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                <title>NASA - Loktej</title>
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                <description>NASA RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आर्टेमिस II मिशन के अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा कर पृथ्वी पर पहुंचे: नासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाशिंगटन, 11 अप्रैल (वेब वार्ता)। नासा ने कहा कि आर्टेमिस II मिशन के तहत चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौट आए हैं।</p>
<p>आर्टेमिस II के चालक दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर (पायलट), क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ) और सीएसए के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन (मिशन विशेषज्ञ) शामिल थे और उन्होंने 10 दिनों के मिशन के बाद सैन डिएगो के तट पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की।</p>
<p>नासा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा: “रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी का घर वापसी पर स्वागत है! आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री पूर्वी समयानुसार रात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146530/astronauts-of-artemis-ii-mission-reach-earth-after-orbiting-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/moon.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन, 11 अप्रैल (वेब वार्ता)। नासा ने कहा कि आर्टेमिस II मिशन के तहत चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौट आए हैं।</p>
<p>आर्टेमिस II के चालक दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर (पायलट), क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ) और सीएसए के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन (मिशन विशेषज्ञ) शामिल थे और उन्होंने 10 दिनों के मिशन के बाद सैन डिएगो के तट पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की।</p>
<p>नासा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा: “रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी का घर वापसी पर स्वागत है! आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री पूर्वी समयानुसार रात 8:07 बजे (भारतीय समयानुसार 11 अप्रैल को सुबह 5:37 बजे) लैंड किए, जिससे चंद्रमा के चारों ओर उनका ऐतिहासिक 10 दिवसीय मिशन समाप्त हो गया।”</p>
<p>अंतरिक्ष यान को एक अप्रैल की शाम को स्थानीय समयानुसार फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से लॉन्च किया गया था। नासा ने छह अप्रैल को बताया कि अंतरिक्ष यान पृथ्वी से 4,06,000 किलोमीटर से अधिक दूर था।</p>
<p>रीड वाइजमैन के नेतृत्व में चार सदस्यीय आर्टेमिस II दल ने दस दिवसीय चंद्र उड़ान पूरी की, जो 50 से अधिक वर्षों में चंद्रमा पर पहली मानवयुक्त यात्रा और सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष उड़ान को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 14:40:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासा ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से खोजी डार्क मैटर से बनी घोस्ट गैलेक्सी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाशिंगटन, 23 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका की अंतरिक्ष अन्वेषण, वैमानिकी अनुसंधान और नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सरकारी एजेंसी राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन ( नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) यानी नासा के खगोलविदों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से डार्क मैटर से बनी भूतिया आकाशगंगा (घोस्ट गैलेक्सी) का पता लगाया है।</p>
<p>यह 99 प्रतिशत डार्क मैटर से बनी है। खगोलविदों का दावा है कि यह रहस्यमयी आकाशगंगा में से एक  सीडीजी-2 है।</p>
<p>नासा ने इस उपलब्धि का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। इसमें कहा गया है कि हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई इस तस्वीर में दिखाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145716/nasa-discovered-ghost-galaxy-made-of-dark-matter-with-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/space-earth-moon-astrology-galaxy.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन, 23 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका की अंतरिक्ष अन्वेषण, वैमानिकी अनुसंधान और नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सरकारी एजेंसी राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन ( नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) यानी नासा के खगोलविदों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से डार्क मैटर से बनी भूतिया आकाशगंगा (घोस्ट गैलेक्सी) का पता लगाया है।</p>
<p>यह 99 प्रतिशत डार्क मैटर से बनी है। खगोलविदों का दावा है कि यह रहस्यमयी आकाशगंगा में से एक  सीडीजी-2 है।</p>
<p>नासा ने इस उपलब्धि का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। इसमें कहा गया है कि हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई इस तस्वीर में दिखाई गई कम सतह वाली गैलेक्सी सीडीजी-2 में डार्क मैटर ज्यादा है और इसमें तारों का बहुत कम बिखराव है।</p>
<p>यह गैलेक्सी लगभग दिखाई नहीं देती, लेकिन एडवांस्ड स्टैटिस्टिकल टेक्नीक का इस्तेमाल करके वैज्ञानिकों ने तारों के छोटे समूह (ग्लोबुलर क्लस्टर) की खोज करके इसकी पहचान की।</p>
<p>राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन के अनुसार, यह पृथ्वी से करीब 300 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर पर्सियस गैलेक्सी क्लस्टर में स्थित यह बेहद धुंधली आकाशगंगा सामान्य तारों से नहीं, बल्कि चार सघन ग्लोब्युलर क्लस्टर्स के जरिए पहचानी गई। शुरुआती आकलन बताते हैं कि सीडीजी-2 की कुल द्रव्यमान का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर है।</p>
<p>नासा के अनुसार ,आमतौर पर अधिकतर आकाशगंगा अरबों तारों की चमक से दूर-दूर तक दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ विशेष आकाशगंगा इतनी फीकी होती हैं कि उन्हें पहचानना बेहद कठिन हो जाता है।</p>
<p>इन्हें लो-सरफेस-ब्राइटनेस गैलेक्सी कहा जाता है। इनमें तारों की संख्या बहुत कम होती है और इनका अधिकांश द्रव्यमान डार्क मैटर से बना होता है, ऐसा पदार्थ जो न प्रकाश उत्सर्जित करता है, न परावर्तित करता है और न ही अवशोषित करता है।</p>
<p>प्रारंभिक माप बताते हैं कि सीडीजी-2 की कुल चमक लगभग 60 लाख सूर्य जैसे तारों के बराबर है। यह किसी सामान्य आकाशगंगा की तुलना में बेहद कम है। इस खोज का विवरण द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में भी प्रकाशित हुआ है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि हबल स्पेस टेलीस्कोप का फ्लाइट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में स्थित है। यह सेंटर ग्रीनबेल्ट (मैरीलैंड) में है। यह सेंटर 24 घंटे सक्रिय रहता है। इंजीनियर, वैज्ञानिक और फ्लाइट कंट्रोलर की टीम हबल के संचालन की निगरानी करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 15:16:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुभांशु शुक्ला समेत अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी में हो रही देरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वॉशिंगटन, 11 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत के शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्रियों के एक्सिओम-4 मिशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से लौट में देरी हो रही है। पहले उनकी वापसी 10 जुलाई को होना थी, लेकिन अब इसमें कम से कम चार से पांच दिन की देरी हो सकती है।</p>
<p>वापसी की नई तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन अनुमान लगायाजा रहा है कि यह 14 जुलाई या उसके बाद ही संभव हो पाएगी। देरी की वजह आईएसएस में आई तकनीकी समस्या बताया जा रहा है। </p>
<p>दरअसल आईएसएस के रूसी हिस्से में स्थित ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल में प्रेसर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141851/delay-in-return-of-astronauts-including-shubhanshu-shukla"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/space-earth-moon-astrology-galaxy.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन, 11 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत के शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्रियों के एक्सिओम-4 मिशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से लौट में देरी हो रही है। पहले उनकी वापसी 10 जुलाई को होना थी, लेकिन अब इसमें कम से कम चार से पांच दिन की देरी हो सकती है।</p>
<p>वापसी की नई तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन अनुमान लगायाजा रहा है कि यह 14 जुलाई या उसके बाद ही संभव हो पाएगी। देरी की वजह आईएसएस में आई तकनीकी समस्या बताया जा रहा है। </p>
<p>दरअसल आईएसएस के रूसी हिस्से में स्थित ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल में प्रेसर लीक पाया गया। इसे रिपेयर कर लिया गया है, लेकिन उसकी सेफ्टी को लेकर अभी ऑडिट और निगरानी की जा रही है। इसी वजह से वहां से जुड़े सभी मिशनों की वापसी पर नजर रखी जा रही है और जल्दबाजी में कोई रिस्क नहीं लिया जा रहा।</p>
<p>शुभांशु और उनके साथी सुरक्षित हैं और आईएसएस में किसी भी तरह का तत्काल खतरा नहीं है। मिशन कंट्रोल और अंतरराष्ट्रीय टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं। एक्सिओम-4 मिशन की लॉन्चिंग भी पहले कई बार टली थी। इसमें इलेक्ट्रिकल हार्नेस की समस्या, फालकॉन-9 रॉकेट में लिक्विड ऑक्सीजन लीक और खराब मौसम जैसी वजहें रही थीं।</p>
<p>यह 25 जून को लॉन्च हो पाया था और इसकी अवधि करीब दो सप्ताह तय थी। तय योजना के मुताबिक, 10 जुलाई को स्पेसक्राफ्ट को आईएसएस से अनडॉक कर पृथ्वी पर लौटना था, लेकिन आईएसएस के रूसी मॉड्यूल की तकनीकी दिक्कत ने शेड्यूल बदल दिया।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक क्रू ड्रैगन यान बिल्कुल सुरक्षित स्थिति में है और उसमें कोई नई समस्या नहीं है। उसकी वापसी प्रक्रिया तय प्रोटोकॉल के मुताबिक ही होगी। आईएसएस से अनडॉक होने के बाद यान अपने थ्रस्टर्स से सुरक्षित दूरी बनाएगा, फिर पृथ्वी की दिशा में डिआर्बिट बर्न कर स्पीड घटाई जाएगी।</p>
<p>पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के वक्त यह करीब 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आएगा। बाहर का तापमान 1600 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होगा, लेकिन हीट शील्ड इसे सुरक्षित रखेगी। वायुमंडल में घुसते वक्त कुछ मिनट का ब्लैकआउट फेज रहेगा। फिर पैराशूट सिस्टम खुलेगा जो स्पीड को घटा देगा और आखिर में यह अटलांटिक महासागर या मेक्सिको की खाड़ी में पानी पर लैंड हो जाएगा। </p>
<p>फिलहाल मिशन कंट्रोल की प्राथमिकता क्रू की सुरक्षा है और इसीलिए आईएसएस की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक पाए जाने के बाद ही वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। शुभांशु शुक्ला और बाकी टीम के सुरक्षित लौटने में थोड़ी देर तो होगी, लेकिन उन्हें अंतरिक्ष में फंसे रहने का कोई खतरा नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/141851/delay-in-return-of-astronauts-including-shubhanshu-shukla</link>
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                <pubDate>Fri, 11 Jul 2025 21:14:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की नई उड़ान : स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए शुभांशु शुक्ला, फ्लोरिडा से एक्सिओम-4 मिशन लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 25 जून (वेब वार्ता)। भारत ने अंतरिक्ष की ओर नई उड़ान भरी है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए हैं। फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में कॉम्प्लेक्स 39ए से एक्सिओम-4 मिशन को लॉन्च किया गया। शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री एक्सिओम स्पेस के एक मिशन के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा पर निकले हैं।</p>
<p>सफल लॉन्चिंग के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सोशल मीडिया के जरिए अपडेट दिया। नासा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “हमने एक्सिओम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141535/shubhanshu-shukla-launched-acom-4-mission-from-shubhanshu-shukla-florida-for"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/3018_nasa.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 25 जून (वेब वार्ता)। भारत ने अंतरिक्ष की ओर नई उड़ान भरी है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए हैं। फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में कॉम्प्लेक्स 39ए से एक्सिओम-4 मिशन को लॉन्च किया गया। शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री एक्सिओम स्पेस के एक मिशन के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा पर निकले हैं।</p>
<p>सफल लॉन्चिंग के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सोशल मीडिया के जरिए अपडेट दिया। नासा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “हमने एक्सिओम मिशन 4 की उड़ान भरी है। एक्स-4 मिशन 25 जून को सुबह 2:31 बजे (भारतीय समयानुसार, दोपहर 12:01 बजे) पर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से उड़ान भर गया, जिसमें चार निजी अंतरिक्ष यात्री 14 दिनों तक के मिशन के लिए स्पेस स्टेशन पर गए।”</p>
<p>एक्सिओम स्पेस ने भी पोस्ट किया है, जिसने लिखा, “एएक्स-4 के लिए उड़ान। एएक्स-4 का चालक दल स्पेस स्टेशन की ओर बढ़ रहा है।”</p>
<p>इस मिशन में शामिल स्पेसएक्स ने जानकारी दी कि ड्रैगन फाल्कन 9 के दूसरे चरण से अलग हो गया है। नासा ने अंतरिक्ष यान के अलग होने की पुष्टि की। नासा ने लिखा, “अपने स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान में स्वतंत्र रूप से उड़ान भरते हुए एएक्स-4 के चालक दल स्पेस स्टेशन की अपनी यात्रा के एक कदम और करीब आ गए हैं।”</p>
<p>फाल्कन 9 रॉकेट पर लॉन्च होने के बाद क्रू नए स्पेसएक्स ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट पर ऑर्बिटिंग प्रयोगशाला की यात्रा करेगा। ये 14 दिन का मिशन है। शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और नासा के संयुक्त सहयोग से विकसित उन्नत खाद्य और पोषण संबंधी प्रयोगों का संचालन करेंगे।</p>
<p>बेटे को अंतरिक्ष में उड़ान भरते हुए देखकर शुभांशु शुक्ला का परिवार काफी भावुक हो गया। शुभांशु की मां की आंखों में आंसू भर आए। लखनऊ में शुभांशु शुक्ला के माता-पिता ने एक्सिओम-4 मिशन की लॉन्चिंग की लाइव तस्वीरें देखीं। मिशन के उड़ान भरने पर वे जश्न मनाते हुए नजर आए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 15:17:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत अंतरिक्ष से अद्भुत दिखता है, अपने पिता की जन्मभूमि पर जरूर जाऊंगी: सुनीता विलियम्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(योषिता सिंह)</p>
<p>न्यूयॉर्क, एक अप्रैल (भाषा) नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा भारत अंतरिक्ष से अद्भुत दिखता है।</p>
<p>उन्होंने आशा व्यक्त की कि वह अपने ‘‘पिता की जन्मभूमि’’ जाएंगी और वहां के लोगों के साथ अंतरिक्ष खोज के बारे में अपने अनुभव साझा करेंगी।</p>
<p>सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान सुनीता ने यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि जब वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में थीं तो वहां से भारत कैसा दिखता था और अंतरिक्ष खोज पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ उनके सहयोग की कोई संभावना है?</p>
<p>इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139750/india-looks-amazing-with-space-sunita-williams-will-definitely-go"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/k19032025-07.jpg" alt=""></a><br /><p>(योषिता सिंह)</p>
<p>न्यूयॉर्क, एक अप्रैल (भाषा) नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा भारत अंतरिक्ष से अद्भुत दिखता है।</p>
<p>उन्होंने आशा व्यक्त की कि वह अपने ‘‘पिता की जन्मभूमि’’ जाएंगी और वहां के लोगों के साथ अंतरिक्ष खोज के बारे में अपने अनुभव साझा करेंगी।</p>
<p>सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान सुनीता ने यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि जब वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में थीं तो वहां से भारत कैसा दिखता था और अंतरिक्ष खोज पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ उनके सहयोग की कोई संभावना है?</p>
<p>इस पर उन्होंने कहा, ‘‘भारत अद्भुत है। मैं आपको बताना चाहूंगी कि हम जब भी हिमालय के ऊपर से गुजरे तो बुच ने हिमालय की कुछ अविश्वसनीय तस्वीरें लीं। बेहद अद्भुत है।’’</p>
<p>सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर ने ‘स्पेसएक्स क्रू-9’ मिशन के तहत पृथ्वी पर लौटने के कुछ दिनों बाद अपने पहले संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। ये दोनों नौ माह से अधिक समय तक अंतरिक्ष में फंसे रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा और यकीन है कि मैं अपने पिता के देश (भारत) जाऊंगी और लोगों से मिलूंगी तथा अंतरिक्ष के बारे में अपने अनुभव साझा करूंगी। ‘एक्सिओम मिशन’ पर जा रहे भारतीय नागरिक शानदार हैं।’’</p>
<p>उन्होंने ये टिप्पणी ‘एक्सिओम मिशन 4’ (एक्स-4) वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्री मिशन का जिक्र करते हुए कीं, जिसमें भारत के मिशन पायलट शुभांशु शुक्ला भी शामिल होंगे।</p>
<p>लखनऊ में जन्मे शुक्ला, 1984 में अंतरिक्ष में जाने वाले भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी राकेश शर्मा के बाद भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री होंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘उनके पास वहां अपने देश का हीरो होगा जो इस बारे में बात कर सकेगा कि उनके दृष्टिकोण से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कितना अद्भुत है। लेकिन मुझे उम्मीद है कि मैं किसी समय उनसे मिल पाऊंगी और हम भारत में जितना संभव हो सके उतने लोगों के साथ अपने अनुभव साझा कर सकेंगे, क्योंकि यह एक महान देश है, एक अद्भुत लोकतंत्र है, जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम करने वाले देशों में अपना पैर जमाने की कोशिश कर रहा है और हम इसका हिस्सा बनना तथा उनकी मदद करना पसंद करेंगे।’’</p>
<p>सुनीता के पिता दीपक पंड्या गुजरात से थे और 1958 में अमेरिका आए थे। उन्होंने क्लीवलैंड, ओहायो में मेडिसिन में इंटर्नशिप और रेजीडेंसी ट्रेनिंग की।</p>
<p>सुनीता का जन्म ओहायो में दीपक और उर्सुलाइन बोनी पंड्या के घर हुआ था।</p>
<p>जब विल्मोर ने सुनीता से पूछा कि क्या वह अपने क्रू (चालक दल) सदस्यों को भारत की यात्रा पर अपने साथ ले जाने की योजना बना रही है, तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया ‘‘बिल्कुल। हम आपको मसालेदार भोजन खिलाएंगे, अच्छा रहेगा।’’</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुनीता और उनके साथी क्रू-9 सदस्यों का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लंबे मिशन के बाद पृथ्वी पर लौटने पर स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि उनका अटूट दृढ़ संकल्प हमेशा लाखों लोगों को प्रेरित करेगा।</p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आपका स्वागत है, क्रू9! धरती को आपकी याद आई।’’</p>
<p>नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता, निक हेग और विल्मोर तथा रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री अलेक्सांद्र गोरबुनोव, 18 मार्च को ‘स्पेसएक्स’ के ड्रैगन अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर वापस लौटे, जो फ्लोरिडा के तल्हासी तट के पास समुद्र में उतरा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 13:32:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुनीता विलियम्स: इतिहास रच देने वाली भारतीय मूल की अंतरिक्षयात्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स यूं तो पहले भी दो बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जा चुकी हैं लेकिन शायद ही उन्होंने यह कल्पना की होगी कि तीसरी बार अंतरिक्ष में जाने के बाद उन्हें वापसी के लिए लंबा इंतजार करना होगा और यह घटना इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी।</p>
<p>नासा के अंतरिक्षयात्री बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स नौ महीने अंतरिक्ष में रहने के बाद भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के पृथ्वी पर लौट आए।</p>
<p>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ स्पेसएक्स यान पर सवार होकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अलविदा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139390/sunita-williams-astronaut-of-indian-origin-creating-history"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/k19032025-07.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स यूं तो पहले भी दो बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जा चुकी हैं लेकिन शायद ही उन्होंने यह कल्पना की होगी कि तीसरी बार अंतरिक्ष में जाने के बाद उन्हें वापसी के लिए लंबा इंतजार करना होगा और यह घटना इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी।</p>
<p>नासा के अंतरिक्षयात्री बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स नौ महीने अंतरिक्ष में रहने के बाद भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के पृथ्वी पर लौट आए।</p>
<p>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ स्पेसएक्स यान पर सवार होकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अलविदा कहा।</p>
<p>भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स की यह तीसरी अंतरिक्ष उड़ान थी और उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए हैं।</p>
<p>पूर्व अमेरिकी नौसैन्य कप्तान विलियम्स (59) का जन्म 19 सितंबर 1965 को यूक्लिड, ओहियो में हुआ था। उनके पिता दीपक पांड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन से थे तथा मां उर्सुलाइन बोनी पांड्या स्लोवेनिया से हैं।</p>
<p>अपनी बहु-सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करते हुए विलियम्स अपने साथ अंतरिक्ष में अपनी विरासत के प्रतीक ले जा चुकी हैं, जिनमें समोसे, स्लोवेनियाई ध्वज और भगवान गणेश की मूर्ति शामिल हैं।</p>
<p>पिछले वर्ष जून में बुच विल्मोर के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए अपने तीसरे मिशन पर रवाना हुईं विलियम्स ने एक महिला द्वारा अंतरिक्ष में सर्वाधिक चहलकदमी किए जाने का रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया। उनका यह तीसरा मिशन 286 दिन का रहा।</p>
<p>विलियम्स के नाम संबंधित मिशन क्रम में अब 62 घंटे और नौ मिनट का अतिरिक्त सक्रिय समय दर्ज है, जिससे उन्होंने पूर्व अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन के 60 घंटे और 21 मिनट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।</p>
<p>सुनीता विलियम्स को बचपन से ही विज्ञान में रुचि थी, लेकिन उनका सपना पशु चिकित्सक बनना था। उनके भाई जय का अमेरिकी नौसेना अकादमी में चयन हुआ था और वहां जाने के बाद सुनीता ने नौसेना अधिकारी बनने का सपना देखा।</p>
<p>यह वह समय था जब महशूर अभिनेता टॉम क्रूज अभिनीत ‘टॉप गन’ धूम मचा रही थी। जब विलियम्स को नौसेना विमानन प्रशिक्षण कमान में शामिल होने का अवसर मिला तो वह लड़ाकू विमान उड़ाना चाहती थीं लेकिन उन्हें हेलीकॉप्टर का विकल्प चुनना पड़ा।</p>
<p>वह 1989 में नौसेना एविएटर बनीं और उन्होंने नॉरफ़ॉक, वर्जीनिया में ‘हेलिकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 8’ में सेवा दी, इसके अलावा उनकी तैनाती ‘डेजर्ट शील्ड’ और ‘ऑपरेशन प्रोवाइड कम्फर्ट’ के समर्थन में भूमध्य सागर, लाल सागर और फारस की खाड़ी में भी की गई।</p>
<p>विलियम्स ने सैनिकों और मानवीय सहायता के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा उनके नेतृत्व कौशल और विषम परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता ने उन्हें भविष्य के अंतरिक्ष यात्री के रूप में अग्रसर किया।</p>
<p>विलियम्स को 1998 में नासा ने अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना और उन्होंने ‘जॉनसन स्पेस सेंटर’ में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के साथ भी काम किया।</p>
<p>वह नौ दिसंबर 2006 को ‘अंतरिक्ष शटल डिस्कवरी’ पर सवार होकर अपने पहले मिशन पर रवाना हुईं और आईएसएस अभियान 14 और 15 में शामिल होकर 195 दिनों के लिए कक्षा में रहीं।</p>
<p>विलियम्स 17 जुलाई 2012 को रूसी अंतरिक्ष यान सोयूज पर सवार होकर अंतरिक्ष स्टेशन पर चार महीने के प्रवास के बाद वापस आईं और 19 नवंबर को पृथ्वी पर लौट आईं।</p>
<p>वह 16 अप्रैल 2007 को अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति बनीं। उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर ट्रेडमिल पर बोस्टन मैराथन चार घंटे और 24 मिनट में पूरी की।</p>
<p>वह 2012 में अपनी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का नेतृत्व करने वाली एकमात्र दूसरी महिला बनीं। उन्होंने स्टेशन के संचालन की देखरेख की, कक्षा में एक ट्रायथलॉन पूरा किया, और अंतरिक्ष में चहलकदमी के दौरान सूर्य को आभासी तौर पर ‘‘स्पर्श’’ करती हुई एक तस्वीर भी खींची।</p>
<p>विलियम्स ने अपने अंतरिक्ष मिशन के तुरंत बाद 2007 और 2013 सहित कम से कम तीन बार भारत का दौरा किया है और उन्हें 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।</p>
<p>इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विलियम्स को एक पत्र लिखकर उन्हें भारत की बेटी बताया था और देश आने का निमंत्रण दिया था।</p>
<p>उनके पति माइकल जे. विलियम्स संघीय पुलिस अधिकारी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 14:05:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुनीता विलियम्स के धरती पर लौटने की खुशी में गुजरात में उनके पैतृक गांव में जश्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मेहसाणा, 19 मार्च (भाषा) नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की धरती पर सुरक्षित वापसी की खुशी में बुधवार को गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित उनके पैतृक गांव झूलासन में जश्न मनाया गया। इस दौरान गांव के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों सहित बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और जुलूस निकाला।</p>
<p>जैसे ही अंतरिक्ष यात्री विलियम्स और बुच विल्मोर को लेकर ‘स्पेसएक्स’ का यान अमेरिका में फ्लोरिडा तट के पास उतरा, गांव के लोग खुशी से झूम उठे, आतिशबाजी की गई, नाचने लगे और मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे लगाने लगे।</p>
<p>विलियम्स की सुरक्षित वापसी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139389/celebration-in-her-ancestral-village-in-gujarat-in-the-joy"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/k19032025-07.jpg" alt=""></a><br /><p>मेहसाणा, 19 मार्च (भाषा) नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की धरती पर सुरक्षित वापसी की खुशी में बुधवार को गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित उनके पैतृक गांव झूलासन में जश्न मनाया गया। इस दौरान गांव के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों सहित बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और जुलूस निकाला।</p>
<p>जैसे ही अंतरिक्ष यात्री विलियम्स और बुच विल्मोर को लेकर ‘स्पेसएक्स’ का यान अमेरिका में फ्लोरिडा तट के पास उतरा, गांव के लोग खुशी से झूम उठे, आतिशबाजी की गई, नाचने लगे और मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे लगाने लगे।</p>
<p>विलियम्स की सुरक्षित वापसी के लिए ग्रामीणों ने एक यज्ञ किया था।</p>
<p>इस मौके का जश्न मनाने के लिए सभी विद्यार्थी सुबह करीब साढ़े नौ बजे सरकारी स्कूल में इकट्ठा हुए। उन्होंने पारंपरिक गुजराती लोक नृत्य गरबा किया और देवी डोला माता के मंदिर तक जुलूस निकालने के लिए कतार में खड़े हो गए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देवी ने उनकी प्रार्थना सुन ली और विलियम्स को घर वापस ले आईं। छात्रों ने कहा कि देवी के आशीर्वाद के लिए उन्हें धन्यवाद देने के लिए जुलूस निकाला गया। छात्रों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी शामिल हुए।</p>
<p>स्कूल के एक शिक्षक ने कहा, ‘‘जब सुनीता विलियम्स पिछले साल पांच जून को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हुईं और उनके मिशन में देरी हुई तो हमने 27 जून को यहां एक अखंड ज्योति जलाई और उनके लिए प्रार्थना करते हुए डोला माता के मंदिर तक अखंड ज्योति लेकर जुलूस निकाला।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘अब जब देवी ने उनकी (विलियम्स की) रक्षा की है और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है, तो हम इस अवसर का जश्न मनाने और उनके आशीर्वाद के लिए उनका धन्यवाद करने की खातिर संगीत एवं रंग के साथ आज डोला माता मंदिर तक एक और जुलूस निकालेंगे।’’</p>
<p>लगभग नौ माह तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहने के बाद जब सुनीता की वापसी जल्द होने की खबर आई तो तभी से झूलासन में उत्साह का माहौल बना हुआ था।</p>
<p>उनके नजदीकी रिश्तेदार नवीन पांड्या ने कहा कि गांव के लोगों ने सुनीता की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की और अखंड ज्योति जलाई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गांववाले सुनीता को झूलासन में आमंत्रित करने के लिए उत्सुक हैं।</p>
<p>सुनीता विलियम्स कम से कम तीन बार भारत की यात्रा पर आ चुकी हैं। वह 2007 और 2013 में अंतरिक्ष मिशन के बाद भारत आई थीं। उन्हें 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।</p>
<p>उनके पिता दीपक पांड्या मूल रूप से झूलासन से थे और 1957 में अमेरिका चले गए थे।</p>
<p>झूलासन प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य विशाल पांचाल ने कहा कि बुधवार के जश्न के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है।</p>
<p>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर नौ महीने पहले बोइंग की एक परीक्षण उड़ान के जरिये अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे। दोनों अंतरिक्षयात्री पांच जून 2024 को बोइंग के नए स्टारलाइनर क्रू यान में सवार होकर अंतरिक्ष में गए थे। उनके एक सप्ताह बाद ही लौटने की उम्मीद थी, लेकिन अंतरिक्ष स्टेशन के रास्ते में इतनी सारी समस्याएं आईं कि नासा को अंततः स्टारलाइनर को खाली वापस धरती पर लाना पड़ा और अंतरिक्षयात्रियों की घर वापसी में देरी हुई।</p>
<p>सुनीता विलियम्स ने नौ बार अंतरिक्ष में चहलकदमी करके रिकॉर्ड बनाया। इस क्रम में उन्हें 62 घंटे लगे। विलियम्स ने अंतरिक्ष में सबसे ज़्यादा चहलकदमी करने का महिला अंतरिक्ष यात्री होने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 14:02:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुनीता विलियम्स मंगलवार को पृथ्वी पर वापस आएंगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, 17 मार्च (वेब वार्ता)। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर नौ महीने से फंसे दो अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर नासा ने पुष्टि की है कि वे मंगलवार की शाम पृथ्वी पर लौट आएंगे।</p>
<p>बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स एक अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और एक रूसी कॉस्मोनॉट के साथ स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन यान से वापस आएंगे, जो रविवार सुबह आईएसएस पर पहुंचा था।</p>
<p>नासा ने रविवार शाम को कहा कि इन अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी मंगलवार को फ्लोरिडा तट पर समुद्र में उतरने का समय शाम 5:57 बजे (भारतीय समयानुसार 19 मार्च की सुबह 3:30 बजे) होगी। पहले यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139330/sunita-williams-will-return-to-earth-on-tuesday"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/3018_nasa.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, 17 मार्च (वेब वार्ता)। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर नौ महीने से फंसे दो अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर नासा ने पुष्टि की है कि वे मंगलवार की शाम पृथ्वी पर लौट आएंगे।</p>
<p>बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स एक अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और एक रूसी कॉस्मोनॉट के साथ स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन यान से वापस आएंगे, जो रविवार सुबह आईएसएस पर पहुंचा था।</p>
<p>नासा ने रविवार शाम को कहा कि इन अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी मंगलवार को फ्लोरिडा तट पर समुद्र में उतरने का समय शाम 5:57 बजे (भारतीय समयानुसार 19 मार्च की सुबह 3:30 बजे) होगी। पहले यह वापसी बुधवार से पहले नहीं होने जा रही थी।</p>
<p>विल्मोर और विलियम्स जून 2023 से आईएसएस पर हैं। वे बोइंग स्टारलाइनर यान के पहले मानवयुक्त परीक्षण उड़ान में गए थे, लेकिन उसमें तकनीकी खराबी आ गई, जिससे वह सुरक्षित वापसी के लिए अनुपयुक्त हो गया।</p>
<p>नासा ने बताया कि इस वापसी का समय इस तरह तय किया गया है कि आईएसएस के दल अपना काम पूरा करने का समय मिल जाए और साथ ही सप्ताह के अंत में खराब मौसम की आशंका को देखते हुए लचीलापन बना रहे।</p>
<p>नासा ने कहा है कि वो स्पेसएक्स क्रू-9 के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से धरती पर लौटने का सीधा प्रसारण करेगा। ये प्रसारण 17 मार्च की रात 10:45 बजे (अमेरिका के समय के अनुसार) से शुरू होगा। भारत में ये समय लगभग 18 मार्च की सुबह 8:30 बजे होगा।</p>
<p>नासा के अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव भी ड्रैगन कैप्सूल में वापस आएंगे। यह यात्रा विलमोर और विलियम्स के लिए राहत लेकर आएगी, जो कुछ दिनों की यात्रा के लिए गए थे, लेकिन नौ महीने तक फंसे रह गए।</p>
<p>बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष स्टेशन में रहना, आम तौर पर छह महीने के रहने से ज्यादा था, लेकिन यह अमरीकी अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक रुबियो के 2023 में बनाए 371 दिन के रिकॉर्ड और रूसी अंतरिक्ष यात्री वालेरी पॉलाकोव के मीर स्टेशन पर बनाए 437 दिन के विश्व रिकॉर्ड से कम था।</p>
<p>इतनी लंबी अवधि तक परिवार से दूर रहने के कारण इस मिशन ने काफी ध्यान आकर्षित किया। लंबे प्रवास के कारण इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को अतिरिक्त कपड़े और व्यक्तिगत देखभाल के सामान भेजने पड़े, क्योंकि वे इतनी लंबी यात्रा के लिए पर्याप्त सामान लेकर नहीं गए थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 14:39:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासा के फंसे हुए अंतरिक्ष यात्रियों का स्थान लेने के लिए नया दल अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केप कैनवेरल (अमेरिका), 16 मार्च (वेब वार्ता)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लंबे समय से फंसे अंतरिक्ष यात्रियों बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स के स्थान पर अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को तैनात करने के लिए एक दिन पहले रवाना हुआ ‘स्पेसएक्स’ का यान रविवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच गया।</p>
<p>इसके साथ ही विलियम्स और विल्मोर की वापसी का रास्ता साफ हो गया।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे चार नए अंतरिक्ष यात्री अमेरिका, जापान और रूस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे कुछ दिन विलियम्स और विल्मोर से स्टेशन के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।</p>
<p>माना जा रहा है कि अगर मौसम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139327/new-team-reached-space-station-to-replace-nasas-trapped-astronauts"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/3018_nasa.jpg" alt=""></a><br /><p>केप कैनवेरल (अमेरिका), 16 मार्च (वेब वार्ता)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लंबे समय से फंसे अंतरिक्ष यात्रियों बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स के स्थान पर अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को तैनात करने के लिए एक दिन पहले रवाना हुआ ‘स्पेसएक्स’ का यान रविवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच गया।</p>
<p>इसके साथ ही विलियम्स और विल्मोर की वापसी का रास्ता साफ हो गया।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे चार नए अंतरिक्ष यात्री अमेरिका, जापान और रूस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे कुछ दिन विलियम्स और विल्मोर से स्टेशन के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।</p>
<p>माना जा रहा है कि अगर मौसम सही रहा तो दोनों फंसे अंतरिक्ष यात्रियों को अगले सप्ताह फ्लोरिडा के तट के निकट जलक्षेत्र में उतारा जाएगा।</p>
<p>विल्मोर और विलियम्स बोइंग के नए स्टारलाइनर कैप्सूल से पांच जून को केप कैनवेरल से रवाना हुए थे। दोनों एक सप्ताह के लिए ही गए थे लेकिन अंतरिक्ष यान से हीलियम के रिसाव और वेग में कमी के कारण ये लगभग नौ माह से अंतरिक्ष स्टेशन में फंसे हुए हैं।</p>
<p>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुए अंतरिक्ष यात्रियों के नए दल में नासा से ऐनी मैक्लेन और निकोल एयर्स शामिल हैं। वे दोनों सैन्य पायलट हैं। इनके अलावा जापान के ताकुया ओनिशी और रूस के किरिल पेस्कोव भी रवाना हुए हैं और दोनों विमानन कंपनियों के पूर्व पायलट हैं।</p>
<p>ये चारों लोग विल्मोर और विलियम्स के धरती के लिए रवाना होने के बाद अगले छह महीने अंतरिक्ष स्टेशन में बिताएंगे, जिसे सामान्य अवधि माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sun, 16 Mar 2025 21:45:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>9 महीने बाद 19 मार्च को धरती पर आएंगी सुनीता विलियम्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वॉशिंगटन, 15 मार्च (वेब वार्ता)। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) में पिछले करीब नौ महीनों से फंसे अंतरिक्षयात्री सुनीता विलयम्स और बुच विलमोर का धरती पर लौटने का सपना अब साकार होने वाला है।</p>
<p>अब 19 मार्च को धरती पर वापस लौटने वाले हैं। दरअसल, उनका मिशन सिर्फ 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबियों के कारण वे लगभग 9 महीने तक अंतरिक्ष में रह गए।</p>
<p>भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर, जो पिछले 9 महीनों से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर फंसे हुए थे, अब 19 मार्च को धरती पर वापस लौटने वाले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139305/sunita-williams-will-come-to-earth-on-march-19-after"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/3018_nasa.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन, 15 मार्च (वेब वार्ता)। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) में पिछले करीब नौ महीनों से फंसे अंतरिक्षयात्री सुनीता विलयम्स और बुच विलमोर का धरती पर लौटने का सपना अब साकार होने वाला है।</p>
<p>अब 19 मार्च को धरती पर वापस लौटने वाले हैं। दरअसल, उनका मिशन सिर्फ 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबियों के कारण वे लगभग 9 महीने तक अंतरिक्ष में रह गए।</p>
<p>भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर, जो पिछले 9 महीनों से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर फंसे हुए थे, अब 19 मार्च को धरती पर वापस लौटने वाले हैं। दरअसल, उनका मिशन सिर्फ 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबियों के कारण वे लगभग 9 महीने तक अंतरिक्ष में रह गए।</p>
<p>सुनीता और बुच को वापस लाने के लिए स्पेस एक्स के फॉल्कन 9 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया, जो 15 मार्च को भारतीय समयानुसार 4:30 बजे लॉन्च हुआ। यह रॉकेट फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था और इसके साथ क्रू ड्रैगन कैप्सूल में चार सदस्यीय टीम को अंतरिक्ष स्टेशन के लिए भेजा गया।</p>
<p>इस मिशन को क्रू-10 नाम दिया गया है, और इसमें नासा के ऐनी मैकक्लेन, निकोल अयर्स, जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जेक्सा के टकुया ओनिशी और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के कोस्मोनॉट किरिल पेस्कोव शामिल हैं।</p>
<p>सुनीता और बुच विलमोर बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के जरिए अंतरिक्ष गए थे। यह मिशन सिर्फ 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबियों के कारण वे 9 महीने तक अंतरिक्ष में रह गए। स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में कई समस्याएं आईं, जिसमें हीलियम गैस लीक होने जैसी दिक्कतें शामिल थीं। इन समस्याओं के कारण स्पेसक्राफ्ट की वापसी में देरी हुई।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जनवरी में इलॉन मस्क से सुनीता और बुच को अंतरिक्ष से वापस लाने की अपील की थी। मस्क ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा था कि वे इन बहादुर अंतरिक्ष यात्रियों को जल्द ही धरती पर वापस लाएंगे। नासा ने स्पेसएक्स को पहले ही इस मिशन में शामिल कर लिया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 18:30:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धरती पर लौटने के बाद भी सुनीता नहीं जा सकेंगी घर, कई टेस्टों से गुजरना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाशिंगटन, 11 मार्च (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में बीते करीब 9 महीने से फंसी सुनीता विलियम्स और बेरी विलमोर जल्द लौटने वाले है। बोइंग के स्टारलाइनर से दोनों अंतरिक्षयात्री केवल 10 दिनों के टूर पर गए थे। हालांकि उनके यान में खराबी आ जाने से वे अब तक लौट ही नहीं पाए। अब नासा ने कहा है कि अगले सप्ताह ही स्पेसएक्स ड्रैगन लॉन्च किया जाएगा। </p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि सुनीता और विलमोर 16 मार्च तक धरती पर लौट आएंगे। हालांकि सुनीता विलियम्स का कहना है कि इतने दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद अब उनके लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139188/even-after-returning-to-the-earth-sunita-will-not-be"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/kkk11032025-01.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन, 11 मार्च (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में बीते करीब 9 महीने से फंसी सुनीता विलियम्स और बेरी विलमोर जल्द लौटने वाले है। बोइंग के स्टारलाइनर से दोनों अंतरिक्षयात्री केवल 10 दिनों के टूर पर गए थे। हालांकि उनके यान में खराबी आ जाने से वे अब तक लौट ही नहीं पाए। अब नासा ने कहा है कि अगले सप्ताह ही स्पेसएक्स ड्रैगन लॉन्च किया जाएगा। </p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि सुनीता और विलमोर 16 मार्च तक धरती पर लौट आएंगे। हालांकि सुनीता विलियम्स का कहना है कि इतने दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद अब उनके लिए धरती पर अजस्ट करना आसान नहीं है। धरती पर चलना उनके लिए कांटों पर चलने के जैसा होगा। उन्होंने कहा कि अब तो मैं चलना भी भूल गई हूं। अंतरिक्ष स्टेशन में गुरुत्वाकर्षण ना होने की वजह से उन्हें चलना नहीं पड़ता। अंतरिक्ष में रहना धरती पर रहने से बहुत अलग हैं। अंतरिक्ष से लौटने के बाद धरती की ग्रेविटी के हिसाब से खुद को ढालना भी आसान नहीं है। वहीं अंतरिक्ष से कई वायरस और बैक्टीरिया के भी आने का खतरा रहता है।</p>
<p>धऱती पर लौटने के बाद भी सुनीता घर नहीं जा पाएंगे। पहले उनके टेस्ट किए जाएंगे और फिर इलाज किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि अंतरिक्ष से वापस आने के बाद उनके शरीर में ताकत नहीं रहती है। ऐसे में ग्रेविटी में फिर से ताकत हासिल करने में डेढ़ महीने का समय लग सकता है। फिर से सारे टेस्ट करने के बाद ही उन्हें घऱ जाने की इजाजत दी जा सकती है।</p>
<p>जानकारों का कहना है कि अंतरिक्षयात्रियों को कई तरह की गंभीर बीमारियों का भी खतरा रहता है। तेज ब्रह्मंडीय विकिरण की वजह से कई बार अंतरिक्षयात्रियों के शरीर के गहराई तक प्रभाव पड़ता है जो कि कैंसर का कारण बन सकता है जिस तरह से अंतरिक्ष में जाने के बाद सुनीता को कुछ दिनों तक शरीर को ढालने में परेशानी का सामना करना पड़ा था, वही दिक्कत धरती पर लौटने के बाद भी हो सकती हैं। अंतरिक्ष में हार्ट और लंग्स को भी मेहनत कम पड़ती है। ऐसे में धरती पर लौटने के बाद उन्हें एक खास वातावरण दिया जाएगा जिसमें वह धऱती के अनुकूल खुद को ढाल सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 15:17:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाने की होड़, भारत पहले ही रच चुका है इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[<p>फ्लोरिड, 04 मार्च (वेब वार्ता)। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाने की होड़ लगी है, जहां स्थायी रूप से छायादार लुनार क्रेटरों में बर्फ हो सकती है। चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव भविष्य के क्रूड आर्टेमिस मिशनों और रोबोटिक खोजों के लिए रहस्यों से भरा डेस्टिनेशन है, लेकिन ब्लू घोस्ट और इसके साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स का उद्देश्य कहीं और उतरना था, ऐसा नासा के साइंस मिशन डायरेक्टोरेट के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. निकोला फॉक्स ने कहा। </p>
<p>बता दें कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का कारनामा भारत कर चुका है। अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138977/india-has-already-created-history"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/moon-surface-imaginary-pic.jpg" alt=""></a><br /><p>फ्लोरिड, 04 मार्च (वेब वार्ता)। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाने की होड़ लगी है, जहां स्थायी रूप से छायादार लुनार क्रेटरों में बर्फ हो सकती है। चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव भविष्य के क्रूड आर्टेमिस मिशनों और रोबोटिक खोजों के लिए रहस्यों से भरा डेस्टिनेशन है, लेकिन ब्लू घोस्ट और इसके साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स का उद्देश्य कहीं और उतरना था, ऐसा नासा के साइंस मिशन डायरेक्टोरेट के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. निकोला फॉक्स ने कहा। </p>
<p>बता दें कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का कारनामा भारत कर चुका है। अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया है।</p>
<p>डॉ फॉक्स ने कहा कि चंद्रमा विज्ञान के लिए एक अविश्वसनीय जगह है। हम हर बार एक ही जगह नहीं जाना चाहते क्योंकि हम चंद्रमा के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं। यह छुट्टी पर जाने जैसा है। आप हर बार एक ही जगह नहीं जाना चाहेंगे। जैसे ही हम अंतरिक्ष यात्रियों को वापस भेजने की तैयारी कर रहे हैं, हम यह तय करना चाहते हैं कि हम सभी चांद के सभी क्षेत्रों को समझें, और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसका अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन हम यह भी देख रहे हैं कि सबसे दिलचस्प क्षेत्र कहां और कौन सा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ब्लू घोस्ट पर सवार 10 इंस्ट्रूमेंट्स एक सूट की तरह हैं, जो उस क्षेत्र के लिए पूरी तरह से चुने गए हैं जहां हम जा रहे हैं। ब्लू घोस्ट मिशन एक प्राचीन ज्वालामुखीय फीचर के पास उतरा जिसे मॉन्स लाट्रेल कहा जाता है, जो चंद्रमा के नजर आने वाले चेहरे के सुदूर पूर्वी किनारे पर भूमध्य रेखा के ठीक उत्तर में स्थित है। डॉ फॉक्स ने कहा कि आप जानते हैं कि आपकी डिलीवरी सर्विस, आप वह जगह चुनते हैं जहां आप अपना पैकेज भेजना चाहते हैं, और हमने फायरफ्लाई के साथ यही किया।</p>
<p>फायरफ्लाई एयरोस्पेस का ब्लू घोस्ट चंद्र लैंडर सफलतापूर्वक चंद्रमा के मैरे क्रिसियम क्षेत्र में उतरा। यह मिशन 15 जनवरी, 2025 को स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए प्रक्षेपण के साथ शुरू हुआ और रविवार को सटीक लैंडिंग के साथ खत्म हुआ। फायरफ्लाई स्पेस, टेक्सास स्थित एक अमेरिकी निजी क्षेत्र की एयरोस्पेस फर्म है, जो अंतरिक्ष वाहनों के डिजाइन, निर्माण और प्रक्षेपण संचालन से संबंधित है।</p>
<p>नासा के मुताबिक कर्मशियल कंपनी के ब्लू घोस्ट चंद्र लैंडर ने नासा के 10 वैज्ञानिक उपकरण और तकनीकी डेमो को सुरक्षित रूप से चंद्रमा पर पहुंचा दिया है। नासा के मुताबिक ब्लू घोस्ट के मिशन के दौरान, एजेंसी के वैज्ञानिक उपकरणों का लक्ष्य चंद्र उपसतह ड्रिलिंग टेक्नोलॉजी, रेगोलिथ नमूना संग्रह क्षमताओं, ग्लोबल नेविगेशन उपग्रह प्रणाली क्षमताओं, विकिरण सहनशील कंप्यूटिंग और चंद्र धूल शमन विधियों का परीक्षण और प्रदर्शन करना है। कैप्चर किए गए डाटा से धरती पर मनुष्यों को भी लाभ हो सकता है, क्योंकि इससे यह पता चल सकता है कि अंतरिक्ष का मौसम और अन्य ब्रह्मांडीय ताकतें धरती को कैसे प्रभावित करती हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 15:15:20 +0530</pubDate>
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