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                <description>Environment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अरावली पहाड़ियों का संरक्षण: भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला को बचाना क्यों है जरूरी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला, अरावली, आज एक गंभीर पारिस्थितिक संकट के मुहाने पर खड़ी है। उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरण को संतुलित रखने में इस पर्वतमाला की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और अवैध गतिविधियों ने इसके अस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया है। अरावली का संरक्षण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।</p>
<p>'विजन आईएएस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अरावली पहाड़ियों का महत्व इसके भौगोलिक विस्तार से कहीं अधिक है। यह पर्वत श्रृंखला थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने के लिए एक प्राकृतिक अवरोध (barrier) के रूप में कार्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144720/conservation-of-aravalli-hills-why-is-it-important-to-save"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mountaineer-couple-exercise-walking-tourism.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला, अरावली, आज एक गंभीर पारिस्थितिक संकट के मुहाने पर खड़ी है। उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरण को संतुलित रखने में इस पर्वतमाला की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और अवैध गतिविधियों ने इसके अस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया है। अरावली का संरक्षण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।</p>
<p>'विजन आईएएस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अरावली पहाड़ियों का महत्व इसके भौगोलिक विस्तार से कहीं अधिक है। यह पर्वत श्रृंखला थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने के लिए एक प्राकृतिक अवरोध (barrier) के रूप में कार्य करती है। यदि अरावली का क्षरण इसी तरह जारी रहा, तो मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के विशाल मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधियों और सूखे का खतरा बढ़ जाएगा।</p>
<p>रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि अरावली क्षेत्र जैव विविधता का एक समृद्ध केंद्र है और यह भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) के लिए एक महत्वपूर्ण 'कैचमेंट एरिया' के रूप में कार्य करता है। हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों के लिए यह पर्वत श्रृंखला एक 'वाटर टावर' की तरह है, जो गिरते भूजल स्तर को थामने में मदद करती है। इसके अलावा, यह क्षेत्र कार्बन सोखने (carbon sink) का भी काम करता है, जो जलवायु परिवर्तन के दौर में वायु गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।</p>
<p>हालांकि, अवैध खनन, अनियंत्रित शहरीकरण और वनों की कटाई ने अरावली के पारिस्थितिक तंत्र को भारी नुकसान पहुँचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली को बचाने के लिए सख्त कानूनी उपायों और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता है। 'ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया' जैसी पहल और सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देश इस दिशा में उम्मीद की किरण जगाते हैं। अरावली का संरक्षण न केवल वन्यजीवों के लिए, बल्कि करोड़ों लोगों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए भी अनिवार्य है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 10:36:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जनवरी 2025 अब तक का सबसे गर्म महीना: यूरोपीय जलवायु एजेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) पिछले महीने ‘ला नीना’ के प्रभाव के बावजूद जनवरी के महीने में रिकॉर्ड सबसे अधिक गर्मी का अनुभव किया गया। यूरोपी जलवायु एजेंसी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>‘ला नीना’ जलवायु संबंधी घटना है जो आमतौर पर वैश्विक तापमान को ठंडा करता है।</p>
<p>जनवरी के महीने में सबसे अधिक तापमान की घटना ऐसे समय में हुई है जब पृथ्वी पर 2024 को सबसे गर्म वर्ष के रूप में अनुभव किया जा रहा है और यह पहला वर्ष होगा जब वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक दर्ज किया गया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/130216/january-2025-the-hottest-month-ever--european-climate-agency"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/space-earth-moon-astrology-galaxy.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) पिछले महीने ‘ला नीना’ के प्रभाव के बावजूद जनवरी के महीने में रिकॉर्ड सबसे अधिक गर्मी का अनुभव किया गया। यूरोपी जलवायु एजेंसी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>‘ला नीना’ जलवायु संबंधी घटना है जो आमतौर पर वैश्विक तापमान को ठंडा करता है।</p>
<p>जनवरी के महीने में सबसे अधिक तापमान की घटना ऐसे समय में हुई है जब पृथ्वी पर 2024 को सबसे गर्म वर्ष के रूप में अनुभव किया जा रहा है और यह पहला वर्ष होगा जब वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक दर्ज किया गया।</p>
<p>यूरोपीय जलवायु सेवा कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) की गणना के अनुसार, जनवरी 2025 में औसत तापमान 13.23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले साल सबसे गर्म जनवरी से 0.09 डिग्री अधिक और 1991-2020 के औसत से 0.79 डिग्री अधिक है।</p>
<p>वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जनवरी में पृथ्वी का तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.75 डिग्री सेल्सियस अधिक था। पिछले 19 महीनों में से 18 महीने वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री के निशान से ऊपर रहा है।</p>
<p>सी3एस की उप निदेशक सामंथा बर्गेस ने कहा, ‘‘जनवरी 2025 एक और आश्चर्यजनक महीना है, जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में ‘ला नीना’ की स्थिति विकसित होने और वैश्विक तापमान पर उनके अस्थायी शीतलन प्रभाव के बावजूद पिछले दो वर्षों के दौरान रिकॉर्ड तापमान का दर्ज होना जारी रहा।’’</p>
<p>‘ला नीना’ एक जलवायु संबंधी घटना है, जिसमें मध्य प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है, जिससे विश्व भर का मौसम प्रभावित होता है।</p>
<p>इसके प्रभाव से आमतौर पर भारत में मजबूत मानसून और भारी वर्षा होती है जबकि अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में यह मौसमी घटना सूखे का कारण बनती है। यह वैश्विक तापमान को थोड़ा ठंडा भी करती है, जबकि इसके विपरीत ‘अल नीनो’ की घटना मौसम को गर्म करती है।</p>
<p>कॉपरनिकस के वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि पिछले 12 महीने की अवधि (फरवरी 2024 - जनवरी 2025) पूर्व-औद्योगिक समय की तुलना में 1.61 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म थी।</p>
<p>इस बीच, दुनिया के कई हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान (एसएसटी) असामान्य रूप से अधिक रहा। जनवरी के लिए औसत एसएसटी (60 डिग्री दक्षिण और 60 डिग्री उत्तर के बीच) 20.78 डिग्री सेल्सियस था, जो इसे रिकॉर्ड दूसरा सबसे गर्म जनवरी बनाता है।</p>
<p>जनवरी में विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने 2024 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष घोषित किया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 15:08:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ठंडे कंबल क्या हैं? क्या वे सचमुच मुझे सोने में मदद कर सकते हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(लिंडा ग्रोसर, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय और लुआना मेन, डीकिन विश्वविद्यालय)</p>
<p>सिडनी, चार फरवरी (द कन्वरसेशन) आप एक और गर्म रात में करवटें बदलने तथा बहुत कम नींद के कारण थके हुए उठते हैं।</p>
<p>तो सोशल मीडिया पर प्रशंसात्मक समीक्षाएं पढ़ने के बाद आप ठंडा कंबल (कूलिंग ब्लैंकेट) खरीदने के लिए प्रलोभित हो सकते हैं। या आपने इस तरह की टैगलाइन वाले ऑनलाइन लेख पढ़े होंगे:</p>
<p>सर्वोत्तम शीतलता प्रदान करने वाले हमारे सर्वोत्तम कंबलों की मदद से पसीने के साथ जागना बंद करें - जिसमें अमेजन का एक ‘टॉप-रेटेड’ विकल्प भी शामिल है जो ‘वास्तव में काम करता है’।</p>
<p>लेकिन ठंडे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/129599/what-are-cold-blankets"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/snowfall-winter-storm-coldwave.jpg" alt=""></a><br /><p>(लिंडा ग्रोसर, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय और लुआना मेन, डीकिन विश्वविद्यालय)</p>
<p>सिडनी, चार फरवरी (द कन्वरसेशन) आप एक और गर्म रात में करवटें बदलने तथा बहुत कम नींद के कारण थके हुए उठते हैं।</p>
<p>तो सोशल मीडिया पर प्रशंसात्मक समीक्षाएं पढ़ने के बाद आप ठंडा कंबल (कूलिंग ब्लैंकेट) खरीदने के लिए प्रलोभित हो सकते हैं। या आपने इस तरह की टैगलाइन वाले ऑनलाइन लेख पढ़े होंगे:</p>
<p>सर्वोत्तम शीतलता प्रदान करने वाले हमारे सर्वोत्तम कंबलों की मदद से पसीने के साथ जागना बंद करें - जिसमें अमेजन का एक ‘टॉप-रेटेड’ विकल्प भी शामिल है जो ‘वास्तव में काम करता है’।</p>
<p>लेकिन ठंडे कंबल क्या हैं? और क्या वे आपको एक आरामदायक रात बिताने में मदद कर सकते हैं?</p>
<p>हम जानते हैं कि ठंडा शयनकक्ष सर्वोत्तम है</p>
<p>सबसे पहले, आइए देखें कि ठंडा वातावरण हमें रात में बेहतर नींद में मदद क्यों करता है।</p>
<p>हमारे शरीर के आंतरिक तापमान में एक ऐसी लय होती है जिसमें पूरे दिन उतार-चढ़ाव होता रहता है। सोने से कुछ घंटे पहले, आपको सो जाने में मदद करने के लिए तापमान लगभग 0.31 डिग्री सेल्सियस गिर जाता है। आपको सोते रहने में मदद करने के लिए रात भर में तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस और गिर जाएगा।</p>
<p>नींद के दौरान, आपका आंतरिक तापमान और त्वचा गर्मी खोने एवं पैदा करने के बीच संतुलन हासिल करने के लिए मिलकर काम करते हैं। आपकी त्वचा में सेंसर होते हैं जो आपके आसपास के वातावरण में होने वाले बदलावों को पकड़ लेते हैं।</p>
<p>यदि यह बहुत अधिक गर्म हो जाता है, तो ये सेंसर आपके शरीर को इसकी सूचना दे देते हैं, जिससे आपको कंबल या कपड़े उतारने पड़ सकते हैं और इसके चलते आपको अधिक बार जागना होगा, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।</p>
<p>नींद की गुणवत्ता नींद के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण घटक है जो यह सुनिश्चित करती है कि आपको रात की अच्छी नींद से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ मिले।</p>
<p>नींद के लिए आदर्श तापमान मौसम और आपके बिस्तर के प्रकार पर निर्भर करता है, लेकिन यह 17 डिग्री सेल्सियस और 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। अपने सोने के माहौल को इस सीमा के भीतर रखने से आपको रात का सबसे अच्छा आराम पाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>तो ठंडे कंबल क्या हैं?</p>
<p>ठंडक देने वाले कंबल आपके सोते समय आपके शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।</p>
<p>इनके डिज़ाइन और निर्माण में विभिन्न तकनीकों और सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>हम अस्पताल-श्रेणी वाले ठंडे कंबलों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं जिनका उपयोग बुखार को कम करने और तंत्रिका तंत्र को चोट से बचाने के लिए किया जाता है। इनमें किसी के तापमान पर नज़र रखने के लिए स्वचालित ‘थर्मोस्टैट्स’ से जुड़े पानी, या वायु शीतलन प्रणाली वाले ‘जैल पैड’ का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>इसके बजाय, आप जिस प्रकार के उपभोक्ता-श्रेणी के ठंडे कंबलों का विज्ञापन देख सकते हैं, उनमें हल्के, सांस लेने योग्य सामग्रियों के मिश्रण का उपयोग किया जाता है जो त्वचा से नमी खींचते हैं और आपको रात भर ठंडी राहत प्रदान करने एवं शुष्क बनाए रखने में मदद करते हैं। वे सामान्य कंबल की तरह दिखते हैं।</p>
<p>सामान्य सामग्रियों में कपास, बांस, रेशम या फाइबर लियोसेल शामिल हैं। ये सभी नमी को अवशोषित करते हैं।</p>
<p>क्या ये काम करते हैं?</p>
<p>यदि आप ऑनलाइन समीक्षाओं पर विश्वास करते हैं, तो हां, ठंडे कंबल आपको ठंडक पहुंचा सकते हैं और गर्म मौसम में या यदि आपको सामान्य चादरों और कंबलों का उपयोग करने से बहुत अधिक गर्मी लगती है, तो बेहतर नींद में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>हालांकि, यह देखने के लिए बहुत कम वैज्ञानिक शोध उपलब्ध हैं कि ये उपभोक्ता-ग्रेड उत्पाद काम करते हैं या नहीं।</p>
<p>नींद की गुणवत्ता पर शोध करने वाले 2021 के एक अध्ययन में, 20 प्रतिभागी दो अलग-अलग परिस्थितियों में तीन रात सोये।</p>
<p>सबसे पहले, वे एक वातानुकूलित कमरे में सामान्य बिस्तर की चादरों पर सोए, जहां तापमान उनकी पसंद के अनुसार रखा गया था। फिर, उन्होंने एक वातानुकूलित कमरे में ठंडी चादरों का इस्तेमाल किया, जहां तापमान उनकी पसंद से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक रखा गया था।</p>
<p>प्रतिभागियों ने दोनों स्थितियों में नींद की अच्छी गुणवत्ता बताई, लेकिन उन्हें ठंडी चादरों वाले गर्म कमरे में नींद अधिक पसंद आई।</p>
<p>इससे यह संकेत मिलता है कि ठंडे बिस्तर का उपयोग रात में अधिक आरामदायक नींद प्रदान करने में सहायक हो सकता है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/129599/what-are-cold-blankets</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 17:03:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जब आप सोते हैं तो ये कीड़े कड़ी मेहनत कर पर्यावरण को स्वस्थ बनाये रखने में करते हैं मदद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(तान्या लैटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)</p>
<p>सिडनी, 31 जनवरी (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया के जंगलों, खेतों और बगीचों में जैसी ही सूरज ढलता है वैसे ही रात के कीड़ों की एक दबी-छिपी दुनिया जीवंत हो उठती है। ज्यादातर पारिस्थितिकी तंत्रों में विशेषकर दुनिया के गर्म हिस्सों में रात के समय कीड़ों की गतिविधियां चरम पर होती हैं।</p>
<p>ये रात्रिचर जीव पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और परागण, अपशिष्ट अपघटन और कीट नियंत्रण जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं। यहां कुछ महत्वपूर्ण कीड़ों के बारे में बताया गया हैं, जो अंधेरा होने के बाद बाहर आते हैं।</p>
<p>आइए जानते हैं ये कीड़ें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/127900/when-you-sleep--these-insects-help-in-keeping-the-environment-healthy-by-working-hard"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/woman-asleep-girl-sleep-dreams-face-young.jpg" alt=""></a><br /><p>(तान्या लैटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)</p>
<p>सिडनी, 31 जनवरी (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया के जंगलों, खेतों और बगीचों में जैसी ही सूरज ढलता है वैसे ही रात के कीड़ों की एक दबी-छिपी दुनिया जीवंत हो उठती है। ज्यादातर पारिस्थितिकी तंत्रों में विशेषकर दुनिया के गर्म हिस्सों में रात के समय कीड़ों की गतिविधियां चरम पर होती हैं।</p>
<p>ये रात्रिचर जीव पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और परागण, अपशिष्ट अपघटन और कीट नियंत्रण जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं। यहां कुछ महत्वपूर्ण कीड़ों के बारे में बताया गया हैं, जो अंधेरा होने के बाद बाहर आते हैं।</p>
<p>आइए जानते हैं ये कीड़ें क्यों महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>पतंगा: रात्रि पाली का सितारा</p>
<p>चमकीली तितलियां दिन के समय अक्सर मन मोहने का काम करती हैं जबकि पतंगा रात के समय अपनी खूबियों से लोगों का दिल जीतता है।</p>
<p>एक अनुमान के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में पतंगा की करीब 22,000 प्रजातियां पाई जाती हैं और इनमें से अधिकांश (प्रजातियां) रात के समय अपनी गतिविधियां करती हैं हालांकि कुछ पतंगा प्रजातियां दिन में और कुछ सुबह व शाम को सक्रिय होती हैं।</p>
<p>कई प्रजातियां अपने लंबे, 'स्ट्रॉ' जैसे मुंह के अंगों का उपयोग कर फूलों के रस से भोजन प्राप्त करती हैं और उड़ने से पहले फूलों के बीच पराग डालने का काम करती हैं। कुछ पतंगे कई तरह के पौधों पर भोजन करते हैं, वहीं अन्य पतंगों का कुछ विशिष्ट फूलों के साथ अत्यधिक विशिष्ट संबंध होता है।</p>
<p>पतंगों के लार्वा, ‘कैटरपिलर’ भी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>उदाहरण के तौर पर ‘मैली’ नामक पतंगों (ओकोफोरिडे) का लार्वा पत्ती के कूड़े में सूखी पत्तियों को खाता है और इसलिए वह कठोर, सूखे पौधों के अपघटन के लिए आवश्यक हो जाता है।</p>
<p>अगर ये पतंगे अपनी कड़ी मेहनत से इन जैविक पदार्थों को नष्ट नहीं करते हैं तो इन पत्तियों का ढेर मनुष्यों के लिए एक समस्या के रूप में सामने आ सकता है।</p>
<p>पतंगे और उनके लार्वा मनुष्यों सहित कई जानवरों के लिए वसा और प्रोटीन युक्त भोजन स्रोत प्रदान करते हैं।</p>
<p> </p>
<p>रात में व्यस्त जुगनू ः</p>
<p>गर्मी के मौसम में रात के समय अंधेरे में नाचते इन जुगनुओं की चमकती रोशनी को देखना एक जादुई अनुभव है। जुगनू वास्तव में लैम्पाइरिडे परिवार के भौरे हैं और ऑस्ट्रेलिया में इनकी 25 प्रजातियां पाई जाती हैं।</p>
<p>जुगनू की प्रत्येक प्रजाति संभावित साथियों के साथ संवाद करने के लिए अपनी स्वयं की विशिष्ट रोशनी का उपयोग करती है।</p>
<p>जब एक ही प्रजाति के बहुत से जुगनू इकट्ठा होते हैं, तो वे अपने प्रकाश स्पंदनों को मिला सकते हैं, जिससे एक लुभावना दृश्य बनता है।</p>
<p>जुगनू की ये विशिष्ट रोशनी ‘ल्यूसिफेरिन’ नाम के अणु और ‘ल्यूसिफेरेज’ नाम के एंजाइम से जुड़ी एक जैव रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिये उत्पन्न होती है।</p>
<p>जब जुगनू ऑक्सीजन की उपस्थिति में परस्पर क्रिया करते हैं, तो रोशनी उत्सर्जित होती है।</p>
<p>लेसविंग्स और मेंटिसफ्लाइ</p>
<p>‘लेसविंग्स’, कीटों के एक प्राचीन समूह (न्यूरोप्टेरा) से ताल्लुक रखते हैं, जिनका नाम उनके पंखों पर नसों के नाजुक जाल के कारण रखा गया है। अधिकांश वयस्क ‘लेसविंग्स’ रात में शिकार करते हैं और अपने शिकार से पोषक तत्वों को निकालने के लिए अपने खोखले, कैंची के आकार के मुंह का उपयोग करके छोटे-छोटे कीटों को खाते हैं।</p>
<p>कई ‘लेसविंग्स’ प्रजातियां प्रभावी कीट नियंत्रक हैं और इनका उपयोग कृषि में ‘एफिड्स’ और ‘मीलीबग्स’ जैसे कीटों के प्रबंधन के लिए किया जाता है।</p>
<p>‘मैन्टिसफ्लाई’ नाम से मशहूर ‘मैन्टिड लेसविंग्स’ मैन्टिस और मक्खी के बीच एक अजीब संकर जैसा दिखता है लेकिन वास्तव में यह ‘लेसविंग्स’ के समान ही है। ‘मैन्टिसफ्लाई’ के लार्वा का बहुत कम अध्ययन किया गया है लेकिन अधिकांश प्रजातियों को कीटों का शिकारी माना जाता है हालांकि कुछ मकड़ी के अंडों को खाते हैं।</p>
<p>‘मैन्टिसफ्लाई’ अन्य कीटों को खाकर कीटों की आबादी को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>रात के समय काम करने वाले इन जीवों की सुरक्षा ः</p>
<p>रात में कृत्रिम रोशनी रात की पाली में काम करने वाले कीटों के लिए गंभीर व्यवधान पैदा कर रही है।</p>
<p>कीट अक्सर भ्रमित हो जाते हैं और चमकदार रोशनी के इर्द-गिर्द अंतहीन घेरे में उड़ते रहते हैं तथा अपनी ऊर्जा खर्च करते रहते हैं, जिस कारण वह मर जाते हैं।</p>
<p>भ्रम के कारण होने वाली ये थकावट उनकी मृत्यु का कारण बन सकती है।</p>
<p>रात में कृत्रिम रोशनी कीटों के प्रजनन को भी बाधित कर सकती है। उल्लू और चमगादड़ आदि कृत्रिम रोशनी के इर्द-गिर्द शिकार करते हैं, क्योंकि इस प्रकार की रोशनी में उनका शिकार अधिक केंद्रित और कमजोर हो जाता है।</p>
<p>हम कैसे मदद कर सकते हैं:</p>
<p>रात में अनावश्यक बाहरी लाइटें बंद करें, खासकर गर्मियों के दौरान जब कई कीट प्रजनन कर रहे होते हैं।</p>
<p>प्रकाश प्रदूषण को कम करने के लिए ‘मोशन एक्टिवेटेड’ रोशनी का उपयोग करना और बगीचों में कीटनाशकों के उपयोग को कम या फिर समाप्त करना।</p>
<p>हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए रात भर कड़ी मेहनत करने वाले कीटों की रक्षा करने में छोटे-छोटे बदलाव बहुत बड़ा अंतर ला सकते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/127900/when-you-sleep--these-insects-help-in-keeping-the-environment-healthy-by-working-hard</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 17:01:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश के 440 जिलों के भूजल में नाइट्रेट का उच्च स्तर स्वास्थ्य के लिए खतरा: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) भारत के 440 जिलों के भूजल में ‘नाइट्रेट’ उच्च स्तर पर पाया गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने एक ‘रिपोर्ट’ में यह जानकारी देते हुए बताया कि एकत्र किए गए नमूनों में से 20 प्रतिशत में ‘नाइट्रेट’ की सांद्रता अनुमेय सीमा से अधिक है।</p>
<p>‘नाइट्रेट’ संदूषण पर्यावरण और स्वास्थ्य के मद्देनजर गंभीर चिंता का विषय है, खास कर उन क्षेत्रों में जहां ‘नाइट्रोजन’ आधारित उर्वरकों एवं पशु अपशिष्ट का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>‘वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट - 2024’ से यह भी पता चला कि 9.04 प्रतिशत नमूनों में ‘फ्लोराइड’ का स्तर भी सुरक्षित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/116956/high-level-of-nitrate-in-groundwater-of-440-districts-of-the-country-is-a-health-threat--report"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/water.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) भारत के 440 जिलों के भूजल में ‘नाइट्रेट’ उच्च स्तर पर पाया गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने एक ‘रिपोर्ट’ में यह जानकारी देते हुए बताया कि एकत्र किए गए नमूनों में से 20 प्रतिशत में ‘नाइट्रेट’ की सांद्रता अनुमेय सीमा से अधिक है।</p>
<p>‘नाइट्रेट’ संदूषण पर्यावरण और स्वास्थ्य के मद्देनजर गंभीर चिंता का विषय है, खास कर उन क्षेत्रों में जहां ‘नाइट्रोजन’ आधारित उर्वरकों एवं पशु अपशिष्ट का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>‘वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट - 2024’ से यह भी पता चला कि 9.04 प्रतिशत नमूनों में ‘फ्लोराइड’ का स्तर भी सुरक्षित सीमा से अधिक था, जबकि 3.55 प्रतिशत नमूनों में ‘आर्सेनिक’ संदूषण पाया गया।</p>
<p>मई 2023 में भूजल की गुणवत्ता की जांच के लिए देश भर में कुल 15,259 निगरानी स्थानों को चुना गया। इनमें से 25 प्रतिशत कुओं (बीआईएस 10500 के अनुसार सबसे अधिक जोखिम वाले) का विस्तार से अध्ययन किया गया। पुनर्भरण से गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी लेने के लिए मानसून से पहले और बाद में 4,982 स्थानों से भूजल का नमूना लिया गया।</p>
<p>रिपोर्ट में पाया गया कि जल के 20 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रेट की सांद्रता 45 मिलीग्राम प्रति लीटर (एमजी/एल) की सीमा को पार कर गई, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा पेयजल के लिए निर्धारित सीमा है।</p>
<p>राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु में 40 प्रतिशत से अधिक नमूनों में नाइट्रेट सीमा से ऊपर था, जबकि महाराष्ट्र के नमूनों में संदूषण 35.74 प्रतिशत, तेलंगाना में 27.48 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 23.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 22.58 प्रतिशत था।</p>
<p>उत्तर प्रदेश, केरल, झारखंड और बिहार में संदूषण का प्रतिशत कम पाया गया।</p>
<p>अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में सभी नमूने सुरक्षित सीमा के भीतर थे।</p>
<p>सीजीडब्ल्यूबी ने कहा कि, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में ‘नाइट्रेट’ का स्तर 2015 से स्थिर बना हुआ है। हालांकि, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 2017 से 2023 तक संदूषण में वृद्धि देखी गई है।</p>
<p>उच्च ‘नाइट्रेट’ स्तर शिशुओं में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है और यह पानी पीने के लिए असुरक्षित है।</p>
<p>भारत में 15 ऐसे जिले चिन्हित किए गए जहां भूजल में नाइट्रेट उच्च स्तर में पाया गया। इसमें राजस्थान में बाड़मेर, जोधपुर, महाराष्ट्र में वर्धा, बुलढाणा, अमरावती, नांदेड़, बीड, जलगांव और यवतमाल, तेलंगाना में रंगारेड्डी, आदिलाबाद और सिद्दीपेट, तमिलनाडु में विल्लुपुरम, आंध्र प्रदेश में पलनाडु और पंजाब में बठिंडा शामिल हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि भूजल में नाइट्रेट का बढ़ता स्तर अत्यधिक सिंचाई का परिणाम हो सकता है, जो संभवत: उर्वरकों में मौजूद नाइट्रेट को मिट्टी में गहराई तक पहुंचा सकता है।</p>
<p>इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘फ्लोराइड’ की अधिक सांद्रता एक बड़ी चिंता का विषय है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मैदानी इलाकों वाले राज्यों में आर्सेनिक का स्तर अधिक पाया गया है। ये राज्य पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और मणिपुर हैं। पंजाब के कुछ हिस्सों में और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के पानी में भी आर्सेनिक का स्तर अधिक पाया गया है।</p>
<p>लंबे समय तक फ्लोराइड और आर्सेनिक संदूषकों के संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं। फ्लोराइड के संदूषण से फ्लोरोसिस और आर्सेनिक के संदूषण से कैंसर या त्वचा के घाव हो सकते हैं।</p>
<p>भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट में एक बड़ी चिंता कई क्षेत्रों में यूरेनियम का ऊंचा स्तर भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान के 42 प्रतिशत नमूनों में और पंजाब के 30 प्रतिशत नमूनों में यूरेनियम का संदूषण पाया गया। यूरेनियम के लगातार संपर्क में रहने से गुर्दों को नुकसान हो सकता है।</p>
<p>राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी यूरेनियम का सांद्रण भूजल में अधिक पाया गया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jan 2025 14:48:36 +0530</pubDate>
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                <title>भारत में 1901 के बाद से 2024 सबसे गर्म साल: आईएमडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) वर्ष 2024 भारत में 1901 के बाद से सबसे गर्म वर्ष रहा, जिसमें औसत न्यूनतम तापमान दीर्घावधि औसत से 0.90 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता में कहा कि 2024 में पूरे भारत में वार्षिक औसत भूमि सतही वायु तापमान दीर्घकालिक औसत (1991-2020 अवधि) से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था।</p>
<p>वर्ष 2024 अब 1901 के बाद से सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया गया है। इसने 2016 को पीछे छोड़ दिया है जिसमें औसत भूमि सतही वायु तापमान सामान्य से 0.54</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/116710/2024-hottest-year-in-india-since-1901--imd"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/5955_sun-strom.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) वर्ष 2024 भारत में 1901 के बाद से सबसे गर्म वर्ष रहा, जिसमें औसत न्यूनतम तापमान दीर्घावधि औसत से 0.90 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता में कहा कि 2024 में पूरे भारत में वार्षिक औसत भूमि सतही वायु तापमान दीर्घकालिक औसत (1991-2020 अवधि) से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था।</p>
<p>वर्ष 2024 अब 1901 के बाद से सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया गया है। इसने 2016 को पीछे छोड़ दिया है जिसमें औसत भूमि सतही वायु तापमान सामान्य से 0.54 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था।</p>
<p>यूरोपीय जलवायु एजेंसी ‘कोपरनिकस’ के अनुसार, 2024 संभवतः अब तक का सबसे गर्म वर्ष होगा तथा यह ऐसा पहला वर्ष होगा जब वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jan 2025 19:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एनजीटी ने 2024 में पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर रखी कड़ी नजर, जारी किए कई आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 31 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले उन पर्यावरणीय मुद्दों को हल तलाशने की कोशिश की, जिनमें से कुछ ने राष्ट्रीय राजधानी में लोगों को 2024 में बढ़ते प्रदूषण के स्तर और घटती वायु गुणवत्ता के बीच सांस लेने के लिए मजबूर कर दिया।</p>
<p>हरित निकाय के समक्ष अन्य मुद्दे जल निकायों में प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन से संबंधित थे।</p>
<p>बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए एजेंसियों ने विभिन्न रिपोर्टें दाखिल कीं, लेकिन सच्चाई यह है कि सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्लीवासियों की सांस फूल गई।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली, 31 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले उन पर्यावरणीय मुद्दों को हल तलाशने की कोशिश की, जिनमें से कुछ ने राष्ट्रीय राजधानी में लोगों को 2024 में बढ़ते प्रदूषण के स्तर और घटती वायु गुणवत्ता के बीच सांस लेने के लिए मजबूर कर दिया।</p>
<p>हरित निकाय के समक्ष अन्य मुद्दे जल निकायों में प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन से संबंधित थे।</p>
<p>बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए एजेंसियों ने विभिन्न रिपोर्टें दाखिल कीं, लेकिन सच्चाई यह है कि सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्लीवासियों की सांस फूल गई।</p>
<p>दिसंबर में, स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करने वाले प्राथमिक प्रदूषक पीएम 2.5 का खतरनाक स्तर दर्ज किया गया। 35 निगरानी स्टेशनों में से 32 ने वायु गुणवत्ता को गंभीर-प्लस श्रेणी में दर्ज किया और कुछ क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 470 दर्ज किया गया।</p>
<p>एनजीटी ने स्थिति पर कड़ी नजर रखी और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।</p>
<p>इसने एनसीआर में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करने और प्रदूषण विरोधी उपाय ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (जीआरएपी) के विभिन्न चरणों का पालन करने में पारदर्शिता रखने का आदेश दिया।</p>
<p>एनजीटी ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘लगातार वायु प्रदूषण’ के कारणों से निपटने वाले एक अध्ययन पर एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया, जिसमें तापीय ऊर्जा संयंत्रों से उत्सर्जन और मौसम की स्थिति शामिल है।</p>
<p>बहरहाल, दिल्ली एकमात्र ऐसा राज्य नहीं है जो बार-बार इस समस्या का सामना कर रहा है। रिपोर्ट बताती हैं, कि कई अन्य राज्य भी वायु प्रदूषण से परेशान हैं।</p>
<p>इस पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने वायु गुणवत्ता के स्तर में गिरावट का सामना कर रहे 53 शहरों को प्रत्येक प्रदूषणकारी स्रोत के योगदान और इसे कम करने के उपायों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।</p>
<p>प्रयागराज में आगामी महाकुंभ के मद्देनजर गंगा और यमुना सहित पूजनीय नदियों की प्राचीन पवित्रता को बनाए रखना हरित निकाय के समक्ष एक और चिंता का विषय था।</p>
<p>एनजीटी ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए कि नदियाँ ठोस अपशिष्ट या सीवेज अपशिष्ट से प्रदूषित न हों और पानी की गुणवत्ता हर समय पीने या स्नान के मानकों के अनुरूप हो।</p>
<p>इसने अधिकारियों को नदियों के लिए निगरानी बिंदुओं की संख्या और निगरानी रखने की आवृत्ति बढ़ाने का निर्देश दिया।</p>
<p>नवंबर में, न्यायाधिकरण ने गंगा नदी पर उत्तराखंड सरकार की प्रदूषण रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और कहा कि गंगोत्री में नदी का उद्गम बिंदु भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के अपशिष्ट से प्रदूषित है।</p>
<p>राज्यों में नदी और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण की स्थिति की निगरानी कर रहे न्यायाधिकरण ने जिलावार कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया और नोडल अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि नदी या उसकी सहायक नदियों में अपशिष्ट न बहाया जाए।</p>
<p>नदियों, झीलों और तालाबों सहित जल निकायों के संरक्षण के लिए, एनजीटी ने कई निर्देश पारित किए, जिनमें सीवेज उपचार के लिए पर्याप्त सुविधाएं, मौजूदा सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) की डिजाइन की गई क्षमता तक इष्टतम उपयोग, सीवरेज प्रणाली के साथ सौ फीसदी घरेलू संपर्क, एसटीपी का निर्धारित मानदंडों का अनुपालन और उपचारित सीवेज के पानी का गैर-पेय और माध्यमिक उद्देश्यों के लिए उपयोग शामिल हैं।</p>
<p>न्यायाधिकरण ने ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के मुद्दे पर मामलों को निपटाया और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दायर अनुपालन रिपोर्टों की जांच की।</p>
<p>इसने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और विसंगतियों को देखते हुए बेहतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया, जैसे कि अपशिष्ट उत्पादन और प्रसंस्करण में अंतराल, विरासत में मिले अपशिष्ट का उपचार आदि।</p>
<p>ऐसे ही एक मामले में, एनजीटी ने ठोस और तरल अपशिष्ट के प्रबंधन में प्रगति की कमी के लिए बिहार की आलोचना की।</p>
<p>जब गंगा, यमुना और हिंडन जैसी नदियों के बाढ़ के मैदानों के संरक्षण की बात आई, तो न्यायाधिकरण ने अधिकारियों से ‘गंगा कायाकल्प (संरक्षण और प्रबंधन) नियमों’ के अनुसार बाढ़ के मैदानों की पहचान, सीमांकन और बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को अधिसूचित करने को कहा।</p>
<p>न्यायाधिकरण ने तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाओं को तैयार करने के महत्व को भी रेखांकित किया।</p>
<p>हरित आवरण की कमी से संबंधित एक मामले में, एनजीटी ने वनों में अतिक्रमण और अवैध वृक्षों की कटाई को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया। प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को रोकना न्यायाधिकरण के समक्ष एक और गंभीर मुद्दा था। इसमें एनजीटी ने अधिकारियों से नदी तल पर अवैध रेत खनन पर रोक लगाने और जंगलों और पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पत्थर खनन और क्रशिंग जैसी औद्योगिक गतिविधियों को रोकने के लिए कहा।</p>
<p>एनजीटी ने घटते भूजल स्तर पर मामलों की सुनवाई की, अवैध बोरवेल को सील करने का निर्देश दिया, बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन के अति-दोहन को रोकने और फिर से भरने के लिए निर्देश जारी किए।</p>
<p>एक महत्वपूर्ण कदम में, इसने 24 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों को आर्सेनिक और फ्लोराइड से भूजल के संदूषण पर नोटिस जारी किया और ‘तत्काल निवारक और सुरक्षात्मक कदम’ उठाने का आह्वान किया।</p>
<p>न्यायाधिकरण ने औद्योगिक या वाणिज्यिक इकाइयों में दुर्घटनाओं पर मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया और पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसने उन इकाइयों पर पर्यावरण मुआवजा भी लगाया जो नियमों का उल्लंघन करके काम कर रही थीं।</p>
<p>इसने खतरनाक कचरे के प्रबंधन पर निर्देश पारित किए तथा बिना उपचार या ‘‘उप-उत्पाद’’ के रूप में वर्गीकरण के, उपचार भंडारण निपटान सुविधाओं के उचित रखरखाव और रखरखाव का आदेश दिया।</p>
<p>जैव-चिकित्सा अपशिष्ट की समस्या को कम करने के लिए, न्यायाधिकरण ने कमियों को दूर करने का सुझाव दिया और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से अपशिष्ट उत्पादन और प्रबंधन में अंतराल की पहचान करने, ऐसे कचरे के लिए बारकोड का उपयोग करने और नगरपालिका के ठोस कचरे के साथ इसके मिश्रण को प्रतिबंधित करने के लिए कहा।</p>
<p>इसने बिजली और इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा करने वाली इकाइयों को इस मुद्दे से निपटने के लिए नियमों का पालन करने का निर्देश दिया।</p>
<p>एनजीटी ने कहा कि प्लास्टिक कचरा एक खतरा है और एकल-उपयोग प्लास्टिक पेश करने और विस्तारित उत्पादकों की जिम्मेदारियों को लागू करने के बावजूद, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के संबंध में लक्ष्य हासिल नहीं हो पाए।</p>
<p>हरित निकाय ने जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए तत्काल कार्रवाई का निर्देश भी दिया, क्योंकि 28 अक्टूबर को दिलजीत दोसांझ के संगीत कार्यक्रम के बाद ‘रनिंग ट्रैक’ पर बीयर की खाली बोतलें, खाद्य पैकेजिंग और अन्य अपशिष्ट बिखरे पाए गए थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/116336/ngt-kept-a-close-watch-on-environmental-concerns-in-2024--issued-many-orders</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2024 16:22:16 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सर्दी में क्यों होती है जुकाम होने की अधिक संभावना, सार्वजनिक स्वास्थ्य नर्स ने बताए कारण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(लिबी रिचर्ड्स, पुरड्यू विश्वविद्यालय)</p>
<p>वेस्ट लाफायेट (अमेरिका), 13 दिसंबर (द कन्वरसेशन) आपने लोगों को सर्दी में यह कहते हुए सुना होगा कि “गीले बालों के साथ या कोट पहने बिना बाहर मत जाओ वरना आपको जुकाम हो जाएगा।”</p>
<p>यह पूरी तरह सच नहीं है। सच्चाई बहुत जटिल है। अंतर यह है: ठंड लगने के कारण आपको जुकाम नहीं होता। लेकिन यह सच है कि ठंडे मौसम में सर्दी-जुकाम और फ्लू से संबंधित वायरस का संक्रमण ज्यादा फैलता है।</p>
<p>शोध से यह भी पता चलता है कि कम तापमान होने पर कोविड-19 का अधिक खतरा होता है।</p>
<p>नर्सिंग के प्रोफेसर के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/109927/why-is-there-a-greater-chance-of-getting-a-cold-in-winter--the-public-health-nurse-explained-the-reasons"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/3288_cold-sweater-weather-fog-road1.jpg" alt=""></a><br /><p>(लिबी रिचर्ड्स, पुरड्यू विश्वविद्यालय)</p>
<p>वेस्ट लाफायेट (अमेरिका), 13 दिसंबर (द कन्वरसेशन) आपने लोगों को सर्दी में यह कहते हुए सुना होगा कि “गीले बालों के साथ या कोट पहने बिना बाहर मत जाओ वरना आपको जुकाम हो जाएगा।”</p>
<p>यह पूरी तरह सच नहीं है। सच्चाई बहुत जटिल है। अंतर यह है: ठंड लगने के कारण आपको जुकाम नहीं होता। लेकिन यह सच है कि ठंडे मौसम में सर्दी-जुकाम और फ्लू से संबंधित वायरस का संक्रमण ज्यादा फैलता है।</p>
<p>शोध से यह भी पता चलता है कि कम तापमान होने पर कोविड-19 का अधिक खतरा होता है।</p>
<p>नर्सिंग के प्रोफेसर के रूप में, मुझसे अक्सर संक्रामक रोग फैलने के बारे में पूछा जाता है, जिसमें सर्दी और जुकाम लगने के बीच का संबंध से जुड़ा सवाल भी शामिल है। तो आइए जानते हैं कि वास्तव में क्या होता है।</p>
<p>सामान्य जुकाम के लिए जिम्मेदार राइनोवायरस और इंफ्लुएंजा व सार्स-कोव-2 समेत कई वायरस ठंडे तापमान और कम आर्द्रता होने पर लंबे समय तक संक्रामक बने रहते हैं और तेजी से फैलते हैं। इसके साथ ही यह तथ्य भी है कि ठंड के मौसम में लोग घर के अंदर अधिक समय बिताते हैं तथा दूसरों के साथ निकट संपर्क में रहते हैं, जो कि रोगाणुओं के फैलने की अधिक सामान्य कारण हैं।</p>
<p>सर्दी के मौसम में फ्लू और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) का फैलना निश्चित होता है। हालांकि, कोविड-19 सामान्य ठंड के मौसम में फैलने वाला श्वसन वायरस नहीं है। उदाहरण के तौर पर, 2020 के बाद से हर बार गर्मी में कोविड-19 संक्रमण दर बढ़ी है।</p>
<p>ठंड के मौसम में वायरस का संक्रमण आसानी से फैलता</p>
<p>ठंड का मौसम इन्फ्लूएंजा वायरस की बाहरी झिल्ली को बदल सकता है, जिससे यह अधिक ठोस और रबड़ जैसा हो जाता है। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि रबड़ जैसी कोटिंग वायरस के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण को आसान बनाती है।</p>
<p>समस्या का कारण सिर्फ सर्दियों की ठंडी हवा ही नहीं है। ठंडी और शुष्क हवा को भी फ्लू के प्रकोप से जोड़ा गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शुष्क शीतकालीन हवा इन्फ्लूएंजा वायरस को लंबे समय तक संक्रामक बने रहने में मदद करती है। शुष्क हवा सर्दियों में आम बात है, छींक की बूंदों में मौजूद पानी अधिक तेजी से निकलता है। इसके परिणामस्वरूप छोटे कण बनते हैं, जो लंबे समय तक टिके रह सकते हैं और आपके खांसने या छींकने के बाद दूर तक जा सकते हैं।</p>
<p>ठंड के मौसम में आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली किस तरह प्रतिक्रिया करती है, यह भी बहुत मायने रखता है। ठंडी हवा में सांस लेने से आपके श्वसन मार्ग में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे वायरस के लिए टिके रहना आसान हो जाता है। इसीलिए नाक और मुंह पर स्कार्फ बांधने से सर्दी से बचाव में मदद मिल सकती है, क्योंकि इससे सांस के जरिए अंदर जाने वाली हवा गर्म हो जाती है।</p>
<p>इसके अलावा, ज्यादातर लोगों को सर्दियों में कम धूप मिलती है। यह एक समस्या है क्योंकि सूरज विटामिन डी का एक प्रमुख स्रोत है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। शारीरिक गतिविधि, एक अन्य कारक है सर्दी के दौरान कम हो जाती है। बर्फीली परिस्थितियों में लोगों के व्यायाम को टालने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।</p>
<p>इसके बजाय, लोग अधिकतर समय घर के अंदर बिताते हैं। इसका मतलब आमतौर पर दूसरों के साथ ज्यादा नजदीकी संपर्क होता है, जिससे बीमारी फैलती है। श्वसन वायरस आम तौर पर संक्रमित व्यक्ति के छह फुट के दायरे में फैलते हैं।</p>
<p>(कन्वरसेशन) </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 07:00:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ष 2009-2019 तक हर वर्ष लगभग 15 लाख लोगों की मौत का संबंध वायु प्रदूषण से: अध्ययन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2009 से 2019 के बीच प्रति वर्ष लगभग 15 लाख लोगों की मौत का संबंध लंबे समय तक पीएम 2.5 प्रदूषण के संपर्क में रहने से है। ‘द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल’ में शोधकर्ताओं में हरियाणा के अशोका विश्वविद्यालय और नयी दिल्ली के ‘सेंटर फॉर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल’ (सीसीडीसी) के शोधकर्ता शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा बताए गए वार्षिक औसत पांच माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2009 से 2019 के बीच प्रति वर्ष लगभग 15 लाख लोगों की मौत का संबंध लंबे समय तक पीएम 2.5 प्रदूषण के संपर्क में रहने से है। ‘द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल’ में शोधकर्ताओं में हरियाणा के अशोका विश्वविद्यालय और नयी दिल्ली के ‘सेंटर फॉर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल’ (सीसीडीसी) के शोधकर्ता शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा बताए गए वार्षिक औसत पांच माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है।</p>
<p>टीम ने यह भी पाया कि भारत की लगभग 82 प्रतिशत या 1.1 अरब आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां वार्षिक औसत पीएम 2.5 का स्तर भारतीय राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (40 माइक्रॉन प्रति घन मीटर) द्वारा अनुशंसित स्तर से अधिक है।</p>
<p>प्रदूषण 2.5 माइक्रॉन व्यास से छोटे कणों के कारण होता है, जिसमें सूक्ष्म कण पदार्थ या पीएम 2.5 शामिल होते हैं।</p>
<p>शोधकर्ताओं ने पाया कि पीएम 2.5 प्रदूषण में प्रति घन मीटर 10 माइक्रोन की वार्षिक वृद्धि से वार्षिक मृत्यु दर में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि होती है।</p>
<p>टीम ने कहा कि भारत में वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक प्रभाव और इससे होने वाली मौत के संबंध में साक्ष्य दुर्लभ हैं तथा अन्य देशों के अध्ययनों से मेल नहीं खाते।</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में पीएम 2.5 प्रदूषण के स्तर में व्यापक वृद्धि देखी गई है। पीएम 2.5 का सबसे कम वार्षिक स्तर अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले में 2019 में (11.2 माइक्रोन प्रति घन मीटर) दर्ज किया गया और सबसे अधिक वार्षिक स्तर गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 2016 में (119 माइक्रोन प्रति घन मीटर) देखा गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/109310/nearly-15-lakh-deaths-every-year-from-2009-2019-linked-to-air-pollution--study</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 13:15:34 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिछले 30 वर्षों में पृथ्वी की तीन-चौथाई से अधिक भूमि हुई शुष्क: संयुक्त राष्ट्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) वर्ष 2020 तक के तीन दशकों के दौरान पृथ्वी के 77 प्रतिशत से अधिक भू-भाग ने पिछली समान अवधि की तुलना में शुष्क जलवायु का सामना किया। मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र समझौता (यूएनसीसीडी) द्वारा सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।</p>
<p>इसी अवधि के दौरान, वैश्विक शुष्क भूमि का विस्तार लगभग 43 लाख वर्ग किलोमीटर हुआ, जो भारत से लगभग एक तिहाई बड़ा है, तथा अब यह पृथ्वी के 40 प्रतिशत से अधिक भू-भाग पर फैला हुआ है।</p>
<p>सऊदी अरब के रियाद में आयोजित यूएनसीसीडी के 16वें सम्मेलन में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108195/more-than-three-fourths-of-earth-s-land-has-become-dry-in-the-last-30-years--united-nations"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/season-weather-climate-mausam.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) वर्ष 2020 तक के तीन दशकों के दौरान पृथ्वी के 77 प्रतिशत से अधिक भू-भाग ने पिछली समान अवधि की तुलना में शुष्क जलवायु का सामना किया। मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र समझौता (यूएनसीसीडी) द्वारा सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।</p>
<p>इसी अवधि के दौरान, वैश्विक शुष्क भूमि का विस्तार लगभग 43 लाख वर्ग किलोमीटर हुआ, जो भारत से लगभग एक तिहाई बड़ा है, तथा अब यह पृथ्वी के 40 प्रतिशत से अधिक भू-भाग पर फैला हुआ है।</p>
<p>सऊदी अरब के रियाद में आयोजित यूएनसीसीडी के 16वें सम्मेलन में जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकने के प्रयास विफल हो गए, तो इस सदी के अंत तक दुनिया के तीन प्रतिशत आर्द्र क्षेत्र शुष्क भूमि में बदल जाएंगे।</p>
<p>पिछले तीन दशकों में शुष्क भूमि पर रहने वाले लोगों की संख्या दोगुनी होकर 2.3 अरब हो गई है। अनुमानों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन की सबसे बदतर स्थिति में 2100 तक पांच अरब लोगों को शुष्क भूमि पर रहना पड़ सकता है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी बड़ी आबादी को जलवायु परिवर्तन के कारण शुष्कता और मरुस्थलीकरण में वृद्धि के कारण अपने जीवन और आजीविका के लिए और भी अधिक खतरों का सामना करना पड़ रहा है। शुष्कता की प्रवृत्ति से विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 96 प्रतिशत यूरोप, पश्चिमी अमेरिका, ब्राजील, एशिया और मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्से शामिल हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण सूडान और तंजानिया में भूमि का सबसे अधिक हिस्सा शुष्क भूमि में परिवर्तित हो रहा है, जबकि गैर-शुष्क भूमि से शुष्क भूमि में परिवर्तित होने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र चीन में है।</p>
<p>दुनिया के लगभग आधे शुष्क भूमि के निवासी एशिया और अफ्रीका में रहते हैं। सबसे घनी आबादी वाले शुष्क क्षेत्र कैलिफोर्निया, मिस्र, पूर्वी और उत्तरी पाकिस्तान, भारत के बड़े हिस्से और पूर्वोत्तर चीन में हैं।</p>
<p>ग्रीनहाउस गैस के अधिक उत्सर्जन की स्थिति में, मध्य-पश्चिमी अमेरिका, मध्य मैक्सिको, उत्तरी वेनेजुएला, उत्तर-पूर्वी ब्राजील, दक्षिण-पूर्वी अर्जेंटीना, संपूर्ण भूमध्य सागर क्षेत्र, काला सागर तट, दक्षिणी अफ्रीका के बड़े हिस्से और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में शुष्क भूमि के विस्तार का पूर्वानुमान है।</p>
<p>यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहिम थियाव ने कहा, ‘‘पहली बार, भूमि के शुष्क होने के संकट को वैज्ञानिक स्पष्टता के साथ सामने लाया गया है, जिससे दुनिया भर में अरबों लोगों को प्रभावित करने वाले इस खतरे का पता चलता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सूखे के विपरीत-कम वर्षा की अस्थायी अवधि, शुष्कता एक स्थायी, निरंतर परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती है। सूखे की स्थिति समाप्त हो जाती है। हालांकि, जब किसी क्षेत्र की जलवायु शुष्क हो जाती है, तो वह पूर्व की स्थिति में लौटने की क्षमता खो देती है।’’</p>
<p>थियाव ने कहा कि दुनिया भर में विशाल क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली शुष्क जलवायु अब वैसी नहीं होगी जैसी वे पहले थी, और यह परिवर्तन पृथ्वी पर जीवन के लिए नयी चुनौतियां पेश कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Dec 2024 08:00:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिकॉर्ड के हिसाब से 2024 सबसे गर्म वर्ष रहेगा: यूरोपीय जलवायु एजेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) यूरोपीय जलवायु एजेंसी ‘कोपरनिकस’ ने सोमवार को कहा कि 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष होगा और औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने वाला यह पहला वर्ष होगा।</p>
<p>उसने कहा कि इसके अलावा, नवंबर 2024 दूसरा सबसे गर्म महीना (नवंबर 2023 के बाद) बन गया है, जिसमें औसत सतह वायु तापमान 14.10 डिग्री सेल्सियस रहा। इस महीने यह 1991-2020 के नवंबर के औसत तापमान से 0.73 डिग्री सेल्सियस अधिक है।</p>
<p>कोपरनिकस के अनुसार नवंबर में वैश्विक तापमान में एक और बड़ी बात नजर आयी जिसमें तापमान पूर्व-औद्योगिक युग के स्तर से 1.62</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108012/2024-will-be-hottest-year-on-record--european-climate-agency"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/heat-temperature-atmosphere-hot-sunlight.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) यूरोपीय जलवायु एजेंसी ‘कोपरनिकस’ ने सोमवार को कहा कि 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष होगा और औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने वाला यह पहला वर्ष होगा।</p>
<p>उसने कहा कि इसके अलावा, नवंबर 2024 दूसरा सबसे गर्म महीना (नवंबर 2023 के बाद) बन गया है, जिसमें औसत सतह वायु तापमान 14.10 डिग्री सेल्सियस रहा। इस महीने यह 1991-2020 के नवंबर के औसत तापमान से 0.73 डिग्री सेल्सियस अधिक है।</p>
<p>कोपरनिकस के अनुसार नवंबर में वैश्विक तापमान में एक और बड़ी बात नजर आयी जिसमें तापमान पूर्व-औद्योगिक युग के स्तर से 1.62 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।</p>
<p>एजेंसी ने कहा कि यह पिछले 17 महीनों में 16वां ऐसा महीना था जब वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक युग स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो गया।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भारत ने 1901 के बाद से दूसरे सबसे गर्म नवम्बर महीने का अनुभव किया, जिसमें औसत अधिकतम तापमान 29.37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और यह सामान्य से 0.62 डिग्री सेल्सियस अधिक है।</p>
<p>इस साल अब तक (जनवरी से नवंबर तक) वैश्विक औसत तापमान विसंगति 1991-2020 के औसत से 0.72 डिग्री सेल्सियस अधिक है, जो इस अवधि संबंधी रिकॉर्ड में सबसे अधिक है और 2023 में इसी अवधि की तुलना में 0.14 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म है।</p>
<p>यूरोपीय जलवायु एजेंसी ने कहा कि यह लगभग तय है कि 2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्ष होगा, जिसमें वार्षिक तापमान पूर्व-औद्योगिक युग स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा। अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2023 है जिसमें तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.48 डिग्री सेल्सियस अधिक था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 14:01:37 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज, वायु गुणवत्ता ‘खराब’ हुई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार की सुबह सर्द रही और न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो इस मौसम के औसत तापमान से 1.2 डिग्री सेल्सियस कम है।</p>
<p>दिल्ली के कुछ हिस्सों में रविवार शाम हल्की बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई है।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिन में अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।</p>
<p>सर्दियों के इस मौसम में रविवार को अब तक दूसरी बार सबसे कम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।</p>
<p>दिल्ली में सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्ष आर्द्रता का स्तर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार की सुबह सर्द रही और न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो इस मौसम के औसत तापमान से 1.2 डिग्री सेल्सियस कम है।</p>
<p>दिल्ली के कुछ हिस्सों में रविवार शाम हल्की बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई है।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिन में अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।</p>
<p>सर्दियों के इस मौसम में रविवार को अब तक दूसरी बार सबसे कम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।</p>
<p>दिल्ली में सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्ष आर्द्रता का स्तर 100 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो दिन में नमी और ठंड की शुरुआत का संकेत है।</p>
<p>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार सुबह नौ बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 212 रहा जो कि ‘खराब’ श्रेणी में आता है।</p>
<p>सीपीसीबी के अनुसार 201 से 300 के बीच का एक्यूआई स्तर ‘खराब’ श्रेणी में आता है, जो संवेदनशील समूहों और श्वसन संबंधी बीमारियों वाले व्यक्तियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।</p>
<p>शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 को ‘गंभीर’ माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/107989/minimum-temperature-recorded-at-8-2-degree-celsius-in-delhi--air-quality--poor</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 11:13:41 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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