-of-iron-man-sardar-patel-prime"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-06/narendra-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>केवड़िया, 31 अक्टूबर (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर गुजरात के एकता नगर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ये लौहपुरुष सरदार पटेल का भारत है, जो सुरक्षा और सम्मान से कभी समझौता नहीं करेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह गर्व और प्रेरणा का पल है। हमने संकल्प लिया है कि हम ऐसे कार्यों को बढ़ावा देंगे, जो देश की एकता को मजबूती दें।<br />प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर एकता नगर में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान हम सभी एक महान क्षण के साक्षी बन रहे हैं। देशभर में हो रही ‘रन फॉर यूनिटी’ में कोटि-कोटि भारतीयों का उत्साह है। हम नए भारत की संकल्प शक्ति को महसूस कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज सरदार पटेल की जयंती का दिन स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय एकता का महापर्व बन गया है। जिस तरह हम 140 करोड़ देशवासी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं, वैसे ही एकता दिवस का महत्व हमारे लिए प्रेरणा और गर्व का पल है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरदार पटेल मानते थे कि इतिहास लिखने में समय नहीं गंवाना चाहिए, हमें तो इतिहास बनाने के लिए मेहनत करनी चाहिए। उनकी ये भावना हमें उनकी जीवनगाथा में दिखाई देती है।</p>
<p>सरदार साहब ने जो नीतियां बनाई, जो निर्णय लिए, उन्होंने नया इतिहास रचा।आजादी के बाद 562 रियासतों को साथ जोड़ने के असंभव कार्य को सरदार साहब ने संभव करके दिखाया। एक भारत-श्रेष्ठ भारत का विचार उनके लिए सर्वोपरि था।</p>
<p>पीएम मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि हर ऐसी बात जो देश की एकता को कमजोर करती है, हर देशवासी को उससे दूर रहना है। उन्होंने कहा, “ये राष्ट्रीय कर्तव्य है, ये सरदार साहब को सच्ची श्रद्धांजलि है। यही आज देश की जरूरत है। यही आज एकता दिवस का हर भारतीय के लिए संदेश भी है, संकल्प भी है।”</p>
<p>कश्मीर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सरदार साहब ने देश की संप्रभुता को सबसे ऊपर रखा, लेकिन दुर्भाग्य से सरदार साहब के निधन के बाद के वर्षों में देश की संप्रभुता को लेकर तब की सरकारों में उतनी गंभीरता नहीं रही।</p>
<p>एक ओर कश्मीर में हुई गलतियां, दूसरी ओर पूर्वोत्तर में पैदा हुई समस्याएं और देश में जगह-जगह पनपा नक्सलवाद-माओवादी आतंक, ये देश की संप्रभुता को सीधी चुनौतियां थीं, लेकिन उस समय की सरकारों ने सरदार साहब की नीतियों पर चलने की जगह रीढ़विहीन रवैये को चुना। इसका परिणाम देश ने हिंसा और रक्तपात के रूप में झेला।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरदार साहब चाहते थे कि जैसे उन्होंने बाकी रियासतों का विलय किया, वैसे ही कश्मीर का विलय हो, लेकिन, नेहरू जी ने उनकी वह इच्छा पूरी नहीं होने दी। कश्मीर को अलग संविधान और अलग निशान से बांट दिया गया। कश्मीर पर कांग्रेस ने जो गलती की थी, उसकी आग में देश दशकों तक जलता रहा।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस की लचर नीतियों के कारण कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। पाकिस्तान ने आतंकवाद को हवा दी। राज्य प्रायोजित आतंकवाद की कश्मीर और देश को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन फिर भी कांग्रेस हमेशा आतंकवाद के आगे नतमस्तक रही।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि अब देश ने पहली बार इस बड़े खतरे के खिलाफ भी निर्णायक लड़ाई लड़ने की ठानी है। लाल किले से मैंने ‘डेमोग्राफी मिशन’ का ऐलान किया। उन्होंने यह भी कहा कि ये लौहपुरुष सरदार पटेल का भारत है। ये अपनी सुरक्षा और सम्मान से कभी समझौता नहीं करेगा। राष्ट्रीय एकता दिवस पर संकल्प यह भी है कि हम भारत में रह रहे हर घुसपैठिए को निकालकर ही रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 15:29:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरदार पटेल: एकीकृत भारत के निर्माता</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>योगेश कुमार गोयल</strong><br /><br />राष्ट्रीय एकता के प्रति सरदार पटेल की निष्ठा आजादी के इतने वर्षों बाद भी पूरी तरह प्रासंगिक है। एकता की मिसाल कहे जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल गुजरात के नाडियाद में एक किसान परिवार में 31 अक्तूबर 1875 को जन्मे थे, जिन्होंने सदैव देश की एकता को सर्वोपरि माना। सरदार पटेल ने भारत को खण्ड-खण्ड करने की अंग्रेजों की साजिश को नाकाम करते हुए बड़ी कुशलता से आजादी के बाद करीब 550 देशी रियासतों तथा रजवाड़ों का एकीकरण करते हुए अखण्ड भारत के निर्माण में सफलता हासिल की थी। राजनीतिक और कूटनीतिक क्षमता का परिचय देते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/97915/sardar-patel-creator-of-unified-india"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-12/sardar-vallabhbhai-patel-statue-kevadia.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>योगेश कुमार गोयल</strong><br /><br />राष्ट्रीय एकता के प्रति सरदार पटेल की निष्ठा आजादी के इतने वर्षों बाद भी पूरी तरह प्रासंगिक है। एकता की मिसाल कहे जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल गुजरात के नाडियाद में एक किसान परिवार में 31 अक्तूबर 1875 को जन्मे थे, जिन्होंने सदैव देश की एकता को सर्वोपरि माना। सरदार पटेल ने भारत को खण्ड-खण्ड करने की अंग्रेजों की साजिश को नाकाम करते हुए बड़ी कुशलता से आजादी के बाद करीब 550 देशी रियासतों तथा रजवाड़ों का एकीकरण करते हुए अखण्ड भारत के निर्माण में सफलता हासिल की थी। राजनीतिक और कूटनीतिक क्षमता का परिचय देते हुए स्वतंत्र भारत को एकजुट करने का असाधारण कार्य बेहद कुशलता से सम्पन्न करने के लिए जाने जाते रहे सरदार पटेल का देहांत दिल का दौरा पड़ने के कारण 15 दिसम्बर 1950 को 75 वर्ष की आयु में हो गया था। इस दिन को प्रतिवर्ष ‘सरदार पटेल स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। देश के पहले गृहमंत्री और पहले उप-प्रधानमंत्री रहे सरदार पटेल का भारत के राजनीतिक एकीकरण के लिए अविस्मरणीय योगदान रहा।<br /><br />सरदार पटेल ने लंदन से वकालत की पढ़ाई पूरी कर अहमदाबाद में प्रैक्टिस शुरू की थी। वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों से अत्यधिक प्रेरित हुए और इसीलिए उन्होंने गांधी जी के साथ भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में हिस्सा लिया। वे भाई-भतीजावाद की राजनीति के सख्त खिलाफ थे और ईमानदारी के ऐसे पर्याय थे कि उनके देहांत के बाद जब उनकी सम्पत्ति के बारे में जानकारियां जुटाई गई तो पता चला कि उनकी निजी सम्पत्ति के नाम पर उनके पास कुछ नहीं था। वह जो भी कार्य करते थे, पूरी ईमानदारी, समर्पण, निष्ठा और हिम्मत से साथ पूरा किया करते थे। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग सामने आते हैं, जो इस महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कुशल प्रशासक के जीवन को समझने में सहायक हैं।<br /><br />एक किसान परिवार में जन्मे वल्लभ भाई पटेल जब छोटे थे, तब अपने पिताजी के साथ खेत पर जाया करते थे। एक दिन जब उनके पिताजी खेत में हल चला रहे थे तो वल्लभ भाई पटेल उन्हीं के साथ चलते-चलते पहाड़े याद कर रहे थे। उसी दौरान उनके पांव में एक बड़ा-सा कांटा चुभ गया किन्तु वे हल के पीछे चलते हुए पहाड़े कंठस्थ करने में इस कदर लीन हो गए कि उन पर कांटा चुभने का कोई प्रभाव ही नहीं पड़ा। जब एकाएक उनके पिताजी की नजर उनके पांव में घुसे बड़े से कांटे और बहते खून पर पड़ी तो उन्होंने घबराते हुए बैलों को रोका और बेटे वल्लभ भाई के पैर से कांटा निकालते हुए घाव पर पत्ते लगाकर खून बहने से रोका। बेटे की यह एकाग्रता और तन्मयता देखकर वे बहुत खुश हुए और जीवन में कुछ बड़ा कार्य करने का आशीर्वाद दिया।<br /><br />वल्लभ भाई पटेल वकालत की पढ़ाई करने के लिए सन् 1905 में इंग्लैंड जाना चाहते थे लेकिन पोस्टमैन ने उनका पासपोर्ट और टिकट उनके भाई विठ्ठल भाई पटेल को सौंप दिए। दोनों भाइयों का शुरुआती नाम वी.जे. पटेल था, ऐसे में बड़ा होने के नाते उस समय विट्ठल भाई ने स्वयं इंग्लैंड जाने का निर्णय लिया। वल्लभ भाई पटेल ने बड़े भाई के निर्णय का सम्मान करते हुए न केवल बड़े भाई को अपना पासपोर्ट और टिकट दे दिया बल्कि इंग्लैंड में रहने के लिए उन्हें कुछ धनराशि भी भेजी।<br /><br />सरदार पटेल का जीवन कितना सादगीपूर्ण था और उनका स्वभाव कितना सहज तथा नम्र था, यह इस किस्से से आसानी से समझा जा सकता है। सरदार पटेल उन दिनों भारतीय लेजिस्लेटिव असेंबली के अध्यक्ष थे। असेंबली के कार्यों से निवृत्त होकर एक दिन जब वे घर के लिए निकल ही रहे थे, तभी एक अंग्रेज दम्पत्ति वहां पहुंचा, जो विदेश से भारत घूमने के लिए आया था। सरदार पटेल सादे वस्त्रों में रहते थे और उन दिनों उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी। अंग्रेज दम्पत्ति ने इस वेश में देखकर उन्हें वहां का चपरासी समझ लिया और असेंबली में घुमाने के लिए कहा। सरदार पटेल ने बड़ी ही विनम्रता से उनका यह आग्रह स्वीकार करते हुए उन्हें पूरे असेंबली भवन में घुमाया। इससे खुश होकर दम्पति ने सरदार पटेल को बख्शीश में एक रुपया देने का प्रयास किया लेकिन सरदार पटेल ने अपनी पहचान उजागर न करते हुए विनम्रतापूर्वक लेने से इनकार कर दिया। अगले दिन जब असेंबली की बैठक हुई तो वह अंग्रेज दम्पत्ति लेजिस्लेटिव असेंबली की कार्यवाही देखने के लिए दर्शक दीर्घा में पहुंचा और सभापति के आसन पर बढ़ी हुई दाढ़ी तथा सादे वस्त्रों वाले उसी शख्स को देखकर दंग रह गया। वह मन ही मन ग्लानि से भर उठा कि जिस शख्स को चपरासी समझकर उन्होंने उसे असेम्बली घुमाने के लिए कहा, वो कोई और नहीं बल्कि खुद इस असेंबली के अध्यक्ष हैं। अंग्रेज दम्पत्ति सरदार पटेल की सादगी, सहज स्वभाव और नम्रता का कायल हो गया और उसने असेम्बली की कार्यवाही के बाद सरदार पटेल से क्षमायाचना की। एकीकृत भारत की निर्माता यह महान् शख्सियत 15 दिसम्बर 1950 को चिरनिद्रा में लीन हो गई।<br /><br />(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 15 Dec 2023 06:00:00 +0530</pubDate>
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