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                <title>Javed Akhtar - Loktej</title>
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                <description>Javed Akhtar RSS Feed</description>
                
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                <title>अगर आप अपनी मातृभाषा नहीं जानते, तो आप अपनी जड़ों से कट रहे हैं: जावेद अख्तर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर, 31 जनवरी (भाषा)पटकथा लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने यह स्वीकार किया है कि आज की दुनिया में, खास तौर पर आईटी क्षेत्र में अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अंग्रेजी भाषा जरूरी है लेकिन भाषा सीखना अपनी मातृभाषा जानने की कीमत पर नहीं होना चाहिए।</p>
<p>जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) के दौरान एक सत्र में अख्तर ने कहा, ‘‘अगर आप अपनी मातृभाषा नहीं जानते, तो आप अपनी जड़ों से कट रहे हैं।’’</p>
<p>यहां उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ज्ञान सीपियां: पर्ल्स ऑफ विजडम’ का विमोचन किया।</p>
<p>अख्तर ने जोर देकर कहा कि अपनी मूल भाषा को छोड़कर बच्चे अपनी संस्कृति और परंपराओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/128046/if-you-do-not-know-your-mother-tongue--then-you-are-cutting-from-your-roots--javed-akhtar"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/3864_bollywood-cinema-multiplex-theater1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर, 31 जनवरी (भाषा)पटकथा लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने यह स्वीकार किया है कि आज की दुनिया में, खास तौर पर आईटी क्षेत्र में अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अंग्रेजी भाषा जरूरी है लेकिन भाषा सीखना अपनी मातृभाषा जानने की कीमत पर नहीं होना चाहिए।</p>
<p>जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) के दौरान एक सत्र में अख्तर ने कहा, ‘‘अगर आप अपनी मातृभाषा नहीं जानते, तो आप अपनी जड़ों से कट रहे हैं।’’</p>
<p>यहां उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ज्ञान सीपियां: पर्ल्स ऑफ विजडम’ का विमोचन किया।</p>
<p>अख्तर ने जोर देकर कहा कि अपनी मूल भाषा को छोड़कर बच्चे अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव खोने का जोखिम उठाते हैं।</p>
<p>अख्तर (80) ने तर्क दिया, ‘‘भाषा सिर्फ संचार का साधन नहीं है; यह हमारी संस्कृति, परंपरा और निरंतरता को आगे ले जाने वाला वाहन है। अगर आप किसी बच्चे को उसकी भाषा से अलग करते हैं, तो आप उसे उसकी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से अलग कर रहे हैं।’’</p>
<p>अख्तर ने कहा कि आज भारत में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा पर व्यापक जोर है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूलों में भेजना चाहते हैं, यहां तक ​​कि निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चे भी इसके लिए संघर्ष करते हैं। मैं अंग्रेजी के महत्व को नकार नहीं रहा हूं, लेकिन मेरा मानना ​​है कि किसी अन्य भाषा को सीखना किसी की अपनी भाषा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। ’’</p>
<p>अख्तर ने बहुभाषावाद पर जोर दिया, जहां एक व्यक्ति अपनी मूल भाषा में जड़ों को जमाए रखते हुए अंग्रेजी में कुशल होता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज की दुनिया में हम अंग्रेजी के बिना जीवित नहीं रह सकते, खासकर आईटी क्षेत्र में। लेकिन मैं चाहता हूं कि हमारे बच्चे बहुभाषी बनें, अपनी भाषा के साथ-साथ दूसरों की भाषा भी जानें। अपनी मातृभाषा जानना जरूरी है। जब हम इसे छोड़ देते हैं, तो हम अपनी जड़ों से अपना संबंध खो देते हैं।’’</p>
<p>सत्र में अख्तर के साथ इंजीनियर से परोपकारी और लेखिका बनी सुधा मूर्ति और फिल्म निर्माता अतुल तिवारी भी शामिल हुए।</p>
<p>18वां जयपुर साहित्य महोत्सव तीन फरवरी तक चलेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 21:45:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>कला किसी राष्ट्रगान, एक ध्वज, एक नारे की तरह है: जावेद अख्तर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) वरिष्ठ गीतकार एवं पटकथा लेखक जावेद अख्तर का मानना ​​है कि कला में समाज के विचारों को आकार देने की शक्ति होती है।</p>
<p>अख्तर ने कहा कि कला में समाज की समग्र भावना समाहित होती है और वह समाज के असंतोष, इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित करती है।</p>
<p>जावेद अख्तर ने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि कला एक राष्ट्रगान, एक ध्वज, एक नारे की तरह है। इसकी शुरुआत समाज से होती है और बाद में यह दो-तरफा यात्रा बन जाती है। एक निश्चित असंतोष, इच्छा, समाज में लोकप्रिय होने के लिए महत्वाकांक्षा होनी चाहिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) वरिष्ठ गीतकार एवं पटकथा लेखक जावेद अख्तर का मानना ​​है कि कला में समाज के विचारों को आकार देने की शक्ति होती है।</p>
<p>अख्तर ने कहा कि कला में समाज की समग्र भावना समाहित होती है और वह समाज के असंतोष, इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित करती है।</p>
<p>जावेद अख्तर ने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि कला एक राष्ट्रगान, एक ध्वज, एक नारे की तरह है। इसकी शुरुआत समाज से होती है और बाद में यह दो-तरफा यात्रा बन जाती है। एक निश्चित असंतोष, इच्छा, समाज में लोकप्रिय होने के लिए महत्वाकांक्षा होनी चाहिए और फिर यह कला के विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त होती है।’’</p>
<p>अपनी बात को समझाने के लिए उन्होंने लोकप्रिय नारे ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का उदाहरण दिया और कहा कि जब कला जनता की भावनाओं से जुड़ती है तो वह अभिव्यक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम बन जाती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर समाज में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ असंतोष नहीं होता तो ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसा नारा भी नहीं होता।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ जब आपको यह नारा मिला, तो यह लोकप्रिय हो गया क्योंकि लोगों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका मिल गया। इसलिए कला अमूर्त को मूर्त बनाती है और फिर इसे आपको लौटा देती है लेकिन इसकी भावना समाज से आनी चाहिए...।’’</p>
<p>अख्तर ने यह बात बृहस्पतिवार को गैर-लाभकारी संगठन खुशी की ओर से आयोजित ‘आर्ट डिजाइन कल्चर कलेक्टिव’ के उद्घाटन समारोह में कही।</p>
<p>उनके साथ उनकी पत्नी शबाना आजमी भी मौजूद थीं। शबाना आजमी ने आज के डिजिटल युग में रंगमंच जगत के सामने पेश आने वाली चुनौतियों के बारे में विचार साझा किए।</p>
<p>आजमी (74) ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य मंचों के बढ़ते प्रभुत्व के कारण युवा दर्शक थिएटर की ओर कम आकर्षित हो रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आप बच्चे को इससे परिचित कराएं, क्योंकि जब बच्चा रंगमंच में रुचि विकसित करेगा तभी वह रंगमंच की ओर आकर्षित होगा।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/109759/art-is-like-a-national-anthem--a-flag--a-slogan--javed-akhtar</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2024 11:38:38 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असली हिंदुस्तान हमारे देश की जीवित आत्मा है - जावेद अख्तर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>छत्रपति संभाजीनगर: हमारे देश की हजारों साल की संस्कृति को चंद चुनाव और दो-चार लोग नष्ट नहीं कर सकते। ये चल रहा है और चलता रहेगा । इस देश में एक आत्मा है जिसे कोई नहीं मार सकता, और ये जीवित आत्मा ही सच्चा हिंदुस्तान है, ये विचार पद्मभूषण जावेद अख्तर ने इस मौके पर व्यक्त किये।</p>
<p>दुनिया भर के दर्शकों के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को पेश करने वाले 9वें अजंता एलोरा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में गीतकार और संवाद लेखक जावेद अख्तर का आज निर्देशक जयप्रद देसाई ने साक्षात्कार लिया, इस मौके पर गीतकार जावेद अख्तर बोल रहे थे।</p>
<p>इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/98438/real-hindustan-is-the-living-soul-of-our-country"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-01/k05012024-04.jpg" alt=""></a><br /><p>छत्रपति संभाजीनगर: हमारे देश की हजारों साल की संस्कृति को चंद चुनाव और दो-चार लोग नष्ट नहीं कर सकते। ये चल रहा है और चलता रहेगा । इस देश में एक आत्मा है जिसे कोई नहीं मार सकता, और ये जीवित आत्मा ही सच्चा हिंदुस्तान है, ये विचार पद्मभूषण जावेद अख्तर ने इस मौके पर व्यक्त किये।</p>
<p>दुनिया भर के दर्शकों के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को पेश करने वाले 9वें अजंता एलोरा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में गीतकार और संवाद लेखक जावेद अख्तर का आज निर्देशक जयप्रद देसाई ने साक्षात्कार लिया, इस मौके पर गीतकार जावेद अख्तर बोल रहे थे।</p>
<p>इस मौके पर जावेद अख्तर ने कहा, साठ के दशक की फिल्मों में टैक्सी ड्राइवर, रिक्शा चालक, मजदूर, शिक्षक, प्रोफेसर, वकील हीरो होते थे। हालांकि, अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। आज के अभिनेता अमीर परिवारों से हैं और कुछ नहीं करते। आज का अभिनेता भारत के बजाय स्विट्जरलैंड के बारे में सोच रहा है। यह समय अमीरों के लिए फिल्में बनाने का है। हमारी फिल्मों में राजनीतिक विषय नहीं दिखते। वैसे ही हमारी फिल्मों में अब सामाजिक मुद्दे नजर नहीं आते, मजदूर वर्ग आज की फिल्मों से गायब हो गया है।</p>
<p>इससे पता चलता है कि हम स्वार्थी हो गए हैं और दूसरी ओर हमें देश की बहुत परवाह है। क्या पचास साल पहले के लोग इस देश से प्यार नहीं करते थे? क्या पहले देश के लिए जेल जाने वाले लोगों को इस देश से प्यार नहीं था? उन्हें देश से प्यार था, लेकिन उन दिनों इतने नाटक नहीं होते थे। अब लोग जहां चाहें वहां जा रहे हैं।</p>
<p>अख्तर ने आगे कहा कि, 'आर्टिकल 15' पिछले 30-40 सालों में बनी सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है। यह खुशी की बात है कि, यह फिल्म इस अजंता एलोरा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की जा रही है और हर किसी को यह फिल्म देखनी चाहिए। साठ के दशक में ऐसी फिल्में नहीं बनती थीं ।  </p>
<p>इस दुनिया में जो कुछ भी होता है उसके पीछे अर्थशास्त्र है। हमें बताया जाता है कि भारत एक समृद्ध देश है और उसने काफी प्रगति की है। और इसके साथ ही हमें ये भी बताया गया है कि इस देश के 80 करोड़ नागरिकों को 5 किलो अनाज देना है। जावेद अख्तर ने दर्शकों से पूछा कि ये किस तरह की प्रगति है?<br />अख्तर ने कहा, भाषा हमेशा हमारे साथ रहती है। भाषा में हमारी संस्कृति झलकती है। इसका मतलब यह है कि जब हम भाषा छोड़ते हैं, तो हम अपनी जड़ें छोड़ देते हैं। भाषा एक दूसरे से बात करने के लिए थी लेकिन आज भाषा के कारण बोलचाल बंद करने का समय आ गया है।</p>
<p>मैं आज पहली बार एलोरा गया। मैं इस सारे वैभव से बहुत अभिभूत था। आज मुझे आश्चर्य हुआ कि, मैं अब तक क्यों नहीं आया। जिन लोगों ने यह काम किया है उन्होंने पैसे के लिए नहीं किया होगा। किसी चीज़ को कार्यान्वित करने के लिए उसमें बहुत अधिक विश्वास की आवश्यकता होती है। खासकर यह काम जिद्द के साथ किया जाता है, अगर उस जिद्द का हजारवां हिस्सा भी हमारे पास आ जाए तो हम इस देश को स्वर्ग बना सकते हैं। इसे बनाने वालों की पीढ़ियों ने इसके लिए काम किया है और इसे प्रेम, परंपरा, संस्कृति और प्रतिबद्धता से बनाया गया है। जावेद अख्तर ने कहा कि मैं दोबारा आऊंगा और अपना अजंता की खूबसूरती देखना चाहता हूं।</p>
<p>इस अवसर पर प्रसिद्ध हिंदी फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा, समन्वय समिति के अध्यक्ष नंदकिशोर कागलीवाल, एम.जी.एम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विलास सपकाल, महोत्सव निदेशक अशोक राणे, महोत्सव कलात्मक निदेशक चंद्रकांत कुलकर्णी, महोत्सव आयोजक नीलेश राऊत, लेखक दासू वैद्य और सभी संबंधित उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jan 2024 20:20:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>जब अपने ‘दादा जी’ से मिली बिग बॉस फ्रेम उर्फी जावेद!</title>
                                    <description><![CDATA[ऊर्फी का उपनाम ‘जावेद’ होने से सोशल मीडिया पर ऐसी हवा है कि वे बॉलीवुड दिग्गज जावेद अख्तर की नातिन हैं, लेकिन सच्चाई यह नहीं है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88811/when-bigg-boss-frame-urfi-javed-met-his-dadaji"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/a20230109.jpg" alt=""></a><br /><p>सोशल मीडिया पर उर्फी जावेद कोई अपरिचित नाम नहीं है। बिग बॉस में दिखाई देने के बाद से उर्फी हमेशा ही अपने अतरंगी ड्रेसिंग सेंस को लेकर चर्चा में रहती हैं। आये दिन उनके वीडियो और तस्वीर सोशल मीडिया पर आते रहते हैं। इसी क्रम में अब उनका एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। अपने बेबाक और बिंदास अंदाज के कारण भी जाने-जनि वाली उर्फी ने अब हाल ही में बॉलीवुड का जाने-माने राइटर जावेद अख्तर के साथ तस्वीर साझा की है और इसके साथ लिखा कि आखिरकार आज वह अपने ‘दादा जी’ से मिलीं।</p>
<p><strong>उर्फी जावेद की जावेद अख्तर से मुलाकात</strong></p>
<p>आपको बता दें कि अक्सर देखा गया है कि बिग बॉस के समय से ही लोग उर्फी जावेद को जावेद अख्तर की नातिन बताते हैं। हालांकि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा बल्कि कई बार इस बात से साफ इनकार किया है। अब रविवार को उर्फी जावेद हाल ही में एक फैशन शो के सिलसिले में दिल्ली में थीं, जहां उनकी मुलाकात जावेद अख्तर से हुई। उर्फी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन में लिखा, "आखिरकार आज मेरे ‘दादाजी’ से मुलाकात हो गई, साथ ही वह एक लेजेंड हैं, सुबह-सुबह इतने लोग सेल्फी लेने के लिए लाइन में लग गए, लेकिन उन्होंने किसी को मना नहीं किया, सभी के साथ हंसते हुए बातचीत की। वह काफी विनम्र थे! मैं बेहद खुश हूं।" </p>
<p><strong>नाम में जावेद होने से लोगों ने बनाया रिश्ता</strong></p>
<p>बता दें कि उर्फी द्वारा साझा इस तस्वीर में उर्फी नीले रंग के ओवरकोट, तो वहीं जावेद अख्तर को ग्रे कुर्ते के साथ कंधे पर शॉल डाले नजर आ रहे है। गौरतलब है कि उर्फी जावेद और जावेद अख्तर के नाम में जावेद आने से  सोशल मीडिया पर लोग जावेद अख्तर को उर्फी जावेद का दादा मानते हैं। हालांकि इस बात 'बिग बॉस' ओटीटी फेम उर्फी जावेद काफी बार नकार चुकी हैं। आलम ये था कि एक बार तो उर्फी जावेद ने 'नॉट जावेद अख्तर ग्रांडडॉटर' की टी शर्ट पहन कर अपनी बात को सबके सामने रखा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jan 2023 11:39:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
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