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                <description>Tiger RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सूरत : सरथाना नेचर पार्क में बाघ और बाघिन का आगमन, जानिए कब देख पाएंगे विज़िटर्स नई रॉयल जोड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत। सूरत के वाइल्डलाइफ़ प्रेमियों के लिए एक खुशी की खबर है। ओडिशा के भुवनेश्वर से लाए गए बाघ और बाघिन के जोड़े को मंगलवार, 10 फरवरी को सरथाना स्थित डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ज़ूलॉजिकल गार्डन (नेचर पार्क) में डिस्प्ले के लिए रखा जाएगा। हालांकि, विज़िटर्स इस जोड़ी को क्वारंटाइन पीरियड पूरा होने के बाद ही करीब से देख सकेंगे।</p>
<p>सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित नेचर पार्क में ‘एनिमल एक्सचेंज स्कीम’ के तहत भुवनेश्वर के प्रसिद्ध नंदनकानन ज़ूलॉजिकल गार्डन से इस बाघ और बाघिन के जोड़े को लाया गया है। बाघ का नाम ‘अभय’ और बाघिन का नाम ‘श्री’ बताया गया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145498/arrival-of-tiger-and-tigress-in-surat-sarthana-nature-park"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-02/b09022026-02.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। सूरत के वाइल्डलाइफ़ प्रेमियों के लिए एक खुशी की खबर है। ओडिशा के भुवनेश्वर से लाए गए बाघ और बाघिन के जोड़े को मंगलवार, 10 फरवरी को सरथाना स्थित डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ज़ूलॉजिकल गार्डन (नेचर पार्क) में डिस्प्ले के लिए रखा जाएगा। हालांकि, विज़िटर्स इस जोड़ी को क्वारंटाइन पीरियड पूरा होने के बाद ही करीब से देख सकेंगे।</p>
<p>सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित नेचर पार्क में ‘एनिमल एक्सचेंज स्कीम’ के तहत भुवनेश्वर के प्रसिद्ध नंदनकानन ज़ूलॉजिकल गार्डन से इस बाघ और बाघिन के जोड़े को लाया गया है। बाघ का नाम ‘अभय’ और बाघिन का नाम ‘श्री’ बताया गया है। दोनों ने लगभग 48 घंटे में भुवनेश्वर से सूरत तक करीब 1675 किलोमीटर की लंबी यात्रा पूरी की है।</p>
<p>क्यों ज़रूरी है क्वारंटाइन पीरियड?</p>
<p>आमतौर पर क्वारंटाइन शब्द इंसानों से जोड़ा जाता है, लेकिन चिड़ियाघरों के नियमों के अनुसार, जब किसी जानवर को एक राज्य से दूसरे राज्य में लाया जाता है, तो उसे नए वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए क्वारंटाइन में रखा जाता है।</p>
<p>नेचर पार्क की अधिकारी हिना पटेल ने बताया कि भुवनेश्वर और सूरत के मौसम व वातावरण में काफी अंतर है। लंबी यात्रा की थकान के बाद जानवरों को करीब 45 दिनों के क्वारंटाइन में रखा जाता है, ताकि वे नए माहौल में ढल सकें और उनकी सेहत पर लगातार निगरानी रखी जा सके।</p>
<p>कब बनेंगे विज़िटर्स के आकर्षण का केंद्र?</p>
<p>बाघ और बाघिन को डिस्प्ले एरिया में लाने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू की जाएगी। फिलहाल यह जोड़ी विशेष निगरानी में रखी गई है। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद यह रॉयल जोड़ी सरथाना नेचर पार्क में आने वाले विज़िटर्स के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 15:41:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यटकों के लिए फिर खोले गए दुधवा बाघ अभयारणय के दरवाजे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लखीमपुर खीरी (उप्र), एक नवंबर (भाषा) दुधवा बाघ अभयारणय (डीटीआर) के दरवाजे शीतकालीन सत्र के तहत शनिवार को पर्यटकों के लिये खोल दिये गये। उत्तर प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री डॉक्टर अरुण कुमार सक्सेना ने इसकी शुरुआत की।</p>
<p>आमतौर पर डीटीआर को शीतकालीन सत्र के तहत 15 नवंबर को खोला जाता था, लेकिन इस बार इसे एक नवंबर को ही खोल दिया गया है।</p>
<p>मंत्री सक्सेना ने डीटीआर को जल्दी खोले जाने को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पर्यटकों के लिए ‘दीपावली का उपहार’ बताया।</p>
<p>हालांकि इस बार पर्यटकों को डीटीआर में घूमने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143838/doors-of-dudhwa-tiger-sanctuary-reopened-for-tourists"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/3285_tiger.jpg" alt=""></a><br /><p>लखीमपुर खीरी (उप्र), एक नवंबर (भाषा) दुधवा बाघ अभयारणय (डीटीआर) के दरवाजे शीतकालीन सत्र के तहत शनिवार को पर्यटकों के लिये खोल दिये गये। उत्तर प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री डॉक्टर अरुण कुमार सक्सेना ने इसकी शुरुआत की।</p>
<p>आमतौर पर डीटीआर को शीतकालीन सत्र के तहत 15 नवंबर को खोला जाता था, लेकिन इस बार इसे एक नवंबर को ही खोल दिया गया है।</p>
<p>मंत्री सक्सेना ने डीटीआर को जल्दी खोले जाने को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पर्यटकों के लिए ‘दीपावली का उपहार’ बताया।</p>
<p>हालांकि इस बार पर्यटकों को डीटीआर में घूमने के लिए ज्यादा शुल्क देना होगा।</p>
<p>दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन (डीटीसीएफ) के शासी निकाय ने शुक्रवार शाम को एक बैठक में शुल्क वृद्धि का फैसला लिया।</p>
<p>डीटीआर में प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये कर दिया गया है। गैंडा विचरण क्षेत्र में भ्रमण शुल्क 150 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है और कैमरा शुल्क 100 रुपये से दोगुना करके 200 रुपये कर दिया गया है।</p>
<p>मंत्री सक्सेना ने इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि दुधवा सफारी के लिए दो नए जंगल मार्ग बनाए गए हैं। इनमे एक कतर्नियाघाट में निशानगढ़ा के पास और दूसरा, दुधवा में रूट संख्या-23 है। इससे पर्यटकों को वन्यजीवों को बेहतर तरीके से देखने के अधिक विकल्प मिलेंगे।</p>
<p>मंत्री ने यह भी कहा कि ज्यादा संख्या में पर्यटकों को उचित दरों पर आवास उपलब्ध कराने के लिए अभयारण्य में आवास सुविधाओं में वृद्धि की जाएगी।</p>
<p>लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित डीटीआर में रॉयल बंगाल टाइगर्स, जंगली हाथियों, एक सींग वाले गैंडों, दलदली हिरणों, सरीसृप और पक्षियों की कई प्रजातियां पायी जाती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 20:24:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाघों की गणना के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ऋषिकेश, 24 सितंबर (भाषा) पूरे देश में बाघों की 2026 में अनुमानित संख्या तथा उससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के सटीक एवं वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्लूआईआई) ने जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है।</p>
<p>संस्थान के निदेशक गोविन्द एस भारद्वाज ने बताया कि देश में छठी बार हो रही बाघों की गणना का कार्य केंद्रीय वन मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देश पर संस्थान द्वारा किया जा रहा है ।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ‘टाइगर लैंड स्केप’ में आने वाले वन प्रभाग के अग्रिम पंक्ति के वन कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143255/work-starts-at-the-ground-level-to-calculate-tigers"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>ऋषिकेश, 24 सितंबर (भाषा) पूरे देश में बाघों की 2026 में अनुमानित संख्या तथा उससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के सटीक एवं वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्लूआईआई) ने जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है।</p>
<p>संस्थान के निदेशक गोविन्द एस भारद्वाज ने बताया कि देश में छठी बार हो रही बाघों की गणना का कार्य केंद्रीय वन मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देश पर संस्थान द्वारा किया जा रहा है ।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ‘टाइगर लैंड स्केप’ में आने वाले वन प्रभाग के अग्रिम पंक्ति के वन कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण का कार्यक्रम शुरू हो चुका है ।</p>
<p>भारद्वाज ने बताया कि इसी माह 15-16 सितंबर को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पेंच बाघ अभयारण्य में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें मध्य और पश्चिम भारत के बाघ की मौजूदगी वाले राज्यों के प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया ।</p>
<p>भारद्वाज ने बताया कि प्रशिक्षण का दूसरा चरण 24-25 सितंबर को दक्षिण के राज्यों के लिए मुद्दु मलाई बाघ अभयारण्य और बांदीपुर बाघ अभयारण्य में होगा जबकि तीसरा चरण 28 से 30 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के विश्व धरोहर स्थल सुंदरबन बाघ अभयारण्य में होगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि चौथा चरण 18 से 20 नवंबर को उत्तर भारत के राज्यों के लिए उत्तराखंड के राजाजी बाघ अभयारण्य में तथा पूर्वोत्तर के लिए असम के नमेरी बाघ अभयारण्य में होगा ।</p>
<p>निदेशक के मुताबिक, प्रशिक्षण में बताया जा रहा है कि बाघ गणना के लिए चिन्हित वन क्षेत्रों में बाघ के अलावा अन्य सह शिकारी जीवों, शिकार की प्रजातियों, परिमार्जक जीवों, पारिस्थितिकीय तंत्र सहित आश्रय स्थल की गुणवत्ता आदि की स्थिति के बारे में भी जानकारी इकट्ठा करनी है ।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस बार देश की ‘टाइगर टास्क फोर्स’ के निर्देश पर चिन्हित वन क्षेत्रों में डबल सैंपलिंग विधि प्रयोग में लाई जाएगी।</p>
<p>भारद्वाज ने बताया कि इसके अलावा, कैमरा ट्रैपिंग सहित पूरी प्रक्रिया को पारदर्शिता और सटीकता के साथ पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143255/work-starts-at-the-ground-level-to-calculate-tigers</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 21:19:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्लोबल टाइगर डे: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पहुंचे दिल्ली के चिड़ियाघर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 29 जुलाई (वेब वार्ता)। ग्लोबल टाइगर डे के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में स्कूली बच्चों के साथ उत्सव मनाया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का महत्व बताया।</p>
<p>उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सभी से अपने घर और आसपास के क्षेत्र में कम से कम एक पेड़ लगाने की अपील की, ताकि पर्यावरण को स्वच्छ और हरित बनाया जा सके।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142230/global-tiger-day-union-mi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 29 जुलाई (वेब वार्ता)। ग्लोबल टाइगर डे के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में स्कूली बच्चों के साथ उत्सव मनाया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का महत्व बताया।</p>
<p>उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सभी से अपने घर और आसपास के क्षेत्र में कम से कम एक पेड़ लगाने की अपील की, ताकि पर्यावरण को स्वच्छ और हरित बनाया जा सके।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2014 में जहां देश में 47 टाइगर रिजर्व थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 58 हो गई है। न केवल बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके संरक्षित क्षेत्रों का भी विस्तार किया गया है।</p>
<p>भारत अब अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस के तहत 97 देशों के साथ मिलकर बाघ संरक्षण, जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरण-पर्यटन और ज्ञान साझा करने की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस अवसर पर दिल्ली के चिड़ियाघर में एक सप्ताह तक चलने वाली बाघ संरक्षण पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से स्कूली बच्चों को बाघों और उनकी सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जा रहा है।</p>
<p>साथ ही, उन्हें प्रकृति और आदिवासी संस्कृति के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को चिड़ियाघर का भ्रमण कराकर प्रकृति के प्रति उनके मन में जागरूकता पैदा करने का कार्य भी किया गया।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत देश के 58 टाइगर रिजर्व में दो लाख पेड़ लगाए गए हैं। इसके अलावा, अरावली क्षेत्र के 29 जिलों में देशी प्रजातियों के पेड़ों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली नर्सरियां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p>इस दिशा में तीन नर्सरियों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया गया। अरावली को हरा-भरा करने का यह अभियान प्रधानमंत्री के संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत 5 जून को दिल्ली में वृक्षारोपण कार्यक्रम शुरू किया गया था।</p>
<p>भूपेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक विरासत को विकास के साथ संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बाघ संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए चल रहे वैश्विक अभियानों के सकारात्मक परिणामों पर भी प्रकाश डाला। इस आयोजन ने बच्चों और आम लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/142230/global-tiger-day-union-mi</link>
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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 15:29:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन 'रानी' ने एक साथ पांच शावकों को दिया जन्म, देश में बना रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर, 01 जुलाई (वेब वार्ता)। राजस्थान के जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन ‘रानी’ ने एक साथ पांच शावकों को जन्म देकर देश में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पहली बार है जब किसी बाघिन ने भारत में एक साथ पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। पार्क प्रशासन ने मंगलवार को शावकों के बाबत जानकारी साझा करते हुए इनके फोटो और वीडियो जारी किए हैं। </p>
<p>पार्क के सीनियर पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि बाघिन ‘रानी’ ने 27 अप्रैल 2025 को दो मादा और तीन नर शावकों को जन्म दिया था। दो माह के संरक्षण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141658/in-nahargarh-biologica-park-in-rajasthan-tigress-queen-gave-birlth"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर, 01 जुलाई (वेब वार्ता)। राजस्थान के जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन ‘रानी’ ने एक साथ पांच शावकों को जन्म देकर देश में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पहली बार है जब किसी बाघिन ने भारत में एक साथ पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। पार्क प्रशासन ने मंगलवार को शावकों के बाबत जानकारी साझा करते हुए इनके फोटो और वीडियो जारी किए हैं। </p>
<p>पार्क के सीनियर पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि बाघिन ‘रानी’ ने 27 अप्रैल 2025 को दो मादा और तीन नर शावकों को जन्म दिया था। दो माह के संरक्षण और देखभाल के बाद अब इन्हें मां रानी के साथ कराल (ओपन एनक्लोजर) में छोड़ा गया है, जहां वे मानसून के मौसम का आनंद ले रहे हैं। अब पार्क में आने वाले पर्यटक रानी और उसके नन्हें शावकों का दीदार कर सकेंगे।</p>
<p>डॉ. माथुर ने बताया कि सभी शावकों को बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीनेट किया गया है। पहचान के लिए उनका लिंग परीक्षण भी किया गया, जिसमें एक सफेद और दो गोल्डन शावक नर हैं, जबकि शेष दो गोल्डन शावक मादा हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि शावकों को अब नियमित रूप से खुले कराल में मां के साथ रखा जाएगा ताकि वे प्राकृतिक परिवेश में खेलने, मिट्टी से संपर्क और सामाजिक व्यवहार को विकसित कर सकें। इससे उनकी शारीरिक और मानसिक ग्रोथ बेहतर होगी। अगस्त में इन्हें बूस्टर डोज भी दी जाएगी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि रानी ने इससे पहले 10 मई 2024 को तीन शावकों को जन्म दिया था, जिनमें से एक की मृत्यु हो गई थी। शेष दो शावक आज भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और पार्क में दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।</p>
<p>बाघिन रानी और उसके शावकों की देखभाल के लिए पार्क प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए। गर्मी से राहत के लिए कलर स्प्रे, टाट की बोरियों, और विशेष आहार की व्यवस्था की गई। पार्क स्टाफ की सतत निगरानी में रानी और उसके सभी शावक स्वस्थ हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 15:38:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>त्रिपुरा के चिड़ियाघर में पहली बार तीन बाघ शावकों का जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अगरतला, 19 मई (वेब वार्ता)। त्रिपुरा के सिपाहीजाला चिड़ियाघर में पहली बार तीन बाघ शावकों का जन्म हुआ है। राज्य का यह एकमात्र चिड़ियाघर 1972 में स्थापित किया गया था।</p>
<p>चिड़ियाघर के निदेशक विश्वजीत दास ने बताया कि यह पहली बार है कि यहां बाघ शावकों का जन्म हुआ है। उन्होंने बताया कि तीन शावकों के जन्म के साथ ही चिड़ियाघर में बाघों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल फरवरी में पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत पश्चिम बंगाल से सिपाहीजाला चिड़ियाघर में बाघों का एक जोड़ा लाया गया था। बाघिन ने 11 मई को तीन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140854/three-tiger-cubs-born-for-the-first-time-in-tripura"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>अगरतला, 19 मई (वेब वार्ता)। त्रिपुरा के सिपाहीजाला चिड़ियाघर में पहली बार तीन बाघ शावकों का जन्म हुआ है। राज्य का यह एकमात्र चिड़ियाघर 1972 में स्थापित किया गया था।</p>
<p>चिड़ियाघर के निदेशक विश्वजीत दास ने बताया कि यह पहली बार है कि यहां बाघ शावकों का जन्म हुआ है। उन्होंने बताया कि तीन शावकों के जन्म के साथ ही चिड़ियाघर में बाघों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल फरवरी में पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत पश्चिम बंगाल से सिपाहीजाला चिड़ियाघर में बाघों का एक जोड़ा लाया गया था। बाघिन ने 11 मई को तीन शावकों को जन्म दिया था।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मां और उसके तीन शावकों को बाड़े के अंदर रखा गया है और वे स्वस्थ हैं तथा बाघ को वहां से एहतियातन हटा दिया गया है। ’’</p>
<p>दास ने बताया कि पहली बार मां बनी बाघिन और उसके शावकों पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए बाड़े के चारों ओर 11 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि आगंतुकों को बाड़े में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मां और शावकों को कोई परेशानी न हो।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम बाघिन को संतुलित भोजन दे रहे हैं। ताजा मांस देने के अलावा, हम उसे दिन में दो या तीन बार सूप भी दे रहे हैं, ताकि शावकों को पर्याप्त दूध मिल सके।’’</p>
<p>दास ने बताया कि 2014 में एक अन्य बाघिन ने एक मृत शावक को जन्म दिया था।</p>
<p>वन मंत्री अनिमेष देबबर्मा ने कहा कि इन शावकों का जन्म चिड़ियाघर में बाघ संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम सिपाहीजाला चिड़ियाघर को विश्वस्तरीय बनाने के प्रयास कर रहे हैं। अगर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण हमारे लोगों को प्रशिक्षित करने में मदद करता है तथा केंद्र सहायता प्रदान करता है तो हम इसे और तेजी से विकसित कर पाएंगे।’’</p>
<p>सिपाहीजाला चिड़ियाघर में 2024-25 में लगभग 1.70 लाख पर्यटक आए थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/140854/three-tiger-cubs-born-for-the-first-time-in-tripura</link>
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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 16:21:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाघों को शांत रहने की जगह देना हमारी जिम्मेदारी: खरगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 01 अप्रैल (वेब वार्ता)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को कहा कि भले ही हमारे यहां टाइगर प्रोजेक्ट के जरिए बाघों का संरक्षण करने से उनकी आबादी बहुत अच्छी है फिर भी अवैध तरीके से उनका शिकार करने का प्रयास चिंताजनक है और इसे रोकना हमारी जिम्मेदारी है।</p>
<p>खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाघों के संरक्षण के लिए किए कार्यों को याद करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की दूर दृष्टि के कारण देश में आज बाघों की संख्या दुनिया में सर्वाधिक है और उन्हें सुरक्षित रखने की हम सबकी जिम्मेदारी है।</p>
<p>उन्होंने कहा "52</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139756/it-will-be-our-responsibility-to-give-tigers-to-remain"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 01 अप्रैल (वेब वार्ता)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को कहा कि भले ही हमारे यहां टाइगर प्रोजेक्ट के जरिए बाघों का संरक्षण करने से उनकी आबादी बहुत अच्छी है फिर भी अवैध तरीके से उनका शिकार करने का प्रयास चिंताजनक है और इसे रोकना हमारी जिम्मेदारी है।</p>
<p>खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाघों के संरक्षण के लिए किए कार्यों को याद करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की दूर दृष्टि के कारण देश में आज बाघों की संख्या दुनिया में सर्वाधिक है और उन्हें सुरक्षित रखने की हम सबकी जिम्मेदारी है।</p>
<p>उन्होंने कहा "52 साल पहले, भारत ने श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में इस भव्य जानवर की रक्षा के लिए 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत की थी। प्रोजेक्ट टाइगर ने बाघों, उनके आवासों और हमारे जंगलों की संपूर्ण जैव विविधता की रक्षा की।"</p>
<p>खरगे ने कहा "कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए, श्रीमती इंदिरा गांधी ने कहा था, 'बाघ को अलग-थलग करके संरक्षित नहीं किया जा सकता। यह एक विशाल और जटिल जैव-क्षेत्र के शीर्ष पर है। मानव घुसपैठ, वाणिज्यिक वानिकी और मवेशियों के चरने से खतरे में पड़े इसके आवास को सबसे पहले अछूता बनाया जाना चाहिए।"</p>
<p>उन्होंने कहा "आज, भले ही दुनिया की 70 प्रतिशत बाघ आबादी भारत में है, फिर भी पिछले कुछ वर्षों में नए तंत्रों के माध्यम से अवैध शिकार की परेशान करने वाली रिपोर्टें आई हैं। हमारे बाघों को अंधाधुंध शिकार से बचाने और शांतिपूर्ण मानव-पशु सह-अस्तित्व के लिए परिस्थितियां स्थापित करने के लिए हर संभव कदम उठाने में हमारी जिम्मेदारी है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 15:01:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री ने 58वां बाघ अभयारण्य बनने की सराहना की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 09 मार्च (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाघ अभयारण्यों की सूची में 58वां अभयारण्य शामिल करने की रविवार को सराहना करते हुए कहा कि यह ‘‘वन्यजीव प्रेमियों के लिए अद्भुत खबर’’ है।</p>
<p>पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कहा था कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि देश में 58वां बाघ अभयारण्य बन गया है और नवीनतम अभयारण्य मध्य प्रदेश का माधव बाघ अभयारण्य है।</p>
<p>यादव के पोस्ट को टैग करते हुए मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘वन्यजीव प्रेमियों के लिए अद्भुत खबर! भारत में वन्यजीव विविधता और वन्यजीवों को सम्मान देने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139147/prime-minister-appreciated-to-become-58th-tiger-sanctuary"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 09 मार्च (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाघ अभयारण्यों की सूची में 58वां अभयारण्य शामिल करने की रविवार को सराहना करते हुए कहा कि यह ‘‘वन्यजीव प्रेमियों के लिए अद्भुत खबर’’ है।</p>
<p>पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कहा था कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि देश में 58वां बाघ अभयारण्य बन गया है और नवीनतम अभयारण्य मध्य प्रदेश का माधव बाघ अभयारण्य है।</p>
<p>यादव के पोस्ट को टैग करते हुए मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘वन्यजीव प्रेमियों के लिए अद्भुत खबर! भारत में वन्यजीव विविधता और वन्यजीवों को सम्मान देने वाली संस्कृति है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, “हम हमेशा जानवरों की सुरक्षा और एक जीवंत ग्रह के लिए योगदान देने में सबसे आगे रहेंगे।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/139147/prime-minister-appreciated-to-become-58th-tiger-sanctuary</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 19:22:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक के मंत्री ने बाघ की मौत की जांच के आदेश दिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बेंगलुरु, 19 फरवरी (भाषा) कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खांडरे ने शिवमोग्गा जिले के अंबालिगोला जलाशय में एक मृत नर बाघ के मिलने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मंत्री ने 18 फरवरी को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन को लिखित निर्देश जारी कर कहा था कि मीडिया में प्रकाशित तस्वीरों में बाघ के शरीर पर गोली (छर्रा) लगने के संकेत मिले हैं।</p>
<p>उन्होंने इस मामले की जांच करने और 10 दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।</p>
<p>खांडरे ने स्थानीय लोगों द्वारा इस बात का संदेह जताए जाने संबंधी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/135055/karnataka-minister-ordered-an-inquiry-into-the-tiger-s-death"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/3285_tiger.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु, 19 फरवरी (भाषा) कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खांडरे ने शिवमोग्गा जिले के अंबालिगोला जलाशय में एक मृत नर बाघ के मिलने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मंत्री ने 18 फरवरी को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन को लिखित निर्देश जारी कर कहा था कि मीडिया में प्रकाशित तस्वीरों में बाघ के शरीर पर गोली (छर्रा) लगने के संकेत मिले हैं।</p>
<p>उन्होंने इस मामले की जांच करने और 10 दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।</p>
<p>खांडरे ने स्थानीय लोगों द्वारा इस बात का संदेह जताए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया कि बाघ को कहीं और मारकर यहां फेंक दिया गया था।</p>
<p>मंत्री ने इस पहलू की भी जांच करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/135055/karnataka-minister-ordered-an-inquiry-into-the-tiger-s-death</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Feb 2025 15:28:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गांवों का ‘स्वैच्छिक’ स्थानांतरण कराना एक ‘प्राथमिकता’ : केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) एनटीसीए ने कहा है कि वन्यजीव संरक्षण में मदद और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गांवों का स्वैच्छिक स्थानांतरण “प्राथमिकता” के आधार पर किया जाना चाहिए।</p>
<p>राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की एक बैठक के दौरान, कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि मौजूदा स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास पैकेज मुख्य और महत्वपूर्ण बाघ आवासों में रहने वाले सभी समुदायों के लिए आकर्षक नहीं हो सकता और इसे संशोधित किया जाना चाहिए।</p>
<p>एनटीसीए की हालिया बैठक के विवरण के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/133499/a--priority--to-transfer--voluntary--of-villages-from-the-main-areas-of-tiger-sanctuaries--center"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) एनटीसीए ने कहा है कि वन्यजीव संरक्षण में मदद और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गांवों का स्वैच्छिक स्थानांतरण “प्राथमिकता” के आधार पर किया जाना चाहिए।</p>
<p>राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की एक बैठक के दौरान, कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि मौजूदा स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास पैकेज मुख्य और महत्वपूर्ण बाघ आवासों में रहने वाले सभी समुदायों के लिए आकर्षक नहीं हो सकता और इसे संशोधित किया जाना चाहिए।</p>
<p>एनटीसीए की हालिया बैठक के विवरण के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि बफर और कॉरिडोर क्षेत्रों में कटौती की रणनीतियों के जरिए हरित विकास हासिल किया जाना चाहिए, जबकि बाघ प्रबंधन सिद्धांतों के अनुसार मुख्य व महत्वपूर्ण बाघ आवासों से कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>एनटीसीए के अध्यक्ष यादव ने जोर देकर कहा कि बाघ अभयारण्य के मुख्य या महत्वपूर्ण क्षेत्रों से गांवों के स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाना चाहिए, ताकि बाघ संरक्षण व समावेशी विकास के लिए दोनों पक्षों को लाभ पहुंचे। और वन क्षेत्रों के अंदर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा में लाया जा सके।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वैच्छिक स्थानांतरण करते समय वनवासियों की आवश्यकताओं पर विचार किया जाना चाहिए।</p>
<p>पिछले वर्ष, भारत के बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के लोगों ने एनटीसीए द्वारा वन अधिकारियों को दिए गए निर्देश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। एनटीसीए ने 54 बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों के 591 गांवों के 64,801 परिवारों के पुनर्वास में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Feb 2025 19:10:48 +0530</pubDate>
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                <title>रामनगर वन प्रभाग में बाघों की वार्षिक गणना के आंकड़े जल्द जारी किए जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ऋषिकेश, तीन फरवरी (भाषा) उत्तराखंड में कॉर्बेट बाघ अभयारण्य से सटे रामनगर वन प्रभाग में बाघों की वार्षिक गणना का डेटाबेस तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। राम नगर के प्रभागीय वन अधिकारी दिगांत नायक ने यह जानकारी दी।</p>
<p>नायक ने बताया कि एकत्रित आंकड़ों को डेटाबेस के रूप में संकलित किया जा रहा है, जिसे उत्तराखंड के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को भेजा जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 2022 की बाघ गणना में रामनगर वन प्रभाग में 67 बाघ पाए गए थे, जो पूरे देश में किसी भी बाघ अभयारण्य के बाहर के वन प्रभाग में बाघों की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/129295/annual-calculation-data-of-tigers-will-be-released-soon-in-ramnagar-forest-division"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/3285_tiger.jpg" alt=""></a><br /><p>ऋषिकेश, तीन फरवरी (भाषा) उत्तराखंड में कॉर्बेट बाघ अभयारण्य से सटे रामनगर वन प्रभाग में बाघों की वार्षिक गणना का डेटाबेस तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। राम नगर के प्रभागीय वन अधिकारी दिगांत नायक ने यह जानकारी दी।</p>
<p>नायक ने बताया कि एकत्रित आंकड़ों को डेटाबेस के रूप में संकलित किया जा रहा है, जिसे उत्तराखंड के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को भेजा जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 2022 की बाघ गणना में रामनगर वन प्रभाग में 67 बाघ पाए गए थे, जो पूरे देश में किसी भी बाघ अभयारण्य के बाहर के वन प्रभाग में बाघों की सर्वाधिक संख्या थी।</p>
<p>नायक के मुताबिक, ताजा गणना के आंकड़े जल्द जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि बाघों की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि देखने को मिलेगी।</p>
<p>नायक के अनुसार, यह गणना राम नगर वन प्रभाग के पांचों रेंज-कोसी, कोटा, देचौरी, कालाढूंगी और फतेहपुर में की गई, जहां बाघों के अत्यधिक आवागमन वाले 165 स्थान चिन्हित किए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इन स्थानों पर ट्रांजिट लाइन लगाकर ग्रिड बनाया गया है और 330 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।</p>
<p>नायक के मुताबिक, ग्रिड में बाघ के शिकार की उपलब्धता और उनके मल के नमूने के आंकड़े भी लिए गए, जो बाघ की मौजूदगी के प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रमाण माने जाते हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि गणना का सारा काम रामनगर वन प्रभाग के 120 वन कर्मियों ने दो महीने में पूरा किया।</p>
<p>नायक ने कहा कि उन्होंने बाघ संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने के लिए स्वतंत्र रूप से इस वार्षिक जनगणना की पहल की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 19:26:47 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल के झारग्राम में घुसा बाघ, वनकर्मियों को सतर्क किया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोलकाता, 13 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले में एक दिन पहले पड़ोसी राज्य झारखंड से एक बाघ के घुसने के बाद वन विभाग के अधिकारी फिर से सतर्क हो गए हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>बांकुड़ा में ओडिशा की एक बाघिन के पकड़े जाने के करीब दो सप्ताह बाद उसके पैरों के ये ताजा निशान देखे गए हैं। यह बाघिन ओडिशा के सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य से भटक कर पश्चिम बंगाल में आ गई थी।</p>
<p>मुख्य वन्यजीव वार्डन देबल रॉय ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पूर्ण विकसित नर रॉयल बंगाल टाइगर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/120760/tiger-entered-jhargram--west-bengal--forest-workers-alerted"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/tiger-rests-at-bandhavgarh-national-park-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता, 13 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले में एक दिन पहले पड़ोसी राज्य झारखंड से एक बाघ के घुसने के बाद वन विभाग के अधिकारी फिर से सतर्क हो गए हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>बांकुड़ा में ओडिशा की एक बाघिन के पकड़े जाने के करीब दो सप्ताह बाद उसके पैरों के ये ताजा निशान देखे गए हैं। यह बाघिन ओडिशा के सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य से भटक कर पश्चिम बंगाल में आ गई थी।</p>
<p>मुख्य वन्यजीव वार्डन देबल रॉय ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पूर्ण विकसित नर रॉयल बंगाल टाइगर अब कंकराझोर वन क्षेत्र में है और हम उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।</p>
<p>देबल रॉय ने कहा, ‘‘हम इसके शांत होने का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह पिछले कुछ दिनों से झारखंड के जंगलों में घूम रहा था।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘पैरों के निशानों से हमें पुष्टि हुई है कि यह अब कंकराझोर के जंगल में डेरा जमाए हुए है। सुंदरबन बाघ अभयारण्य की हमारी टीम और झारग्राम के वनकर्मी इसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।’’</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 15:08:04 +0530</pubDate>
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