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                <title>Tax - Loktej</title>
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                <description>Tax RSS Feed</description>
                
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                <title>दस लाख रुपये से अधिक कीमत वाले लक्जरी सामान पर अब एक प्रतिशत टीसीएस लगेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) दस लाख रुपये से अधिक कीमत वाले हैंडबैग, कलाई घड़ी, जूते और स्पोर्ट्सवियर (खेल-कूद के पहनने वाले उत्पाद) जैसे लक्जरी सामान पर अब एक प्रतिशत ‘स्रोत पर कर संग्रह’ (टीसीएस) लगेगा।</p>
<p>आयकर विभाग ने 22 अप्रैल, 2025 से 10 लाख रुपये से अधिक की विशिष्ट लक्जरी वस्तुओं की बिक्री पर एक प्रतिशत की दर से टीसीएस की प्रयोज्यता को अधिसूचित किया है।</p>
<p>लक्जरी (विलासिता वाली) वस्तुओं के लिए टीसीएस प्रावधान वित्त अधिनियम, 2024 के माध्यम से जुलाई, 2024 में प्रस्तुत बजट के भाग के रूप में पेश किया गया था।</p>
<p>टीसीएस एकत्र करने का दायित्व</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140311/luxury-goods-priced-more-than-ten-million-rupees-will-now"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/tax.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) दस लाख रुपये से अधिक कीमत वाले हैंडबैग, कलाई घड़ी, जूते और स्पोर्ट्सवियर (खेल-कूद के पहनने वाले उत्पाद) जैसे लक्जरी सामान पर अब एक प्रतिशत ‘स्रोत पर कर संग्रह’ (टीसीएस) लगेगा।</p>
<p>आयकर विभाग ने 22 अप्रैल, 2025 से 10 लाख रुपये से अधिक की विशिष्ट लक्जरी वस्तुओं की बिक्री पर एक प्रतिशत की दर से टीसीएस की प्रयोज्यता को अधिसूचित किया है।</p>
<p>लक्जरी (विलासिता वाली) वस्तुओं के लिए टीसीएस प्रावधान वित्त अधिनियम, 2024 के माध्यम से जुलाई, 2024 में प्रस्तुत बजट के भाग के रूप में पेश किया गया था।</p>
<p>टीसीएस एकत्र करने का दायित्व विक्रेता पर होगा, जो अधिसूचित वस्तुओं जैसे कलाई घड़ी, कला वस्तुएं जैसे पेंटिंग, मूर्तियां और प्राचीन वस्तुएं, संग्रहणीय वस्तुएं जैसे सिक्के और टिकट, नौकाएं, हेलीकॉप्टर, लक्जरी हैंडबैग, धूप के चश्मे, जूते, उच्च श्रेणी के खेल परिधान और उपकरण, होम थिएटर सिस्टम और रेसिंग या पोलो के लिए घोड़े आदि के संबंध में होगा।</p>
<p>नांगिया एंडरसन एलएलपी के कर साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि यह अधिसूचना उच्च मूल्य वाले विवेकाधीन व्यय की निगरानी बढ़ाने और लक्जरी सामान खंड में ऑडिट को मजबूत करने की सरकार की मंशा बताती है।</p>
<p>यह अधिसूचना कर आधार का विस्तार करने तथा अधिक वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देने के व्यापक नीतिगत उद्देश्य को दर्शाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Apr 2025 13:35:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप के आयातित वाहन व घटकों पर शुल्क का भारत के वाहन क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा: जीटीआरआई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) अमेरिका के पूर्ण निर्मित वाहनों और घटकों पर अप्रैल से 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा का भारत के मोटर वाहन उद्योग पर प्रभाव सीमित रहेगा और यह घरेलू निर्यातकों के लिए अवसर भी प्रस्तुत कर सकता है। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्णतः निर्मित वाहनों (सीबीयू) और वाहन घटकों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की 26 मार्च को घोषणा की, जो तीन अप्रैल से लागू होगा।</p>
<p>जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ कैलेंडर वर्ष 2024 में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139616/trumps-imported-vehicles-and-components-will-have-a-minimum-impact"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/business-news-update.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) अमेरिका के पूर्ण निर्मित वाहनों और घटकों पर अप्रैल से 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा का भारत के मोटर वाहन उद्योग पर प्रभाव सीमित रहेगा और यह घरेलू निर्यातकों के लिए अवसर भी प्रस्तुत कर सकता है। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्णतः निर्मित वाहनों (सीबीयू) और वाहन घटकों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की 26 मार्च को घोषणा की, जो तीन अप्रैल से लागू होगा।</p>
<p>जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ कैलेंडर वर्ष 2024 में भारत के वाहन तथा वाहन घटकों के निर्यात पर गौर करने से पता चलता है कि भारतीय निर्यातकों पर इन शुल्क का काफी कम प्रभाव होगा।’’</p>
<p>शोध संस्थान ने कहा कि यात्री कारों के मामले में भारत ने 2024 में अमेरिका को मामूली 83 लाख अमरीकी डॉलर मूल्य के वाहन निर्यात किए। यह देश के कुल निर्यात 6.98 अरब अमरीकी डॉलर का केवल 0.13 प्रतिशत है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस नगण्य जोखिम का मतलब है कि शुल्क का भारत के फलते-फूलते कार निर्यात कारोबार पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ेगा और अन्य श्रेणियों में भी अमेरिकी जोखिम या तो कम है या इससे निपटा जा सकता है।</p>
<p>अमेरिका को ट्रक निर्यात केवल 1.25 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा, जो भारत के वैश्विक ट्रक निर्यात का 0.89 प्रतिशत है। ये आंकड़े सीमित जोखिम की पुष्टि करते हैं।</p>
<p>हालांकि, जीटीआरआई ने कहा गया कि इंजन लगे कार ‘चेसिस’ पर कुछ असर पड़ने की आशंका है। इसमें भारत के 24.69 करोड़ अमेरिकी डॉलर के वैश्विक निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 2.82 करोड़ डॉलर (11.4 प्रतिशत) थी।</p>
<p>श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ जिस क्षेत्र पर सबसे अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है वाहन कलपुर्जे व घटक ... भारत ने 2024 में अमेरिका को 2.2 अरब अमरीकी डॉलर मूल्य के वाहन घटक निर्यात किए, जो उसके वैश्विक निर्यात का 29.1 प्रतिशत है। हालांकि यह पहली नजर में चिंताजनक लगता है, लेकिन करीब से देखने पर यह पता चलता है कि दोनों देशों के बीच समान अवसर हैं।’’</p>
<p>अमेरिका ने पिछले वर्ष वैश्विक स्तर पर 89 अरब डॉलर मूल्य के वाहन घटकों का आयात किया, जिसमें मैक्सिको की हिस्सेदारी 36 अरब डॉलर, चीन की 10.1 अरब डॉलर तथा भारत की मात्र 2.2 अरब डॉलर थी।</p>
<p>चूंकि 25 प्रतिशत शुल्क सभी पर लागू होता है, इसलिए सभी निर्यातक देशों को एक ही तरह की बाधा का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>इस संदर्भ में उन्होंने कहा, भारत के वाहन कलपुर्जा व घटक उद्योग को भी एक अवसर मिल सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ श्रम-प्रधान विनिर्माण में अपने प्रतिस्पर्धात्मक लाभ और भारत की प्रतिस्पर्धी आयात शुल्क संरचनाओं (शून्य से 7.5 प्रतिशत तक) के साथ, भारत समय के साथ अमेरिका में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।’’</p>
<p>श्रीवास्तव ने कहा कि भारत सरकार को जवाबी कार्रवाई करने के बजाय, शुल्क कदम को दीर्घकालिक दृष्टि से एक तटस्थ या मामूली ही सही पर लाभप्रद घटना के रूप में देखना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Mar 2025 13:06:38 +0530</pubDate>
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                <title>देश में प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि कॉर्पोरेट आय कर (सीआईटी) और व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) राजस्व में लगातार वृद्धि के कारण हुई ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89650/significant-increase-in-direct-tax-collection-in-the-country"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/tax.jpg" alt=""></a><br /><p>वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह के अनंतिम आंकड़े महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शा रहे हैं। 10 फरवरी 2023 तक, सकल संग्रह ₹15.67 लाख करोड़ है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 24.09% अधिक है। रिफंड के समायोजन के बाद शुद्ध संग्रह 12.98 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के शुद्ध संग्रह से 18.40% अधिक है।</p>
<p>प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि कॉर्पोरेट आय कर (सीआईटी) और व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) राजस्व में लगातार वृद्धि के कारण हुई है। सीआईटी संग्रह की वृद्धि दर 19.33% है, जबकि पीआईटी संग्रह (प्रतिभूति लेनदेन कर सहित) की वृद्धि दर 29.63% है। रिफंड के समायोजन के बाद, सीआईटी संग्रह में शुद्ध वृद्धि 15.84% और पीआईटी संग्रह में 21.93% (केवल पीआईटी)/21.23% (एसटीटी सहित पीआईटी) है।</p>
<p>सरकार ने 1 अप्रैल 2022 और 10 फरवरी 2023 के बीच ₹2.69 लाख करोड़ की राशि का रिफंड जारी किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 61.58% अधिक है। ये आंकड़े भारत में एक निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं।</p>
<p>वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार वृद्धि दिखाई दे रही है, जो बढ़ती अर्थव्यवस्था और कर कानूनों के बढ़ते अनुपालन को दर्शाता है। कर प्रणाली में सुधार और कर रिफंड प्रदान करने के सरकार के प्रयास भी इस सकारात्मक प्रवृत्ति में योगदान दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Feb 2023 13:52:55 +0530</pubDate>
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