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                <title>Reserve Bank of India (RBI) - Loktej</title>
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                <description>Reserve Bank of India (RBI) RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अब 10 हजार से अधिक के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर लगेगा 1 घंटे का ‘होल्ड’, सुरक्षित बैंकिंग के लिए नया नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऑनलाइन और डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है।</p>
<p>आरबीआई द्वारा जारी डिस्कशन पेपर के अनुसार, अब ₹10,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर एक घंटे का ‘कूलिंग पीरियड’ अनिवार्य किया जा सकता है।</p>
<p>यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि साल 2025 में ही लगभग 28 लाख डिजिटल फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए, जिनमें आम जनता को ₹22,900 करोड़ से अधिक की चपत लगी।</p>
<p>चूंकि यूपीआई (UPI) और आईएमपीएस (IMPS) जैसी प्रणालियों में पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है, इसलिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146517/now-hold-of-1-hour-will-be-imposed-on-online"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 10 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऑनलाइन और डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है।</p>
<p>आरबीआई द्वारा जारी डिस्कशन पेपर के अनुसार, अब ₹10,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर एक घंटे का ‘कूलिंग पीरियड’ अनिवार्य किया जा सकता है।</p>
<p>यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि साल 2025 में ही लगभग 28 लाख डिजिटल फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए, जिनमें आम जनता को ₹22,900 करोड़ से अधिक की चपत लगी।</p>
<p>चूंकि यूपीआई (UPI) और आईएमपीएस (IMPS) जैसी प्रणालियों में पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है, इसलिए पीड़ित के पास शिकायत करने और ट्रांजेक्शन रोकने का समय नहीं बचता है।</p>
<p>प्रस्तावित नियमों के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी नए खाते में ₹10,000 से अधिक की राशि भेजता है, तो वह पैसा तुरंत क्रेडिट नहीं होगा बल्कि एक घंटे तक ‘प्रोविजनली डेबिट’ (होल्ड) रहेगा। इस बीच, यदि यूजर को महसूस होता है कि उसके साथ कोई धोखाधड़ी हुई है, तो वह उस भुगतान को रद्द कर सकेगा।</p>
<p>हालांकि, आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छोटे भुगतानों और नियमित मर्चेंट पेमेंट्स को इस नियम से बाहर रखा गया है। इससे आम जनता को बड़ी असुविधा नहीं होगी, जबकि बड़े फ्रॉड के मामलों में रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाएगी।</p>
<p>आरबीआई ने वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए और भी सख्त सुरक्षा मानकों का सुझाव दिया है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों द्वारा ₹50,000 से अधिक के पेमेंट पर ‘सेकेंडरी को-ऑथेंटिकेशन’ का नियम प्रस्तावित है, जिसके तहत किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी अनिवार्य हो सकती है।</p>
<p>इसके अलावा, एक ‘किल स्विच’ का भी विचार है, जिससे ग्राहक आपात स्थिति में अपने खाते के सभी डिजिटल चैनलों को तुरंत ब्लॉक कर सकेंगे। रिजर्व बैंक ने इन प्रस्तावों पर आम जनता और बैंकिंग विशेषज्ञों से 8 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद ही अंतिम गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 16:01:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई ने पेश की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए नीतिगत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया गया। गवर्नर ने बताया कि एमपीसी ने अपना रुख ‘तटस्थ’ बनाए रखा है, जिसका अर्थ है कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) 5.00 प्रतिशत और बैंक<br />रेट 5.50 प्रतिशत पर बरकरार रहेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146483/rbi-presented-the-first-monetary-policy-for-the-financial-year"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए नीतिगत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया गया। गवर्नर ने बताया कि एमपीसी ने अपना रुख ‘तटस्थ’ बनाए रखा है, जिसका अर्थ है कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) 5.00 प्रतिशत और बैंक<br />रेट 5.50 प्रतिशत पर बरकरार रहेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं और भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं।</p>
<p>गवर्नर ने अपने संबोधन में विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (इजरायल-ईरान-अमेरिका) का जिक्र किया, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।</p>
<p>उन्होंने स्वीकार किया कि मार्च के बाद से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, लेकिन भारत की आर्थिक बुनियाद अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत है।</p>
<p>रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7 प्रतिशत और महंगाई दर का अनुमान 4.5 प्रतिशत रखा है। आरबीआई का मुख्य लक्ष्य मुद्रास्फीति को टिकाऊ आधार पर 4 प्रतिशत के स्तर तक लाना है, जिसके लिए बैंक पूरी तरह सतर्क है।</p>
<p>रेपो रेट में बदलाव न होने से आम आदमी को राहत मिली है क्योंकि अब होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।</p>
<p>हालांकि, जो लोग ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें अभी और इंतजार करना होगा क्योंकि बैंक ने दरों को घटाने के संकेत नहीं दिए हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करने वाले निवेशकों के लिए भी ब्याज दरें मौजूदा स्तर पर ही बनी रहेंगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट और महंगाई को देखते हुए आरबीआई का यह ‘रुको और देखो’ वाला दृष्टिकोण बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 15:18:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर नियमों को 1 जुलाई तक के लिए टाला</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 01 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर से जुड़े अपने संशोधित नियमों को लागू करने की समयसीमा </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने बढ़ा दी है। अब ये नियम </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लागू होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पहले इन्हें </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल से लागू किया जाना था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी (सीएमआई) और इंडस्ट्री संगठनों से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है। इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में ऑपरेशनल और समझ से जुड़ी चुनौतियों की बात कही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरबीआई ने इन नियमों का ड्राफ्ट </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> फरवरी </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को जारी किया</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 01 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर से जुड़े अपने संशोधित नियमों को लागू करने की समयसीमा </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने बढ़ा दी है। अब ये नियम </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लागू होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पहले इन्हें </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल से लागू किया जाना था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी (सीएमआई) और इंडस्ट्री संगठनों से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है। इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में ऑपरेशनल और समझ से जुड़ी चुनौतियों की बात कही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरबीआई ने इन नियमों का ड्राफ्ट </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> फरवरी </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को जारी किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सार्वजनिक परामर्श भी किया गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरबीआई ने अधिग्रहण वित्तपोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय परिसंपत्तियों के खिलाफ लोन और सीएमआई को दिए जाने वाले क्रेडिट एक्सपोजर से जुड़े मामलों में भी कुछ स्पष्टता दी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नए नियमों के तहत अधिग्रहण फाइनेंस के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें मर्जर और अमलगमेशन (विलय) को भी शामिल किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पहले की अस्पष्टता दूर हो गई है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह फाइनेंस केवल उन मामलों में दिया जाएगा जहां किसी गैर-वित्तीय कंपनी पर नियंत्रण हासिल करना उद्देश्य हो।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अगर लक्षित कंपनी एक होल्डिंग कंपनी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित लाभ (सिनर्जी) उसकी सभी सब्सिडियरी कंपनियों में भी दिखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि सिर्फ मुख्य कंपनी में।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नए नियमों के तहत कंपनियों को अब अधिग्रहण फाइनेंस भारतीय या विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए लेने की अनुमति भी दी गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीफाइनेंसिंग के नियमों को सख्त किया गया है। बैंक अब अधिग्रहण लोन का रीफाइनेंस तभी कर सकेंगे जब डील पूरी हो जाए और कंपनी पर नियंत्रण स्थापित हो जाए। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पैसा सिर्फ पुराने अधिग्रहण लोन को चुकाने के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर अधिग्रहण फाइनेंस किसी सब्सिडियरी या स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) को दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी की कॉर्पोरेट गारंटी जरूरी होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बैंकों की सुरक्षा मजबूत होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस फैसले से बैंकों को अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को नए नियमों के मुताबिक ढालने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नए नियमों में स्पष्टता आने से कानूनी विवाद और जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश करने वाली कंपनियों के लिए यह ढांचा अधिग्रहण फाइनेंस के नए रास्ते खोलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन साथ ही नियंत्रण आधारित निवेश और सख्त रीफाइनेंसिंग नियमों के जरिए सीमाएं भी तय करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी के लिए आरबीआई ने कुछ राहत भी दी है। अब बैंक </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत नकद या नकद-जैसे कोलैटरल के बदले प्रोपरायटरी ट्रेडिंग के लिए फंडिंग दे सकेंगे। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार निर्माण गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली सिक्योरिटीज के खिलाफ फाइनेंसिंग पर लगी पाबंदियां भी हटा दी गई हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/146355/rbi-postpones-capital-market-exposure-rules-till-july-1</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 16:13:33 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका से व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 06 फरवरी (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।</p>
<p>महंगाई में नरमी, वृद्धि को लेकर चिंता दूर होने के साथ बजट में सरकारी खर्च में वृद्धि तथा अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद शुल्क को लेकर दबाव कम होने के बीच नीतिगत दर को यथावत रखने की उम्मीद की जा रही थी।</p>
<p>केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने का निर्णय लिया। इसके साथ आरबीआई ने अपने तटस्थ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145445/after-agreement-on-trade-agreement-with-america-rbi-maintained-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 06 फरवरी (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।</p>
<p>महंगाई में नरमी, वृद्धि को लेकर चिंता दूर होने के साथ बजट में सरकारी खर्च में वृद्धि तथा अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद शुल्क को लेकर दबाव कम होने के बीच नीतिगत दर को यथावत रखने की उम्मीद की जा रही थी।</p>
<p>केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने का निर्णय लिया। इसके साथ आरबीआई ने अपने तटस्थ रुख को बरकरार रखा, जिसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने एमपीसी के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि बाहरी चुनौतियां बढ़ गई हैं, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का सफल समापन अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।</p>
<p>आरबीआई ने फरवरी, 2025 से रेपो दर में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। यह 2019 के बाद से सबसे आक्रामक कटौती है। दिसंबर में हुई पिछली बैठक में आरबीआई ने प्रमुख ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के साथ अच्छी स्थिति में है। मुद्रास्फीति संतोषजनक सीमा से नीचे बनी हुई है और इसका परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है।”</p>
<p>मल्होत्रा ने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति से वृद्धि की गति लंबे समय तक बनी रहने की उम्मीद है।’’</p>
<p>चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति औसतन 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।</p>
<p>आरबीआई ने आगामी वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत (अप्रैल-जून) और 7.0 प्रतिशत (जुलाई-सितंबर) कर दिया है। हालांकि पूरे वर्ष के अनुमान को अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया है क्योंकि नई जीडीपी श्रृंखला इसी महीने जारी की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 16:12:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय अर्थव्यवस्था के चुनौतियों के बावजूद मजबूत वृद्धि कायम रखने की संभावनाः आरबीआई रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 31 दिसंबर (भाषा) वैश्विक आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत वृद्धि बनाए रखने की संभावना है और इसे मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति एवं संतुलित व्यापक आर्थिक नीतियों से समर्थन मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।</p>
<p>आरबीआई ने अपनी 'वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट' (एफएसआर) में कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी भंडार है, उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है और लाभ भी मजबूत बना हुआ है।</p>
<p>आरबीआई ने कहा, "घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144934/indian-economy-likely-to-maintain-strong-growth-despite-challenges-rbi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 31 दिसंबर (भाषा) वैश्विक आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत वृद्धि बनाए रखने की संभावना है और इसे मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति एवं संतुलित व्यापक आर्थिक नीतियों से समर्थन मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।</p>
<p>आरबीआई ने अपनी 'वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट' (एफएसआर) में कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी भंडार है, उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है और लाभ भी मजबूत बना हुआ है।</p>
<p>आरबीआई ने कहा, "घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत है जिसे सुदृढ़ बहीखाते, अनुकूल वित्तीय हालात और वित्तीय बाजारों में कम उतार-चढ़ाव से समर्थन मिला है। हालांकि, निकट अवधि में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता से जोखिम बने हुए हैं।"</p>
<p>केंद्रीय बैंक के व्यापक दबाव परीक्षण के परिणाम इसकी पुष्टि करते हैं कि बैंक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संभावित नुकसान सहन कर पाने में सक्षम हैं और उनकी पूंजी नियामकीय न्यूनतम स्तर से काफी ऊपर बनी रहेगी। रिपोर्ट में म्यूचुअल फंड कंपनियों और समाशोधन निगमों की स्थिति को भी मजबूत बताया गया है।</p>
<p>इसके अलावा, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पर्याप्त पूंजी, स्थिर आय और बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के कारण मजबूत बनी हुई हैं।</p>
<p>आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, बीमा क्षेत्र में भी बहीखाते की स्थिति मजबूत है और एकीकृत सॉल्वेंसी अनुपात भी तय न्यूनतम सीमा से ऊपर है। सॉल्वेंसी अनुपात बीमा क्षेत्र में किसी कंपनी की दीर्घकालिक देनदारियों को पूरा करने और पॉलिसीधारकों के दावों का भुगतान करने की क्षमता को मापता है।</p>
<p>यह रिपोर्ट वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति के उस सामूहिक आकलन को दर्शाती है, जिसमें भारतीय वित्तीय प्रणाली की मजबूती और वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 16:34:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई नकदी बढ़ाने को दो लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 23 दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि वह बैंकों में नकदी बढ़ाने के लिए दो लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। साथ ही 10 अरब अमेरिकी डॉलर की डॉलर-रुपया अदला-बदली नीलामी आयोजित करेगा।</p>
<p>ओएमओ (खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री) के तहत ये खरीद और अदला-बदली नीलामी 29 दिसंबर, 2025 से 22 जनवरी, 2026 के बीच आयोजित की जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय बैंक ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि वह नकदी और बाजार की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगा और सुचारू तरलता सुनिश्चित करने के लिए जरूरत के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144797/rbi-will-purchase-government-securities-worth-rs-2-lakh-crore"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 23 दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि वह बैंकों में नकदी बढ़ाने के लिए दो लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। साथ ही 10 अरब अमेरिकी डॉलर की डॉलर-रुपया अदला-बदली नीलामी आयोजित करेगा।</p>
<p>ओएमओ (खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री) के तहत ये खरीद और अदला-बदली नीलामी 29 दिसंबर, 2025 से 22 जनवरी, 2026 के बीच आयोजित की जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय बैंक ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि वह नकदी और बाजार की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगा और सुचारू तरलता सुनिश्चित करने के लिए जरूरत के मुताबिक कदम उठाएगा।</p>
<p>यह घोषणा रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार की प्रतिभूतियों की एक लाख करोड़ रुपये की ओएमओ खरीद नीलामी और तीन साल की अवधि के लिए पांच अरब अमेरिकी डॉलर के डॉलर/रुपया खरीद/बिक्री अदला-बदली नीलामी आयोजित करने के कुछ दिनों बाद आई है।</p>
<p>मौजूदा तरलता और वित्तीय स्थितियों की समीक्षा के बाद, केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को कहा कि उसने बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए ओएमओ और स्वैप संचालन आयोजित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>भारत सरकार की प्रतिभूतियों की कुल 2,00,000 करोड़ रुपये की ओएमओ के जरिये खरीद नीलामी 50,000 करोड़ रुपये की चार किस्तों में 29 दिसंबर, 2025, 5 जनवरी, 12 जनवरी और 22 जनवरी, 2026 को आयोजित की जाएगी।</p>
<p>आरबीआई ने कहा, ‘‘तीन साल की अवधि के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर की डॉलर/रुपया खरीद/बिक्री अदला-बदली नीलामी 13 जनवरी, 2026 को आयोजित की जाएगी।’’</p>
<p>यह अदला-बदली रिजर्व बैंक की ओर से एक साधारण खरीद/बिक्री विदेशी मुद्रा अदला-बदली है। एक बैंक रिजर्व बैंक को अमेरिकी डॉलर बेचेगा और साथ ही अदला-बदली अवधि के अंत में उतनी ही मात्रा में अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए सहमत होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144797/rbi-will-purchase-government-securities-worth-rs-2-lakh-crore</link>
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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 21:38:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई ने रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाई, कर्ज होंगे सस्ते</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, पांच दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को वृहद आर्थिक स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अमेरिकी शुल्क के प्रभावों से निपटने के लिए 'बेहद संतुलित' अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाले कदमों की भी घोषणा की।</p>
<p>आरबीआई के रेपो दर में कटौती से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज सस्ता होने की उम्मीद है।</p>
<p>अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144423/rbi-reduced-repo-rate-by-025-percent-loans-will-be"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, पांच दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को वृहद आर्थिक स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अमेरिकी शुल्क के प्रभावों से निपटने के लिए 'बेहद संतुलित' अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाले कदमों की भी घोषणा की।</p>
<p>आरबीआई के रेपो दर में कटौती से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज सस्ता होने की उम्मीद है।</p>
<p>अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा महंगाई दर के अनुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है।</p>
<p>इस तरह वर्ष 2025 में रेपो दर में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी से जून तक रेपो दर में कुल एक प्रतिशत की कटौती की थी। वहीं अगस्त और अक्टूबर में मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीस) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए इन निर्णयों की जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘एमपीसी ने आम सहमति से रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत करने का निर्णय किया है।"</p>
<p>रेपो दर में इस कटौती से आरबीआई ने डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 90 के भी पार चले जाने से जुड़ी आशंकाएं दरकिनार करने की कोशिश की है। इस साल डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में पांच प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है जो एशिया की सभी मुद्राओं के बीच सबसे खराब प्रदर्शन है।</p>
<p>रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं।</p>
<p>इसके साथ ही आरबीआई ने मौद्रिक नीति के रुख को तटस्थ बनाए रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।</p>
<p>आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।</p>
<p>वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 2.0 प्रतिशत कर दिया गया जबकि पहले इसके 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।</p>
<p>मल्होत्रा ने कहा कि आर्थिक वृद्धि जहां मजबूत बनी हुई है वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति में अक्टूबर से ही तीव्र गिरावट देखी गई है। खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के लिए निर्धारित दायरे की निचली सीमा से भी कम हो गई है।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर ने कहा, "वृद्धि एवं मुद्रास्फीति के बीच संतुलन, खासकर मुख्य एवं कुल मुद्रास्फीति दोनों मोर्चे पर अच्छे परिदृश्य की वजह से वृद्धि की रफ्तार को समर्थन देने के लिए नीतिगत गुंजाइश बनी हुई है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि खराब और मुश्किल बाहरी परिवेश के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जबर्दस्त जुझारू रवैया दिखाया है और उच्च वृद्धि दर्ज करने के लिए तैयार है। इसमें मुद्रास्फीति परिदृश्य से पैदा हुई गुंजाइश ने इसमें मदद की है।</p>
<p>गवर्नर ने कहा कि महंगाई के नरम रुख और मजबूत वृद्धि संकेतकों को देखते हुए आरबीआई उधारी लागत को कम करने और बाजार में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराने पर जोर देता रहेगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने के बाद भारतीय निर्यात दबाव में हैं। ऐसे माहौल में घरेलू मांग को मजबूत बनाए रखना एक प्रमुख प्राथमिकता बन गया है।</p>
<p>इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने इस महीने एक लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड की खरीद के लिए खुला बाजार परिचालन (ओएमओ) करने और नकदी बढ़ाने के लिए पांच अरब डॉलर का डॉलर-खरीद/बिक्री अदलाबदली करने की घोषणा की।</p>
<p>ओएमओ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंकों के पास कम ब्याज दरों का लाभ उपभोक्ताओं और उद्योग तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नकदी हो।</p>
<p>रिजर्व बैंक के इन कदमों पर डीबीएस बैंक में कार्यकारी निदेशक एवं वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि आरबीआई ने लगभग सभी मोर्चों पर बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय लिए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि निर्धारित सीमा से नीचे चल रही मुद्रास्फीति इस नीतिगत निर्णय का प्रमुख आधार रही।</p>
<p>आरबीएल बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनीता रंगन ने कहा कि रेपो दर में कटौती से रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है, लेकिन पांच अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा अदलाबदली इस बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक मुद्रा स्थिरता को लेकर सक्रिय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144423/rbi-reduced-repo-rate-by-025-percent-loans-will-be</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 15:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो 0.25 प्रतिशत घटाया, आर्थिक वृद्धि दर अनुमान बढ़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="content-profession">
<p>मुंबई, पांच दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को वृहद आर्थिक स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया। मजबूत आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति में नरमी के बीच आरबीआई ने नीतिगत दर में यह कटौती की है।</p>
<p>इसके साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा महंगाई दर के अनुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है।</p>
<p>इस तरह वर्ष 2025 में रेपो दर में अब</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144415/rbi-reduced-the-policy-rate-repo-by-025-percent-and"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><div class="content-profession">
<p>मुंबई, पांच दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को वृहद आर्थिक स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया। मजबूत आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति में नरमी के बीच आरबीआई ने नीतिगत दर में यह कटौती की है।</p>
<p>इसके साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा महंगाई दर के अनुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है।</p>
<p>इस तरह वर्ष 2025 में रेपो दर में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी से जून तक रेपो दर में कुल एक प्रतिशत की कटौती की थी। वहीं अगस्त और अक्टूबर में मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीस) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘एमपीसी ने आम सहमति से रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत करने का निर्णय किया है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसके साथ ही मौद्रिक नीति के रुख को तटस्थ बनाये रखा गया है।</p>
<p>इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।</p>
<p>रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। रेपो दर में कटौती होने से आवास, वाहन समेत अन्य खुदरा कर्ज पर ब्याज में बदलाव की संभावना है।</p>
<p>आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।</p>
<p>वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 2.0 प्रतिशत कर दिया गया जबकि पहले इसके 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।</p>
<p> </p>
<p> </p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 10:43:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत के यूपीआई, यूरोपीय संघ के टीआईपीएस को जोड़ने पर काम जारी: आरबीआई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 21 नवंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि यूपीआई को यूरोसिस्टम के टीआईपीएस (टार्गेट इंस्टेंट पेमेंट सटेलमेंट) से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।</p>
<p>केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह सीमा-पार धन प्रेषण को व्यावहारिक रूप से शुरू करने के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर काम करता रहेगा।</p>
<p>आरबीआई तथा एनपीसीपीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) यूरोसिस्टम द्वारा संचालित तत्काल भुगतान प्रणाली टीआईपीएस से यूपीआई को जोड़ने के इस प्रयास पर यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।</p>
<p>एक बयान में कहा गया, ''रचनात्मक और निरंतर बातचीत के बाद दोनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144191/rbi-continues-work-on-linking-indias-upi-with-eus-tips"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/d05042024-09-upi.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 21 नवंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि यूपीआई को यूरोसिस्टम के टीआईपीएस (टार्गेट इंस्टेंट पेमेंट सटेलमेंट) से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।</p>
<p>केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह सीमा-पार धन प्रेषण को व्यावहारिक रूप से शुरू करने के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर काम करता रहेगा।</p>
<p>आरबीआई तथा एनपीसीपीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) यूरोसिस्टम द्वारा संचालित तत्काल भुगतान प्रणाली टीआईपीएस से यूपीआई को जोड़ने के इस प्रयास पर यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।</p>
<p>एक बयान में कहा गया, ''रचनात्मक और निरंतर बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने यूपीआई-टीआईपीएस जुड़ाव के लिए कार्यान्वयन चरण को शुरू करने पर सहमति जताई है।''</p>
<p>आरबीआई ने कहा कि प्रस्तावित यूपीआई-टीआईपीएस जुड़ाव का मकसद भारत और यूरो क्षेत्र के बीच सीमा-पार धन प्रेषण को सुविधाजनक बनाना है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, ''भारतीय रिजर्व बैंक और एनआईपीएल यूपीआई-टीआईपीएस जुड़ाव को व्यावहारिक बनाने के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ निकट सहयोग जारी रखेंगे।''</p>
<p>आरबीआई सीमा-पार भुगतान को बढ़ावा देने के लिए दूसरे देशों की त्वरित भुगतान प्रणालियों से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को जोड़ने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 21:13:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई सावधानी से आगे बढ़ रहा, साहस की आवश्यकता के कारण बैंक मानदंडों में ढील दी गई: मल्होत्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, सात नवंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहा है लेकिन साहस दिखाने की आवश्यकता के कारण हाल ही में बैंकों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले नियमों में ढील दी गई है।</p>
<p>भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से यहां आयोजित कार्यक्रम में मल्होत्रा ​​ने साथ ही स्पष्ट किया कि बैंकों पर अधिक जिम्मेदारियां उनके बेहतर प्रदर्शन एवं बेहतर कामकाज के कारण हैं। केंद्रीय बैंक के पास किसी भी गलत व्यवहार पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त साधन मौजूद हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143918/rbi-is-moving-with-caution-as-bank-norms-are-relaxed"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/rbi-governer-sanjay-malhotra.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, सात नवंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहा है लेकिन साहस दिखाने की आवश्यकता के कारण हाल ही में बैंकों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले नियमों में ढील दी गई है।</p>
<p>भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से यहां आयोजित कार्यक्रम में मल्होत्रा ​​ने साथ ही स्पष्ट किया कि बैंकों पर अधिक जिम्मेदारियां उनके बेहतर प्रदर्शन एवं बेहतर कामकाज के कारण हैं। केंद्रीय बैंक के पास किसी भी गलत व्यवहार पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त साधन मौजूद हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आरबीआई सूक्ष्म प्रबंधन नहीं करना चाहता है। कोई भी नियामक ‘बोर्डरूम’ के निर्णय का स्थान नहीं ले सकता है और न ही उसे ऐसा करना चाहिए। प्रत्येक मामले को विनियमित संस्था द्वारा योग्यता के आधार पर देखा जाना चाहिए।</p>
<p>आरबीआई ने पिछले महीने कई उपायों की घोषणा की थी जिनमें बैंकों को घरेलू अधिग्रहणों के लिए धन मुहैया कराने और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए विदेशी उधारी लेने की अनुमति देना शामिल है।</p>
<p>पदभार ग्रहण करने के बाद से मल्होत्रा ​​ने कारोबार को आसान बनाने और किसी भी कदम की घोषणा करने से पहले नियमों को ध्यान में रखने पर जोर दिया है।</p>
<p>मल्होत्रा ​​ने इन कदमों के पीछे के तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘ ...जबकि हम सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं, हमें साहस भी दिखाना होगा।’’</p>
<p>गवर्नर ​​ने कहा कि अल्पकालिक वृद्धि के पीछे भागते हुए वित्तीय स्थिरता से समझौता करने से वृद्धि पर दीर्घकालिक प्रभाव होगा जिससे लागत बढ़ सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक को आर्थिक संदर्भ के प्रति सचेत रहने और संतुलन बनाने की आवश्यकता है।</p>
<p>रियल एस्टेट कंपनियों को विदेश से उधार लेने की अनुमति देने के कदम पर स्पष्टीकरण देते हुए मल्होत्रा ​​ने कहा कि ईसीबी की अनुमति केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मानदंडों के अनुरूप परियोजनाओं के लिए है। किसी भी सट्टा गतिविधि या भूमि खरीद के लिए यह प्रतिबंधित रहेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आरबीआई सार्वजनिक परामर्श और इस कदम के प्रभाव का आकलन करने के बाद नियम बनाने की प्रक्रिया को अधिक खुला, आंकड़ों एवं साक्ष्यों पर आधारित बनाने का प्रयास कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 14:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : एसजीसीसीआई ने ‘सेम डे चेक क्लियरिंग’ नियम एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत। दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मुख्य महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर ‘उसी दिन चेक क्लियरिंग’ (Same Day Cheque Clearing) नियम को एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है।</p>
<p>एसजीसीसीआई के अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक डिजिटल एवं तत्पर बनाने के उद्देश्य से रियल-टाइम चेक क्लियरेंस सिस्टम को 4 अक्टूबर 2025 से लागू किया था। इस प्रणाली के तहत, चेक उसी दिन क्लियर किए जाने थे। लेकिन शुरुआती दिनों में तकनीकी खामियों और सर्वर गड़बड़ियों के कारण कई चेक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143567/surat-sgcci-demands-suspension-of-same-day-check-clearing-rule"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-10/b11102025-06.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मुख्य महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर ‘उसी दिन चेक क्लियरिंग’ (Same Day Cheque Clearing) नियम को एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है।</p>
<p>एसजीसीसीआई के अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक डिजिटल एवं तत्पर बनाने के उद्देश्य से रियल-टाइम चेक क्लियरेंस सिस्टम को 4 अक्टूबर 2025 से लागू किया था। इस प्रणाली के तहत, चेक उसी दिन क्लियर किए जाने थे। लेकिन शुरुआती दिनों में तकनीकी खामियों और सर्वर गड़बड़ियों के कारण कई चेक क्लियरेंस अटक गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, “पहले जहाँ चेक कुछ ही घंटों में क्लियर हो जाते थे, वहीं अब व्यापारी और उद्योगपति पिछले 6-7 दिनों से भुगतान अटकने की शिकायत कर रहे हैं। बैंक कर्मियों को मैनुअल सिस्टम के जरिए दोबारा चेक क्लियर करने पड़ रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।”</p>
<p>मद्रासी ने आगे बताया कि चेक क्लियरेंस में विलंब के कारण दिवाली से पहले बाजार में नकदी प्रवाह पर असर पड़ा है। व्यापारियों को कच्चे माल की खरीद, मजदूरों के वेतन और रोजमर्रा के लेन-देन में कठिनाई हो रही है। “त्योहार के इस सीजन में नकदी की कमी का सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है, साथ ही त्वरित भुगतान प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ियों के चलते धोखाधड़ी की आशंका भी बढ़ रही है,” उन्होंने कहा।</p>
<p>इसी कारण एसजीसीसीआई ने आरबीआई से अनुरोध किया है कि ‘सेम डे चेक क्लियरिंग’ नियम को एक महीने के लिए अस्थायी रूप से स्थगित किया जाए, ताकि बैंकों को तकनीकी खामियों को दुरुस्त करने का समय मिल सके और व्यापार जगत पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 19:14:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई ने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बरकरार रखी: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोलकाता, चार अक्टूबर (भाषा) क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बरकरार रखी है।</p>
<p>आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने मुद्रास्फीति के अपने पूर्वानुमान में भारी कटौती की है।</p>
<p>केंद्रीय बैंक ने एक अक्टूबर को शुल्क अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए अपनी नीतिगत ब्याज दर को लगातार दूसरी बार 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा था।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि एमपीसी ने स्वीकार किया है कि अमेरिकी शुल्क के प्रभाव के कारण चालू वित्त वर्ष (2025-26) की दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्धि में गिरावट का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143420/rbi-upheld-the-possibility-of-cutting-interest-rates-in-future"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता, चार अक्टूबर (भाषा) क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बरकरार रखी है।</p>
<p>आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने मुद्रास्फीति के अपने पूर्वानुमान में भारी कटौती की है।</p>
<p>केंद्रीय बैंक ने एक अक्टूबर को शुल्क अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए अपनी नीतिगत ब्याज दर को लगातार दूसरी बार 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा था।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि एमपीसी ने स्वीकार किया है कि अमेरिकी शुल्क के प्रभाव के कारण चालू वित्त वर्ष (2025-26) की दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्धि में गिरावट का जोखिम रहेगा।</p>
<p>क्रिसिल इंटेलिजेंस ने कहा कि जीएसटी दरों में हालिया कमी से वृद्धि पर शुल्क का समग्र प्रभाव आंशिक रूप से कम हो जाएगा।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया, ''कुछ श्रम-प्रधान क्षेत्र अमेरिकी शुल्क के प्रभाव से सबसे अधिक संवेदनशील हैं और उन्हें नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है। चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति कम चिंता का विषय होने के साथ, अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो आरबीआई के लिए भी ऐसा करने की गुंजाइश बनेगी।''</p>
<p>आरबीआई ने फरवरी 2025 से नीतिगत दर में एक प्रतिशत की कटौती की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143420/rbi-upheld-the-possibility-of-cutting-interest-rates-in-future</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 14:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>

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