<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.loktej.com/tag/6516/rishikesh" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Loktej RSS Feed Generator</generator>
                <title>Rishikesh - Loktej</title>
                <link>https://www.loktej.com/tag/6516/rss</link>
                <description>Rishikesh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ऋषिकेश : मां गंगा के पावन तट पर शिवाभिषेक कर ऋषिकुमारों ने की विश्व मंगल की कामना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ऋषिकेश, 02 अगस्त (हि.स.)। परमार्थ निकेतन में श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर परमार्थ निकेतन के आचार्यों, ऋषिकुमारों और परमार्थ परिवार के सदस्यों ने वैदिक मंत्रों एवं दिव्य शंख ध्वनि के साथ शिवाभिषेक कर भगवान शिव से विश्व मंगल की प्रार्थना की। परमार्थ निकेतन द्वारा शिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ियों व शिवभक्तों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रातः सात बजे से शाम सात बजे तक बाघखाला में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं।<br /><br />स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भगवान शिव निराकार व ओमकार ब्रह्मांडीय चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह दिव्य शक्ति न केवल बह्माण्ड बल्कि सभी में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103553/rishikesh-rishikumars-prayed-for-the-prosperity-of-the-world-by"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-08/b02082024-07.jpg" alt=""></a><br /><p>ऋषिकेश, 02 अगस्त (हि.स.)। परमार्थ निकेतन में श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर परमार्थ निकेतन के आचार्यों, ऋषिकुमारों और परमार्थ परिवार के सदस्यों ने वैदिक मंत्रों एवं दिव्य शंख ध्वनि के साथ शिवाभिषेक कर भगवान शिव से विश्व मंगल की प्रार्थना की। परमार्थ निकेतन द्वारा शिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ियों व शिवभक्तों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रातः सात बजे से शाम सात बजे तक बाघखाला में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं।<br /><br />स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भगवान शिव निराकार व ओमकार ब्रह्मांडीय चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह दिव्य शक्ति न केवल बह्माण्ड बल्कि सभी में समाहित है। शिव की सर्वोच्च चेतना और माता पार्वती जी की शक्ति की दिव्य ऊर्जा का सभी के जीवन में संचार हो। स्वामी ने कहा कि शिव परिवार सर्वत्र समानता, विविधता में एकता, समर्पण और प्रेम का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। भगवान शिव के गले में सर्प, गणेश का वाहन चूहा और कार्तिकेय का वाहन मोर है, सर्प, चूहे का भक्षण करता है और मोर, सर्प का परन्तु परस्पर विरोधी स्वभाव होते हुए भी शिव परिवार में आपसी प्रेम है। अलग-अलग विचारों, प्रवृत्तियों, अभिरुचियों और अनेक विषमताओं के बावजूद प्रेम से मिलजुल कर रहना ही हमारी संस्कृति है और शिव परिवार हमें यही शिक्षा देता है।<br /><br />शिवरात्रि के पावन अवसर पर स्वामी ने शिवजी की नटराज मुद्रा का दिव्य वर्णन करते हुय अपने सत्संग में कहा कि शिव, संहारक और सृजनकर्ता दोनों हैं, जीवन के द्वंद्वों को मूर्त रूप देते हुए सृजन और विनाश दोनों से जुड़े हुए हैं। नटराज का तांडव नृत्य इसका प्रतीक हैं और इसके पीछे एक गहरी अंतर्दृष्टि भी है। शिव के अग्रदूत रुद्र हैं, जो प्राकृतिक तत्त्वों और प्रकृति की दैवीय शक्तियों के प्रतीक हैं।<br /><br />स्वामी ने कहा कि शिवरात्रि, हमें अपनी अन्तर्चेतना से जुड़ने, सत्य को जनाने, स्व से जुड़ने तथा शिवत्व को प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। जीवन में आये विषाद्, कड़वाहट और दुःख को पी कर आनन्द से परमानन्द की ओर बढ़ने का संदेश देती है। उन्होंने सभी शिवभक्तों का आह्वान करते हुए कहा कि श्रावण माह प्रकृति और पर्यावरण की समृद्धि का प्रतीक है। इस माह में नैसर्गिक सौन्दर्य चरम पर होता है इसलिये शिवाभिषेक के साथ धराभिषेक भी जरूरी है। उत्तराखण्ड के तो कण-कण में शिव का वास है इसलिये इस देवभूमि को सिंगल यूज प्लास्टिक से प्रदूषित न करें और अपनी यात्रा की याद में कम से कम पांच पौधों का रोपण अवश्य करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/103553/rishikesh-rishikumars-prayed-for-the-prosperity-of-the-world-by</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/103553/rishikesh-rishikumars-prayed-for-the-prosperity-of-the-world-by</guid>
                <pubDate>Fri, 02 Aug 2024 14:39:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2024-08/b02082024-07.jpg"                         length="90748"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऋषिकेश : धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहुंचे परमार्थ, गंगा आरती में किया सहभाग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ऋषिकेश, 24 जुलाई (हि.स.)। बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बुधवार को परमार्थ निकेतन पहुंच कर विश्व शान्ति यज्ञ एवं गंगा आरती में सहभाग किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूज्य संतों का सान्निध्य, साधना व ध्यान को जीवन का अंग बनाना होगा। जिनके पास साधना की शक्ति है उनके पास सब कुछ है।<br /><br />परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने परमार्थ निकेतन में बागेश्वर धाम सरकार के पहुंचने पर वेदमंत्रों, शंख ध्वनि एवं पुष्पवर्षा कर उनका अभिनन्दन किया। बागेश्वर धाम सरकार ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट की। स्वामी ने हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103354/dhirendra-krishna-shastri-reached-rishikesh-and-participated-in-parmarth-ganga"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b24072024-29.jpg" alt=""></a><br /><p>ऋषिकेश, 24 जुलाई (हि.स.)। बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बुधवार को परमार्थ निकेतन पहुंच कर विश्व शान्ति यज्ञ एवं गंगा आरती में सहभाग किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूज्य संतों का सान्निध्य, साधना व ध्यान को जीवन का अंग बनाना होगा। जिनके पास साधना की शक्ति है उनके पास सब कुछ है।<br /><br />परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने परमार्थ निकेतन में बागेश्वर धाम सरकार के पहुंचने पर वेदमंत्रों, शंख ध्वनि एवं पुष्पवर्षा कर उनका अभिनन्दन किया। बागेश्वर धाम सरकार ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट की। स्वामी ने हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर बागेश्वर धाम सरकार का अभिनन्दन किया।<br /><br />इस मौके पर बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जीवन में सब कुछ होता है पर मन ठीक नहीं होता इसलिये पूज्य संतों का सान्निध्य, साधना व ध्यान को जीवन का अंग बनाना होगा। उन्होंने कहा कि विचारों व मन का पवित्र होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती भारतीय संस्कृति व प्रकृति के संरक्षक व उन्नायक हैं, उनका प्रत्येक संदेश गंगा जी, प्रकृति व पर्यावरण के लिये होता है। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन दूसरी बार आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। परमार्थ निकेतन आने पर लगता है जैसे अपने ही घर पहुंच गये। जीवन को जीने के दो रास्ते हैं- एक है अर्थ के माध्यम से और दूसरा परमार्थ के माध्यम से। अधिकांश लोग अर्थ के माध्यम से जीवन जीते हैं। परन्तु धन्य है पूज्य स्वामी आप परमार्थ के लिये जीते हैं। आपने पूरे विश्व को एक नई दिशा प्रदान की।<br /><br />इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सनातन संस्कृति के ध्वज को पूरे विश्व में बड़ी ही दिव्यता, सात्विकता, सरलता, सजगता और दृढ़ता के साथ फहराने का कार्य किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/103354/dhirendra-krishna-shastri-reached-rishikesh-and-participated-in-parmarth-ganga</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/103354/dhirendra-krishna-shastri-reached-rishikesh-and-participated-in-parmarth-ganga</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Jul 2024 21:35:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2024-07/b24072024-29.jpg"                         length="76497"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिमाचल सरकार पर राज्यसभा चुनाव के बाद छाए संकट के बादल , 11 विधायक पंचकूला से उत्तराखंड पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा हिमाचल में कर सकती है फ्लोर टेस्ट की मांग, मामला सुप्रीम कोर्ट में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/100061/clouds-of-crisis-loom-over-himachal-government-after-rajya-sabha"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d09032024-07.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ऋषिकेश 09 मार्च (हि.स.)। हिमाचल में पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव के दौरान 6 कांग्रेस सहित तीन निर्दलीय विधायकों का कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी मनु सिंघवी के विरुद्ध क्रॉस वोटिंग किए जाने के बाद विधानसभा स्पीकर का कांग्रेस के छह विधायकों की सदस्यता रद्द किए जाने के चलते सुक्खू सरकार पर छाये खतरे के बादल उनकी सरकार का पीछा नहीं छोड़ पा रहे हैं।<br /><br />शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस के इन छह और तीन निर्दली विधायकों सहित कुल 11 विधायकों को चंडीगढ़ प्लेन उत्तराखंड के देहरादून के जौलीगग्रांट एयरपोर्ट लाया गया, जहां लेकर एक बस ऋषिकेश बदरीनाथ मार्ग पर स्थित ताज होटल पहुंची। उनकी सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड सरकार ने चाक चौबंद व्यवस्था कर रखी है। इसे लेकर उत्तराखंड से हिमाचल तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।<br /><br />उल्लेखनीय की इससे पूर्व सभी बागी विधायकों को हिमाचल से चंडीगढ़ शिफ्ट किया गया था, जहां से अब इन विधायकों को उत्तराखंड की भाजपा सरकार के क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया गया है। इन सभी विधयकों को पहले चंडीगढ़ से एक चार्टर्ड प्लेन के माध्यम से देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे लाया गया था। इसके बाद उन्हें वहां से आज बस से ताज होटल पहुंचाया गया है।<br /><br />इनमें सुधीर शर्मा ,राजेंद्र राणा, इंद्रदत्त, लखनपाल, देवेंद्र कुमार भुट्टू ,रविंद्र ठाकुर और चैतन्य शर्मा शामिल हैं। उनके साथ तीन निर्दलीय विधायक होशियार सिंह, केएल ठाकुर, आशीष शर्मा और भाजपा के दो विधायक विक्रम ठाकुर और त्रिलोक जम्वाल भी बताए गए हैं।<br /><br />गौरतलब है कि हिमाचल सरकार के स्पीकर ने छह विधायकों को क्रॉस वोटिंग के आरोप में अयोग्य घोषित कर सदस्यता रद्द किए जाने के बाद इन विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर न्याय के लिए दस्तक दी है। उन्हें बहुत राहत की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि भाजपा हिमाचल प्रदेश में फ्लोर टेस्ट की मांग भी कर सकती है। इसके चलते इन विधायकों की सुरक्षा बढ़ाई गई है।<br /><br />गौरतलब है कि राज्यसभा के चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन विजय घोषित हुए थे। जबकि कांग्रेस के यह विधायक बजट मतदान में भी शामिल नहीं हुए हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर ने व्हिप के उल्लंघन के मामले में इन्हें अयोग्य घोषित किया है, जो इस घटना के बाद 21 फरवरी से चंडीगढ़ में ठहरे हुए थे। जिन्हें अब ऋषिकेश के निकट ताज होटल में ठहराया गया है, जहां उनकी सुरक्षा को चाक चौबंद रखा गया है। जिन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/100061/clouds-of-crisis-loom-over-himachal-government-after-rajya-sabha</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/100061/clouds-of-crisis-loom-over-himachal-government-after-rajya-sabha</guid>
                <pubDate>Sat, 09 Mar 2024 18:10:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2024-03/d09032024-07.jpg"                         length="152724"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उप्र के बलरामपुर से ऋषिकेश घूमने आए स्कूल के दल का एक छात्र गंगा में बहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ऋषिकेश, 23 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से ऋषिकेश घूमने आए एक स्कूल छात्रों के दल का एक छात्र उस समय गंगा में बह गया, जब वह नहाने के लिए गया था। रेस्क्यू टीम को अभी तक डूबे युवक का कुछ पता नहीं चल सका है।<br /><br />एसडीआरएफ के प्रभारी कविंद्र सजवान ने बताया कि सोमवार की सुबह थाना लक्ष्मण झूला के अंतर्गत फूल चट्टी आश्रम के पास एक युवक की डूबने की सूचना मिलने पर एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सर्च अभियान चलाया,लेकिन दोपहर तक डूबे युवक का कुछ पता नहीं चला। टीम पशुलोक बैराज तक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/96622/a-student-of-the-school-group-who-had-come-from"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-10/d23102023-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ऋषिकेश, 23 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से ऋषिकेश घूमने आए एक स्कूल छात्रों के दल का एक छात्र उस समय गंगा में बह गया, जब वह नहाने के लिए गया था। रेस्क्यू टीम को अभी तक डूबे युवक का कुछ पता नहीं चल सका है।<br /><br />एसडीआरएफ के प्रभारी कविंद्र सजवान ने बताया कि सोमवार की सुबह थाना लक्ष्मण झूला के अंतर्गत फूल चट्टी आश्रम के पास एक युवक की डूबने की सूचना मिलने पर एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सर्च अभियान चलाया,लेकिन दोपहर तक डूबे युवक का कुछ पता नहीं चला। टीम पशुलोक बैराज तक सभी संभावित स्थानों पर सर्च अभियान चला रही है।<br /><br />उन्होंने बताया गया कि उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से एक स्कूल के 60 छात्रों का दल हरिद्वार ऋषिकेश घूमने आया था, जिसमें से 15 वर्षीय सकिन पुत्र इसरार अहमद अपने साथियों के साथ लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र अंतर्गत फूल चट्टी आश्रम के नीचे जब नहाने लगा तो वह गंगा में बह गया। उसे बहता देख कर उसके अन्य साथियों ने बचाने का प्रयास भी किया,लेकिन वह असफल रहे, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। इस पर एसडीआरएफ की टीम उसकी खोज में सर्च अभियान चला रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/96622/a-student-of-the-school-group-who-had-come-from</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/96622/a-student-of-the-school-group-who-had-come-from</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 19:42:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2023-10/d23102023-01.jpg"                         length="124733"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार धामों की यात्रा कर लौट रही अहमदाबाद के यात्रियों की बस सड़क पर पलटी, 27 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ऋषिकेश, 13 मई (हि.स.)। चारों धामों की यात्रा कर ऋषिकेश लौट रही अहमदाबाद के यात्रियों की एक बस ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कोडियाला के निकट सड़क पर अचानक पलट गई। इसके कारण बस में सवार 27 लोग घायल हो गए, जिसमें 4 लोगों को ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय और 23 लोगों को एम्स में भर्ती कराया गया है।<br /><br />शनिवार को अहमदाबाद गुजरात निवासी भावना बेन ने बताया कि एक ही परिवार के 27 लोग विगत 3 मई को अहमदाबाद से चार धाम यात्रा पर गए थे। इस दौरान उन्होंने चारों धामों की यात्रा कुशलतापूर्वक कर जब वे वापस दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">ऋषिकेश, 13 मई (हि.स.)। चारों धामों की यात्रा कर ऋषिकेश लौट रही अहमदाबाद के यात्रियों की एक बस ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कोडियाला के निकट सड़क पर अचानक पलट गई। इसके कारण बस में सवार 27 लोग घायल हो गए, जिसमें 4 लोगों को ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय और 23 लोगों को एम्स में भर्ती कराया गया है।<br /><br />शनिवार को अहमदाबाद गुजरात निवासी भावना बेन ने बताया कि एक ही परिवार के 27 लोग विगत 3 मई को अहमदाबाद से चार धाम यात्रा पर गए थे। इस दौरान उन्होंने चारों धामों की यात्रा कुशलतापूर्वक कर जब वे वापस दिल्ली के लिए लौट रहे थे तो इसी बीच अचानक उनकी बस यूपी 17ए 7489 सड़क पर पलट गई। इस हादसे में घायल 4 लोगों में 55 वर्षीय भावना बेन पत्नी प्रकाश भाई , 24 वर्षीय परीता धवल पत्नी धवल कुमार, 47 वर्षीय मनीषा बेन पत्नी मुकेश भाई , 52 वर्षीय गौरी बैन पत्नी रमेश भाई को राजकीय चिकित्सालय लाया गया और बाकी 23 लोगों को एम्स में ले जाया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।<br /><br />यात्रियों ने बताया कि बस के पलटने से आधा घंटा पहले उन्होंने एक स्थान पर साथ खाना खाया था। इसके बाद उनकी बस कुछ ही दूर चली थी कि अचानक पलट गई। उन्हें दिल्ली से अहमदाबाद के लिए ट्रेन पकड़नी थी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/92076/passengers-of-ahmedabad-bus-returning-after-traveling-to-char-dham</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/92076/passengers-of-ahmedabad-bus-returning-after-traveling-to-char-dham</guid>
                <pubDate>Sat, 13 May 2023 19:28:49 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिन्दू संस्कृति में चारधामों का है विशेष महत्व, अन्य दर्शनीय स्थलों के भी हैं खास मायने</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ऋषिकेश, 13 अप्रैल (हि.स.)। हिन्दू संस्कृति में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है। उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड की यात्रा का भी अपना अलग ही महत्व है। चारधाम का आगाज 22 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है।<br /><br />केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को तो बदरीनाथ के 27 अप्रैल को खुलेंगे जबकि परंपरा के अनुसार 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। शासन-प्रशासन ने यात्रियों की अतिथि देवो भव की तर्ज पर पूरी तैयारी कर ली है। यात्रा को लेकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91217/chardham-has-special-importance-in-hindu-culture-other-places-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/char-dham-yatra.jpg" alt=""></a><br /><p>ऋषिकेश, 13 अप्रैल (हि.स.)। हिन्दू संस्कृति में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है। उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड की यात्रा का भी अपना अलग ही महत्व है। चारधाम का आगाज 22 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है।<br /><br />केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को तो बदरीनाथ के 27 अप्रैल को खुलेंगे जबकि परंपरा के अनुसार 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। शासन-प्रशासन ने यात्रियों की अतिथि देवो भव की तर्ज पर पूरी तैयारी कर ली है। यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष नजर बनाए रखे हुए हैं। यात्रा को सुखद और सरल यात्रा बनाने के लिए मुख्यमंत्री लगातार और समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दे रहे हैं हैं।<br /><br />प्रशासन का मानना है कि पिछले 2 वर्ष में कोरोना के चलते कम हुई यात्रियों की संख्या के बाद इस वर्ष काफी संख्या में यात्रियों के आने की संभावना है, जिसे लेकर केंद्र सरकार के मेगा प्रोजेक्ट फोर लाइन का कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है। केदारनाथ पुरी को आधुनिक तरीके से सभी सुविधायुक्त बना दिया गया है, तो सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड साहिब में भी गोविंद घाट से लेकर हेमकुंड साहिब तक रोपवे का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे यात्रियों को पहले की अपेक्षा काफी सुविधा हो जाएगी।<br /><br /><strong>हिन्दू संस्कृति में चारधामों का विशेष महत्व</strong><br /><br />चारधाम यात्रा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगोत्री, यमुनोत्री को जहां धरती पर ईश्वरीय साक्ष्य के रूप में मानते हैं तो केदारनाथ को भगवान शिव और बद्रीनाथ को भगवान विष्णु का निवास स्थान माना गया है। इसलिए इसे यात्रा नहीं अपितु जीवन दर्शन कहा जाता है। श्री बद्रीनाथ को बैकुंठ धाम, मां गंगोत्री को फलदायिनी, मां यमुनोत्री को सूर्य पुत्री और केदारनाथ को शिव के धाम के रूप में मान्यता दी गई है।<br /><br /><strong>यमुनोत्री धाम</strong><br /><br />यमुना में पवित्र यमुना नदी का उद्गम स्थल है ,यहां पर यमुना देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। कहा जाता है कि यमुना को यमराज की जुड़वा बहन और सूर्य की बेटी माना गया है। यमुनोत्री जाने के लिए जानकीचट्टी तक मोटर मार्ग और यहां से 5 से 6 किलोमीटर पैदल रास्ता तय करना पड़ता है, जो समुद्र तल से लगभग 3235 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के समीप गर्म पानी का कुंड है ,जिसे सूर्यकुंड के नाम से भी जाना जाता है। यात्री इसमें कपड़े में चावल और आलू पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।<br /><br /><strong>गंगोत्री धाम</strong><br /><br />गंगोत्री धाम में मां गंगा मंदिर है जो कि 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ,जिसका निर्माण 18वीं सदी में किया गया था। सफेद रंग की संगमरमर से बने इस मंदिर की ऊंचाई 25 फीट है, जहां गंगा का उद्गम स्थल गोमुख ग्लेशियर भी है ,जो गंगोत्री से 18 किलोमीटर पैदल मार्ग की दूरी पर है। गंगोत्री को राजा भगीरथ की तपस्थली भी कहा गया है। इसके संबंध में कहा गया है कि भागीरथी नदी को अपने उद्गमस्थल से निकल कर देवप्रयाग में अलकनंदा में मिलीं, जहां से दोनों बहनों के मिलन के बाद उसे ही मां गंगा का नाम दिया गया जो कलकत्ता तक गई हैं। गंगोत्री मंदिर के निकट अन्य पूजा स्थल सूर्यकुंड ,विष्णु कुंड ,ब्रह्मकुंड भी है, जहां श्रद्धालु पूरी आस्था और पूर्वक जाते हैं।<br /><br /><strong>श्री केदारनाथ धाम</strong><br /><br />श्री केदारनाथ मंदिर मंदाकिनी नदी के किनारे समुद्र तल से लगभग 3584 मीटर की ऊंचाई पर है। यह मंदिर शिव धाम के नाम से विख्यात है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इस महा धाम में गंगोत्री से लाए जल से यात्री महादेव का जलाभिषेक करते हैं। आदि गुरु शंकराचार्य ने इस पावन भूमि पर भगवान शिव को स्थापित किया। पौराणिक कथा अनुसार भगवान शिव ने इस स्थान पर पांडवों को कौरवों की हत्या के पाप से मुक्त किया था। केदारनाथ में अनेक कुंड विद्यमान हैं, जिनका अपना आध्यात्मिक महत्व है। केदारनाथ धाम के लिए सोनप्रयाग तक बड़े वाहन के माध्यम से सोनप्रयाग से 5 किलोमीटर गौरीकुंड तक छोटे वाहनों तक और अन्य वाहनों से यात्री सुविधा पूर्वक पहुंच सकते हैं। यात्रियों को पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर पैदल यात्रा के अतिरिक्त घोड़े, खच्चर, डांडी, कंडी आदि से भी पहुंचा जा सकता है।<br /><br /><strong>बद्रीनाथ मंदिर</strong><br /><br />बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी के दाहिने तट पर 3133 मीटर की ऊंचाई पर नर -नारायण पर्वत की गोद में स्थित है। श्री बद्रीनाथ धाम में जहां काले पत्थर की ध्यान मग्न पद्मासन भगवान विष्णु की मूर्ति है वहीं इस मंदिर को सबसे पुराने तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। बताया जाता है कि आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना की थी। भगवान बद्रीनाथ के पुजारी दक्षिण भारत के नम्बूदरी पाद ब्राह्मण होते हैं, जिन्हें रावल भी कहते हैं वे ही मंदिर की पूजा करते हैं, जहां श्री बद्रीनाथ मंदिर के अलावा तप्त कुंड ,नारद कुंड, शेष नेत्र नीलकंठ शिखर, उर्वशी मंदिर, ब्रह्म कपाल ,माता मूर्ति मंदिर के अलावा देश का अंतिम गांव माणा और भीम पुल के अलावा वसुधारा जलप्रपात स्थल भी दर्शनीय है।<br /><br /><strong>श्री हेमकुंड साहिब</strong><br /><br />श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा समुद्र तल से अलकनंदा और पुष्पावती नदी के संगम पर 4329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गुरु गोविन्द साहिब के संबंध में मान्यता है कि इस स्थान पर सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने तपस्या की थी। इसलिए सिख समाज में हेमकुंड साहिब को गुरु गोविंद सिंह की तपस्थली के रूप में जाना जाता है। इसके कपाट मई माह में दर्शनार्थियों के लिए खोले जाते हैं।<br /><br />पांचों धामों के अतिरिक्त पंच बद्री योगध्यान, वृद्धबद्री मंदिर, आदि बद्री मंदिर, पंच केदार आदि मंदिरों की भी यात्रा प्रारंभ हो जाती है। जहां हजारों की संख्या में यात्री दर्शनों के लिए जाते हैं। इन सभी स्थानों पर जाने के लिए यात्रियों को ऋषिकेश आना पड़ता है, जहां से उन्हें इन यात्रा मार्गों पर जाने के लिए सभी प्रकार के वाहन उपलब्ध रहते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/91217/chardham-has-special-importance-in-hindu-culture-other-places-of</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/91217/chardham-has-special-importance-in-hindu-culture-other-places-of</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Apr 2023 12:59:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2023-04/char-dham-yatra.jpg"                         length="94585"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भगवान बदरीविशाल को लेपन किए जाने वाले तिल तेल को सुहागिन महिलाओं ने निकाला</title>
                                    <description><![CDATA[27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर खुलेंगे, श्री बदरीनाथ धाम के कपाट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91169/suhagin-women-took-out-sesame-oil-to-be-applied-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/k12042023-03.jpg" alt=""></a><br /><p>ऋषिकेश, 12 अप्रैल (हि.स.)। बदरीनाथ मंदिर में भगवान को लेपन किए जाने के साथ ज्योत में जलने वाले तिल तेल को नरेंद्र नगर स्थित राजमहल में महारानी के साथ सुहागिन महिलाओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद पिरोया यानी निकाला।<br /><br />बुधवार की सुबह तिल तेल को निकाले जाने की प्रक्रिया राजा मनु जयेंद्र शाह और महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल की उपस्थिति में विधि विधान के साथ प्रारंभ हुई। इसे शाम को गाडू घड़े में भरकर राजदरबार से श्री बदरीनाथ धाम के लिए रवाना किया जाएगा। इसके बाद शाम को तेल कलश ऋषिकेश स्थित मंदिर समिति के चेला चेतराम धर्मशाला में रात्रि विश्राम के लिए पहुंचेगा। यहां श्री बदरीनाथ धाम गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा के लिए श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के पदाधिकारियों सहित प्रतिनिधिगण डिमरियों के मूल गांव डिम्मर से ऋषिकेश मंदिर समिति के चेला चेतराम धर्मशाला पहुंच गये हैं।<br /><br />श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति बीकेटीसी के सदस्य आशुतोष डिमरी ने बताया कि डिमरी धार्मिक पंचायत के पदाधिकारी प्रतिनिधि श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर डिम्मर सिमली-चमोली से रात्रि प्रवास के लिए ऋषिकेश पहुंच गये हैं, जो ऋषिकेश से डिमरी पंचायत प्रतिनिधि तेल कलश को नरेन्द्र नगर राजदरबार पहुंचे।<br /><br />उल्लेखनीय है कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान से खुल जायेंगे। ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, डिम्मर होते हुए तेल कलश यात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए 26 अप्रैल शाम को बदरीनाथ धाम पहुंच जायेगी। कपाट खुलने के अवसर पर गाडू घड़ा के तिलों के तेल से भगवान बदरीविशाल का छह माह तक यात्रा काल में अभिषेक किया जायेगा।<br /><br />पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष विनोद डिमरी ने बताया कि तेल कलश यात्रा प्रथम चरण में नरेन्द्र नगर राजदरबार से शुरू होकर रात्रि निवास को मंदिर समिति के चेला चेतराम धर्मशाला ऋषिकेश पहुंचेगी। 13 अप्रैल को प्रात: से दोपहर तक चेला चेतराम धर्मशाला ऋषिकेश में तेल कलश के दर्शन होंगे। भोग और पूजा के पश्चात 13 अप्रैल को तेल कलश श्रीनगर गढ़वाल रात्रि प्रवास को प्रस्थान करेगा।<br /><br />जबकि 14 अप्रैल को तेल कलश श्रीनगर से लक्ष्मी नारायण मंदिर डिम्मर पहुंचेगा। 23 अप्रैल तक श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर डिम्मर में तेल कलश की पूजा की जायेगी। द्वितीय चरण में 24 अप्रैल को तेल कलश श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगा। 25 अप्रैल को आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी सहित रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी के साथ गाडू घड़ा योग बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंचेगा।<br /><br />26 अप्रैल को पांडुकेश्वर से आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी और रावल जी के साथ ही श्री उद्धव जी श्री कुबेर जी के साथ गाडू घड़ा श्री बदरीनाथ धाम पहुंचेगा। 27 अप्रैल प्रात: सात बजकर 10 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं को दर्शनार्थ खुलेंगे।<br /><br />डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया कि ऋषिकेश में 13 अप्रैल प्रात: गाडू घड़ा तेल कलश मंदिर समिति के रेलवे रोड धर्मशाला में रखा जायेगा। डिमरी केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी सहित उपाध्यक्ष भाष्कर डिमरी, महामंत्री भगवती डिमरी, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष विनोद डिमरी आदि गाडू घड़ा यात्रा के लिए मंदिर समिति के चेला चेतराम धर्मशाला ऋषिकेश पहुंच गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/91169/suhagin-women-took-out-sesame-oil-to-be-applied-to</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/91169/suhagin-women-took-out-sesame-oil-to-be-applied-to</guid>
                <pubDate>Wed, 12 Apr 2023 14:19:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2023-04/k12042023-03.jpg"                         length="66263"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        