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                <title>Finance - Loktej</title>
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                <description>Finance RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सरकार ने 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवंबर तक बढ़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल एक महीने बढ़ाकर 30 नवंबर तक कर दिया है।</p>
<p>सरकार ने 31 दिसंबर 2023 को 16वें वित्त आयोग का गठन किया था और नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया का इसका चेयरमैन बनाया गया था। इस आयोग को 31 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट देनी थी।</p>
<p>आयोग मुख्य तौर पर एक अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि के लिए केंद्र एवं राज्यों के बीच करों के वितरण पर सिफारिशें करता है।</p>
<p>वित्त मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को अधिसूचना में कहा कि 16वें वित्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143602/government-extended-the-tenure-of-16th-finance-commission-till-30"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-09/d21092023-11-ministry-of-finance.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल एक महीने बढ़ाकर 30 नवंबर तक कर दिया है।</p>
<p>सरकार ने 31 दिसंबर 2023 को 16वें वित्त आयोग का गठन किया था और नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया का इसका चेयरमैन बनाया गया था। इस आयोग को 31 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट देनी थी।</p>
<p>आयोग मुख्य तौर पर एक अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि के लिए केंद्र एवं राज्यों के बीच करों के वितरण पर सिफारिशें करता है।</p>
<p>वित्त मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को अधिसूचना में कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट दाखिल करने करने की तिथि 30 नवंबर तक बढ़ाई जा रही है।</p>
<p>आयोग में चार सदस्य हैं। सचिव ऋत्विक पांडे, दो संयुक्त सचिव और एक आर्थिक सलाहकार इसकी सहायता करते हैं।</p>
<p>सेवानिवृत्त नौकरशाह एनी जॉर्ज मैथ्यू और अर्थशास्त्री मनोज पांडा आयोग के पूर्णकालिक सदस्य हैं, जबकि एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष और आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर अंशकालिक सदस्य हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 13:53:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर जीएसटी लगाने पर विचार नहीं: वित्त मंत्रालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर जीएसटी लगाने पर विचार नहीं कर रही है।</p>
<p>सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाने पर विचार करने की खबरों पर सफाई देते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि ये पूरी तरह से गलत, भ्रामक और निराधार हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''फिलहाल सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।''</p>
<p>जीएसटी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) जैसे कुछ खास शुल्कों पर लगाया जाता है।</p>
<p>केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140221/ministry-of-finance-is-not-considering-imposing-gst-on-upi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/d05042024-09-upi.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर जीएसटी लगाने पर विचार नहीं कर रही है।</p>
<p>सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाने पर विचार करने की खबरों पर सफाई देते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि ये पूरी तरह से गलत, भ्रामक और निराधार हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''फिलहाल सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।''</p>
<p>जीएसटी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) जैसे कुछ खास शुल्कों पर लगाया जाता है।</p>
<p>केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जनवरी 2020 से ग्राहक से व्यापारी (पीटूएम) के बीच यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर हटा दिया है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, ''चूंकि इस समय यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगाया जाता है, इसलिए इन लेनदेन पर कोई जीएसटी लागू नहीं है।''</p>
<p>यूपीआई लेनदेन में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जो वित्त वर्ष 2019-20 में 21.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2025 तक 260.56 लाख करोड़ रुपये हो गया है।</p>
<p>मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार यूपीआई के जरिये डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/140221/ministry-of-finance-is-not-considering-imposing-gst-on-upi</link>
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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 20:22:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर बचत के लिए ‘इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम’ एक बेहतर विकल्प: कर विशेषज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(राधा रमण मिश्रा)</p>
<p>नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) करदाता मार्च का महीना करीब आते ही अक्सर कर बचाने वाले विभिन्न विकल्पों की तलाश में जुट जाते हैं, लेकिन विभिन्न विकल्पों के साथ यह जानना भी जरूरी है कि कर बचत की कौन सी योजना रिटर्न और जरूरत पड़ने पर तुरंत नकदी उपलब्ध कराने के मामले में बेहतर है।</p>
<p>कर विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर कानून की धारा 80सी के तहत शामिल किए गए कर बचत वाले विकल्पों में से ‘इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम’ (ईएलएसएस) कहीं बेहतर विकल्प है।</p>
<p>कर विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कर बोझ कम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/123673/%E2%80%98equity-linked-saving-scheme%E2%80%99-a-better-option-for-tax-saving--tax-expert"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/3249_money-coin-investment-business-finance-bank.jpg" alt=""></a><br /><p>(राधा रमण मिश्रा)</p>
<p>नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) करदाता मार्च का महीना करीब आते ही अक्सर कर बचाने वाले विभिन्न विकल्पों की तलाश में जुट जाते हैं, लेकिन विभिन्न विकल्पों के साथ यह जानना भी जरूरी है कि कर बचत की कौन सी योजना रिटर्न और जरूरत पड़ने पर तुरंत नकदी उपलब्ध कराने के मामले में बेहतर है।</p>
<p>कर विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर कानून की धारा 80सी के तहत शामिल किए गए कर बचत वाले विकल्पों में से ‘इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम’ (ईएलएसएस) कहीं बेहतर विकल्प है।</p>
<p>कर विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कर बोझ कम करने के लिए व्यक्ति को धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये की बचत करने के अलावा 80 डी (स्वास्थ्य बीमा ) और धारा 80सीसीडी के तहत एनपीएस का भी लाभ उठाना चाहिए। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में 50,000 रुपये के योगदान पर अतिरिक्त कर छूट का दावा किया जा सकता है।</p>
<p>एनपीएस, ईएलएसएस, राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) एवं जीवन बीमा पॉलिसी (एलआईसी) जैसी विभिन्न कर बचत योजनाओं में से बेहतर विकल्प के बारे में पूछे जाने पर आनंद राठी वेल्थ लि. के उपाध्यक्ष चिंतक शाह ने कहा, ‘‘अगर आयकर कानून की धारा 80सी के तहत कर लाभ का दावा करने की बात आती है, तो मेरी पसंद इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) है।’’</p>
<p>शाह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इसके दो प्रमुख कारण हैं...पहला, ईएलएसएस निवेश सीधे शेयर बाजारों से जुड़ा होता है और इसने ऐतिहासिक रूप से सालाना लगभग 11 से 12 प्रतिशत का दीर्घकालिक रिटर्न दिया है। दूसरा, ईएलएसएस के तहत ‘लॉक इन अवधि’ केवल तीन साल की है। यानी तीन साल बाद आप अपनी राशि निकाल सकते हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यह सुविधा निवेशकों को उपभोग जरूरतों के लिए अपनी निवेश राशि को निकालने या धारा 80सी के तहत लाभ उठाने के लिए एक नए ईएलएसएस में फिर से निवेश करने की अनुमति देती है। इस प्रकार, धन सृजन और कर दक्षता की क्षमता का यह मेल ईएलएसएस को एक आकर्षक विकल्प बनाता है।’’</p>
<p>इस बारे में परामर्श कंपनी टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी में साझेदार विवेक जालान ने कहा, ‘‘निवेश विकल्प का चुनाव व्यक्ति के जोखिम लेने की क्षमता, जरूरत और लक्ष्य पर निर्भर करता है। जहां एनएससी, पीपीएफ जैसे उत्पादों पर ब्याज निश्चित होता है और इसकी घोषणा सरकार हर तीन महीने पर करती है, वहीं ईएलएसएस जैसे उत्पाद पर रिटर्न निश्चित नहीं है और उनका प्रदर्शन बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है।’’</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 80सी के तहत आने वाले निवेश एवं बचत उत्पादों में ईएलएसएस, पीपीएफ (सार्वजनिक भविष्य निधि), सुकन्या समृद्धि योजना, एनएससी, जीवन बीमा आदि शामिल हैं। वहीं एनपीएस धारा 80सीसीडी के तहत आता है।</p>
<p>पीपीएफ की ‘लॉक इन अवधि ’15 साल है, जबकि एनएससी का ‘लॉक इन’ समय पांच साल है। वहीं सुकन्या समृद्धि योजना के तहत ‘लॉक इन अवधि बच्ची के 18 साल पूरे होने तक तथा एलआईसी परिपक्वता अवधि तक होती है।</p>
<p>अगर ब्याज और रिटर्न की बात की जाए तो पीपीएफ पर यह फिलहाल 7.1 प्रतिशत और एनएससी पर 7.70 प्रतिशत है। सुकन्या समृद्धि योजना के लिए 8.2 प्रतिशत और एलआईसी के मामले में यह पांच से छह प्रतिशत के आसपास बैठता है।</p>
<p>धारा 80सी के अलावा अन्य कर बचत उपायों के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा, ‘‘करदाता धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत एनपीएस में 50,000 रुपये का योगदान करके, अतिरिक्त कर छूट का दावा कर सकते हैं। इससे उनकी कर योग्य आय और कम हो जाएगी।’’</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि एनपीएस में निवेश लंबी अवधि के लिए होने से इसमें पूर्ण तरलता यानी नकदी का अभाव है। इसलिए व्यक्तियों को इसे अपनाने से पहले इस विकल्प का सोच-विचारकर मूल्यांकन करना चाहिए।</p>
<p>इस बारे में जालान ने कहा, ‘‘एनपीएस में निवेश करने से व्यक्ति को 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त कर बचत करने में मदद मिलती है। यह नई एवं पुरानी कर व्यवस्था के तहत आने वाले करदाताओं, कर्मचारियों और स्वरोजगार में लगे लोगों के लिए प्रमुख कर बचत योजनाओं में से एक है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि एनपीएस से आंशिक निकासी की सुविधा है जो निर्धारित परिस्थितियों और मानदंडों पर निर्भर करती है। साथ ही निकाली गई राशि स्व-अंशदान के 25 प्रतिशत तक होने पर कर छूट के लिए पात्र है। इसके अलावा 60 वर्ष या सेवानिवृत्ति तक पहुंचने पर एकत्रित एनपीएस कोष के 60 प्रतिशत की एकमुश्त निकासी पर कर छूट भी मिलती है। शेष 40 प्रतिशत राशि से पेंशन उत्पाद खरीदना होता है।</p>
<p>अगर रिटर्न की बात की जाए तो पेंशन कोष विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के मुताबिक, एनपीएस के तहत इक्विटी में निवेश पर शुरू से लेकर अबतक 12 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न मिला है। वहीं एनपीएस से सरकारी कर्मचारियों के मामले में रिटर्न 9.4 प्रतिशत तक मिला है।</p>
<p>एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि करदाता सभी पात्र कटौतियों का पूरा उपयोग करे। पुरानी कर व्यवस्था को चुनने वालों के लिए इसमें धारा 80सी और 80डी (स्वास्थ्य बीमा और एहतियाती स्वास्थ्य देखभाल) के तहत अधिकतम कटौती शामिल है।</p>
<p>इसके अलावा करदाता हाल में पूंजी बाजार में आई गिरावट से हुए नुकसान का भी दावा अपने रिटर्न में कर सकते हैं। इससे उन्हें अन्य पूंजीगत लाभ पर कर देनदारी कम करने में मदद मिल सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 10:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधार हाउसिंग फाइनेंस का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के अंत तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक एयूएम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) किफायती घरों को सेवाएं देने वाली कंपनी आधार हाउसिंग फाइनेंस को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक उसकी प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) 25,000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगी।</p>
<p>आधार हाउसिंग फाइनेंस के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ऋषि आनंद ने पीटीआई-भाषा से कहा, “हमने पहली छमाही को 22,817 करोड़ रुपये (30 सितंबर, 2023 को 18,885 करोड़ रुपये से) के एयूएम के साथ बंद किया। एयूएम 23-24 प्रतिशत की वृद्धि दर के हिसाब से मार्च 2025 के अंत तक बढ़कर 25,000-26,000 करोड़ रुपये हो जाना चाहिए।’’</p>
<p>निम्न आय वर्ग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/107783/aadhar-housing-finance-aims-to-achieve-over-rs-25-000-crore-aum-by-the-end-of-the-current-financial-year"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/business-news-update.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) किफायती घरों को सेवाएं देने वाली कंपनी आधार हाउसिंग फाइनेंस को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक उसकी प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) 25,000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगी।</p>
<p>आधार हाउसिंग फाइनेंस के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ऋषि आनंद ने पीटीआई-भाषा से कहा, “हमने पहली छमाही को 22,817 करोड़ रुपये (30 सितंबर, 2023 को 18,885 करोड़ रुपये से) के एयूएम के साथ बंद किया। एयूएम 23-24 प्रतिशत की वृद्धि दर के हिसाब से मार्च 2025 के अंत तक बढ़कर 25,000-26,000 करोड़ रुपये हो जाना चाहिए।’’</p>
<p>निम्न आय वर्ग के आवास खंड पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने कहा, “हमारा औसत टिकट आकार 10 लाख रुपये है, तथा औसत ऋण-से-मूल्य अनुपात 59 प्रतिशत है, जो हमारे पोर्टफोलियो के 56 प्रतिशत वेतनभोगी ग्राहक खंड को पूरा करता है।”</p>
<p>पहली छमाही में लाभ 24 प्रतिशत बढ़कर 428 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 344 करोड़ रुपये था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने सकल एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) में 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.29 प्रतिशत पर बही की गुणवत्ता को सफलतापूर्वक बनाए रखा है, जबकि संग्रह दक्षता 99 प्रतिशत है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/107783/aadhar-housing-finance-aims-to-achieve-over-rs-25-000-crore-aum-by-the-end-of-the-current-financial-year</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Dec 2024 19:27:12 +0530</pubDate>
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                        url="https://www.loktej.com/media/2024-12/business-news-update.jpg"                         length="52512"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : देश की जीडीपी ग्रोथ रेट पहली तिमाही में 6 फीसदी रहने का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्‍ली, 22 अगस्‍त (हि.स.)। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने सरकारी पूंजीगत व्‍यय में कमी तथा शहरी उपभोक्‍ता मांग में नरमी आने से देश की आर्थिक वृद्धि दर वित्‍त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में छह फीसदी रहने का अनुमान जताया है। हालांकि जून तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर के आधिकारिक आंकड़े 30 अगस्त को आएंगे।<br /><br />निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (आईसीआरए लिमिटेड) ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अप्रैल-जून तिमाही में छह फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम है। इक्रा ने पूरे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103925/new-delhi-the-countrys-gdp-growth-rate-is-estimated-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-08/b22082024-03.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्‍ली, 22 अगस्‍त (हि.स.)। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने सरकारी पूंजीगत व्‍यय में कमी तथा शहरी उपभोक्‍ता मांग में नरमी आने से देश की आर्थिक वृद्धि दर वित्‍त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में छह फीसदी रहने का अनुमान जताया है। हालांकि जून तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर के आधिकारिक आंकड़े 30 अगस्त को आएंगे।<br /><br />निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (आईसीआरए लिमिटेड) ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अप्रैल-जून तिमाही में छह फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम है। इक्रा ने पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.8 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में दर्ज 8.2 फीसदी की ग्रोथ से कम है।<br /><br />सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) मौजूदा वित्‍त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-जून तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर का आधिकारिक आंकड़ा 30 अगस्त, 2024 को जारी करेगा। इससे पिछले वित्त 2023-24 की अप्रैल-जून तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही थी। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को चालू वित्‍त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी और पहली तिमाही में वृद्धि दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है।<br /><br />उल्‍लेखनीय है कि आईसीआरए लिमिटेड एक भारतीय स्वतंत्र और पेशेवर निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है। इस कंपनी की स्थापना 1991 में हुई थी। इसका मूल नाम इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लिमिटेड था। हालांकि, इसे इक्रा के नाम से जाना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Aug 2024 14:54:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में बैंकिंग संकट गहराने के आसार, दबाव में ग्लोबल मार्केट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली, 05 मई (हि.स.)। ग्लोबल मार्केट में आज कमजोरी का रुख नजर आ रहा है। अमेरिका में बैंकिंग संकट बढ़ने की आशंका के कारण वॉल स्ट्रीट के तीनों सूचकांक पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। इसी तरह यूरोपियन बाजार में भी पिछले सत्र के कारोबार के दौरान लगातार कमजोरी बनी रही। आज एशियाई बाजारों में भी दबाव की स्थिति बनी हुई है। भारत के अलावा एशिया के 9 बाजारो में से 6 बाजारों में आज कारोबार हो रहा है। इनमें से हैंग सेंग इंडेक्स को छोड़कर शेष सभी बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91870/global-markets-under-pressure-as-us-banking-crisis-deepens"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/dollar-currency-money-note1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली, 05 मई (हि.स.)। ग्लोबल मार्केट में आज कमजोरी का रुख नजर आ रहा है। अमेरिका में बैंकिंग संकट बढ़ने की आशंका के कारण वॉल स्ट्रीट के तीनों सूचकांक पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। इसी तरह यूरोपियन बाजार में भी पिछले सत्र के कारोबार के दौरान लगातार कमजोरी बनी रही। आज एशियाई बाजारों में भी दबाव की स्थिति बनी हुई है। भारत के अलावा एशिया के 9 बाजारो में से 6 बाजारों में आज कारोबार हो रहा है। इनमें से हैंग सेंग इंडेक्स को छोड़कर शेष सभी बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है।<br /><br />पिछले कारोबारी सत्र के दौरान डाओ जोंस 286.50 अंक यानी 0.86 प्रतिशत टूट कर 33,127.74 अंक के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एसएंडपी 500 इंडेक्स ने 0.72 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,061.22 अंक के स्तर पर पिछले सत्र के अपने कारोबार का अंत किया। इसके अलावा नैस्डेक 58.93 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 11,966.40 अंक के स्तर पर बंद हुआ।<br /><br />आपको आपको बता दें क्या अमेरिका में बैंकिंग संकट एक बार फिर गहराता हुआ नजर आने लगा है। यहां के तीन और रीजनल बैंकों के शेयरों में भारी गिरावट की स्थिति बनी है। पिछले 1 हफ्ते के दौरान रीजनल बैंक इंडेक्स 17 प्रतिशत तक टूट गया है। सिर्फ पिछले सत्र के कारोबार में ही पैकवेस्ट बैनकॉर्प के शेयरों में 51 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इसी तरह वेस्टर्न एलायंस बैनकॉर्प में 38 प्रतिशत की कमजोरी आ गई, जबकि फर्स्ट होराइजन के शेयर 33 प्रतिशत तक फिसल गए। जाहिर है बैंकों के इस संकट का असर वॉल स्ट्रीट के तीनों सूचकांकों पर नकारात्मक रूप से पड़ा है। इसी वजह से पिछले कारोबारी सत्र में वॉल स्ट्रीट के तीनों सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।<br /><br />पिछले कारोबारी सत्र में यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट का रुख बना रहा। एफटीएसई इंडेक्स 50.73 अंक यानी 1.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 7,702.64 अंक के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह सीएसी इंडेक्स ने 63.06 अंक यानी 0.86 प्रतिशत गिर कर 7,340.77 अंक के स्तर पर पिछले सत्र के अपने कारोबार का अंत किया। इसके अलावा डीएएक्स इंडेक्स 80.82 अंक यानी 0.51 प्रतिशत फिसल कर 15,734.24 अंक के स्तर पर बंद हुआ।<br /><br />एशियाई बाजारों में भी आज दबाव की स्थिति बनी हुई है। भारत के अलावा एशिया के 9 बाजारों में से निक्केई, कोस्पी और सेट कंपोजिट इंडेक्स में आज कारोबार नहीं हो रहा है। इन 9 एशियाई बाजारों में से सिर्फ हैंग सेंग इंडेक्स 128.18 अंक यानी 0.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,076.91 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है।<br /><br />दूसरी ओर एसजीएक्स निफ्टी 59 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 18,226 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स 0.17 प्रतिशत गिरकर 3,263.3 अंक के स्तर पर पहुंचा हुआ है। ताइवान वेटेड इंडेक्स 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 15,608.30 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसके अलावा जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 105.89 अंक यानी 1.55 प्रतिशत टूट कर 6,738.14 अंक के स्तर पर और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.72 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 3,326.62 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 May 2023 15:20:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फरवरी 2023 में भारत में थोक मुद्रास्फीति 24 महीने के निचले स्तर 3.85% पर पहुंच गई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति में 24 महीने के निचले स्तर का संकेत देते हुए डेटा जारी किया है, जो फरवरी 2023 में 3.85% तक गिर गया। यह डेटा जनवरी 2023 में WPI मुद्रास्फीति के 4.73% पर आने के बाद एक स्वागत योग्य राहत के रूप में आया है। </p>
<p>यह जनवरी 2021 के बाद से सबसे कम WPI मुद्रास्फीति को चिह्नित करता है जब यह 2.51% थी। फरवरी 2023 में थोक मुद्रास्फीति में गिरावट का श्रेय कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, गैर-खाद्य वस्तुओं और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट को दिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90412/wholesale-inflation-in-india-to-hit-24-month-low-of-385"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/economic-report-budget-calculator-business.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति में 24 महीने के निचले स्तर का संकेत देते हुए डेटा जारी किया है, जो फरवरी 2023 में 3.85% तक गिर गया। यह डेटा जनवरी 2023 में WPI मुद्रास्फीति के 4.73% पर आने के बाद एक स्वागत योग्य राहत के रूप में आया है। </p>
<p>यह जनवरी 2021 के बाद से सबसे कम WPI मुद्रास्फीति को चिह्नित करता है जब यह 2.51% थी। फरवरी 2023 में थोक मुद्रास्फीति में गिरावट का श्रेय कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, गैर-खाद्य वस्तुओं और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट को दिया गया। इसके अतिरिक्त, फरवरी में खनिज, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पाद, रसायन और रासायनिक उत्पाद, बिजली के उपकरण और मोटर वाहनों की कीमतों में भी कमी आई।</p>
<p>एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि थोक मुद्रास्फीति में गिरावट मुख्य रूप से आवश्यक उत्पादों की कीमतों में कमी के कारण हुई है। यह समाचार संभावित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, विशेष रूप से विनिर्माण और उत्पादन क्षेत्रों के संबंध में।</p>
<p>सरकार उम्मीद कर रही होगी कि यह प्रवृत्ति जारी रहेगी, क्योंकि इससे संभावित रूप से उपभोक्ता मांग में वृद्धि हो सकती है और भारतीय अर्थव्यवस्था को समग्र रूप से बढ़ावा मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/90412/wholesale-inflation-in-india-to-hit-24-month-low-of-385</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Mar 2023 13:20:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिलिकॉन वैली बैंक के पतन से भारतीय स्टार्टअप चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका में सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) के पतन ने कई भारतीय स्टार्टअप्स को अपने निवेश के जोखिम के बारे में चिंतित कर दिया है। ग्लोबल सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (सास) आधारित मार्केट इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन के आंकड़ों के मुताबिक, एसवीबी का एक्सपोजर कम से कम 21 भारतीय स्टार्टअप्स तक था, हालांकि निवेश के आकार का खुलासा नहीं किया गया था। इसके अलावा, SVB ने हाल ही में किसी भी भारतीय स्टार्टअप में निवेश नहीं किया है। कैलिफ़ोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ाइनेंशियल प्रोटेक्शन एंड इनोवेशन, जिसने बैंक को बंद कर दिया, ने घोषणा की कि सभी बीमित जमाकर्ताओं की सोमवार, 13 मार्च, 2023 तक अपनी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>अमेरिका में सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) के पतन ने कई भारतीय स्टार्टअप्स को अपने निवेश के जोखिम के बारे में चिंतित कर दिया है। ग्लोबल सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (सास) आधारित मार्केट इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन के आंकड़ों के मुताबिक, एसवीबी का एक्सपोजर कम से कम 21 भारतीय स्टार्टअप्स तक था, हालांकि निवेश के आकार का खुलासा नहीं किया गया था। इसके अलावा, SVB ने हाल ही में किसी भी भारतीय स्टार्टअप में निवेश नहीं किया है। कैलिफ़ोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ाइनेंशियल प्रोटेक्शन एंड इनोवेशन, जिसने बैंक को बंद कर दिया, ने घोषणा की कि सभी बीमित जमाकर्ताओं की सोमवार, 13 मार्च, 2023 तक अपनी बीमित जमा राशि तक पूरी पहुँच होगी। हालाँकि, स्टार्टअप संस्थापक चिंतित हैं।</p>
<p>समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार पिंटरेस्ट और कॉइनबेस के बोर्ड के सदस्य गोकुल राजाराम ने ट्वीट किया कि "भारत-आधारित संस्थापकों को नहीं पता कि एसवीबी के विकल्प के रूप में किसे जाना है।" द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, SVB 2,500 से अधिक वेंचर कैपिटल फर्मों का बैंक था, जिनमें लाइट्सपीड, बैन कैपिटल और इनसाइट पार्टनर्स शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंक कई तकनीकी अधिकारियों की व्यक्तिगत संपत्ति का प्रबंधन करता है और सिलिकॉन वैली तकनीकी सम्मेलनों, पार्टियों, रात्रिभोज और मीडिया आउटलेट्स का एक प्रमुख प्रायोजक था।</p>
<p>वर्कप्लेस सेफ्टी एनालिटिक्स स्टार्टअप कॉम्पसाइंस के सीईओ जोश बटलर ने आशंका जताई कि वह बैंक से अपनी कंपनी का फंड नहीं निकाल पा रहे हैं। "मेरे निवेशकों से लेकर कर्मचारियों और मेरी अपनी मां तक हर कोई यह पूछने के लिए पहुंच रहा है कि क्या चल रहा है। बड़ा सवाल यह है कि हम जल्द ही बाकी फंडों तक कैसे पहुंच पाएंगे, अगर कितना भी हो तो? यह बिल्कुल डरावना है।" फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को ग्राहक जमा में एसवीबी के $ 175 बिलियन का नियंत्रण ले लिया और नियामक द्वारा $250,000 तक की जमा राशि का बीमा किया गया। हालांकि, ग्राहकों को इस बात की कोई जानकारी नहीं मिली है कि वे अपने पैसे कब वापस पा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/90338/indian-startups-worried-about-the-collapse-of-silicon-valley-bank</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Mar 2023 13:15:05 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि कॉर्पोरेट आय कर (सीआईटी) और व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) राजस्व में लगातार वृद्धि के कारण हुई ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89650/significant-increase-in-direct-tax-collection-in-the-country"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/tax.jpg" alt=""></a><br /><p>वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह के अनंतिम आंकड़े महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शा रहे हैं। 10 फरवरी 2023 तक, सकल संग्रह ₹15.67 लाख करोड़ है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 24.09% अधिक है। रिफंड के समायोजन के बाद शुद्ध संग्रह 12.98 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के शुद्ध संग्रह से 18.40% अधिक है।</p>
<p>प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि कॉर्पोरेट आय कर (सीआईटी) और व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) राजस्व में लगातार वृद्धि के कारण हुई है। सीआईटी संग्रह की वृद्धि दर 19.33% है, जबकि पीआईटी संग्रह (प्रतिभूति लेनदेन कर सहित) की वृद्धि दर 29.63% है। रिफंड के समायोजन के बाद, सीआईटी संग्रह में शुद्ध वृद्धि 15.84% और पीआईटी संग्रह में 21.93% (केवल पीआईटी)/21.23% (एसटीटी सहित पीआईटी) है।</p>
<p>सरकार ने 1 अप्रैल 2022 और 10 फरवरी 2023 के बीच ₹2.69 लाख करोड़ की राशि का रिफंड जारी किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 61.58% अधिक है। ये आंकड़े भारत में एक निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं।</p>
<p>वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार वृद्धि दिखाई दे रही है, जो बढ़ती अर्थव्यवस्था और कर कानूनों के बढ़ते अनुपालन को दर्शाता है। कर प्रणाली में सुधार और कर रिफंड प्रदान करने के सरकार के प्रयास भी इस सकारात्मक प्रवृत्ति में योगदान दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Feb 2023 13:52:55 +0530</pubDate>
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