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                <title>Economy - Loktej</title>
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                <title>पश्चिम एशिया में युद्धविराम की आहट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, 17<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी राहत दर्ज की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया में जारी लंबे संघर्ष के थमने की खबरों के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से अधिक गिरकर </span>97.99<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (</span>WTI) <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड में करीब </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह </span>92.91<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। भारतीय बाजार में भी इसका सीधा असर दिखा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146635/heavy-fall-in-crude-oil-prices-in-international-market-due"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-03/iran-usa-war.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, 17<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी राहत दर्ज की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया में जारी लंबे संघर्ष के थमने की खबरों के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से अधिक गिरकर </span>97.99<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (</span>WTI) <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड में करीब </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह </span>92.91<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। भारतीय बाजार में भी इसका सीधा असर दिखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (</span>MCX) <span lang="hi" xml:lang="hi">पर कच्चा तेल </span>2.6<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत लुढ़ककर </span>8,625<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये के स्तर पर पहुंच गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">तेल की कीमतों में आई इस नरमी का मुख्य श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इजरायल और लेबनान के बीच </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिवसीय युद्धविराम की घोषणा को दिया जा रहा है। शांति वार्ताओं में प्रगति और ईरान के साथ एक बड़े परमाणु समझौते की संभावनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताएं कम कर दी हैं। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिए हैं कि हिंसा समाप्त करने का समय आ गया है और तेहरान के साथ सकारात्मक संवाद जारी है। इस कूटनीतिक सफलता ने बाजार में सकारात्मक उत्साह भर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पिछले सत्र की </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की उछाल के बाद अब कीमतों में स्थिरता आने लगी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे प्रमुख आयातक देशों के लिए संजीवनी के समान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे देश के आयात बिल और राजकोषीय दबाव में कमी आएगी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक शेयर बाजारों में फिलहाल मिला-जुला रुख बना हुआ है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भारतीय सेंसेक्स और निफ्टी सपाट खुले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं अमेरिकी वॉल स्ट्रीट के इंडेक्स मामूली बढ़त पर रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति वार्ता स्थाई समझौते की ओर बढ़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और सुधार होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे परिवहन लागत कम होगी और घरेलू स्तर पर महंगाई से जूझ रही जनता को बड़ी राहत मिल सकेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:29:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संघर्ष ऊर्जा सुधारों, उद्योग के लिए बिजली की लागत घटाने का बड़ा अवसर: अर्थशास्त्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, 12 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया संघर्ष ने जहां ऊर्जा के मोर्चे पर भारत की ‘कमजोरी’ को उजागर किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं यह वृद्धि के लिए जरूरी क्षेत्रों में सुधार शुरू करने और उद्योग के लिए बिजली की दरें घटाने का अच्छा अवसर है। एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने यह बात कही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की बाहरी सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भविष्य की वृद्धि के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल ही में कोटक प्राइवेट बैंकिंग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मिश्रा ने कहा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, 12 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया संघर्ष ने जहां ऊर्जा के मोर्चे पर भारत की ‘कमजोरी’ को उजागर किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं यह वृद्धि के लिए जरूरी क्षेत्रों में सुधार शुरू करने और उद्योग के लिए बिजली की दरें घटाने का अच्छा अवसर है। एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने यह बात कही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की बाहरी सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भविष्य की वृद्धि के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल ही में कोटक प्राइवेट बैंकिंग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मिश्रा ने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे पास दुनिया की सबसे सस्ती ऊर्जा है। घरों और किसानों के लिए दुनिया की सबसे सस्ती बिजली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारे पास उद्योग और वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए दुनिया की सबसे महंगी बिजली है।’’</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि कोई भी देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके पास ऊर्जा की कमी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे सबसे पहले उसकी कीमत ‘ठीक’ करनी चाहिए जिससे भविष्य की वृद्धि का मार्ग सुनिश्चित हो सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मिश्रा ने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं सरकार से बार-बार कह रहा हूं कि देखिये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह जरूरी है कि उद्योग को सस्ती बिजली मिले क्योंकि तब आप नौकरियां पैदा करते हैं। लोगों को मुफ्त बिजली देने के बजाय उन्हें बिजली के दाम देने में सक्षम बनाया जाए।’’ उन्होंने आगे कहा कि एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा पश्चिम एशिया संघर्ष ऊर्जा की सही कीमत तय करने का एक ‘बड़ा मौका’ है। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:37:05 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मई के दूसरे सप्ताह में लागू हो सकता है भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार करार : अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 12 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मई के दूसरे सप्ताह से लागू होने की उम्मीद है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते पर पिछले साल जुलाई में हस्ताक्षर किए गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और ब्रिटेन ने </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई</span>, 2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वृहद आर्थिक और व्यापार करार (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत </span>99<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत भारतीय निर्यात शून्य शुल्क पर ब्रिटेन के बाजार में जाएगा। वहीं भारत कार और शराब जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क दरें घटाएगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी ने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हमें उम्मीद है कि यह समझौता मई के दूसरे सप्ताह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 12 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मई के दूसरे सप्ताह से लागू होने की उम्मीद है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते पर पिछले साल जुलाई में हस्ताक्षर किए गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और ब्रिटेन ने </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई</span>, 2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वृहद आर्थिक और व्यापार करार (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत </span>99<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत भारतीय निर्यात शून्य शुल्क पर ब्रिटेन के बाजार में जाएगा। वहीं भारत कार और शराब जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क दरें घटाएगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी ने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हमें उम्मीद है कि यह समझौता मई के दूसरे सप्ताह से लागू हो जाएगा।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों ने दोहरा योगदान संधि (डीसीसी) करार पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इससे दोनों देशों के अस्थाई कर्मियों को सामाजिक शुल्क को दो बार नहीं देना पड़ेगा।’’</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी ने बताया कि दोनों समझौतों को एक साथ लागू किए जाने की संभावना है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सीईटीए का लक्ष्य </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को दोगुना कर </span>56<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर तक पहुंचाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समझौते के तहत भारत ने चॉकलेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स सहित कई उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपना बाजार खोल दिया है। वहीं उसे ब्रिटेन में कपड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जूते-चप्पल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रत्न एवं आभूषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल के सामान और खिलौनों जैसे क्षेत्रों के लिए अधिक बाजार पहुंच मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते के तहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क तुरंत </span>150<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से घटाकर </span>75<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत कर दिया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>2035<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक इसे और घटाकर </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत कर दिया जाएगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाहनों पर भारत धीरे-धीरे उदार कोटा प्रणाली के तहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पांच साल में आयात शुल्क को घटाकर </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत कर देगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अभी </span>110<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत तक है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके एवज में भारतीय विनिर्माताओं को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए ब्रिटेन के बाजार में पहुंच मिलेगी। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 19:22:22 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत का 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार रुपए की स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 01 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। भारत का </span>700<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुंद्रा भंडार रुपए की स्थिति को संभालने और उसमें तेज उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए पर्याप्त है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने से अधिक के आयात के बराबर है और छोट अवधि का ऋण विदेशी मुद्रा भंडार के </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत के बराबर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे रुपए को सहारा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पर्याप्त जगह मिलती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च फर्म</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146354/indias-700-billion-foreign-exchange-reserves-report-sufficient-to-handle"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/d03042024-11-economy.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 01 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। भारत का </span>700<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुंद्रा भंडार रुपए की स्थिति को संभालने और उसमें तेज उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए पर्याप्त है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने से अधिक के आयात के बराबर है और छोट अवधि का ऋण विदेशी मुद्रा भंडार के </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत के बराबर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे रुपए को सहारा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पर्याप्त जगह मिलती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च फर्म ने चेतावनी दी कि अस्थिर पूंजी प्रवाह और तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य के दृष्टिकोण के लिए जोखिम पैदा करती हैं और तेल विपणन कंपनियों के लिए </span>250-300<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन डॉलर की दैनिक मांग को पूरा करने के लिए एक विशेष डॉलर विंडो सहित कई नीतिगत उपायों का आग्रह किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट में कहा गया</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे वास्तविक विदेशी मुद्रा की मांग और आपूर्ति की गतिशीलता पर बेहतर स्पष्टता प्राप्त होगी और अनावश्यक अस्थिरता को रोकने के लिए नियामक द्वारा शुरू किए गए विभिन्न उपायों की प्रभावशीलता को मापने में मदद मिलेगी।</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि केवल ट्रेडिंग बुक पर </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन डॉलर की सीमा लगाई जानी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि पूरे बैंक बुक स्तर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे परिचालन संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें अल्पकालिक यील्ड बढ़ाने और दीर्घकालिक यील्ड घटाने के लिए ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ का सुझाव दिया गया है</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सुनिश्चित करते हुए कि विभिन्न संदर्भ दरें निर्धारित सीमा के भीतर रहें और नीतिगत दर के अनुरूप हों।</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय बैंक ने </span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए को सहारा देने के लिए कड़े कदम उठाए हैं</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फर्म ने बाहरी बाजारों से मांग वाली मुद्राओं को लाकर और वैकल्पिक तंत्रों (जैसे ओएमसी के लिए एक विशेष यूएसडी विंडो) को शामिल करके हस्तक्षेपों में तेजी लाने का आग्रह किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि रुपए में गिरावट देश के मैक्रो फंडामेंटल्स से काफी अधिक है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 16:02:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण गुजरात में 1,185 करोड़ की सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी, सूरत-वलसाड समेत 5 जिलों को फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गांधीनगर, 13 मार्च (वेब वार्ता)। गुजरात सरकार ने लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को मजबूत करने और सूरत आर्थिक क्षेत्र (एसईआर) के दीर्घकालिक विकास में सहायता करने के व्यापक प्रयास के तहत, दक्षिण गुजरात के पांच जिलों में 1,185 करोड़ रुपए के सड़क विकास कार्यों को मंजूरी दे दी है।</p>
<p>मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत, तापी, वलसाड, नवसारी और डांग जिलों में लगभग 383 किलोमीटर तक सड़कों को चौड़ा करने और उनमें सुधार करने वाली 24 परियोजनाओं को मंजूरी दी।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं का मकसद इस क्षेत्र में मौजूद औद्योगिक समूहों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146009/road-projects-worth-rs-1185-crore-given-green-signal-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/1906_car-travel-road-saffari-mountain-trip-valley1.jpg" alt=""></a><br /><p>गांधीनगर, 13 मार्च (वेब वार्ता)। गुजरात सरकार ने लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को मजबूत करने और सूरत आर्थिक क्षेत्र (एसईआर) के दीर्घकालिक विकास में सहायता करने के व्यापक प्रयास के तहत, दक्षिण गुजरात के पांच जिलों में 1,185 करोड़ रुपए के सड़क विकास कार्यों को मंजूरी दे दी है।</p>
<p>मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत, तापी, वलसाड, नवसारी और डांग जिलों में लगभग 383 किलोमीटर तक सड़कों को चौड़ा करने और उनमें सुधार करने वाली 24 परियोजनाओं को मंजूरी दी।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं का मकसद इस क्षेत्र में मौजूद औद्योगिक समूहों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने में मदद करना है।</p>
<p>ये परियोजनाएं एक बड़े विकास ढांचे का हिस्सा हैं, जिसका केंद्र एसईआर (सूरत आर्थिक क्षेत्र) है। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र को दुबई और गुआंगजौ जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्रों की तर्ज पर विकसित करना है।</p>
<p>इस योजना का मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सूरत की भूमिका को मजबूत करना और विनिर्माण केंद्रों तथा वैश्विक बाजारों के बीच की दूरी को कम करना है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं में पाँच जिलों में होने वाले काम शामिल हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा सूरत जिले को दिया गया है। सूरत को 631 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो इस क्षेत्र की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में उसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।</p>
<p>वलसाड जिले के लिए 264 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं, जबकि बाकी बची राशि का इस्तेमाल नवसारी, तापी और डांग जिलों की परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। सड़क से जुड़ी ये परियोजनाएं एसईआर के लिए नीति आयोग द्वारा तैयार किए गए आर्थिक मास्टर प्लान से जुड़ी हुई हैं।</p>
<p>इस योजना को लगभग 17 महीने पहले सूरत में शुरू किया गया था। इसमें सूरत और उसके आस-पास के जिलों को 2047 तक एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की एक दीर्घकालिक रणनीति की रूपरेखा तैयार की गई है।</p>
<p>2024 में जब यह योजना तैयार की गई थी, तब जारी एक संदेश में मुख्यमंत्री पटेल ने कहा था, “सूरत आर्थिक क्षेत्र के लिए यह आर्थिक मास्टर प्लान महज एक खाका नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में एक भागीदार के तौर पर दूरदर्शी, गतिशील और समावेशी विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का एक प्रतिबिंब है।”</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण गुजरात की औद्योगिक प्रोफाइल इस क्षेत्र के चयन में एक अहम कारक थी। आर्थिक मास्टर प्लान तैयार करने के लिए देश भर में चुने गए चार पायलट शहर क्षेत्रों में से एक के तौर पर इस क्षेत्र को चुना गया था।</p>
<p>सूरत अपने कपड़ा विनिर्माण और हीरा तराशने के उद्योगों के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है, जबकि इसके आस-पास के जिलों में रसायन, दवा, पेट्रोकेमिकल, कृषि-प्रसंस्करण और छोटे पैमाने के विनिर्माण सहित कई तरह के क्षेत्र मौजूद हैं।</p>
<p>भरूच जिले में रसायन, दवा और पेट्रोकेमिकल उद्योगों का एक मजबूत आधार है। नवसारी कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे पैमाने के उत्पादन के लिए जाना जाता है, जबकि तापी में कृषि-प्रसंस्करण, कागज निर्माण और डेयरी से जुड़ी गतिविधियां होती हैं।</p>
<p>वलसाड में केमिकल इंडस्ट्रीज के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन भी हैं, जबकि ज्यादातर जंगलों और आदिवासियों वाला डांग जिला मुख्य रूप से खेती, जंगल से मिलने वाली चीजों और बुनियादी सेवाओं पर निर्भर है।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि सरकार का नजरिया इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर केंद्रित है, ताकि आर्थिक विविधता और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल सके। तटीय इलाके और अंदरूनी हिस्सों के वे इलाके जो अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं, वे दुनिया भर में बड़े व्यापारिक केंद्रों के तौर पर उभर रहे हैं; इसी वजह से राज्य सरकार लॉजिस्टिक्स और परिवहन कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दे रही है।</p>
<p>इस इलाके को पहले से ही कई परिवहन सुविधाओं का फायदा मिल रहा है, जिनमें एक्सप्रेसवे, रेलवे नेटवर्क, बंदरगाह, एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक बड़ा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाते हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों को बंदरगाहों और बाजारों से जोड़ता है।</p>
<p>राज्य सरकार ने टिकाऊ खेती, रियल एस्टेट, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को भी इस इलाके में भविष्य के विकास के लिए संभावित क्षेत्रों के तौर पर पहचाना है।</p>
<p>अधिकारियों का अनुमान है कि दक्षिण गुजरात की मौजूदा प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 4,600 अमेरिकी डॉलर है। लंबे समय के विकास की रणनीति के तहत, सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश और औद्योगिक विस्तार के जरिए 2047 तक इस आंकड़े को बढ़ाकर 45,000 अमेरिकी डॉलर से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 21:05:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2025 में अरबपतियों की संख्या 3,000 के पार, संपत्ति 18.3 ट्रिलियन डॉलर पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई ‎दिल्ली, 20 जनवरी (वेब वार्ता)। साल 2025 में दुनिया भर में अरबपतियों की संख्या पहली बार 3,000 के आंकड़े को पार कर गई है। ऑक्सफैम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अरबपतियों की कुल संपत्ति बढ़कर 18.3 ट्रिलियन डॉलर हो गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।</p>
<p>यह रिपोर्ट दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से ठीक पहले जारी की गई है। ‎रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अरबपतियों की संपत्ति में 16 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p>
<p>साल 2020 की तुलना में यह बढ़ोतरी 81 फीसदी रही है, यानी करीब 8.2 ट्रिलियन डॉलर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145181/number-of-billionaires-will-cross-3000-in-2025-wealth-at"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/d03042024-11-economy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई ‎दिल्ली, 20 जनवरी (वेब वार्ता)। साल 2025 में दुनिया भर में अरबपतियों की संख्या पहली बार 3,000 के आंकड़े को पार कर गई है। ऑक्सफैम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अरबपतियों की कुल संपत्ति बढ़कर 18.3 ट्रिलियन डॉलर हो गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।</p>
<p>यह रिपोर्ट दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से ठीक पहले जारी की गई है। ‎रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अरबपतियों की संपत्ति में 16 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p>
<p>साल 2020 की तुलना में यह बढ़ोतरी 81 फीसदी रही है, यानी करीब 8.2 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा। रिपोर्ट में बताया गया है कि सिर्फ नवंबर 2024 के बाद एक साल में संपत्ति की ग्रोथ 16.2 फीसदी रही, जो महामारी के बाद की औसत वृद्धि से लगभग तीन गुना अधिक है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनियों के बढ़ते वैल्यूएशन ने अमीरों की दौलत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। अमेरिका के अरबपतियों की संपत्ति सबसे तेजी से बढ़ी है, हालांकि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी डबल डिजिट ग्रोथ देखी गई है।</p>
<p>फोर्ब्स की रियल-टाइम लिस्ट के मुताबिक, एलन मस्क 779.6 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 में मस्क 500 अरब डॉलर की संपत्ति पार करने वाले पहले व्यक्ति बने थे। स्पेसएक्स के संभावित आईपीओ और टेस्ला के शेयरों में मजबूती से उनकी दौलत में तेज उछाल आया।</p>
<p>भारत में मुकेश अंबानी 104.6 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ सबसे अमीर बने हुए हैं, जबकि गौतम अडानी 89.6 अरब डॉलर और सावित्री जिंदल 40.2 अरब डॉलर के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। दुनिया में संपत्ति का केंद्रीकरण अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 12 सबसे अमीर लोगों के पास उतनी ही दौलत है जितनी दुनिया की आधी आबादी के पास भी नहीं, जिससे वैश्विक आर्थिक असमानता पर चिंता बढ़ गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 18:29:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान में आर्थिक संकट को लेकर प्रदर्शन उग्र हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दुबई, 01 जनवरी (वेब वार्ता)। ईरान में आर्थिक संकट को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन बुधवार देर रात उग्र हो गया। इस दौरान अर्धसैनिक बल बासिज मिलिशिया के एक सदस्य की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य घायल हैं। ईरान के पश्चिमी लोरेस्टान प्रांत के कुहदाश्त में हुई यह घटना उस अशांति में वृद्धि का संकेत है।</p>
<p>ये प्रदर्शन रविवार को दुकानदारों द्वारा मुद्रास्फीति और गिरती मुद्रा दर को लेकर शुरू किया गया था, जो पूरे ईरान में फैल गया है। बता दें कि तीन साल पहले बुर्का विवाद में हुई महसा अमीनी की मौत के बाद ये सबसे बड़ा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144966/protests-escalate-over-economic-crisis-in-iran"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/economic-report-budget-calculator-business.jpg" alt=""></a><br /><p>दुबई, 01 जनवरी (वेब वार्ता)। ईरान में आर्थिक संकट को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन बुधवार देर रात उग्र हो गया। इस दौरान अर्धसैनिक बल बासिज मिलिशिया के एक सदस्य की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य घायल हैं। ईरान के पश्चिमी लोरेस्टान प्रांत के कुहदाश्त में हुई यह घटना उस अशांति में वृद्धि का संकेत है।</p>
<p>ये प्रदर्शन रविवार को दुकानदारों द्वारा मुद्रास्फीति और गिरती मुद्रा दर को लेकर शुरू किया गया था, जो पूरे ईरान में फैल गया है। बता दें कि तीन साल पहले बुर्का विवाद में हुई महसा अमीनी की मौत के बाद ये सबसे बड़ा प्रदर्शन है।</p>
<p>कई इलाकों में गोलीबारी और झड़पें भी ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बुधवार देर रात कुछ शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प और गोलीबारी भी हुईं।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने ईरान के निर्वासित राजा रजा पहलवी के समर्थन में भी नारेबाजी की। कई जगहों पर हिंसा हुई है और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े हैं।</p>
<p>वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी इमारतों में भी प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की कोशिश की। कई प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।</p>
<p>ईरानी सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बयान जारी कर कहा कि कुहदाश्त में विरोध प्रदर्शन के दौरान असमाजिक तत्व शामिल हो गए और मौके का फायदा उठाते हुए अशांति फैलाने की कोशिश की।</p>
<p>सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजरानी ने कहा, अधिकारी ट्रेड यूनियनों और व्यापारियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातचीत कर इस मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 20:49:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय अर्थव्यवस्था के चुनौतियों के बावजूद मजबूत वृद्धि कायम रखने की संभावनाः आरबीआई रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 31 दिसंबर (भाषा) वैश्विक आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत वृद्धि बनाए रखने की संभावना है और इसे मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति एवं संतुलित व्यापक आर्थिक नीतियों से समर्थन मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।</p>
<p>आरबीआई ने अपनी 'वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट' (एफएसआर) में कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी भंडार है, उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है और लाभ भी मजबूत बना हुआ है।</p>
<p>आरबीआई ने कहा, "घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144934/indian-economy-likely-to-maintain-strong-growth-despite-challenges-rbi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4787_rbi-logo-bank-india1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 31 दिसंबर (भाषा) वैश्विक आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत वृद्धि बनाए रखने की संभावना है और इसे मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति एवं संतुलित व्यापक आर्थिक नीतियों से समर्थन मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।</p>
<p>आरबीआई ने अपनी 'वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट' (एफएसआर) में कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी भंडार है, उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है और लाभ भी मजबूत बना हुआ है।</p>
<p>आरबीआई ने कहा, "घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत है जिसे सुदृढ़ बहीखाते, अनुकूल वित्तीय हालात और वित्तीय बाजारों में कम उतार-चढ़ाव से समर्थन मिला है। हालांकि, निकट अवधि में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता से जोखिम बने हुए हैं।"</p>
<p>केंद्रीय बैंक के व्यापक दबाव परीक्षण के परिणाम इसकी पुष्टि करते हैं कि बैंक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संभावित नुकसान सहन कर पाने में सक्षम हैं और उनकी पूंजी नियामकीय न्यूनतम स्तर से काफी ऊपर बनी रहेगी। रिपोर्ट में म्यूचुअल फंड कंपनियों और समाशोधन निगमों की स्थिति को भी मजबूत बताया गया है।</p>
<p>इसके अलावा, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पर्याप्त पूंजी, स्थिर आय और बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के कारण मजबूत बनी हुई हैं।</p>
<p>आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, बीमा क्षेत्र में भी बहीखाते की स्थिति मजबूत है और एकीकृत सॉल्वेंसी अनुपात भी तय न्यूनतम सीमा से ऊपर है। सॉल्वेंसी अनुपात बीमा क्षेत्र में किसी कंपनी की दीर्घकालिक देनदारियों को पूरा करने और पॉलिसीधारकों के दावों का भुगतान करने की क्षमता को मापता है।</p>
<p>यह रिपोर्ट वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति के उस सामूहिक आकलन को दर्शाती है, जिसमें भारतीय वित्तीय प्रणाली की मजबूती और वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 16:34:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत 2025 में सात प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के साथ उभरते बाजारों की वृद्धि में होगा अग्रणी: मूडीज रेटिंग्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 28 नवंबर (भाषा) भारत 2025 में सात प्रतिशत और 2026 में 6.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि के साथ उभरते बाजारों और एशिया प्रशांत क्षेत्र में वृद्धि का नेतृत्व करेगा।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज रेटिंग्स’ ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत के घरेलू वृद्धि चालक इसकी आर्थिक मजबूती को बल देते हैं। हालांकि भारतीय रुपया, डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा है लेकिन फिर भी अधिकतर ‘रेटेड’ कंपनियों के पास सक्रिय मुद्रा जोखिम प्रबंधन या मजबूत वित्तीय भंडार हैं।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘ भारत उभरते बाजारों और पूरे क्षेत्र में वृद्धि का नेतृत्व करेगा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144304/india-to-lead-emerging-market-growth-with-seven-percent-gdp"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/d03042024-11-economy.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 28 नवंबर (भाषा) भारत 2025 में सात प्रतिशत और 2026 में 6.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि के साथ उभरते बाजारों और एशिया प्रशांत क्षेत्र में वृद्धि का नेतृत्व करेगा।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज रेटिंग्स’ ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत के घरेलू वृद्धि चालक इसकी आर्थिक मजबूती को बल देते हैं। हालांकि भारतीय रुपया, डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा है लेकिन फिर भी अधिकतर ‘रेटेड’ कंपनियों के पास सक्रिय मुद्रा जोखिम प्रबंधन या मजबूत वित्तीय भंडार हैं।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘ भारत उभरते बाजारों और पूरे क्षेत्र में वृद्धि का नेतृत्व करेगा जिसकी जीडीपी 2025 में सात प्रतिशत और 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।’’</p>
<p>इसने अनुमान लगाया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 2026 में औसत 3.4 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी। 2025 में इसके 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2024 में यह 3.3 प्रतिशत थी।</p>
<p>मूडीज ने कहा कि भारित औसत के आधार पर उभरते बाजार इस क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि को गति देंगे। इसकी औसत वृद्धि 5.6 प्रतिशत होगी जबकि उन्नत बाजारों में औसत वृद्धि 1.3 प्रतिशत रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 15:03:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चालू वित्त वर्ष में सात प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था: सीईए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 29 अक्टूबर (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों का संतोषजनक ढंग से सामना किया है।</p>
<p>उन्होंने भरोसा जताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंच सकती है।</p>
<p>नागेश्वरन ने यहां ‘भारत समुद्री सप्ताह’ (आईएमडब्‍ल्‍यू) में कहा कि साख (रेटिंग) निर्धारण करने वाली तीन वैश्विक एजेंसियों ने हाल ही में भारत की साख बढ़ाई है और यदि देश इसी राह पर आगे बढ़ता रहा तो वह जल्द ही ‘ए’ रेटिंग श्रेणी में आ सकता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143765/indian-economy-may-grow-at-the-rate-of-seven-percent"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/d03042024-11-economy.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 29 अक्टूबर (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों का संतोषजनक ढंग से सामना किया है।</p>
<p>उन्होंने भरोसा जताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंच सकती है।</p>
<p>नागेश्वरन ने यहां ‘भारत समुद्री सप्ताह’ (आईएमडब्‍ल्‍यू) में कहा कि साख (रेटिंग) निर्धारण करने वाली तीन वैश्विक एजेंसियों ने हाल ही में भारत की साख बढ़ाई है और यदि देश इसी राह पर आगे बढ़ता रहा तो वह जल्द ही ‘ए’ रेटिंग श्रेणी में आ सकता है।</p>
<p>शिक्षाविद से नीति सलाहकार बने नागेश्वरन ने कहा कि अर्थव्यवस्था के जुझारूपन ने सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उठाए गए कदमों के साथ मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘‘आरामदायक स्थिति" में रखा।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ इस साल वैश्विक अनिश्चितताओं एवं शुल्क संबंधी घटनाक्रमों से निपटने की भारतीय अर्थव्यवस्था के रुख से हमें काफी संतुष्ट होना चाहिए।’’</p>
<p>मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि आयकर में राहत एवं माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को युक्तिसंगत बनाने सहित नीतिगत उपायों ने ‘‘ वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक रूप से इस वर्ष की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को बेहतर बनाकर करीब सात प्रतिशत तक पहुंचा दिया है।’’</p>
<p>नागेश्वरन ने फरवरी में अनुमान लगाया था कि चालू वित्त वर्ष में आधार वर्ष 2011-12 के आधार पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत तक रह सकती है। हालांकि, अमेरिकी शुल्क के कारण उन्होंने इसे और घटाकर छह प्रतिशत कर दिया था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ हालांकि, अर्थव्यवस्था की मजबूती और मांग बढ़ाने के लिए समय पर उठाए गए नीतिगत कदमों ने हमें वास्तव में एक बहुत ही आरामदायक स्थिति में ला दिया है।’’</p>
<p>बैंक ऋण वृद्धि में सुस्ती की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए हमें अर्थव्यवस्था में कुल संसाधन जुटाने पर गौर करना चाहिए जिसमें गैर-बैंक ऋणदाताओं, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाणपत्र, इक्विटी बाजार आदि के माध्यम से जुटाई गई धनराशि भी शामिल है।</p>
<p>आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले छह साल में अर्थव्यवस्था में कुल संसाधन जुटाने में 28.5 प्रतिशत सालाना की वृद्धि हुई है।</p>
<p>यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब निजी पूंजीगत व्यय में सुस्त वृद्धि को लेकर व्यापक चिंता व्याप्त है।</p>
<p>नागेश्वरन ने जोर देकर कहा कि आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की है और अर्थव्यवस्था में ‘‘पर्याप्त धन उपलब्धता’’ सुनिश्चित करने के लिए नकदी उपाय किए हैं।</p>
<p>इसी कार्यक्रम में ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण के चेयरमैन के. राजारामण ने कहा कि प्राधिकरण को उम्मीद है कि पोत-परिवहन, बंदरगाहों और समुद्री उद्योग की कोष की आवश्यकता 300 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होंगी। यह राशि जुटाने के लिए ‘गिफ्ट सिटी’ एक अच्छा विकल्प हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 15:10:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की अर्थव्यवस्था खपत और निवेश बढ़ने से अप्रैल-सितंबर अवधि में रही मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (वेब वार्ता)। भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-सितंबर अवधि में मजबूत रही है। इसकी वजह खपत, निवेश और सरकारी खर्च का बढ़ना है। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।</p>
<p>सरकार की ओर से कहा गया कि समीक्षा अवधि में खाद्य उत्पादों की कीमतें एक सीमित दायरे में रही हैं। जीएसटी सुधार, एक्सटर्नल सेक्टर का प्रदर्शन संतुलित रहा। साथ ही, स्थिर तरलता और अच्छे वित्तीय बाजार से मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता बनी हुई है।</p>
<p>सरकार की ओर से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अगस्त की मौद्रिक नीति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143387/indias-economy-strengthened-in-april-september-period-due-to-increasing-consumption"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/d03042024-11-economy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (वेब वार्ता)। भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-सितंबर अवधि में मजबूत रही है। इसकी वजह खपत, निवेश और सरकारी खर्च का बढ़ना है। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।</p>
<p>सरकार की ओर से कहा गया कि समीक्षा अवधि में खाद्य उत्पादों की कीमतें एक सीमित दायरे में रही हैं। जीएसटी सुधार, एक्सटर्नल सेक्टर का प्रदर्शन संतुलित रहा। साथ ही, स्थिर तरलता और अच्छे वित्तीय बाजार से मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता बनी हुई है।</p>
<p>सरकार की ओर से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अगस्त की मौद्रिक नीति को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।</p>
<p>केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि अनुमान को संशोधित करके 6.8 प्रतिशत कर दिया है, जो कि पहले 6.5 प्रतिशत था। आधिकारिक बयान में कहा गया, “मजबूत उपभोग, निवेश और सरकारी खर्च के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है और अच्छे मानसून, जीएसटी 2.0, बेहतर क्रेडिट फ्लो और बढ़ती क्षमता उपयोग जैसे सहायक कारक सकारात्मक दृष्टिकोण को बनाए रख रहे हैं।”</p>
<p>भारत की रियल जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जो कि पिछली तिमाही में 7.4 प्रतिशत थी। यह पिछली सात तिमाही में सबसे तेज वृद्धि दर थी। अर्थव्यवस्था में इस तेजी की वजह मजबूत निवेश और उपभोग बढ़ना था।</p>
<p>वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है। कई वैश्विक रेटिंग एजेंसी भी इसकी पुष्टि कर चुकी है। आईएमएफ के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 26 में 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। फिच ने विकास दर वित्त वर्ष 26 में 6.9 प्रतिशत और वित्त वर्ष 27 में 6.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जारी किया है।</p>
<p>एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार, भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 26 में 6.5 प्रतिशत और ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष में विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143387/indias-economy-strengthened-in-april-september-period-due-to-increasing-consumption</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/143387/indias-economy-strengthened-in-april-september-period-due-to-increasing-consumption</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 14:57:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया को वैश्विक कार्यबल की जरूरत, नयी व्यापार व्यवस्थाएं उभरेंगी: जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, 28 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया को बड़े पैमाने पर वैश्विक कार्यबल की जरूरत होगी और अनिश्चितताओं के बावजूद नयी व्यापार व्यवस्थाएं उभरकर सामने आएंगी।</p>
<p>जयशंकर ने वैश्विक समीकरणों में बदलाव के बीच आर्थिक संबंधों में विविधता लाने के लिए लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते रिश्तों पर भी प्रकाश डाला।</p>
<p>उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें वार्षिक सत्र से इतर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के कार्यक्रम में शनिवार को कहा कि अनिश्चितताओं के बावजूद “व्यापार अपना रास्ता बनाता रहेगा।”</p>
<p>जयशंकर ने कहा, “दुनिया को वैश्विक कार्यबल की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143321/the-world-needs-new-business-systems-need-for-global-workforce"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-07/jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, 28 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया को बड़े पैमाने पर वैश्विक कार्यबल की जरूरत होगी और अनिश्चितताओं के बावजूद नयी व्यापार व्यवस्थाएं उभरकर सामने आएंगी।</p>
<p>जयशंकर ने वैश्विक समीकरणों में बदलाव के बीच आर्थिक संबंधों में विविधता लाने के लिए लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते रिश्तों पर भी प्रकाश डाला।</p>
<p>उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें वार्षिक सत्र से इतर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के कार्यक्रम में शनिवार को कहा कि अनिश्चितताओं के बावजूद “व्यापार अपना रास्ता बनाता रहेगा।”</p>
<p>जयशंकर ने कहा, “दुनिया को वैश्विक कार्यबल की जरूरत होगी और अनिश्चितताओं के बावजूद व्यापार अपना रास्ता बनाता रहेगा। हम नयी व्यापार व्यवस्थाएं, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और कार्यस्थल मॉडल देखेंगे, जो कम समय में वैश्विक परिदृश्य को बहुत अलग बना देंगे।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के साथ संपर्क में है, तथा वह “व्यापार एवं साझेदारी को और आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।”</p>
<p>विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि “ऐसे अशांत माहौल” में, खासतौर पर बड़े देशों के लिए, अधिक आत्मनिर्भरता हासिल करने के वास्ते क्षमता निर्माण करना अहम है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “आज भारत में इस पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है। प्रौद्योगिकी, आत्मनिर्भरता, बहुध्रुवीयता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग, सभी एक ही पहलू हैं।”</p>
<p>दक्षिण-दक्षिण सहयोग उन विकासशील देशों के बीच ज्ञान, विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को दर्शाता है जो 'ग्लोबल साउथ' का हिस्सा हैं। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य आम विकास की चुनौतियों का समाधान करना, आर्थिक और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देना और सामूहिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है, न कि विकसित देशों पर निर्भर रहना।</p>
<p>जयशंकर की यह टिप्पणी अमेरिका के एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाकर सालाना 1,00,000 अमेरिकी डॉलर किए जाने और रूसी तेल की खरीद को लेकर भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के हालिया कदमों के बीच आई है।</p>
<p>एच-1बी वीजाधारकों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी लगभग 71 फीसदी (2.8 लाख से अधिक) और चीनी पेशेवरों की हिस्सेदारी लगभग 11.7 प्रतिशत (46,600) है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Sep 2025 20:06:28 +0530</pubDate>
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