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                <title>Indian Space and Research Organization (ISRO) - Loktej</title>
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                <description>Indian Space and Research Organization (ISRO) RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आसमान से गिरा क्रू मॉड्यूल और खिल उठे वैज्ञानिकों के चेहरे, इसरो ने गगनयान में रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[<p>श्रीहरिकोटा, 10 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में तिरंगा फहराने के अपने सपने गगनयान की ओर एक और विशाल कदम बढ़ा दिया है।</p>
<p>श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में इसरो ने दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-02) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह परीक्षण इतना महत्वपूर्ण है कि इसकी सफलता ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षा को पक्का कर दिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस गौरवशाली उपलब्धि को देश के साथ साझा किया।</p>
<p>इस परीक्षण की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146519/crew-module-fell-from-the-sky-and-faces-of-scientists"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा, 10 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में तिरंगा फहराने के अपने सपने गगनयान की ओर एक और विशाल कदम बढ़ा दिया है।</p>
<p>श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में इसरो ने दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-02) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह परीक्षण इतना महत्वपूर्ण है कि इसकी सफलता ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षा को पक्का कर दिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस गौरवशाली उपलब्धि को देश के साथ साझा किया।</p>
<p>इस परीक्षण की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें एक डमी क्रू मॉड्यूल को कई किलोमीटर की ऊंचाई से नीचे गिराया गया। मिशन का सबसे मुश्किल हिस्सा तब होता है जब अंतरिक्ष यात्री 400 किलोमीटर ऊपर से वापस धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं।</p>
<p>उस वक्त मॉड्यूल की रफ्तार इतनी तेज होती है कि उसे सुरक्षित उतारने के लिए पैराशूट का सही क्रम में खुलना अनिवार्य है। आईएडीटी -02 ने साबित कर दिया कि भारत का पैराशूट सिस्टम और रिकवरी तकनीक पूरी तरह सटीक है।</p>
<p>गगनयान मिशन के तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 3 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाना है। इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती उन्हें सुरक्षित समुद्र में उतारना है। इसरो की इस सफलता ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि लैंडिंग के वक्त कोई अनहोनी नहीं होगी।</p>
<p>यह मिशन अगले साल के लिए निर्धारित है और ऐसी हर कामयाबी भारत को उन गिने-चुने देशों की कतार में खड़ा कर रही है जो इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 16:12:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘गगनयान’ की तैयारियों में बड़ी सफलता, ड्रोग पैराशूट का सफल लोड टेस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 19 फरवरी (वेब वार्ता)। भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को एक बड़ी सफलता मिली है। डीआरडीओ ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज सुविधा में किया गया।</p>
<p>बता दें कि गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है। इसे इसरो द्वारा पूरा किया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत 3 सदस्यीय भारतीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा में 3 दिनों के लिए भेजने और फिर उन्हें सुरक्षित वापस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145664/big-success-in-preparations-for-gaganyaan-successful-load-test-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 19 फरवरी (वेब वार्ता)। भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को एक बड़ी सफलता मिली है। डीआरडीओ ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज सुविधा में किया गया।</p>
<p>बता दें कि गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है। इसे इसरो द्वारा पूरा किया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत 3 सदस्यीय भारतीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा में 3 दिनों के लिए भेजने और फिर उन्हें सुरक्षित वापस लाने की योजना है।</p>
<p>दरअसल, ड्रोग पैराशूट अंतरिक्ष कैप्सूल की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाता है। यह पहले खुलकर कैप्सूल की गति कम करता है और उसे स्थिर करता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मुख्य पैराशूट सुरक्षित तरीके से खुल सके।</p>
<p>इस बार इसे वास्तविक उड़ान में आने वाले अधिकतम भार से भी अधिक दबाव में परखा गया, जिससे इसकी अतिरिक्त सुरक्षा क्षमता सिद्ध हुई। यानी इस बार जो टेस्ट किया गया, उसमें पैराशूट को असली उड़ान से भी ज्यादा दबाव वाली स्थिति में परखा गया।</p>
<p>ऐसे में अगर असली मिशन में हालात मुश्किल भी हों, तब भी यह पैराशूट सुरक्षित काम करेगा। यही कारण है कि डिजाइन में अतिरिक्त सुरक्षा रखी गई है। इस सफलता के बाद भारत ने साबित कर दिया है कि वह हाई-टेक और मजबूत पैराशूट खुद डिजाइन और बना सकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों को बधाई दी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं डिपार्टमेंट ऑफ डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट के सचिव तथा डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता पर टीमों को शुभकामनाएं दीं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि गगनयान मिशन की तैयारियों को और मजबूत बनाती है व भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान योजना के लिए अहम कदम मानी जा रही है।</p>
<p>इस सफलता के साथ भारत ने उच्च क्षमता वाले रिबन पैराशूट के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण में अपनी तकनीकी दक्षता सिद्ध की है। यह उपलब्धि अंतरिक्ष तथा रक्षा कार्यक्रमों के लिए उन्नत परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने में टीबीआरएल के योगदान को भी रेखांकित करती है।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस परीक्षण में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट तथा टीबीआरएल की विशेषज्ञ टीमों ने भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 20:52:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गगनयान कार्यक्रम के लिए पहले मानवरहित मिशन की दिशा में काम जारी : इसरो अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चेन्नई, 31 जनवरी (वेब वार्ता)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी नारायणन ने कहा है कि इसरो 2027 में निर्धारित अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के पहले मानवरहित मिशन की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p>गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है जिस पर वर्तमान में कार्य जारी है। इसका उद्देश्य तीन सदस्यीय दल को तीन दिवसीय अंतरिक्ष मिशन पर भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लाना है।</p>
<p>उन्होंने शुक्रवार देर रात पत्रकारों से कहा, ‘‘गगनयान कार्यक्रम 2027 में शुरू करने की योजना है। इससे पहले तीन मानवरहित मिशन की योजना बनाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145332/isro-chairman-continues-work-towards-first-unmanned-mission-for-gaganyaan"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई, 31 जनवरी (वेब वार्ता)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी नारायणन ने कहा है कि इसरो 2027 में निर्धारित अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के पहले मानवरहित मिशन की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p>गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है जिस पर वर्तमान में कार्य जारी है। इसका उद्देश्य तीन सदस्यीय दल को तीन दिवसीय अंतरिक्ष मिशन पर भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लाना है।</p>
<p>उन्होंने शुक्रवार देर रात पत्रकारों से कहा, ‘‘गगनयान कार्यक्रम 2027 में शुरू करने की योजना है। इससे पहले तीन मानवरहित मिशन की योजना बनाई गई है। हम पहले मानवरहित मिशन की दिशा में काम कर रहे हैं।’’</p>
<p>नारायणन ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वर्तमान में वैज्ञानिक इस मिशन की सफलता के लिए कई परीक्षण करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कई परीक्षण जारी हैं। आप जानते हैं कि गगनयात्रा की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी।</p>
<p>हमें हर प्रणाली की गुणवत्ता की जांच करनी होगी। रॉकेट प्रणाली में हमें शत प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे।’’नारायणन ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य (गगनयान की सफलता) है। हमें इसे बेहतरीन तरीके से करना है। हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं।’’</p>
<p>पीएसएलवी-सी62 मिशन के बारे में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मिशन में हर चीज का अध्ययन कर रहे हैं ताकि सबकुछ ठीक तरीके से किया जा सके। 12 जनवरी को प्रक्षेपण के बाद रॉकेट के तीसरे चरण में एक गड़बड़ी आ गई थी जिसके बाद वैज्ञानिकों ने मिशन का विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 16:19:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो का लक्ष्य श्रीहरिकोटा में चार साल के भीतर तीसरा प्रक्षेपण पैड विकसित करना है : वैज्ञानिक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चेन्नई, 28 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र पर तीसरा प्रक्षेपण पैड विकसित करने की प्रक्रिया में है और वर्तमान में इसके लिए उपयुक्त कंपनियों की तलाश की जा रही है। यह जानकारी एक शीर्ष वैज्ञानिक ने दी है।</p>
<p>तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित श्रीहरिकोटा परिसर 175 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी को विभिन्न प्रक्षेपण यानों के जरिये उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने की सेवा मुहैया कराता रहा है।</p>
<p>श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक और प्रख्यात वैज्ञानिक पद्मकुमार ईएस ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144875/isro-aims-to-develop-third-launch-pad-at-sriharikota-within"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई, 28 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र पर तीसरा प्रक्षेपण पैड विकसित करने की प्रक्रिया में है और वर्तमान में इसके लिए उपयुक्त कंपनियों की तलाश की जा रही है। यह जानकारी एक शीर्ष वैज्ञानिक ने दी है।</p>
<p>तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित श्रीहरिकोटा परिसर 175 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी को विभिन्न प्रक्षेपण यानों के जरिये उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने की सेवा मुहैया कराता रहा है।</p>
<p>श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक और प्रख्यात वैज्ञानिक पद्मकुमार ईएस ने कहा कि अंतरिक्ष में विभिन्न कक्षाओं में 12,000-14,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाले बड़े उपग्रहों को स्थापित करने की योजना पर आगे बढ़ने के लिए इसरो को बड़े प्रक्षेपण यानों की आवश्यकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इसरो तीसरे प्रक्षेपण पैड की योजना बना रहा है।</p>
<p>पद्मकुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से हालिया बातचीत में कहा, ‘‘हमारी योजना चार साल में तीसरा ‘लॉन्च पैड’ स्थापित कर संचालित करने की है। इसके लिए प्रक्रिया जारी है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम खरीद प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और इस विशाल परियोजना के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए उपयुक्त कंपनियों की पहचान कर रहे हैं।’’</p>
<p>पद्मकुमार ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि एक बार तीसरा प्रक्षेपण पैड चालू हो जाने के बाद, इसका उपयोग 14,000 किलोग्राम से अधिक वजन के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए किया जाएगा, जिन्हें अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों (एनजीएलवी) द्वारा कक्षा में ले जाया जाएगा।</p>
<p>इसरो ने 24 दिसंबर को लगभग 6,000 किलोग्राम वजनी अमेरिकी उपग्रह ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 को एलवीएम3-एम6 रॉकेट के जरिये पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित किया था। इसके साथ ही अंतरिक्ष एजेंसी ने पहली बार भारतीय धरती से इतने अधिक वजन का उपग्रह कक्षा में भेजा था।</p>
<p>पद्मकुमार ने बताया कि आगामी शृंखला के प्रक्षेपण यानों के लिए तीसरे प्रक्षेपण पैड की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘तीसरे प्रक्षेपण पैड का उपयोग मानवयुक्त और मानवरहित दोनों प्रकार के अभियानों के लिए किया जाएगा, जबकि पहले और दूसरे प्रक्षेपण पैड का उपयोग पीएसएलवी और जीएसएलवी रॉकेट को प्रक्षेपित करने के लिए किया जाता है।’’</p>
<p>तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कुलसेकरपट्टिनम में निर्माणाधीन इसरो प्रक्षेपण परिसर के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस सुविधा का उपयोग लघु उपग्रह प्रक्षेपण यानों (एसएसएलवी) को प्रक्षेपण करने के लिए किया जाएगा, जो उपग्रहों को पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित कर सकते हैं।</p>
<p>पद्मकुमार ने कहा, ‘‘इन उपग्रहों का वजन लगभग 500 किलोग्राम हो सकता है और इन्हें निम्न-स्तरीय विद्युत क्षेत्र (एलईओ) में स्थापित किया जा सकता है। ऐसे मिशनों के लिए, हम उस (कुलसेकरपट्टिनम) सुविधा का उपयोग करेंगे।’’</p>
<p>इसरो वर्तमान में तीन तरह के प्रक्षेपण यानों ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी), भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) और लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (एलवीएम3) का इस्तेमाल करता है। एलवीएम को पूर्व में भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान एमके-3 नाम से जाना जाता था।</p>
<p>इसरो के मुताबिक, अंतरिक्ष एजेंसी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर सतीश धवन की स्मृति में पांच सितंबर, 2002 को इस अंतरिक्ष केंद्र का नाम बदलकर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) कर दिया गया था।</p>
<p>इस अंतरिक्ष केंद्र का परिचालन अक्टूबर 1971 में ‘रोहिणी-125’ रॉकेट के प्रक्षेपण के साथ शुरू हुआ। तब से, अंतरिक्ष एजेंसी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए यहां की सुविधाओं का धीरे-धीरे विस्तार किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 18:49:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो के ‘बाहुबली’ प्रक्षेपण यान ने 6,000 किलोग्राम वजनी अमेरिकी उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 24 दिसंबर (भाषा) क्रिसमस से पहले, एक ऐतिहासिक मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सबसे भारी प्रक्षेपण यान ‘एलवीएम-3 एम6’ ने एक अमेरिकी संचार उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में बुधवार को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया जिसे अंतरिक्ष एजेंसी प्रमुख ने देश के लिए तोहफा करार दिया।</p>
<p>प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 ने 6,100 किलोग्राम वजनी ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ मिशन का उद्देश्य उपग्रह के जरिए सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह नेटवर्क कहीं भी, कभी भी, सभी के लिए 4जी और 5जी वॉयस-वीडियो कॉल,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144798/isros-bahubali-launch-vehicle-placed-6000-kg-american-satellite-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 24 दिसंबर (भाषा) क्रिसमस से पहले, एक ऐतिहासिक मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सबसे भारी प्रक्षेपण यान ‘एलवीएम-3 एम6’ ने एक अमेरिकी संचार उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में बुधवार को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया जिसे अंतरिक्ष एजेंसी प्रमुख ने देश के लिए तोहफा करार दिया।</p>
<p>प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 ने 6,100 किलोग्राम वजनी ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ मिशन का उद्देश्य उपग्रह के जरिए सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह नेटवर्क कहीं भी, कभी भी, सभी के लिए 4जी और 5जी वॉयस-वीडियो कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 को अत्यधिक भार ले जाने की उसकी क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ नाम भी दिया गया है। इसरो ने कहा कि ‘एलवीएम3-एम6’ ने सटीक प्रक्षेपण प्रक्रिया के तहत उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया।</p>
<p>यह मिशन ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए वाणिज्यिक समझौते के तहत संचालित किया गया। एनएसआईएल, इसरो की वाणिज्यिक इकाई है।</p>
<p>चौबीस घंटे की उल्टी गिनती पूरी होने के बाद दो एस-200 ठोस बूस्टर से युक्त 43.5 मीटर लंबा यान चेन्नई से लगभग 135 किलोमीटर पूर्व स्थित इस अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण ‘पैड’ से सुबह आठ बजकर 55 मिनट पर रवाना हुआ। करीब 15 मिनट की उड़ान के बाद ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ प्रक्षेपण यान से अलग हो गया और इसे सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया गया जिसके बाद यहां मिशन नियंत्रण केंद्र तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।</p>
<p>इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इस सफल प्रक्षेपण के बाद कहा, ‘‘मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि एलवीएम-3 एम-6 ‘बाहुबली’ प्रक्षेपण यान ने ‘ब्लूबर्ड-ब्लॉक 2’ उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। मैं इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर न्यू स्पेस इंडिया और एएसटी स्पेसमोबाइल को बधाई देता हूं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि उपग्रह को नियोजित 520 किलोमीटर ऊंचाई के मुकाबले 518 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एलवीएम-3 प्रक्षेपण यान ने अपनी 100 प्रतिशत सफलता दर का प्रदर्शन किया है।</p>
<p>इसरो ने बताया कि 6,100 किलोग्राम वजनी यह संचार उपग्रह एलवीएम3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी की निम्न कक्षा (एलईओ) में भारतीय धरती से स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी पेलोड है।</p>
<p>इससे पहले सबसे भारी पेलोड एलवीएम3-एम5 संचार उपग्रह-03 था, जिसका वजन करीब 4,400 किलोग्राम था और जिसे इसरो ने दो नवंबर को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था।</p>
<p>नारायणन के अनुसार, इसरो ने दो नवंबर को सफल ‘एम-5’ मिशन के बाद महज 52 दिनों के भीतर दो एलवीएम-3 प्रक्षेपण यानों का प्रक्षेपण पहली बार किया है।</p>
<p>उन्होंने मिशन नियंत्रण केंद्र से अपनी टीम को संबोधित करते हुए उन्हें इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इस मिशन के साथ भारत ने 34 देशों के लिए कुल 434 उपग्रह प्रक्षेपित कर दिए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘कड़ी मेहनत का पुरस्कार और अधिक काम होता है तथा हमारे पास कई कार्यक्रम हैं।’’</p>
<p>इसरो के अध्यक्ष ने ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ उपग्रह के सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए इसे ‘‘नववर्ष और क्रिसमस का भारत को उपहार’’ बताया। उन्होंने इसे उपलब्धियों से भरा वर्ष बताया और निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) मिशन, सीएमएस-03 और ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ जैसे महत्वपूर्ण मिशन का जिक्र किया।</p>
<p>उन्होंने महत्वाकांक्षी ‘गगनयान’ मिशन के बारे में कहा, ‘‘हमें मानवरहित मिशन पूरे करने हैं और हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’’</p>
<p>नारायणन अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक समूह पूरी तरह तैयार है और भारतीय स्टार्टअप का एक और प्रक्षेपण कुछ ही सप्ताह में निर्धारित है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यानों (एसएसएलवी) का विकास चरण पहले ही पूरा हो चुका है और ‘‘हम एसएसएलवी के परिचालन चरण को शुरू करने जा रहे हैं।’’</p>
<p>केंद्र सरकार की प्रमुख प्रतिबद्धताओं में से एक प्रतिबद्धता नेविगेशन उपग्रहों को स्थापित करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘उपग्रहों की उस श्रृंखला को हम जारी रख रहे हैं और हम उन्हें उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करना शुरू करेंगे।’’</p>
<p>‘एलवीएम-3 एम-6’ मिशन का उद्देश्य अगली पीढ़ी का ऐसा संचार उपग्रह स्थापित करना है जिसे दुनिया भर में स्मार्टफोन को सीधे उच्च गति वाली सेल्युलर ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>एएसटी स्पेसमोबाइल पहला और एकमात्र अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क बना रहा है जो सीधे स्मार्टफोन के माध्यम से सुलभ होगा और इसे वाणिज्यिक एवं सरकारी दोनों ऐप्लीकेशन के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, एमवीएम3 तीन चरण वाला प्रक्षेपण यान है जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा है। इसे इसरो के ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर’ ने विकसित किया है।</p>
<p>प्रक्षेपण के लिए आवश्यक अत्यधिक 'थ्रस्ट' प्रदान करने के लिए इस प्रक्षेपण यान में दो एस200 ठोस रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं जिन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने विकसित किया है।</p>
<p>एएसटी स्पेसमोबाइल ने सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड-1 से 5 तक पांच उपग्रह प्रक्षेपित किए थे जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में निरंतर इंटरनेट कवरेज प्रदान कर रहे हैं। कंपनी ने अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ऐसे और उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है और दुनिया भर के 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटर के साथ साझेदारी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144798/isros-bahubali-launch-vehicle-placed-6000-kg-american-satellite-in</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 14:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीहरिकोटा में इसरो के ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ मिशन के लिए उल्टी गिनती शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 23 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि अमेरिका के एक नए पीढ़ी के संचार उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम-एम6 रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए 24 घंटे की उल्टी गिनती मंगलवार को यहां शुरू हो गयी।</p>
<p>एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन के तहत इसरो बुधवार को सुबह 8.54 बजे इस अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण पैड से भारी सामान को ले जाने वाले अपने प्रक्षेपण यान एलवीएम3-एम6 के जरिए ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ का प्रक्षेपण करेगा।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि 6,100 किलोग्राम वजनी यह संचार उपग्रह एलवीएम3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144787/countdown-begins-for-isros-bluebird-block-2-mission-in-sriharikota"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 23 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि अमेरिका के एक नए पीढ़ी के संचार उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम-एम6 रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए 24 घंटे की उल्टी गिनती मंगलवार को यहां शुरू हो गयी।</p>
<p>एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन के तहत इसरो बुधवार को सुबह 8.54 बजे इस अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण पैड से भारी सामान को ले जाने वाले अपने प्रक्षेपण यान एलवीएम3-एम6 के जरिए ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ का प्रक्षेपण करेगा।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि 6,100 किलोग्राम वजनी यह संचार उपग्रह एलवीएम3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी की निम्न कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी पेलोड होगा।</p>
<p>इससे पहले सबसे भारी पेलोड एलवीएम3-एम5 संचार उपग्रह-03 था, जिसका वजन करीब 4,400 किलोग्राम था और जिसे इसरो ने दो नवंबर को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था।</p>
<p>बुधवार का यह मिशन ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए वाणिज्यिक समझौते के तहत संचालित किया जा रहा है। एनएसआईएल, इसरो की वाणिज्यिक इकाई है।</p>
<p>यह ऐतिहासिक मिशन अगली पीढ़ी का ऐसा संचार उपग्रह स्थापित करेगा, जिसे दुनिया भर में सीधे स्मार्टफोन को उच्च गति वाली सेल्युलर ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>प्रक्षेपण से पहले इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने 23 दिसंबर को तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की।</p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, 43.5 मीटर ऊंचा एमवीएम3 तीन चरणों वाला रॉकेट है, जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा है। इसे इसरो के ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर’ ने विकसित किया है।</p>
<p>प्रक्षेपण के लिए आवश्यक अत्यधिक थ्रस्ट प्रदान करने के लिए इस प्रक्षेपण यान में दो एस200 ठोस रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं, जिन्हें विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने विकसित किया है। प्रक्षेपण के लगभग 15 मिनट बाद ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ उपग्रह के रॉकेट से अलग होने की उम्मीद है।</p>
<p>ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन का उद्देश्य उपग्रह के जरिए सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह नेटवर्क दुनिया में कहीं भी, कभी भी, सभी के लिए 4जी और 5जी वॉयस-वीडियो कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>एएसटी स्पेसमोबाइल ने सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड-1 से 5 तक पांच उपग्रह प्रक्षेपित किए थे, जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में निरंतर इंटरनेट कवरेज प्रदान कर रहे हैं। कंपनी ने अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ऐसे और उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है और दुनिया भर के 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144787/countdown-begins-for-isros-bluebird-block-2-mission-in-sriharikota</link>
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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 16:47:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो प्रमुख नारायणन ने अंतरिक्ष मिशन से पहले तिरुमला में पूजा-अर्चना की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तिरुपति, 22 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ मिशन से पहले सोमवार को यहां तिरुपति मंदिर में पूजा-अर्चना की।</p>
<p>इसरो बुधवार (24 दिसंबर) को एलवीएम3-एम6/ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन का प्रक्षेपण करने वाला है। यह एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन होगा, जिसे एलवीएम3 प्रक्षेपण यान के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह ऐतिहासिक मिशन अमेरिका आधारित एएसटी स्पेसमोबाइल के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाएगा।</p>
<p>अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों के साथ मौजूद नारायणन ने कथित रूप से दर्शन पूजन करते समय प्रक्षेपण रॉकेट की सूक्ष्म प्रतिकृति भी रखी हुई थी।</p>
<p>नारायणन ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144769/isro-chief-narayanan-offers-prayers-at-tirumala-before-space-mission"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>तिरुपति, 22 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ मिशन से पहले सोमवार को यहां तिरुपति मंदिर में पूजा-अर्चना की।</p>
<p>इसरो बुधवार (24 दिसंबर) को एलवीएम3-एम6/ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन का प्रक्षेपण करने वाला है। यह एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन होगा, जिसे एलवीएम3 प्रक्षेपण यान के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह ऐतिहासिक मिशन अमेरिका आधारित एएसटी स्पेसमोबाइल के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाएगा।</p>
<p>अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों के साथ मौजूद नारायणन ने कथित रूप से दर्शन पूजन करते समय प्रक्षेपण रॉकेट की सूक्ष्म प्रतिकृति भी रखी हुई थी।</p>
<p>नारायणन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘24 दिसंबर को हम ब्लूबर्ड-2 का प्रक्षेपण करने वाले हैं… हमारे बाहुबली रॉकेट…एम6 रॉकेट का उपयोग करके।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत की धरती से प्रक्षेपित किए जाने वाले अब तक के सबसे भारी उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाने का है।</p>
<p>इसरो प्रमुख के अनुसार, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह का उपयोग 4जी और 5जी संचार उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144769/isro-chief-narayanan-offers-prayers-at-tirumala-before-space-mission</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 16:37:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg"                         length="57418"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो अगले साल मार्च तक गगनयान सहित सात अभियान प्रक्षेपित करेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अगले साल मार्च तक सात प्रक्षेपण अभियानों की योजना बनाई है, जिनमें उपग्रह और क्वांटम-की वितरण प्रौद्योगिकियों के लिए स्वदेशी रूप से निर्मित इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणालियों का प्रदर्शन आंकने वाला मिशन और गगनयान परियोजना से जुड़ा पहला मानवरहित अभियान शामिल है।</p>
<p>इन सात प्रक्षेपणों में से पहला प्रक्षेपण अगले हफ्ते होने की संभावना है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में संसद को बताया कि भारत का सबसे भारी रॉकेट ‘एलवीएम3’ इसरो की न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए एक वाणिज्यिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144596/isro-will-launch-seven-missions-including-gaganyaan-by-march-next"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अगले साल मार्च तक सात प्रक्षेपण अभियानों की योजना बनाई है, जिनमें उपग्रह और क्वांटम-की वितरण प्रौद्योगिकियों के लिए स्वदेशी रूप से निर्मित इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणालियों का प्रदर्शन आंकने वाला मिशन और गगनयान परियोजना से जुड़ा पहला मानवरहित अभियान शामिल है।</p>
<p>इन सात प्रक्षेपणों में से पहला प्रक्षेपण अगले हफ्ते होने की संभावना है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में संसद को बताया कि भारत का सबसे भारी रॉकेट ‘एलवीएम3’ इसरो की न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए एक वाणिज्यिक करार के तहत ‘ब्लूबर्ड-6’ संचार उपग्रह को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करेगा।</p>
<p>‘ह्यूमन रेटेड’ एलवीएम3 साल 2026 की शुरुआत में एक बार फिर उड़ान भरेगा, जिसके जरिये भारत के मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान ‘गगनयान’ का पहला मानवरहित यान ‘व्योममित्र’ नाम के एक रोबोट को लेकर अंतरिक्ष की कक्षा में दाखिल होगा।</p>
<p>‘ह्यूमन रेटेड’ एक प्रमाणन प्रणाली है, जो दर्शाती है कि कोई अंतरिक्ष यान या प्रक्षेपण वाहन मनुष्यों को अंतरिक्ष में सुरक्षित रूप से ले जाने में सक्षम है।</p>
<p>‘गगनयान’ के तहत 2027 में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने से पहले इसरो ने अगले साल के अंत में एक और मानवरहित मिशन की योजना बनाई है।</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘गगनयान का पहला मानवरहित अभियान, मिशन की शुरुआत से लेकर अंत तक विभिन्न पहलुओं का आकलन करेगा, जिसमें ‘ह्यूमन रेटेड’ प्रक्षेपण वाहन के वायुगतिकीय पैमाने, कक्षीय मॉड्यूल के विभिन्न हिस्सों का प्रदर्शन और चालक दल मॉड्यूल के पुनः प्रवेश एवं पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया शामिल है।’’</p>
<p>अगले साल उद्योग जगत द्वारा पहली बार निर्मित ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) का भी प्रक्षेपण किया जाएगा, जो ओशनसैट उपग्रह को कक्षा में स्थापित करेगा। पीएसएलवी अपने साथ दो अन्य उपग्रह भी ले जाएगा, जिनमें भारत-मॉरीशस संयुक्त उपग्रह और ध्रुव स्पेस का ‘लीप-2’ उपग्रह शामिल हैं।</p>
<p>उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण को बढ़ावा देने के लिए, एनएसआईएल ने इस साल सितंबर में हस्ताक्षरित एक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत, एचएएल-एलएंडटी कंसोर्टियम को पांच पीएसएलवी रॉकेट के निर्माण का ठेका दिया था।</p>
<p>इसरो निर्मित पीएसएलवी एक रणनीतिक उपयोगकर्ता के लिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस-एन1) और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के 18 छोटे उपग्रहों को भी अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करेगा।</p>
<p>वहीं, जीएसएलवी-एमके2 रॉकेट से ईओएस-5 उपग्रह या जीआईसैट-1ए का प्रक्षेपण किए जाने की उम्मीद है, जो 2021 में निर्धारित कक्षा में पहुंचने में विफल रहे जीआईसैट-1 की जगह लेगा।</p>
<p>इसरो का पीएसएलवी63 मिशन टीडीएस-01 उपग्रह को कक्षा में स्थापित करेगा, ताकि उच्च थ्रस्ट वाली इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली, क्वांटम-की वितरण और स्वदेशी यात्रा-तरंग नली प्रवर्धक जैसी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन आंका जा सके।</p>
<p>उच्च थ्रस्ट वाली इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली की मदद से इसरो भविष्य में पूर्ण विद्युतीकृत उपग्रहों के प्रक्षेपण में सक्षम हो सकेगा। यह तकनीक उपग्रहों को हल्का बनाएगी और रासायनिक ईंधन पर निर्भरता घटाएगी।</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘टीडीएस-01 में इस्तेमाल प्रौद्योगिकियों और घटकों की आजमाइश में खरा उतरने के बाद इन्हें निकट भविष्य में नौवहन और संचार अभियानों में शामिल किया जाएगा।’’</p>
<p>इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि चार टन के एक संचार उपग्रह में दो टन से अधिक तरल ईंधन भरा होता है, जिसका इस्तेमाल उपग्रह को अंतरिक्ष में दिशा देने के लिए ‘थ्रस्टर’ को सक्रिय करने में किया जाता है, लेकिन विद्युत प्रणोदन के मामले में ईंधन की आवश्यकता घटकर महज 200 किलोग्राम रह जाती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईंधन की आवश्यकता घटने की सूरत में विद्युत प्रणोदन प्रणाली पर आधारित उपग्रह का वजन दो टन से अधिक नहीं रह जाएगा, लेकिन फिर भी इसमें चार टन के उपग्रह जितनी ताकत होगी।</p>
<p>स्वदेशी यात्रा-तरंग नली प्रवर्धक ‘सैटेलाइट ट्रांसपॉन्डर’ से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मददगार साबित होगा।</p>
<p>लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) मार्च 2026 से पहले एक समर्पित उपग्रह भी प्रक्षेपित करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 21:09:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो ‘एलवीएम3-एम5’ के जरिए भारत से सबसे भारी संचार उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए पूरी तरह तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) एक नवंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का 4,000 किलोग्राम से अधिक वजनी संचार उपग्रह सीएमएस-03 रविवार को इस अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किए जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि लगभग 4,410 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रक्षेपित किया जाने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा। यह उपग्रह एलवीएम3-एम5 रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसे इसकी भारी भारोत्तोलन क्षमता के लिए ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को बताया कि प्रक्षेपण यान को पूरी तरह से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143818/isro-all-set-to-launch-indias-heaviest-communication-satellite-through"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) एक नवंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का 4,000 किलोग्राम से अधिक वजनी संचार उपग्रह सीएमएस-03 रविवार को इस अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किए जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि लगभग 4,410 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रक्षेपित किया जाने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा। यह उपग्रह एलवीएम3-एम5 रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसे इसकी भारी भारोत्तोलन क्षमता के लिए ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को बताया कि प्रक्षेपण यान को पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है और अंतरिक्ष यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है तथा इसे प्रक्षेपण-पूर्व कार्यों के लिए यहां दूसरे प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया गया है।</p>
<p>इसरो ने बताया कि 4,000 किलोग्राम तक भारी पेलोड ले जाने की क्षमता के कारण 'बाहुबली' नाम से जाना जाने वाला 43.5 मीटर लंबा यह यान दो नवंबर यानी रविवार को शाम पांच बजकर 26 मिनट पर प्रक्षेपित होगा।</p>
<p>उसने बताया कि एलवीएम3 (प्रक्षेपण यान मार्क-3) इसरो का भारी वजन वहन करने वाला नया प्रक्षेपण यान है और इसका उपयोग 4,000 किलोग्राम के अंतरिक्ष यान को लागत प्रभावी तरीके से जीटीओ में स्थापित करने के लिए किया जाएगा।</p>
<p>दो ठोस मोटर ‘स्ट्रैप-ऑन’ (एस200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (एल110) और एक क्रायोजेनिक चरण (सी25) वाला यह तीन चरणीय प्रक्षेपण यान इसरो को जीटीओ में 4,000 किलोग्राम तक वजन वाले भारी संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्रदान करता है।</p>
<p>एलवीएम3- को इसरो के वैज्ञानिक भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) एमके3 भी कहते हैं।</p>
<p>इसरो ने कहा कि एलवीएम3-एम5 पांचवीं अभियानगत उड़ान है।</p>
<p>इससे पहले, अंतरिक्ष एजेंसी ने पांच दिसंबर, 2018 को एरियन-5 वीए-246 रॉकेट के जरिए फ्रेंच गुयाना के कौरू प्रक्षेपण केंद्र से अपने सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-11 को प्रक्षेपित किया था। लगभग 5,854 किलोग्राम वजनी जीसैट-11 इसरो द्वारा निर्मित सबसे भारी उपग्रह है।</p>
<p>इसरो ने कहा कि रविवार के मिशन का उद्देश्य यह है कि बहु-बैंड संचार उपग्रह सीएमएस-03 भारतीय भूभाग सहित एक विस्तृत समुद्री क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा।</p>
<p>एलवीएम-3 रॉकेट ने इससे पहले चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया था, जिसके जरिए भारत 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बन गया।</p>
<p>एलवीएम3 यान अपने शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण के साथ 4,000 किलोग्राम वजन का पेलोड जीटीओ तक तथा 8,000 किलोग्राम वजन का पेलोड पृथ्वी की निचली कक्षा तक ले जाने में सक्षम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 15:27:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान 400 वैज्ञानिकों ने चौबीसों घंटे किया कार्य : इसरो प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने मंगलवार को बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पृथ्वी अवलोकन और संचार उपग्रहों के माध्यम से सहायता प्रदान करने के लिए 400 से अधिक वैज्ञानिकों ने चौबीसों घंटे काम किया।</p>
<p>अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (एआईएमए) के 52वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए नारायणन ने कहा कि इसरो ने राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए उपग्रह डेटा उपलब्ध कराया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सभी उपग्रह चौबीसों घंटे सक्रिय थे और सभी आवश्यकताओं को पूरा कर रहे थे।”</p>
<p>नारायणन ने कहा ‘‘400 से अधिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142979/during-operation-sindoor-400-scientists-did-work-round-the-clock"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने मंगलवार को बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पृथ्वी अवलोकन और संचार उपग्रहों के माध्यम से सहायता प्रदान करने के लिए 400 से अधिक वैज्ञानिकों ने चौबीसों घंटे काम किया।</p>
<p>अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (एआईएमए) के 52वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए नारायणन ने कहा कि इसरो ने राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए उपग्रह डेटा उपलब्ध कराया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सभी उपग्रह चौबीसों घंटे सक्रिय थे और सभी आवश्यकताओं को पूरा कर रहे थे।”</p>
<p>नारायणन ने कहा ‘‘400 से अधिक वैज्ञानिक दिन-रात, पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे थे और मिशन के दौरान सभी पृथ्वी अवलोकन और संचार उपग्रह पूरी तरह से सक्रिय थे।”</p>
<p>इसरो प्रमुख ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सशस्त्र संघर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका पर विशेष ध्यान गया। इस दौरान ड्रोन और स्वदेशी ‘आकाश तीर’ जैसी वायु रक्षा प्रणालियों की क्षमताओं की व्यापक जांच हुई।</p>
<p>इसरो प्रमुख ने बताया कि मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' परियोजना के तहत अब तक 7,700 से अधिक जमीनी परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं और आगामी मानव अंतरिक्ष उड़ान से पहले 2,300 परीक्षण और किए जाएंगे।</p>
<p>‘गगनयान’ मिशन के तहत इसरो बिना चालक दल वाले तीन मिशन संचालित करेगा, जिनमें पहला मिशन इस वर्ष दिसंबर में अपेक्षित है। इसके बाद दो और मानव रहित मिशन होंगे।</p>
<p>‘गगनयान’ परियोजना के तहत दो मानवयुक्त मिशनों के संचालन के लिए भी अनुमोदन मिल चुका है।</p>
<p>नारायणन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसरो को 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य सौंपा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/142979/during-operation-sindoor-400-scientists-did-work-round-the-clock</link>
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                <pubDate>Tue, 09 Sep 2025 15:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल्द ही कोई हमारी धरती, हमारे रॉकेट से अंतरिक्ष की यात्रा करेगा : शुभांशु शुक्ला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के सफल मिशन से उत्साहित भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जताई कि बहुत जल्द ही कोई ‘‘हमारे अपने कैप्सूल से, हमारे रॉकेट से, हमारी धरती से’’ अंतरिक्ष की यात्रा करेगा।</p>
<p>ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आईएसएस मिशन का प्रत्यक्ष अनुभव अमूल्य था और किसी भी प्रशिक्षण से कहीं बेहतर था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत आज भी ‘‘सारे जहां से अच्छा’’ दिखता है। ये शब्द पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने 1984 में अपने अंतरिक्ष मिशन के बाद कहे थे।</p>
<p>अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142624/soon-some-of-our-earth-will-travel-to-space-with"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/isro-indian-space-mission-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के सफल मिशन से उत्साहित भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जताई कि बहुत जल्द ही कोई ‘‘हमारे अपने कैप्सूल से, हमारे रॉकेट से, हमारी धरती से’’ अंतरिक्ष की यात्रा करेगा।</p>
<p>ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आईएसएस मिशन का प्रत्यक्ष अनुभव अमूल्य था और किसी भी प्रशिक्षण से कहीं बेहतर था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत आज भी ‘‘सारे जहां से अच्छा’’ दिखता है। ये शब्द पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने 1984 में अपने अंतरिक्ष मिशन के बाद कहे थे।</p>
<p>अपने ‘एक्सिओम-4’ मिशन को लेकर शुक्ला ने कहा कि आईएसएस मिशन से प्राप्त अनुभव भारत के अपने ‘गगनयान’ मिशन के लिए बहुत उपयोगी होगा और उन्होंने पिछले वर्ष अपने मिशन के दौरान बहुत कुछ सीखा है।</p>
<p>अंतरिक्ष यात्री ने कहा, ‘‘चाहे आपने कितना भी प्रशिक्षण लिया हो, उसके बाद भी, जब आप रॉकेट में बैठते हैं और इंजन चालू होता तथा वह उड़ान भरता है तो मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही अलग एहसास होता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि यह कैसा लगेगा। रॉकेट में बैठने से वापस लौटने पर उसके समुद्र में उतरने तक का अनुभव अविश्वसनीय था। यह इतना रोमांचक और अद्भुत था कि मेरे पास इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/142624/soon-some-of-our-earth-will-travel-to-space-with</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 15:05:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : 'तापी के तारे' अभियान के तहत 28 आदिवासी बच्चे इसरो का दौरा कर लौटे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत। 'विज्ञान सेतु-तापी के तारे' परियोजना के तहत इसरो की शैक्षिक यात्रा पर गए तापी जिले के 28 आदिवासी बच्चे आज सफलतापूर्वक सूरत लौट आए। आदिवासी विकास एवं शिक्षा मंत्री<strong> </strong>डॉ. कुबेरभाई डिंडोर और वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री मुकेशभाई पटेल<strong> </strong>ने सूरत हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया और उनके अनुभवों को जाना।</p>
<p>यह यात्रा 10 से 13 अगस्त तक आयोजित की गई थी, जिसमें तापी जिले के 15 सरकारी स्कूलों के विज्ञान संकाय के 28 छात्रों ने भाग लिया था। इन बच्चों ने पहली बार हवाई यात्रा का अनुभव भी किया।</p>
<p>इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. कुबेरभाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142517/28-tribal-children-returned-after-visiting-isro-under-tapis-taare"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-08/b13082025-05.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। 'विज्ञान सेतु-तापी के तारे' परियोजना के तहत इसरो की शैक्षिक यात्रा पर गए तापी जिले के 28 आदिवासी बच्चे आज सफलतापूर्वक सूरत लौट आए। आदिवासी विकास एवं शिक्षा मंत्री<strong> </strong>डॉ. कुबेरभाई डिंडोर और वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री मुकेशभाई पटेल<strong> </strong>ने सूरत हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया और उनके अनुभवों को जाना।</p>
<p>यह यात्रा 10 से 13 अगस्त तक आयोजित की गई थी, जिसमें तापी जिले के 15 सरकारी स्कूलों के विज्ञान संकाय के 28 छात्रों ने भाग लिया था। इन बच्चों ने पहली बार हवाई यात्रा का अनुभव भी किया।</p>
<p>इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. कुबेरभाई डिंडोर ने कहा कि तापी जिला प्रशासन की यह पहल बेहद प्रेरणादायक है, जिसका उद्देश्य आदिवासी बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को अन्य आदिवासी जिलों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि ऐसी अभिनव यात्राएँ बच्चों की कल्पना और सपनों को नई उड़ान देती हैं, जिससे वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने 'जय विज्ञान, जय अनुसंधान' के नारे का जिक्र करते हुए विज्ञान के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p>तापी जिले के प्रभारी मंत्री मुकेशभाई पटेल ने कहा कि बच्चों ने इसरो के शोध कार्यों, अंतरिक्ष विज्ञान और भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को करीब से देखा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समूह के अधिक से अधिक बच्चे वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करेंगे।</p>
<p>कैसे हुआ छात्रों का चयन?</p>
<p>इन 28 छात्रों का चयन एक विशेष प्रक्रिया के तहत किया गया था। तापी जिले के 15 सरकारी स्कूलों के कक्षा 11 और 12 के विज्ञान के छात्रों के लिए एक 100 अंकों की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें कक्षा 9 और 10 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों से प्रश्न पूछे गए थे। इस परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को इस शैक्षिक दौरे के लिए चुना गया।</p>
<p>छात्रों ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (इसरो) में प्रक्षेपण केंद्र की तकनीक, रॉकेट लॉन्च प्रक्रिया, रॉकेट के प्रकार और उपग्रहों के उपयोग के बारे में वैज्ञानिकों से जानकारी प्राप्त की। सभी छात्रों ने एक स्वर में कहा कि यह भ्रमण उनके लिए विज्ञान में करियर बनाने के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव रहा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 21:02:16 +0530</pubDate>
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