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                <title>Relationship - Loktej</title>
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                <description>Relationship RSS Feed</description>
                
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                <title>डेटिंग ऐप्स से क्यों होता जा रहा है लोगों का मोहभंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कॉवेंट्री (ब्रिटेन), 16 मई (द कन्वरसेशन) कुछ समय पहले डेटिंग ऐप्स ने लोगों के रोमांटिक पार्टनर से मिलने के तरीके को बदल दिया था। लेकिन ऐसा लगता है कि अब इनकी लोकप्रियता खत्म होती जा रही है।</p>
<p>आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल, ब्रिटेन में चार बड़े डेटिंग ऐप ने अपने लाखों उपयोगकर्ता खो दिए। मेरे साथी और मैंने जो अध्ययन किया है, उससे पता चलता है कि ऐसा इसलिए हुआ है कि लोग इन ऐप से निराश हो चुके हैं और ऊब गए हैं।</p>
<p>यह निराशा आमतौर पर ऐप के दूसरे उपयोगकर्ताओं के अनुचित व्यवहार के कारण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140799/6826e4f2c47ed"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/8601_hands-heart-couple-woman-man-love-youth-lady-girl-friend.jpg" alt=""></a><br /><p>कॉवेंट्री (ब्रिटेन), 16 मई (द कन्वरसेशन) कुछ समय पहले डेटिंग ऐप्स ने लोगों के रोमांटिक पार्टनर से मिलने के तरीके को बदल दिया था। लेकिन ऐसा लगता है कि अब इनकी लोकप्रियता खत्म होती जा रही है।</p>
<p>आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल, ब्रिटेन में चार बड़े डेटिंग ऐप ने अपने लाखों उपयोगकर्ता खो दिए। मेरे साथी और मैंने जो अध्ययन किया है, उससे पता चलता है कि ऐसा इसलिए हुआ है कि लोग इन ऐप से निराश हो चुके हैं और ऊब गए हैं।</p>
<p>यह निराशा आमतौर पर ऐप के दूसरे उपयोगकर्ताओं के अनुचित व्यवहार के कारण होती है। ऐसा लगता है कि यह बोरियत इस बढ़ते विश्वास से उत्पन्न होती है कि इन ऐप्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सार्थक जुड़ाव की तुलना में अल्पकालिक जुड़ाव को प्राथमिकता देती है।</p>
<p>ये डेटिंग ऐप पहले की ऑनलाइन डेटिंग वेबसाइटों की तुलना में काफी अलग हैं, जो प्रामाणिक संबंध स्थापित करने के तरीके के बारे में अधिक पारदर्शी थीं। उन वेबसाइट पर उपयोगकर्ताओं से कई तरह के सवाल पूछकर और उनके व्यक्तित्व का काफी मूल्यांकन करके पारदर्शिता कायम की जाती थी।</p>
<p>उदाहरण के लिए ‘ओके क्यूपिड डॉट कॉम’ (2003 में स्थापित) पर उपयोगकर्ताओं से कई बहु विकल्प प्रश्न पूछे जाते थे। इसके अलावा उनसे उन्हीं प्रश्नों के उत्तर भी पूछे जाते थे, जो प्रश्न वे भावी पार्टनर से पूछना चाहते थे।</p>
<p>इसके विपरीत, आज के डेटिंग ऐप की बहुत कम पारदर्शी एआई पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। एआई पर आधारित डेटिंग ऐप वास्तविक तौर-तरीकों के बजाय झंझटों से मुक्त नियमों (पसंद-नापसंद की संख्या, संदेश भेजने के तरीके और ऐप पर समय बिताने ) पर आधारित प्रतीत होते हैं।</p>
<p>इसकी वजह से लोग अक्सर अस्पष्ट, अल्पकालिक संबंध बना पाते हैं और सार्थक संबंध नहीं बन पाते। आज के डेटिंग ऐप्स के बिजनेस मॉडल की वजह से कई उपयोगकर्ताओं के लिए अपनी पसंद का साथी खोजना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस बिजनेस मॉडल के तहत लोगों से कहा जाता है कि अगर वे कुछ भुगतान करते हैं तो उनकी प्रोफाइल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाएगा और वे भी अधिक से अधिक लोगों से संपर्क कर पाएंगे।</p>
<p>इसकी वजह से, कई उपयोगकर्ताओं में असंतोष की भावना उत्पन्न होती है, जिसके चार चरण होते हैं।</p>
<p>असंतोष की इस भावना की शुरुआत बोरियत से होती है। सामान्य बोरियत के कारण कई उपोयगकर्ताओं की बातचीत अक्सर फिजूल और नीरस बातचीत में बदल जाती है। इससे बोरियत बढ़ती है, जो फिर पूरे डेटिंग ऐप नेटवर्क में फैलती और बढ़ती जाती है।</p>
<p>इसके बाद निराशा की सामान्य भावना महसूस होती है, क्योंकि उपयोगकर्ता नियमित "घोस्टिंग" (बिना बताए बातचीत बंद कर देना), "फ्लेकिंग" (अंतिम क्षण में डेट रद्द करना) और इधर-उधर की बातों से थक जाते हैं और वास्तविक रूप से एक-दूसरे को डेट नहीं कर पाते।</p>
<p>इसके बाद शुरू होता है तीसरा चरण, जिसके "एल्गोरिदम संशयवाद" कहा जाता है। इस मोड़ पर आकर उपयोगकर्ता डेटिंग ऐप एल्गोरिदम के प्रति अधिक सशंकित हो जाते हैं, उन्हें संदेह होता है कि अब प्रामाणिक संबंध स्थापित करने के बजाय उनका काम इन ऐप पर फिजूलखर्च करना रह गया है।</p>
<p>अंत में, उबाउपन शुरू हो जाता है। उपयोगकर्ता यह सोचकर बस स्वाइपिंग (पसंद-नापसंद करना) और टेक्स्टिंग (संदेश भेजना) करते रहते हैं कि कोई बेहतर विकल्प तो है नहीं। यह सब कुछ हद तक अनुभवों को और खराब करता है, जिसके बाद अंततः कई लोग प्लेटफ़ॉर्म से पूरी तरह से दूर हो जाते हैं।</p>
<p>‘स्वाइप ऑन, स्वाइप ऑफ’ शोध से यह भी पता चला है कि जब सोशल मीडिया के प्रति शुरुआती उत्साह था तब नई उम्र के लोगों के बीच ऑनलाइन डेटिंग के उपयोग में वृदधि हुई।</p>
<p>सोशल मीडिया उपयोगकर्ता अब गलत सूचना, धोखाधड़ी और आपत्तिजनक कंटेंट के जोखिमों के बारे में अधिक सशंकित (और सतर्क) हो रहे हैं।</p>
<p>इन सबके बावजूद, लोग अभी भी ‘डेटिंग प्लेटफर्म’ के जरिए साथी तलाश करते हैं, फिर चाहे उनका साथ कुछ समय के लिए हो या फिर लंबे वक्त तक के लिए। लिहाजा समस्या शायद डिजिटल डेटिंग के साथ नहीं है, बल्कि इस बात से है कि उद्योग एआई का उपयोग कैसे करता है।</p>
<p>हमारा शोध बताता है कि जैसे-जैसे डेटिंग ऐप उपयोगकर्ता अधिक समझदार होते जा रहे हैं, वे अधिक पारदर्शिता और बेहतर डेटिंग ऐप अनुभव की उम्मीद कर रहे हैं।</p>
<p>उद्योग का भविष्य अंततः इस बात पर निर्भर कर सकता है कि क्या कंपनियां एआई से ध्यान हटाकर प्रामाणिक जुड़ाव को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। और जो प्लेटफॉर्म पारदर्शिता को अपनाते हैं और उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाते हैं, वे कई लोगों को फिर से डेटिंग ऐप से जुड़ने पर मजबूर कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 May 2025 13:44:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शादी आपसी विश्वास और साहचर्य पर बना रिश्ता है: उच्चतम न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 21 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अलग-अलग रह रहे अभियंता दंपति को विवाह विच्छेद की अनुमति देने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि शादी एक ऐसा रिश्ता है जो आपसी विश्वास, साहचर्य और साझा अनुभवों पर बनता है।</p>
<p>न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि अलगाव की अवधि और पति-पत्नी के बीच स्पष्ट तल्खी यह स्पष्ट करती है कि विवाह को बचाने की कोई संभावना नहीं है।</p>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘विवाह आपसी विश्वास, साहचर्य और साझा अनुभवों पर बना एक रिश्ता है। जब ये आवश्यक तत्व लंबे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/113161/marriage-is-a-relationship-built-on-mutual-trust-and-companionship--supreme-court"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/4718_marriage-bride-groom-couple-shaadi-shadi.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 21 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अलग-अलग रह रहे अभियंता दंपति को विवाह विच्छेद की अनुमति देने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि शादी एक ऐसा रिश्ता है जो आपसी विश्वास, साहचर्य और साझा अनुभवों पर बनता है।</p>
<p>न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि अलगाव की अवधि और पति-पत्नी के बीच स्पष्ट तल्खी यह स्पष्ट करती है कि विवाह को बचाने की कोई संभावना नहीं है।</p>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘विवाह आपसी विश्वास, साहचर्य और साझा अनुभवों पर बना एक रिश्ता है। जब ये आवश्यक तत्व लंबे समय तक गायब रहते हैं तो वैवाहिक बंधन किसी भी सार से रहित केवल कानूनी औपचारिकता बनकर रह जाता है।’’</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अदालत ने लगातार माना है कि लंबे समय तक अलगाव और मेल-मिलाप करने की अक्षमता वैवाहिक विवादों पर निर्णय लेने में एक प्रासंगिक कारक है।</p>
<p>पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में अलगाव की अवधि और दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट दुश्मनी से यह स्पष्ट हो जाता है कि शादी को बचाने की कोई संभावना नहीं है।</p>
<p>पीठ ने कहा कि पति और पत्नी दो दशकों से अलग-अलग रह रहे हैं और यह तथ्य इस निष्कर्ष को और पुष्ट करता है कि यह विवाह अब व्यवहार्य नहीं है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने उन महिलाओं की अपील खारिज कर दी जिन्होंने क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद की अनुमति देने वाले मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के आठ जून, 2018 के फैसले को चुनौती दी थी।</p>
<p>पीठ ने कहा कि पति ने यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध कराए हैं कि अपीलकर्ता (पत्नी) ऐसे व्यवहार में शामिल थी जिससे उसे अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक परेशानी हुई।</p>
<p>दोनों ने 30 जून, 2002 को शादी की थी और दोनों से नौ जुलाई, 2003 को एक बेटी का जन्म हुआ। दोनों पक्षों के बीच कलह बच्ची के जन्म के ठीक बाद शुरू हुई जब पत्नी ने अपने माता-पिता के घर से लौटने से इनकार कर दिया। प्रसव के लिए माता-पिता के घर गई पत्नी ने लौटने से इनकार कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2024 08:06:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली हाई कोर्ट: पुरुष के साथ महिला का साथ होना यौन संबंध के लिए सहमति नहीं है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने घोषित किया है कि एक महिला का एक पुरुष के साथ रहने का यह अर्थ नहीं लगाया जा सकता है कि वह उसके साथ यौन संबंध के लिए सहमत है। अदालत ने यह बयान संजय मलिक, जिसे संत सेवक दास के नाम से भी जाना जाता है, की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिस पर अक्टूबर 2019 में दिल्ली के एक छात्रावास में चेक नागरिक के साथ बलात्कार करने का आरोप है और 2020 में उसके साथ दो और मौकों पर शारीरिक संबंध बनाए।</p>
<p>अभियोजन पक्ष ने मलिक पर एक "आध्यात्मिक गुरु" के रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90435/delhi-high-court-woman-being-with-a-man-does-not"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/delhi-high-court.-1.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने घोषित किया है कि एक महिला का एक पुरुष के साथ रहने का यह अर्थ नहीं लगाया जा सकता है कि वह उसके साथ यौन संबंध के लिए सहमत है। अदालत ने यह बयान संजय मलिक, जिसे संत सेवक दास के नाम से भी जाना जाता है, की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिस पर अक्टूबर 2019 में दिल्ली के एक छात्रावास में चेक नागरिक के साथ बलात्कार करने का आरोप है और 2020 में उसके साथ दो और मौकों पर शारीरिक संबंध बनाए।</p>
<p>अभियोजन पक्ष ने मलिक पर एक "आध्यात्मिक गुरु" के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया, जो 8 अगस्त, 2019 को निधन हो चुके अपने मृत पति के अंतिम संस्कार में चेक नागरिक की सहायता कर सकता था। महिला, जो एक विदेशी नागरिक थी और हिंदू संस्कारों से अपरिचित थी, अपने पति के अंतिम संस्कार और समारोहों को पूरा करने में मदद करने के लिए आरोपी पर निर्भर थी।</p>
<p>अदालत ने कहा कि अंतिम संस्कार करने के लिए महिला की विभिन्न स्थानों की यात्रा लगभग चार महीने की अवधि में हुई, और यह विशेष रूप से आरोप नहीं लगाया गया कि मलिक ने महिला को बंधक बना लिया या उसे अपने साथ यात्रा करने के लिए मजबूर किया। हालांकि, अदालत ने घोषणा की कि केवल यह कहने के लिए अभियोक्ता के दिमाग की स्थिति का निर्धारक नहीं होगा कि कथित यौन संबंध सहमति से थे।</p>
<p>अदालत ने आगे कहा कि हालांकि शारीरिक संपर्क की पहली घटना को बलात्कार नहीं माना गया था, लेकिन उस कृत्य पर महिला की चुप्पी को भविष्य में और अधिक हिंसक यौन संपर्क के अनुमोदन के रूप में नहीं समझा जा सकता है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने पाया कि आरोपों ने मलिक की ओर से एक "पवित्र व्यक्ति" होने का ढोंग करके एक विदेशी नागरिक की उसके पति की मृत्यु के बाद के समारोहों में सहायता करने के लिए धोखे और कपट का खुलासा किया। मामले का यह पहलू विशेष रूप से चिंताजनक था।</p>
<p>इसलिए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी और अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों के बयान पूरे होने के बाद ट्रायल कोर्ट के समक्ष उसी राहत के लिए नए सिरे से आवेदन करने की स्वतंत्रता दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Mar 2023 14:43:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहमति से बने शारीरिक संबंध में खटास आने के बाद महिलाओं द्वारा बलात्कार का आरोप लगाना गलत</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोपी को बरी किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89467/it-is-wrong-for-women-to-allege-rape-after-a"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/court-symbol5.jpg" alt=""></a><br /><p>सर्वोच्च अदालत ने दुष्कर्म के एक आरोपी को बरी कर दिया है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को सात साल की सजा सुनाई थी। </p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक शादीशुदा महिला अपने तीन बच्चों और पति को 2009 में छोड़कर अपने प्रेमी नईम अहमद के साथ भाग गई। 2011 में महिला को नईम से एक बच्चा पैदा हुआ। महिला के कहे अनुसार नईम ने उससे शादी करने का वादा किया था, लेकिन वो ऐसा करने से बचता रहा। 2012 में महिला को पता चला कि नईम ने उससे झूठ बोला था और वह पहले से शादीशुदा था और उसके बच्चे भी हैं। </p>
<p>महिला को ये सबकुछ पता होने के बाद भी वह नईम के साथ रहती रही और अपने पति से तलाक लेकर 2014 में अपने तीन बच्चों को उसी के पास छोड़ आई। नईम में अब भी शादी को टालता रहा। 2015 में महिला ने नईम के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत करवा दी। </p>
<img src="https://www.loktej.com/media/2021-10/scene-family-marriage-couple-people-fight-man-woman.jpg" alt="Scene-Family-Marriage-Couple-People-Fight-Man-Woman"></img>
सहमति से शारीरिक संबंध बनाने के बाद कपल के बीच अनबन होने पर दुष्कर्म का आरोप लगाना गलत (प्रतिकात्मक तस्वीर

<p> </p>
<p>दुष्कर्म की शिकायत पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नईम को सात साल कैद ही सजा चुनाई। मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा। यहां महिला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि निचली अदालत और उच्च न्यायालय ने सही निष्कर्ष निकाला था कि नईम ने शादी का वादा यौन संबंध बनाने की नियत से किया था। दूसरी ओर नईम के वकील राज चौधरी ने दलील पेश की कि महिला की ओर से मोटी रकम की मांग पूरी नहीं किये जाने पर बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई गई। </p>
<p>इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने नईम को बलात्कार के आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा है कि कई कारणों से सहमति से बने शारीरिक संबंध में खटास आने के बाद अक्सर महिलाओं द्वारा बलात्कार का आरोप लगाया जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/89467/it-is-wrong-for-women-to-allege-rape-after-a</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Feb 2023 14:17:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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