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                <title>Online Shopping - Loktej</title>
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                <description>Online Shopping RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>त्योहारी सत्र में शहरी भारत में ऑनलाइन खरीदारी में 115 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) लोकल सर्किल्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल त्योहारों पर खर्च के लिए ई-कॉमर्स और ऑनलाइन मंच को अपने पसंदीदा माध्यम के रूप में चुनने वाले शहरी भारतीय परिवारों की संख्या बढ़ने की संभावना है।</p>
<p>साथ ही, हाल ही में जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने से भी खरीदारों के बीच सकारात्मक धारणा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>इस रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले शहरी परिवारों की संख्या में 115 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।</p>
<p>वहीं, एक बड़ा वर्ग अभी भी त्योहारों के दौरान ऑफलाइन खरीदारी को पसंद करता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142942/rep-the-possibility-of-115-percent-increase-in-online-purchases"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/1366_e-commerce-online-shopping-business-credit-card.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) लोकल सर्किल्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल त्योहारों पर खर्च के लिए ई-कॉमर्स और ऑनलाइन मंच को अपने पसंदीदा माध्यम के रूप में चुनने वाले शहरी भारतीय परिवारों की संख्या बढ़ने की संभावना है।</p>
<p>साथ ही, हाल ही में जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने से भी खरीदारों के बीच सकारात्मक धारणा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>इस रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले शहरी परिवारों की संख्या में 115 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।</p>
<p>वहीं, एक बड़ा वर्ग अभी भी त्योहारों के दौरान ऑफलाइन खरीदारी को पसंद करता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 37 प्रतिशत शहरी भारतीय परिवार इस त्योहारी सीजन में 20,000 रुपये या उससे अधिक खर्च करने की योजना बना रहे हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के त्योहारी सीजन में कुल खर्च 2.19 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘सरकार द्वारा जीएसटी सुधारों की घोषणा के बाद एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और टीवी जैसे व्हाइट गुड्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में कमी आई है, जिससे शहरी भारतीय परिवार खरीदारी के लिए ई-कॉमर्स और ऑनलाइन मंच को ज्यादा पसंद कर सकते हैं।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Sep 2025 19:13:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक-तिहाई डिजिटल भुगतान क्रेडिट कार्ड, मासिक किस्तों के जरिये हुएः रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) वर्ष 2024 में सभी घरेलू डिजिटल भुगतान लेनदेन में से करीब एक-तिहाई लेनदेन क्रेडिट कार्ड या ब्याज वाली मासिक किस्तों के जरिये किए गए थे। एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है।</p>
<p>डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनी फाई कॉमर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल भुगतान में यूपीआई एक परिवर्तनकारी उत्पाद बनकर उभरा है और कुल लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी 65 प्रतिशत हो चुकी है।</p>
<p>रिपोर्ट कहती है कि छोटे और मध्यम मूल्य वाले लेनदेन पर यूपीआई हावी है जबकि क्रेडिट कार्ड और ईएमआई (समान मासिक किस्त) का उपयोग बड़ी खरीदारी के लिए तेजी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140051/one-third-digital-payment-credit-cards-through-monthly-installments-report"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/7672_ecommerce-online-payment-credit-debit-card-shopping.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) वर्ष 2024 में सभी घरेलू डिजिटल भुगतान लेनदेन में से करीब एक-तिहाई लेनदेन क्रेडिट कार्ड या ब्याज वाली मासिक किस्तों के जरिये किए गए थे। एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है।</p>
<p>डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनी फाई कॉमर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल भुगतान में यूपीआई एक परिवर्तनकारी उत्पाद बनकर उभरा है और कुल लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी 65 प्रतिशत हो चुकी है।</p>
<p>रिपोर्ट कहती है कि छोटे और मध्यम मूल्य वाले लेनदेन पर यूपीआई हावी है जबकि क्रेडिट कार्ड और ईएमआई (समान मासिक किस्त) का उपयोग बड़ी खरीदारी के लिए तेजी से किया जा रहा है।</p>
<p>इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वाहन सहायक क्षेत्रों में डिजिटल ऋण लेने की दर में मजबूत वृद्धि देखी गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी खरीदारी, स्कूल में दाखिले और मौसमी रुझान क्रेडिट के इस्तेमाल में तेजी लाते हैं। इससे पता चलता है कि उपभोक्ता अधिक खर्च वाले समय में अल्पकालिक ऋण सुविधा का सहारा लेना पसंद करते हैं।</p>
<p>यह रिपोर्ट देश भर के 20,000 से अधिक दुकानदारों से ऑनलाइन भुगतान के बारे में जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।</p>
<p>फाई कॉमर्स के सह-संस्थापक राजेश लोंढे ने कहा कि यूपीआई और लचीले ऋण विकल्पों का इस्तेमाल आम होते जाने के साथ भविष्य उन लोगों का है जो समावेशी विकास और वित्तीय मजबूती को बढ़ावा देने के लिए इन साधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करते हैं।</p>
<p>मौजूदा समय में उपभोक्ता एकमुश्त भुगतान करने के बजाय अपने खर्च को वित्तपोषित करना पसंद करते हैं। यह खासकर शिक्षा (10 प्रतिशत), स्वास्थ्य सेवा (15 प्रतिशत) और वाहन सहायक व्यय (15 प्रतिशत) में स्पष्ट है, जहां बड़ी खरीदारी तेजी से ईएमआई और संरचित क्रेडिट विकल्पों के जरिये की जाती है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल की फीस, इलाज पर खर्च और बड़ी ऑनलाइन खरीद के लिए ईएमआई योजनाओं पर निर्भरता ग्राहकों के वित्तीय व्यवहार में बदलाव को दर्शाती है। अब वे चरणबद्ध ढंग से खर्च और उसके प्रबंधन पर ध्यान देते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 20:55:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फटाफट समान पहुंचाने वाली इकाइयों का बढ़ रहा प्रभाव, ई-किराना ऑर्डर में हासिल किया दो-तिहाई हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) देश में त्वरित वाणिज्य (क्विक कॉमर्स) यानी कुछ ही मिनटों में सामान पहुंचाने की सुविधा देने वाली इकाइयां देश में उपभोक्ताओं की खरीदारी के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही हैं। बीते वर्ष इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सभी किराना ऑर्डर में से दो-तिहाई से अधिक और ‘ई-रिटेल’ खर्च का दसवां हिस्सा त्वरित वाणिज्य से जुड़ी इकाइयों के मंच पर हुआ। फ्लिपकॉर्ट और बेन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक फटाफट सामान पहुंचाने वाली इन इकाइयों में सालाना 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139635/increasing-impact-of-units-of-instant-uniforms-achieved-two-thirds-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/online-food-delivery-zomato-swiggy-zepto-quick-q-commerce.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) देश में त्वरित वाणिज्य (क्विक कॉमर्स) यानी कुछ ही मिनटों में सामान पहुंचाने की सुविधा देने वाली इकाइयां देश में उपभोक्ताओं की खरीदारी के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही हैं। बीते वर्ष इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सभी किराना ऑर्डर में से दो-तिहाई से अधिक और ‘ई-रिटेल’ खर्च का दसवां हिस्सा त्वरित वाणिज्य से जुड़ी इकाइयों के मंच पर हुआ। फ्लिपकॉर्ट और बेन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक फटाफट सामान पहुंचाने वाली इन इकाइयों में सालाना 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है। इसकी वृद्धि को विभिन्न श्रेणियों, भौगोलिक क्षेत्रों और ग्राहक खंड में विस्तार से गति मिलेगी।</p>
<p>इसमें कहा गया, ‘‘फटाफट सामान पहुंचाने (30 मिनट से कम समय में डिलिवरी) की सुविधा का शुरू होना पिछले दो वर्षों में देश के ई-रिटेल बाजार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रहा है।’’</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, बीते वर्ष, सभी ई-किराना ऑर्डर में से दो-तिहाई से अधिक और ई-रिटेल खर्च का दसवां हिस्सा इन मंचों पर हुआ।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि देश की फटाफट सामान पहुंचाने वाली वाणिज्य इकाइयां वैश्विक रुझानों को पीछे छोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ी हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इन इकाइयों में तेज वृद्धि का कारण उच्च जनसंख्या घनत्व और कम किराये वाले ‘डार्क स्टोर’ यानी पूरी तरह से ऑनलाइन ऑर्डर को पूरा करने वाले खुदरा दुकानों के नेटवर्क तक करीबी पहुंच शामिल हैं।</p>
<p>इस क्षेत्र ने कई कंपनियों को आकर्षित किया है, जिसने उपभोक्ता मूल्य प्रस्ताव को समृद्ध किया है।</p>
<p>वैसे फटाफट सामान पहुंचाने की सुविधा की शुरुआत किराने के सामान से हुई थी। लेकिन अब इसके सकल वस्तु मूल्य या जीएमवी का 15 से 20 प्रतिशत सामान्य वस्तुएं, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और परिधान जैसी श्रेणियों से आता है।</p>
<p>महानगरों के अलावा छोटे शहरों में विस्तार ने भी वृद्धि को गति दी है। हालांकि, अब भी जीएमवी का बड़ा हिस्सा शीर्ष छह महानगरों से आता है।</p>
<p>रिपोर्ट में सुझाव दिया गया, ‘‘हालांकि, लाभदायक विकास को बनाए रखने के लिए, कंपनियों को प्रमुख महानगरों के अलावा अन्य बाजारों के लिए भी व्यापार मॉडल को अपनाना चाहिए, बढ़ती प्रतिस्पर्धा का प्रबंधन करना चाहिए और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अनुकूलतम करना चाहिए...।’’</p>
<p>भारत में 2025 में ऑनलाइन खरीदारी के रुख पर फ्लिपकार्ट-बेन की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश पिछले एक दशक में खुदरा क्षेत्र में बड़ा केंद्र बन गया है और 2024 में वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा खुदरा बाजार बन गया है।</p>
<p>भारतीय ई-रिटेल बाजार का सकल वस्तु मूल्य लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके साथ यह ऑनलाइन खरीदारी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।</p>
<p>हालांकि, निजी खपत में कमी से 2024 में ई-रिटेल क्षेत्र में वृद्धि 20 प्रतिशत के ऐतिहासिक उच्चस्तर से 10 से 12 प्रतिशत पर आ गयी। लेकिन 2025 में त्योहारों के दौरान स्थिति बदलने की उम्मीद है।</p>
<p>एक अनुमान के अनुसार, ई-रिटेल खंड अगले छह साल में 18 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 170 से 190 अरब डॉलर जीएमवी पर पहुंच सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Mar 2025 19:30:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजपाल यादव, ईस्टर्न पे के ब्रॉन्ड एम्बेसडर बने, लोगों से की जुड़ने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हिंदुस्तान में मशहूर कॉमेडियन बॉलीवुड फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ईस्टर्न पे डिजिटल प्लेटफॉर्म के ब्रांड एम्बेसडर बनाये गए। इस ईस्टर्न पे के बारे में बात करते हुए ईस्टर्न हाईलैंड्स ग्रुप के फाउंडर व चेयरमैन रूपेश आर पांडेय ने बताया कि अब आप ईस्टर्न पे से भी डिजिटल लेन देन कर सकते हैं। आप कहीं भी पैसा भेज सकते हैं, किसी भी जगह से शॉपिंग कर सकते हैं। किसी भी साइट से टिकट बुकिंग कर सकते हैं। यानी एक और यूपीआई आईडी का विकल्प आपके पास आ गया है ।</p>
<p>यह ईस्टर्न पे ठीक उसी तरह से काम करता है जैसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91636/rajpal-yadav-became-the-brand-ambassador-of-eastern-pay-appealed"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/k27042023-04.jpg" alt=""></a><br /><p>हिंदुस्तान में मशहूर कॉमेडियन बॉलीवुड फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ईस्टर्न पे डिजिटल प्लेटफॉर्म के ब्रांड एम्बेसडर बनाये गए। इस ईस्टर्न पे के बारे में बात करते हुए ईस्टर्न हाईलैंड्स ग्रुप के फाउंडर व चेयरमैन रूपेश आर पांडेय ने बताया कि अब आप ईस्टर्न पे से भी डिजिटल लेन देन कर सकते हैं। आप कहीं भी पैसा भेज सकते हैं, किसी भी जगह से शॉपिंग कर सकते हैं। किसी भी साइट से टिकट बुकिंग कर सकते हैं। यानी एक और यूपीआई आईडी का विकल्प आपके पास आ गया है ।</p>
<p>यह ईस्टर्न पे ठीक उसी तरह से काम करता है जैसे गूगल पे, फोन पे पेटीएम और भीम ऐप काम करते हैं। अगर कोई भी नया कस्टमर ईस्टर्न पे से जुड़ता है वो इस समय उसे शानदार रिवॉर्ड मिलेंगे। कम्पनी अपने ग्राहकों की सुविधाओं का बेहद खास ख्याल रखेगी। कम्पनी ने राजपाल यादव को अपना ब्रांड अम्बेस्डर बनाया है।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2023-04/k27042023-04.jpg" alt="k27042023-04"></img><br /><br />मशहूर कॉमेडियन व अभिनेता राजपाल यादव ने बताया कि ईस्टर्न पे बेहद शानदार डिजिटल पे प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़कर उन्हें बेहद अच्छा लगा कि एक शानदार इंसान जो पहले से ही बैंकिंग और फाइनेंशियल मार्किट को रिप्रेजेंट कर रहा है, वह यदि इस तरह के डिजिटल ई पे जैसे प्लेटफॉर्म को लेकर आते हैं तो इसका इम्पैक्ट लोगों पर बहुत अनुकूल पड़ेगा। राजपाल यादव ने आम लोगों से भी इस ई पे प्लेटफॉर्म ईस्टर्न पे को डाउनलोड करने और इस्तेमाल करने की अपील की।</p>
<p>राजपाल यादव ने बताया की इस ऐड को निर्देशक राजीव श्रीवास्तव ने निर्देशित किया है जिन्होंने कई ऐड को पहले ही सुपर हिट कर चुके है। छायांकन अशोक मेहता, प्रोडक्शन चंद्र भूषण और प्रचारक संजय भूषण पटियाला हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 12:33:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑटोरिक्शा की ऑनलाइन बुकिंग पर केन्द्र की अधिसूचना को हाई कोर्ट ने रखा बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 12 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने ओला, उबर और अन्य माध्यमों से ऑटोरिक्शा की बुकिंग पर जीएसटी लगाने के केंद्र सरकार की अधिसूचना को बरकरार रखा है। जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि केंद्र की अधिसूचना भेदभाव पूर्ण नहीं है।<br /><br />बुधवार को हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश से किसी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। कोर्ट ने माना कि ई-कॉमर्स आपरेटरों के वर्गीकऱण को कानून से मान्यता दी गई थी, जो कि भेदभाव को रोकता है। केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक अगर कोई ऑटो चालक ऐप आधारित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91206/high-court-upholds-centres-notification-on-online-booking-of-autorickshaws"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/1214_riksha-autoriksha.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 12 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने ओला, उबर और अन्य माध्यमों से ऑटोरिक्शा की बुकिंग पर जीएसटी लगाने के केंद्र सरकार की अधिसूचना को बरकरार रखा है। जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि केंद्र की अधिसूचना भेदभाव पूर्ण नहीं है।<br /><br />बुधवार को हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश से किसी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। कोर्ट ने माना कि ई-कॉमर्स आपरेटरों के वर्गीकऱण को कानून से मान्यता दी गई थी, जो कि भेदभाव को रोकता है। केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक अगर कोई ऑटो चालक ऐप आधारित एग्रीगेटर के साथ पंजीकृत होता है और ऐसे प्लेटफार्म्स का उपयोग करनेवाले ग्राहकों को यात्री परिवहन सेवाएं प्रदान करता है, तो प्राप्त किराये पर पांच फीसदी या 12 फीसदी जीएसटी लागू होगी।<br /><br />याचिका उबर इंडिया ने दायर की थी। याचिका में नवंबर 2021 में केंद्र सरकार की ओर जारी नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया ता कि सरकार ऑफलाइन मोड के जरिये ऑटो की सवारी पर तो ऐसा कोई टैक्स नहीं लगा रही है, लेकिन ऑनलाइन ऑटो बुकिंग पर जीएसटी का नियम क्यों लगाया जा रहा है। ऐसा करना संविधान की धारा 14 का उल्लंघन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Apr 2023 21:49:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर कसी जा सकती है नकेल, ई-फार्मेसी को लेकर सख्त नियम बनाने की तैयारी में मंत्रालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज कल लगभग हर चीज ऑनलाइन बिक रही हैं. आजकल दवाइयों का भी ऑनलाइन व्यापार बड़ी तेजी से फलफूल रहा है. इसी बीच अब डॉक्टर द्वारा लिखी पर्ची को अपलोड कर ऑनलाइन दवा खरीदने की मौजूदा व्यवस्था पर नकेल कसी जा सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ई-फार्मेसी को लेकर सख्त नियम बनाने की तैयारी कर रहा है। </p>
<p><strong>दवाओं की ऑनलाइन बिक्री प्रतिबंधित</strong></p>
<p>आपको बता दें कि इस मामले में मिल रही जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा ई-फार्मेसी को लेकर मौजूदा नियमों में जल्द बदलाव किया जाएगा। वर्तमान में कंपनियां ड्रग रेगुलेटर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90427/ministry-preparing-to-make-strict-rules-regarding-e-pharmacy-may-be"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/antibiotic-medicine-capsule.jpg" alt=""></a><br /><p>आज कल लगभग हर चीज ऑनलाइन बिक रही हैं. आजकल दवाइयों का भी ऑनलाइन व्यापार बड़ी तेजी से फलफूल रहा है. इसी बीच अब डॉक्टर द्वारा लिखी पर्ची को अपलोड कर ऑनलाइन दवा खरीदने की मौजूदा व्यवस्था पर नकेल कसी जा सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ई-फार्मेसी को लेकर सख्त नियम बनाने की तैयारी कर रहा है। </p>
<p><strong>दवाओं की ऑनलाइन बिक्री प्रतिबंधित</strong></p>
<p>आपको बता दें कि इस मामले में मिल रही जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा ई-फार्मेसी को लेकर मौजूदा नियमों में जल्द बदलाव किया जाएगा। वर्तमान में कंपनियां ड्रग रेगुलेटर के पास रजिस्ट्रेशन कराकर प्रिस्क्रिप्शन वाली 'एच' श्रेणी की दवाएं और बिना प्रिस्क्रिप्शन के अन्य दवाएं ऑनलाइन बेच सकती हैं। हालांकि, मादक पदार्थों से युक्त इन दवाओं की ऑनलाइन बिक्री प्रतिबंधित है।</p>
<p><strong>कई सारे नियमों का हो रहा हैं उल्लंघन</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक ऑनलाइन दावा बेचने वाली कंपनियों को आईटी एक्ट के नियमों का पालन करना होता है और विज्ञापनों पर भी रोक है लेकिन कंपनियां इन नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। पिछले महीने ड्रग कंट्रोलर की ओर से 20 नामी ऑनलाइन फार्मेसी को नोटिस दिया गया था। साथ इ 12 लाख केमिस्ट दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का विरोध कर रहे हैं. इससे पहले मंत्रियों का एक समूह भी दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर असहमत था।</p>
<p><strong>अन्य देशों में ई-फार्मेसी को मिली अनुमति निराधार</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, ऑनलाइन दवाई दवा कंपनियों का यह तर्क कि विदेशों में ई-फार्मेसी को अनुमति दी गई है, निराधार है। किसी भी देश के पास 'ई-प्रिस्क्रिप्शन' के अलावा ऐसी व्यवस्था नहीं है, जहां डॉक्टर की सलाह सीधे फार्मेसी में जाती है और मरीज वहां जाकर अपनी दवा ले सकता है। सूत्रों के मुताबिक ई-फार्मेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय ई-फार्मेसी और डॉक्टर एक मंच पर कोई प्रणाली विकसित किया जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Mar 2023 20:29:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगर आप भी मंगवाते हैं स्विगी वन से ऑनलाइन फ़ूड तो ये खबर आपके लिए है बहुत जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नेटफ्लिक्स की ही तरह स्विगी भी कर रही हैं पासवर्ड शेयरिंग को समाप्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89677/if-you-also-order-food-online-from-swiggy-one-then"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/swiggy-food-online.jpg" alt=""></a><br /><p>ऑनलाइन शॉपिंग ऐप हो या वेब सीरीज और फिल्म देखने के लिए उपयोग होने वाले ऐप, लोग इसे शेयरिंग में ही इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। देश में लाखों उपभोक्ताओं के सामने कुछ हजार ही पंजीकरण है। ऐसे में हाल ही में वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने धीरे-धीरे पासवर्ड शेयरिंग को समाप्त करने की योजना शुरू कर दी है। ये नियम भारत में भी जल्द ही लागू होने जा रहा है। इसी बीच फूड डिलीवरी ऐप ने अपने 'स्विगी वन' सदस्यता कार्यक्रम के लिए एक नया नियम लागू किया है, जो उपयोगकर्ताओं को अधिकतम दो उपकरणों पर लॉग इन करने तक सीमित करता है।</p>
<p><strong>स्विगी ने किया बड़ा बदलाव</strong></p>
<p>आपको बता दें कि स्विगी ने अपने सब्सक्राइबर्स को ईमेल के जरिए स्विगी वन मेंबरशिप में किए गए बदलावों की जानकारी दी। ईमेल में कंपनी ने उल्लेख किया है कि 8 फरवरी से स्विगी वन सदस्य अब दो से अधिक स्मार्टफोन पर एक खाते का उपयोग नहीं कर पाएंगे। पावर शेयरिंग और राजस्व बढ़ाने में सहायक हो सकता हैं।</p>
<p><strong>इस कारण लिया गया है ये फैसला</strong></p>
<p>डिलीवरी दिग्गज ने आगे कहा कि जो उपयोगकर्ता दो उपकरणों की सीमा का पालन करते हैं, वे स्विगी द्वारा घोषित परिवर्तनों से प्रभावित नहीं होंगे। कंपनी आपके उपयोग इतिहास का विश्लेषण करके यह निर्धारित कर सकती है कि विशेष खाते का उपयोग दो से अधिक फोन पर किया जा रहा है या नहीं। अपने स्विगी वन खाते का पासवर्ड अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा करना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि वे सदस्यता शुल्क का भुगतान किए बिना भी लाभ उठा सकते हैं। हालाँकि, यह एप को अपनी सदस्यता योजना के माध्यम से मौके पर अधिक राजस्व उत्पन्न करने की कोशिश में है।</p>
<p><strong>जनिये क्या कहती है कंपनी</strong></p>
<p>इस बारे में कंपनी ने लिखा "स्विगी वन सदस्यता व्यक्तिगत उपयोग के लिए है। इस बदलाव को लागू करने से दुरुपयोग की घटनाओं में कमी आएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि हम अपने सदस्यों को उचित मापदंडों के भीतर उचित उपयोग बनाए रखते हुए सबसे इष्टतम तरीके से सेवा देने में सक्षम हैं," स्विगी ने लिखा। </p>
<p><strong>सदस्यता के लोए चुकाने होंगे इतने पैसे</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि स्विगी ने स्विगी वन सदस्यता के अपने नियमों और शर्तों को अपडेट किया है। बता दें कि स्विगी के मेंबरशिप प्लान की कीमत 75 रुपये प्रति माह है। यूजर्स को तीन महीने के लिए 299 रुपये और पूरे साल के लिए 899 रुपये का भुगतान करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Feb 2023 16:05:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑनलाइन मंगवाई ब्रेड के साथ पैकेट में आया ‘जिन्दा चूहा’!</title>
                                    <description><![CDATA[नितिन अरोडा नाम के एक युवक को हुआ बुरा अनुभव, जानिये पूरी हकीकत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89661/alive-rat-came-in-a-packet-with-bread-ordered-online"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/a20230211.jpg" alt=""></a><br /><p>आजकल लगभग हर व्यापार ऑनलाइन हो चुका है। पहले जहाँ कपड़े, खाने और किताब जैसी चीजें ही ऑनलाइन मिलती थी और कंपनी उन्हें ग्राहक के घर पहुंचा देती थी। वहीं अब तो घर का राशन भी इसी माध्यम से ख़रीदा जा सकता है। आजकल ऐसे बहुत से ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप हैं जैसे ब्लिंकिट, स्विगी, जोमैटो आदि, जिससे आप घर बैठे ही ऑनलाइन ग्रॉसरी ऑर्डर कर सकते हैं। हालांकि इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जो ऑनलाइन खरीदारी करने वालों के लिए एक चेतावनी स्वरुप हो सकता है।</p>
<p><strong>जानिए पूरा माजरा, नितिन अरोडा नाम के यूजर ने दर्ज कराई शिकायत</strong></p>
<p>नितिन अरोडा नाम के एक यूजर ने अपने साथ हुई इस घटना की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की। ट्विटर पर उन्होंने कहा कि मैंने ब्लिंकिट नाम के एप्लीकेशन पर से होम डिलीवरी के लिए ब्रेड का पैकेट ऑर्डर किया था। जब मुझे यह पैकेट मिला तो मैं चौंक गया। पैकेट में एक जिंदा चूहा था। यहां तक ​​कि डिलीवरी बॉय को भी इसकी भनक नहीं लगी। मामला सामने आते ही ब्लिंकिट की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना होने लगी।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Most unpleasant experience with <a href="https://twitter.com/letsblinkit?ref_src=twsrc%5Etfw">@letsblinkit</a> , where alive rat was delivered inside the bread packet ordered on 1.2.23. This is alarming for all of us. If 10 minutes delivery has such baggage, <a href="https://twitter.com/blinkitcares?ref_src=twsrc%5Etfw">@blinkitcares</a> I would rather wait for a few hours than take such items.<a href="https://twitter.com/hashtag/blinkit?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#blinkit</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/zomato?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#zomato</a> <a href="https://t.co/RHNOj6tswA">pic.twitter.com/RHNOj6tswA</a></p>
— Nitin Arora (@NitinA14261863) <a href="https://twitter.com/NitinA14261863/status/1621391446053101568?ref_src=twsrc%5Etfw">February 3, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p><strong>कंपनी ने यह जवाब दिया</strong></p>
<p>हालांकि ये मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तस्वीर का जवाब देते हुए डिलीवरी कंपनी ने ग्राहक नितिन से माफ़ी मांगी और निजी संवाद के माध्यम से मामले को सुलझाने के लिए नितिन के पंजीकृत मोबाइल नंबर या ऑर्डर आईडी को संदेश के माध्यम से मंगवाया। अब आगे नितिन और कंपनी के बीच क्या बातचीत हुई इस बारे में भी  जानकारी सामने आई है। नितिन ने अपने ट्वीट में उस बातचीत का स्क्रीनशॉट साझा किया है। जो भी हो ये मामला हर चीज ऑनलाइन मंगवाने वाले लोगों के लिए एक चेतवानी समान है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/89661/alive-rat-came-in-a-packet-with-bread-ordered-online</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Feb 2023 17:36:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इन भाई साहब ने ऑनलाइन मंगवाया सवा लाख का मैक बुक प्रो, मिला कुत्ते का खाना! जानिए पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इन दिनों Amazon और Flipkart जैसी साइटों से ऑनलाइन शॉपिंग करना सामान्य जीवन का हिस्सा बन गया है। लोग बड़े आराम से इन साइट्स पर से अपनी मनपसंद चीजें मांगा लेते है पर कभी कभी ग्राहकों को बहुत बुरा अनुभव झेलना पड़ता है। यह भारत में कई बार हुआ है जहां एक व्यक्ति ने ई-कॉमर्स दिग्गजों से कुछ महंगा ऑर्डर किया और जब आइटम आया, तो यह ऑर्डर किए गए से बिल्कुल अलग था। आपने कई दफा सुना होगा कि किसी ने महंगा मोबाइल मंगाया और जब पार्सल खोला तो उसमें साबुन की बत्ती या पत्थर का टुकड़ा निकला।</p>
<p><strong>यूके</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88194/this-brother-ordered-a-macbook-pro-worth-125-lakh-online"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/20221221_054743_0000.jpg" alt=""></a><br /><p>इन दिनों Amazon और Flipkart जैसी साइटों से ऑनलाइन शॉपिंग करना सामान्य जीवन का हिस्सा बन गया है। लोग बड़े आराम से इन साइट्स पर से अपनी मनपसंद चीजें मांगा लेते है पर कभी कभी ग्राहकों को बहुत बुरा अनुभव झेलना पड़ता है। यह भारत में कई बार हुआ है जहां एक व्यक्ति ने ई-कॉमर्स दिग्गजों से कुछ महंगा ऑर्डर किया और जब आइटम आया, तो यह ऑर्डर किए गए से बिल्कुल अलग था। आपने कई दफा सुना होगा कि किसी ने महंगा मोबाइल मंगाया और जब पार्सल खोला तो उसमें साबुन की बत्ती या पत्थर का टुकड़ा निकला।</p>
<p><strong>यूके का है मामला</strong></p>
<p>अब ऐसा ही कुछ सामने आया है यूनाइटेड किंगडम से जहां एलन वुड नामक ग्राहक ने अमेज़ॅन यूके की दुकान से मैकबुक प्रो खरीदा। उन्होंने इसके लिए 1,200 पाउंड (करीब 1,20,000 रुपये) चुकाए। उन्होंने अपनी बेटी को क्रिसमस का तोहफा देने के लिए 29 नवंबर को इस लैपटॉप के लिए ऑर्डर दिया था। लेकिन जब पार्सल उनके पास पहुंचा तो जो उसके अंदर जो था उसे देखकर उनकी आंखे खुली की खुली रह गई। इस पार्सल में मैकबुक प्रो के बदले पेडिग्री डॉग फूड के कार्टन देखकर वह हैरान रह गए।</p>
<p><strong>शख्स का दावा, ग्राहक सेवा अधिकारियों ने नहीं की कोई मदद</strong></p>
<p>आपको बता दें कि ग्राहक का कहना है कि उन्हें अमेजन की कस्टमर सर्विस टीम से भी पूरी मदद नहीं मिली। ग्राहक सेवा विभाग मदद नहीं कर रहा था। आइटम को स्टोर में वापस भेज दिया गया था। उन्होंने कहा कि अमेजन के साथ उनकी बातचीत में उनका 15 घंटे का समय लगा। कॉल आंतरिक रूप से विशेष रूप से भेजे जा रहे थे। हालांकि हर बार उन्होंने मदद करने से साफ इनकार कर दिया। अमेज़न के एक प्रतिनिधि के अनुसार, कंपनी ने पहले ही उपभोक्ता से संपर्क कर लिया है और पूर्ण धनवापसी जारी कर दी है।</p>
<p><strong>पहली बार ऐसा हुआ - ग्राहक</strong></p>
<p>वहीं इस पूरे मामले में तकलीफ झेलने वाले एलन वुड का दावा है कि अमेज़न क्लाइंट के रूप में उनके कई वर्षों के बावजूद उनके साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। ये पहला मौका है जब ऐसा कुछ हुआ है। यह अक्सर भारत में होता है, जहां उपभोक्ता लगभग कुछ भी ऑनलाइन खरीद सकते हैं और इसे सीधे अपने दरवाजे पर पहुंचा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2022 10:17:35 +0530</pubDate>
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