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                <title>Fruits - Loktej</title>
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                <description>Fruits RSS Feed</description>
                
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                <title>आम पकने के पहले ही क्यों गिर जाते हैं ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(सोफी जोन्स, द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड )</p>
<p>क्वींसलैंड, 25 दिसंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया में हर मौसम में आम उत्पादकों को उस समय भारी नुकसान होता है, जब पेड़ों से बड़ी संख्या में फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं। ये आम न तो ठीक से पकते हैं, न ही उपभोक्ताओं तक पहुंच पाते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह की क्षति होती है।</p>
<p>शोधकर्ताओं के अनुसार, समय से पहले फल गिरना आम की कम पैदावार का एक बड़ा कारण है, क्योंकि केवल करीब 0.1 प्रतिशत फल ही परिपक्व हो पाते हैं। इससे उत्पादकों को खासा नुकसान होता है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144815/why-do-mangoes-fall-before-ripening"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/news-photo-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>(सोफी जोन्स, द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड )</p>
<p>क्वींसलैंड, 25 दिसंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया में हर मौसम में आम उत्पादकों को उस समय भारी नुकसान होता है, जब पेड़ों से बड़ी संख्या में फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं। ये आम न तो ठीक से पकते हैं, न ही उपभोक्ताओं तक पहुंच पाते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह की क्षति होती है।</p>
<p>शोधकर्ताओं के अनुसार, समय से पहले फल गिरना आम की कम पैदावार का एक बड़ा कारण है, क्योंकि केवल करीब 0.1 प्रतिशत फल ही परिपक्व हो पाते हैं। इससे उत्पादकों को खासा नुकसान होता है और संसाधनों की बर्बादी भी होती है।</p>
<p>लगातार जलवायु परिवर्तन के साथ यह समस्या वैश्विक महत्व की हो गई है, जो खाद्य सुरक्षा से लेकर किसानों की आय तक को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में आम एक उच्च-मूल्य वाली फसल है, जहां हर साल 63,000 टन से अधिक उत्पादन होता है, जो अर्थव्यवस्था में लगभग 22 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का योगदान देता है।</p>
<p>हालांकि, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के कारण आम की फसल को अस्थिर जलवायु में अधिक जोखिम है। सूखा, लू और पत्तियों का झड़ना जैसी स्थितियां उस प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, जिसके कारण फल गिरते हैं।</p>
<p>शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि तनाव के दौरान पेड़ों में हार्मोनल असंतुलन और कार्बोहाइड्रेट की कमी पैदा हो जाती है। फल के विकास के लिए आवश्यक शर्करा की आपूर्ति बाधित होने पर पेड़ अपने अस्तित्व को प्राथमिकता देता है और फल गिर जाता है।</p>
<p>शोधकर्ताओं ने इसे एक आणविक “क्विट सिग्नल” बताया है, जो पेड़ को फल का साथ छोड़ने का संदेश देता है। यह संकेत जीन गतिविधि और हार्मोनल संकेतों के जटिल नेटवर्क से जुड़ा है।</p>
<p>इस प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिक आम के डंठल (पेडिसल) के ऊतकों में जीन गतिविधियों का अध्ययन कर रहे हैं, जहां पेड़ और फल के बीच पोषक तत्वों और संकेतों का आदान-प्रदान होता है।</p>
<p>फल झड़ने की समस्या के लिए शोध में पौध वृद्धि नियामकों (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स) के उपयोग को एक प्रभावी उपाय बताया गया है। ये हार्मोन के कृत्रिम रूप होते हैं, जो तनाव की स्थिति में पेड़ों में संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।</p>
<p>परीक्षणों में पाया गया कि फूल आने के शुरुआती चरण में इनका प्रयोग अधिक प्रभावी रहा, जिससे पैदावार में 17 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<p>शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन अभी जारी है और समीक्षा के बाद अगले वर्ष प्रकाशित किया जाएगा। इसका उद्देश्य आम की नई किस्में विकसित करना नहीं, बल्कि अपरिपक्व फल गिरने की प्राकृतिक प्रक्रिया को समझकर किसानों को बेहतर प्रबंधन के उपाय सुझाना है।</p>
<p>वैज्ञानिकों ने कहा कि इस शोध का लाभ केवल आम तक सीमित नहीं रहेगा। सेब, संतरा और एवोकाडो जैसी अन्य फसलों में भी पर्यावरणीय तनाव के कारण फल झड़ने की समस्या होती है। आम में इस प्रक्रिया की बेहतर समझ से वैश्विक स्तर पर कई फसलों को लाभ मिल सकता है।</p>
<p>( द कन्वरसेशन )</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 15:31:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया में कई फल ऐसे जिनकी कीमत होती है लाखों में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लंदन, 16 अप्रैल (वेब वार्ता)। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे फल भी हैं, जिनकी कीमत सुनकर आप चौंक सकते हैं? ये फल इतने महंगे हैं कि आम आदमी के लिए इन्हें खरीदना किसी सपने जैसा लगता है।</p>
<p>सबसे पहले बात करते हैं ताइयो नो तमागो आम की, जिसे ‘एग्स ऑफ सन’ भी कहा जाता है। जापान में पैदा होने वाला यह आम आधा पीला और आधा लाल होता है और इसकी कीमत 1 से 2 लाख रुपये तक हो सकती है।</p>
<p>इसके बाद आता है सेम्बिकिया क्वीन स्ट्रॉबेरी, जिन्हें न्योहो स्ट्रॉबेरी के नाम से भी जाना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140155/many-fruits-in-the-world-which-cost-millions"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-09/3843_fruits-dish.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन, 16 अप्रैल (वेब वार्ता)। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे फल भी हैं, जिनकी कीमत सुनकर आप चौंक सकते हैं? ये फल इतने महंगे हैं कि आम आदमी के लिए इन्हें खरीदना किसी सपने जैसा लगता है।</p>
<p>सबसे पहले बात करते हैं ताइयो नो तमागो आम की, जिसे ‘एग्स ऑफ सन’ भी कहा जाता है। जापान में पैदा होने वाला यह आम आधा पीला और आधा लाल होता है और इसकी कीमत 1 से 2 लाख रुपये तक हो सकती है।</p>
<p>इसके बाद आता है सेम्बिकिया क्वीन स्ट्रॉबेरी, जिन्हें न्योहो स्ट्रॉबेरी के नाम से भी जाना जाता है, टोक्यो की एक प्रसिद्ध फल की दुकान, सेम्बिकिया के नाम पर रखी गई हैं, जो जापान की सबसे पुरानी फल की दुकान है. सेम्बिकिया क्वीन स्ट्रॉबेरी, जिसकी खासियत है कि इसे कई दिनों तक स्टोर किया जा सकता है। 12 पीस की एक पैकिंग की कीमत करीब 20 से 25 हजार रुपये होती है। युबारी खरबूजा, जिसे युबारी किंग के नाम से भी जाना जाता है, जापान के होक्काइडो द्वीप के युबारी शहर में उगाया जाने वाला एक विशेष प्रकार का खरबूजा है, जो अपनी उच्च गुणवत्ता और मिठास के लिए प्रसिद्ध है. जिसकी कीमत 10 से 12 लाख रुपये तक हो सकती है। यह दुनिया के सबसे महंगे फलों में से एक माना जाता है। </p>
<p>इसी तरह जापान मेंस्क्वायर तरबूज  यानी चौकोर तरबूज भी तैयार किया जाता है, जिसकी कीमत 50 से 60 हजार रुपये तक होती है। इसे सजावट के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। अगर अंगूर की बात करें तो रूबी रोमन अंगूर का नाम सबसे ऊपर आता है। जापान में उगाए जाने वाले इन लाल अंगूरों की एक प्रीमियम क्वालिटी वाली बंच की कीमत 6 से 7 लाख रुपये तक हो सकती है।</p>
<p>रूबी रोमन एक प्रकार का टेबल अंगूर है जो पूरी तरह से जापान के इशिकावा प्रान्त में उगाया और बेचा जाता है। यह लाल रंग का होता है और लगभग पिंग-पोंग बॉल के आकार का होता है। पहला रूबी रोमन अंगूर अगस्त 2008 में 100,000 जापानी येन प्रति 700 ग्राम गुच्छा, या 26 डॉलर प्रति अंगूर की दर से बिक्री के लिए गया था।</p>
<p>वहीं, सेकाई इची सेब दुनिया का सबसे महंगा और बड़ा सेब है, जिसकी लंबाई लगभग 15 इंच और वजन 1 किलोग्राम तक होता है। इसकी कीमत 1.5 से 2 हजार रुपये तक है। अंत में बात करते हैं बुद्धा शेप्ड नाशपाती की, जो बुद्धा की आकृति में तैयार की जाती हैं। चीन में उगाई जाने वाली इस अनोखी नाशपाती की कीमत 600 से 700 रुपये तक होती है।</p>
<p>इन फलों की कीमतें जरूर चौंकाती हैं, लेकिन इनका स्वाद, आकार और दुर्लभता इन्हें खास बना देती है। मालूम हो कि फल न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। डॉक्टर अक्सर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को फल खाने की सलाह देते हैं क्योंकि ये शरीर को ऊर्जा देते हैं और बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Apr 2025 15:28:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शरीर को जलयोजित रखने के साथ ठंडक भी पहुंचाता है तरबूज </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कानपुर, 23 अप्रैल (हि.स.)। तेज धूप के साथ इन दिनों तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच रहा है जिससे डिहाइड्रेशन का बढ़ना स्वाभाविक है। इससे बचने के लिए तरबूज का सेवन बहुत जरुरी है। यह एक ऐसा फल है जो शरीर को जलयोजित रखने के साथ ठंडक भी पहुंचाता है। इसकी उच्च जल सामग्री त्वचा को हाइड्रेटेड और कोमल बनाए रखने में मदद करती है, जिससे महीन रेखाएं और झुर्रियां कम हो जाती हैं। इस फल में पानी की मात्रा करीब 90 प्रतिशत होती है। यह प्यास बुझाने और पसीने के माध्यम से खोए गए इलेक्ट्रोलाइट्स को फिर से भरने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/101168/along-with-keeping-the-body-hydrated-watermelon-also-provides-coolness"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/watermelon.jpg" alt=""></a><br /><p>कानपुर, 23 अप्रैल (हि.स.)। तेज धूप के साथ इन दिनों तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच रहा है जिससे डिहाइड्रेशन का बढ़ना स्वाभाविक है। इससे बचने के लिए तरबूज का सेवन बहुत जरुरी है। यह एक ऐसा फल है जो शरीर को जलयोजित रखने के साथ ठंडक भी पहुंचाता है। इसकी उच्च जल सामग्री त्वचा को हाइड्रेटेड और कोमल बनाए रखने में मदद करती है, जिससे महीन रेखाएं और झुर्रियां कम हो जाती हैं। इस फल में पानी की मात्रा करीब 90 प्रतिशत होती है। यह प्यास बुझाने और पसीने के माध्यम से खोए गए इलेक्ट्रोलाइट्स को फिर से भरने में काफी मददगार साबित होता है।<br /><br />चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव ने मंगलवार को बताया कि गर्मियों ने दस्तक दे दी है, ऐसे में सेहत का ध्यान रखना बेहद जरुरी है। गर्मी के चलते डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है ऐसे में शरीर को अंदर से हाइड्रेटेड रखना बेहद जरुरी है। इसके लिए तरबूज का फल बेहतर विकल्प है जो शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए अच्छा काम करता हैं। ये शरीर को अंदर से ठंडा और जलयोजित रखता है। रसायन शास्त्र में जलयोजित (हाइड्रेट) एक ऐसा पदार्थ है जिसमें जल या इसके घटक तत्व शामिल होते हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि यह फल हाइड्रेशन का पावरहाउस कहा जाता है। इसके अलावा तरबूज पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है जो शरीर के तरल पदार्थ के संतुलन को बनाए रखने में सहायता करता है। तरबूज विटामिन ए और सी का भी एक अच्छा स्रोत है, जो विशेष रुप से गर्मी के महीनों के दौरान स्वास्थ्य को सही रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसकी प्राकृतिक मिठास इसे हाइड्रेटिंग स्नैक्स, स्मूदी और ड्रिंक्स अच्छा विकल्प बनाती है। ताजा स्वाद और हाइड्रेटिंग गुणों के अलावा तरबूज त्वचा के लिए ढेर सारे लाभ प्रदान करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2024 12:26:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाराष्ट्र : पुणे के बाजार में पहुंची रत्नागिरी के हाफुस आम की पहली खेप, जानिए कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[हाफुस की ख्याति दूर-दूर तक है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88645/the-first-box-of-ratnagiri-hafus-mangoes-reached-pune-market"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/0551.jpg" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र के रत्नागिरी से हाफुस आम पुणे के बाजार में पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पहली खेप के इस आम के एक डिब्बे की कीमत 20 हजार रुपए है। आम उत्पादकों का कहना है कि मौसमी उतार-चढ़ाव का असर आम की फसल पर पड़ रहा है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार रत्नागिरी तालुका के गावखडी गांव के किसान ने जिले के हाफुस आम की पहली खेप पुणे भेजी है। कोंकण और हाफुस का अनोखा रिश्ता है। हाफुस की ख्याति दूर-दूर तक है। इसलिए लोगों को हाफुस बहुत पसंद है और वे इस आम का इंतजार करते हैं।</p>
<p>लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हाफुस आम का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इस साल भी लंबे समय तक बारिश और जलवायु परिवर्तन के कारण आम का मौसम लंबे समय तक रहने की संभावना है। कुछ किसानों ने तो चार महीने पहले आए बौरों की उचित देखभाल के चलते अपने बागों में आम पैदा कर लिए हैं।</p>
<p><strong>बगीचे से 48 आमों का पहला डिब्बा पुणे के बाजार में भेजा</strong></p>
<p>गावखड़ी स्थित किसान के बाग में सितंबर माह में आम के पेड़ लहलहा उठे। जिसकी रक्षा के लिए उसने जाल बिछा दिया और उसकी कड़ी निगरानी करने लगे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने अपने बगीचे से 48 आमों का पहला डिब्बा पुणे के बाजार में भेजा। उन्होंने उम्मीद जताई कि उन्हें इस डिब्बे के करीब 20 हजार रुपए मिलेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jan 2023 22:12:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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