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                <title>Loan - Loktej</title>
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                <description>Loan RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बैंक की कर्ज वृद्धि में आ सकती है कमी, एनपीए बढ़ने की आशंका: क्रिसिल रेटिंग्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, 01 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने वित्त वर्ष </span>2026-27<span lang="hi" xml:lang="hi"> में बैंकों की ऋण वृद्धि में मामूली गिरावट और कर्ज लौटाने में चूक बढ़ने का अनुमान जताया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्रिसिल ने बुधवार को कहा कि बैंक </span>2026-27<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कर्ज में </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेंगे। यह वित्त वर्ष </span>2025-26<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लिए अनुमानित </span>14<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की तुलना में मामूली गिरावट है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (निष्पादित परिसंपत्तियां) अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं और मार्च</span>, 2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>0.20<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत बढ़कर </span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, 01 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने वित्त वर्ष </span>2026-27<span lang="hi" xml:lang="hi"> में बैंकों की ऋण वृद्धि में मामूली गिरावट और कर्ज लौटाने में चूक बढ़ने का अनुमान जताया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्रिसिल ने बुधवार को कहा कि बैंक </span>2026-27<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कर्ज में </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेंगे। यह वित्त वर्ष </span>2025-26<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लिए अनुमानित </span>14<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की तुलना में मामूली गिरावट है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (निष्पादित परिसंपत्तियां) अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं और मार्च</span>, 2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>0.20<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत बढ़कर </span>2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत तक हो सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य रेटिंग अधिकारी कृष्णन सीतारमण ने कहा कि सूक्ष्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लघु और मझोले उद्यमों को दिए गए ऋण पर नजर रखने की जरूरत है। खासकर उन छोटे उद्योगों के मामले में जिनका पश्चिम एशिया में बाजार है या फिर वे वहां से कच्चे माल लेते हैं। इसके साथ संपत्ति के बदले दिए गए छोटी राशि के कर्ज और कुछ बिना गारंटी वाले ऋण पर भी नजर रखने की जरूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने स्वीकार किया कि सेरेमिक और हीरा पॉलिश जैसे क्षेत्रों में इकाइयों को पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पहले ही प्रतिकूल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूछे जाने पर कि क्या पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर राहत पैकेज दिया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रिसिल के अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि राजकोषीय और मौद्रिक प्राधिकरण प्रतिकूल घटनाओं के बाद उद्योग के लिए उपयुक्त कदम उठा सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रेटिंग एजेंसी ने कहा कि युद्ध लंबा चलने पर ये उपाय लागू किए जा सकते हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राहत उपायों के सटीक प्रभाव का अनुमान लगाना फिलहाल कठिन है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">परिसंपत्ति की गुणवत्ता के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंकों द्वारा जमा जुटाने पर भी नजर रखने की जरूरत है क्योंकि यह ऋण वृद्धि को भी प्रभावित करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अंतिम ऋण वृद्धि बैंकों द्वारा जमा जुटाने के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/146363/there-may-be-a-decline-in-banks-loan-growth-fear</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 20:25:04 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>औसतन 25-28 साल की उम्र में ले रहे पहला कर्ज, ऋण लेने की औसत आयु 21 साल घटी: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="content-profession">
<p>नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) कर्ज लेने वाले ग्राहकों की औसत उम्र में कमी आई है। पहले औसतन 47 साल की उम्र में लोग कर्ज लेते थे, जबकि अब 25 से 28 साल की उम्र में ही कर्ज लेना शुरू हो जाता है। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>रिपोर्ट कहती है कि अब ग्राहक पिछली पीढ़ियों के मुकाबले औसतन 21 साल पहले कर्ज लेने लगे हैं।</p>
<p>उपभोक्ता कर्ज और मुफ्त ‘क्रेडिट स्कोर’ की सूचना देने वाले मंच 'पैसा बाजार' के इस अध्ययन के मुताबिक, ‘‘1960 के दशक में जन्मे उपभोक्ताओं ने औसतन 47 साल की उम्र</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140745/on-average-the-average-age-of-taking-the-first-loan"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/business-payment-cash-loan-banking.jpg" alt=""></a><br /><div class="content-profession">
<p>नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) कर्ज लेने वाले ग्राहकों की औसत उम्र में कमी आई है। पहले औसतन 47 साल की उम्र में लोग कर्ज लेते थे, जबकि अब 25 से 28 साल की उम्र में ही कर्ज लेना शुरू हो जाता है। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>रिपोर्ट कहती है कि अब ग्राहक पिछली पीढ़ियों के मुकाबले औसतन 21 साल पहले कर्ज लेने लगे हैं।</p>
<p>उपभोक्ता कर्ज और मुफ्त ‘क्रेडिट स्कोर’ की सूचना देने वाले मंच 'पैसा बाजार' के इस अध्ययन के मुताबिक, ‘‘1960 के दशक में जन्मे उपभोक्ताओं ने औसतन 47 साल की उम्र में अपना पहला कर्ज लिया। वहीं, 1990 के दशक में जन्मे उपभोक्ता कर्ज लेने की शुरूआत 25 से 28 वर्ष की उम्र में ही कर रहे हैं।"</p>
<p>इससे यह स्पष्ट होता है कि कर्ज मिलना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है और उपभोक्ता की सोच में भी बदलाव आया है।</p>
<p>पीबी फिनटेक समूह की इकाई पैसाबाजार ने इस रिपोर्ट में एक करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं के कर्ज लेने की प्रवृत्ति का विश्लेषण किया है।</p>
<p>पैसाबाजार की मुख्य उत्पाद अधिकारी राधिका बिनानी ने कहा, “आज के युवा उपभोक्ता ज्यादा जागरूक, महत्वाकांक्षी और डिजिटल रूप से सक्षम हैं। पहले की तुलना में वे न केवल जल्दी कर्ज ले रहे हैं बल्कि उसका अधिक आत्मविश्वास से और विभिन्न वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि किस तरह समय के साथ पूरा परिवेश बेहतर हुआ और कर्ज पहुंच आसान होती गयी है।</p>
<p>पैसाबाजार के अध्ययन के मुताबिक, कर्ज के लिए चुने जाने वाले उत्पादों में भी पीढ़ियों के बीच स्पष्ट बदलाव आया है। जहां पिछली पीढ़ियां आमतौर पर अपनी कर्ज की शुरूआत आवास ऋण या वाहन कर्ज जैसे सुरक्षित कर्जों से करती थीं, वहीं 1990 के दशक में जन्मे उपभोक्ता आमतौर पर 25 से 28 वर्ष की उम्र में असुरक्षित माने जाने वाले क्रेडिट कार्ड, व्यक्तिगत ऋण और टिकाऊ उपभोक्ता सामानों के लिए कर्ज ले रहे हैं।</p>
<p>अध्ययन के अनुसार, पहले लोग आवासीय ऋण को उम्रदराज होने पर लेते थे लेकिन अब युवावस्था में ही लोग कर्ज लेने लगे हैं। पहले घर के लिए कर्ज लेने की औसत उम्र 41 साल (1970 के दशक में जन्मे लोगों के लिए) हुआ करती थी, वहीं अब यह घटकर 28 वर्ष (1990 के दशक में जन्मे लोगों के लिए) हो गई है।</p>
<p>इसी तरह, कारोबार के लिए पहला कर्ज लेने की औसत उम्र भी 42 साल से घटकर 27 साल हो गई है। यह भारत में उद्यमशीलता की बढ़ती भावना और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) के लिए कर्ज उत्पादों तक आसान पहुंच को दर्शाती है।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/140745/on-average-the-average-age-of-taking-the-first-loan</link>
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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 20:12:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होम लोन पर 53,984 रुपए ईएमआई या 53,984 रुपए का सिप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्‍ली, 28 अप्रैल (वेब वार्ता)। मकान खरीदने वालों के लिए होम लोन लेने के बाद कई साल तक उसकी ईएमआई चुकाना टेढ़ी खीर होता है। कुछ ‎विशेषज्ञों का मानना है कि ईएमआई चुकाने से बेहतर है कि उतनी रकम का सिप खोला जाए और लोन के टेन्‍योर तक मकान खरीदने जितनी रकम तैयार की जा सकती है।</p>
<p>म्‍यूचुअल फंड का सिप और होम लोन की ईएमआई, लगभग एक जैसी ही चीज लगती है। सिप में भी आप एक निश्चित र‍कम हर महीने निवेश करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे होम लोन लेने के बाद उसकी ईएमआई हर महीने चुकाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140439/53984-emi-or-sip-of-rs-53984-on-home-loan"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/business-payment-cash-loan-banking.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्‍ली, 28 अप्रैल (वेब वार्ता)। मकान खरीदने वालों के लिए होम लोन लेने के बाद कई साल तक उसकी ईएमआई चुकाना टेढ़ी खीर होता है। कुछ ‎विशेषज्ञों का मानना है कि ईएमआई चुकाने से बेहतर है कि उतनी रकम का सिप खोला जाए और लोन के टेन्‍योर तक मकान खरीदने जितनी रकम तैयार की जा सकती है।</p>
<p>म्‍यूचुअल फंड का सिप और होम लोन की ईएमआई, लगभग एक जैसी ही चीज लगती है। सिप में भी आप एक निश्चित र‍कम हर महीने निवेश करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे होम लोन लेने के बाद उसकी ईएमआई हर महीने चुकाई जाती है।</p>
<p>अब अगर ईएमआई जितनी रकम को ही सिप में निवेश कर दिया जाए तो क्‍या लोन के टेन्‍योर जितने समय में ही होम लोन जितनी रकम तैयार की जा सकती है। मान लीजिए आपने 60 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए 9 फीसदी सालाना ब्‍याज दर पर लिया है।</p>
<p>इस पर आपको हर महीने 53,984 रुपये की ईएमआई चुकानी पड़ेगी और पूरे टेन्‍योर में ब्‍याज के रूप में 69,56,053 रुपये चुकाएंगे, जबकि 60 लाख मूलधन मिलाकर यह रकम 1.30 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगी। इसका मतलब हुआ कि आपने मकान तो 70 लाख का ही खरीदा, लेकिन उसके लिए दोगुनी रकम चुकानी पड़ जाती है।</p>
<p>अगर आप म्‍यूचुअल फंड के सिप में ईएमआई जितनी रकम 53,984 रुपये ही निवेश 20 साल के लिए शुरू किया जाए और इस पर सालाना 12 फीसदी का ब्‍याज मिलता है। इस दौरान 20 साल में आपका कुल निवेश 1,29,56,160 रुपये होगा, जिस पर ब्‍याज के रूप में 3,67,01,419 रुपये मिलेंगे और इस तरह मेच्‍योरिटी पर आपको कुल 4,96,57,579 रुपये की रकम मिल जाएगी।</p>
<p>इस आपने देखा कि ईएमआई जितनी रकम से ही आपने 20 साल में करीब 5 करोड़ रुपये जुटा लिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 21:29:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक-तिहाई डिजिटल भुगतान क्रेडिट कार्ड, मासिक किस्तों के जरिये हुएः रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) वर्ष 2024 में सभी घरेलू डिजिटल भुगतान लेनदेन में से करीब एक-तिहाई लेनदेन क्रेडिट कार्ड या ब्याज वाली मासिक किस्तों के जरिये किए गए थे। एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है।</p>
<p>डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनी फाई कॉमर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल भुगतान में यूपीआई एक परिवर्तनकारी उत्पाद बनकर उभरा है और कुल लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी 65 प्रतिशत हो चुकी है।</p>
<p>रिपोर्ट कहती है कि छोटे और मध्यम मूल्य वाले लेनदेन पर यूपीआई हावी है जबकि क्रेडिट कार्ड और ईएमआई (समान मासिक किस्त) का उपयोग बड़ी खरीदारी के लिए तेजी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140051/one-third-digital-payment-credit-cards-through-monthly-installments-report"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/7672_ecommerce-online-payment-credit-debit-card-shopping.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) वर्ष 2024 में सभी घरेलू डिजिटल भुगतान लेनदेन में से करीब एक-तिहाई लेनदेन क्रेडिट कार्ड या ब्याज वाली मासिक किस्तों के जरिये किए गए थे। एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है।</p>
<p>डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनी फाई कॉमर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल भुगतान में यूपीआई एक परिवर्तनकारी उत्पाद बनकर उभरा है और कुल लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी 65 प्रतिशत हो चुकी है।</p>
<p>रिपोर्ट कहती है कि छोटे और मध्यम मूल्य वाले लेनदेन पर यूपीआई हावी है जबकि क्रेडिट कार्ड और ईएमआई (समान मासिक किस्त) का उपयोग बड़ी खरीदारी के लिए तेजी से किया जा रहा है।</p>
<p>इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वाहन सहायक क्षेत्रों में डिजिटल ऋण लेने की दर में मजबूत वृद्धि देखी गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी खरीदारी, स्कूल में दाखिले और मौसमी रुझान क्रेडिट के इस्तेमाल में तेजी लाते हैं। इससे पता चलता है कि उपभोक्ता अधिक खर्च वाले समय में अल्पकालिक ऋण सुविधा का सहारा लेना पसंद करते हैं।</p>
<p>यह रिपोर्ट देश भर के 20,000 से अधिक दुकानदारों से ऑनलाइन भुगतान के बारे में जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।</p>
<p>फाई कॉमर्स के सह-संस्थापक राजेश लोंढे ने कहा कि यूपीआई और लचीले ऋण विकल्पों का इस्तेमाल आम होते जाने के साथ भविष्य उन लोगों का है जो समावेशी विकास और वित्तीय मजबूती को बढ़ावा देने के लिए इन साधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करते हैं।</p>
<p>मौजूदा समय में उपभोक्ता एकमुश्त भुगतान करने के बजाय अपने खर्च को वित्तपोषित करना पसंद करते हैं। यह खासकर शिक्षा (10 प्रतिशत), स्वास्थ्य सेवा (15 प्रतिशत) और वाहन सहायक व्यय (15 प्रतिशत) में स्पष्ट है, जहां बड़ी खरीदारी तेजी से ईएमआई और संरचित क्रेडिट विकल्पों के जरिये की जाती है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल की फीस, इलाज पर खर्च और बड़ी ऑनलाइन खरीद के लिए ईएमआई योजनाओं पर निर्भरता ग्राहकों के वित्तीय व्यवहार में बदलाव को दर्शाती है। अब वे चरणबद्ध ढंग से खर्च और उसके प्रबंधन पर ध्यान देते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/140051/one-third-digital-payment-credit-cards-through-monthly-installments-report</link>
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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 20:55:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जियो फाइनेंस ने लॉन्च किया डिजिटल लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज, 10 मिनट में मिलेगा 1 करोड़ तक का लोन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 9 अप्रैल 2025: जियो फाइनेंस लिमिटेड (जेएफएल), जो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का एक हिस्सा है, ने डिजिटल लोन के क्षेत्र में एक नया कदम उठाया है। कंपनी ने 'लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज' (एलएएस) नामक एक नई सेवा शुरू की है, जिसके तहत ग्राहक अपने शेयरों और म्यूचुअल फंड्स के बदले लोन ले सकते हैं। इस सेवा के जरिए ग्राहकों को जियो फाइनेंस ऐप के माध्यम से मात्र 10 मिनट में 1 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता है।</p>
<p>जियो फाइनेंस ने इस नई पेशकश को पूरी तरह डिजिटल बनाया है, जिसमें न्यूनतम 9.99% की ब्याज दर और अधिकतम 3</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139960/jio-finance-launched-digital-loan-against-securities-loans-up-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/business-payment-cash-loan-banking.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 9 अप्रैल 2025: जियो फाइनेंस लिमिटेड (जेएफएल), जो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का एक हिस्सा है, ने डिजिटल लोन के क्षेत्र में एक नया कदम उठाया है। कंपनी ने 'लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज' (एलएएस) नामक एक नई सेवा शुरू की है, जिसके तहत ग्राहक अपने शेयरों और म्यूचुअल फंड्स के बदले लोन ले सकते हैं। इस सेवा के जरिए ग्राहकों को जियो फाइनेंस ऐप के माध्यम से मात्र 10 मिनट में 1 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता है।</p>
<p>जियो फाइनेंस ने इस नई पेशकश को पूरी तरह डिजिटल बनाया है, जिसमें न्यूनतम 9.99% की ब्याज दर और अधिकतम 3 साल की अवधि का विकल्प दिया गया है। खास बात यह है कि इस लोन में कोई फोरक्लोजर चार्ज नहीं लिया जाएगा, जिससे ग्राहकों को लचीलापन मिलेगा। यह कदम जियो फाइनेंस के डिजिटल लेंडिंग इकोसिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>जियो फाइनेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ कुसल रॉय ने इस लॉन्च के बारे में कहा, "लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज हमारी व्यापक डिजिटल रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को उनकी वित्तीय जरूरतों के लिए तेज, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित समाधान प्रदान करना है। हमारा लक्ष्य जियो फाइनेंस ऐप को एक ऐसा मंच बनाना है, जहां ग्राहक लोन, बीमा, भुगतान, और निवेश जैसे सभी वित्तीय सेवाओं का लाभ एक ही जगह उठा सकें।"</p>
<p>भारत में डिजिटल लेंडिंग मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, और जियो फाइनेंस इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डिजिटल लेंडिंग मार्केट 2024 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें छोटे शहरों से मांग में वृद्धि देखी जा रही है। जियो फाइनेंस की यह नई सेवा निवेशकों को अपनी संपत्ति बेचे बिना त्वरित नकदी प्राप्त करने का एक आसान और सुरक्षित तरीका प्रदान करती है।</p>
<p>जियो फाइनेंस पहले से ही होम लोन और म्यूचुअल फंड लोन जैसी सेवाएं प्रदान कर रही है, और अब लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज के साथ कंपनी अपने पोर्टफोलियो को और विस्तार दे रही है। यह कदम न केवल जियो फाइनेंस की फिनटेक क्षेत्र में स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।</p>
<p>जियो फाइनेंस की इस नई पहल से उन निवेशकों को फायदा होगा जो अपनी संपत्ति को बरकरार रखते हुए तुरंत धन की जरूरत को पूरा करना चाहते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सेवा डिजिटल लेंडिंग मार्केट में कितना बदलाव लाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Apr 2025 08:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऋण गारंटी कोष योजना से 2024 तक 6.78 लाख छात्रों को लाभ मिला: प्रधान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि केंद्र ने ऋण गारंटी कोष योजना के तहत वर्ष 2024 तक 6.78 लाख छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए 3,019 करोड़ रुपये मंजूर किए।</p>
<p>योजना के तहत, केंद्र सरकार छात्रों को बिना किसी गिरवी आदि (कोलेटरल सिक्योरिटी) के शिक्षा ऋण की गारंटी देती है।</p>
<p>उन्होंने लोकसभा में कहा, ‘‘31 दिसंबर 2024 तक 6.78 लाख छात्रों को ऋण गारंटी कोष योजना के तहत 3,019 करोड़ रुपये दिए गए हैं।’’</p>
<p>प्रधान ने कहा कि ‘पीएम विद्यालक्ष्मी’ पहल के तहत, केंद्र मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान कर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/131781/6-78-lakh-students-benefited-from-loan-guarantee-fund-scheme-by-2024--principal"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/business-payment-cash-loan-banking.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि केंद्र ने ऋण गारंटी कोष योजना के तहत वर्ष 2024 तक 6.78 लाख छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए 3,019 करोड़ रुपये मंजूर किए।</p>
<p>योजना के तहत, केंद्र सरकार छात्रों को बिना किसी गिरवी आदि (कोलेटरल सिक्योरिटी) के शिक्षा ऋण की गारंटी देती है।</p>
<p>उन्होंने लोकसभा में कहा, ‘‘31 दिसंबर 2024 तक 6.78 लाख छात्रों को ऋण गारंटी कोष योजना के तहत 3,019 करोड़ रुपये दिए गए हैं।’’</p>
<p>प्रधान ने कहा कि ‘पीएम विद्यालक्ष्मी’ पहल के तहत, केंद्र मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है ताकि वित्तीय बाधाएं किसी को भी उच्च अध्ययन करने से न रोकें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 15:12:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्रेडिट कार्ड बकाया पर 30 प्रतिशत से अधिक ब्याज वसूल सकते हैं बैंकः उच्चतम न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 26 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के 16 साल पुराने एक फैसले को खारिज कर दिया है जिसके बाद बैंक ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड बकाया पर 30 प्रतिशत से अधिक ब्याज वसूल सकते हैं।</p>
<p>एनसीडीआरसी ने अपने फैसले में कहा था कि क्रेडिट कार्ड बकाये पर ग्राहकों से अत्यधिक ब्याज दर वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार है।</p>
<p>यह फैसला सिटीबैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस, एचएसबीसी और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक द्वारा एनडीसीआरसी के सात जुलाई, 2008 के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर आया है। आयोग ने कहा था कि क्रेडिट कार्ड बकाये पर 36 प्रतिशत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/114782/banks-can-charge-more-than-30-percent-interest-on-credit-card-dues--supreme-court"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/7672_ecommerce-online-payment-credit-debit-card-shopping.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 26 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के 16 साल पुराने एक फैसले को खारिज कर दिया है जिसके बाद बैंक ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड बकाया पर 30 प्रतिशत से अधिक ब्याज वसूल सकते हैं।</p>
<p>एनसीडीआरसी ने अपने फैसले में कहा था कि क्रेडिट कार्ड बकाये पर ग्राहकों से अत्यधिक ब्याज दर वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार है।</p>
<p>यह फैसला सिटीबैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस, एचएसबीसी और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक द्वारा एनडीसीआरसी के सात जुलाई, 2008 के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर आया है। आयोग ने कहा था कि क्रेडिट कार्ड बकाये पर 36 प्रतिशत से 49 प्रतिशत प्रति वर्ष तक की ब्याज दरें बहुत अधिक हैं और उधारकर्ताओं के शोषण की तरह हैं।</p>
<p>न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि एनसीडीआरसी की यह टिप्पणी अवैद्य है और भारतीय रिजर्व बैंक की शक्तियों के स्पष्ट, सुस्पष्ट प्रत्यायोजन में हस्तक्षेप है।</p>
<p>न्यायालय ने कहा कि आयोग का 30 प्रतिशत से अधिक ब्याज दर न लेने के बारे में दिया गया निर्णय बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के विधायी उद्देश्य के विपरीत है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने 20 दिसंबर के अपने फैसले में कहा कि बैंकों ने क्रेडिट कार्ड धारकों को धोखा देने के लिए किसी भी तरह से कोई गलतबयानी नहीं की थी और भ्रामक व्यवहार एवं अनुचित तौर-तरीकों की पूर्व-शर्तें नदारद थीं।</p>
<p>न्यायालय ने कहा कि एनसीडीआरसी के पास बैंकों तथा क्रेडिट कार्ड धारकों के बीच किए गए अनुबंध की उन शर्तों को फिर से तय करने का कोई अधिकार नहीं है जिसपर दोनों पक्षों ने आपसी सहमति जताई थी।</p>
<p>पीठ ने कहा, हम भारतीय रिजर्व बैंक की इन दलीलों से सहमत हैं कि वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में किसी भी बैंक के विरुद्ध कार्रवाई करने का आरबीआई को निर्देश देने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। </p>
<p>इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम के प्रावधानों और उसके तहत जारी परिपत्रों/ निर्देशों के उलट समूचे बैंकिंग क्षेत्र या किसी एक बैंक को ब्याज दर पर सीमा लगाने का रिजर्व बैंक को निर्देश देने का सवाल नहीं उठता है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग को एकतरफा ढंग से लगाए गए या अनुचित एवं अविवेकपूर्ण शर्तें रखने वाले अनुचित अनुबंधों को रद्द करने का पूरा अधिकार है। लेकिन बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की दर वित्तीय विवेक और आरबीआई निर्देशों से तय होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/114782/banks-can-charge-more-than-30-percent-interest-on-credit-card-dues--supreme-court</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 17:42:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गैर-विनियमित कर्ज पर अंकुश के लिए विधेयक का मसौदा तैयार, कारावास का भी प्रावधान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बिना नियमन वाले कर्ज पर अंकुश लगाने और उल्लंघन करने वालों के लिए मौद्रिक दंड के अलावा 10 साल तक की सजा का प्रावधान करने वाले एक नए विधेयक का प्रस्ताव रखा है।</p>
<p>बीयूएलए (गैर-विनियमित ऋण गतिविधियों पर प्रतिबंध) शीर्षक वाले विधेयक के मसौदे पर हितधारकों को 13 फरवरी, 2025 तक टिप्पणियां देने के लिए कहा गया है।</p>
<p>प्रस्तावित विधेयक में भारतीय रिजर्व बैंक या अन्य नियामकों की तरफ से अधिकृत नहीं किए गए और किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत नहीं हुए सभी व्यक्तियों या संस्थाओं को सार्वजनिक उधारी कारोबार से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/112510/draft-bill-prepared-to-curb-unregulated-lending--provision-for-imprisonment-also"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/business-payment-cash-loan-banking.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बिना नियमन वाले कर्ज पर अंकुश लगाने और उल्लंघन करने वालों के लिए मौद्रिक दंड के अलावा 10 साल तक की सजा का प्रावधान करने वाले एक नए विधेयक का प्रस्ताव रखा है।</p>
<p>बीयूएलए (गैर-विनियमित ऋण गतिविधियों पर प्रतिबंध) शीर्षक वाले विधेयक के मसौदे पर हितधारकों को 13 फरवरी, 2025 तक टिप्पणियां देने के लिए कहा गया है।</p>
<p>प्रस्तावित विधेयक में भारतीय रिजर्व बैंक या अन्य नियामकों की तरफ से अधिकृत नहीं किए गए और किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत नहीं हुए सभी व्यक्तियों या संस्थाओं को सार्वजनिक उधारी कारोबार से प्रतिबंधित करने की संकल्पना रखी गई है।</p>
<p>विधेयक के मसौदे में ‘गैर-विनियमित ऋण गतिविधियों’ को ऐसे कर्ज के रूप में परिभाषित किया गया है जो विनियमित ऋण को नियंत्रित करने वाले किसी भी कानून के दायरे में नहीं आते हैं, चाहे वे डिजिटल रूप से किए गए हों या अन्य माध्यमों से।</p>
<p>इसमें रिश्तेदारों को कर्ज को छोड़कर अन्य किसी भी गैर-विनियमित ऋण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने और उधारकर्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए एक व्यापक तंत्र बनाने के लिए एक अधिनियम लाने की बात कही गई है।</p>
<p>इसमें यह भी कहा गया है कि अगर कोई भी ऋणदाता इस कानून का उल्लंघन करते हुए, चाहे डिजिटल रूप से या अन्यथा, ऋण देता है तो उसे कम-से-कम दो साल की कैद की सजा होगी जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा उसपर दो लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।</p>
<p>प्रस्तावित विधेयक में कर्जदारों को परेशान करने या कर्ज वसूली के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करने वाले कर्जदाताओं को तीन से लेकर 10 साल तक की कैद और जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है।</p>
<p>इस विधेयक के मसौदे के मुताबिक, अगर ऋणदाता, उधारकर्ता या संपत्ति कई राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में स्थित है या कुल राशि सार्वजनिक हित को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने के लिए पर्याप्त रूप से बड़ी है तो जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी जाएगी।</p>
<p>डिजिटल उधारी पर गठित आरबीआई के कार्यसमूह ने नवंबर, 2021 में पेश अपनी रिपोर्ट में गैर-विनियमित उधारी पर अंकुश लगाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की बात कही थी।</p>
<p>कार्यसमूह ने बिना नियमन वाले कर्ज पर प्रतिबंध लगाने के लिए नया कानून लाने जैसे कई उपाय सुझाए थे।</p>
<p>दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें भोले-भाले लोगों को धोखाधड़ी वाले ऋण ऐप के जरिये ठगा गया है। कुछ मामलों में जबरन वसूली के तरीके अपनाए जाने से दुखी होकर कई कर्जदारों ने आत्महत्या भी कर ली।</p>
<p>इनके प्रसार पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि वे धोखाधड़ी वाले ऋण ऐप के विज्ञापन न दिखाएं।</p>
<p>इसके बाद गूगल ने सितंबर, 2022 और अगस्त, 2023 के बीच अपने प्ले स्टोर से इस तरह के 2,200 से अधिक ऋण ऐप हटा दिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/112510/draft-bill-prepared-to-curb-unregulated-lending--provision-for-imprisonment-also</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2024 12:43:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई ने बिना गारंटी के कृषि ऋण की सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपये की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक जनवरी, 2025 से किसानों के लिए बिना गारंटी के ऋण की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी है।</p>
<p>यह कदम खेती की बढ़ती लागत के बीच छोटे और सीमांत किसानों की सहायता करने के लिए उठाया गया है।</p>
<p>नए निर्देश में देशभर के बैंकों से प्रत्येक उधारकर्ता के लिए दो लाख रुपये तक के कृषि और संबद्ध गतिविधि ऋण के लिए जमानत और मार्जिन आवश्यकताओं को माफ करने को कहा गया है।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला बढ़ती लागत और किसानों के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110207/rbi-increased-the-limit-of-agricultural-loan-without-guarantee-to-rs-2-lakh"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक जनवरी, 2025 से किसानों के लिए बिना गारंटी के ऋण की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी है।</p>
<p>यह कदम खेती की बढ़ती लागत के बीच छोटे और सीमांत किसानों की सहायता करने के लिए उठाया गया है।</p>
<p>नए निर्देश में देशभर के बैंकों से प्रत्येक उधारकर्ता के लिए दो लाख रुपये तक के कृषि और संबद्ध गतिविधि ऋण के लिए जमानत और मार्जिन आवश्यकताओं को माफ करने को कहा गया है।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला बढ़ती लागत और किसानों के लिए ऋण पहुंच में सुधार के लिए लिया गया है।</p>
<p>बयान में कहा गया, ''इस उपाय से छोटे और सीमांत भूमिधारक 86 प्रतिशत से अधिक किसानों को काफी लाभ होगा।''</p>
<p>बैंकों को दिशानिर्देशों को तेजी से लागू करने और नए ऋण प्रावधानों के बारे में व्यापक जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p>इस कदम से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण तक आसान पहुंच की सुविधा मिलने की उम्मीद है और यह सरकार की संशोधित ब्याज सहायता योजना का पूरक होगा। इस योजना के तहत सरकार चार प्रतिशत प्रभावी ब्याज दर पर तीन लाख रुपये तक का ऋण देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 13:38:00 +0530</pubDate>
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                <title>कार की किस्त चुकाने में हुई देरी तो आ सकती है समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कार खरीदना हर किसी का सपना होता है। लोग कार खरीदने के लिए बचत करते हैं और जरूरत पड़ने पर कर्ज भी ले लेते हैं। कई बार लोग अपने बजट से बाहर जाकर कार खरीद लेते हैं। जिससे उन्हें कर्ज की ईएमआई चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कार लोन लेते समय बैंक कार को गिरवी रखता है। ऋण का भुगतान न करने पर आपकी कार बैंक द्वारा वापस ले ली जाती है। इसका आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर भी बुरा असर पड़ता है। आइये जानते हैं कि अगर आप समय पर अपने कार की क़िस्त नहीं चुका पाते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>कार खरीदना हर किसी का सपना होता है। लोग कार खरीदने के लिए बचत करते हैं और जरूरत पड़ने पर कर्ज भी ले लेते हैं। कई बार लोग अपने बजट से बाहर जाकर कार खरीद लेते हैं। जिससे उन्हें कर्ज की ईएमआई चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कार लोन लेते समय बैंक कार को गिरवी रखता है। ऋण का भुगतान न करने पर आपकी कार बैंक द्वारा वापस ले ली जाती है। इसका आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर भी बुरा असर पड़ता है। आइये जानते हैं कि अगर आप समय पर अपने कार की क़िस्त नहीं चुका पाते तो आपको कौन कौन सी समस्या से जूझना पड़ सकता है। </p>
<p><strong>क्रेडिट स्कोर पर असर</strong></p>
<p>यदि समय पर ईएमआई का भुगतान नहीं किया जाता है, तो यह सीधे आपके क्रेडिट प्रोफाइल को प्रभावित करता है। आपका क्रेडिट जल्दी डाउन हो जाता है और क्रेडिट हिस्ट्री पर भी बुरा असर पड़ता है।</p>
<p><strong>अतिरिक्त ब्याज और दंड</strong></p>
<p>अगर कार की ईएमआई देर से चुकाई जाती है तो देरी की वजह से ब्याज और पेनल्टी लग सकती है। जिससे आप पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>वसूली के लिए फोन कॉल</strong></p>
<p>ऋण भुगतान न करने के नोटिस के बाद बैंकों और वित्त कंपनियों से रिकवरी कॉल और एसएमएस भी आ सकते हैं, जिससे तनाव या अन्य कठिनाइयाँ हो सकती हैं।</p>
<p><strong>कानूनी नोटिस</strong></p>
<p>लोन की ईएमआई में देरी या भुगतान न करने पर भी बैंक या फाइनेंस कंपनी की ओर से कानूनी नोटिस भेजा जा सकता है। जिससे आपका खाता एनपीए भी घोषित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/91098/delay-in-paying-the-installment-of-the-car-can-be</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Apr 2023 23:38:46 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
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