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                <description>Investment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>न दिल्ली, न मुंबई, न हैदराबाद, ये बेंगलुरु शहर बना भारत का सबसे हॉट इंवेस्टमेंट हब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बेंगलुरु, 24 अगस्त (वेब वार्ता)। बेंगलुरु को टॉप 15 ग्लोबल शहरों की सूची में चौथा स्थान मिला है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और मुंबई भी शामिल हैं।</p>
<p>हालांकि, बेंगलुरु एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है, क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि यह शहर निवेशकों को तेजी से और उच्च रिटर्न देता है। आईटी हब बेंगलुरु ने प्राइम ग्लोबल सिटीज इंडेक्स के क्यू-2 2025 में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद जैसे अन्य प्रमुख भारतीय मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ दिया है।</p>
<p>यह इंडेक्स लंदन स्थित रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक ने जारी किया है। कर्नाटक की राजधानी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142689/neither-delhi-nor-mumbai-nor-hyderabad-this-bengaluru-city-becomes"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/3249_money-coin-investment-business-finance-bank.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु, 24 अगस्त (वेब वार्ता)। बेंगलुरु को टॉप 15 ग्लोबल शहरों की सूची में चौथा स्थान मिला है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और मुंबई भी शामिल हैं।</p>
<p>हालांकि, बेंगलुरु एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है, क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि यह शहर निवेशकों को तेजी से और उच्च रिटर्न देता है। आईटी हब बेंगलुरु ने प्राइम ग्लोबल सिटीज इंडेक्स के क्यू-2 2025 में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद जैसे अन्य प्रमुख भारतीय मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ दिया है।</p>
<p>यह इंडेक्स लंदन स्थित रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक ने जारी किया है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु भारत में सबसे हॉट इंवेस्टमेंट हब के रूप में उभर रही है।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु में प्राइम रियल एस्टेट की कीमतें सालाना 10.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी हैं, जो भारतीय शहरों में सबसे अधिक है। इसके बाद मुंबई (8.7 प्रतिशत) और दिल्ली (3.9 प्रतिशत) का स्थान है, जो क्रमशः 6वें और 15वें स्थान पर हैं। बेंगलुरु की तेजी से बढ़ती कीमतों का मुख्य कारण इसका मजबूत आईटी सेक्टर है, जो देश में सबसे अधिक वेतन वाली टेक नौकरियां प्रदान करता है, जिससे शहर में प्रीमियम प्रॉपर्टीज की मांग बढ़ती है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु, जिसे ‘भारत का सिलिकॉन वैली’ कहा जाता है, कई भारतीय और वैश्विक टेक कंपनियों और कई टेक स्टार्टअप्स का घर है। इस मजबूत टेक इकोसिस्टम के कारण बड़ी संख्या में पेशेवर यहां आते हैं, जिससे शहर में प्रीमियम घर खरीदने और किराए पर लेने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 19:18:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश मार्च में 14 प्रतिशत घटकर 25,082 करोड़ रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) इक्विटी म्यूचुअल फंड (एमएफ) में निवेश मार्च में 14 प्रतिशत घटकर 25,082 करोड़ रुपये रह गया। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेश में गिरावट आई है।</p>
<p>इक्विटी फंड में लगातार तीसरे महीने निवेश में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, लगातार 49वें महीने म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध प्रवाह सकारात्मक बना रहा है।</p>
<p>एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी एमएफ में मार्च में 25,082 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो फरवरी में 29,303 करोड़ रुपये, जनवरी में 39,688 करोड़ रुपये और दिसंबर में 41,156 करोड़ रुपये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140025/investment-in-equity-mutual-funds-reduced-by-14-percent-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/3249_money-coin-investment-business-finance-bank.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) इक्विटी म्यूचुअल फंड (एमएफ) में निवेश मार्च में 14 प्रतिशत घटकर 25,082 करोड़ रुपये रह गया। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेश में गिरावट आई है।</p>
<p>इक्विटी फंड में लगातार तीसरे महीने निवेश में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, लगातार 49वें महीने म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध प्रवाह सकारात्मक बना रहा है।</p>
<p>एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी एमएफ में मार्च में 25,082 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो फरवरी में 29,303 करोड़ रुपये, जनवरी में 39,688 करोड़ रुपये और दिसंबर में 41,156 करोड़ रुपये से काफी कम है।</p>
<p>इक्विटी फंड श्रेणियों में, फ्लेक्सी कैप फंड में मार्च में सबसे अधिक 5,165 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। हालांकि, सेक्टोरल/थीमैटिक फंड में भारी गिरावट के साथ निवेश 735 करोड़ रुपये रहा। फरवरी में इसमें 5,711 करोड़ रुपये का मजबूत निवेश हुआ था।</p>
<p>वहीं मिड-कैप और स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड ने मार्च में क्रमशः 3,439 करोड़ रुपये और 4,092 करोड़ रुपये के प्रवाह के साथ महत्वपूर्ण निवेशक रुचि आकर्षित करना जारी रखा।</p>
<p>दूसरी ओर, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में फरवरी में निवेशकों द्वारा 1,980 करोड़ रुपये का निवेश किए जाने के बाद मार्च में 77 करोड़ रुपये की निकासी हुई।</p>
<p>इसके अलावा, डेट फंडों ने फरवरी में 6,525 करोड़ रुपये की तुलना में मार्च में 2.02 लाख करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की।</p>
<p>कुल मिलाकर, म्यूचुअल फंड में समीक्षाधीन महीने में 1.64 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि फरवरी में 40,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था।</p>
<p>निकासी के बावजूद म्यूचुअल फंड कंपनियों के प्रबंधन के तहत कुल परिसंपत्तियां मार्च के अंत में मामूली बढ़त के साथ 65.7 लाख करोड़ रुपये की हो गईं, जो फरवरी में 64.53 लाख करोड़ रुपये थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 13:12:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जियो फाइनेंस ने लॉन्च किया डिजिटल लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज, 10 मिनट में मिलेगा 1 करोड़ तक का लोन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 9 अप्रैल 2025: जियो फाइनेंस लिमिटेड (जेएफएल), जो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का एक हिस्सा है, ने डिजिटल लोन के क्षेत्र में एक नया कदम उठाया है। कंपनी ने 'लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज' (एलएएस) नामक एक नई सेवा शुरू की है, जिसके तहत ग्राहक अपने शेयरों और म्यूचुअल फंड्स के बदले लोन ले सकते हैं। इस सेवा के जरिए ग्राहकों को जियो फाइनेंस ऐप के माध्यम से मात्र 10 मिनट में 1 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता है।</p>
<p>जियो फाइनेंस ने इस नई पेशकश को पूरी तरह डिजिटल बनाया है, जिसमें न्यूनतम 9.99% की ब्याज दर और अधिकतम 3</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139960/jio-finance-launched-digital-loan-against-securities-loans-up-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/business-payment-cash-loan-banking.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 9 अप्रैल 2025: जियो फाइनेंस लिमिटेड (जेएफएल), जो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का एक हिस्सा है, ने डिजिटल लोन के क्षेत्र में एक नया कदम उठाया है। कंपनी ने 'लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज' (एलएएस) नामक एक नई सेवा शुरू की है, जिसके तहत ग्राहक अपने शेयरों और म्यूचुअल फंड्स के बदले लोन ले सकते हैं। इस सेवा के जरिए ग्राहकों को जियो फाइनेंस ऐप के माध्यम से मात्र 10 मिनट में 1 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता है।</p>
<p>जियो फाइनेंस ने इस नई पेशकश को पूरी तरह डिजिटल बनाया है, जिसमें न्यूनतम 9.99% की ब्याज दर और अधिकतम 3 साल की अवधि का विकल्प दिया गया है। खास बात यह है कि इस लोन में कोई फोरक्लोजर चार्ज नहीं लिया जाएगा, जिससे ग्राहकों को लचीलापन मिलेगा। यह कदम जियो फाइनेंस के डिजिटल लेंडिंग इकोसिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>जियो फाइनेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ कुसल रॉय ने इस लॉन्च के बारे में कहा, "लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज हमारी व्यापक डिजिटल रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को उनकी वित्तीय जरूरतों के लिए तेज, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित समाधान प्रदान करना है। हमारा लक्ष्य जियो फाइनेंस ऐप को एक ऐसा मंच बनाना है, जहां ग्राहक लोन, बीमा, भुगतान, और निवेश जैसे सभी वित्तीय सेवाओं का लाभ एक ही जगह उठा सकें।"</p>
<p>भारत में डिजिटल लेंडिंग मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, और जियो फाइनेंस इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डिजिटल लेंडिंग मार्केट 2024 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें छोटे शहरों से मांग में वृद्धि देखी जा रही है। जियो फाइनेंस की यह नई सेवा निवेशकों को अपनी संपत्ति बेचे बिना त्वरित नकदी प्राप्त करने का एक आसान और सुरक्षित तरीका प्रदान करती है।</p>
<p>जियो फाइनेंस पहले से ही होम लोन और म्यूचुअल फंड लोन जैसी सेवाएं प्रदान कर रही है, और अब लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज के साथ कंपनी अपने पोर्टफोलियो को और विस्तार दे रही है। यह कदम न केवल जियो फाइनेंस की फिनटेक क्षेत्र में स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।</p>
<p>जियो फाइनेंस की इस नई पहल से उन निवेशकों को फायदा होगा जो अपनी संपत्ति को बरकरार रखते हुए तुरंत धन की जरूरत को पूरा करना चाहते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सेवा डिजिटल लेंडिंग मार्केट में कितना बदलाव लाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Apr 2025 08:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब डिजिलॉकर के जरिये डीमैट, म्यूचुअल फंड का विवरण ले सकेंगे उपयोगकर्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) निवेशक दस्तावेज संग्रह के डिजिटल मंच ‘डिजिलॉकर’ के जरिये अब अपने डीमैट खाते का विवरण और म्यूचुअल फंड से संबंधित जानकारी को स्टोर करने के साथ उसे देख सकते हैं। यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो गई है।</p>
<p>इस पहल से भारतीय प्रतिभूति बाजार में बिना दावे वाली संपत्तियों में कमी आएगी और निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p>डिजिलॉकर सरकार की एक अहम डिजिटल सेवा है, जो नागरिकों को डिजिटल रूप में दस्तावेज़ों को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने और साझा करने की सुविधा देती है।</p>
<p>सरकार ने डिजिलॉकर पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139769/now-users-will-be-able-to-take-details-of-demat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/telephone-wifi-hotspot-social-media-smart-phone-internet-mobile-sms-chat-crime1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) निवेशक दस्तावेज संग्रह के डिजिटल मंच ‘डिजिलॉकर’ के जरिये अब अपने डीमैट खाते का विवरण और म्यूचुअल फंड से संबंधित जानकारी को स्टोर करने के साथ उसे देख सकते हैं। यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो गई है।</p>
<p>इस पहल से भारतीय प्रतिभूति बाजार में बिना दावे वाली संपत्तियों में कमी आएगी और निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p>डिजिलॉकर सरकार की एक अहम डिजिटल सेवा है, जो नागरिकों को डिजिटल रूप में दस्तावेज़ों को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने और साझा करने की सुविधा देती है।</p>
<p>सरकार ने डिजिलॉकर पर उपलब्ध सेवाओं का विस्तार कर दिया है, जिसमें पहले से ही बैंक खाता विवरण, बीमा पॉलिसी प्रमाणपत्र और एनपीएस खाता विवरण शामिल हैं।</p>
<p>डिजिलॉकर उपयोगकर्ता अब अपने डीमैट खातों के साथ अपने समेकित खाता विवरण (सीएएस) के जरिये शेयरों और म्यूचुअल फंड इकाइयों का विवरण प्राप्त और संग्रहीत कर सकते हैं।</p>
<p>इसके अलावा, उपयोगकर्ता अपने डिजिलॉकर खातों में नॉमित व्यक्ति को भी जोड़ सकते हैं। इससे उपयोगकर्ता के निधन के बाद उपयोगकर्ता के दस्तावेजों तक पहुंच मिल सकेगी। इससे परिवार के सदस्यों या कानूनी उत्तराधिकारियों को मृतक की वित्तीय संपत्तियों का अधिक आसानी से प्रबंधन करने में मदद मिलती है।</p>
<p>इसके अलावा, डिजिलॉकर प्रणाली मृत्यु प्रमाण पत्र या केवाईसी पंजीकरण एजेंसियों (केआरए) से मिले विवरण से प्राप्त सूचना का उपयोग करके किसी उपयोगकर्ता की मृत्यु पर उसके खाते की स्थिति को भी अद्यतन कर सकती है।</p>
<p>उपयोगकर्ता की मृत्यु के बाद डिजिलॉकर स्वचालित रूप से नामित व्यक्तियों को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सूचित करता है, जिससे उन्हें मृतक की संपत्ति का प्रबंधन करने में मदद मिलती है।</p>
<p>परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी), आरटीए और डिपॉजिटरी संस्थान डिजिलॉकर के साथ पंजीकरण करेंगी ताकि निवेशक अपने म्यूचुअल फंड एवं डीमैट खाते का विवरण प्राप्त कर सकें।</p>
<p>इस तरह से बाजार नियामक सेबी निष्क्रिय खातों, संपर्क या बैंक विवरण की कमी जैसे मुद्दों पर ध्यान देकर प्रतिभूति बाजार में बिना दावे वाली संपत्तियों को कम करना चाहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/139769/now-users-will-be-able-to-take-details-of-demat</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 20:37:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेबी ने निवेश सलाहकारों, शोध विश्लेषकों को एक साल तक अग्रिम शुल्क लेने की अनुमति दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 24 मार्च (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों को एक साल तक अग्रिम शुल्क लेने की अनुमति देने का फैसला किया।</p>
<p>मौजूदा नियमों के तहत निवेश सलाहकार (आईए) ग्राहक की सहमति होने पर दो तिमाहियों तक के लिए अग्रिम शुल्क ले सकते हैं। शोध विश्लेषकों (आरए) के लिए यह अवधि केवल एक तिमाही थी।</p>
<p>सेबी ने कहा कि उद्योग की कई चिंताओं को दूर करने के लिए पहले भी आईए और आरए से संबंधित नियमों को युक्तिसंगत बनाया गया था। ज्यादातर बदलावों का उन्होंने स्वागत किया है।</p>
<p>बाजार नियामक ने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139553/sebi-allowed-investment-advisors-research-analysts-to-charge-advance-fees"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 24 मार्च (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों को एक साल तक अग्रिम शुल्क लेने की अनुमति देने का फैसला किया।</p>
<p>मौजूदा नियमों के तहत निवेश सलाहकार (आईए) ग्राहक की सहमति होने पर दो तिमाहियों तक के लिए अग्रिम शुल्क ले सकते हैं। शोध विश्लेषकों (आरए) के लिए यह अवधि केवल एक तिमाही थी।</p>
<p>सेबी ने कहा कि उद्योग की कई चिंताओं को दूर करने के लिए पहले भी आईए और आरए से संबंधित नियमों को युक्तिसंगत बनाया गया था। ज्यादातर बदलावों का उन्होंने स्वागत किया है।</p>
<p>बाजार नियामक ने कहा कि हालांकि शुल्क संबंधी कुछ प्रावधानों पर चिंताएं बनी हुई थीं, जो आईए और आरए द्वारा अग्रिम शुल्क लेने को छह महीने या तीन महीने तक सीमित करती हैं।</p>
<p>सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इन चिंताओं को दूर करने के लिए, बोर्ड ने फैसला किया कि अगर ग्राहक सहमत हो, तो आईए और आरए एक साल तक अग्रिम शुल्क ले सकते हैं।’’</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि शुल्क सीमा, भुगतान विधि, धन वापसी से संबंधित अनुपालन आवश्यकताएं केवल व्यक्तिगत और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) वाले ग्राहकों पर लागू होंगी।</p>
<p>गैर-व्यक्तिगत ग्राहकों, मान्यता प्राप्त निवेशकों और प्रॉक्सी सलाहकार की सिफारिश चाहने वाले संस्थागत निवेशकों के मामले में शुल्क संबंधी नियम समझौते की शर्तों के अनुसार तय होंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 20:23:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अपंजीकृत निवेश सलाहकारों से खतरा, 70 हजार भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट, खाते हटाए गए: नारायण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 21 मार्च (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण जी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल 'फिन-इन्फ्लुएंसर' ढांचे के क्रियान्वयन के बाद से सोशल मीडिया मंचों के साथ परामर्श कर 70,000 भ्रामक खाते और ‘पोस्ट’ हटाए गए हैं।</p>
<p>सोशल मीडिया पर वित्तीय मामलों में लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखने वालों को फिन-इन्फ्लुएंसर कहते हैं।</p>
<p>नारायण ने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की चिंताओं के बीच कुल मिलाकर निवेश प्रवाह उतना बुरा नहीं है, जितना सोचा गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139473/narayan-removed-70-thousand-misleading-social-media-post-accounts-threatened"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/7639_sebi-share-market.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 21 मार्च (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण जी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल 'फिन-इन्फ्लुएंसर' ढांचे के क्रियान्वयन के बाद से सोशल मीडिया मंचों के साथ परामर्श कर 70,000 भ्रामक खाते और ‘पोस्ट’ हटाए गए हैं।</p>
<p>सोशल मीडिया पर वित्तीय मामलों में लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखने वालों को फिन-इन्फ्लुएंसर कहते हैं।</p>
<p>नारायण ने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की चिंताओं के बीच कुल मिलाकर निवेश प्रवाह उतना बुरा नहीं है, जितना सोचा गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में एफआईआई का निवेश जारी है।</p>
<p>नारायण ने कहा कि अपंजीकृत निवेश सलाहकार और शोध विश्लेषक एक ‘‘खतरा’’ हैं, जो निवेश में बढ़ती रुचि का फायदा उठा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने यहां पंजीकृत निवेश सलाहकारों द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ अक्टूबर 2024 से सेबी ने 70,000 से अधिक भ्रामक खातों/‘पोस्ट’ को हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों के साथ काम किया है।’’</p>
<p>सेबी के पूर्णकालिक सदस्य ने कहा कि उन्होंने अनुपालन सुनिश्चित करने में सलाहकारों की मदद मांगी। उन्होंने साथ ही सेबी-पंजीकृत संस्थाओं की पहचान करने में मदद के लिए यूपीआई ‘पेराइट’ खाते और इस दिशा में सेबी के प्रयासों के रूप में वैकल्पिक केंद्रीकृत शुल्क संग्रह तंत्र का उल्लेख किया।</p>
<p>वाणिज्यिक बैंकर से नियामक बने नारायण ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) की निकासी पर कहा कि स्थिति उतनी बुरी नहीं है, लेकिन ‘‘ हमें आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि भारत को विदेशी बचत की आवश्यकता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 तक एफपीआई के पास भारतीय शेयर में 62 लाख करोड़ रुपये या 700 अरब डॉलर से अधिक और ऋण के रूप में करीब 5.9 लाख करोड़ रुपये या 68 अरब डॉलर थे।</p>
<p>नारायण ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में शेयर और ऋण में 54 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी प्रवाह देखा गया है, जो पिछले पांच वर्षों के 19 अरब अमेरिकी डॉलर से बहुत अधिक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की रुचि बनाए रखने के लिए निरंतर वृद्धि, व्यापक आर्थिक स्थिरता और कामकज का उचित माहौल देने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 20:13:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एफपीआई की निकासी जारी, जनवरी में इक्विटी से 64,000 करोड़ रुपये निकाले</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) भारतीय इक्विटी बाजारों से एफपीआई की बेरुखी लगातार जारी है, और उन्होंने इस महीने अब तक 64,156 करोड़ रुपये निकाले हैं। रुपये के अवमूल्यन, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि और कमजोर तिमाही नतीजों के चलते ऐसा हो रहा है।</p>
<p>डिपॉजिटरी के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने दिसंबर में 15,446 करोड़ रुपये का निवेश किया था।</p>
<p>मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स इंडिया के संयुक्त निदेशक - शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ''भारतीय रुपये में लगातार गिरावट से विदेशी निवेशकों पर काफी दबाव है, जिससे वे भारतीय इक्विटी बाजारों से पैसा निकाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/125684/fpi-withdrawals-continue--rs-64-000-crore-withdrawn-from-equities-in-january"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/foreign-investment-stock-market-fdi-fpi.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) भारतीय इक्विटी बाजारों से एफपीआई की बेरुखी लगातार जारी है, और उन्होंने इस महीने अब तक 64,156 करोड़ रुपये निकाले हैं। रुपये के अवमूल्यन, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि और कमजोर तिमाही नतीजों के चलते ऐसा हो रहा है।</p>
<p>डिपॉजिटरी के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने दिसंबर में 15,446 करोड़ रुपये का निवेश किया था।</p>
<p>मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स इंडिया के संयुक्त निदेशक - शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ''भारतीय रुपये में लगातार गिरावट से विदेशी निवेशकों पर काफी दबाव है, जिससे वे भारतीय इक्विटी बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।''</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसके अलावा हाल ही में हुई गिरावट, अपेक्षाकृत कमतर तिमाही नतीजों और व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों का उच्च मूल्यांकन निवेशकों को सावधान कर रहा है।</p>
<p>इसके अलावा, डोनाल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियों ने भी निवेशकों को सावधानी से कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। ऐसे में निवेशक जोखिम भरे निवेश के रास्ते से दूर रहने के लिए मजबूर हैं।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार एफपीआई ने इस महीने (24 जनवरी तक) अब तक भारतीय इक्विटी से 64,156 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। एफपीआई ने इस महीने दो जनवरी को छोड़कर सभी दिनों में बिकवाली की।</p>
<p>जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ''डॉलर की लगातार मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि एफआईआई की बिक्री को बढ़ावा देने वाले मुख्य कारक रहे हैं। जब तक डॉलर सूचकांक 108 से ऊपर रहेगा और 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफल 4.5 प्रतिशत से ऊपर रहेगा, तब तक बिक्री जारी रहने का अनुमान है।''</p>
<p>वित्तीय क्षेत्र को खासतौर से एफपीआई की बिकवाली का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, आईटी क्षेत्र में कुछ खरीदारी देखी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jan 2025 19:29:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अस्थिरता के बीच इक्विटी म्यूचुअल फंडों के लिए 2025 में सतर्क परिदृश्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) इक्विटी म्यूचुअल फंडों में 2024 में लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह राशि इससे पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है, जो निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है।</p>
<p>साथ ही निवेशक अब व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) के जरिये लंबी अवधि के निवेश को अधिक महत्व दे रहे हैं। हालांकि, 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, ऐसा लग रहा है कि 2025 के लिए परिदृश्य सतर्क रहेगा।</p>
<p>जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज के सह-संस्थापक और सीईओ संतोष जोसेफ ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग ने दिसंबर की शुरुआत से इक्विटी फंड प्रवाह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/125692/cautious-outlook-for-equity-mutual-funds-in-2025-amid-volatility"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mutual-fund.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) इक्विटी म्यूचुअल फंडों में 2024 में लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह राशि इससे पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है, जो निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है।</p>
<p>साथ ही निवेशक अब व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) के जरिये लंबी अवधि के निवेश को अधिक महत्व दे रहे हैं। हालांकि, 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, ऐसा लग रहा है कि 2025 के लिए परिदृश्य सतर्क रहेगा।</p>
<p>जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज के सह-संस्थापक और सीईओ संतोष जोसेफ ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग ने दिसंबर की शुरुआत से इक्विटी फंड प्रवाह में मंदी देखनी शुरू कर दी है। बाजार में बढ़ती अस्थिरता के चलते ऐसा देखने को मिल रहा है।</p>
<p>ऐतिहासिक रूप से, इक्विटी फंडों में निवेश बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा रहा है, और बाजार की अनिश्चितता की अवधि में अक्सर निवेशक गतिविधियां कम हो जाती हैं।</p>
<p>जोसेफ ने कहा कि ऐसे में 2025 में नए फंड की पेशकश और इक्विटी फंड जुटाने के मामले में सुस्ती देखी जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/125692/cautious-outlook-for-equity-mutual-funds-in-2025-amid-volatility</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/125692/cautious-outlook-for-equity-mutual-funds-in-2025-amid-volatility</guid>
                <pubDate>Sun, 26 Jan 2025 19:28:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिसंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 14 प्रतिशत बढ़कर 41,156 करोड़ रुपये पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, नौ जनवरी (भाषा) स्थानीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड की इक्विटी योजनाओं में दिसंबर माह में निवेश 14 प्रतिशत बढ़कर 41,156 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।</p>
<p>एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने कहा कि म्यूचुअल फंड की स्मॉल और मिड कैप (छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करने वाले) की पूंजी योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और इस महीने के दौरान निवेश रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। हालांकि, इन दोनों खंडों में जोखिम को लेकर चिंता जताई जा रही थी।</p>
<p>व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) में निवेश पिछले महीने 26,459 करोड़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/119463/investment-in-equity-mutual-funds-increased-by-14-percent-to-rs-41-156-crore-in-december"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/stock-market-bull-uptrend-investment.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, नौ जनवरी (भाषा) स्थानीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड की इक्विटी योजनाओं में दिसंबर माह में निवेश 14 प्रतिशत बढ़कर 41,156 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।</p>
<p>एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने कहा कि म्यूचुअल फंड की स्मॉल और मिड कैप (छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करने वाले) की पूंजी योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और इस महीने के दौरान निवेश रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। हालांकि, इन दोनों खंडों में जोखिम को लेकर चिंता जताई जा रही थी।</p>
<p>व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) में निवेश पिछले महीने 26,459 करोड़ रुपये रहा, जो नवंबर में 25,320 करोड़ रुपये था। एसआईपी के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां 13.63 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो कुल परिसंपत्तियों का लगभग पांचवां हिस्सा है।</p>
<p>दिसंबर के अंत तक म्यूचुअल फंड कंपनियों के प्रबंधन के तहत कुल परिसंपत्तियां (एयूएम) 66.93 लाख करोड़ रुपये थीं, जो एक महीने पहले की समान अवधि के 68.08 लाख करोड़ रुपये से कुछ कम है।</p>
<p>एम्फी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेंकट चलसानी ने कहा कि इस गिरावट का कारण बाजार में ‘करेक्शन’ के साथ ऋण या बॉन्ड योजनाओं से 1.27 लाख करोड़ रुपये की निकासी है।</p>
<p>इक्विटी म्यूचुअल फंड में निरंतर रुचि और भविष्य में उम्मीद को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में चलसानी ने माना कि ऐसी अनिश्चितताएं हैं जो बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के साथ वहां के प्रशासन में बदलाव को लेकर भी लोगों के मन में कई शंकाएं हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशकों का शेयर बाजार में भरोसा बना हुआ है।</p>
<p>एसआईपी में निरंतर रुचि की ओर इशारा करते हुए चलसानी ने कहा कि यह निवेश दीर्घावधि में भारतीय बाजारों में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/119463/investment-in-equity-mutual-funds-increased-by-14-percent-to-rs-41-156-crore-in-december</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Jan 2025 15:38:28 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय शेयर बाजार में 2024 में एफपीआई प्रवाह में भारी गिरावट; 2025 में उछाल की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(शिल्पी पांडे)</p>
<p>नयी दिल्ली, 25 दिसंबर (भाषा) भारतीय शेयर बाजारों में 2023 में मजबूत निवेश के बाद विदेशी निवेशकों ने 2024 में अपने निवेश को काफी हद तक कम कर दिया। इस साल शुद्ध प्रवाह 5,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा। उच्च घरेलू मूल्यांकन और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का अधिक सतर्क रुख अपनाना इसकी मुख्य वजह रही।</p>
<p>वेंचुरा सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख विनीत बोलिंजकर ने कहा कि 2025 की ओर देखते हुए भारतीय शेयर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के प्रवाह में सुधार देखने को मिल सकता है। इसे कॉर्पोरेट आय में चक्रीय उछाल से समर्थन मिलेगा खासकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/114411/huge-decline-in-fpi-inflows-into-indian-stock-market-in-2024"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/foreign-investment-stock-market-fdi-fpi.jpg" alt=""></a><br /><p>(शिल्पी पांडे)</p>
<p>नयी दिल्ली, 25 दिसंबर (भाषा) भारतीय शेयर बाजारों में 2023 में मजबूत निवेश के बाद विदेशी निवेशकों ने 2024 में अपने निवेश को काफी हद तक कम कर दिया। इस साल शुद्ध प्रवाह 5,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा। उच्च घरेलू मूल्यांकन और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का अधिक सतर्क रुख अपनाना इसकी मुख्य वजह रही।</p>
<p>वेंचुरा सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख विनीत बोलिंजकर ने कहा कि 2025 की ओर देखते हुए भारतीय शेयर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के प्रवाह में सुधार देखने को मिल सकता है। इसे कॉर्पोरेट आय में चक्रीय उछाल से समर्थन मिलेगा खासकर पूंजीगत वस्तुओं, विनिर्माण व बुनियादी ढांचे जैसे घरेलू-उन्मुख क्षेत्रों में...।</p>
<p>हालांकि, आसियान तथा लैटिन अमेरिका जैसे अन्य उभरते बाजारों में ऊंचे मूल्यांकन और सस्ते विकल्प इन प्रवाहों को बाधित कर सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसके अलावा लंबे समय तक वैश्विक मंदी के चलते बनी चिंताएं निवेशकों की भावनाओं तथा जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों के प्रति उनकी रुचि पर असर डाल सकती हैं।</p>
<p>दूसरी ओर आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के डिप्टी सीईओ ( उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी) फिरोज अजीज ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में कटौती तथा संभावित अमेरिकी शुल्क प्रतिबंध भारतीय बाजारों में एफपीआई प्रवाह के लिए अनुकूल स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं।</p>
<p>‘डिपॉजिटरीज’ के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजारों में 5,052 करोड़ रुपये से अधिक और ऋण बाजार में 1.12 लाख करोड़ रुपये (24 दिसंबर तक) का शुद्ध निवेश किया है।</p>
<p>इससे पहले 2023 में शेयर बाजार में 1.71 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया गया था जो भारत के जुझारू आर्थिक बुनियादी ढांचे के बारे में आशावाद से प्रेरित रहा था। इसके विपरीत 2022 में वैश्विक केंद्रीय बैंकों की आक्रामक दर वृद्धि के कारण 1.21 लाख करोड़ रुपये की सबसे अधिक शुद्ध बिकवाली दर्ज की गई थी।</p>
<p>हालांकि इससे पहले तीन वर्षों 2019, 2020 तथा 2021 में एफपीआई ने निवेश किया था।</p>
<p>वर्ष 2024 में जनवरी, अप्रैल, मई, अक्टूबर और नवंबर महीनों में एफपीआई बिकवाल रहे। 2024 में एफपीआई प्रवाह में भारी गिरावट वैश्विक तथा घरेलू कारकों के कारण हुई।</p>
<p>मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के मैनेजर रिसर्च के ‘एसोसिएट डायरेक्टर’ हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार में कम निवेश मुख्य रूप से ऊंचे मूल्यांकन के कारण हुआ, जिससे निवेशकों ने आकर्षक मूल्य वाले चीनी शेयर बाजार में निवेश किया।</p>
<p>इस बदलाव को चीन द्वारा आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए प्रोत्साहन उपायों की श्रृंखला से और बढ़ावा मिला, जिससे उसके शेयर बाजार में तेजी से आकर्षण बढ़ा।</p>
<p>इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि खासकर इज़राइल-ईरान संघर्ष, जोखिम से बचने की प्रवृत्ति में वृद्धि, निवेशकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर धकेल रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले सतर्कता तथा इस साल की 100 आधार अंकों की कटौती के बावजूद अगले साल अमेरिकी फेडरल दरों में कम कटौती की चिंताओं ने धारणा को और कमजोर कर दिया।</p>
<p>ग्रोथ इन्वेस्टिंग के ‘स्मॉलकेस’ प्रबंधक एवं संस्थापक नरेन्द्र सिंह ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर उच्च मूल्यांकन, सितंबर तिमाही के लिए कमजोर कॉर्पोरेट आय, दिसंबर के लिए कमजोर परिणामों की आशंका, बढ़ती मुद्रास्फीति, धीमी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि और कमजोर रुपये जैसे कारकों ने निवेशकों के विश्वास को कम कर दिया है।</p>
<p>हालांकि, अस्थिरता के बावजूद एफपीआई ने दिसंबर में पुनरुद्धार के संकेत दिये। अब तक शुद्ध प्रवाह 20,071 करोड़ रुपये से अधिक रहा है, जो भारतीय शेयर बाजारों में नए सिरे से बढ़ती रुचि का संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2024 14:38:32 +0530</pubDate>
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                <title>भारत में 2025 में भी जारी रहेगा एफडीआई प्रवाह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(राजेश राय)</p>
<p>नयी दिल्ली, 25 दिसंबर (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं तथा चुनौतियों के बावजूद भारत में इस साल जनवरी से अब तक औसतन मासिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 4.5 अरब डॉलर से अधिक रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत सरकार के देश में निवेशक अनुकूल उपायों को बढ़ावा देने से 2025 में भी यह रुझान बरकरार रहने की उम्मीद है।</p>
<p>निवेशक-अनुकूल नीतियां, निवेश पर मजबूत ‘रिटर्न’, कुशल कार्यबल, कम अनुपालन बोझ, छोटे उद्योग-संबंधी अपराधों को दूर करना, सुव्यवस्थित अनुमोदन तथा मंजूरी के लिए राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं विदेशी निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/114390/fdi-flow-will-continue-in-india-even-in-2025"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/foreign-investment-stock-market-fdi-fpi.jpg" alt=""></a><br /><p>(राजेश राय)</p>
<p>नयी दिल्ली, 25 दिसंबर (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं तथा चुनौतियों के बावजूद भारत में इस साल जनवरी से अब तक औसतन मासिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 4.5 अरब डॉलर से अधिक रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत सरकार के देश में निवेशक अनुकूल उपायों को बढ़ावा देने से 2025 में भी यह रुझान बरकरार रहने की उम्मीद है।</p>
<p>निवेशक-अनुकूल नीतियां, निवेश पर मजबूत ‘रिटर्न’, कुशल कार्यबल, कम अनुपालन बोझ, छोटे उद्योग-संबंधी अपराधों को दूर करना, सुव्यवस्थित अनुमोदन तथा मंजूरी के लिए राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं विदेशी निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित करने के लिए किए गए प्रमुख उपायों में से हैं।</p>
<p>इसके अलावा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत एक आकर्षक तथा निवेशक-अनुकूल गंतव्य बना रहे, सरकार निरंतर आधार पर एफडीआई नीति की समीक्षा करती है। शीर्ष उद्योग मंडलों, संघों तथा उद्योगों के प्रतिनिधियों सहित हितधारकों के साथ गहन परामर्श के बाद समय-समय पर सरकार इसमें बदलाव करती है।</p>
<p>इस साल जनवरी-सितंबर की अवधि में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करीब 42 प्रतिशत बढ़कर 42.13 अरब डॉलर हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में एफडीआई प्रवाह 29.73 अरब डॉलर रहा था।</p>
<p>एफडीआई प्रवाह अप्रैल-सितंबर 2024-25 में 45 प्रतिशत बढ़कर 29.79 अरब अमरीकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 20.48 अरब अमरीकी डॉलर था। 2023-24 में कुल एफडीआई 71.28 अरब अमरीकी डॉलर रहा।</p>
<p>उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ प्रवृत्ति के अनुसार देश 2025 में भी अच्छा एफडीआई आकर्षित करने का सिलसिला जारी रखेगा। ’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर, नियामक बाधाओं को हटाकर, बुनियादी ढांचे का विकास कर और कारोबारी माहौल में सुधार कर वैश्विक निवेशकों के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को खोलना जारी रख रहा है।</p>
<p>बीते दस साल (2014-2024) के दौरान कुल 991 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई प्रवाह दर्ज किया गया, जिसमें से 67 प्रतिशत (667 अरब अमेरिकी डॉलर) हासिल हुआ। विनिर्माण क्षेत्र में एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 2004-2014 में 98 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2014-2024 में 165 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।</p>
<p>इसी तरह के विचार साझा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत अब भी वैश्विक कंपनियों के लिए पसंदीदा निवेश गंतव्य है।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को और अधिक कदम उठाने चाहिए जैसे कि व्यापार करने में सुगमता को और बेहतर बनाना, औषधि, निजी सुरक्षा एजेंसियों, प्रसारण व वृक्षारोपण जैसे क्षेत्र में क्षेत्रीय सीमाओं को उदार बनाना और प्रेस नोट 3 (2020) के तहत मानदंडों को आसान बनाना।</p>
<p>इस ‘प्रेस नोट’ के तहत, चीन जैसे भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले एफडीआई आवेदनों को सभी क्षेत्रों के लिए अनिवार्य रूप से सरकारी अनुमोदन लेना होता है।</p>
<p>शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी लिमिटेड के साझेदार रुद्र कुमार पांडे ने कहा, ‘‘ सरकार को प्रेस नोट 3 आवेदनों को संसाधित करने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली लानी चाहिए। इसमें समयबद्ध प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें ‘डीमिंग’ प्रावधान हो, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और एफडीआई में वृद्धि होगी...।’’</p>
<p>पांडे ने कॉरपोरेट घरानों के बीच विवाद समाधान की सुविधा के लिए त्वरित (फास्ट-ट्रैक) अदालतें, मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने और कॉरपोरेट को उनके विवादों को सुलझाने में मदद करने के लिए न्यायिक परिवेश बेहतर बनाने का भी आग्रह किया।</p>
<p>सरकारी शोध संस्थान नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को उन कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है जो चीन से अपना विनिर्माण केंद्र स्थानांतरित करना चाहती हैं। यह बदलाव देश को अपनी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है खासकर उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों में..।</p>
<p>डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और नौकरशाही संबंधी बाधाओं को कम करने से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा निवेश परिदृश्य सुगम बनेगा।</p>
<p>मजूमदार ने कहा, ‘‘ बुनियादी ढांचे के विकास खासकर लॉजिस्टिक्स और डिजिटल संपर्क पर निरंतर जोर देना भी एफडीआई वृद्धि को समर्थन देने के लिए महत्वपूर्ण है।’’</p>
<p>भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह 2000 अप्रैल से 2024 सितंबर के बीच 1000 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया जिससे वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित तथा प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में देश की प्रतिष्ठा मजबूती से स्थापित हुई है।</p>
<p>डीपीआईआईटी के आंकड़ों के अनुसार, शेयर, पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी सहित एफडीआई की संचयी राशि उक्त अवधि के दौरान 1,033.40 अरब अमरीकी डॉलर रही।</p>
<p>डीपीआईआईटी एफडीआई नीति के निर्माण के लिए जिम्मेदार है, जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के तहत अधिसूचित नियमों के जरिये लागू किया जाता है। इसे आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा प्रशासित और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2024 12:24:53 +0530</pubDate>
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                <title>एफपीआई ने बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार से 976 करोड़ रुपये निकाले</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 22 दिसंबर (भाषा) लगातार दो सप्ताह तक लिवाल रहने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजारों से 976 करोड़ रुपये निकाले हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।</p>
<p>नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लि. के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की। पहले दो कारोबारी सत्रों (16-20 दिसंबर) के दौरान उन्होंने शेयरों में 3,126 करोड़ रुपये का निवेश किया। हालांकि, बाद में उनके रुख में बदलाव आया और उन्होंने तीन सत्रों में 4,102 करोड़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/113352/fpis-withdrew-rs-976-crore-from-the-indian-stock-market-last-week"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/foreign-investment-stock-market-fdi-fpi.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 22 दिसंबर (भाषा) लगातार दो सप्ताह तक लिवाल रहने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजारों से 976 करोड़ रुपये निकाले हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।</p>
<p>नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लि. के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की। पहले दो कारोबारी सत्रों (16-20 दिसंबर) के दौरान उन्होंने शेयरों में 3,126 करोड़ रुपये का निवेश किया। हालांकि, बाद में उनके रुख में बदलाव आया और उन्होंने तीन सत्रों में 4,102 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की। इस तरह सप्ताह के दौरान उन्होंने शुद्ध रूप से 976 करोड़ रुपये की निकासी की।</p>
<p>हालांकि, इसके बावजूद दिसंबर में एफपीआई का रुख सकारात्मक बना हुआ और उन्होंने माह के दौरान भारतीय शेयर बाजार में 21,789 करोड़ रुपये डाले हैं।</p>
<p>मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट निदेशक, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की बैठक और भविष्य की नीतिगत समीक्षा के नतीजों को लेकर अनिश्चितता के बीच एफपीआई सतर्क रुख अपना रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व ने इस साल तीसरी बार ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की है, लेकिन उसने भविष्य में दरों में कम कटौती का संकेत दिया है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई और वैश्विक बाजार में बिकवाली शुरू हो गई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसके अलावा ऊंचे मूल्यांकन, कंपनियों के सितंबर तिमाही के कमजोर नतीजों, दिसंबर के नतीजे कमजोर रहने के अनुमान, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि की सुस्त रफ्तार तथा रुपये में गिरावट से विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।</p>
<p>जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि डॉलर इंडेक्स में मजबूती तथा 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ने की वजह से एफपीआई बिकवाली कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत से संबंधित मुद्दे मसलन वृद्धि को लेकर चिंता तथा कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहने की वजह से भी एफपीआई की धारणा प्रभावित हुई है।</p>
<p>इससे पहले नवंबर में एफपीआई ने 21,612 करोड़ रुपये और अक्टूबर में 94,017 करोड़ रुपये की भारी निकासी की थी।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों में 57,724 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था, जो नौ माह का उच्चस्तर है।</p>
<p>डिपॉजिटरी के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में अबतक एफपीआई का भारतीय शेयर बाजारों में निवेश 6,770 करोड़ रुपये रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/113352/fpis-withdrew-rs-976-crore-from-the-indian-stock-market-last-week</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2024 12:36:01 +0530</pubDate>
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                        url="https://www.loktej.com/media/2024-12/foreign-investment-stock-market-fdi-fpi.jpg"                         length="360987"                         type="image/jpeg"  />
                
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