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                            <item>
                <title>ईरान : खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को मिले 1800 साल पुराने अग्नि मंदिर के अवशेष</title>
                                    <description><![CDATA[पारसी वास्तुकला और कलाओं के लिए ससनीद काल अत्यंत महत्वपूर्ण ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88482/archeologists-find-remains-of-1800-year-old-fire-temple-during-iran-excavation"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/a20221230-1.jpg" alt=""></a><br /><p>ईरान में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान 1800 साल पुराने अग्नि मंदिर के अवशेष मिले हैं। यह प्राचीन मंदिर ईरान के शक्तिशाली ससनीद साम्राज्य के समय का माना जाता है। मिली जानकारी के मुताबिक पूर्वी ईरान के एक स्थान पर काफी समय से यह खुदाई चल रही थी।</p>
<p><strong>भारत-ईरान का विशेष संबंध</strong></p>
<p>यहाँ गौरतलब है कि पारसी समुदाय ईरान से भारत आया था और भारत और ईरान के बीच एक प्राचीन संबंध है। मुसलमानों के आने से पहले भी, ईरान विभिन्न संस्कृतियों का घर था। ईरान में 2,000 साल पुरानी क़नात जल प्रणाली अभी भी जल भंडारण और वितरण के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करती है।</p>
<p><strong>प्राचीन चित्रकला से संबंधित कुछ वस्तुएँ भी प्राप्त</strong></p>
<p>आपको बता दें कि इस अग्नि मंदिर के अवशेष के साथ ही प्राचीन इतिहास का एक नया अध्याय खोजा गया है। खुदाई में जुटे पुरातत्वविदों के अनुसार जिस स्थल पर अग्नि मंदिर के साक्ष्य मिले हैं वहां काफी समय से खुदाई चल रही थी। मंदिर के अतिरिक्त प्राचीन चित्रकला से संबंधित कुछ वस्तुएँ भी प्राप्त हुई हैं। अग्नि मंदिर के अवशेषों में ज्यामितीय पौधों वाले प्लास्टर के काम के कुछ खूबसूरत टुकड़े पाए गए हैं। इससे साइट का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>विभिन्न प्रकार की नक्काशियों से सजे हैं अवशेष</strong></p>
<p>प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर, विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया कि यह एक अग्नि मंदिर है जिसमें कभी एक हाइपोस्टाइल हॉल था। इस हॉल को विभिन्न प्रकार की नक्काशियों से सजाया गया होगा। ईरान में पुरातत्वविदों ने लंबे समय तक ससनीद साम्राज्य के स्मारकों पर शोध किया है, जिसकी एक अलग पहचान है। इतना ही नहीं, इस काल के स्मारकों को अच्छी तरह से संरक्षित रखा गया है। पारसी वास्तुकला और कलाओं के लिए ससनीद काल अत्यंत महत्वपूर्ण है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2022 10:00:00 +0530</pubDate>
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