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                <title>Makar Sankranti - Loktej</title>
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                <description>Makar Sankranti RSS Feed</description>
                
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                <title>मकर संक्रांति पर्व : खिचड़ी के चार यार - दही, घी, पापड़ और अचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) भारत में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर विभिन्न प्रांतों में प्रसाद के रूप में खिचड़ी तैयार की जाती है। कहीं इसे ताई पोंगल, कहीं खेचड़ा, कहीं माथल तो कहीं बीसी बेले भात कहा जाता है। नाम चाहे कुछ भी हो लेकिन इसे खाने का असली मजा दही, घी, पापड़ और अचार के साथ ही आता है। कहा भी गया है-खिचड़ी के चार यार -दही, घी, पापड़ और अचार।</p>
<p>खिचड़ी मुगल बादशाह जहांगीर और औरंगजेब को भी बहुत पसंद थी। इतना ही नहीं, अंग्रेज भी भारत से इस पोषक आहार को ब्रिटेन लेकर गए थे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/120717/makar-sankranti-festival--four-friends-of-khichdi---curd--ghee--papad-and-pickle"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/makarsankranti-uttarayan-kite-laddu.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) भारत में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर विभिन्न प्रांतों में प्रसाद के रूप में खिचड़ी तैयार की जाती है। कहीं इसे ताई पोंगल, कहीं खेचड़ा, कहीं माथल तो कहीं बीसी बेले भात कहा जाता है। नाम चाहे कुछ भी हो लेकिन इसे खाने का असली मजा दही, घी, पापड़ और अचार के साथ ही आता है। कहा भी गया है-खिचड़ी के चार यार -दही, घी, पापड़ और अचार।</p>
<p>खिचड़ी मुगल बादशाह जहांगीर और औरंगजेब को भी बहुत पसंद थी। इतना ही नहीं, अंग्रेज भी भारत से इस पोषक आहार को ब्रिटेन लेकर गए थे जहां आज यह नाश्ते में शौक से खायी जाती है।</p>
<p>दीनदयाल शोध संस्थान, नयी दिल्ली द्वारा भारत में खानपान की विविध परंपरा और संस्कृति पर प्रकाशित किताब ‘पोषण उत्सव’ में खिचड़ी को लेकर ऐसी ही बहुत सी दिलचस्प जानकारी दी गई हैं।</p>
<p>संक्रांति पर्व पर देश के विभिन्न हिस्सों में खिचड़ी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की समृद्ध परंपरा है और संपूर्ण देश में अलग अलग नामों से प्रचलित खिचड़ी का ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी उल्लेख मिलता है।</p>
<p>किताब में बताया गया है कि यूनानी राजदूत सेल्यूकस ने भारतीय उप महाद्वीप में दाल और चावल की लोकप्रियता के बारे में उल्लेख किया है, साथ ही मोरक्को के यात्री इब्नबतूता ने भी 1550 के अपने भारतीय प्रवास के दौरान चावल और मूंग से बने व्यंजन के रूप में खिचड़ी का वर्णन किया है।</p>
<p>किताब में दावा किया गया है कि खिचड़ी की परंपरा इतनी पुरानी है कि 15वीं शताब्दी में भारत की यात्रा करने वाले अफानासी निकितिन ने भी खिचड़ी पर अपनी कलम चलाई।</p>
<p>किताब के अनुसार, ‘‘ खिचड़ी मुगल साम्राज्य, विशेष तौर पर जहांगीर के समय में बहुत लोकप्रिय थी। यहां तक कि औरंगजेब को भी खिचड़ी बहुत पसंद थी।"</p>
<p>पुस्तक के अनुसार, 19वीं शताब्दी में अंग्रेज भारत से खिचड़ी अपने देश ले गए जहां यह केडगेरे नाम से इंग्लैंड में एक नाश्ता पकवान बन गयी।</p>
<p>इतिहास को उद्धृत कर किताब में कहा गया है कि 19वीं शताब्दी में अवध के नवाब उद्दीन शाह के समय खिचड़ी का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें बादाम और पिस्ता भी इस्तेमाल किया जाता था और हैदराबाद के निजामों ने भी अपने शाही भेाजन में खिचड़ी को बहुत महत्व दिया।</p>
<p>खिचड़ी पर लेख के अनुसार, कन्याकुमारी से लेकर खीर भवानी तक, कोटेश्वर से कामाख्या तक, जगन्नाथ से केदारनाथ तक, सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक, सम्मेद शिखर से श्रवणबेलगोला तक, बोधगया से सारनाथ तक, अमृतसर से पटना साहिब तक, अंडमान से अजमेर तक, लक्षद्वीप से लेह तक, पूरा भारत किसी न किसी तरह से खिचड़ी का प्रेमी है।</p>
<p>किताब कहती है कि "खिचड़ी एक ऐसा भोजन है जिसमें बहुत लचीलापन है। शैशवकाल का पहला भोजन खिचड़ी ही होता है। जीवन के अंतिम क्षणों में भी खिचड़ी का ही सहारा होता है। बीमार होने पर या बीमारी के बाद भी खिचड़ी एक सुपाच्य भोजन के रूप में पाचनतंत्र पर महरम की तरह काम करती है।’’</p>
<p>किताब कहती है कि इस प्रकार पूरे भारत में खिचड़ी एक उत्सव का नाम है। मृत व्यक्ति की स्मृति में पहला गोग्रास छोड़ना हो तो भी खिचड़ी। और अब तो लग्जरी रिजार्ट के एग्जॉटिक मेन्यू में भी प्रमुख स्थान पा चुकी है खिचड़ी।</p>
<p>लेख में खिचड़ी को लेकर प्रचलित मुहावरा ‘बीरबल की खिचड़ी’ का जिक्र करते हुए कहा गया है कि मुगल सम्राट अकबर के समय में भी खिचड़ी प्रचलित रही होगी।</p>
<p>लेख में उस दंतकथा का भी उपयोग किया गया है जिसके अनुसार, अपने कुछ असफल अभियानों के बाद अपनी सामरिक रणनीति को बदलने की प्रेरणा मराठा योद्धा शिवाजी को खिचड़ी से ही मिली थी। ऐसी ही कुछ कहानी महाराणा प्रताप के बारे में भी है -यानि मेवाड़ से मराठवाड़ा तक खिचड़ी का एकछत्र प्रताप।</p>
<p>किताब के अनुसार, खिचड़ी मात्र एक भोजन ही नहीं बल्कि भारत की पूरी संस्कृति और भारतीय भोजन शैली की अगुवा है। इसके चार यार कहे जाते हैं -दही, घी, पापड़ और अचार। खिचड़ी को खाने का असली मजा तभी आता है जब इसे चम्मच के बजाय हाथ से खाया जाए।</p>
<p>किताब में जानकारी दी गई है कि खिचड़ी से जुड़े त्योहार को देश के प्रांतों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। जैसे, तमिलनाडु में इसे ताई पोंगल या उझवर तिरूनल कहा जाता है । गुजरात और उत्तराखंड में उत्तरायण पर्व पर खिचड़ी को प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है। असम में भोगाली बिहु, कश्मीर घाटी में शिशुर सेंक्रात, पंजाब में लोहड़ी, कर्नाटक में मकर संक्रमण पर्व पर खिचड़ी बनाने की परंपरा है।</p>
<p>‘पोषण उत्सव’ में देश के विभिन्न राज्यों में खिचड़ी से जुड़े त्यौहारों और उनमें इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य अन्न और मसालों का भी विस्तार से ब्यौरा दिया गया है।</p>
<p>किताब में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश में आला/बाला खिचड़ी चना, भुना हुआ धनिया और छाछ के साथ बनायी जाती है जबकि उत्तराखंड के गढ़वाल में खिचड़ी उड़द की दाल, तिल और गर्म मसाले के साथ तैयार की जाती है।</p>
<p>किताब के अनुसार, उत्तर प्रदेश में आंवला खिचड़ी बहुत लोकप्रिय है तो वहीं ओडिशा में खिचड़ी को खेचड़ा कहा जाता है जहां आमतौर पर इसे अदरक और हींग के साथ बनाया जाता है। जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद में भी खिचड़ी एक महत्वपूर्ण व्यंजन है। कई जगह पर खिचड़ी को अचार, दही, आलू भर्ता, बैंगन भर्ता, दालमा और चटनी के साथ परोसा जाता है।</p>
<p>पोषण उत्सव के अनुसार, आंध्र प्रदेश में संक्रांति व अन्य त्यौहारों पर मुख्य भोजन खिचड़ी ही होता है। यहां काजू के इस्तेमाल के कारण खिचड़ी गरिष्ठ होती है । केरल में इस खिचड़ी को माथन कहा जाता है और इसमें माथन यानि के लाल कद्दू मुख्य सामग्री होती है। इस प्रदेश में इमली, नारियल और करी पत्ता इसकी पौष्टिकता में और इजाफा कर देते हैं।</p>
<p>किताब में और ज्यादा जानकारी देते हुए कहा गया है कि कर्नाटक में यही खिचड़ी बीसी बेले भात कहलाती है जो बहुत ही लोकप्रिय व्यंजन है। यहां पर हग्गी खिचड़ी भी खासी प्रचलित है और कर्नाटक में श्रीकृष्ण मठ महोत्सव के लिए विशेष रूप से इसे तैयार किया जाता है।</p>
<p>किताब में विभिन्न राज्यों में प्रचलित इसके अनूठे नामों का भी उल्लेख किया गया है। जम्मू कश्मीर में मोंग खेचिर, राजस्थान में बाजरा खीचड़ा, पूर्वोत्तर के राज्यों में जा दोई, मणिपुरी खिचड़ी, काली दाल खिचड़ी, महाराष्ट्र में वालाची खिचड़ी, बंगाल में खिचुरी, तमिलनाडु में वेन पोंगल, खारा पोंगल, मिलागु पोंगल और सक्कराई पोंगल, आंध्र प्रदेश में पुलागम, कीमा खिचड़ी और केरल में माथन खिचड़ी कहलाती है।</p>
<p>किताब में यह रोचक जानकारी दी गयी है कि भारत के बाहर भी खिचड़ी काफी लोकप्रिय है। बांग्लादेश में पौष संक्रांति, थाइलैंड में सोंगकरन, कम्बोडिया में मोहा संगक्रान, लाओस में पिमालाओ, श्रीलंका में पोंगल, उझवर तिरूनल और नेपाल में माघे संक्रांति पर खिचड़ी पकायी जाती है।</p>
<p>ऐसा कहा जाता है कि राजस्थान में सैनिकों के लिए खिचड़ी मुख्य आहार था और इसके लिए गांव वालों से अलग से लगान लिया जाता था जिसे ‘खिचड़ा लाग’ कहा जाता था।</p>
<p>किताब के अनुसार, गुजरात जैसे कुछ बड़े राज्यों में विभिन्न हिस्सों में खिचड़ी के नाम बदल जाते हैं। गुजरात के काठियावाड़ में राम खिचड़ी, सूरत में सोला खिचड़ी और पारसी समुदाय में भड़ूची वाघरेली खिचड़ी चाव से खायी जाती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 14:40:16 +0530</pubDate>
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                <title>आज भी पतंग का क्रेज बरकरार, मकर संक्रांति पर्व पर बढ़ जाती है मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>धमतरी, 12 दिसंबर (हि.स.)। मकर संक्रांति पर्व पर एकाएक पतंग की पूछ-परख बढ़ जाती है। पर्व के नजदीक आते ही शहर की पतंग दुकानों में पतंग की पूछपरख बढ़ गई है। पतंगबाजी के क्रेज को बरकरार रखने के लिए कुछ संस्थाएं पर्व विशेष पर पतंगबाजी की स्पर्धा का भी आयोजन करती हैं।<br /><br />कम्प्यूटर और मोबाइल के इस युग में पतंग का क्रेज आज भी बरकरार है। दुकान में पतंग व मांझा खरीदने बच्चों की भीड़ लगती है। तीन रुपये से लेकर 250 रुपये तक पतंग दुकान में है, जो बच्चों की पसंद बनी हुई है। पतंग को लेकर अब बच्चों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/97854/kite-craze-continues-even-today-demand-increases-on-makar-sankranti"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/makarsankranti-uttarayan-kite-laddu.jpg" alt=""></a><br /><p>धमतरी, 12 दिसंबर (हि.स.)। मकर संक्रांति पर्व पर एकाएक पतंग की पूछ-परख बढ़ जाती है। पर्व के नजदीक आते ही शहर की पतंग दुकानों में पतंग की पूछपरख बढ़ गई है। पतंगबाजी के क्रेज को बरकरार रखने के लिए कुछ संस्थाएं पर्व विशेष पर पतंगबाजी की स्पर्धा का भी आयोजन करती हैं।<br /><br />कम्प्यूटर और मोबाइल के इस युग में पतंग का क्रेज आज भी बरकरार है। दुकान में पतंग व मांझा खरीदने बच्चों की भीड़ लगती है। तीन रुपये से लेकर 250 रुपये तक पतंग दुकान में है, जो बच्चों की पसंद बनी हुई है। पतंग को लेकर अब बच्चों में स्पर्धा भी शुरू हो गई है, क्योंकि मकर संक्रांति पर्व पर शहर में पतंग स्पर्धा का आयोजन शुरू हो चुका है। यही वजह है कि पतंग को लेकर पहले की तुलना में अब दिलचस्पी बढ़ने लगा है।<br /><br />धमतरी शहर के बनियापारा रोड व शिव चौक रोड पर पतंग दुकान की अपनी अलग पहचान है। यहां सालों से पतंग का विक्रय हो रहा है। कंप्यूटर व मोबाइल पर कई आधुनिक खेल शुरू हो चुके हैं, लेकिन पतंग की मांग आज भी वैसे ही है, जैसे पहले था। पतंग आज भी बच्चों की पसंद बनी हुई है। दिसंबर माह शुरू होने के साथ पतंग की मांग बढ़ जाती है। खरीदने के लिए दुकान में बच्चों की भीड़ लगता है। शिव चौक रोड पर संचालित पतंग दुकानों में इन दिनों पतंग खरीदने बच्चों की भीड़ लग रहा है।<br /><br />पतंग दुकान संचालक मोहम्मद इरफान और मोहम्मद हफीज ने बताया कि उनके दुकानों में तीन रुपये से 250 रुपये तक का पतंग उपलब्ध है, जिसे खरीदने बच्चों की भीड़ लग रहा है। उनके पास पतंग के कई माडल है, जैसे मटका पतंग, सारफीन, चील पतंग, छतरी आदि पतंग उपलब्ध है। पतंग दुकान संचालक मोहम्मद इरफान ने बताया कि पतंग के साथ उनके पास कई प्रकार के मांझे है, जिसमें फाइटर, ड्रेगन और अन्य है। यह गड्डी व बंडल में उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति पर्व पर पतंग की काफी मांग रहता है। शहर व गांवों में जमकर बिक्री होती है। पिछले साल धमतरी शहर के खेल मैदान पर पतंग स्पर्धा आयोजित हुई थी, ऐसे में अब पतंग को लेकर स्पर्धा शुरू होने से बच्चों में पतंग के प्रति दिलचस्पी बढ़ गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 12:55:50 +0530</pubDate>
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                <title>रविवार का सप्ताहिक अवकाश होने से पतंगबाजी का डबल मजा लूट रहे सूरत वासी!</title>
                                    <description><![CDATA[शनिवार को मकर संक्रांति के बाद रविवार को भी खूब उड़ रहीं पतंगें, हवा भी दे रही साथ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88977/due-to-sunday-being-a-weekly-holiday-surat-people-are"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/makar-sankranti.jpg" alt=""></a><br /><p>त्यौहारों को पसंद करने वाले सुरतियों के लिए इस बार की उत्तरायण डबल मजा लेकर आई है। गुजरात भर में मकर संक्रांति शनिवार को मनाई गई। पारंपरिक रूप से प्रदेश में लोग पतंगें उड़ाकर इस त्योहार को मनाते हैं। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने भी पतंग उड़ा कर मकर संक्रांति का पर्व मनाया।</p>
<img src="https://www.loktej.com/media/2023-01/d14012023-08.jpg" alt="D14012023-08"></img>
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पतंगबाजी पर हाथ आजमा कर मकर संक्रांति पर्व मनाया।

<p> </p>
<p>आम तौर पर उत्तरायण के दूसरे दिन भी लोग पतंगें उड़ा कर बासी-उत्तरायण का लुत्फ उठाते हैं। लेकिन इस बार मजा दुगना हो गया है क्योंकि बासी-उत्तरायण के दिन रविवार की साप्ताहिक छुट्टी है। ऐसे में लोग दिल खोल कर अपने घरों की छतों से पतंगें उड़ा रहे हैं। आम दिनों में बासी-उत्तरायण सप्ताह के चालू दिन होने से कई नौकरी पेशा लोग लगातार दो दिन पतंगबाजी का मजा नहीं ले सकते थे। </p>
<p><strong>पतंग के त्योहार पर महंगाई का असर नहीं दिखा</strong></p>
<p>पिछले कुछ दिनों से अफवाहें चल रही थीं कि भारी मंदी है और इसका असर पतंगोत्सव पर दिखेगा। लेकिन सूरतियों ने महंगाई को भुला कर मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर खूब पतंगें और मांझे खरीदे। उत्तरायण के दिन शनिवार को हवा  भीअच्छी थी, ऐसे में सुरतियों को इस बार पतंग उड़ाने के लिए ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। सूरत के आसमान में सुबह से ही पतंगें नजर आने लगीं थीं और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया था।</p>
<img src="https://www.loktej.com/media/2023-01/k14012023-02.jpg" alt="k14012023-02"></img>
मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने भी उत्तरायण पर पतंगें उड़ाईं।

<p> </p>
<p>सुबह से ही सुरती अपने-अपने आवासीय परिसरों - भवनों की छतों पर पहुंच गये थे। पतंगबाजी के साथ उत्साही लोगों ने छत पर डीजे और स्पीकर जैसे उपकरण लगाकर अपने पसंदीदा गाने भी बजाए। संगीत की पसंद और हवा की संगत के कारण सूरतियों का उत्तराया का बजा कई गुना बढ़ गया। आतिशबाजी और पटाखों से रात रोशन भी हुई। </p>
<p>आज रविवार को भी शनिवार का सा ही माहौल है। ‘काइपो छे’ की गूंज थोड़ी थोड़ी देर में सुनाई दे रही है। लोग उत्तरायण के व्यंजन ऊंधियू, चिक्की आदि का स्वाद ले रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jan 2023 13:30:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : मकर संक्रांति के दिन छतों पर पतंगबाजी के साथ हनुमान चालीसा की धूम रही!</title>
                                    <description><![CDATA[चुंकि इस बार गुजरात में मकर संक्रांति शनिवार को थी इसलिये सोशल मीडिया में छतों से एक साथ हनुमान चालीसा बजाने की अपील की गई थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88975/hanuman-chalisa-was-celebrated-with-kite-flying-on-the-roofs"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/k15012023-03.jpg" alt=""></a><br /><p>लोगों ने शनिवार को कोरोना के बाद बिना किसी बंदिश के मकर संक्रांति पर्व का मनाया। दिन भर गुजरात वासियों ने पतंगबाजी का मजा लिया। वहीं उत्तरायण की रात में दीवाली जैसा माहौल दिखा जब आसामान में आतिशबाजी का नजारा देखा गया। वहीं प्रदेश के कई शहरों में जगह-जगह शाम सात बजते ही माहौल भक्तिमय भी बन गया, ऐसा लग रहा था जैसे हनुमान जयंती हो! जैसे ही शाम के सात बजे छतों पर हनुमान चालीसा गुंजायमान हो गई।</p>
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<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="qme" xml:lang="qme"><a href="https://twitter.com/hashtag/HanumanChalisa?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#HanumanChalisa</a> <a href="https://t.co/ThBe6PqCk7">pic.twitter.com/ThBe6PqCk7</a></p>
— Pravinbhai Gordhanji Mali (@pravinmalibjp) <a href="https://twitter.com/pravinmalibjp/status/1614271865090117634?ref_src=twsrc%5Etfw">January 14, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

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<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Today 7pm hanuman chalisa <a href="https://twitter.com/hashtag/Uttrayan?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Uttrayan</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/hanumanchalisa?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#hanumanchalisa</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/JaiShreeRam?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#JaiShreeRam</a> <a href="https://t.co/JsoC80aREH">pic.twitter.com/JsoC80aREH</a></p>
— Mayur Khatri (@mayuuuuuurr) <a href="https://twitter.com/mayuuuuuurr/status/1614300313443504128?ref_src=twsrc%5Etfw">January 14, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>हिंदू त्योहार उत्तरायण में दान पुण्य की भी बड़ी महिमा है। खाने-पीने के साथ लोगों ने पतंग उड़ाई और दान-पुण्य कर उत्तरायण की परंपरा को निभाया। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="gu" xml:lang="gu">ઉત્તરાયણની સાંજે સાત વાગે સુરતના અનેક વિસ્તારમાં હનુમાન ચાલીસા ગૂંજી ઉઠી <a href="https://twitter.com/hashtag/Surat?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Surat</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/HanumanChalisa?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#HanumanChalisa</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Uttarayan?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Uttarayan</a> <a href="https://t.co/LUhv0M65Gn">pic.twitter.com/LUhv0M65Gn</a></p>
— Gujarat Samachar (@gujratsamachar) <a href="https://twitter.com/gujratsamachar/status/1614512748179894272?ref_src=twsrc%5Etfw">January 15, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>चूंकि इस साल उत्तरायण शनिवार थी, इसलिए सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अपील की थी कि सभी लोग शनिवार की शाम को छत पर हनुमान चालीसा बजाएं। सोशल मीडिया पर इस अपील का लोगों पर काफी असर पड़ा। ठीक सात बजे शहर के कई रिहायशी इलाकों में एक साथ हनुमान चालीसा बजने लगी। विभिन्न छतों से एक साथ हनुमान चालीसा बजने से माहौल धार्मिक हो गया और ऐसा लगा जैसे उतरायन नहीं बल्कि हनुमान जयंती है।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="gu" xml:lang="gu">આ વખતે ઉતરાયણ 🗾 શનિવારે ધાબા ઉપર લાઉસ્પીકર માં બરાબર સાંજે 7.00 વાગે હનુમાન ચાલીસા વગાડયું, તેનાથી ખરેખર મન પ્રસન્ન થઈ ગયું<br />હનુમાન દાદા ના આશીર્વાદ દરેક ને મળે <br /><br />જય જય શ્રી રામ જય હનુમાન દાદા 🚩🚩<a href="https://twitter.com/hashtag/HanumanChalisa?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#HanumanChalisa</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/JaiShreeRam?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#JaiShreeRam</a> <a href="https://t.co/rlHVzlK6XQ">pic.twitter.com/rlHVzlK6XQ</a></p>
— Ashok Darji (@AMDARJI2020) <a href="https://twitter.com/AMDARJI2020/status/1614291760393617420?ref_src=twsrc%5Etfw">January 14, 2023</a></blockquote>

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</p>
<p>बता दें कि देश के कई हिस्सों में मकर संक्रांति रविवार को मनाई जा रही है। ऐसे में गुजरात में इस बार शनिवार और रविवार - लगातार दो दिन पतंगबाजी की धूम मची हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jan 2023 12:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश भर में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में उमड़े लोग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88973/the-festival-of-makar-sankranti-is-being-celebrated-with-enthusiasm"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/k15012023-01.jpg" alt=""></a><br /><p>मकरसंक्रांति का त्यौहार देश के वि‌भिन्न हिस्सों में अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है। </p>
<p>उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर स्थित गोरखनाथ मंदिर में इस अवसर पर भक्तों ने पूजा-अर्चना की और मंदिर में खिचड़ी चढ़ाई। उत्तराखंड में श्रद्धालुओं ने हरिद्वार में गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाई। </p>
<p>झारखंड की राजधानी रांची में मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर में भक्तों ने पूजा अर्चना की। असम के हर प्रांत में माघ बिहू, भोगाली बिहू मनाया जा रहा है। यह किसानों का त्योहार है। गुवाहाटी में इस अवसर पर पारंपरिक असमिया मेजी जलाई गई। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> मध्य प्रदेश: मकर सक्रांति के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। <a href="https://t.co/urdzBWnrjl">pic.twitter.com/urdzBWnrjl</a></p>
— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1614458654685810690?ref_src=twsrc%5Etfw">January 15, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>मध्यप्रदेश की तीर्थ नगरी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्त आरती के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। </p>
<p>आप सभी को मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jan 2023 10:49:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : उत्तरायण-मकरसंक्रांति पर मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने लिया पतंगबाजी का मज़ा</title>
                                    <description><![CDATA[ अहमदाबाद के दरियापुर स्थित नये तलिया की पोल इलाके में स्थानीय लोगों से रुबरू हुए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88965/gujarat-chief-minister-bhupendra-patel-enjoyed-kite-flying-on-uttarayan-makarsankranti"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/k14012023-02.jpg" alt=""></a><br /><p>गुजरात में उत्तरायण यानि मकर संक्रांति के अवसर पर प्रदेश भर में पतंग उड़ाने की परंपरा है। लोग सुबह से अपने परिवार और दोस्तों के साथ घरों की छतों पर पहुंच जाते हैं और दिन भर पतंगबाजी का मजा लेते हैं। </p>
<p>प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने भी आज मकर संक्रांति का पर्व मनाया। उन्होंने प्रदेश वासियों के नाम अपने शुभकामना संदेश में कामना की कि भगवान सूर्य नारायण का उत्तर दिशा में प्रयाण का यह उत्सव सभी के जीवन में विकास की उर्ध्वगति लाए और समाज में सुख और भाईचारे की भावना मजबूत हो। </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="gu" xml:lang="gu">આપ સૌને મકરસંક્રાંતિ પર્વની હાર્દિક શુભેચ્‍છાઓ. <br />ભગવાન સૂર્યનારાયણના ઉત્તર તરફના પ્રયાણનો આ ઉત્‍સવ સૌના જીવનમાં વિકાસની ઉર્ધ્વગતિ લાવે અને સમાજમાં સુખાકારી તથા ભાઈચારાની ભાવના વધુ સુદ્રઢ બને તેવી અભ્યર્થના. <a href="https://t.co/9R0WOz2TJw">pic.twitter.com/9R0WOz2TJw</a></p>
— Bhupendra Patel (@Bhupendrapbjp) <a href="https://twitter.com/Bhupendrapbjp/status/1614108299628273665?ref_src=twsrc%5Etfw">January 14, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने अहमदाबाद के दरियापुर स्थित नये तलिया की पोल इलाके में स्थानीय लोगों के साथ पतंगबाजी का भी लुत्फ उठाया। इस मौके पर उन्होंने मकर संक्रांति पर बनने वाले खास व्यंजन तल सांकड़ी और सिंग चिकी का भी स्वाद चखा। </p>
<p>बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल की एक झलक पाने के लिये अपने अपने घरों की छतों पर देखे गये। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Jan 2023 16:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अहमदाबाद : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद आएंगे, परिवार और कार्यकर्ताओं के साथ उत्तरायण मनाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर में पूजा भी करेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88952/ahmedabad-union-home-minister-amit-shah-will-come-to-ahmedabad"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/d14012023-08.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शनिवार को गुजरात समेत पूरे देश में उत्तरायण पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके साथ ही सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद आकर अपने परिवार और कार्यकर्ताओं के साथ मकर संक्रांति मनाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वह जगन्नाथ मंदिर में पूजा भी करेंगे</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद आएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तरायण पर्व के लिए गुजरात आएंगे। अमित शाह हर साल मकर संक्रांति का पर्व अपने परिवार और कार्यकर्ताओं के साथ मनाते हैं। इस साल भी वे गुजरात में अपने परिवार के सदस्यों और कार्यकर्ताओं के साथ उत्तरायण पर्व मनाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अमित शाह अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा भी कर सकते हैं। इसके अलावा वह जगन्नाथ मंदिर में भी पूजा-अर्चना करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संसदीय क्षेत्र के कार्यकर्ता के साथ पतंग उड़ाएंगे</strong></p>
<p style="text-align:justify;">हर साल मकर संक्रांति पर अमित शाह कार्यकर्ताओं के घर जाते हैं और पतंग उड़ाते हैं। इस साल भी वे कार्यकर्ताओं के साथ पतंग महोत्सव का लुत्फ उठाएंगे। इस बार वे दो दिन की छुट्टी में गुजरात के अहमदाबाद और गांधीनगर के कलोल में मकर संक्रांति मनाएंगे। मकर संक्रांति के दिन वह अपने परिवार के साथ संसदीय क्षेत्र का दौरा करेंगे, जहां वह कार्यकर्ताओं के साथ पतंगबाजी का लुत्फ उठाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/88952/ahmedabad-union-home-minister-amit-shah-will-come-to-ahmedabad</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Jan 2023 23:34:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : तापी नदी के ब्रिज को छोड़ शहर के फ्लाई ओवरों पर 14 व 15 जनवरी को दुपहिया वाहन नहीं जा पायेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[पतंग की डोर से दोपहिया वाहनों को बचाने लिया गया निर्णय, बीआरटीएस कॉरिडोर में पतंग उड़ाने या पकड़ने पर भी रोक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88941/two-wheelers-will-not-be-able-to-go-on-the-flyovers"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/flyover-pool-bridge-e16089755078291.jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तरायण पर्व के दौरान हादसों और गला कटने की घटनाओं को रोकने के लिए सूरत शहर के सभी फ्लाई ओवर ब्रिजों पर 14 और 15 जनवरी को दोपहिया वाहनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस संबंध में सूरत पुलिस आयुक्त द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। इसके अलावा सूरत नगर पालिका के बीआरटीएस कॉरिडोर में पतंग उड़ाने या पकड़ने पर रोक लगा दी गई है।</p>
<p><strong>उत्तरायण को लेकर प्रशासन अलर्ट</strong></p>
<p>सूरत शहर को ‘ब्रिज सिटी’ के रूप में भी जाना जाता है। शहर में बड़ी संख्या में लोग पुल पर आवागमन करते हैं। सूरत पुलिस कमिश्नर ने उतरायन पर्व के दौरान पतंग की डोर से दुपहिया वाहन चालकों या राहगिरों को नुकसान न हो, उनका गला न कटे, घायल न हों इस उद्देश्य से एक नोटिफिकेशन जारी किया है। अधिसूचना के तहत 14 से 15 जनवरी तक शहर के सभी फ्लाई ओवर ब्रिज पर दुपहिया वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2023-01/makar-sankranti.jpg" alt="makar-sankranti"></img></p>
<p><strong>नदी पर बने पुलों पर आवाजाही सामान्य</strong></p>
<p>अधिसूचना के अनुसार, दुपहिया वाहन चालक प्रतिबंधित समयावधि में नदी पर बने पुलों को छोड़कर सभी फ्लाई ओवर ब्रिजों के नीचे से आवाजाही करेंगे। वैसे ऐसे दुपहिया वाहन चालक जिन्होंने अपने वाहनों पर फ्रंट सेफ्टी गार्ड लगाये होंगे, उन्हें इस रोक से छूट दी गई है। इसके अलावा नदी पर बने पुल से सभी प्रकार के वाहन चालक सामान्य रूप से आवाजाही कर सकेंगे। </p>
<p><strong>नगर निगम के बीआरटीएस कॉरिडोर में पतंग उड़ाने या उड़ाने पर रोक</strong></p>
<p>नगर निगम के अनुसार, सूरत शहर भारत का एकमात्र शहर है जहां एक टिकट सिटी बस और बीआरटीएस में यात्रा की अनुमति देता है। वर्तमान में बीआरटीएस के कुल 13 रूटों और सिटी बसों के 45 रूटों पर लगभग 2.70 लाख नागरिक सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। शहर में 14 व 15 जनवरी को उत्तरायण फेस्टिवल बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन कुछ लोग और विशेष रुप से किशोर-बच्चे पतंगे लूटने दौड़ते देखे जा सकते हैं। ऐसी प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने और विशेष रूप से बीआरटीएस कॉरिडोर में लोगों द्वारा पतंग उड़ाने/पकड़ने से दुर्घटना की संभावना को देखते हुए जनता से अनुरोध है कि बीआरटीएस कॉरिडोर में पतंग न उड़ाएं/पकड़ें नहीं। इसके अलावा लोगों को सलाह दी गई है कि वे बीआरटीएस कॉरिडोर तथा सड़क की रेलिंग के ऊपर से न कूदें और जेब्रा क्रॉसिंग पर दोनों तरफ देखकर ही सावधानी से पार करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jan 2023 20:39:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>त्यौहार : जानिए क्यों मनाया जाता है उत्तरायण पर्व? क्या है इसका महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[सूर्य जिस दिन मकर राशि में प्रवेश करता है, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88935/know-why-the-festival-is-celebrated-what-is-the-importance"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/makarsankranti-uttarayan-kite-laddu.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य जनवरी के साथ ही देशभर में त्यौहारों की सीजन शुरू होने वाली है। गुजरात समेत पश्चिम-उत्तर भारत में उतरायण, दक्षिण भारत में पोंगल, पंजाब समेत उत्तर भारत के अन्य राज्यों में लोहड़ी और असम समेत पूर्वी भारत में बिहू मनाया जायेगा। मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2023 दिन रविवार को मनाया जाएगा।</p>
<p>सूर्य जिस दिन मकर राशि में प्रवेश करता है, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2023 को है। इसे सूर्य उत्तरायण पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इसे लेकर धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होता है। मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से देश के विभिन्न राज्यों में मनाया जाता है। कर्नाटक में इसे संक्रांति, तमिलनाडु और केरल में पोंगल, पंजाब और हरियाणा में माघी, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, उत्तराखंड में उत्तरायणी, उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी आदि जैसे नामों से भी जाना जाता है।</p>
<p><strong>उत्तरायण और दक्षिणायन क्या है?</strong></p>
<p>सूर्य की दो स्थितियां उत्तरायण और दक्षिणायण हैं। दोनों की अवधि छह-छह महीने की होती है। सूर्यदेव छह माह उत्तरायण (मकर से मिथुन राशि तक) और छह माह दक्षिणायन (कर्क से धनु राशि तक) रहते हैं। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है तो वक्री होता है। इसी प्रकार जब यह कर्क राशि में प्रवेश करता है तो दक्षिण दिशा में होता है। बहुत कम समय होता है जब सूर्य पूर्व में उदय होता है और दक्षिण से होकर पश्चिम में अस्त होता है।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2023-01/makar-sankranti.jpg" alt="makar-sankranti"></img></p>
<p><strong>प्रकाश का समय है उत्तरायण</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, उत्तरायण के समय सूर्य उत्तर की ओर झुकाव के साथ चलता है, जबकि दक्षिणायन के समय सूर्य दक्षिण की ओर झुकाव के साथ चलता है। इसलिए इसे उत्तरायण और दक्षिणायन कहते हैं। उत्तरायण को प्रकाश का समय कहा गया है और इसलिए शास्त्रों में इसे शुभ माना गया है। सूर्य के उत्तरायण होने से दिन बड़ा और रात छोटी होने लगती है। इस दौरान दान-पुण्य, यज्ञ और शुभ-मांगलिक कार्य करना शुभ होता है। उत्तरायण के समय दिन बड़े और रातें छोटी होती हैं जबकि दक्षिणायन के समय रातें बड़ी और दिन छोटे होने लगते हैं।</p>
<p><strong>क्या है इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं</strong></p>
<p>देवताओं का दिन मकर संक्रांति से शुरू होता है, जो आषाढ़ मास तक रहता है। दक्षिणायन की अवधि को देवताओं की रात्रि माना जाता है। अर्थात देवताओं का एक दिन और एक रात मनुष्य का एक वर्ष होता है। मनुष्यों का एक मास पूर्वजों का एक दिन होता है। दक्षिणायन को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। उत्तरायण तीर्थ यात्रा और उत्सव का समय है और दक्षिणायन उपवास और ध्यान का समय है। उत्तरायण के 6 माह में गृहप्रवेश, यज्ञ, व्रत, कर्मकांड, विवाह, मुंडन आदि नव कार्य करना शुभ माना जाता है। दक्षिणायन में विवाह, मुंडन, उपनयन आदि विशेष शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस दौरान व्रत रखना और किसी भी तरह की सात्विक या तांत्रिक साधना करना भी फलदायी होता है। इस दौरान सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p><strong>गीता में भी हैं इस दिन का उल्लेख</strong></p>
<p>उत्तरायण का महत्व बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में यह भी कहा है कि उत्तरायण के 6 मास के शुभ काल में जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी पर प्रकाश रहता है, तब इस प्रकाश में शरीर छोड़ने से मनुष्य की मृत्यु नहीं होती है। व्यक्ति का पुनर्जन्म, ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त करते हैं। उत्तरायण के दिन को बहुत ही शुभ माना गया है। यह दिन दान-दक्षिणा और पूजा-पाठ के लिए ही अत्यंत ही शुभ होता है। मान्यता है कि इस दिन प्राण त्यागने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण कि, भीष्म पितामह अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jan 2023 19:38:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : मकरसंक्राति पर पतंग और डोर के साथ इन अन्य एसेसरीज की भी डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[आकाश रंगबेरंगी पतंगों से छा जायेगा, पुराने त्यौहार को नये जमाने के साधनों के साथ मनाया जायेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88933/along-with-kites-and-strings-these-other-accessories-are-also"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/story-13012023-b02.jpg" alt=""></a><br /><p>त्यौहार हमारे जीवन में नई जान फूंकते हैं। हमारे यहां हर उत्सव का धार्मिक महत्व भी होता है। इसलिए कई त्योहार हजारों सालों से मनाए जाते रहे हैं। हालांकि उन्हें मनाने के तरीके समय के साथ बदल गए हैं, लेकिन उत्साह वही बना हुआ है।</p>
<p>गुजरात और खास कर सूरत में मकरसंक्रांति यानि उत्तरायण पर पतंगबाजी की परंपरा है। पतंगें उड़ाना एक सामान्य का सबब हो सकता है, लेकिन इसमें भी समय के साथ नई-नई चीजें जुड़ती रही हैं। आइए जानते हैं कि उत्तरायण पर पतंगबाजी के साथ किन-किन एसेसरीज का लोग उपयोग करते हैं और उनमें समय के साथ क्या-क्या बदलाव आया है।</p>
<p><strong>चरखी</strong></p>
<p>वर्षों पहले केवल लकड़ी की सादी चरखी हुआ करती थी। लेकिन एक त्यौहार पर चरखी से डोर खतम हो जाती और अगले वर्ष फिर उसे खोजते तो लकड़ी की चरखी टूटी हुई मिलती। धीरे-धीरे स्टील और प्लास्टिक की चरखी का चलन बढ़ गया और अब इस साल इलेक्ट्रिक चरखी बाजार में आ गई है। अब पतंग कट जाए तो हाथों से डोर चरखी में लपेट ने के बजाय स्विच दबाते ही चरखी घूमने लगती और मांझा उसमें लिपटता चला जाता है। </p>
<p><strong>चश्मे</strong></p>
<p>उत्तरायण मनाने के लिए उत्सव प्रेमी सुबह से ही छत पर पहुंच जाते हैं। हालांकि, हवा और धूप में पूरे दिन छत पर रहने में मदद के लिये चश्मा पसंदीदा एसेसरीज़ रही है। पहले के ज़माने में व्यक्ति सिर्फ धूप से बचने और थोड़ा स्टाइलिश दिखने के लिए गॉगल्स पहनता था। हालांकि, आज लोग फैशन और ट्रेंड को ज्यादा महत्व देते हैं। इसलिए अलग-अलग स्टाइल और शेप के गॉगल्स पसंद किये जाते हैं।</p>
<p><strong>टोपी</strong></p>
<p>अगर आपको पतंग उड़ाना बहुत पसंद है तो आपको सूरज की परवाह क्यों करनी चाहिए? इसलिए सूरज की रोशनी पतंगबाजी में बाधा न आए, इसके लिए लोग टोपी पहनकर पतंगबाजी का लुत्फ उठाते हैं। हालांकि अब टोपी भी पुराना फैशन हो गया है और लोग अब सन हैट, काउबॉय हैट, पनामा हैट, बेसबॉल कैप, बोटर हैट, बकेट हैट , फैन कैप जैसी विभिन्न शैलियों की टोपियां पहनते हैं। इसके अलावा हाथों से पेंट की हुई टोपियां भी इन दिनों खूब चलन में हैं।</p>
<p><strong>मांझा</strong></p>
<p>पहले रस्सी को हाथ से रगड़ा जाता था और अनुपात से लपेटा जाता था। एक व्यक्ति डोरी को हाथ से घुमाता और दूसरा लपेटता। हालाँकि, समय के साथ मशीनों का उपयोग मांझा तराशने के लिये किया जाता है। पहले सिर्फ कच्ची और पक्की डोर मिलती थी और वह भी खासकर गुलाबी रंग की। लेकिन अब कई रंगों के साथ-साथ तिरंगा पसंदीदा रंग बन गया है। हालांकि, जिस प्रकार लोगों को पतंगें काटने में ही रुचि होती है, तो उसे देखते हुए बिते कुछ वर्षों से चीनी मांझा या  नायलॉन डोर का उपयोग बढ़ा है। लेकिन सरकार ने अब उसे प्रतिबंध कर दिया गया है क्योंकि ये चीनी मांझे कभी-कभी मनुष्यों और जानवरों के लिए घातक साबित होते हैं।</p>
<p><strong>पिपोडी, सीटी </strong></p>
<p>कुछ साल पहले की बात करें तो बच्चे मनोरंजन के लिए पिपोड़ी इस्तेमाल करते थे जबकि पतंगबाज चिल्ला कर अपनी उत्तेजना जाहिर करते थे। लेकिन अब विभिन्न प्रकार की आवाज वाली सीटियां पतंग प्रेमियों के उत्साह को बढ़ाने के लिए बाजार में आ गई हैं।</p>
<p><strong>नकाब, मास्क</strong></p>
<p>वैसे भी उत्तरायण के दौरान डोर कहीं भी गिर जाती है और कभी-कभी गंभीर चोटों का सबब बन जाती है। कई बार पीड़ित के चेहरे पर चोटों के निशान हमेशा के लिए रह जाते हैं। इसलिए मास्क पहने जाते हैं। उसमें भी फिल्मी कलाकारों और राजनीतिज्ञों के चेहरे वाले प्लास्टिक के मास्क चलन में हैं। </p>
<p><strong>पतंग</strong></p>
<p>आज पतंगों में पहले की तुलना में अधिक से अधिक किस्में उपलब्ध हैं। अब बाजार में अलग-अलग आकार की पतंगें और गुब्बारे मिले हैं। पुराने ज़माने में फटी हुई पतंगों में चावल की लुग्दी लगाते थे, लेकिन अब लोग गोंद से भी चिपका देते हैं। </p>
<p><strong>सुरक्षा छड़, सेफ्टी बेल्ट</strong></p>
<p>सुरक्षा टेप का उपयोग शरीर के किसी भी अन्य भाग की तुलना में हाथों की चोटों को रोकने और कॉर्ड को लगातार रगडऩे के लिए किया जाता था, लेकिन अब सुरक्षा दस्ताने, दस्ताने आदि हाथों पर पहनने के लिए उपलब्ध हैं जो पहले से बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jan 2023 19:32:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : उत्तरायण पर्व पर घायल पक्षियों के लिए 20 जनवरी तक 'करुणा' अभियान चलेगा </title>
                                    <description><![CDATA[करुणा अभियान अंतर्गत शहर में  20 जनवरी तक घायल पक्षियों का विशेष केंद्र में होगा इलाज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88907/compassion-campaign-will-run-till-january-20-for-injured-birds"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/story-12012023-b03.jpg" alt=""></a><br /><p>राज्य सरकार द्वारा उत्तरायण पर्व पर शुरू किया गया करुणा अभियान 20 जनवरी तक सूरत शहर व जिले में शुरू किया गया है। पतंग की डोर से घायल पक्षियों के इलाज के लिए 'करुणा' अभियान के माध्यम से वन विभाग द्वारा विशेष केंद्र शुरू किया गया है। इसके लिए वन विभाग की ओर से हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया गया है। जिसके माध्यम से अधिक से अधिक लोगों से घायल पक्षियों के बारे में जानकारी देने का अनुरोध किया गया है।</p>
<p><strong>करुणा अभियान का प्रारंभ हुआ</strong></p>
<p>राज्य सरकार द्वारा अबोल जीव की सुरक्षा के लिए करुणा अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत सूरत शहर व जिले में 20 जनवरी तक करुणा अभियान चलेगा।</p>
<p>सूरत शहर व जिले में पतंग की डोर से घायल पक्षियों के इलाज के लिए वन भवन अडाजन में विशेष केंद्र स्थापित किया गया है, इसके साथ ही राज्य सरकार का पशुओं के लिए टोल फ्रि नंबर 1962  करूणा अभियान के दौरान 6 एंबुलेंस भी ड्यूटी पर रहेंगी।</p>
<p><strong>वन विभाग द्वारा हेल्प लाइन नंबर घोषित</strong></p>
<p>वन विभाग द्वारा घायल पक्षियों के बचाव एवं तत्काल इलाज के लिए हेल्पलाइन नंबर। 9909730030 की भी घोषणा की गई है। यह नंबर नागरिकों और धर्मार्थ संस्थाओं के लिए उपलब्ध कराया गया है। सभी से विशेष अनुरोध है कि घायल पक्षियों के इलाज के लिए इस नंबर पर रिपोर्ट करें।</p>
<p><strong>विभिन्न सामाजिक संगठन शामिल हुए</strong></p>
<p>पशुपालन विभाग और करीब 12 समाज कल्याण संस्थाएं भी करुणा अभियान से जुड़ चुकी हैं और उनके स्वयंसेवी युवा और पशु चिकित्सक भी सेवा देंगे। कुल 30 शासकीय एवं संस्थागत केन्द्रों पर पक्षियों का उपचार उपलब्ध होगा इसके अतिरिक्त कामधेनु विश्वविद्यालय नवसारी से पशु चिकित्सा प्रशिक्षणार्थी भी सेवा देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Jan 2023 16:31:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ और गौरवशाली माना गया है मकरसंक्राति का महापर्व</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात में जहां इस दिन पतंगबाजी की परंपरा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु अत्र, तत्र और सर्वत्र जीवनदायिनी गतिविधियों में लिप्त नजर आते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88898/the-great-festival-of-makarsankranti-has-been-considered-the-best"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/makarsankranti-uttarayan-kite-laddu.jpg" alt=""></a><br /><p>सभी धर्मों में दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ और गौरवशाली माना गया है मकरसंक्राति का महापर्व। गुजरात में जहां इस दिन पतंगबाजी की परंपरा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु अत्र, तत्र और सर्वत्र जीवनदायिनी गतिविधियों में लिप्त नजर आते हैं। आबोल पक्षियों के लिए दाना, पानी की विशेष व्यवस्था की जाती है। इसके साथ ही भूदेवों, संतों, महंतों को वस्त्र और अनाज दान करने की भी अनुपम महिमा बताई गई है।</p>
<p><strong>मकरसंक्रांति का महत्व</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य के विस्तार की दिशा दो अयन, छह ऋतुएं और बारह मास हैं। वर्ष भर में सूर्य लगभग एक माह एक राशि में व्यतीत करता है और बारह राशियों में भ्रमण करता है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना संक्राति कहलाता है। वर्तमान में सूर्य धन राशि में है इसलिए इसे धनारक कहा जाता है। 14 जनवरी शनिवार को सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करेगा। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को शुभ माना गया है। इसीलिये महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह की मृत्यु दक्षिणायन में हुई थी। लेकिन चूंकि वह काल शुभ नहीं था और इच्छामृत्यु भीष्म के लिए वरदान थी, इसलिए वे उत्तरायण तक दर्दनाक बाणों की शैय्या पर रहे। </p>
<p><strong>मकरसंक्रांति पर श्रद्धालुओं का क्रम</strong></p>
<p>मकर संक्रांति के दिन सूर्य के गोचर से लगभग 10 घंटे तक की अवधि दान, दान और जीवनदायी गतिविधियों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। गुजरात भर में श्रद्धालू इस दिन पवित्र नदी, जलाशय में स्नान कर पूजा-पाठ, तिल, गुड़, अनाज, गरीबों व ब्राह्मणों को गर्म वस्त्र दान करते हैं। साथ ही भूदेवों, संतों, महंतों को पीतांबरी धोती, शॉल, गमछा, राशिवार रंगे कपड़े, राम नाम लिखे शॉल, मुकुट व पैंट शर्ट दान में बांटे जाते हैं। गाय आदि को दाना, पानी, चना, पशु-पक्षियों को चारा देकर उनकी पूजा कराकर पुण्य कमाया जाता है। इसके साथ ही उत्तरायण के अवसर पर सुबह-सुबह ऐतिहासिक और प्राचीन तीर्थों के पास नदी, जलाशय में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ता है।</p>
<p><strong>सात धान खिचड़ा का सर्वोपरि महत्व</strong></p>
<p>उत्तरायण में वर्षों से खिचड़ा का सर्वाधिक महत्व रहा है। ज्वार, चावल, मूंग, बाजरी, उड़द, चना और छोले को एक साथ मिलाकर सात अनाजों का खिचड़ो नमकीन और मीठा दो प्रकार से बनाया जाता है। बहन-बेटी को पका हुआ खिचड़ो भेजने की अनूठी परंपरा सालों से चली आ रही है। कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों को भी खिचड़ो भेजते हैं। भाई बहन के घर खिचड़ो देने जाता है। उत्तरायण में खिचड़ो देने का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि बेटी या बहन का घर धन-धान्य से भरपूर हो, भाई-बहन का रिश्ता भी बना रहता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Jan 2023 10:15:06 +0530</pubDate>
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