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                <title>Terapanth News - Loktej</title>
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                <description>Terapanth News RSS Feed</description>
                
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                <title>अंतिम श्वास तक रहे धार्मिकता - युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>06.12.2024, शुक्रवार, अंकलेश्वर, भरूच (गुजरात) । तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी जनोपकार करते हुए गांव–गांव, नगर–नगर में सदाचार की सौरभ को जनमानस में फैला रहे है। आचार्यश्री का सन्निधि प्राप्त कर हर जाति वर्ग के ग्राम वासी भी अपने आप को धन्य महसूस कर रहे है। गुजरात की धरा को पावन बनाते हुए आचार्य श्री निरंतर गतिमान है। आज गुरुदेव का अंकलेश्वर में पदार्पण हुआ। पूर्व में सन् 2023 में आचार्यश्री यहां पधारे थे। युगप्रधान का द्वितीय बार प्रवास प्राप्त कर अंकलेश्वर के सकल समाज में अनूठा हर्षोल्लास का माहौल छाया हुआ था। प्रवेश से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/107230/remain-righteous-till-the-last-breath-yugpradhan-acharyashri-mahashraman"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/terapanth-acharyashree-mahashrama.jpg" alt=""></a><br /><p>06.12.2024, शुक्रवार, अंकलेश्वर, भरूच (गुजरात) । तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी जनोपकार करते हुए गांव–गांव, नगर–नगर में सदाचार की सौरभ को जनमानस में फैला रहे है। आचार्यश्री का सन्निधि प्राप्त कर हर जाति वर्ग के ग्राम वासी भी अपने आप को धन्य महसूस कर रहे है। गुजरात की धरा को पावन बनाते हुए आचार्य श्री निरंतर गतिमान है। आज गुरुदेव का अंकलेश्वर में पदार्पण हुआ। पूर्व में सन् 2023 में आचार्यश्री यहां पधारे थे। युगप्रधान का द्वितीय बार प्रवास प्राप्त कर अंकलेश्वर के सकल समाज में अनूठा हर्षोल्लास का माहौल छाया हुआ था। प्रवेश से कुछ किलोमीटर पूर्व ही श्रावक समाज जुलूस के रूप में धवल सेना के स्वागत हेतु उपस्थित था। सजोद से लगभग 10 किमी विहार कर आचार्य श्री अंकलेश्वर के ई एन जिनवाला हाइस्कूल में प्रवास हेतु पधारे। मां शारदा टाऊन हॉल ऑडिटोरियम में स्वागत समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें नगर की प्रमुख संस्थाओं द्वारा युगप्रधान का नागरिक अभिनंदन किया गया।</p>
<p>मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा – हर व्यक्ति अपने जीवन में मानसिक शांति, मनोबल तथा स्वस्थता ये तीन चीजें चाहता है। पर इनसे भी बड़ी चीज है सन्यास व धर्म साधना। साधु का जीवन तो पूर्ण धर्ममय होता ही है, पर गृहस्थों की भी धर्म साधना पुष्ट होती रहनी चाहिए। सांसारिक दुनिया में विभिन्न प्रकार के पद होते है, किन्तु कोई स्थाई नहीं होता, एक सरकार में कोई मंत्री है व सरकार बदलने पर नहीं भी रह सकता है। राष्टपति का भी कार्यकाल पूरा होने से दूसरा राष्टपति बन जाता है। पर साधुत्व ऐसा तत्व है, श्रावक व धार्मिकता ऐसा तत्व है जो सदा बने रहते है। और कुछ अंतिम श्वास तक रहे न रहे धर्म भावना को अंतिम श्वास तक सुरक्षित रखा जा सकता है। </p>
<p>गुरुदेव ने आगे फरमाया कि इस साधुता न कोई चोर चुरा सकता है न कोई डाकू लूट सकता है। कर्मों में एक मोह कर्म ही ऐसा है जो हमारी धर्म साधना को कमजोर बना सकता है। धन की सम्पति इस जन्म तक ही रहती है पर धर्म की सम्पति इस जन्म के बाद भी रहती है। एक गृहस्थ को भी अधिकार है धर्म करने का। साधुओं के लिए महाव्रत व श्रावकों के लिए अणुव्रत की साधना का उल्लेख आता है। आदमी ईमानदारी, वाणी संयम, अहिंसा आदि की अनुपालना पर ध्यान दे। झूठ व चोरी से बचना इमानदारी है। सादा जीवन उच्च विचार, मानव जीवन का श्रृंगार। कितना भी धनी क्यों न हो जाए किन्तु भोगोपभोग का परिमाण रहे। जीवन में सादगी और चिंतन में उच्चता रहे तो जीवन बढ़िया बन सकता है। </p>
<p>इस अवसर पर नागरिक अभिनंदन के क्रम में नगरपालिका अध्यक्षा ललिता बेन राजपुरोहित, तेरापंथ सभा अंकलेश्वर के अध्यक्ष श्री बख्तावरमल सिंघवी, श्री जिनेंद्र कोठारी ने अपने विचार रखे। महिला मंडल की बहनों ने गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने प्रस्तुति दी। नगरपालिका एवं नगर की प्रमुख संस्थाओं द्वारा नगर की प्रतीकात्मक चाबी भेंट कर गुरुदेव का नागरिक अभिनंदन किया गया। </p>
<p>कार्यक्रम में अणुव्रत विश्व भारती के अध्यक्ष श्री प्रताप दूगड़ ने आगामी कार्यकाल के कार्यकारी सदस्यों की घोषणा की एवं शपथ प्रदान की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 19:08:32 +0530</pubDate>
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                <title>गुस्सा मनुष्य का शत्रु, क्षमा और शांति का करें विकास : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[शांतिदूत आचार्यश्री ने लगभग दस किलोमीटर का किया मंगल विहार ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/101355/anger-is-the-enemy-of-man-develop-forgiveness-and-peace"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-04/terapanth-acharyashree-mahashrama.jpg" alt=""></a><br /><div>गढ़ी गांव, बीड (महाराष्ट्र) : महाराष्ट्र की विस्तारित यात्रा कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, मानवता के मसीहा, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना का कुशल नेतृत्व करते हुए अब औरंगाबाद की गतिमान हैं। यहां आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अक्षय तृतीया का महनीय कार्यक्रम समायोजित होना है। सोमवार को प्रातःकाल शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने हीरापुर गांव से मंगल प्रस्थान किया। सायंकालीन विहार कर हीरापुर में आचार्यश्री के पदार्पण के उपरान्त देर रात वर्षा भी हुई थी। इस कारण आज प्रातःकाल का मौसम कुछ ठंडा था, किन्तु उमस से भरा हुआ था। मार्ग के दोनों ओर दूर-दूर तक पवनचक्कियां नजर आ रही थीं। इस क्षेत्र में लगी पवनचक्कियों के माध्यम से बिजली उत्पादन किया जाता है। मार्ग के अनेक स्थानों पर श्रद्धा-भक्ति से युक्त ग्रामीण आचार्यश्री के दर्शन से लाभान्वित हो रहे थे। एक स्थान पर तो एक आदमी आचार्यश्री को प्रणाम करने के उपरान्त चाय की मनुहार की, किन्तु उसे जैन साधुचर्या की अवगति दी गई। लगभग दस किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री गढ़ी गांव में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में पधारे।</div>
<div> </div>
<div><img src="https://www.loktej.com/media/2024-04/k29042024-08.jpg" alt="k29042024-08"></img></div>
<div> </div>
<div>विद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित श्रद्धालु जनता को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आदमी के भीतर कषाय के रूप में वृत्तियां होती हैं। आठ प्रकार की आत्माएं बताई गई हैं। इनमें एक द्रव्य आत्मा होती है। यह आत्मा सिद्ध हों, मनुष्य हो अन्यथा कोई भी संसारी जीव हो, द्रव्य आत्मा सभी में होती है। एक और आत्मा होती है- उपयोग आत्मा। यह आत्मा भी सभी जीवों में होती है। द्रव्य और उपयोग आत्मा दोनों का साहचर्य है। दर्शन आत्मा भी सभी जीव में होती हैं। इस प्रकार द्रव्य, उपयोग और दर्शन आत्माएं हर जीव में उपलब्ध होती हैं। शेष पांच आत्माएं किसी जीव में होती हैं तो किसी जीव में नहीं भी होती हैं। कषाय, योग, ज्ञान, चारित्र व वीर्य कुछ जीवों में होती हैं तो कुछ आत्माएं नहीं भी होती हैं।</div>
<div> </div>
<div>आदमी के भीतर कषाय आत्मा कभी प्रकट रूप में तो कभी सुसुप्तावस्था में रहती है। इसमें एक कषाय है-गुस्सा। सामान्य आदमी में मानों कभी गुस्से का उफान आता है। उसमें आदमी मौखिक, शारीरिक हिंसा भी कर लेता है। गुस्से को आदमी की दुर्बलता भी कहा जाता है। यह स्वयं उस आदमी का भी नुक्सान करता है और दूसरे का भी नुक्सान करता है। आदमी को यह प्रयास करना चाहिए कि वह गुस्से को उपशांत रखने का प्रयास करना चाहिए। गुस्से रूपी कषाय को समाप्त करने के लिए आदमी के भीतर क्षमा भाव का विकास हो। कहा गया है कि जिस आदमी के पास क्षमा रूपी खड्ग हो तो दुर्जन उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। परिवार, समाज व राष्ट्र कहीं भी हो, गुस्सा काम का चीज नहीं होता। गुस्सा मनुष्य का शत्रु होता है। इसलिए आदमी को जितना संभव हो सके, शांति रखने की प्रयास करना चाहिए व गुस्से से यथोचित रूप में बचने का प्रयास करना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने जवाहर नवोदय विद्यालय परिवार को आशीष प्रदान करते हुए कहा कि आज यहां आना हुआ है। यहां भी जितना संभव हो सके, अच्छे संस्कारों का विकास होता रहे।  </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Apr 2024 19:40:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिनांक 3 जून 2023 जैन धर्मोस्तु मंगलम् का भव्य कार्यक्रम हुआ आयोजित </title>
                                    <description><![CDATA[<p>साध्वीश्री अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती नीलमजी सेठिया की अध्यक्षता में दिल्ली तेरापंथ महिला मंडल द्वारा शाह ऑडिटोरियम में जैन धर्मोस्तु मंगलम् का कार्यक्रम आयोजित हुआ।</p>
<p>साध्वीश्रीजी द्वारा नमस्कार महामंत्र से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।कन्या मंडल व तेमम की बहनों द्वारा आचार्य तुलसी शिक्षा परियोजना गीत का सामूहिक संगान किया गया।</p>
<p>साध्वीश्री अणिमाश्रीजी ने भगवान महावीर की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा अहिंसा संयम व तपोमय धर्म उत्कृष्ट मंगल है।जैन धर्म अहिंसा संयम व तप का पर्यायवाची है इसलिए हमारा जैन धर्म मंगलकारी है। आपने यह भी फरमाया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/92732/a-grand-program-of-jain-dharmastu-mangalam-was-organized-on"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-06/k10062023-03.jpg" alt=""></a><br /><p>साध्वीश्री अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती नीलमजी सेठिया की अध्यक्षता में दिल्ली तेरापंथ महिला मंडल द्वारा शाह ऑडिटोरियम में जैन धर्मोस्तु मंगलम् का कार्यक्रम आयोजित हुआ।</p>
<p>साध्वीश्रीजी द्वारा नमस्कार महामंत्र से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।कन्या मंडल व तेमम की बहनों द्वारा आचार्य तुलसी शिक्षा परियोजना गीत का सामूहिक संगान किया गया।</p>
<p>साध्वीश्री अणिमाश्रीजी ने भगवान महावीर की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा अहिंसा संयम व तपोमय धर्म उत्कृष्ट मंगल है।जैन धर्म अहिंसा संयम व तप का पर्यायवाची है इसलिए हमारा जैन धर्म मंगलकारी है। आपने यह भी फरमाया हमारे संस्कार धूमिल होते जा रहे हैं इसके लिए जरूरत है हम जैनत्व को समझें।शादी विवाह में बढ़ते आडंबर, प्रदर्शन और नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाने हेतु आह्वान किया एवं उपस्थित भाई बहनों को नशा न करने का संकल्प करवाया।</p>
<p>साध्वीश्री सुधा प्रभाजी ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम  तत्वज्ञान को समझे,जाने ओर वीतरागता की ओर कदम बढ़ाए। सभी साध्वीश्रीजी द्वारा जैन धर्मोस्तु मंगलम् पर स्वरचित गीतिका का सामूहिक संगान किया गया।</p>
<p>अभातेममं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती नीलम जी सेठिया ने जैन धर्मोस्तु मंगलम् A scientific approach of Jainism पर प्रकाश डालते हुए कहा प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी विषय विशेष में दक्षता हासिल करनी चाहिए।</p>
<p>अभातेममं चीफ ट्रस्टी श्रीमती पुष्पाजी बैंगानी ने कर्म की अवधारणा एवं जीवन व्यवहार को विस्तृत रूप से बताया।</p>
<p>चीफ गेस्ट विधानसभा अध्यक्ष श्रीमान रामनिवास जी गोयल ने कार्यक्रम में पधार कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।आपने मंडल के कार्यों की सराहना की।</p>
<p>मुख्य वक्ता उज्जैन से डॉ वीरबालाजी छाजेड़ ने जैन दर्शन के दर्पण में स्वयं को कैसे पहचाने विषय पर बहुत ही सुंदर ढंग से प्रकाश डाला। आपका परिचय श्रीमती सरोज सिपानी ने दिया।</p>
<p>महामंत्री श्रीमती मधुजी देराससिया ने जैन धर्म की वैज्ञानिकता के संदर्भ में विचार व्यक्त किए।</p>
<p>दिल्ली की क्षेत्रीय प्रभारी श्रीमती मंजूजी भूतोड़िया ने बताया कैसे क्यों जुड़े और जोड़ें तत्वज्ञान तेरापंथ दर्शन पाठ्यक्रम से।</p>
<p>सुश्री प्रियांशी हिरण ने आज की यंग जनरेशन को किस तरह से जैन धर्म से जुड़ाव हो पर प्रकाश डाला। इनका परिचय सुश्री अंकिता हीरावत द्वारा दिया गया। </p>
<p>कार्यक्रम में अभातेममं से दिल्ली प्रभारी बिमलाजी दुगड़(ट्रस्टी),सायरजी बैंगानी,नीतूजी पटावरी,सुमनजी नाहटा,अर्चनाजी भंडारी,दिल्ली प्रभारी मंजूजी भुतोड़या,सुनीताजी जैन,कुसुमजी बैंगानी,शिल्पाजी बैद, सोनिका जी बैंगानी,दिल्ली तेरापंथ महिला मंडल के परामर्शक,संरक्षक, कोषट्रस्टी, पूर्वाध्यक्ष,पदाधिकारी गण संयोजकाएं,दिल्ली सभा महामंत्री प्रमोदजी घोडावत एवं अनेक सभा संस्था से पधारे पदाधिकारी गण की गरिमामय उपस्थिति रही। कुल 400 बहनों-भाइयों की उपस्थिति रही।</p>
<p>कार्यक्रम के प्रायोजक रहे:<br />श्रीमती सुशीलाजी,श्रीमान कन्हैयालालजी पटावरी<br />श्रीमती उषाजी,श्रीमान जीतमलजी चोरड़िया<br />श्रीमती कनकजी,श्रीमान मन्नालालजी बैद<br />श्रीमती कमलाजी,श्रीमान फतेहचंदजी भंसाली</p>
<p>कार्यक्रम संयोजिका श्रीमती सरोज सिपानी(उपाध्यक्ष)एवं श्रीमती मंजू बांठिया(क्षेत्रीय संयोजिका पूर्वी दिल्ली)के अथक श्रम से कार्यक्रम सफल रहा।</p>
<p>कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती सुनीताजी जैन द्वारा एवं आभार ज्ञापन मंत्री श्रीमती यशा बोथरा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में भोजन की व्यवस्था थी।</p>
<p>मंत्री यशा बोथरा<br />जैन श्वेतांबर तेरापंथ महिला मंडल,दिल्ली</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jun 2023 15:03:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सूरत : अक्षय तृतीया महोत्सव, महातपस्वी महाश्रमण की सन्निधि में तपस्या का बना नवकीर्तिमान</title>
                                    <description><![CDATA[आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अक्षय ऊर्जा की प्राप्ति को पहुंचे गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91537/surat-akshaya-tritiya-festival-created-a-new-record-of-penance"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/d23042023-05.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया भर में अपने हीरे के व्यापार के लिए जाने जाना वाला गुजरात का शहर सूरत, अपनी साड़ियों और भी कपड़े के निर्माण के प्रसिद्ध सूरत ने आध्यात्मिक क्षेत्र में एक नवकीर्तिमान बनाया। जिसमें अक्षय तृतीया के दिन जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में 1151 तपस्वियों ने आराध्य के पात्र में ईक्षुरस का दान कर नवकीर्तिमान बनाया। तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में अपने आचार्यकाल में नित नवीन अध्याय जोड़ने वाले महातपस्वी महाश्रमण ने एक और नवीन अध्याय सृजित कर दिया। अक्षय तृतीया महोत्सव के अवसर पर गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने भी पूज्य सन्निधि में उपस्थित होकर आचार्यश्री से अक्षय आशीर्वाद प्राप्त किया। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>8.15 बजे से ही आरम्भ हो गया अक्षय तृतीया महोत्सव का कार्यक्रम  </strong></p>
<p style="text-align:justify;"> भगवान महावीर यूनिवर्सिटी परिसर में निर्मित भगवान महावीर इण्टरनेशनल स्कूल के सन्निकट अक्षय तृतीया महोत्सव के लिए बना विशाल महावीर समवसरण आचार्यश्री के आगमन से पूर्व ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति से भरा हुआ नजर आ रहा था। लोगों की विराट उपस्थिति तथा तपस्वियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए आचार्यश्री ने मुख्य कार्यक्रम का समय प्रातः 8.15 से प्रारम्भ होना निर्धारित किया। रविवार को निर्धारित समय पर युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी मंचासीन हुए और मंगल महामंत्रोच्चार करते हुए अक्षय तृतीया महोत्सव का शुभारम्भ किया। आचार्यश्री के महामंत्रोच्चार के उपरान्त तेरापंथ महिला मण्डल-सूरत ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री महाश्रमण अक्षय तृतीया प्रवास समिति-सूरत के अध्यक्ष संजय सुराणा ने अपने भावसुमन अर्पित किए। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.loktej.com/media/2023-04/d23042023-05.jpg" alt="d23042023-05"></img></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>साध्वीप्रमुखाजी, मुख्यमुनिश्री व साध्वीवर्याजी ने भी जनमेदिनी को किया उद्बोधित  </strong></p>
<p style="text-align:justify;"> अक्षय तृतीया महोत्सव के अवसर पर साध्वीवर्या साध्वी संबुद्धयशाजी ने लोगों को उद्बोधित करते हुए स्वरचित गीत का संगान किया। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने भी जनता को अभिप्रेरित करते हुए अक्षय तृतीया के महत्त्व पर प्रकाश डाला। मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने अक्षय तृतीया और भगवान ऋषभ के जीवनवृत्त का वर्णन करते हुए आचार्यश्री द्वारा रचित गीत का संगान किया। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह चार मार्ग मोक्ष प्राप्ति के लिए हैं</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अक्षय तृतीया के अवसर पर महातपस्वी महाश्रमण के श्रीमुख से अक्षय आशीष की वृष्टि  अक्षय तृतीया महोत्सव उपस्थित विराट जनमेदिनी व वर्षीतप के तपस्वियों को महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अक्षय आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि आदमी ज्ञान से भावों को जानता है, दर्शन से श्रद्धा करता है, चारित्र से निग्रह करता है और तप से परिशोधन करता है। यह चार मार्ग मोक्ष प्राप्ति के लिए हैं। आज अक्षय तृतीया का अवसर और एक तपस्या के सानंद सम्पन्नता का दिन भी है। परम तपस्वी, परमात्मा स्वरूप भगवान ऋषभ की तपस्या का आंशिक अनुकरण तप रूप की सम्पन्नता का दिन है। भगवान ऋषभ इस वर्तमान अवसर्पिणी के आदि तीर्थंकर हुए। तीर्थंकर बनने से पूर्व उन्होंने लौकिक सेवा के कार्य भी किए। सांसारिक अवस्था में रहते हुए उन्होंने अषि, मसि और कृषि की शिक्षा भी लोगों को प्रदान की। लौकिक अनुकंपा और कर्त्तव्य निर्वहन के लिए उन्होंने वह कार्य किया। समाज को सही दिशा दिखाने के लिए समाज में नेता का होना आवश्यक होता है।  </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भगवान ऋषभ समाज के नेता और राजनेता थे</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भगवान ऋषभ समाज के नेता और राजनेता थे। वे लौकिक जीवन में उच्च थे और उन्होंने जब लौकिक जीवन का त्याग कर सन्यास ग्रहण किया और धर्म के अधिनेता बन गए। उनके सन्यास ग्रहण करते ही उनकी तपस्या प्रारम्भ हो गई। साधिक एक वर्ष बाद उन्हें श्रेयांसकुमार ने ईक्षुरस प्रदान कर आज के ही दिन पारणा कराया। </p>
<p style="text-align:justify;"> <strong>आदमी को अपनी वाणी में ईक्षुरस जैसी मिठास रखने का प्रयास करना चाहिए</strong></p>
<p style="text-align:justify;">आज का दिन दान दिवस के रूप में भी प्रतिष्ठित है। आदमी को अपनी वाणी में ईक्षुरस जैसी मिठास रखने का प्रयास करना चाहिए। कितने-कितने लोगों ने वर्षीतप किया है अथवा बाहर में भी किए होंगे, वे सभी अनुमोदना के पात्र हैं। गृहस्थों के साथ विहार यात्रा करने चारित्रात्माएं भी वर्षीतप तप कर लेते हैं और गृहस्थ और चारित्रात्माएं तो वर्षीतप के दौरान लम्बी तपस्याएं भी कर लेते हैं, वह विशेष बात है। साधना के क्षेत्र में तपस्या का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। वर्षीतप के दौरान गृहस्थों के लिए अनेक पालनीय नियम भी बने हैं। उन नियमों के साथ तपस्या कर गृहस्थ और अच्छी गति कर सकते हैं। सभी के भीतर अक्षय आनंद और अक्षय शक्ति का संचार होता रहे। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रद्धेय मंत्री मुनिश्री सुमेरमलजी स्वामी (लाडनूं) को आचार्यश्री ने दी श्रद्धांजलि</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अपने दीक्षा प्रदाता श्रद्धेय मंत्रीमुनिश्री सुमेरमलजी स्वामी (लाडनूं) के चौथे महाप्रयाण दिवस पर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि आज से चार वर्ष पूर्व हमारे दीक्षा प्रदाता मंत्री मुनिश्री का जयपुर में महाप्रयाण हो गया था। मैं उनको सश्रद्धा श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चलते कार्यक्रम में पहुंचे गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी, प्राप्त किया आशीर्वाद  </strong></p>
<p style="text-align:justify;"> कार्यक्रम के दौरान ही गुजरात राज्य के गृहमंत्री श्री हर्ष संघवी भी आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में उपस्थित हुए। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन करते हुए श्रद्धा के साथ पट्ट के नीचे विराजे तो आचार्यश्री ने उन्हें आशीष प्रदान करते हुए कहा कि राजनीति में शुद्धि रखने का प्रयास हो। भगवान ऋषभ के चारित्र से राजनीति को भी प्रेरणा प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आपश्री से प्राप्त होती रहे मंगल प्रेरणा : गृहमंत्री श्री हर्ष संघवी </strong></p>
<p style="text-align:justify;"> गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने आचार्यश्री के दर्शन और आशीष प्राप्त करने के उपरान्त उन्होंने ने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि आज सूरत में एक नए इतिहास का सृजन हो रहा है। परम पूजनीय आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में देश भर से तपस्वी आए हैं। सूरत को ऐसा दृश्य दिखाने वाले आचार्यश्री के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूं। आप से प्राप्त प्रेरणा हमारे जीवन में भी उतरें, ऐसा आशीर्वाद प्रदान करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.loktej.com/media/2023-04/d23042023-041.jpg" alt="d23042023-04"></img></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>घंटों चला ईक्षुरस के दान का क्रम </strong></p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में अब तपस्वियों द्वारा ईक्षुरस का दान देने का क्रम आरम्भ हुआ, जो कई घंटों तक चलता रहा। सभी उपस्थित 1151 तपस्वियों ने आचार्यश्री के पात्र में ईक्षुरस का दान देकर आचार्यश्री से आशीष प्राप्त कर पारणा किया। कार्यक्रम के अंत आगामी वर्ष 2024 के अक्षय तृतीया महोत्सव जो औरंगाबाद-महाराष्ट्र में आयोजित होगा, उसके बैनर का लोकार्पण अक्षय तृतीया व्यवस्था समिति-औरंगाबाद द्वारा किया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रवचन पण्डाल स्थल के ऑनर मनहर शंकर भाई ने आचार्यश्री के समक्ष अपने भावों को समर्पित कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यश्री के मंगलपाठ से इस भव्य आयोजन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सूरत में सृजित हुआ तपस्या का नवइतिहास</strong></p>
<p style="text-align:justify;">तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में सूरत में तपस्या का एक नया अध्याय कीर्तिधर आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में बना। जिसे हजारों लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से निहारा तो लाखों लोगों ने पारस चैनल, और तेरापंथ के युट्यूब चैनल तथा अन्य माध्यमों से भी देखा। इस तपस्या में जहां 12 वर्ष से 25 वर्ष के 32 तपस्वी थे तो 80-95 वर्ष की वयोवृद्ध अवस्था को प्राप्त 24 तपस्वी भी उपस्थित थे। इनमें 18 तपस्वी ऐसे भी थे जो अपने जीवनकाल का 25 वां वर्षीतप सम्पन्न किया। अपने जीवन में 48 वां वर्षीतप सम्पन्न करने वाले भी दो तपस्वी उपस्थित थे। 91 जोड़े पति-पत्नी भी इस तपस्या के संभागी थे। </p>
<p style="text-align:justify;">आचार्यश्री की मंगल सन्निधि गुरुकुलवास में मुनि राजकुमारजी, मुनि कोमलकुमारजी, मुनि वर्धमानकुमारजी, मुनि पुनीतकुमारजी, मुनि निकुंजकुमारजी, साध्वी कल्पयशाजी, साध्वी अक्षयप्रभाजी, साध्वी रुचिरप्रभाजी व समणी स्वर्णप्रज्ञाजी ने अपने-अपने वर्षीतप सम्पन्न किए।  </p>
<p style="text-align:justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/LShwQTcwjmo" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/91537/surat-akshaya-tritiya-festival-created-a-new-record-of-penance</link>
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                <pubDate>Sun, 23 Apr 2023 21:39:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल का C20 एवं G20 में चयन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:left;">अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल पिछले 50 वर्षों से आध्यात्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सशक्त NGO है।  वर्तमान में तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के आध्यात्मिक निर्देशन में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल प्रगतिशील है।  अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल देशव्यापी 60,000 महिला सदस्यों व 450 शाखाओं वाला NGO है।  अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल सजगता से प्रत्येक कार्य को निष्पत्तिजनक परिणाम तक पहुंचाने में सदैव प्रयत्नशील है।  प्रत्येक कार्य को बुद्धिशीलता एवं गहन चिन्तन के बाद प्रस्तावित किया जाता है और देश भर में फैली शाखाओं द्वारा समर्पित भाव से उन कार्यों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89514/selection-of-all-india-terapanth-mahila-mandal-in-c20-and"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/06022023-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;">अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल पिछले 50 वर्षों से आध्यात्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सशक्त NGO है।  वर्तमान में तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के आध्यात्मिक निर्देशन में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल प्रगतिशील है।  अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल देशव्यापी 60,000 महिला सदस्यों व 450 शाखाओं वाला NGO है।  अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल सजगता से प्रत्येक कार्य को निष्पत्तिजनक परिणाम तक पहुंचाने में सदैव प्रयत्नशील है।  प्रत्येक कार्य को बुद्धिशीलता एवं गहन चिन्तन के बाद प्रस्तावित किया जाता है और देश भर में फैली शाखाओं द्वारा समर्पित भाव से उन कार्यों को अंजाम दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:left;">दिनांक 29 जनवरी 2023 रविवार को तेरापंथ भवन गांधीनगर में आयोजित #LifeStyleforEnvironment समाज-शाला में भारत सरकार द्वारा मनोनीत ‘रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी’ द्वारा अधिकृत ‘सम्पूर्णा’ की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती शोभा विजेन्द्र गुप्ता (दिल्ली से समागत) द्वारा भारत सरकार के महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम Civil-20 India 2023 - You are the Light और G20 भारत India, वसुधैव कुटुम्बकम् One Earth - One Family - One Future में चयनित होने की घोषणा करते हुए अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल को C20 का प्रतीक Flag एवं Logo प्रदान किया, जिसे अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की पूर्व महामंत्री श्रीमती वीणा बैद एवं परामर्शक श्रीमती लता जैन ने स्वीकार किया।  </p>
<p style="text-align:left;">श्रीमती शोभा विजेन्द्र गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि C20 और G20 में चयनित होना किसी भी संस्था के लिए अत्यन्त गौरव भरी उपलब्धि है एवं इस C20 द्वारा निर्धारित सामाजिक सरोकार के विभिन्न विषयों पर काम करने हेतु अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल पूर्णतः सक्षम एवं समर्पित संस्था है। भारत सरकार के अभियान में इस चयन से अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के कदमों में अधिक तीव्रता आएगी और और उसे और अधिक शक्तिशाली बनाएगा।  इस विश्वास के साथ उन्होंने संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती नीलम सेठिया तथा राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती सुमन नाहटा (दिल्ली) को मंच से उत्साहपूर्ण बधाई प्रेषित की।</p>
<p style="text-align:left;">इस अवसर पर धारवाड़ से Director of Water and Land Management Development Institute श्री राजेन्द्र पोद्दार एवं दिल्ली से समागत Member -World Water Council of France श्री दीपक पर्वतियार ने प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित होकर समारोह की गरिमा बढ़ाई और अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए उपस्थित जनमेदिनी को जल संरक्षण पर अपने महत्त्वपूर्ण विचारों से अवगत कराया। #LifeStyleforEnvironment समाज-शाला हेतु देश भर के विशिष्ट जन एवं सम्पूर्ण देश की शाखा मंडल से बधाइयां प्राप्त हुई।  </p>
<p style="text-align:left;">उ20 के अन्तर्गत प्रस्तावित विषय जैसे Gender Equality and Disabilty, Lifestyle for Environment, Human  Rights as Human Values, Vasudhaiva Kutumbakam जैसे गहन मुद्दों पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल सघन कार्य करेगा और देश भर की शाखाओं से जुड़ा प्रत्येक सदस्य इन कार्यों को अंजाम देने हेतु कटिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Feb 2023 12:27:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अभातेयुप जेटीएन है तेरापंथ धर्मसंघ का अधिकृत सोशल मीडिया नेटवर्क : आचार्य श्री महाश्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[जैन तेरापंथ धर्मसंघ की गतिविधियों के प्रचार प्रसार के लिए अधिकृत सोशल मीडिया उपक्रम जेटीएन का षष्टम राष्ट्रीय अधिवेशन आचार्य श्री महाश्रमण के सानिध्य में जोधपुर में हुआ आयोजित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88602/abhateyup-jtn-is-the-official-social-media-network-of-terapanth"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/story-02012023-b16.jpg" alt=""></a><br /><p>अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के सोशियल मीडिया प्रचार प्रसार उपक्रम जेटीएन का षष्ठम प्रतिनिधि सम्मेलन आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में आयोजित हुआ।अधिवेशन में आचार्य महाश्रमण ने प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया की जेटीएन तेरापंथ धर्मसंघ का सोशल मीडिया में प्रचार प्रसार करने वाला कल्याण परिषद से मान्यता प्राप्त, विश्वसनीय एवं अधिकृत उपक्रम है, उन्होंने प्रवचन में फरमाया की ऐसा प्रतीत होता है की जेटीएन से निकली सामग्री प्रमाणिक होती है।</p>
<p>अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज डागा की अध्यक्षता में आयोजित अधिवेशन में उपाध्यक्ष जयेश मेहता, महामंत्री पवन मांडोत, संगठन मंत्री श्रेयांश कोठारी, जेटीएन कार्यकारी संपादक अभिषेक पोखरना ने देश भर से उपस्थित प्रतिनिधियों का स्वागत जेटीएन पिन एवं अधिवेशन किट देकर किया। द्विदिवसीय अधिवेशन में वर्षभर के कार्यों के बार में जानकारी दी गई एवं भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई।</p>
<p>राजीव चोरड़िया ने बताया कि सूरत से संजय वेदमेहता, पवन फुलफगर, संजय बोथरा एवं राहुल संकलेचा ने इस अधिवेशन में भाग लिया। संजय वेदमेहता को लाइफ टाइम अचिवमेंट अवार्ड से, पवन फुलफगर को एडिटिंग टीम में सेवाओं के लिए एवं जेटीएन के प्रतिवेदन निर्माण  एवं वर्ष भर विशिष्ट सेवाओं हेतु प्रशस्ति पत्र से तथा संजय बोथरा एवं राहुल संकलेचा का विशिष्ट सेवाओं के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया ।</p>
<p>पहले दिन आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में मंचीय कार्यक्रम, पर्यवेक्षक मुनि योगेश कुमार एवं मुनि नय कुमार द्वारा सभी प्रतिनिधियों को उत्साहवर्धक प्रेरणा, डिजिटल मार्केटिंग पर राशिका द्वारा प्रशिक्षण एवं भक्ति संध्या में प्रसिद्द गायक पंकज भंडारी ने भक्ति गीतों से लोगो को आनंदित किया ।</p>
<p>दूसरे दिन भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर चेतन जैन, प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर नीलेश संचेती ने प्रतिनिधियों को "कैसे बने विशिष्ट कार्यकर्ता" पर वक्तव्य एवं नरेश जांगिड़ ने ग्राफ़िक डिज़ाइन पर प्रशिक्षण दिया।</p>
<p>इस अधिवेशन में देश भर के 70 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनका प्रशस्ति पत्र से सम्मान किया गया। जेटीएन विशेषकर तेरापंथ धर्मसंघ के केंद्रीय सूचनाओं के साथ साथ देश विदेश में पदयात्रा करने वाले साधु साध्वियो ,समणियों के विशेष प्रवचनों , विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित संघीय कार्यक्रमों की ऑनलाइन माध्यम से प्रचार प्रसार करता है। यह तेरापंथ धर्मसंघ का अधिकृत एवं विश्वसनीय सोशल मीडिया उपक्रम है।</p>
<p>अधिवेशन का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद सरदारपुरा ने किया, परिषद के अध्यक्ष महावीर चोपड़ा, मंत्री निर्मल छल्लाणी, संयोजक नरेंद्र सेठिया के नेतृत्व में कई युवक अधिवेशन को सफल बनाने में रात दिन जुटे रहे। अधिवेशन में विभिन्न सत्रो का संचालन संजय वैदमेहता,पवन फूलफगर, नोरतन ओसवाल, जयंत सेठिया, मीनाक्षी सुराणा, करुणा कोठारी, मोनिका चोरड़िया ने किया।</p>
<p>(यह आलेख प्राइमेक्स न्यूज नेटवर्क द्वारा प्रदान किया गया है। Loktej.com इस आलेख की सामग्री के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होगा।)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jan 2023 21:33:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जोधपुर पर महाश्रमण की महर, धवल सेना संग पहुंचे अमर नगर</title>
                                    <description><![CDATA[अनेकानेक न्यायविज्ञों ने भी आचार्यश्री के किए दर्शन, प्राप्त किया मार्गदर्शन ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88277/amar-nagar-reached-jodhpur-with-mahar-dhaval-army-of-mahashraman"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/23122022-04.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>- 3 कि.मी. के विहार में लगा तीन घण्टे से भी अधिक का समय  </strong></p>
<p><strong>- जन-जन के श्रद्धाभावों को स्वीकार करने में 40 जगहों पर थामे चरण, सुनाया मंगलपाठ </strong></p>
<p><strong>ज्ञान हो जाए आचरणगत तो जीवन बने सुफल: युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण </strong><br /> <br />23.12.2022, शुक्रवार, अमर नगर, जोधपुर (राजस्थान) : ऐतिहासिक सूर्यनगरी और नीलीनगरी के रूप में विख्यात जोधपुर नगर पर लगातार तीसरे तीन भी जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की कृपा बरसती रही और जोधपुरवासी इस कृपा से निहाल होते रहे। जोधपुर को कण-कण को अपनी चरणरज से पावन बना रहे मानवता के मसीहा आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शुक्रवार को सरदारपुरा से प्रातःकाल अगले गंतव्य की ओर गतिमान हुए तो आचार्यश्री के साथ भक्तिभावों से ओतप्रोत श्रद्धालुओं का हुजूम भी निकल पड़ा। सूर्योदय के साथ ही लोगों को आध्यात्मिक आलोक बांटने निकले आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं के श्रद्धा भावों को स्वीकार करते हुए लगभग चालीस जगहों पर अपने चरणों को थामकर श्रद्धालुओं को मंगलपाठ सुनाने के साथ ही मंगल आशीष भी किया।</p>
<p>आचार्यश्री की ऐसी कृपा पाकर जन-जन का मन हर्षविभोर बना हुआ था। सरदारपुरा से अमर नगर की कुल दूरी लगभग तीन किलोमीटर थी, लेकिन विशाल जुलूस और जनता की भावनाओं को स्वीकार करते हुए आचार्यश्री को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने में लगभग तीन घण्टे से भी ज्यादा का समय लग गया। मार्ग में अनेक पूर्व और वर्तमान न्यायविज्ञ लोगों को भी आचार्यश्री से पावन पाथेय प्राप्त हुआ। आचार्यश्री अमरनगर में स्थित जीरावला परिवार के निवास स्थान में पधारे। </p>
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<p>प्रवास स्थल के निकट बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित विशाल जनमेदिनी को साध्वीप्रमुखाजी ने भी उद्बोधित करते हुए गुरु के चरणरज की महिमा का वर्णन किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि जीवन में ज्ञान का परम महत्त्व है तो शुद्ध आचार का भी बहुत महत्त्व है। ज्ञान की वास्तविक सार्थकता तब होती है, जब वह जीवन में उतर जाए, आचरणगत हो जाए। ज्ञान और आचार दोनों तट हैं। दोनों को एक साथ मिलाने में दर्शन पुल की भूमिका निभाता है। ज्ञान होने के बाद दर्शन के माध्यम से ज्ञान को आचरण में उतार लेता है तो ज्ञान सार्थक हो जाता है और आदमी का जीवन सुफल बन सकता है। मान लिया जाए कि ज्ञान हो गया कि अहिंसा धर्म है, किन्तु अहिंसात्मक आचरण नहीं हुआ तो क्या लाभ। आदमी का दर्शन सम्यक् होता है तो ज्ञान सुगमता से आचरणगत हो सकता है। सिद्धांत के प्रति श्रद्धा, अपने आराध्य के प्रति सम्पूर्ण समर्पण हो तो अच्छी बात हो सकती है। </p>
<p>कार्यक्रम में तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सरिता कांकरिया, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री महावीर चौधरी, तेरापंथी सभा के मंत्री श्री महावीर चौपड़ा, श्री सुरेश जीरावला व तेरापंथ किशोर मण्डल के संयोजक श्री ऋषभ श्यामसुखा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। तेरापंथी समाज, टी.पी.एफ. के सदस्य, तेरापंथ महिला मण्डल व जीरावला परिवार की महिलाएं तथा श्री कवि जैन ने पृथक्-पृथक् स्वागत गीत का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल की सदस्याओं ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। </p>
<p>जोधपुर के सूरसागर क्षेत्र की विधायक श्रीमती सूर्यकान्ता व्यास ने भी आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि मैं अपने क्षेत्र की जनता की ओर से परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी का हार्दिक स्वागत करती हूं। आपकी कृपा सैदव लोगों को प्राप्त होती रहे। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 23 Dec 2022 21:53:37 +0530</pubDate>
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